इंडिया गठबंधन ने लोक सभा चुनाव किसी चेहरे पर नहीं लड़ा था। न ही नियमित आपसी विचार-विमर्श के लिए कोई समिति आदि बनाई थी। न साझा झंडा था, न ही कोई सचिवालय, न कोई संयोजक।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हाल ही में आइएनडीआइए के मौजूदा नेतृत्व से असंतोष व्यक्त करने और खुद इसका कमान संभालने की इच्छा व्यक्त करने के बाद विपक्षी गठबंधन में नेतृत्व के सवाल पर तीखी बहस छिड़ गई है।
इस बीच वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि यह गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए बना था। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा, इंडिया गठबंधन ने लोक सभा चुनाव किसी चेहरे पर नहीं लड़ा था। न ही नियमित आपसी विचार-विमर्श के लिए कोई समिति आदि बनाई थी। न साझा झंडा था, न ही कोई सचिवालय, न कोई संयोजक।
विपक्षी एकता के इस मंच को कोई संस्थागत रूप प्रदान नहीं किया गया था। नीतीश कुमार ऐसी ही कुछ बातों को लेकर विरोधस्वरूप इससे अलग हो गए थे। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस के हाथों में इसकी कमान थी। अब जबकि यह सवाल उठ रहा है कि इंडिया गठबंधन की कमान कौन संभाले, यह समझना जरूरी है कि विपक्ष का यह गठबंधन लोक सभा चुनाव के लिए बना था।
जिन राज्यों में विपक्ष का पहले से ही तालमेल था, वहां तो यह गठबंधन चला, लेकिन बाकी राज्यों में नाकाम रहा। बहरहाल, इंडिया गठबंधन की यह अंदरूनी खींचतान उन लोगों को रास नहीं आएगी जो 'बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा' के अंदाज में एनडीए सरकार में आपसी सिरफुटव्वल का इंतजार कर रहे थे।
आपको बता दें, ममता बनर्जी के अध्यक्ष बनने की संभावनाएं इसलिए ज्यादा है, क्योंकि देश के 4 बड़े राज्यों में स्थापित पार्टियों ने ममता का समर्थन कर दिया है।
इंडिया गठबंधन ने लोक सभा चुनाव किसी चेहरे पर नहीं लड़ा था। न ही नियमित आपसी विचार-विमर्श के लिए कोई समिति आदि बनाई थी। न साझा झंडा था, न ही कोई सचिवालय, न कोई संयोजक। विपक्षी एकता के इस मंच को कोई संस्थागत रूप प्रदान नहीं किया गया था। नीतीश कुमार ऐसी ही कुछ बातों को लेकर…
— Akhilesh Sharma (@akhileshsharma1) December 11, 2024
सुप्रीम कोर्ट ने सौरव गांगुली के पक्ष में 14.49 करोड़ रुपये के मध्यस्थता अवॉर्ड को चुनौती देने वाली परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
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Samachar4media Bureau
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) के पक्ष में दिए गए 14.49 करोड़ रुपये के मध्यस्थता अवॉर्ड (Arbitration Award) को चुनौती देने वाली परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट लिमिटेड (Percept Talent Management Ltd.) की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें अदालत ने मध्यस्थता अवॉर्ड को बरकरार रखा था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद की शुरुआत 22 अक्टूबर 2003 को परसेप्ट और सौरव गांगुली के बीच हुए प्लेयर रिप्रेजेंटेशन एग्रीमेंट (Player Representation Agreement) से हुई थी। इस समझौते के तहत परसेप्ट को गांगुली के व्यावसायिक अधिकारों और व्यक्तित्व के कारोबारी इस्तेमाल के लिए उनका एकमात्र और विशेष प्रबंधक नियुक्त किया गया था। समझौते में राजस्व साझा करने और कमाई को एस्क्रो खाते (Escrow Account) के जरिए संचालित करने का प्रावधान था।
