किस दौर में आ पहुंचे हैं हम? जैसे जैसे आधुनिक संचार साधनों को अपना रहे हैं, वैसे वैसे खुद को अभिव्यक्त करने में शालीनता भी भूल रहे हैं
राजेश बादल 5 years ago
अभी तक खबरिया चैनल अपने दर्शकों से दुश्मनी निकाल रहे थे। अब उन्हें एक नया विरोधी मिल गया है।
राजेश बादल 5 years ago
अतिरेक किसी भी चीज का अच्छा नहीं होता। यह दौर चीख चीख कर कह रहा है कि अब बस भी करिए। वरना अवाम अब सब कुछ अपने हाथ में ले लेगी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
जिस एजेंसी का नाम लेते ही हम मीडिया के लोग गर्व से भर जाते थे, वह अब राष्ट्रद्रोही ठहराई जा रही है। पीटीआई हिंदुस्तान ही नहीं, समूचे संसार में सबसे बड़े नेटवर्क वाली संस्थाओं में से एक है।
राजेश बादल 5 years ago
बीते सप्ताह गलवान में चीन के साथ खूनी संघर्ष मीडिया के सभी रूपों में छाया रहा। इस दरम्यान शुरू के तीन-चार दिन तक चीन के बयान एक के बाद एक आते रहे और भारतीय अधिकृत बयान आने में कुछ समय लगा।
राजेश बादल 5 years ago
मानसिक उत्पीड़न का यह सिलसिला यकीनन परेशान करता है। छोटे पर्दे पर उपलब्धियों का कीर्तिमान रचने वाले विनोद दुआ को अपने ही मुल्क में सम्मान की जगह संत्रास दिया जा रहा है
राजेश बादल 5 years ago
स्टेटमेंट में दिल्ली पुलिस द्वारा वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने का उदाहरण दिया गया है। वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने एडिटर्स गिल्ड के इस बयान का समर्थन किया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
तो आशंकाएं सच होने लगी हैं। हिन्दुस्तान की पत्रकारिता पिछले 73 साल में अपने सबसे बुरे दौर में जा पहुंची है। कमर तो पहले ही टूटी हुई थी। रही सही कसर कोरोना ने पूरी कर दी है।
राजेश बादल 5 years ago
पत्रकारिता को अगर लोकतंत्र में चौथा स्तंभ कहा जाता है, तो प्रश्न यह है कि इस महत्वपूर्ण स्थान की क्या हम रक्षा कर पा रहे हैं?
राजेश बादल 5 years ago
शब्दों की सत्ता किसी का मोहताज नहीं होती। बेजोड़ शायर और गीतकार साहिर लुधियानवी ने अपनी रचनाओं से समूची दुनिया को दीवाना बना रखा था
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago