‘असभ्य विरोध’ पर रूबिका ने लगाई ऐसी फटकार, हो रही तारीफ

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पक्ष-विपक्ष में माहौल तैयार किया जा रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 December, 2019
Last Modified:
Friday, 20 December, 2019
Rubika Liyaquat

लोकतंत्र में विरोध हर नागरिक का अधिकार है। यदि आप सरकार के किसी फैसले से खुश नहीं हैं तो विरोध कर सकते हैं। किसी की बातें आपको चुभती हैं तो विरोध कर सकते हैं। किसी के ख्याल आपको ठेस पहुंचाते हैं तो विरोध कर सकते हैं, लेकिन शर्त केवल यही है कि विरोध का तरीका सभ्य होना चाहिए।

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पक्ष-विपक्ष में माहौल तैयार किया जा रहा है। कानून का समर्थन करने वाले, विरोधियों को मानसिक विकलांग करार दे रहे हैं और विरोधी इस कानून के समर्थकों की सोच पर उंगली उठा रहे हैं। इस समर्थन-विरोध के ‘खेल’ में शब्दों की मर्यादा तार-तार हो रही है।

‘एबीपी न्यूज’ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत को भी इस तार-तार होती मर्यादा से दो-चार होना पड़ा। दरअसल, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय झा ने अपनी एक फोटो ट्विटर पर शेयर की, जिसमें वह मुस्लिम टोपी में नजर आ रहे हैं। संजय झा की फोटो पर कई लोगों ने कमेंट किए, जिनमें रूबिका भी शामिल थीं। उन्होंने लिखा, ‘संजय जी टोपी पहनने से कौम का भला होना होता तो आपकी सरकार में खूब टोपियां पहनी गईं, इफ्तार पार्टियां रखी गई। अब तक कौम हर पैमाने पर ऊपर उठ गई होती, मुसलमान बच्चे खूब पढ़ लिख गए होते, औरतें ट्रिपल तलाक़ की सलाखों से आजाद हो गई होती! इसे टोपी पहनना नहीं टोपी पहनाना कहते हैं।’

रूबिका ने शब्दों की मर्यादा में रहकर नपे-तुले अंदाज में अपनी बात कही, लेकिन उनका यह अंदाज में कुछ लोगों को नागवार गुजरा। संभव है एबीपी की पत्रकार के विचारों ने उन्हें आहत किया हो, मगर इसके विरोध में उन्होंने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, उसकी इजाजत सभ्य समाज नहीं देता। तौसीफ नामक यूजर ने रूबिका के ट्वीट पर कमेंट करते हुए लिखा ‘अगर BJP और RSS के बेड पर सोने से कौम का भला होता तो तुम बहुत सो ली हो और तुमसे पहले भी बहुत सोई हैं’।

क्या इसे महज विरोध या असहमति कहा जा सकता है? एक महिला के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग तौसीफ जैसे लोगों की घृणित सोच को दर्शाता है। यही वे लोग हैं जिन्होंने विचारों को व्यक्त करने के सोशल प्लेटफार्म को इस कदर गंदा कर दिया है कि अब इससे दूर रहने की नसीहतें दी जाने लगी हैं। तौसीफ के इस कमेंट का रूबिका ने करारा जवाब दिया। उन्होंने लिखा ‘तौसीफ़ आपकी मां को मेरा सलाम कहना और सेक्स, बेड, सोने से फुर्सत मिल जाए तो CAA को अच्छे से पढ़ लेना, पढ़ने के बावजूद समझ न आए तो नीचे लिखी लाइन को रट लेना, NRC अभी लागू नहीं हुआ, CAA का हिंदुस्तानी मुसलमान से कोई वास्ता नहीं।’

रूबिका लियाकत के इस जवाबी ट्वीट को हजारों बार रीट्वीट किया जा चुका है और साढ़े आठ हजार के आसपास कमेंट हैं, जिनमें से अधिकांश में तौसीफ को उसकी विकलांग मानसिकता के लिए निशाना बनाया गया है। सोशल मीडिया पर रूबिका को किस तरह लोगों का समर्थन मिल रहा है, वह आप यहां दिए गए ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं।  

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पत्रकारों को पसंद नहीं आया बीजेपी नेता का ‘पाकिस्तानी राग’, यूं की खिंचाई

आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले कपिल मिश्रा अपने ट्वीट को लेकर खबरनवीसों के निशाने पर आ गए हैं

Last Modified:
Friday, 24 January, 2020
Kapil Mishra

आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले कपिल मिश्रा अपने ट्वीट को लेकर खबरनवीसों के निशाने पर आ गए हैं। कई पत्रकारों ने अपने-अपने अंदाज में मिश्रा की खिंचाई की है। दरअसल, भाजपा नेता ने दिल्ली विधानसभा चुनाव को भारत-पाकिस्तान के मैच से जोड़ते हुए ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा है, ‘8 फरवरी को दिल्ली की सड़कों पर हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का मुकाबला होगा’।

दरअसल, कपिल अपनी पुरानी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कुछ न कुछ बोलते रहते हैं और कई लोगों को यह सब सुनने की आदत भी हो गई है, लेकिन कपिल मिश्रा का इस तरह से हिन्दुस्तान-पाकिस्तान करना पत्रकारों को बिल्कुल भी रास नहीं आया।

स्वतंत्र पत्रकार स्मिता शर्मा ने कपिल पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, ‘छुपाना भी नहीं आता, जताना भी नहीं आता...हमें तुमसे मुहब्बत है...बताना भी नहीं आता...पाकिस्तान ना होता तो पता नहीं कितनों के सियासी करियर का क्या होता।’

स्मिता की तरह ही ‘एनडीटीवी इंडिया’ के रिपोर्टर सोहित मिश्रा ने भी भाजपा नेता को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कपिल मिश्रा के ट्वीट के जवाब में कहा, ‘आखरी बार बिना पाकिस्तान का नाम लिए कब चुनाव लड़ा गया था? सही जवाब देने वाले को उचित इनाम दिया जाएगा।’

‘एनडीटीवी’ के विदेश मामलों के संपादक उमाशंकर सिंह ने भी कपिल के बयान पर उन्हें निशाना बनाया है। उन्होंने लिखा है ‘इस नफ़रती नासूर को आईना दिखाया जाए’? इसके साथ ही सिंह ने कपिल मिश्रा का पुराना विडियो शेयर किया है जिसमें वह कहते नजर आ रहे हैं ‘क्या संघ की शाखाओं में आजकल ऐसा हिन्दू धर्म सिखाया जा रहा है कि उर्दू को देखते ही डर जाए, भड़क जाए? अगर कोई सोचता है कि दिल्ली की गंगा जमुनी संस्कृति को बर्बाद कर देगा तो वह ग़लतफ़हमी है। दिल्ली ने हमेशा ऐसी ताक़तों को उनकी सही जगह दिखाई है।” यह विडियो संभवतः तब का है जब मिश्रा आम आदमी पार्टी का हिस्सा थे।

वहीं, CNN-न्यूज18 की पॉलिटिकल एडिटर माया शकील ने अपने ही अंदाज में कपिल मिश्रा को जवाब दिया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है, ‘दिल्ली की सड़कों पर क्यों? यह फ़िरोज शाह कोटला स्टेडियम में खेला जा सकता है। भारत और पाकिस्तान में शांति के लिए क्रिकेट कूटनीति सबसे बेहतर तरीका है।’ साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग को टैग करते हुए मिश्रा के बयान पर गौर करने को कहा है।

उधर पत्रकारों के विरोध के बीच, चुनाव आयोग ने भी कपिल मिश्रा के बयानों को गंभीरता से लिया है। आयोग ने भाजपा नेता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उमाशंकर सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी देते हुए कहा है ‘कपिल मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मिश्रा अपने नफरती बयानों का किसी भी तरह बचाव नहीं कर सकता। आचारसंहिता के इस अतिगंभीर उल्लंघन के कारण मिश्रा की उम्मीदवारी रद्द होनी चाहिए। #ECI कठोर कार्रवाई कर ऐसे तत्वों को कड़ा संदेश देगा ये महज खानापूर्ति है’?

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अब फेसबुक में इस बड़े पद पर काम करेंगे अविनाश पंत

पंत को इंडस्ट्री में काम करने का करीब 22 साल का अनुभव है और पूर्व में वह तमाम बड़े ब्रैंड्स के साथ काम कर चुके हैं

Last Modified:
Friday, 24 January, 2020
Avinash Pant

सोशल नेटवर्किंग साइट ‘फेसबुक’ (Facebook) ने भारत में अपनी लीडरशिप टीम को और मजबूती देते हुए इसमें एक और चेहरे को शामिल किया है। खबर है कि अविनाश पंत को फेसबुक इंडिया का मार्केटिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।

बताया जाता है कि कंपनी में मार्केटिंग डायरेक्टर का यह नया पद होगा। इसके तहत पंत को फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप समेत कंपनी के सभी एप्स की कंज्यूमर मार्केटिंग की दिशा में काम करना होगा। पंत को इंडस्ट्री में काम करने का करीब 22 साल का अनुभव है और पूर्व में वह ‘नाइकी’ (Nike), ‘कोका कोला’ (Coca-Cola), ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ (The Walt Disney Company) और ‘रेड बुल’ (Red Bull) जैसे बड़े ब्रैंड्स के साथ काम कर चुके हैं।

फेसबुक में नई जिम्मेदारी से पहले वह ‘रेड बुल’ कंपनी में मार्केटिंग डायरेक्टर (इंडिया) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’ (IIM) अहमदाबाद के छात्र रह चुके पंत भारत में फेसबुक के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन को रिपोर्ट करेंगे।   

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पत्रकार रोहिणी सिंह के विरोध में ट्रोलर्स कर बैठे यह गलती, अब उड़ रहा मजाक

क्या ब्राजील के राष्ट्रपति को गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने का सरकार का फैसला सही है? सोशल मीडिया पर यह सवाल पूछा जा रहा है

Last Modified:
Monday, 20 January, 2020
Rohini SIngh

क्या ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो को गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने का मोदी सरकार का फैसला सही है? सोशल मीडिया पर यह सवाल पूछा जा रहा है। पत्रकार रोहिणी सिंह ने सरकार के इस फैसले को कठघरे में खड़ा किया है। आपको बता दें कि पिछले साल वरिष्ठ पत्रकार करन थापर ने भी अपने एक लेख में इस निर्णय पर नाखुशी जाहिर की थी। रोहिणी ने अपने ट्वीट में कहा है, ‘गणतंत्र दिवस समारोह का अतिथि वह व्यक्ति है, जिसने एक महिला सांसद से कहा था कि वह उसका बलात्कार नहीं करेगा, क्योंकि वह इसके लायक नहीं है। और बाद में उसने कहा था कि वह बदसूरत है और बलात्कार के लायक नहीं है। एक ऐसे व्यक्ति को अतिथि के रूप में आमंत्रित करना जो बलात्कार को प्रोत्साहित करता है, हर भारतीय महिला के गाल पर थप्पड़ के समान है’।

रोहिणी सिंह के इस ट्वीट को अब तक नौ हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। अधिकांश ने अपने कमेंट में उनकी बात से सहमति जताई है। हालांकि, उनका विरोध करने वालों की भी कोई कमी नहीं है, लेकिन इस विरोध में कई ऐसी गलती कर बैठे हैं, जो उनके मजाक की वजह बन गई है।

रोहिणी सिंह ने अपने पहले ट्वीट में केवल अतिथि के चुनाव पर सवाल उठाये थे, उनके नाम का जिक्र नहीं किया था। इस वजह से रोहिणी सिंह का विरोध करने वालों को समझ ही नहीं आया कि बात किस की हो रही है और उन्होंने अपने आप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को मुख्य अतिथि समझ लिया। इस आधे-अधूरे ज्ञान के चलते कई ने तो ट्रम्प को अपने ट्वीट में टैग करके रोहिणी को अमेरिकी वीसा न देने की अपील भी कर डाली। इन ट्रोलर्स का कहना था कि चूंकि रोहिणी सिंह उनके बारे में झूठ फैला रही हैं, इसलिए उन्हें भविष्य में वीसा न दिया जाए।

रोहिणी ने अपने ट्वीट में इसकी जानकारी देते हुए लिखा है ‘आज कुछ आईटी सेल ट्रोलर्स ने खुद को विदेश नीति विशेषज्ञ साबित करते हुए यह बताने का प्रयास किया कि मैं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को कितना कम समझती हूं। पहले कोई आईटी सेल वालों को बताए कि गणतंत्र दिवस का अतिथि कौन है।’ उन्होंने आगे लिखा ‘मैंने ट्वीट किया था कि महिलाओं के खिलाफ गलत सोच रखने वाला व्यक्ति गणतंत्र दिवस समारोह का अतिथि कैसे हो सकता है और कुछ ट्रोलर्स ने ट्रम्प को टैग करते हुए यह कहना शुरू कर दिया कि मुझे अमेरिकी वीसा न दिया जाए, क्योंकि मैं उनके बारे में दुष्प्रचार कर रही हूं। जबकि ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो अतिथि हैं न कि ट्रम्प। आईटी ट्रोलर्स अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का कारण हैं।’

रोहिणी के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए रितुराज पुरोहित नामक यूजर ने करन थापर का प्रकाशित लेख पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि के चुनाव पर सवाल उठाये थे। अपने लेख में थापर ने जायर बोलसोनारो के उन बयानों का जिक्र किया है, जो महिलाओं के प्रति उनकी सोच को दर्शाता है। यह लेख बिजनेस स्टैंडर्ड में पिछले साल प्रकाशित हुआ था।

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जानिए, क्यों ट्विटर पर राहुल कंवल और दैनिक भास्कर की हो रही आलोचना

सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स एक्टिव हैं। वे आए दिन किसी न किसी को ढूंढकर निशाना बना रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर ‘इंडिया टुडे’ के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल और हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ हैं।

Last Modified:
Monday, 13 January, 2020
rahulkanwal

पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू होने और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के कैंपस में 5 जनवरी को हुई हिंसा के बाद से सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स एक्टिव हैं। वे आए दिन किसी न किसी को ढूंढकर निशाना बना रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर ‘इंडिया टुडे’ के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल और हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ हैं।

दरअसल, राहुल कंवल और दैनिक भास्कर को ट्रोल किए जाने की वजह बताने से पहले ये बता दें कि ‘इंडिया टुडे’ की स्पेशल इन्वे​स्टिगेटिव टीम (SIT) ने अपनी तफ्तीश JNU Tapes में संभावित हमलावरों की पहचान की है। इस स्टिंग ऑपरेशन में एबीवीपी कार्यकर्ता अक्षत अवस्थी ने हिंसा के लिए खुद लड़के जुटाने की बात स्वीकारी है, जिसके बाद से ही उसके पत्रकारों को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना भी बनाया जा रहा है। स्टिंग ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाने वाले जमशेद खान और नितिन जैन के बाद कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई और अब राहुल कंवल पर शाब्दिक हमले हो रहे हैं।

अब बात करते हैं राहुल कंवल को ट्रोल किए जाने के पीछे की वजह पर। दरअसल, यूं तो जेएनयू में 5 जनवरी को छात्रों के साथ हुई हिंसा के कुछ दिनों बाद से ही राहुल कंवल ट्विटर पर पर ट्रोल किए जा रहे हैं। लेकिन इस बार वे ‘वंदे मातरम’ को लेकर ट्रोल हो रहे हैं। ट्विटर पर उनका एक विडियो तेजी से वायरल किया जा रहा है, जिसमें वह न्यूज रूम में दो शख्स से बात करते दिखाई दे रहे हैं। इस विडियो में उन्होंने प्रशांत भूषण का भी नाम लिया है। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'सर आपने वंदे मातरम के नारे लगाए... वह एंटी नेशनल है।'

दरअसल, इस विडियो के सामने आते ही #RahulKanwalExposed और  #VandeMataram ट्रेंड कराया जा रहा है। इस ट्रेंड के साथ ही राहुल कंवल की आलोचना भी की जा रही है और उनकी पत्रकारिता पर कई लोग सवाल भी उठा रहे हैं।

 

 

 

 

वहीं, विडियो वायरल होने के बाद राहुल कंवल ने एक ट्वीट को रिट्वीट कर जवाब भी दिया, जिसमें दावा किया कि जिस विडियो क्लिप को ट्विटर पर जमकर शेयर किया जा रहा है, वह अधूरा है। हालांकि इसके बाद राहुल कंवल ने विडियो का पूरा हिस्सा जारी किया और लोगों को सच्चाई से अवगत कराया। बता दें कि यह विडियो फरवरी, 2016 यानी करीब चार साल पुराना है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि एसआईटी ने उन वकीलों को बेनकाब किया था, जिन्होंने कैमरे के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने कन्हैया कुमार को अदालत में पेश किए जाने के दौरान पीटा, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। वकीलों ने वंदे मातरम कहते हुए कन्हैया कुमार को पीटा। किसी को पीट देना और फिर वंदे मातरम गा देना राष्ट्र विरोधी है और यह मैं फिर कहूंगा। जय हिंद।

वहीं दूसरी तरफ, दैनिक भास्कर भी ट्रोलर्स के निशाने पर है। ट्रोलर्स बायकाट दैनिक भास्कर’ (#BoycottDainikBhaskar)  हैशटैग चलाकर इसे ट्रेंड कराने में कामयाब रहे। दरअसल 11 जनवरी यानी शनिवार को ग्वालियर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के समर्थन में जनजागरण मंच द्वारा एक रैली का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इसी रैली की कवरेज को दैनिक भास्कर ने अपने अखबार में जगह दी, जिसकी हेडिंग थी- ‘सीएए का समर्थन...500 मीटर लंबी रैली, 4 किलोमीटर पैदल चले लोग’  

बस ‘500 मीटर लंबी रैली’ वाली बात ट्रोलर्स को दिल पर लग गई और सवाल खड़े करते हुए अखबार को निशाने पर ले लिया। ट्रोलर्स का कहना है कि रैली 500 मीटर नहीं, बल्कि इससे बहुत ही ज्यादा बड़ी थी।  

 

 

 

 

 

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सोशल मीडिया पर घिरे वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता, यूं मानी गलती

‘द प्रिंट’ की इस खबर पर प्रोफेसर शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और न्यूज पोर्टल के पत्रकार के साथ अपनी बातचीत का ऑडियो भी जारी किया

Last Modified:
Monday, 06 January, 2020
Shekhar Gupta

‘द प्रिंट’ की एक खबर को लेकर वेबसाइट के एडिटर-इन-चीफ और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता मुश्किल में घिर गए हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने खबर में हुई गलती पर खेद प्रकट किया, लेकिन इसका कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है। प्रोफेसर वशी मंत शर्मा ने शेखर गुप्ता की माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

दरअसल, आईआईटी कानपुर के जिस प्रोफेसर ने फैज की नज्म ‘हम देखेंगे‘ गाने वाले छात्रों के खिलाफ पिछले महीने शिकायत दर्ज कराई थी, वह वशी शर्मा ही हैं। शेखर गुप्ता के न्यूजपोर्टल ‘द प्रिंट’ ने इस संबंध में हाल ही में एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसमें प्रोफेसर को ‘लव जिहाद’ और मुस्लिम विरोधी बताते हुए कहा गया था कि वह दलितों के उत्थान के भी पक्षधर नहीं हैं।

‘द प्रिंट’ की इस खबर पर प्रोफेसर शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और न्यूज पोर्टल के पत्रकार के साथ अपनी बातचीत का ऑडियो भी जारी किया। शर्मा ने अपने ट्वीट में शेखर गुप्ता, खबर लिखने वाले प्रशांत श्रीवास्तव और उन्नति शर्मा को टैग करते हुए लिखा, ‘मैं आपके रिपोर्टर के साथ बातचीत का अनकट ऑडियो पोस्ट कर रहा हूं, कृपया ध्यान से सुनें और जो लिखा गया है उससे तुलना करें।’ प्रोफेसर वशी मंत शर्मा ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये, जिसके बाद शेखर गुप्ता आगे आये और उन्होंने खबर में हुई गलती के लिए खेद प्रकट किया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा ‘आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर वशी मंत शर्मा के प्रोफाइल में हमने गलती से उन्हें भी ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया, जो दलित उत्थान की निंदा करता है। हम इस गलती पर खेद प्रकट करते हुए उनसे माफी मांगते हैं’।