समझौते में यह भी कहा गया था कि अगर गांगुली लगातार छह महीने तक भारतीय टीम से बाहर रहते हैं, तो समझौता समाप्त किया जा सकता है। फरवरी 2006 में टीम से बाहर होने के बाद यह अवधि 1 अगस्त 2006 को पूरी हो गई। हालांकि, 30 नवंबर 2006 को टीम में वापसी के बाद भी परसेप्ट ने गांगुली का प्रतिनिधित्व जारी रखा और 21 नवंबर 2007 को समझौता समाप्त करने का नोटिस दिया।
इसके बाद विवाद मध्यस्थता (Arbitration) में पहुंचा। गांगुली ने न्यूनतम गारंटी राशि का भुगतान नहीं होने और एस्क्रो खाते से कथित अनधिकृत निकासी को लेकर दावे किए। मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने उनके दावों को स्वीकार करते हुए 14,49,91,000 रुपये की राशि 12 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया। इसके अलावा 50 लाख रुपये की लागत भी निर्धारित की गई।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने बाद में मध्यस्थता अवॉर्ड को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि जिस संविदात्मक घटना के आधार पर परसेप्ट समझौता समाप्त करने का अधिकार जता रहा था, उसके बाद भी कंपनी ने गांगुली का प्रतिनिधित्व जारी रखा। ऐसे में बाद में समझौता समाप्त करने का उसका अधिकार समाप्त हो चुका था।
मीडिया नेटवर्क्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, हाई कोर्ट ने यह भी माना कि कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) यानी केकेआर (KKR) से गांगुली की कमाई समझौते के तहत राजस्व साझा करने की व्यवस्था के दायरे में नहीं आती थी।
परसेप्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नकुल दीवान (Nakul Dewan) ने दलील दी कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने गांगुली की केकेआर से हुई कमाई को राजस्व साझा करने की व्यवस्था से गलत तरीके से बाहर रखा। उन्होंने कहा कि समझौते में प्रचार संबंधी सेवाओं को व्यापक रूप से शामिल किया गया था, जिसमें क्रिकेट मैचों से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल थीं।
दीवान ने यह भी तर्क दिया कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम (Arbitration and Conciliation Act) की धारा 34 और 37 के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाली अदालतें समझौते की शर्तों की नए सिरे से व्याख्या नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि संबंधित संविदात्मक प्रावधानों और साक्ष्यों पर भी उचित तरीके से विचार नहीं किया गया।
जियोस्टार ने 'West Indies Tour of India 2026' के लिए 15 ब्रांड्स को जोड़ा है। तीन वनडे और पांच टी20 मैचों के लिए टीवी और डिजिटल पर स्पॉन्सरशिप साझेदारियां हुई हैं।
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भारत में फेस्टिव सीजन से पहले इंटरनेशनल क्रिकेट (International Cricket) की वापसी के साथ जियोस्टार (JioStar) ने वेस्टइंडीज टूर ऑफ इंडिया 2026 (West Indies Tour of India 2026) के लिए 15 ब्रांड्स को अपने साथ जोड़ा है। ये ब्रांड्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बैंकिंग-फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस (BFSI), पेंट्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रैवल, वेलनेस और ऑटोमोटिव सहित आठ कैटेगरी से हैं।
