गूगल की इस पहल से दुनियाभर के न्यूज पब्लिशर्स को होगा फायदा

कोविड-19 के प्रकोप का असर अन्य सेक्टर्स की तरह मीडिया इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है।

Last Modified:
Saturday, 18 April, 2020
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कोविड-19 के प्रकोप का असर अन्य सेक्टर्स की तरह मीडिया इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है। वहीं इस बीच मीडिया की आर्थिक हालत को देखते हुए गूगल ने एक बड़ा फैसला किया है। आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए गूगल न्यूज पब्लिशर्स की मदद करेगा।

गूगल ने शुक्रवार को कहा कि वह अपने न्यूज पार्टनर्स से 5 महीनों तक ऐड सर्विंग फीस नहीं लेगा। गूगल के इस फैसले का फायदा दुनियाभर के न्यूज पब्लिशर्स को होगा। आपको बता दें कि दुनियाभर के कई न्यूज पब्लिशर्स अपने डिजिटल बिजनेस पर विज्ञापन के लिए गूगल ऐड मैनेजर की सहायता लेते हैं।

गूगल की ओर से जारी बयान में निदेशक ग्लोबल पार्टनरशिप न्यूज जेशन वॉशिंग ने कहा कि कोरोनावायरस महामारी से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में गूगल न्यूज ने वित्तीय मदद देने की पहल शुरू की है। इस पहल के तहत पूरी दुनिया में वास्तविक पत्रकारिता करने वाले न्यूज संस्थानों को आर्थिक मदद दी जाएगी। वॉशिंग ने कहा कि हमारे सभी न्यूज पार्टनर्स को आने वाले दिनों में इस वित्तीय पहल की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

आपको बता दें कि न्यूज के साथ दिखने वाली ऐड, ब्रेकिंग न्यूज स्टोरी लिखने वाले जर्नलिस्ट्स को फंड उपलब्ध कराती है ताकि वे अपनी वेबसाइट या ऐप्स को लगातार अपडेट करते रहें। गूगल पूरी दुनिया में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर न्यूज सर्विस उपलब्ध कराता है। इसके लिए वह स्थानीय न्यूज पब्लिशर्स की मदद लेता है।

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फेसबुक के वर्किंग कल्चर में हो सकता है ये बड़ा बदलाव!

लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि घर से अथवा दूर बैठकर काम करना जल्द एक बढता हुआ ट्रेंड बनने जा रहा है

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
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इन दिनों पूरी दुनिया कोरोनावायरस (कोविड-19) के कहर का सामना कर रही है। कोरोना का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर तमाम कंपनियां अपने एंप्लाईज से घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करा रही हैं। इन सबके बीच अब सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक’ के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि वर्ष 2030 तक कंपनी के करीब आधे एंप्लाईज घरों से ही काम करने लगेंगे। फेसबुक पेज पर लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान उन्होंने यहां तक कहा कि कंपनी अपने तमाम एंप्लाईज को स्थायी रूप से घर से काम करने की इजाजत देगी।

जुकरबर्ग की ओर से यह भी कहा गया है, ‘हम अपने काम को अब इस तरह शिफ्ट कर रहे हैं कि लोग चुन सकते हैं कि वे कहां से बेहतर काम कर सकते हैं। हम इस दिशा में तकनीकी रूप से काम करना जारी रखे हुए हैं। एक बार यह महामारी गुजरने के बाद मुझे उम्मीद है कि दूर बैठकर अथवा घर से काम करना जल्द ही एक बढ़ता हुआ ट्रेंड बनने जा रहा है।’

फेसबुक की ओर से एक ब्लॉग पोस्ट में कहा गया है कि नई टेक्नोलॉजी हमें आपस में जुड़े रहने और प्रॉडक्टिव यानी उत्पादक बने रहने में मदद कर रही है। बता दें कि ‘गूगल’ अपने एंप्लाईज को इस पूरे साल घर से काम करने की छूट दे रही है। ‘अमेजॉन’ और ‘माइक्रोसॉफ्ट’ भी इस साल कम से कम अक्टूबर तक ऐसा करना जारी रखेंगी।

