'बहुत ही कठिन डगर पर सधे हुए कदमों की लंबी यात्रा का पूर्णविराम'

अभयजी के कई रूप थे और उनमें से हर रूप अपने आप में एक उपन्यास। और उनका हर रूप एक अंतहीनसंघर्ष की दास्तान है। बाहर-भीतर हर तरह का संघर्ष।

Last Modified:
Thursday, 23 March, 2023
AbhayChhajlani78452


जयदीप कर्णिक, एडिटर, अमर उजाला (डिजिटल) ।। बात सन 1998 के अक्टूबर की है। मालवा की खुशनुमा सर्दी की बस शुरुआत ही थी। सुबह ठीक 6.30 बजे इंदौर के साके...
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