भारत के होम मैचों के ब्रॉडकास्टर और स्ट्रीमिंग पार्टनर जियोस्टार ने तीन वनडे (ODIs) और पांच टी20 इंटरनेशनल (T20Is) के लिए टीवी और डिजिटल पर को-प्रेजेंटिंग (Co-Presenting) और एसोसिएट लाइव (Associate Live) पार्टनरशिप के जरिए इन ब्रांड्स को जोड़ा है।
हैवेल्स (Havells), ओपनएआई (OpenAI), गूगल सर्च (Google Search), बर्जर पेंट्स (Berger Paints), हर्बालाइफ (Herbalife), फोनपे (PhonePe) और अल्ट्रावोल्ट (Ultravolt) को को-प्रेजेंटिंग पार्टनर बनाया गया है। वहीं, एशियन पेंट्स (Asian Paints), टाटा कैपिटल (Tata Capital), टाटा एआईजी (Tata AIG), ब्रिटानिया (Britannia), टीवीएस (TVS), विमल पान मसाला (Vimal Pan Masala), एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil) और एयरबीएनबी (Airbnb) एसोसिएट पार्टनर हैं।
वेस्टइंडीज सीरीज जियोस्टार के फेस्टिव-सीजन क्रिकेट कैलेंडर (Festive-Season Cricket Calendar) की शुरुआत करेगी। ब्रॉडकास्टर ने इस विस्तारित शेड्यूल को ब्रांड्स के लिए कई स्पोर्ट्स प्रॉपर्टीज (Sports Properties) में लगातार विजिबिलिटी बनाए रखने के अवसर के तौर पर पेश किया है, ताकि वे केवल किसी एक मैच या टूर्नामेंट पर निर्भर न रहें।
वेस्टइंडीज टूर ऑफ इंडिया 2026 की शुरुआत 27 सितंबर को तिरुवनंतपुरम से तीन मैचों की वनडे सीरीज के साथ होगी। इसके बाद पांच मैचों की टी20 सीरीज 6 अक्टूबर से शुरू होगी।
टाइम्स नाउ नवभारत की एडिटर- इन -चीफ नाविका कुमार ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से महिला सुरक्षा, सत्य निकेतन त्रासदी और राजधानी से जुड़े अहम मुद्दों पर बातचीत की।
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टाइम्स नाउ नवभारत (Times Now Navbharat) की एडिटर इन चीफ और वरिष्ठ पत्रकार नाविका कुमार (Navika Kumar) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) से राजधानी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत की है। नाविका कुमार ने एक्स (X) पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि बातचीत में दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा, सत्य निकेतन त्रासदी (Satya Niketan Tragedy) और राजधानी के सामने मौजूद बड़े सवालों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही दिल्ली की चुनौतियों, चिंताओं और आगे की राह को लेकर भी मुख्यमंत्री से बातचीत हुई।
Delhi has a lot to talk about. From women’s safety and the Satya Niketan tragedy to the bigger questions facing the capital.
— Navika Kumar (@navikakumar) September 25, 2026
I spoke to Delhi CM @gupta_rekha about the challenges, the concerns and the road ahead.
🎙️ Baatein Dil Se with Navika Kumar
Today | 7 PM on @TimesNow… pic.twitter.com/K2k53sLeem
नाविका कुमार ने बताया कि यह बातचीत उनके कार्यक्रम ‘बातें दिल से विद नाविका कुमार’ (Baatein Dil Se with Navika Kumar) में प्रसारित होगी। कार्यक्रम आज शाम 7 बजे टाइम्स नाउ (Times Now) के यूट्यूब (YouTube) चैनल पर देखा जा सकेगा। इसके बाद रात 9 बजे इसे ‘द न्यूज ऑवर’ (The News Hour) में भी प्रसारित किया जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने एक्स पोस्ट के जरिए डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म ‘द फ्रंट’ के नए अंदाज में दर्शकों से जुड़ने की जानकारी दी। प्लेटफॉर्म न्यूजरूम और स्टूडियो के साथ आएगा।