 

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ShareChat ने अपने 101 एम्प्लॉयीज को दिखाया बाहर का रास्ता, पर रखे ये दो ऑप्शन

वित्तीय बोझ को कम करने के लिए कई कंपनियों ने छंटनी शुरू कर दी है, जिनमें अब सोशल मीडिया फर्म शेयरचैट का नाम भी शामिल हो गया है। शेयरचैट ने अपने 101 एम्प्लॉयीज को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

Last Modified:
Thursday, 21 May, 2020
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कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण को कम करने लिए लागू किए लॉकडाउन का असर अब कई कंपनियों पर भी पड़ने लगा है। ऐसे में वित्तीय बोझ को कम करने के लिए कई कंपनियों ने छंटनी शुरू कर दी है, जिनमें अब सोशल मीडिया फर्म शेयरचैट का नाम भी शामिल हो गया है। शेयरचैट ने अपने 101 एम्प्लॉयीज को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बता दें कि निकाले गए एम्प्लॉयीज उसकी पूरी टीम का एक चौथाई हिस्सा हैं।

शेयरचैट  मात्र 5 साल पुरानी कंपनी है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से ऐडवर्टाइजिंग मार्केट को काफी नुकसान हुआ है, जिसका सीधा असर अब इस कंपनी पर भी पड़ते हुए दिखाई दे रहा है।

शेयरचैट के सीईओ अंकुश सचदेवा ने कर्मचारियों को भेजे ई-मेल में लिखा कि हम मजबूर हैं। इस साल ऐडवर्टाइजिंग मार्केट अप्रत्याशित रहेगा, इसलिए कंपनी ने लागत में कटौती करने का फैसला किया है।  इस ई-मेल में यह भी कहा गया है कि कंपनी लागत में कटौती के अलग-अलग उपायों के बारे में विचार कर रही है।

सीईओ अंकुश सचदेवा ने मेल में कहा, हमें अब अपने मुख्य प्रॉडक्ट पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। हम बिजनेस पर फिर से विचार करने पर मजबूर हैं। पिछले साल कंपनी ने अच्छी पूंजी जुटाई थी, लेकिन इस साल ऐडवर्टाइजिंग मार्केट अप्रत्याशित रहेगा। इसलिए हमें कंपनी को बनाए रखने के लिए मूल सिद्धांतों को फिर से अपनाना होगा।

सचदेवा ने कहा, हम अब रेवेन्यू टीम को नई उम्मीद के साथ व्यवस्थित कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारे लोग शेयर चैट को खड़ा रखने के लिए दिन-रात ईमानदारी से मेहनत कर रहे हैं। यह समय हमारे लिए बहुत कठिन है, मुझे उम्मीद है कि आप हमारी मजबूरी को समझ गए होंगे, हमें संगठन को बनाए रखने और कोरोना संकट के दूसरे पक्ष को देखने के लिए ऐसा करना पड़ रहा है। शेयरचैट के प्रवक्ता ने कर्मचारियों को निकालने की पुष्टि करते हुए कहा, वैश्विक महामारी ने कठिन फैसला लेने के लिए मजबूर कर दिया है।

कंपनी निकाले गए एम्प्लॉयीज के सामने 2 महीने का 'गार्डन लीव’ या चार महीने के लिए आधा वेतन लेने का विकल्प रखा है। गार्डन लीव एक एक्सरसाइज है जब एक टर्मिनेटेड कर्मचारी नोटिस अवधि के दौरान काम से दूर रहता है, जबकि पेरोल जारी रहता है। इसके अलावा, एम्प्लॉयीज को हर साल कंपनी के लिए काम करने के लिए 1 महीने की एक्स ग्रैटिया मिलेगी।

सचदेवा ने कहा कि, प्रभावित कर्मचारी साल के अंत तक शेयरचैट की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के दायरे में रहेंगे, और कंपनी स्टॉक कर्मचारियों के लिए समयसीमा का विस्तार वर्ष के अंत तक करेगी. इसका मतलब यह होगा कि साल के अंत तक कर्मचारियों को अधिकृत करने का विकल्प बना रहेगा.

