ये चार पत्रकार भी हुए वॉट्सऐप जासूसी कांड के ‘शिकार’

‘वॉट्सऐप’ द्वारा किए गए इस खुलासे के बाद यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 01 November, 2019
Last Modified:
Friday, 01 November, 2019
whatsapp

लोकसभा चुनावों के दौरान पत्रकारों की जासूसी को लेकर किए गए ‘वॉट्सऐप’ (Whatsapp) के खुलासे के बाद यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है। दरअसल, वॉट्सऐप ने खुलासा किया है कि 2019 के आम चुनावों के दौरान भारत में कई शिक्षाविदों, वकीलों, पत्रकारों और दलित कार्यकर्ताओं की जासूसी के लिए ‘पेगासस’ (PEGASUS) नामक इजरायली स्पाईवेयर का इस्तेमाल किया गया था।

टोरंटों यूनिवर्सिटी की साइबर सिक्योरिटी लैब ‘सिटीजन लैब’ ने हैकिंग के इस मामले की जांच में वॉट्सऐप की मदद की थी। हालांकि, वॉट्सऐप ने उन लोगों के नाम और सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया था, जिनके फोन की निगरानी की गई, लेकिन अब धीरे-धीरे यह नाम सामने आने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जो लोग इस जासूसी का शिकार हुए, उनमें चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय समेत चार पत्रकार भी शामिल थे।  

यह भी पढ़ें: वॉट्सऐप का बड़ा खुलासा, लोकसभा चुनाव में इस तरह हुई पत्रकारों की जासूसी

समाचार4मीडिया डॉट कॉम से लोकसभा के पूर्व सांसद और वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय का कहना है कि उन्हें 28 को पहले एक विदेशी लगने वाले नंबर से फोन आया, पर संदिग्ध नंबर लगने की वजह से उन्होंने उसे नहीं उठाया। फिर उसके बाद उन्हें उसी नंबर से वॉट्सऐप मेसेज मिला था, जिसमें संभावित हैक के बारे में बताया गया था। संतोष भारतीय के अनुसार, सिटीजन लैब के सदस्य द्वारा भेजे गए संदेश को उन्होंने नजरअंदाज कर दिया था। उस समय उन्हें लगा था कि हैकर ने ये संदेश भेजा है। उन्हें ये मेसेज मिले थे

My name is John Scott-Railton, I am the Senior Researcher at the Citizen Lab at the University of Toronto in Canada. The Citizen Lab works on tracking internet threats against civil society.

 I'm a little bit familiar with who you are, based on our research into an ongoing case, and this message concerns a specific cyber risk that we believe that you faced earlier this year

 I encourage you to use google figure out more about me and the Citizen Lab if you are suspicious. Our website is www.citizenlab.ca and my official e-mail if you would like to verify that I am real is jsr@citizenlab.ca

 We should set up a time to talk. Again I apologize for the strangeness of such a contact, and understand that it may make you suspicious of me. Unfortunately there is no better way to do this kind of thing. I am more than happy to help you verify my identity before we talk more, if you prefer.

संतोष भारतीय के अनुसार, ‘मैं कोई बड़ा पत्रकार नहीं हूं। फिर मुझे क्यों निशाना बनाया गया, यह मेरी समझ से परे है। मुझे लगता है कि शायद निष्पक्ष पत्रकारिता करने वालों को निशाना बनाया गया है।’

संतोष भारतीय की जासूसी की बात जब ट्विटर पर आई तो कई लोगों ने उन्हें एंटी नेशनल कह ट्रोल करना शुरू कर दिया, इस पर संतोष भारतीय कहते हैं कि अगर मैं एंटी नेशनल हूं तो फिर अजीत डोभाल, राजनाथ सिंह या फिर अमित शाह भी एंटी नेशनल है। मैंने भी इन्हीं सबकी तरह देश के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए काम किया है। जेपी के साथ दूसरी आजादी की लड़ाई लड़ी है। क्या आधार कार्ड, कश्मीर और लोकसभा चुनावों में मेरा द्वारा पत्रकारिता करते हुए सरकार पर सवाल उठाना एंटी नेशनल एक्टिविटी है? उन्होंने कहा कि मुझसे सरकार को क्या डर है, मैं तो अदना पत्रकार हूं।

संतोष भारतीय के अलावा जासूसी के शिकार हुए लोगों में बीबीसी के पूर्व पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी का नाम भी सामने आ रहा है। शुभ्रांशु चौधरी इन दिनों छत्तीसगढ़ में बतौर एक्टिविस्ट काम कर रहे हैं। ‘चौथी दुनिया’ की खबर के मुताबिक, सिटिजन लैब ने उन्हें भी इस जासूसी के बारे में जानकारी दी थी। शुभ्रांशु ने बताया कि चूंकि वे बस्तर में शांति बहाली की दिशा में जुटे हुए हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया। 

बताया जा रहा है कि ‘जी मीडिया’ के अंग्रेजी न्यूज चैनल विऑन (WION) में काम कर रहे पत्रकार सिद्धांत सिब्बल भी पेगासस ’नामक इस स्पाईवेयर का शिकार हुए हैं। वहीं, इस स्पाईवेयर का शिकार हुए लोगों में स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा का नाम भी सामने आ रहा है। राजीव शर्मा के अनुसार, इस बारे में सिटीजन लैब की ओर से उन्हें भी कुछ समय पूर्व फोन आया था। फोन करने वाले ने मार्च से मई के बीच उनका फोन सर्विलांस पर होने की जानकारी दी थी। राजीव शर्मा का यह भी कहना है कि सिटीजन लैब की ओर से उन्हें फोन बदलने का सुझाव भी दिया गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

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फेसबुक ने राजीव अरोड़ा पर जताया भरोसा, दी ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

राजीव अरोड़ा 'फेसबुक इंडिया' की कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस डायरेक्टर बिपाशा चक्रवर्ती को रिपोर्ट करेंगे

Last Modified:
Thursday, 08 April, 2021
Rajiv Arora

राजीव अरोड़ा ने सोशल नेटवर्किंग साइट ‘फेसबुक इंडिया’ के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। यहां पर उन्हें इंटरनल कम्युनिकेशंस की कमान दी गई है। वह 'फेसबुक इंडिया' की कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस डायरेक्टर बिपाशा चक्रवर्ती को रिपोर्ट करेंगे।

फेसबुक इंडिया से पहले राजीव अरोड़ा ‘ओयो’ (OYO) के ग्लोबल इंटरनल कम्युनिकेशंस डिपार्टमेंट की कमान संभाल रहे थे। नई पारी के बारे में राजीव अरोड़ा ने अपने लिंक्डइन प्रोफाइल पर जानकारी शेयर की है। उन्होंने लिखा है, ‘ओयो के साथ दो साल से ज्यादा लंबी यादगार व बेहतरीन पारी के बाद मैं हाल ही में फेसबुक इंडिया के साथ जुड़ गया हूं, जहां मुझे इंटरनल कम्युनिकेशंस की कमान सौंपी गई है।’

राजीव अरोड़ा को मीडिया इंडस्ट्री का काफी अनुभव है। उन्होंने ‘केपीएमजी’ (KPMG) के साथ कॉरपोरेट की दुनिया में कदम रखा था। वह अब तक ‘जनरल इलेक्ट्रिक्स’ (General Electrics), ‘एमएसडी’ (MSD), ‘एरिसेंट’ (Aricent) और ‘ओयो’ (OYO) की कम्युनिकेशन टीम में अपना योगदान दे चुके हैं।

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अब यूं होगा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे न्यूज चैनल्स को फायदा!

पंजाब सरकार न्यूज वेब चैनल्स को सूची में सम्मिलित करने के लिए ‘द पंजाब न्यूज वेब चैनल पॉलिसी 2021’ लेकर आयी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 April, 2021
Last Modified:
Wednesday, 07 April, 2021
newschannels5464

पंजाब सरकार न्यूज वेब चैनल्स को सूची में सम्मिलित करने के लिए ‘द पंजाब न्यूज वेब चैनल पॉलिसी 2021’ (The Punjab News Web Channel Policy 2021) लेकर आयी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि यह समय की मांग है कि पंजाब सरकार की नीतियों (Policies of the Punjab Government) के प्रचार के लिए आज के युग के इन मंचों का सही तरीके से प्रयोग किया जाए।

प्रवक्ता ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक और यूट्यूब पर चल रहे न्यूज चैनल्स को इस नीति के अंतर्गत कवर किया जाएगा।