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वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत (Rana Yashwant) ने अपने नए डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म (Digital News Platform) ‘द फ्रंट’ (The Front) को लेकर जानकारी साझा की है। उन्होंने एक्स (X) पर पोस्ट कर बताया कि ‘द फ्रंट’ अब अपनी टीम और नए तेवर के साथ दर्शकों से जुड़ने जा रहा है।
राणा यशवंत के मुताबिक, ‘द फ्रंट’ अब अपने न्यूजरूम (Newsroom) और स्टूडियो (Studio) के साथ दर्शकों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि आखिरकार मसला खबर का ही है और खबर को किस तरह देखा और प्रस्तुत किया जाता है, इससे भी काफी कुछ तय होता है।
आप सभी को नई ख़बर देनी है. #thefront डिजिटल न्यूज़ प्लैटफॉर्म अब अपनी टीम और तेवर के साथ आप से जुड़ने जा रहा है. अब यह न्यूज़ चैनल अपने न्यूजरुम और स्टूडियो के साथ आप तक पहुंचेगा. ज़ाहिर है मसला तो ख़बर का ही है. ये सब ना हों तब भी ख़बर को कैसे देखा जाए और रखा जाए- इसी से बहुत… pic.twitter.com/J9fmVvtxzl
— Rana Yashwant (@RanaYashwant1) September 24, 2026
उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि इस मोर्चे पर उन्होंने कोई समझौता नहीं किया है। हालांकि, प्रेजेंटेशन (Presentation) और खबरों को बताने के तरीके को तकनीक के जरिए और बेहतर किया जाएगा। उनका कहना है कि दर्शकों को इसका अंदाज नया लगेगा और इसमें ताजगी के साथ कुछ ऐसा भी देखने को मिलेगा, जो इसे अलग महसूस कराएगा।
राणा यशवंत ने अपनी पोस्ट में लिखा, “आप सभी को नई ख़बर देनी है। #thefront डिजिटल न्यूज़ प्लैटफॉर्म अब अपनी टीम और तेवर के साथ आप से जुड़ने जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि ‘द फ्रंट’ के जरिए खबरों की प्रस्तुति में बदलाव और तकनीक के इस्तेमाल के साथ दर्शकों के लिए एक नया अनुभव तैयार करने की कोशिश होगी।
वेबदुनिया ने 23 सितंबर 2026 को अपनी डिजिटल यात्रा के 27 वर्ष पूरे कर लिए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारतीय भाषाओं और पत्रकारिता में योगदान के लिए बधाई दी।
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Samachar4media Bureau
डिजिटल क्रांति के दौर में हिंदी को इंटरनेट पर पहचान दिलाने वाले वेबदुनिया (Webdunia) ने 23 सितंबर 2026 को अपनी यात्रा के 27 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 1999 में मध्य प्रदेश से शुरू हुई यह यात्रा आज भारतीय भाषाओं की डिजिटल दुनिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन चुकी है।
वेबदुनिया की शुरुआत ऐसे समय में हुई थी, जब इंटरनेट पर अंग्रेजी का दबदबा था और भारतीय भाषाओं के लिए डिजिटल स्पेस (Digital Space) बनाना बड़ी चुनौती थी। वेबदुनिया ने हिंदी को इंटरनेट पर स्वतंत्र पहचान देने की दिशा में काम किया और आगे चलकर हिंदी के साथ सात अन्य भारतीय भाषाओं में भी अपनी मौजूदगी बनाई।
विश्व के पहले हिंदी पोर्टल 'वेबदुनिया' को 27 वर्ष पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई।
— Office of Dr. Mohan Yadav (@drmohanoffice51) September 23, 2026
मध्यप्रदेश के इंदौर से शुरू होकर हिंदी सहित 7 अन्य भारतीय भाषाओं में करोड़ों पाठकों की आवाज बनने की यह यात्रा सराहनीय है।
आपकी राष्ट्र समर्पित पत्रकारिता निरंतर जारी रहे, यही मंगलकामना है।
- श्री…