उन्होंने कहा कि कंपनी सभी प्रभावित कर्मचारियों को बाजार में उपलब्ध नौकरी ढूढने में मदद करेगी और उन्हें दूसरे संगठनों, और एजेंसियों से जोड़ेगी. इसके लिए कर्मचारियों को अपने रिज्यूम और लिंक्डइन प्रोफाइल को बनाने में मदद करने के लिए एक पेशेवर रिज्यूमे बनाने वाले के साथ एग्रीमेंट किया है.

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कारोबारियों के लिए फेसबुक की बड़ी पहल, लॉन्च किया ये नया फीचर

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक’ ने कोरोवायरस (कोविड-19) महामारी के दौरान व्यापारियों को सपोर्ट करने की कोशिश है।

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2020
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सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक’ ने कोरोवायरस (कोविड-19) महामारी के दौरान छोटे व्यापारियों को सपोर्ट करने की कोशिश के तहत कदम आगे बढ़ाया है। दरअसल फेसबुक ने एक नया फीचर ‘शॉप्स’ (Shops) लॉन्च किया है। इस फीचर को लॉन्च करने का उद्देश्य छोटे व्यापारियों को एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है, ताकि उस पर वे अपने प्रॉडक्ट प्रदर्शित कर सकें। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने मंगलवार को इस बारे में घोषणा की है।

इस सर्विस के तहत दुकानदर अपने कस्टमर्स के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक ऑनलाइन स्टोर तैयार कर सकते हैं। बिजनेसमैन जिन प्रॉडक्ट्स को इन प्लेटफॉर्म पर रखना चाहते हैं, वे उनका चुनाव कर सकते हैं। इसके अलावा वे अपने प्रॉडक्ट्स और ब्रैंड्स को प्रदर्शित करने के लिए इस ‘शॉप’ के लुक को अपने हिसाब से सेट कर सकते हैं। उसका कवर पेज बदल सकते हैं अथवा उसे एक नया रंग दे सकते हैं और अपने मनचाहे प्रॉडक्ट को उसमें सजा सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसबुक शॉप्स को फिलहाल अमेरिका  में जारी कर दिया गया है। इंस्टाग्राम में इस फीचर को आने वाले महीनों में लाया जाएगा। साथ ही इस नए फीचर को जल्द ही भारत समेत अन्य बाजारों में भी उतारा जाएगा। यह फीचर फ्री होगा। कंपनी ने अपने ब्लॉग में कहा है, ‘हम लोगों की खरीदारी की खुशी को एक नया अनुभव देना चाहते हैं और हम छोटे बिजनेस को ऐसा प्लेटफॉर्म देना चाहते हैं, जहां पर लोग अपने पसंद की चीजें तलाश सकें और उन्हें खरीद सकें।’

 

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Facebook की नई डील, अब इस कंपनी को खरीदा

आपको बता दें कि हाल में फेसबुक ने भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस (Reliance Jio) में भी 9.99 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है।

Last Modified:
Saturday, 16 May, 2020
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक (Facebook) ने एनिमेटेड इमेज लाइब्रेरी 'जिफी' (GIPHY) को खरीद लिया है। फेसबुक ने यह जानकारी अपने ब्लॉग के जरिए दी है। बता दें कि ये सौदा 40 करोड़ डॉलर (करीब 3040 करोड़ रुपए) में हुआ है।

आपको बता दें कि Giphy विडियो क्लिप्स की लाइब्रेरी और एनिमेटेड इमेज जिन्हें GIF के नाम से जाना जाता है उसकी बहुत बड़ी लाइब्रेरी है। Giphy अलग-अलग प्लेटफॉर्म जैसे ट्विटर, टिकटॉक, फेसबुक, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम में यूजर्स को इंटरेक्टिव GIF और छोटी-छोटी विडियो प्रोवाइड करती है।

Giphy को फेसबुक के स्वामित्व वाले फोटो और विडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के साथ जोड़ा जाएगा। फेसबुक ने 100 से ज्यादा Giphy के कर्मचारियों को अपने साथ शामिल कर लिया है। फेसबुक पहले से ही Giphy की लाइब्रेरी को अपने मैसेजिंग प्रॉडक्ट पर यूज करता है।

फेसबुक ने बताया कि अब यूजर्स मैसेज और स्टोरीज के लिए आसानी से GIF और stickers खोज पाएंगे। Giphy का 50 प्रतिशत से ज्यादा ट्रैफिक फेसबुक से जुड़े ऐप्स से आता है, जिनमें से आधा ट्रैफिक केवल इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म से आता है। फेसबुक ऐप, मैसेंजर, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप में लंबे समय से Giphy के एप्लिकेशन प्रोग्राम इंटरफेस का इस्तेमाल हो रहा है।

वैसे फेसबुक ने साल 2015 में भी Giphy का अधिग्रहण करने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय Giphy ने कई अलग-अलग सोशल मीडिया कंपनियों के साथ डील की हुई थी। इसीलिए फेसबुक के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

आपको बता दें कि हाल में फेसबुक ने भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस (Reliance Jio) में भी 9.99 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है।

 

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भारी पड़ सकती है अखबारों को लेकर सोशल मीडिया पर की जा रही ये 'कारगुजारी'

न्यूज पब्लिशर्स इन दिनों ऐसे ऑनलाइन ग्रुप्स और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ लगाम लगाने की तैयारी में हैं

Last Modified:
Wednesday, 06 May, 2020
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न्यूज पब्लिशर्स इन दिनों ऐसे ऑनलाइन ग्रुप्स और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ लगाम लगाने की तैयारी में हैं, जो पाठकों को रोजाना लोकप्रिय अखबारों के पीडीएफ संस्करण शेयर कर रहे हैं।   

तमाम अखबारों के प्रबंधन के लिए सोशल मीडिया पर इस तरह अखबारों के पीडीएफ का सर्कुलेशन कुछ और नहीं, बल्कि पायरेसी का एक रूप है। बताया जाता है कि जल्द ही सिर्फ सबस्क्राइब्ड मेंबर्स यानी जिन्होंने सबस्क्रिप्शन लिया है, वे ही ऑनलाइन न्यूजपेपर का उपयोग कर पाएंगे।  

इस बारे में ‘इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी’ (Indian Newspaper Society) सचिवालय की महासचिव मैरी पाल का कहना है, ‘हमारी जानकारी में आया है कि कुछ पब्लिशर्स को अखबारों के डिस्ट्रीब्यूशन में कुछ परेशानी आ रही है और पायरेसी के मामले, खासकर डिजिटल फॉर्मेट में ज्यादा बढ़ रहे हैं।’

दरअसल, आजकल तमाम अखबार ई-प्रारूप (epaper format) में उपलब्ध हैं, जिन्हें ऑनलाइन पढ़ा जा सकता है, जिनमें से कुछ तो बिल्कुल मुफ्त हैं। वैश्विक महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण अखबारों का सर्कुलेशन काफी प्रभावित हुआ है। खासकर, अप्रैल की शुरुआत में देश के कई स्थानों पर अखबारों का सर्कुलेशन बंद कर दिया गया था, तब से विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर ईपेपर्स की उपलबध्ता में काफी बढ़ोतरी हुई।  

‘आईएनएस’ के अनुसार, तमाम यूजर्स अखबार के पेजों की पीडीएफ (PDF) बना रहे हैं और उसे वॉट्सऐप और टेलिग्राम ग्रुप्स पर पाठकों को भेज रहे हैं। इससे अखबारों और ई-पेपर्स को सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू के रूप में काफी नुकसान हो रहा है। ‘आईएनएस’ ने भी सोशल मीडिया पर अखबारों के इस तरह सर्कुलेशन को गैरकानूनी करार देते हुए कहा कि तमाम पब्लिकेशंस अपने तरीके से इससे लड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए ‘आईएनएस’ ने कुछ सुझाव भी दिए हैं।  

1: ऐप्स, वेबसाइट और अखबारों में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया जाए कि इस तरह किसी भी अखबार अथवा उसके कुछ हिस्से को सर्कुलेट करना गैरकानूनी है और भारी जुर्माना लगाने के साथ ही कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

2: कानूनी कार्यवाही के बारे में कुछ खबरें प्रसारित करें, जिसमें भारी जुर्माने के साथ ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही के बारे में बताया जाए, ताकि अन्य लोगों को ऐसा करने से रोका जा सके।  

3: इस तरह की गतिविधियों में लिप्त लोगों खासकर वॉट्सऐप और टेलिग्राम एडमिन के खिलाफ कानूनी कदम उठाएं और उन्हें कानूनी नोटिस भेजें। किसी भी वॉट्स ग्रुप में कुछ भी गैरकानूनी होता है, तो उसके लिए ग्रुप का एडमिन ही उत्तरदायी होता है।

4: कुछ ऐसे फीचर्स तैयार करें, जिससे पायरेसी को रोका अथवा कम किया जा सके। जैसे-पीडीएफ और इमेज डाउनलोड को सीमित कर दिया जाए। पेजों को कॉपी न किया जा सके, इसके लिए उसमें कुछ कोडिंग की जाए। इसमें यूजर आइडेंटिफायर कोड डाला जाए, जो दिखाई न दे। ताकि सोशल मीडिया पर पीडीएफ सर्कुलेट करने वालों की पहचान हो सके। प्रति सप्ताह एक निश्चित संख्या से अधिक पीडीएफ डाउनलोड करने वाले यूजर्स की सूची तैयार हो और उन्हें ब्लॉक किया जाए।

बताया जाता है कि कुख अखबारों ने इन सुझावों पर अमल करना भी शुरू कर दिया है। हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ ने वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम ग्रुप पर ऑनलाइन सर्कुलेशन के रूप में अखबारों की चोरी के बारे में एक खबर भी प्रकाशित की थी। इस खबर में कहा गया था कि वॉट्सऐप पर ई-पेपर के पीडीएफ शेयर करना गैरकानूनी है और इसका पालन न करने की स्थिति में ग्रुप एडमिन के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, ‘फ्री प्रेस जर्नल’ (Free Press Journal) में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया कि वॉटसऐप, टेलिग्राम या अन्य किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फ्री प्रेस जर्नल के ई-पेपर के पीडीएफ को साझा करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इन दोनों परस्पर विरोधी खबरों से लोगों में भ्रम पैदा हो गया कि वास्तव में ई-पेपर की पीडीएफ शेयर करना सही है या नहीं।

इसके बाद ‘इंडिया टुडे’ के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि अगर कोई अखबार ई-पेपर की पीडीएफ मुफ्त में उपलब्ध कराता है तो उसे प्रसारित करना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन अगर कोई अखबार ई-पेपर के पैसे लेता है तो उसकी पीडीएफ बनाकर शेयर करना गैरकानूनी है। इसके अलावा, किसी भी ई-पेपर को डाउनलोड करके या कॉपी करके पीडीएफ बनाना और उसे टेलिग्राम और वॉट्सऐप आदि पर सर्कुलेट करना गैरकानूनी है।

इस बारे में उत्तर भारत के एक प्रमुख अखबार के मार्केटिंग हेड का कहना है, ‘अखबार उस समाचारपत्र मैनेजमेंट की प्रॉपर्टी है। इसे या तो खरीदकर अथवा ऑनलाइन सबस्क्राइब कर पढ़ा जा सकता है। इंडस्ट्री पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही है। हम नहीं चाहते कि पाठक प्रिंट मीडिया को छोड़ दें। सभी अखबार इस मामले में एक साथ हैं और इस स्थिति से निपटने के लिए जल्द ही एक प्लान लेकर आएंगे। हमें विश्वास है कि हमारे संरक्षक इसमें हमारे साथ खड़े होंगे।’

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ट्विटर पर भड़के बीजेपी सांसद अनंत कुमार हेगड़े, PMO को लिखे लेटर में दिया ये सुझाव

अपना ट्विटर अकाउंट बंद किए जाने को लेकर भाजपा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर जमकर भड़ास निकाली है

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2020
Anant Kumar Twitter

भाजपा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया है। इस बात को लेकर उन्होंने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर जमकर अपनी भड़ास निकाली है। हेगड़े का कहना है कि ट्विटर भारत विरोधी रुख अपनाने को तवज्जो देने के साथ ही अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगा रहा है। इसके साथ ही हेगड़े ने कंपनी के डिजिटल उपनिवेशवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि ट्विटर की जांच के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को छह पॉइंट्स को भी ध्यान में ऱखना चाहिए।

इन पॉइंट्स में कहा गया है कि राष्ट्रवादी ट्विटर अकाउंट्स को निशाना बनाया जा रहा है। चुने गए जनप्रतिनिधियों से संबंधित ट्विटर हैंडल्स को बिना किसी नोटिस के सस्पेंड किया जा रहा है। भुगतान किए गए विज्ञापनों (paid ads) के माध्यम से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री आदि के बारे में ‘जहर’ उगला जा रहा है।  किसी भी धर्म या देश के खिलाफ असंतोष, फेक न्यूज और आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वाले हैंडल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि ट्विटर खालिस्तान समर्थक ट्वीट्स को इतना कठोर नहीं मानता है, जितना राष्ट्रवादियों को। इसके साथ ही उन्होंने इस पत्र में अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (Wall Street Journal) का वह ट्वीट भी शामिल किया है, जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में नागरिक स्वतंत्रताएं दाव पर थीं, जिसे तमाम शिकायतों के बाद भी नहीं हटाया गया है।

भाजपा सांसद ने देश के ‘डिजिटल उपनिवेशीकरण’ (Digital colonisation) को रोकने के लिए ‘NIC’, ‘CDAC’ अथवा ‘CDOT’ की मदद से माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट का एक भारतीय संस्करण विकसित करने का भी सुझाव दिया। हेगड़े ने यह भी कहा है कि उनका पर्सनल ट्विटर अकाउंट और पॉलिसी थिंक टैंक @CksIndia, जिसने इस साइट द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों का मुद्दा उठाया था, उसे भी सस्पेंड कर दिया गया है। अपने पत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया है कि वह ऐसे कृत्यों के पीछे के उद्देश्यों की जांच करे और यह पता लगाए कि क्या माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट भारतीय विरोधी, मोदी विरोधी और भाजपा विरोधी ट्वीट को बढ़ावा देने के लिए पैसे लेती है।

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Facebook ने मुकेश अंबानी की इस कंपनी में किया निवेश, जानिए क्या होगा फायदा

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली  रिलायस इंडस्ट्रीज के जियो प्लेटफॉर्म्स के बीच एक बड़ी डील  हुई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 22 April, 2020
mukesh

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली  रिलायस इंडस्ट्रीज के जियो प्लेटफॉर्म्स के बीच एक बड़ी डील  हुई है। फेसबुक ने जियो प्लेटफॉर्म में 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 43,574 करोड़ रुपए के निवेश का ऐलान किया है। इस बड़ी डील के बाद फेसबुक अब जियो की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई है। फेसबुक के इस निवेश के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स की एंटरप्राइज वैल्यू 4.62 लाख करोड़ हो गई है।

माइनॉरिटी इंवेस्टमेंट के लिहाज से यह सबसे सबसे बड़ा विदेशी प्रत्क्ष निवेश (FDI) है। दोनों कंपनियों की साझेदारी से रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे और साथ ही बिजनेस बढ़ेगा। इसके अलावा इस सौदे से रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप को अपने कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिलेगी तथा फेसबुक की भारत में स्थिति और मजबूत होगी।

इस बड़ी डील को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा कि जब रिलायंस ने 2016 में जियो को लॉन्च किया था तब हम हर भारतीय के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और भारत को दुनिया की अग्रणी डिजिटल सोसाइटी के रूप में प्रचारित करने के सपने से प्रेरित थे। इसलिए रिलायंस के हम सभी लोग भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने और बदलाव लाने के लिए हमारे साझेदार के रूप में फेसबुक का स्वागत करते हैं।

फेसबुक ने कहा, 'यह निवेश भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जियो भारत में जो बड़े बदलाव लाया है, उससे हम भी उत्साहित हैं। 4 साल से भी कम समय में रिलायंस जियो 38 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लेकर आया है। इसलिए हम जियो के जरिए भारत में पहले से ज्यादा लोगों के साथ जुड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'

इस डील के बाद जुकरबर्ग ने कहा, मैं मुकेश अंबानी और पूरी जियो टीम को उनकी साझेदारी के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं नई डील को लेकर बहुत उत्साहित हूं। वहीं रिलायंस ने एक अलग बयान में कहा कि फेसबुक ने जियो प्लेटफॉर्म्स पर 4.62 लाख करोड़ रुपए के प्री-मनी एंटरप्राइज वैल्यू (यूएसडी 65.95 बिलियन अमरीकी डॉलर को 70 रुपए प्रति डॉलर पर चेंज करने के बाद) मानकर निवेश किया।

गौरतलब है कि जियो की शुरुआत 2016 में हुई थी। धीरे-धीरे इसने टेलिकॉम इंडस्ट्री में अपनी धाक जमा ली। टेलिकॉम और ब्रॉडबैंड से लेकर ई-कॉमर्स में इसने अपना विस्तार किया और 38 करोड़ ग्राहकों तक पहुंच गई। फेसबुक की बात करें तो भारत में इसके 40 करोड़ यूजर्स हैं और इंटरनेट यूजर्स की संख्या इस साल 85 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।


 

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स्थानीय मीडिया कंपनियों की मदद के लिए गूगल यूं आया सामने

कोरोना वायरस का प्रकोप पूरी दुनिया पर पड़ा है। देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। कोरोना के असर से मीडिया भी अछूती नहीं रही।

Last Modified:
Thursday, 16 April, 2020
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कोरोना वायरस का प्रकोप पूरी दुनिया पर पड़ा है। देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। कोरोना के असर से मीडिया भी अछूती नहीं रही। आर्थिक कामकाज ठप होने और विज्ञापनों में कटौती की वजह से कई मीडिया कंपनियों की हालत बुरी हो गई है, जिसकी वजह से कई मैगजींस-अखबारों का प्रकाशन बंद हो गया है। कई कंपनियों ने तो अपने यहां से या तो छंटनी शुरू कर दी है, या फिर एम्प्लॉयीज की सैलरी कम कर दी है। ऐसे में इस महामारी से जूझ रही छोटी-बड़ी मीडिया कंपनियों की मदद के लिए गूगल सामने आया है।

अमेरिकी कंपनी गूगल ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण कामकाज जारी रखने को लेकर संघर्ष कर रहे स्थानीय मीडिया प्रतिष्ठानों की मदद के लिए वह आपात कोष शुरू करेगी। हालांकि गूगल ने कोष की राशि का खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा कि वह छोटे मीडिया से लेकर बड़े मीडिया प्रतिष्ठानों को वित्तीय मदद देगी।

गूगल न्यूज के उपाध्यक्ष रिचर्ड गिंगरास ने एक बयान में कहा कि स्थानीय खबर लोगों और समुदाय को आसपास की घटनाओं से जुड़े रहने को लेकर महत्वपूर्ण संसाधन है। उन्होंने कहा कि आज ये मीडिया प्रतिष्ठान और महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये लोगों को स्थानीय लॉकडाउन, रहने के स्थान आदि के बारे में अहम सूचना दे रहे हैं। गिंगरास ने कहा कि इस कोष से मीडिया प्रतिष्ठान संकट के समय और बेहतर खबर लोगों तक पहुंचा सकेंगे। इसके लिये मीडिया प्रतिष्ठानों से 29 अप्रैल तक आवेदन देने को कहा गया है।  

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सीनियर न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी को परेशान करते रहे आंकड़े और हो गई ये चूक

पूरी दुनिया कोरोना वायरस के प्रकोप से लड़ रही है। भारत में भी कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए देशभर में 21 दिनों तक का लॉकडाउन है

Last Modified:
Monday, 13 April, 2020
chitra tripathi

पूरी दुनिया कोरोना वायरस के प्रकोप से लड़ रही है। भारत में भी कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए देशभर में 21 दिनों तक का लॉकडाउन है, जो 14 अप्रैल तक निर्धारित किया गया है। कई राज्यों के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के बाद लॉकडाउन को 14 अप्रैल से बढ़ाकर 30 अप्रैल करने का फैसला लिया है। ऐसे में लॉकडाउन की वजह से घर में बैठे लोगों तक मीडिया पल-पल की जानकारी पहुंचा रहा है। लेकिन इस बीच, एक न्यूज एंकर से बड़ी चूक हो गई, जिसका सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर मजाक उड़ाया।

दरअसल, ‘आजतक’ की सीनियर न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी लॉकडाउन से जुड़ी एक खबर को पढ़ रहीं थीं। इस खबर वे बता रहीं थीं कि पश्चिम बंगाल सरकार ने लॉकडाउन की सीमा बढ़ा दी है, जिसे 14 अप्रैल से बढ़ाकर अब 30 अप्रैल कर दिया गया है। हालांकि यहीं उनसे गलती हो गई। उन्होंने 30 अप्रैल की जगह 40 अप्रैल कह दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा।

ट्विट की ट्रेंडिंग में #40_अप्रैल नंबर वन पर ट्रेंड करने लगा। लोग इस न्यूज की एंकर और चैनल को लेकर अफवाहें फैलाने लगे। वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने विडियो के साथ छेड़छाड़ भी कर दी। इसमें एंकर और न्यूज चैनल का नाम बदल दिया गया।

हालांकि बाद में उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उनसे यह गलती अनजाने में इसलिए हो गई क्योंकि एक ही दिन में कोरोना को लेकर भारत में हुई 40 मौतें लगातार उन्हें परेशान रही थीं। जिस वजह से उन्होंने गलती से 30 अप्रैल की जगह 40 अप्रैल कह दिया।

हालांकि चित्रा की इस स्वीकारोक्ति के बाद भी सोशल मीडिया यूजर्स ने उनका मजाक बनाना बंद नहीं किया।

 

 

  

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सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर कुछ इस तरह ‘लगाम’ लगाने की तैयारी में है सरकार

नए नियमों से ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर एंड-टू-एंड एंक्रिप्शन का इस्तेमाल करने पर रोक लगेगी जो समाज के लिए हानिकारक कंटेंट को फैलने से रोकने के लिए इसका हवाला देते हैं

Last Modified:
Saturday, 11 April, 2020
Social Media

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और अफवाहों की रोकथाम के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी) 2000 की गाइडलाइंस में कुछ संशोधन किए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार की ओर से इस बारे में जल्द ही घोषणा की जाएगी।  

इन रिपोर्ट्स में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि कानून मंत्रालय ने संशोधनों का मसौदा तैयार करने के लिए मामूली बदलाव किए हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अंतिम रूप दिया गया है। अभी इनके अनुमोदन (अप्रूवल) का इंतजार किया जा रहा है, इसके बाद सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

बताया जाता है कि गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक बड़ी जिम्मेदारी डालने की आवश्यकता का हवाला देते हुए ये संशोधन किए गए हैं। नए नियम इन प्लेटफॉर्म्स को एंड-टू-एंड एंक्रिप्शन (end-to-end encryption) का उपयोग करने से भी रोकेंगे,  जो हानिकारक कंटेंट को बाहर करने के लिए इसका हवाला देते हैं।

बता दें कि कोविड-19 संकट के बीच तमाम फेक न्यूज और अफवाहें फैलाने के साथ ही सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार कई हानिकारक विडियो ऐसे ही प्लेटफॉर्म्स पर उत्पन्न हुए हैं। इसके बाद उस तरह के कंटेंट को मैसेजिंग ऐप्स पर शेयर किया जाता है, जिसे एंड-टू-एंड एंक्रिप्शन के आधार पर नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।

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