सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों RIP कार्टून नेटवर्क (#RIPCotoonNetwork) ट्रेंड कर रहा है। दरअसल, इसकी वजह वह खबर है, जो चर्चा में बनी हुई है
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो
आज भी खासकर 90 के दशक के बच्चे ‘कार्टून नेटवर्क’ का नाम नहीं भूले हैं। इस कार्टून नेटवर्क ने कई लोगों के बचपन को मजेदार और यादगार बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई है। कई दर्शकों के बाद भी 'टॉम एंड जेरी', 'रिची रिच', 'बेन 10', 'पावरपफ गर्ल्स' समेत कई कार्टून्स आज भी लोगों को याद हैं। लेकिन इन सबके बीच सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों RIP कार्टून नेटवर्क (#RIPCotoonNetwork) ट्रेंड कर रहा है। दरअसल, इसकी वजह वह खबर है, जो चर्चा में बनी हुई है और वह यह कि कार्टून नेटवर्क ने वार्नर ब्रदर्स स्टूडियोज के साथ मर्जर का ऐलान कर दिया है। इस मर्जर से कार्टून नेटवर्क में कई बड़े बदलाव किए जाने की खबरें भी सामने आयी हैं, जिसके बाद से फैंस को लगने लगा की अब कार्टून नेटवर्क नहीं रहेगा। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कार्टून नेटवर्क की टीम से कई वर्कर्स को निकाला जा रहा है।
इसी खबर के बाद से अफवाहें फैलने लगीं कि 'कार्टून नेटवर्क' बंद होने जा रहा है और इस वजह से हैशटैग #RIPCotoonNetwork सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड करने लगा।
RIP Cartoon Network
— Blazer (@IncognitoBlazer) October 13, 2022
Have a video I found in discord pic.twitter.com/L2Lg6UktyY
Rip Cartoon Network Studios (as we know it)
— Ben 10 News (@BenTenNews) October 12, 2022
1994-2022
While the brand will still exist, Cartoon Network Studios will be merged with Warner Bros. Animation. pic.twitter.com/ZycVF4iJxX
RIP Cartoon Network. RT if this played a huge role in your childhood ? pic.twitter.com/WtHAPrnped
— Modern Notoriety (@ModernNotoriety) October 13, 2022
To everyone at cartoon network, thank you for 30 years of great storytelling and characters.
— Kren (@KrensThighHighs) October 12, 2022
You will be missed, RIP Cartoon Network.#FireDavidZaslav pic.twitter.com/bPARfyty61
एबीसी न्यूज के मुताबिक, कार्टून नेटवर्क और वॉर्नर ब्रोज एनिमेशन के मर्जर के बाद वॉर्नर ब्रदर्स टेलिविजन ने ग्रुप ने 12 अक्टूबर को यह घोषणा की कि वह 25 प्रतिशत से ज्यादा वर्कर्स को हटाने जा रहे हैं। इसमें कार्टून बनाने वाले एनिमेशन आर्टिस्ट, कार्टून के लिए स्क्रिप्ट लिखने वाले और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
इसके बाद से ही ट्विटर पर #RIPCartoonNetwork और तेजी से ट्रेंड करने लगा और इसके साथ लोगों ने अपनी फीलिंग्स बयां करनी शुरू कर दी।
हालांकि यह सब देखने के बाद कार्टून नेटवर्क के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से इसका जवाब दिया गया और उड़ रही फेक खबरों पर विराम लगाया गया। कार्टून नेटवर्क ने अपने फैंस को ट्वीट कर बताया कि वह मरा नही है। वह 30 साल का हो गया है।
अपने ट्वीट में कार्टून नेटवर्क ने लिखा, ‘हम मरे नहीं हैं। हम सिर्फ 30 साल के हुए हैं। हमारे फैंस के लिएः हम कहीं नहीं जा रहे। प्यारे और इनोवेटिव कार्टून्स के माध्यम से हम आपके घरों में थे और रहेंगे। बहुत जल्द और अपडेट देंगे।’
Y’all we're not dead, we're just turning 30 ?
