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भारत में नेपाल जैसे हालात कभी नहीं होंगे: राणा यशवंत
क्योंकि जब इंसान का विवेक मर जाता है, तो वह सही-ग़लत, पाप-पुण्य और यश-अपयश का ही नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व का भी अंतर खो देता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
नेपाल में जारी राजनीतिक उथल-पुथल और जनविद्रोह की गूंज भारत में भी सुनाई दे रही है। सोशल मीडिया पर कुछ वर्ग भारत को श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल की स्थिति से जोड़कर अराजक माहौल की आशंका जता रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बुनियादी तासीर और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं इसे ऐसे हालात से दूर रखती हैं।
इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने लिखा, नेपाल के हालात का हवाला देकर भारत में भी वैसी स्थिति की आशंका जताई जा रही है, मानो यहाँ किसी भी वक्त ऐसा हो सकता है।
लेकिन इस देश की बुनियादी तासीर, जहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी सब साथ रहते हैं कुछ और ही है। अगर भारत को श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जैसा मानकर डर फैलाया जा रहा है, तो सवाल उठता है कि जब नेहरू से मोदी तक कोई भी प्रधानमंत्री लुटेरा नहीं निकला, फिर भी ऐसा डर दिखाया जा रहा है तो यह स्थिति सच हो ही जानी चाहिए।
अलग-अलग दलों के सांसद तमाम मतभेदों के बावजूद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत की बात रखने के लिए दुनिया के देशों का दौरा करते हैं, जिसकी मिसाल दी जाती है, फिर भी अगर भारत को नेपाल जैसा बताया जा रहा है तो यह देश तबाह हो जाना चाहिए। जब भारत का फॉरेक्स 700 बिलियन डॉलर है, GDP दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और 6.2% विकास दर के साथ सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है, तब भी अगर इसे लंका-बांग्लादेश-नेपाल जैसा कहा जा रहा है, तो यह आज ही हो जाना चाहिए।
अगर भारत फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट, जेट इंजन, 24 मैक की रफ़्तार वाली मिसाइल और स्पेस साइंस में दुनिया को चौंका रहा है, तब भी अगर इसे नेपाल बताया जा रहा है तो बेहतर है कि आज ही हो जाए। अ
गर शंकराचार्य से लेकर विवेकानंद और कृष्णमूर्ति तक की संस्कृति अधोगति को प्राप्त हो चुकी है, तो यहाँ वैसा ही होना चाहिए जैसा कुछ लोग कह रहे हैं। क्योंकि जब इंसान का विवेक मर जाता है, तो वह सही-ग़लत, पाप-पुण्य और यश-अपयश का ही नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व का भी अंतर खो देता है।
नेपाल के हालात का हवाला देकर भारत में ऐसी स्थिति की आशंका से कुछ लोग भर गए हैं. ऐसा कि - बस अब यहाँ किसी भी वक्त वैसा हो सकता है! मैं इस देश के मिज़ाज की बुनियादी तासीर - उसमे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,पारसी सब हैं- को थोड़ा बहुत तो समझता ही हूँ.
— Rana Yashwant (@RanaYashwant1) September 12, 2025
- अगर भारत - श्रीलंका,बांग्लादेश…
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