इस मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Dr. Mohan Yadav) ने वेबदुनिया को बधाई दी। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि हिंदी सहित सात अन्य भारतीय भाषाओं में करोड़ों पाठकों की आवाज बनने की यह यात्रा सराहनीय है। उन्होंने वेबदुनिया की राष्ट्र समर्पित पत्रकारिता के निरंतर जारी रहने की मंगल कामना की।
27 वर्षों की यह यात्रा केवल एक डिजिटल पोर्टल (Digital Portal) की वर्षगांठ नहीं है, बल्कि भारतीय भाषाओं की डिजिटल यात्रा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। करोड़ों पाठकों तक पहुंच इस बात को सामने रखती है कि भारत की डिजिटल कहानी केवल अंग्रेजी में नहीं लिखी जा सकती।
अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में भारतीय भाषा मीडिया के सामने नई चुनौतियां और संभावनाएं हैं। AI लोगों के सूचना हासिल करने, ज्ञान प्राप्त करने और संवाद करने के तरीके को तेजी से बदल रहा है। ऐसे में चुनौती केवल भारतीय भाषाओं को ट्रांसलेट (Translate) करने की नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति, संदर्भ और विविधता को समझने वाली तकनीक तैयार करने की भी है।
भारत में करोड़ों लोग अपनी मातृभाषा में सोचते और संवाद करते हैं। ऐसे में भारतीय भाषाओं में तैयार डिजिटल कंटेंट (Digital Content) आने वाले समय में AI के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। पिछले 27 वर्षों में भारतीय भाषा मीडिया ने समाचार, विचार, संस्कृति, इतिहास, मनोरंजन, खेल और समाज से जुड़ा बड़ा कंटेंट तैयार किया है, जो अब कंटेंट से आगे बढ़कर संदर्भ और ज्ञान के नए स्रोत के रूप में भूमिका निभा सकता है।
पारलीन रणहोत्रा ने गूगल के बाद Monks India में ग्रोथ लीड के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए नियुक्ति की जानकारी साझा की।
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पारलीन रणहोत्रा (Parleen Ranhotra) ने Monks India में ग्रोथ लीड (Growth Lead) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए संगठन का हिस्सा बनने पर उत्साह जताया।
रणहोत्रा ने कहा कि एडटेक (AdTech) क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और ऐसे समय में Monks अपने इनोवेशन (Innovation) और ग्रोथ (Growth) पर फोकस के कारण उनके लिए खास जगह है। उन्होंने यह भी बताया कि गूगल (Google) में काम करने के दौरान Monks उनके क्लाइंट्स (Clients) में से एक था। ऐसे में क्लाइंट साइड (Client Side) से एजेंसी साइड (Agency Side) में उनका यह बदलाव उनके लिए खास मायने रखता है।
अपने लिंक्डइन पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैं आधिकारिक तौर पर Monk बन गई हूं। यह साझा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि मैंने Monks India में ग्रोथ लीड के तौर पर जॉइन किया है।”
इससे पहले पारलीन रणहोत्रा गूगल में डेटा एनालिस्ट, मार्केटिंग पार्टनर्स-एलसीएस (Data Analyst, Marketing Partners - LCS) के पद पर काम कर रही थीं। नई भूमिका में वह Monks की टीम के साथ काम करने, सहयोग करने, नई चीजें सीखने और आगे बढ़ने को लेकर उत्साहित हैं।
भारत समाचार के एडिटर-इन-चीफ ब्रजेश मिश्रा ने शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर से मुलाकात की और व्यापार, तकनीक, संस्कृति तथा सहयोग को लेकर अपने विचार साझा किए।