— Cartoon Network (@cartoonnetwork) October 14, 2022
To our fans: We're not going anywhere. We have been and will always be your home for beloved, innovative cartoons ⬛️⬜️ More to come soon!#CartoonNetwork #CN30 #30andthriving #CartoonNetworkStudios #FridayFeeling #FridayVibes
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB) ने 'Gems of India Challenge' के पायलट चरण की शुरुआत की है।
by
Samachar4media Bureau
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB) ने 'जेम्स ऑफ इंडिया चैलेंज' (Gems of India Challenge) के पायलट चरण की शुरुआत की है। इस राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य देशभर के डिजिटल क्रिएटर्स (Digital Creators) को अपने-अपने जिलों की संस्कृति, विरासत, इतिहास और विशिष्ट पहचान को शॉर्ट वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर पर ₹5 लाख तक का पुरस्कार दिया जाएगा।
यह प्रतियोगिता वेव्स ओटीटी (WAVES OTT) के अंतर्गत मायवेव्स (MyWAVES) प्लेटफॉर्म पर आयोजित की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, यह पहल स्थानीय स्तर के कंटेंट क्रिएटर्स को पहचान दिलाने और हाइपरलोकल स्टोरीटेलिंग (Hyperlocal Storytelling) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियां 1 अगस्त से 31 अगस्त तक स्वीकार की जाएंगी। पायलट चरण की सफलता के बाद इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।
प्रतिभागियों को MyWAVES सेक्शन के माध्यम से 1 से 3 मिनट की अवधि का वीडियो अपलोड करना होगा, जिसमें उनके जिले की विशेष पहचान, सांस्कृतिक धरोहर, परंपराएं, पर्यटन स्थल या अन्य विशिष्ट पहलुओं को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया हो।
फिलहाल पायलट चरण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar Islands), अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh), चंडीगढ़ (Chandigarh), दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव (Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu), गोवा (Goa) और लद्दाख (Ladakh) को शामिल किया गया है।
मंत्रालय ने तीन-स्तरीय पुरस्कार प्रणाली की घोषणा की है। प्रत्येक जिले से चुने गए अधिकतम 20 क्रिएटर्स को ₹50,000-₹50,000 का पुरस्कार मिलेगा। इसके बाद राज्य स्तर पर विजेताओं को ₹2 लाख दिए जाएंगे। वहीं, देशभर में योजना लागू होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ क्रिएटर्स को ₹5 लाख तक का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने वकीलों, कानून के छात्रों और इंटर्न के लिए नए दिशा-निर्देशों को तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं।
by
Samachar4media Bureau
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने वकीलों, कानून के छात्रों और इंटर्न के लिए नए दिशा-निर्देशों को तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं। BCI ने सभी राज्य बार काउंसिलों और देश के लॉ कॉलेजों व विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
17 जुलाई 2026 को जारी निर्देश में BCI ने साफ कहा कि इस सर्कुलर को सामान्य सलाह नहीं माना जाए। सभी संस्थानों की जिम्मेदारी होगी कि वे हर वकील, छात्र और अन्य संबंधित लोगों तक इन नियमों की जानकारी प्रभावी तरीके से पहुंचाएं।
BCI के नए दिशा-निर्देश सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, डिजिटल नैतिकता, अदालत की गरिमा, गोपनीयता और पेशेवर आचरण से जुड़े हैं। इनमें कोर्ट परिसर के गलत इस्तेमाल, अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग की क्लिप साझा करने, भ्रामक कानूनी जानकारी फैलाने, मुवक्किल से जुड़ी गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने, वकील की पहचान का दुरुपयोग करने और एआई से तैयार किए गए फर्जी वीडियो, डीपफेक, वॉयस क्लोन तथा अन्य छेड़छाड़ किए गए कंटेंट के इस्तेमाल जैसे मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बार काउंसिल ने सभी लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे इन नियमों की जानकारी शिक्षकों, छात्रों, इंटर्न और कर्मचारियों तक पहुंचाएं। इसके लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, छात्रों से दाखिले के समय और इंटर्नशिप शुरू करने से पहले लिखित सहमति ली जाए तथा नियमों के पालन की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
BCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल सर्कुलर को वेबसाइट पर डाल देना या व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग ग्रुप में भेज देना पर्याप्त नहीं होगा। संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी संबंधित लोग इन नियमों को समझें और उनका पालन करें।