इन शर्तो पर मिलेंगे सरकारी विज्ञापन

नीति की अन्य शर्तों और नियमों के अलावा पंजाब आधारितन्यूज चैनल (News Channel) जिनमें मुख्य तौर पर 70 प्रतिशत खबरें पंजाब से संबंधित होती हैं, को सूची में सम्मिलित करने पर विचार किया जाएगा। इस नीति के अंतर्गत सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा सूचीबद्ध किए जाने वाले चैनल सिर्फ राजनैतिक इंटरव्यू या खबरों, डेली न्यूज बुलेटिन, बहस या चर्चा विशेषकर संपादकीय इंटरव्यू और पंजाब संबंधी खबरों के दौरान ही सरकारी विज्ञापन प्रदर्शित करेंगे।

बता दें कि पंजाब सरकार के पास अखबार, सैटेलाइट टीवी चैनल्स, रेडियो चैनल्स और वेबसाइट्स के लिए एक विज्ञापन नीति पहले से ही मौजूद है। यह नई नीति मौजूदा प्रचलन और फेसबुक और यूट्यूब चैनल्स की व्यापक उपलब्धता के मद्देनजर लाई गई है। इससे राज्य सरकार को और ज्यादा लोगों तक कल्याण योजनाओं संबंधी जागरूकता फैलाने में और मदद मिलेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, नीति संबंधी विस्तृत नियम और शर्तें सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब से प्राप्त की जा सकतीं है या विभाग की वेबसाइट से भी डाउनलोड की जा सकतीं है।

गौरतलब है कि वर्तमान में पंजाब में यू-ट्यूब और वेब चैनल्स की भरमार है, जो इस वक्त पंजाब की रोजाना खबरों को कवर कर रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान पंजाब सरकार इन वेब चैनल्स के माध्यम से अपनी उपलब्धियों का प्रचार प्रसार कर सकती है।

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सोशल मीडिया पर वापसी की तैयारी में ट्रंप, शुरू कर सकते हैं खुद का प्लेटफॉर्म

ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर बैन किए जाने के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब सोशल मीडिया पर वापसी की तैयारी में हैं

Last Modified:
Monday, 22 March, 2021
Donald Trump

ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर बैन किए जाने के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब सोशल मीडिया पर वापसी की तैयारी में हैं। खास बात ये है कि इस बार वे खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप अगले तीन महीनों में सोशल मीडिया पर दिखने लगेंगे। इसकी जानकारी ट्रंप के एक पुराने वरिष्ठ सलाहकार और प्रवक्ता जैसन मिलर ने दी है। मिलर ने फॉक्स न्यूज से बातचीत करते हुए कहा है कि ट्रंप दो से तीन महीनों में सोशल मीडिया पर वापसी कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ये मीडिया प्लेटफॉर्म खुद ट्रंप का अपना होगा। मिलर के मुताबिक, ट्रंप का ये अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आने वाले दिनों में गेम चेंजर साबित हो सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि इस प्लेफॉर्म पर करोड़ों लोग जुड़ सकते हैं।

बता दें कि राजधानी वॉशिंगटन में छह जनवरी को हुए हमले के बाद ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया साइट्स ने ट्रंप को बैन कर दिया था। सोशल मीडिया पर ट्रंप के बैन होने की शुरुआत गूगल और एपल ने अपने एप स्टोर से की थी, फिर फेसबुक और ट्विटर के बाद यू-ट्यूब ने भी डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपलोड किए गए नए वीडियो कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया था। साथ ही डोनाल्ड ट्रंप के चैनल को सेवा शर्तों के उल्लंघन के आरोप में सस्पेंड किया गया था।

स्नैपचैट ने अपने बयान में कहा था कि हमने लोगों की हित का ख्याल रखते हुए अपने प्लेटफॉर्म पर डोनाल्ड ट्रंप को हमेशा के लिए बैन कर दिया है। उनके अकाउंट से लगातार गलत सूचनाएं, भड़काऊ भाषण जैसे पोस्ट होते थे। 

वहीं यू-ट्यूब ने अपने एक बयान में कहा था कि ट्रंप ने एक वीडियो अपलोड किया था जो कि हमारी नीतियों का उल्लंघन कर रहा था जिसके बाद उनके चैनल पर ऑटोमेटिक स्ट्राइक आया। पहला स्ट्राइक कम-से-कम सात दिनों के लिए होता है। ऐसे में अगले सात दिनों तक ट्रंप अपने चैनल पर कोई वीडियो अपलोड नहीं कर पाएंगे। इसके बाद कंपनी ने पूरी तरह से ट्रंप का अकाउंट निष्क्रिय कर दिया था।