हालांकि, शेखर गुप्ता की माफी का प्रोफेसर पर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। शेखर को जवाबी ट्वीट में वशी मंत शर्मा ने कहा, ‘शेखर गुप्ता मुझे आपकी माफी स्वीकार नहीं है। आपने तब माफी मांगी, जब मैंने आपके पत्रकार के साथ अपनी बातचीत सामने लाकर आपका झूठ उजागर किया।’

इसके साथ ही प्रोफेसर ने ‘द प्रिंट’ की खबर में अपने ऊपर लगे प्रत्येक आरोप की सफाई भी दी है। सोशल मीडिया पर ‘इस गलती’ के लिए द प्रिंट और शेखर गुप्ता को निशाना बनाया जा रहा है। पेशे से वकील अनिरुद्ध नामक यूजर ने तो प्रोफेसर को शेखर गुप्ता पर केस करने की सलाह दी है।   

‘द प्रिंट’ द्वारा भूल सुधार के बाद प्रकाशित की गई स्टोरी आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं:

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डिजिटल मैगजींस के सबस्क्राइबर्स का पैसा वापस करेगा Google, जानिए वजह

कंपनी की ओर से वर्ष 2012 में शुरू की थी यह सर्विस, बाद में इसे गूगल न्यूज में मिला दिया गया था

Last Modified:
Monday, 06 January, 2020
Google News

दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ‘गूगल’ के सबस्क्राइबर्स गूगल न्यूज ऐप पर मैगजींस का डिजिटल वर्जन नहीं पढ़ सकेंगे। दरअसल, ‘गूगल’ ने निर्णय लिया है कि वह अपने गूगल न्यूज ऐप पर मैंगजींस की पीडीएफ पढ़ने के लिए शुरू की गई ‘print replica’ सर्विस को बंद कर रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि गूगल ने महसूस किया है कि लोग इस सर्विस पर ‘Rolling Stone’ अथवा ‘Conde Nast Traveller’ जैसी मैगजींस के अलावा ऑनलाइन अखबार भी नहीं पढ़ रहे हैं, इसलिए इस सर्विस को बंद करने का निर्णय लिया गया है।   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में कंपनी की ओर से गूगल न्यूज यूजर्स को ई-मेल भेजकर बताया जा रहा है कि नया इश्यू अब नहीं आएगा। इसके साथ ही सबस्क्राइबर्स द्वारा किए गए भुगतान को वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

बता दें कि गूगल न्यूज के ‘print replica’ मैगजींस में प्रिंट एडिशंस का पीडीएफ वर्जन होता है, जिसे यूजर्स स्मार्टफोन अथवा कंप्यूटर पर पढ़ सकते हैं। अब यह सर्विस बंद होने के बाद यदि पाठक किसी मैगजीन का ई-वर्जन (इंटरनेट संस्करण) पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें उस मैगजीन की वेबसाइट पर जाना होगा। इस बारे में यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजकर बताया जाएगा कि गूगल न्यूज में print replica मैगजींस को बंद किया जा रहा है।

हालांकि, पाठकों द्वारा पूर्व में सबस्क्राइब किए गए मैगजींस के सभी इश्यू गूगल न्यूज एप पर एक्सेस किए जा सकते हैं। गूगल की ओर से कहा गया है कि लेटेस्ट आर्टिकल पढ़ने के लिए अब गूगल न्यूज में उस पब्लिकेशन को सर्च करना होगा अथवा उस पब्लिकेशन की वेबसाइट पर जाना होगा। बता दें कि गूगल ने ‘प्ले मैगजींस एप’ के द्वारा वर्ष 2012 में पाठकों को मैगजीन कंटेंट उपलब्ध कराना शुरू किया था। बाद में कंपनी ने इसका नाम बदलकर ‘प्ले न्यूजस्टैंड’ कर दिया और इसे ‘गूगल न्यूज’ में मिला दिया।

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ट्रोलर्स के निशाने पर आया दैनिक भास्कर, चलाया जा रहा ये अभियान

सोशल मीडिया पर दैनिक भास्कर पर पक्षपात और जातिवाद का आरोप लगाते हुए उसके बहिष्कार की अपील की जा रही है

Last Modified:
Friday, 03 January, 2020
dainik bhaskar

दैनिक भास्कर के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की वजह है वह होर्डिंग जो अखबार ने अपने प्रचार के लिए उत्तर प्रदेश में लगवाये हैं। सोशल मीडिया पर दैनिक भास्कर पर पक्षपात और जातिवाद का आरोप लगाते हुए उसके बहिष्कार की अपील की जा रही है।

दरअसल, भास्कर समूह ने अपनी न्यूज़ वेबसाइट ‘दैनिक भास्कर डॉट कॉम’ के प्रचार के लिए जातिवादी राजनीति पर चोट करने वाले होर्डिंग लगवाये हैं। मीडिया हाउस को उम्मीद होगी कि इस तरह का प्रचार लोगों को आकर्षित करेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। भास्कर का यह दांव इसलिए उल्टा पड़ गया क्योंकि उसके प्रचार में एक तरह से अखिलेश यादव और मायावती पर कटाक्ष किया गया है।

जायज है, उनके समर्थकों के लिए यह हजम करना मुश्किल है। लिहाजा, सोशल मीडिया पर भास्कर समूह के बहिष्कार का अभियान चलाया जा रहा है। तेजपाल यादव नामक यूजर ने ‘गंदी पत्रकारिता’ लिखकर भास्कर के होर्डिंग ट्वीट किये हैं, साथ ही मीडिया समूह के बहिष्कार की मांग भी की गई है। इस ट्वीट को तेजी से रीट्वीट किया जा रहा है और कमेन्ट करने वालों में से अधिकांश ने भास्कर पर निशाना साधा है।

 

सोशल मीडिया पर भास्कर के जो होर्डिंग शेयर किये गए हैं उनमें लिखा है ‘ना माया का जाल, ना अखिलेश का क्लेश। अब सिर्फ सच चलेगा, यूपी में खबरें न दबेंगी, न रुकेंगी’। इसी तरह दूसरा होर्डिंग कहता है ‘ना दलितों की रानी, न यादवों की कहानी। अब सिर्फ सच चलेगा, यूपी में खबरें न दबेंगी, न रुकेंगी’।

प्रचार के इस अंदाज के पीछे भास्कर की मंशा भले ही जातिवादी राजनीति पर चोट करना हो, लेकिन उस पर खुद जातिवादी होने के आरोप लगाये जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भास्कर के बहिष्कार का अभियान चल रहा है। हालांकि, कुछ लोगों ने मीडिया समूह का समर्थन भी किया है, लेकिन विरोध करने वालों की संख्या ज्यादा है।

कपिल कुमार नाम के एक यूजर ने लिखा है ‘#BoycottDainikBhaskar वैसे तो इसको गिने चुने लोग ही पढ़ते हैं, पर फिर भी इसने इतनी तो कोशिश करी कि खुलकर बता दिया, हम #बहुजन विरोधी व #सरकार की नुमाइंदगी करते हैं। ये एक नहीं है, ऐसे बहुत हैं। दुर्भाग्यपूर्ण! सत्ता का शोर सर चढ़ कर बोलेगा ऐसे? पत्रकारिता और चाटुकारिता में फर्क है।’    

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अजीत अंजुम ने ट्रोलर्स को सिखाया सबक, कई पत्रकारों ने दिया साथ

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और रोहणी सिंह का ट्वीट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ अश्लील टिप्पणी करने वालों को निशाना बनाया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 02 January, 2020
Last Modified:
Thursday, 02 January, 2020
ajit anjum

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और रोहणी सिंह का ट्वीट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ अश्लील टिप्पणी करने वालों को निशाना बनाया है।

दरअसल, स्वरा पर उनके एक ट्वीट को लेकर लगातार हमले हो रहे हैं। ट्रोलर्स उनके लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हें सभ्य विरोध की श्रेणी में कतई शामिल नहीं किया जा सकता। अंजुम और रोहणी की तरह कुछ अन्य पत्रकारों ने भी स्वरा भास्कर का समर्थन करते हुए विरोधियों को आड़े हाथों लिया है। यहां तक कि स्वरा की विचारधारा से इत्तेफाक न रखने वाले भी एक महिला के खिलाफ इस्तेमाल हुए शब्दों को लेकर उद्देलित हैं।

दरअसल, अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने 2019 की विदाई और नए साल के आगमन को लेकर एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने अपनी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है ‘2019 की मुख्य अभिव्यक्ति!! अलविदा 2019- मैं तुम्हें बहुत ज्यादा याद नहीं करूंगी!!! हैलो 2020! ऐसा***मत करना, जिसके चलते मेरी स्थिति ऐसी हो जाए’!! इस ट्वीट के माध्यम से स्वरा जो भी संदेश देना चाह रही हों, लेकिन ट्रोलर्स को यह बिलकुल भी पसंद नहीं आया।

स्वरा पहले से ही नागरिकता संशोधन कानून की खिलाफत करके विरोधियों के निशाने पर हैं और इस ट्वीट से विरोधियों को उन पर हमला तेज करने का मौके मिल गया। ‘सोनू हिंदू’ नामक यूजर ने स्वरा के ट्वीट का आपत्तिजनक जवाब दिया। इसी तरह ‘कुलदीप’, ‘तेजू जोशी’ और कई अन्य यूजर्स ने मर्यादित विरोध की परिभाषा की धज्जियां उड़ाते हुए अभिनेत्री के लिए अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया।

‘तेजू जोशी’ ने स्वरा की एक तस्वीर शेयर करते हुए उस पर जो कुछ लिखा है, उसे यहां दोहराया नहीं जा सकता। एक महिला के खिलाफ चलाये जा रहे इस अभियान की भनक जब वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और रोहणी सिंह को लगी, तो दोनों खुद को रोक नहीं सके और ट्रोलर्स को जमकर सबक सिखाया।

अंजुम ने लिखा ‘आप @ReallySwara के इस ट्वीट के सारे अश्लील कॉमेंट पढ़कर उनके बॉयोडाटा देख लीजिए। एक ही 'संस्कारी कुल' के हैं सब। ये सब मानसिक व्यभिचारी स्वयंभू 'देशभक्त' हैं। पता नहीं अपने आसपास की लड़कियों को ये लोग किस नज़र से देखते होंगे। धिक्कार है ऐसे लोगों पर’।

इसी तरह रोहणी सिंह स्वरा के ट्वीट पर लिखा,‘इस ट्वीट के जवाब देखिए। मुझे आश्चर्य है कि क्या इस तरह की यौन बलात्कार की कल्पनाओं को पोस्ट करने वाले पुरुषों के परिवार जानते हैं कि उनके बीच संभावित बलात्कारी हैं। मुझे लगता है कि समय आ गया है कि ऐसे लोगों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया जाना चाहिए’। 

‘दन्यूज़मिनट’ की एडिटर-इन-चीफ धन्या राजेंद्रन, पत्रकार प्रशांत कुमार सहित कई अन्य यूजर्स ने भी स्वरा भास्कर को निशाना बनाने के लिए ट्रोलर्स को आड़े हाथों लिया है।  

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एडिटर्स गिल्ड के खिलाफ कई वरिष्ठ पत्रकारों ने खोला ‘मोर्चा’, जानें वजह

संभवत: यह पहला मौका है जब एक साथ कई पत्रकारों ने खुलकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की कार्यशैली पर सवाल उठाये हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 30 December, 2019
Last Modified:
Monday, 30 December, 2019
Editor Guild

वरिष्ठ पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को सोशल मीडिया पर निशाना बनाने वाले भाजपा नेता के खिलाफ ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ आगे आया है। गिल्ड ने भाजपा की आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के विवादस्पद ट्वीट पोल पर कड़ा एतराज जताते हुए उनसे माफी मांगने और तुरंत अपना ट्वीट डिलीट करने को कहा है।

एडिटर्स गिल्ड के इस कदम पर जहां राजदीप ने खुशी जाहिर की है, वहीं कुछ अन्य पत्रकारों ने गिल्ड पर पक्षपात का आरोप लगाया है। नाराज पत्रकारों का कहना है कि एडिटर्स गिल्ड को सभी मामलों में ऐसी सक्रियता दिखानी चाहिए। संभवत: यह पहला मौका है जब एक साथ कई पत्रकारों ने खुलकर एडिटर्स गिल्ड की कार्यशैली पर सवाल उठाये हैं।

वहीं, ‘जी न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने एडिटर्स गिल्ड को पिछले साल लिखे गए पत्र की याद दिलाते हुए आड़े हाथों लिया है। उन्होंने लिखा है ‘प्रिय एडिटर्स गिल्ड, ट्विटर पोल को लेकर आपका त्वरित बयान केवल आपके ढोंग (hypocrisy) में मेरे विश्वास को मजबूत करता है। आपको दिनांक 4.12.18 को लिखे पत्र के जवाब का मुझे अभी भी इंतजार है’। चौधरी ने ट्वीट के साथ पत्र की कॉपी भी पोस्ट की है। अपने इस पत्र में चौधरी ने कांग्रेस द्वारा बेवजह ‘जी न्यूज’ को निशाना बनाये जाने का जिक्र किया था।

यह भी पढ़ें: राजदीप सरदेसाई के बारे में नेता ने कही ऐसी बात, भड़क उठे पत्रकार

‘न्यूज18’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर अमिश देवगन ने भी एडिटर्स गिल्ड की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है ‘गिल्ड ने अच्छा काम किया, लेकिन केवल चुनिंदा पत्रकारों के मामले में ही ऐसा क्यों किया जाता है? गिल्ड उस वक्त क्यों खामोश रहा जब कांग्रेस प्रवक्ता ने ऑन एयर मुझसे अपशब्द कहे। एडिटर्स गिल्ड को सभी के साथ एक समान पेश आना चाहिए’। गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने लाइव टीवी डिबेट के दौरान अमिश को दलाल तक कह डाला था।

अमिश देवगन के ट्वीट पर कमेंट करते हुए ‘एबीपी न्यूज’ के वरिष्ठ पत्रकार विकास भदौरिया ने भी गिल्ड पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि गिल्ड अपने पदाधिकारियों को छोड़कर अन्य पत्रकारों के मामले में खामोश रहता है। मालूम हो कि राजदीप सरदेसाई भी एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष चुके हैं। कई अन्य पत्रकारों ने भी गिल्ड के इस भेदभावपूर्ण रवैये पर एतराज जताया है। उनका कहना है कि अगस्त में जब ‘एबीपी गंगा’ के रिपोर्टर नीतिश कुमार पाण्डेय के साथ प्रियंका गांधी के सहयोगी ने दुर्व्यवहार किया था, तब गिल्ड ने कोई बयान जारी करके नाराजगी क्यों नहीं जताई? अब एडिटर्स गिल्ड इन आरोपों पर क्या जवाब देता है ये देखने वाली बात होगी।

गौरतलब है कि राजदीप सरदेसाई ने डिटेंशन सेंटर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावे पर सवाल उठाये थे। हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी को भी कठघरे में खड़ा किया, लेकिन मोदी के दावे पर सवाल उठाना अधिकांश लोगों को पसंद नहीं आया। राजदीप ने अपने ‘माय टेक’ शो में सीएए और एनआरसी को लेकर चल रही राजनीति पर बात करते हुए कहा था कि इस सियासत में सत्य पराजित हुआ है। इसके अलावा उन्होंने सीएए को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के संबंध में भी एक ट्वीट किया था। इसके बाद भाजपा की नेशनल इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी टीम के इंचार्ज अमित मालवीय ने राजदीप के खिलाफ ऑनलाइन पोल शुरू कर दिया था। इस पोल में उन्होंने पूछा कि क्या राजदीप सरदेसाई को आईएसआईएस का पीआर संभालना चाहिए?

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राजदीप सरदेसाई के बारे में नेता ने कही ऐसी बात, भड़क उठे पत्रकार

किसी विषय पर दो लोगों के विचार अलग हो सकते हैं, यह स्वाभाविक है, लेकिन जब बात पत्रकारों की आती है तो यह ‘स्वाभाविक’ एकदम से ‘अस्वाभाविक’ हो जाता है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 27 December, 2019
Last Modified:
Friday, 27 December, 2019
Rajdeep sardesai

किसी एक विषय पर दो लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं, यह स्वाभाविक है। लेकिन जब बात पत्रकारों की आती है तो यह ‘स्वाभाविक’ एकदम से ‘अस्वाभाविक’ हो जाता है। लोग यह तक भूल जाते हैं कि पत्रकार भी उनकी तरह इंसान हैं। नागरिकता संशोधन कानून पर फिलहाल कुछ ऐसा ही माहौल है। वरिष्ठ पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। वजह महज इतनी है कि उन्होंने डिटेंशन सेंटर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावे पर सवाल उठाये। हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी को भी कठघरे में खड़ा किया, लेकिन मोदी के दावे पर सवाल उठाना अधिकांश लोगों को पसंद नहीं आया।

राजदीप ने अपने ‘माय टेक’ शो में सीएए और एनआरसी को लेकर चल रही राजनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि इस सियासत में सत्य पराजित हुआ है। इसके अलावा उन्होंने सीएए को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के संबंध में भी एक ट्वीट किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा ‘सीएए विरोधी हर रैली में मैंने तिरंगा और महात्मा गांधी की फोटो देखी, जबकि कानून के समर्थकों की रैली में तिरंगे के साथ-साथ भगवा झंडा भी दिखाई दिया। इस बारे में सोचें।’

राजदीप ने अपने विचार व्यक्त किये, लेकिन यह कुछ सोशल मीडिया यूजर्स को नागवार गुजरा। भाजपा की नेशनल इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी टीम के इंचार्ज अमित मालवीय ने तो राजदीप के खिलाफ ऑनलाइन पोल ही शुरू कर डाला। इस पोल में उन्होंने पूछा कि क्या राजदीप सरदेसाई को आईएसआईएस का पीआर संभालना चाहिए? हालांकि, राजदीप ने मालवीय को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने जवाबी ट्वीट में कहा ‘मेरे मित्र, इस बेशर्मी भरे भड़काऊ अभियान को आगे बढ़ाएं। मेरा नया साल का संकल्प शांत रहना है! आपका नववर्ष शांतिपूर्ण और खुशहाल हो।’

वहीं, कई पत्रकारों ने अमित मालवीय को अपने इस असभ्य पोल के लिए आड़े हाथ लिया। ‘न्यूज24’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर मानक गुप्ता ने मालवीय से पूछा,‘राजदीप ने कब आईएसआई या किसी अन्य आतंकी संगठन का समर्थन किया और जब नहीं किया तो फिर ऐसे पोल का क्या औचित्य’?

वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने अपने ट्वीट में राजदीप के साथ ही एडिटर गिल्ड को टैग करते हुए लिखा ‘मालवीय को इसके लिए कोर्ट में घसीटा जाना चाहिए।’ इसी तरह ‘न्यूज24’ की एसोसिएट एडिटर साक्षी जोशी ने स्वाति के ट्वीट के जवाब में लिखा ‘और ऐसा तब हुआ जब उन्होंने असम के डिटेंशन सेंटर पर एक शो किया और लगातार भाजपा प्रवक्ता से पूछा कि पीएम झूठ क्यों बोलते हैं’!

‘द हिंदू’ की नेशनल एडिटर सुहासनी हैदर और ‘एनडीवी इंडिया’ के वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने भी राजदीप को निशाना बनाने वालों को निशाना बनाया। उमाशंकर ने पूछा है, ‘अमित मालवीय की मानसिक हालत दयनीय है। उन्हें मानसिक अस्पताल में ले जाने की जरूरत है। सवाल है कि इलाज कहां और कब संभव है?               

इस बारे में लोगों का मानना है कि पत्रकारों को भी यह अधिकार है कि वह सरकार के फैसले या किसी अन्य विषय पर अपने विचारों को व्यक्त कर सकते हैं। यदि उनकी सोच या विचार आपकी सोच के विपरीत हैं, तो इसका यह मतलब नहीं कि आप उन्हें जिस भाषा में चाहें जवाब दें। आपके पास भी विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका सभ्य और शालीन होना चाहिए।

'माय टेक' में राजदीप सरदेसाई ने सीएए और एनआरसी को लेकर क्या कहा, वह आप यहां इस विडियो में देख सकते हैं-

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