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भारत समाचार (Bharat Samachar) के एडिटर-इन-चीफ और वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश मिश्रा (Brajesh Mishra) ने शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर (Pratik Mathur) से मुलाकात की। इस मुलाकात को उन्होंने यादगार बताते हुए अपने एक्स (X) पोस्ट के जरिए अनुभव साझा किया।
शंघाई में आज भारत के महावाणिज्य दूत श्री प्रतीक माथुर से मुलाक़ात यादगार रही। पूर्वी चीन में भारत का प्रतिनिधित्व केवल औपचारिक कूटनीति नहीं है; व्यापार, तकनीक, संस्कृति और आपसी सहयोग के बीच भरोसे के नए रास्ते बनाना भी है। माथुर जी की समझ, ऊर्जा और भारत के प्रति प्रतिबद्धता… pic.twitter.com/NsI1xOrhM8
— Brajesh Misra (@brajeshlive) September 22, 2026
ब्रजेश मिश्रा ने कहा कि पूर्वी चीन में भारत का प्रतिनिधित्व केवल औपचारिक डिप्लोमेसी (Diplomacy) तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, तकनीक, संस्कृति और आपसी सहयोग के बीच भरोसे के नए रास्ते बनाना भी इसका हिस्सा है।
उन्होंने प्रतीक माथुर की समझ, ऊर्जा और भारत के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। ब्रजेश मिश्रा ने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में भारत और पूर्वी चीन के बीच संवाद और अधिक सार्थक परिणाम देगा। उन्होंने प्रतीक माथुर और उनकी पूरी टीम को शुभकामनाएं भी दीं।
वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने पुराने इंटरव्यू की झलकियां साझा करने की जानकारी दी है। यह सिलसिला अगले 15 दिनों तक चलेगा।
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वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया (Deepak Chaurasia) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ किए गए अपने पुराने इंटरव्यू (Interview) की खास झलकियां साझा करने की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया (Social Media) पोस्ट में बताया कि अगले 15 दिनों तक वह इन दुर्लभ इंटरव्यू की झलकियां दर्शकों के साथ साझा करेंगे।
दीपक चौरसिया ने अपनी पोस्ट में लिखा कि राजनीतिक पत्रकारिता (Political Journalism) के सफर में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई ऐतिहासिक इंटरव्यू किए हैं। अब वह इन्हीं इंटरव्यू से जुड़ी खास झलकियां ‘मोदी आर्काइव्स’ (Modi Archives) के नाम से लेकर आएंगे।
धन्यवाद दोस्तों...
— Deepak Chaurasia (@DChaurasia2312) September 17, 2026
आपके अपार प्यार और समर्थन की बदौलत #DeepakChaurasiaModiTalk ग्लोबली No. 2 पर ट्रेंड करवाने के लिए...
अपने राजनीतिक पत्रकारिता के सफर में मैंने प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के कई ऐतिहासिक इंटरव्यू लिए हैं...अगले 15 दिनों तक मैं आपके लिए लेकर आ रहा हूं…
उन्होंने बताया कि इन इंटरव्यू में गुजरात दंगों से जुड़े तीखे सवालों के साथ कई दिलचस्प बातचीत भी शामिल होंगी। उन्होंने लोगों से ‘मोदी आर्काइव्स’ के लिए इंतजार करने को कहा है।
अपनी पोस्ट में दीपक चौरसिया ने #DeepakChaurasiaModiTalk का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने इसके लिए मिले प्यार और समर्थन का धन्यवाद देते हुए दावा किया कि इस हैशटैग को ग्लोबली नंबर दो (Globally No. 2) पर ट्रेंड कराया गया।
दिल्ली HC ने केंद्र से पूछा, क्या सोशल मीडिया के ‘एडिक्टिव’ फीचर्स पर नीति बनाने का विचार है?
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सोशल मीडिया पर लगातार स्क्रॉल करते रहने की आदत को लेकर अब मामला अदालत तक पहुंच गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ऐसे डिजाइन फीचर्स को लेकर कोई नीति बनाने पर विचार कर रही है, जो यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। खास तौर पर बच्चों और किशोरों पर इसके असर को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और अमित शर्मा की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से केंद्र सरकार से इस बारे में जानकारी लेने को कहा है। सुनवाई के दौरान शर्मा ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे पर उनके पास फिलहाल सरकार की ओर से कोई विशेष निर्देश नहीं हैं। मामले की अगली सुनवाई करीब तीन सप्ताह बाद होगी।
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ऐसे फीचर्स की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने की मांग की गई है, जो यूजर्स की लगातार भागीदारी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। याचिका में ऐसे फीचर्स के लिए नियामकीय सुरक्षा उपाय सुझाने की भी मांग की गई है।
Infinite Scrolling और Autoplay पर सवाल
याचिका में खास तौर पर Infinite Scrolling, Autoplay और Personalised Feeds जैसे फीचर्स का जिक्र किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन फीचर्स की मदद से यूजर्स को लगातार नया कंटेंट दिखाया जाता है, जिससे वे बार-बार प्लेटफॉर्म पर वापस आते हैं और लंबे समय तक ब्राउजिंग करते रहते हैं।
याचिका में Meta Platforms, Alphabet, X और Telegram को भी पक्षकार बनाया गया है। इसके साथ ही यूजर्स को कथित तौर पर हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी की गई है।
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया की लत और लगातार स्क्रॉल करने की आदत से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर वित्त वर्ष 2026 के Economic Survey में भी चिंता जताई गई थी। याचिका के मुताबिक, इसमें सोशल मीडिया की लत को चिंता, डिप्रेशन, कम आत्मसम्मान और साइबरबुलिंग से जुड़े तनाव जैसी समस्याओं के साथ जोड़ा गया है। इसमें युवाओं को खास तौर पर संवेदनशील बताया गया है।
Meta के अमेरिकी मामले का भी जिक्र
याचिका में Meta से जुड़े शोध का भी हवाला दिया गया है और कहा गया है कि किशोर ऐसे फीचर्स के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं, जिन्हें यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।
इस बहस के बीच अमेरिका में Meta के खिलाफ बच्चों और किशोरों पर Facebook और Instagram के कथित प्रभाव से जुड़े मामले का भी जिक्र सामने आया है। अगस्त में Meta ने अमेरिका के लगभग सभी राज्यों से जुड़े एक समझौते के तहत अगले 10 साल में 18 अरब डॉलर तक भुगतान करने और किशोरों के इस्तेमाल पर अतिरिक्त प्रतिबंध लागू करने पर सहमति जताई थी।
समझौते के तहत Facebook और Instagram पर किशोरों के लिए डिफॉल्ट रूप से दो घंटे की दैनिक उपयोग सीमा का प्रावधान है, हालांकि माता-पिता के कंट्रोल से इसमें बदलाव किया जा सकता है। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक किशोरों की पहुंच पर भी रोक का प्रावधान है। इसके अलावा स्कूल के समय नोटिफिकेशन डिफॉल्ट रूप से बंद रखने की बात कही गई है।
Meta ने 13 साल से कम उम्र के यूजर्स की पहचान के लिए अपनी Age Assurance व्यवस्था को मजबूत करने पर भी सहमति जताई है। अमेरिकी राज्यों ने आरोप लगाया था कि Meta ने बच्चों के बीच प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले डिजाइन अपनाए और इससे जुड़े जोखिमों को पर्याप्त तरीके से नहीं संभाला। हालांकि, समझौते के तहत Meta ने किसी गलत काम को स्वीकार नहीं किया है।
अब नजर सोशल मीडिया के डिजाइन पर
दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही यह कार्यवाही ऐसे समय में हो रही है, जब सोशल मीडिया के इस्तेमाल, प्लेटफॉर्म डिजाइन, यूजर की पसंद और बच्चों की सुरक्षा के बीच नियमन की सीमा को लेकर चर्चा बढ़ रही है।
कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध या रोक से जुड़े मामलों में कहा था कि ऐसे फैसलों में नीतिगत पहलू शामिल होते हैं और इन्हें सरकार पर छोड़ना बेहतर है। मौजूदा याचिका हालांकि सोशल मीडिया पर सीधे प्रतिबंध की बजाय प्लेटफॉर्म के डिजाइन और यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने वाले फीचर्स की औपचारिक जांच पर जोर देती है।
अभी दिल्ली हाई कोर्ट ने केवल केंद्र का रुख जानने के लिए निर्देश दिया है। इस स्तर पर सोशल मीडिया के इन फीचर्स पर किसी तरह का प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया गया है।
मेटा ने Meta One सब्सक्रिप्शन सेवा पेश की है, जिसमें Instagram, Facebook, WhatsApp और Meta AI के लिए 50 से ज्यादा प्रीमियम फीचर्स और अतिरिक्त AI टूल्स मिलेंगे।
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Samachar4media Bureau
मेटा (Meta) ने सोशल मीडिया और एआई (AI) इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए नई सब्सक्रिप्शन सेवा (Subscription Service) मेटा वन (Meta One) पेश की है। इसके तहत इंस्टाग्राम (Instagram), फेसबुक (Facebook), व्हाट्सऐप (WhatsApp) और मेटा एआई (Meta AI) में कई अतिरिक्त सुविधाएं मिलेंगी। कंपनी के मुताबिक, सेवा में 50 से ज्यादा फीचर्स होंगे, जबकि सामान्य ऐप और एआई सुविधाएं पहले की तरह मुफ्त रहेंगी।
मेटा वन के तहत इंस्टाग्राम प्लस (Instagram Plus) में कस्टम फॉन्ट (Custom Font), स्टोरी नोटिफिकेशन (Story Notifications) और डीएम प्रीव्यू (DM Preview) जैसे फीचर्स मिलेंगे। व्हाट्सऐप प्लस (WhatsApp Plus) में खास थीम, नए आइकन, स्पेशल स्टिकर और ज्यादा चैट पिन करने की सुविधा दी जाएगी।
फेसबुक प्लस (Facebook Plus) में कस्टम ऐप आइकन, सुपर हार्ट और दूसरे पर्सनलाइजेशन (Personalization) विकल्प मिलेंगे। सब्सक्राइबर्स मेटा एआई की मदद से ज्यादा इमेज और वीडियो भी बना सकेंगे। इसके अलावा इंस्टाग्राम रेस्टाइल (Instagram Restyle) फीचर का ज्यादा इस्तेमाल करने की सुविधा भी मिलेगी।
मेटा वन के क्रिएटर और बिजनेस प्लान (Creator and Business Plan) में बेहतर प्रोफाइल, वेरिफाइड बैज (Verified Badge) और इम्पर्सोनेशन प्रोटेक्शन (Impersonation Protection) जैसे फीचर्स मिलेंगे। व्हाट्सऐप पर मेटा बिजनेस एजेंट (Meta Business Agent) का ज्यादा इस्तेमाल भी किया जा सकेगा।
एडवांस्ड प्लान (Advanced Plan) में 30 दिनों तक स्टोरी शेड्यूल करने, पोस्ट और रील्स में लिंक जोड़ने, एक्सपोर्टेबल एनालिटिक्स (Exportable Analytics) और बेहतर ऑडियंस इनसाइट्स (Audience Insights) जैसे टूल्स शामिल हैं। इसके साथ अतिरिक्त लिंक्ड डिवाइसेज और बिजनेस ब्रॉडकास्ट क्रेडिट (Business Broadcast Credits) भी मिलेंगे।
मेटा वन की अलग-अलग सेवाओं की कीमत 79 रुपये प्रति महीने से शुरू होगी। व्हाट्सऐप प्लस की कीमत 79 रुपये और इंस्टाग्राम प्लस व फेसबुक प्लस की शुरुआती कीमत 99 रुपये प्रति महीने होगी। कोर बंडल (Core Bundle) 549 रुपये और प्रीमियम प्लान (Premium Plan) 1,950 रुपये प्रति महीने का होगा।
क्रिएटर और बिजनेस प्लान की शुरुआती कीमत 639 रुपये होगी। वहीं एडवांस्ड, एक्सपर्ट और मैक्स प्लान (Advanced, Expert and Max Plans) की कीमत क्रमशः 2,099 रुपये, 6,399 रुपये और 20,990 रुपये प्रति महीने होगी।