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जानें, गूगल-फेसबुक का ऐड रेवेन्यू साझा करने के मामले में क्या बोले सूचना प्रसारण मंत्री

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में सूचना प्रसारण मंत्री ने यह भी कहा कि इस बारे में सरकार ने आईएनएस की किसी मांग का समर्थन नहीं किया है।

Last Modified:
Monday, 22 March, 2021
Prakash Javadekar

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि गूगल और फेसबुक जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा न्यूजपेपर पब्लिशर्स के साथ अपना ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू साझा करने के बारे में सरकार द्वारा कानून बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

लोकसभा में यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार इस दिशा में कोई कानून बनाने जा रही है, प्रकाश जावड़ेकर ने यह बात कही। इसके साथ ही एक अन्य सवाल के जवाब में जावड़ेकर ने यह भी कहा कि सरकार ने ‘इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी’ (INS) द्वारा गूगल, फेसबुक आदि जैसी कंपनियों की विज्ञापन से होने वाली कमाई को साझा करने की उनकी मांग का समर्थन नहीं किया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार को वैश्विक नियम-कायदों के अनुसार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित भारतीय खबरों के लिए गूगल जैसी कंपनियों से राजस्व प्राप्त होता है? जावड़ेकर ने कहा कि सरकार पब्लिशिंग इंडस्ट्री से लागू दरों के हिसाब से जीएसटी हासिल करती है, और इस संबंध में कानून बनाने को लेकर सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

गौरतलब है कि लंबी लड़ाई के बाद ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और मीडिया कंपनी ‘न्यूज कॉर्प’ के बीच सहमति बन गई है और इसके तहत फेसबुक ने अब खबरों के भुगतान की बात कही है।

दरअसल, कुछ माह पहले ऑस्ट्रेलिया की संसद ने एक कानून पारित किया था, जिसके तहत डिजिटल कंपनियों को खबरें दिखाने के लिए भुगतान करना जरूरी कर दिया गया है। फरवरी में जावड़ेकर ने कहा था कि भारतीय सरकार इस बारे में ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर आदि मार्केट्स के घटनाक्रम पर निगरानी रख रही है।

पूर्व में आईएनएस प्रेजिडेंट एल. आदिमूलम ने इस बारे में गूगल इंडिया के कंट्री मैनेजर संजय गुप्ता को पत्र लिखकर गूगल को विज्ञापन से होने वाली कमाई में पब्लिशर्स की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत तक करने की मांग की थी।

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Google ने 2020 में 3.1 अरब विज्ञापनों को पर लगाई रोक, जानें वजह

गूगल की यह रिपोर्ट बुरे विज्ञापनों को रोकने के पीछे के प्रयासों पर प्रकाश डालती है और दिखाती है कि गूगल अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स को कैसे पारदर्शी बना रहा है।

Last Modified:
Thursday, 18 March, 2021
Google

टेक कंपनी गूगल (Google) ने वर्ष 2020 की अपनी वार्षिक विज्ञापन सुरक्षा रिपोर्ट यानी कि ऐड सेफ्टी रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट बुरे विज्ञापनों को रोकने के पीछे के प्रयासों पर प्रकाश डालती है और दिखाती है कि गूगल अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स को कैसे पारदर्शी बना रहा है। दरअसल, गूगल बुरे विज्ञापनों से परेशान हो चुका है, इसीलिए 2020 में कंपनी ने हर घंटे 5700 से ज्‍यादा विज्ञापनों पर रोक ही नहीं लगाई, बल्कि उन्‍हें हटा दिया है।

गूगल ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट के जरिये यह जानकारी दी कि उसने पिछले साल दुनियाभर में कोरोना वायरस से जुड़े 9.9 करोड़ विज्ञापनों समेत कुल 3.1 अरब बुरे विज्ञापनों को अपने प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया है, जो यूजर्स को गलत जानकारी दे रहे थे। साथ ही टेक कंपनी ने 6.4 अरब अतिरिक्‍त विज्ञापनों पर पाबंदी भी लगाई है। बता दें कि ऐसा पहली बार हुआ है जब गूगल ने उन विज्ञापनों की जानकारी भी साझा की है, जिन पर पाबंदी लगाई गई है।

गूगल ने दुनियाभर में स्‍थानीय कानूनों व नियमों के आधार पर रोक लगाई है। अब इसके प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ वही विज्ञापन दिखेंगे, जिनको कंपनी ने सभी मानकों के आधार पर मंजूरी दी है। कंपनी ने अपनी सालाना ऐड सेफ्टी रिपोर्ट 2020 में बताया है कि नियमों का उल्‍लंघन करने पर हटाए गए विज्ञापनों की संख्‍या में 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी ने 17 लाख से ज्‍यादा विज्ञापनों को पॉलिसी का उल्‍लंघन करने की वजह से हटाया है। वहीं, गूगल ने डिटेक्‍शन सिस्‍टम की चोरी करने की कोशिश करने वाले 86.7 करोड़ विज्ञापनों को या तो ब्‍लॉक कर दिया या पूरी तरह से हटा दिया है। गूगल ने यह भी बताया कि नीतियों को गलत तरीके से पेश (Misrepresentation of Policies) करने की वजह से उसने 10.1 करोड़ विज्ञापनों को हटा दिया है।

टेक कंपनी ने 2020 में विज्ञापनदाताओं और प्रकाशकों (Advertisers & Publishers) के लिए 40 से भी ज्यादा नीतियों को या तो जोड़ा या उसमें बदलाव किया था। गूगल ने कहा कि पिछले साल महामारी से संबंधित गलत और भ्रामक विज्ञापन सबसे बड़ी चिंता का कारण थे। इनमें चमत्‍कारिक इलाज, एन-95 फेस मास्‍क की कमी और हाल में वैक्‍सीन को लेकर आने वाले जैसे फर्जी विज्ञापन शामिल थे।

चूंकि पिछले साल दुनियाभर में COVID-19 मामलों की संख्या में बेहताशा बढ़ोतरी देखने को मिली थी, इसलिए इससे जुड़े प्रॉडक्ट्स और इलाज का दावा करने वाले झूठे प्रॉडक्ट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली थी, जिसके चलते ही गूगल ने कोरोना वायरस को लेकर गलत विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए कोविड विज्ञापन नीति जारी की थी। साथ ही कंपनी ने 2020 में विज्ञापनों के साथ ही कोविड या ग्‍लोबल हेल्‍थ इमरजेंसी से ऐसी जुड़ी सामग्री को रोकने के लिए एक नई पॉलिसी भी पेश की थी, जो वैज्ञानिक तथ्‍यों के उलट थीं।

अप्रैल 2020 में गूगल ने विज्ञापनदाता पहचान सत्‍यापन कार्यक्रम (AIVP) भी शुरू किया। इसके तहत अभी 20 देशों के विज्ञापनदाताओं का सत्‍यापन किया जा रहा है। गूगल के विज्ञापन निजता व सुरक्षा विभाग के उपाध्‍यक्ष स्‍कॉट स्‍पेंसर ने कहा कि हजारों कर्मचारियों ने यूजर्स, क्रिएटर्स, पब्लिशर्स और एवर्टाइजर्स की सेफ्टी के लिए 24 घंटे काम किया।

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फिल्ममेकर अशोक पंडित ने अजीत अंजुम पर कसा तंज, कहा- सड़क पर सह रहे बेइज्जती

बॉलीवुड फिल्ममेकर अशोक पंडित सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और आए दिन तमाम समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय रखते दिखाई देते हैं। 

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 17 March, 2021
Last Modified:
Wednesday, 17 March, 2021
ASHOK652154

बॉलीवुड फिल्ममेकर अशोक पंडित सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और आए दिन तमाम समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय रखते दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर वे अकसर किसी न किसी नेता पर भी तंज कसते रहते हैं, लेकिन इस बार उनके निशाने पर कोई नेता नहीं, बल्कि वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम आ गए।

अशोक पंडित ने वरिष्ठ पत्रकार के एक वीडियो को शेयर करते हुए तंज कसा और कहा कि बिना लोगो का माइक लेकर घूमने वाले पत्रकारों पर उन्हें तरस आता है और अब हाल यह हो गया है कि ऐसे लोग अब सड़कों पर माइक लेकर लोगों की बेइज्जती सह रहे हैं!

यहां पढ़िए उनका ये पूरा ट्वीट

हालांकि, खबर लिखे जाने तक फिल्ममेकर अशोक पंडित के इस ट्वीट का वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने कोई जवाब नहीं दिया है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखकर लोगों के अलग-अलग रिएक्शन सामने आ रहे हैं।

दरअसल, इस वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम बीच सड़क पर एक वकील से बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसमें वे सवाल करते हैं कि क्या होने वाला है बंगाल में? ऐसे में मास्क लगाए वकील कहता है कि बीजेपी आएगी। फिर वे अगला सवाल करते है, क्यों? इस पर सामने खड़ा वकील जवाब देता है कि मोदी सरकार जो कर रही है, वह अच्छा है, बहुत विकास हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर, सोशल हर तरह का विकास हुआ है।

यह जवाब सुनकर अजीत अंजुम तुरंत एक और सवाल करते हैं, मोदी सरकार ने साढ़े 6 साल में कितने लोगों को नौकरी दे दी है? जवाब में वकील कहता है, बहुत दे दी। अजीत अंजुम फिर कहते हैं, अच्छा दो करोड़ हर साल बोला था तो कम से कम साढ़े 6 साल में तो 12-13 करोड़ को तो मिलना ही चाहिए।

वकील साहब सोचने लगते हैं कि और फिर जवाब देते हैं, हां मिल गया। किसी न किसी सेक्टर में मिल गया। वे फिर पूछते हैं, जैसे मोदी जी ने कहा कि पकौड़ा तलना भी रोजगार है तो करो? इस पर वकील बोलते हैं, हां बिल्कुल यह भी इंडस्ट्री का पार्ट है। इस पर अजीत अंजुम फिर पूछते हैं कि क्या मोदी जी के पीएम बनने से पहले देश में पकौड़े नहीं तले जाते थे क्या? इस पर वकील साहब जवाब में कहते हैं, तलते तो थे। अजीत अंजुम कहते हैं, फिर? मोदी जी ने कह दिया तो रोजगार हो गया?  

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इस वजह से मुसीबत में आया गूगल, भरना पड़ सकता है भारी भरकम जुर्माना

हम छोटी से छोटी जानकारी हासिल करने के लिए भी गूगल का इस्तेमाल करने लगे है, लेकिन अब यही गूगल एक बड़ी मुसीबत में फंस गया है

Last Modified:
Tuesday, 16 March, 2021
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वर्तमान समय में गूगल हम सबका एक सहायक बन गया है और हो भी क्यों न, हम छोटी से छोटी जानकारी हासिल करने के लिए भी गूगल का इस्तेमाल करने लगे है लेकिन अब यही गूगल एक बड़ी मुसीबत में फंस गया है जिसके कारण इसे लगभग 36,369 करोड़ रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है। 

दरअसल हाल ही में एक अमेरिकी नागरिक ने गूगल पर केस किया है। उसका कहना है कि गूगल अपने क्रोम ब्राउजर के जरिए इनकॉग्निटो मोड में भी लोगों को जानकारी एकत्र  कर रहा है। 

दरअसल जब आप गूगल पर कोई भी सर्च करते है तो ब्राउजर आपकी हर हरकत को रिकॉर्ड करता है। वो हर उस Key Word को भी सेव करता है जिसे आपने सर्च किया है। 

आप अगर आपने आपकी सर्च हिस्ट्री या वाच हिस्ट्री को डिलीट नहीं किया तो कोई भी आपके द्वारा देखी गई जानकारी को हासिल कर सकता है। इसके अलावा आप जो भी गूगल पर देख रहे है वो पूरा डाटा गूगल के सर्वर में भी सुरक्षित रहता है। इसे तकनीक की भाषा में कुकीज सेव करना भी कहते हैं।

लेकिन इनकॉग्निटो मोड इससे बिल्कुल अलग है। इसे आप एक तरह से प्राइवेट ब्राउजिंग कह सकते है। इसे सबसे पहले एपल के सफारी ब्राउजर में साल 2015 में आजमाया गया था। 

गूगल भी इसी मोड में ब्राउज़िंग करने की सुविधा देता है। जब आप  इनकॉग्निटो मोड में कुछ भी देखते है या सर्च करते है तो ये आपकी सर्च हिस्ट्री में नहीं आता है। आप जो कुछ भी देख रहे है या सर्च कर रहे है वो आपके विंडो क्लोज करते ही अपने आप डिलीट हो जाता है और इसलिए ही इसे प्राइवेट या सेफ ब्राउजिंग कहा जाता है। 

दरअसल  इनकॉग्निटो मोड में लोग कई कारणों से ब्राउजिंग करते है मसलन अपनी निजी जानकारी को छिपाने के लिए या पासवर्ड हैकर से बचने के लिए भी लोग ऐसा करते है। इसके पीछे एक यह भी तर्क दिया जाता है की गूगल आपकी सर्च हिस्ट्री और key Word के आधार पर ही आपको विज्ञापन दिखाता है।

आपको बताते चले, इस मामले पर गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी इस दावे को करीब से देख रही है और वह अपना बचाव सख्ती से करेगी।

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फेसबुक की इस मीडिया कंपनी से डील, खबरें शेयर करने पर करेगी भुगतान

इस नए समझौते के तहत फेसबुक ने अब खबरों के भुगतान की बात कही है।

Last Modified:
Tuesday, 16 March, 2021
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लंबी लड़ाई के बाद ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और मीडिया कंपनी ‘न्यूज कॉर्प’ के बीच सहमति बन गई है और इसके तहत फेसबुक ने अब खबरों के भुगतान की बात कही है।

करीब तीन हफ्ते पहले ऑस्ट्रेलिया की संसद ने एक कानून पारित किया था, जिसके तहत डिजिटल कंपनियों को खबरें दिखाने के लिए भुगतान करना जरूरी कर दिया गया है।

न्यूयॉर्क स्थित ‘न्यूज कॉर्प’ विशेष तौर पर अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में समाचार देता है। इस मौके पर ‘न्यूज कॉर्प’ का कहना है कि उसने फेसबुक के साथ कई साल का एक समझौता किया है। यह समझौता गूगल के साथ पिछले महीने किए गए समझौते से मिलता-जुलता है।

न्यूज कॉर्प ने एक बयान में कहा कि ‘स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया’, न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया की सहायक कंपनी है और उसने भी एक नया समझौता किया है, जो मौजूदा फेसबुक समझौते पर आधारित है।

इससे पहले, फेसबुक ने तीन स्वतंत्र समाचार संस्थानों ‘प्राइवेट मीडिया’, ‘स्वाट्ज मीडिया’ और ‘सोलस्टिक मीडिया’ के साथ आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए थे।

फेसबुक ने एक बयान में कहा था कि वाणिज्यिक समझौते के संदर्भ में अगले 60 दिन में पूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

बता दें कि इसके भी पहले फेसबुक ने न्यूज कंपनियों को उनके लिंक शेयर करने के लिए भुगतान करने के मुद्दे पर ऑस्ट्रेलिया को 'अनफ्रेंड' कर दिया था और दावा किया था कि सरकार के प्रस्तावित कानून ने इस प्लेटफॉर्म और न्यूज पब्लिशर्स के बीच संबंध को 'गलत तरीके से' समझा है।

फेसबुक की ओर से अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज बैन करने को लेकर हुए विवाद और प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के कड़े बयानों के बाद, सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी ने कहा था कि वो ऑस्ट्रेलियाई न्यूज से विवादित बैन हटा लेगी और स्थानीय मीडिया कंपनियों को कंटेंट के लिए भुगतान करेगी। यह सब लंबित पड़े ऐतिहासिक कानून पर आखिरी समझौते के बाद हुआ है।

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न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने Google को लिखा लेटर, उठाई ये मांग

गूगल इंडिया के कंट्री मैनेजर को लिखे लेटर में एनबीए का कहना है कि ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू का असमान वितरण और एडवर्टाइजिंग सिस्टम में पारदर्शिता की कमी से डिजिटल न्यूज बिजनेस काफी दबाव में आ रहा है।’

Last Modified:
Thursday, 11 March, 2021
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने अमेरिका की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ‘गूगल’ (Google) से फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों की तरह भारतीय न्यूज पब्लिशर्स को भी उनके कंटेंट को इस्तेमाल करने से होने वाली कमाई में हिस्सेदारी देने का आग्रह किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में एनबीए ने गूगल इंडिया के कंट्री मैनेजर संजय गुप्ता को एक लेटर लिखा है। एनबीए प्रेजिडेंट रजत शर्मा की ओर से लिखे इस लेटर में कथित रूप से कहा गया है, ‘ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू का असमान वितरण और एडवर्टाइजिंग सिस्टम में पारदर्शिता की कमी से डिजिटल न्यूज बिजनेस काफी दबाव में आ रहा है।’

मीडिया रिपोर्ट्स में इस लेटर के हवाले से कहा गया है, ‘विश्वसनीय जानकारी जुटाने, सत्यापित करने और वितरित करने के लिए एंकर्स, पत्रकारों और रिपोर्टर्स को नियुक्त करने में न्यूज ऑर्गनाइजेशंस काफी निवेश करते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त रूप से रेवेन्यू नहीं मिल पाता है। एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा असमान रूप से गूगल, यूट्यूब, फेसबुक जैसे टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स को चला जाता है।’

लेटर के अनुसार, ‘इस कड़ी में गूगल अपने ऑडियंस को न्यूज कंटेंट उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और रेवेन्यू जुटाता है, लेकिन न्यूज पब्लिशर्स को इस रेवेन्यू में हिस्सेदारी नहीं मिल पाती है। गूगल ने पिछले दिनों फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों के न्यूज पब्लिशर्स को उनका कंटेंट इस्तेमाल करने के बदले रेवेन्यू में हिस्सेदारी देने पर सहमति जताई है। उम्मीद है कि एक बहुराष्ट्रीय ऑर्गनाइजेशन होने के नाते गूगल वैश्विक सिद्धांतों का पालन करेगा और भारतीय न्यूज पब्लिशर्स को भी उनका न्यूज कंटेंट दिखाने के ऐवज में भुगतान करेगा।’

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डिजिटल मीडिया के लिए जारी नई गाइडलाइंस मीडिया की आजादी पर खतरा: एडिटर्स गिल्ड

सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए हाल ही में नई गाइडलाइंस जारी की गई थी, जिसे लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI)  ने इस पर चिंता जाहिर की है

Last Modified:
Monday, 08 March, 2021
EGI

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए हाल ही में नई गाइडलाइंस जारी की थी, जिसे लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI)  ने इस पर चिंता जाहिर की है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा है कि ये गाइडलाइन्स डिजिटल मीडिया पर 'अकारण प्रतिबंध' लगाएंगी।

गिल्ड ने कहा है कि इन गाइडलाइंस से उन तौर तरीकों में बदलाव होगा जिनके तहत इंटरनेट पर पब्लिशर खबरें प्रकाशित करते हैं और इसे भारत में मीडिया की स्वतंत्रता का उल्लंघन होने की भी आशंका है।

गिल्ड ने इस बात को लेकर भी चिंता जाहिर की कि इन नियमों के तहत सरकार को असीमित शक्तियां दे दी गई हैं। गिल्ड ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा इन गाइडलाइंस से केंद्र सरकार को देश में कहीं भी प्रकाशित किसी भी खबर को ब्लॉक करने, उसे डिलीट करने या बदलाव करने का अधिकार मिल जाएगा, वह भी बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया का पालन किए हुए। इसके अलावा इन गाइडलाइंस में पब्लिशर्स को एक शिकायत निवारण प्रक्रिया अपनाने के लिए भी बाध्य किया जा रहा है। इन गाइडलाइंस से डिजिटल न्यूज मीडिया और पूरे मीडिया पर गैर-तार्किक पांबदिया लगने की आशंका है।

गिल्ड ने कहा कि इस तरह का ‘रिफॉर्म्स’ बनाते वक्त सरकार ने इससे जुड़े हितधारकों से कोई विचार नहीं किया, इसलिए इन नियमों को लागू नहीं किया जाना चाहिए और सभी संबंधित लोगों से बात की जाए।

एडिटर्स गिल्ट ने कहा है कि सरकार को सोशल मीडिया पर नियंत्रण के नाम पर देश के संविधान के तहत मीडिया को मिली आजादी पर पाबंदियां लगाने से पहले विचार करना चाहिए क्योंकि मीडिया लोकतंत्र का अहम स्तंभ है।

यह प्रेस नोट एडिटर्स गिल्ड की अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार सीमा मुस्तफा, महासचिव संजय कपूर और कोषाध्यक्ष अनंत नाथ की तरफ से जारी किया गया है।  

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