राज्य बार काउंसिलों को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां पंजीकृत सभी वकीलों और मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशनों तक यह सर्कुलर पहुंचाएं। साथ ही बार एसोसिएशनों से कहा गया है कि वे इसे प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करें, शिकायतें प्राप्त करने की व्यवस्था बनाएं, डिजिटल एथिक्स कमेटी या नोडल अधिकारी नियुक्त करें और नियमों के पालन की रिपोर्ट भी जमा करें।
BCI ने कहा है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और भविष्य में होने वाली गलतियों को रोकना है। इनका पालन एडवोकेट्स एक्ट, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप किया जाएगा।
साथ ही BCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन नियमों का इस्तेमाल किसी से व्यक्तिगत बदला लेने, वैध आलोचना को दबाने या बिना जांचे-परखे आरोपों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी संबंधित संस्थानों से इन निर्देशों को तत्काल और पूरी तरह लागू करने की अपेक्षा जताई है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने WAVES 2027 के तहत Create in India Challenge (CIC) Season 2 के लिए उद्योग संगठनों और संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
by
Samachar4media Bureau
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information & Broadcasting-MIB) ने वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (World Audio Visual and Entertainment Summit-WAVES) 2027 के प्रमुख कार्यक्रम 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (Create in India Challenge-CIC) Season 2' के तहत उद्योग संगठनों, संस्थाओं और एसोसिएशनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
प्रस्तावों की प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाने के लिए मंत्रालय ने एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल (Unified Online Portal) भी शुरू किया है। इसी पोर्टल के माध्यम से प्रस्ताव जमा किए जाएंगे और उनका मूल्यांकन किया जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट (Media & Entertainment) क्षेत्र में युवाओं के बीच रचनात्मकता (Creativity), नवाचार (Innovation), कौशल विकास (Skill Development) और नई प्रतिभाओं की पहचान को बढ़ावा देना है।
चयनित चुनौतियां उद्योग के नेतृत्व में संचालित होंगी, जबकि सरकार उनका सहयोग करेगी। इनमें मेंटरशिप (Mentorship), प्रशिक्षण (Training), अपस्किलिंग (Upskilling) और सहयोगात्मक सीख (Collaborative Learning) पर विशेष जोर रहेगा।
क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (CIC) Season 2 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI), AVGC-XR, डिजिटल मीडिया (Digital Media), गेमिंग (Gaming), ई-स्पोर्ट्स (E-Sports), एनीमेशन (Animation), विजुअल इफेक्ट्स (VFX), कॉमिक्स (Comics), फिल्म (Films), ब्रॉडकास्टिंग (Broadcasting), संगीत (Music), नृत्य (Dance), एआर/वीआर (AR/VR) और अन्य उभरते मीडिया क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
इच्छुक संस्थाएं 31 जुलाई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने प्रस्ताव जमा कर सकती हैं। सरकार चयनित चुनौतियों के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक चुनौती पर अधिकतम ₹1 करोड़ की एकमुश्त वित्तीय सहायता (One-time Grant) उपलब्ध कराएगी। यह सहायता तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन, परिणाम आधारित योजना, जमीनी स्तर तक पहुंच और कौशल विकास कार्यक्रमों के आधार पर प्रदान की जाएगी।
मंत्रालय का लक्ष्य CIC Season 2 के तहत 50 से अधिक उद्योग-नेतृत्व वाली चुनौतियां आयोजित करना है। इनमें विशेष रूप से AI, डिजिटल एवं सोशल मीडिया (Digital & Social Media) तथा AVGC-XR जैसे उभरते क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा।
कार्यक्रम का समापन WAVES 2027 के दौरान आयोजित 'क्रिएटोस्फीयर (CreatoSphere)' में होगा, जहां विजेताओं और उनके प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को इंस्टाग्राम (Instagram) पर CSAM से जुड़े विज्ञापनों के मामले में मेटा (Meta) का जवाब मिल गया है।
by
Samachar4media Bureau
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों के मामले में मेटा (Meta) ने भारत सरकार को अपना स्पष्टीकरण सौंप दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) फिलहाल कंपनी के जवाब की विस्तृत समीक्षा कर रहा है।
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सचिव एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मंत्रालय को मेटा (Meta) का जवाब प्राप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि जवाब के प्रत्येक पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और समीक्षा पूरी होने के बाद ही सरकार अपने अगले कदम पर फैसला करेगी।
एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने कहा, "CSAM कंटेंट को लेकर हमने मेटा को जो नोटिस जारी किया था, उसका जवाब हमें मिल गया है। वर्तमान में यह हमारे परीक्षण के अधीन है। इस जवाब के गहन मूल्यांकन के आधार पर ही उचित कार्रवाई की जाएगी।"
हाल ही में सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इंस्टाग्राम (Instagram) पर कुछ प्रायोजित विज्ञापन ऐसे थे, जो 'चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूज मटेरियल' (Child Sexual Exploitative and Abuse Material-CSEAM) तक पहुंच को आसान बना रहे थे या उसका प्रचार कर रहे थे।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए MeitY ने मेटा (Meta) को नोटिस जारी किया था। मंत्रालय ने कंपनी को निर्देश दिया था कि ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित सामग्री को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। साथ ही निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
आईटी सचिव ने बताया कि मेटा (Meta) ने शनिवार को अपना जवाब दाखिल किया, जो मंत्रालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा का अंतिम दिन था। अब सरकार इस जवाब का कानूनी और तकनीकी पहलुओं से परीक्षण कर रही है। समीक्षा पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाए।
उम्मीद है कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) सितंबर में अपने वार्षिक 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (State of the Union) संबोधन के दौरान इस पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगी।
by
Samachar4media Bureau
यूरोपीय संघ (European Union-EU) 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया (Social Media) इस्तेमाल पर सख्त नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित नियमों के तहत 27 सदस्य देशों (27-member bloc) में छोटे बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर आयु-आधारित (Age-based) प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं।
यूरोपीय आयोग (European Commission) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने सोमवार को दो विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई सिफारिशें पेश कीं। इन सिफारिशों में बच्चों के लिए आयु के आधार पर सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने का सुझाव दिया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार, 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को केवल सीमित समय के लिए और माता-पिता, अभिभावकों (Caregivers) या शिक्षकों (Teachers) की निगरानी में ही सोशल मीडिया का उपयोग करने की अनुमति होगी। जैसे-जैसे बच्चों की उम्र बढ़ेगी, इन प्रतिबंधों में चरणबद्ध तरीके से ढील दी जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने कहा कि अब इस बात पर व्यापक सहमति बन चुकी है कि बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनकी उम्र के अनुरूप अधिक सुरक्षा (Age-appropriate Protection) की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अब चर्चा इस बात पर नहीं है कि ऑनलाइन जोखिम मौजूद हैं या नहीं, बल्कि इस पर है कि सरकारें बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित डिजिटल माहौल कैसे सुनिश्चित करें।
यूरोपीय आयोग (European Commission) गर्मियों के बाद इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव पेश करेगा। उम्मीद है कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) सितंबर में अपने वार्षिक 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (State of the Union) संबोधन के दौरान इस पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगी।
यह प्रस्ताव बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा (Online Safety) को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आयोग का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम (Screen Time), हानिकारक कंटेंट (Harmful Content) और प्लेटफॉर्म्स की लत लगाने वाली विशेषताओं (Addictive Features) को देखते हुए ऐसे कदम जरूरी हो गए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित नियम केवल पारंपरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन अन्य ऑनलाइन सेवाओं पर भी लागू हो सकते हैं, जिनमें उम्र के अनुरूप नहीं मानी जाने वाली या लत बढ़ाने वाली सुविधाएं मौजूद हैं।
आईबीएम (IBM) ने तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) को एशिया पैसिफिक (Asia Pacific) के लिए वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग (Vice President, Marketing) नियुक्त किया है।
