इन दिनों मेरे दौर के अधिकांश वरिष्ठ साथी यह लोक छोड़कर जा चुके हैं। शिखर पुरुष के रूप में अभय जी ही बचे थे, वे भी चले गए। पत्रकारिता के इस विलक्षण व्यक्तित्व को मेरा नमन।
राजेश बादल 2 years ago
अभयजी के कई रूप थे और उनमें से हर रूप अपने आप में एक उपन्यास। और उनका हर रूप एक अंतहीनसंघर्ष की दास्तान है। बाहर-भीतर हर तरह का संघर्ष।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
लंबे समय तक ‘नई दुनिया’ के प्रधान संपादक रहे अभय छजलानी काफी समय से बीमार चल रहे थे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago