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संविधान हत्या दिवस पर राजनीति, भारत की आत्मा पर आघात: डॉ. सुधांशु त्रिवेदी
इस निर्णय पर राजनीति भी बहुत हो रही है। इसी मसले पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने एक टीवी डिबेट में अपने विचार व्यक्त किए।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
25 जून 1975 को आजाद भारत के इतिहास का सबसे काला दिन कहा जाता है। इसी दिन संविधान को ताक पर रखकर आपातकाल मतलब इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई थी। अब सरकार इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाएगी। इसी बीच इस निर्णय पर राजनीति भी बहुत हो रही है।
इसी मसले पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने एक टीवी डिबेट में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, पीएम मोदी ने न सिर्फ संविधान हत्या दिवस बल्कि अनेक अन्य स्मरणीय दिवसों को राष्ट्रीय दिवस घोषित कर मान सम्मान दिया है।
गुरु गोविंद साहब के साहिबज़ादों का बलिदान भारतीय इतिहास में रोमांचित कर देने वाला बलिदान है। उनके लिए कभी एक शब्द न निकला और अगर हम सम्मान दे तो वो राजनीति है? नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जिनकी वजह से देश को आज़ादी मिली उनकी प्रतिमा दिल्ली में लगाना राजनीति है? 26 नवम्बर को संविधान दिवस करना राजनीति है?
विभाजन विभीषिका दिवस करना राजनीति है? अगर वो इन पर सवाल करता है तो भारत की आत्मा पर आघात करता है। चाचा नेहरू का दिवस मनाना बाल दिवस है उनका बच्चों के साथ संबंध है मगर गुरु गोविंद साहब के साहिबज़ादों का बाल दिवस से सम्बंध नहीं है, जो योग दिवस हम लाये थे उसको 170 देशों ने समर्थन किया।
आपको बता दें कि 21 महीनों तक विपक्ष के सभी नेता या तो जेल में बंद कर दिए गए थे या फिर वे फरार थे। इंदिरा गांधी इमरजेंसी लगाकर बहुत ज्यादा ताकतवर हो चुकी थीं। संसद, अदालत, मीडिया किसी में उनके खिलाफ बोलने की ताकत नहीं रह गई थी।
PM श्री @narendramodi जी ने न सिर्फ़ संविधान हत्या दिवस बल्कि अनेक अन्य स्मरणीय दिवसों को राष्ट्रीय दिवस घोषित कर मान सम्मान दिया है। गुरु गोविंद साहब के साहिबज़ादों का बलिदान भारतीय इतिहास में रोमांचित कर देने वाला बलिदान है। उनके लिए कभी एक शब्द न निकला और अगर हम सम्मान दे तो… pic.twitter.com/Tp2jrk4PvR
— Dr. Sudhanshu Trivedi (@SudhanshuTrived) July 15, 2024
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