by
Samachar4media Bureau
आईबीएम (IBM) ने तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) को एशिया पैसिफिक (Asia Pacific) के लिए वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग (Vice President, Marketing) की नई जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले वह डायरेक्टर APAC कम्युनिकेशंस एंड मार्केटिंग, इंडिया एंड साउथ एशिया (Director APAC Communications & Marketing, India and South Asia) के पद पर कार्यरत थीं।
तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) ने अपनी नई भूमिका की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा करते हुए कहा, "यह भूमिका हमारे ग्राहकों की प्राथमिकताओं के केंद्र में है। इसमें आईबीएम (IBM) की पूरी क्षमताओं को एक साथ लाकर ग्राहकों की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करना और क्षेत्रभर में प्रभाव को बढ़ाने के लिए साझेदारों के साथ मिलकर काम करना शामिल है।"
तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) वर्ष 2020 में आईबीएम (IBM) से हेड ऑफ कम्युनिकेशंस, इंडिया एंड साउथ एशिया (Head of Communications, India and South Asia) के रूप में जुड़ी थीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी की कम्युनिकेशंस और मार्केटिंग रणनीतियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आईबीएम (IBM) से पहले वह टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) में ग्लोबल कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस एंड पब्लिक अफेयर्स (Global Corporate Communications and Public Affairs) का नेतृत्व कर चुकी हैं।
नई भूमिका में तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) एशिया पैसिफिक क्षेत्र में आईबीएम (IBM) की मार्केटिंग रणनीति को आगे बढ़ाने, ग्राहकों के साथ जुड़ाव मजबूत करने और क्षेत्रीय स्तर पर बिजनेस ग्रोथ को गति देने पर काम करेंगी।
वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर भेजे गए नोटिस पर मेटा (Meta) का जवाब अभी तक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को नहीं मिला है।
by
Samachar4media Bureau
वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम (Username) फीचर को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) द्वारा भेजे गए नोटिस पर मेटा (Meta) का जवाब अभी तक मंत्रालय को प्राप्त नहीं हुआ है। जबकि कंपनी को जवाब देने के लिए दी गई विस्तारित समय-सीमा गुरुवार को समाप्त हो रही है।
नई दिल्ली (New Delhi) में सीआईआई (Confederation of Indian Industry-CII) बिजनेस समिट (Business Summit) के दौरान आईटी सचिव एस. कृष्णन (S Krishnan) ने कहा कि सरकार मेटा (Meta) का जवाब मिलने और उसकी समीक्षा करने के बाद ही अगला कदम तय करेगी।
उन्होंने कहा, "हमें अभी तक नोटिस का जवाब नहीं मिला है। जवाब देने के लिए अभी थोड़ा समय बाकी है। आज जवाब दाखिल करने का अंतिम दिन है।" एस. कृष्णन (S Krishnan) ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार फिलहाल मेटा (Meta) से जुड़े दो अलग-अलग मामलों पर काम कर रही है। पहला वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर से जुड़ा है, जबकि दूसरा चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से संबंधित नोटिस का मामला है।
सरकार ने मेटा (Meta) से वॉट्सऐप (WhatsApp) की उस योजना पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसके तहत उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर साझा किए बिना यूनिक यूजरनेम (Unique Username) के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। केंद्र का मानना है कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना यह फीचर शुरू होने पर फिशिंग (Phishing), प्रतिरूपण (Impersonation), ऑनलाइन ठगी (Online Scam) और तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) जैसे साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है।
अब सभी की निगाहें मेटा (Meta) के जवाब और उसके बाद MeitY के अगले कदम पर टिकी हैं। सरकार का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी का स्पष्टीकरण उपयोगकर्ता सुरक्षा, साइबर धोखाधड़ी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही से जुड़े सवालों का कितना संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करता है।
कंडोम विज्ञापन के प्रसारण पर विवाद छिड़ गया है। पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने आपत्ति जताते हुए खेल प्रसारणों में परिवार और बच्चों की मौजूदगी को देखते हुए विज्ञापन नीति की समीक्षा की मांग की है।
by
Samachar4media Bureau
भारत-इंग्लैंड टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के प्रसारण के दौरान कंडोम का विज्ञापन दिखाए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या परिवारों और बच्चों द्वारा बड़ी संख्या में देखे जाने वाले खेल आयोजनों के दौरान वयस्क उत्पादों से जुड़े विज्ञापन प्रसारित किए जाने चाहिए। हालांकि भारत में कंडोम का विज्ञापन पूरी तरह वैध है और इसे सुरक्षित यौन संबंध, यौन स्वास्थ्य जागरूकता तथा परिवार नियोजन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों का हिस्सा माना जाता है, लेकिन कई दर्शकों ने इसके समय और प्रसारण मंच पर सवाल उठाए हैं।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने इस विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि क्रिकेट ऐसा खेल है जिसे बच्चे, किशोर और पूरा परिवार एक साथ बैठकर देखता है। उनके अनुसार, ऐसे विज्ञापन लाइव मैचों के दौरान प्रसारित नहीं होने चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को जरूरत पड़ने पर संसद में उठाने की बात भी कही है और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से यह जांच करने का आग्रह किया है कि मैच के प्रसारण के दौरान ऐसे विज्ञापन कैसे शामिल किए गए।
इस विवाद ने कानूनी वैधता और प्रसारण की उपयुक्तता के बीच अंतर को भी चर्चा का विषय बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंडोम विज्ञापन पर कोई कानूनी रोक नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे विज्ञापन उस समय दिखाए जाने चाहिए जब करोड़ों परिवार एक साथ क्रिकेट देख रहे हों। दूसरी ओर, कई लोग मानते हैं कि आज के डिजिटल दौर में दर्शक टीवी, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस तरह की सामग्री पहले से देख रहे हैं, इसलिए सुरक्षित यौन स्वास्थ्य से जुड़े संदेशों को अनुचित नहीं माना जाना चाहिए।
फिलहाल प्रसारक, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म या BCCI की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ऐसे में यह विवाद किसी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने का नहीं, बल्कि विज्ञापनों के समय, प्रसारण नीति और दर्शकों की संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाने का मुद्दा बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में खेल प्रसारणों के लिए विज्ञापन निर्धारण संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देशों पर गंभीर विचार की आवश्यकता हो सकती है।
भारत सरकार की नोटिस के बाद मेटा (Meta) ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट पर कार्रवाई तेज करते हुए पिछले छह महीनों में भारत में 1.6 लाख संदिग्ध अकाउंट हटाने का दावा किया है।
by
Samachar4media Bureau
मेटा (Meta) ने बच्चों के यौन शोषण (Child Exploitation) से जुड़े कंटेंट पर रोक लगाने के लिए अपने प्लेटफॉर्म्स पर नए सुरक्षा उपायों की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब हाल ही में भारत सरकार ने इंस्टाग्राम (Instagram) पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े विज्ञापनों को लेकर कंपनी को नोटिस जारी किया था।
एक ब्लॉग पोस्ट में मेटा (Meta) ने कहा कि सार्वजनिक रूप से मामला सामने आने से पहले ही उसने कई आपत्तिजनक विज्ञापनों और अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें हटा दिया था। इसके बाद की गई विस्तृत जांच में कंपनी ने अतिरिक्त विज्ञापनों को हटाया, कई अन्य अकाउंट्स को निष्क्रिय किया और नीति का उल्लंघन करने वाले कंटेंट से जुड़े यूआरएल (URLs) भी ब्लॉक किए।
कंपनी के अनुसार, वह संदिग्ध बाहरी लिंक (Off-platform Links) साझा करने वाले अकाउंट्स और बच्चों के शोषण से जुड़े अन्य संकेतों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित तकनीक का उपयोग करती है। मेटा (Meta) ने दावा किया कि पिछले छह महीनों में इसी तकनीक की मदद से भारत में 1.6 लाख संदिग्ध अकाउंट हटाए गए।
मेटा (Meta) ने उन दावों को भी खारिज किया कि उसकी विज्ञापन प्रणाली जानबूझकर ऐसे यूजर्स को टार्गेट करती है, जिनकी बच्चों में अनुचित रुचि हो सकती है। कंपनी का कहना है कि उसकी तकनीक संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करती है और वर्ष 2025 के दौरान वैश्विक स्तर पर बच्चों से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों के कारण 40 लाख से अधिक अकाउंट हटाए गए।
कंपनी ने बताया कि वह विज्ञापनों की जांच और विज्ञापनदाताओं की गतिविधियों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम (Automated Systems) और मैन्युअल समीक्षा (Manual Review) दोनों का इस्तेमाल करती है। विज्ञापन नीति (Advertising Policy) या कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स (Community Standards) का उल्लंघन करने वाले व्यवसायों पर विज्ञापन संबंधी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं या उन्हें मेटा (Meta) के सभी प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन देने से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
मेटा (Meta) ने यह भी कहा कि कंटेंट मॉडरेशन (Content Moderation) को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उसने AI में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। कंपनी के अनुसार, उसकी AI प्रणाली अब उन भाषाओं का समर्थन करती है, जिनका उपयोग दुनिया के 98 प्रतिशत इंटरनेट यूजर्स करते हैं।
कंपनी ने कहा कि वह बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies), उद्योग से जुड़े भागीदारों और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर काम करती रहेगी। साथ ही नई तकनीकों, इंटेलिजेंस शेयरिंग (Intelligence Sharing) और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों में निवेश भी जारी रखेगी।
ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने लोगों को फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स से सावधान रहने की सलाह दी है।
by
Vikas Saxena
ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने लोगों को फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स से सावधान रहने की सलाह दी है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि कुछ लोग खुद को मंत्रालय का सलाहकार बताकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं और उनसे पैसे भी वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच भाजपा सांसद संबित पात्रा का वॉट्सऐप अकाउंट कथित तौर पर हैक होने का मामला भी सामने आया है, जिसमें उनके नाम पर लोगों से पैसे मांगे गए।
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक फैक्ट-चेक हैंडल के जरिए जारी एडवाइजरी में कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर अपनी पहचान गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। ये लोग दावा कर रहे हैं कि वे व्यापार, माइग्रेशन और अन्य नीतिगत मामलों पर विदेश मंत्रालय को सलाह देते हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, कुछ फर्जी अकाउंट्स मंत्रालय के साथ काम करने का तरीका बताने के नाम पर पेड सेशन (पैसे लेकर सलाह देने वाले सत्र) भी चला रहे हैं और लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि इन लोगों का मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर ऐसे फर्जी दावों और अकाउंट्स से सतर्क रहें तथा किसी भी आधिकारिक जानकारी या सहायता के लिए केवल सरकार के सत्यापित (Verified) प्लेटफॉर्म और आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें।
भाजपा सांसद संबित पात्रा के नाम से पत्रकार को आया फेक मैसेज
विदेश मंत्रालय की इस चेतावनी के बीच भाजपा सांसद संबित पात्रा का वॉट्सऐप अकाउंट कथित तौर पर हैक होने का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि हैकर ने उनके अकाउंट का इस्तेमाल कर उनके दोस्तों, परिचितों और समर्थकों को आर्थिक मदद के नाम पर संदेश भेजे।
इस मामले का खुलासा रविवार को बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और यूट्यूबर अजीत अंजुम ने फेसबुक पर किया। उन्होंने बताया कि उन्हें संबित पात्रा के वॉट्सऐप नंबर से एक संदेश मिला, जिसमें लिखा था, "हैलो, मुझे थोड़ी मदद चाहिए।"
अजीत अंजुम ने बताया कि पहले उन्हें हैरानी हुई कि एक सांसद उनसे आर्थिक मदद क्यों मांग रहे हैं, जबकि दोनों के बीच पिछले पांच-सात वर्षों से कोई बातचीत नहीं हुई थी। उन्होंने वॉट्सऐप कॉल करके पुष्टि करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद उसी नंबर से एक क्यूआर कोड भेजा गया और 65 हजार रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्हें शक हुआ कि संबित पात्रा का वॉट्सऐप अकाउंट हैक हो गया है और कोई ठग उनके नाम का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे मांग रहा है।
अजीत अंजुम ने अपनी X पोस्ट के साथ कथित वॉट्सऐप चैट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक संबित पात्रा की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल ठग फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने के साथ-साथ WhatsApp अकाउंट हैक कर परिचित लोगों से पैसे मांगने जैसे तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में अगर किसी परिचित के नाम से अचानक पैसे मांगने का संदेश मिले, तो बिना पुष्टि किए कोई भी भुगतान न करें। पहले संबंधित व्यक्ति से फोन कॉल या किसी अन्य माध्यम से संपर्क कर यह सुनिश्चित कर लें कि संदेश वास्तव में उसी ने भेजा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती ऐसी घटनाओं को देखते हुए लोगों को अधिक सतर्क रहने और केवल आधिकारिक व सत्यापित स्रोतों पर ही भरोसा करने की जरूरत है।