वॉट्सऐप यूजर्स हो जाएं सावधान, जल्द से जल्द कर लें ये काम

सुरक्षा खामी के कारण लोगों के मोबाइल में इंस्टॉल हो गया है जासूसी सॉफ्टवेयर

Last Modified:
Tuesday, 14 May, 2019
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सोशल मीडिया के इस दौर में इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप लोगों की जिंदगी का अनिवार्य अंग बन चुका है। इसका इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही सुरक्षा के लिहाज से भी यह संवेदनशील हो गया है। पिछले दिनों सोशल मीडिया खासकर वॉट्सऐप पर फेक न्यूज की बढ़ती घटनाओं को लेकर काफी कदम उठाए गए थे। इसमें फॉरवर्ड मैसेज डिस्प्ले होने के साथ ही एक बार में भेजने वाले मैसेज की अधिकतम संख्या पांच कर दी गई थी।

लेकिन अब वॉट्सऐप को लेकर नया खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, सोशल मीडिया नेटवर्क फेसबुक ने स्वीकार किया है कि उसके इस ऐप में सुरक्षा खामी के कारण लोगों के मोबाइल में एक जासूसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्राइली कंपनी द्वारा विकसित इस सॉफ्टवेयर को वॉट्सऐप कॉल के द्वारा फोन में इंस्टॉल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक यूजर द्वारा कॉल का जवाब न देने पर भी यह सॉफ्टवेयर उनके फोन में इंस्टॉल किया जा सकता है। कनाडा के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस सॉफ्टवेयर से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं को निशाना बनाया गया है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कितने लोगों को इस तरह के साइबर हमले का शिकार बनाया गया है। माना जा रहा है कि इस साइबर हमले के निशाने पर चुनिंदा लोग हैं। फिलहाल, रविवार तक फेसबुक के इंजीनियर इस सुरक्षा चूक को सही करने में जुटे थे। फेसबुक ने यूजर्स से नए वर्जन को अपडेट करने के लिए कहा है। बताया जाता है कि फेसबुक को अपडेट करने के साथ ही डाउनलोड फोल्डर में किसी संदिग्ध फाइल (जिसे आपने डाउनलोड न किया हो) के मिलने पर उसे डिलीट कर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। इसके अलावा संभव होने पर यूजर्स अपना फोन रीसेट भी कर सकते हैं।

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इस खबर से नाराज हो गए कबीर बेदी, बोले- तुरंत हटाकर माफी मांगिए

मीडिया में आने वाली खबरों को लेकर बॉलीवुड कलाकारों का रुख नरम-गरम रहता है। कभी कोई खबर किसी के दिल को छू जाती है, तो कभी दिल में नश्तर की तरह उतर जाती है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 21 February, 2020
Last Modified:
Friday, 21 February, 2020
kabirbedi

मीडिया में आने वाली खबरों को लेकर बॉलीवुड कलाकारों का रुख नरम-गरम रहता है। कभी कोई खबर किसी के दिल को छू जाती है, तो कभी दिल में नश्तर की तरह उतर जाती है। वरिष्ठ अभिनेता कबीर बेदी भी आजकल एक खबर को लेकर खासे परेशान हैं। परेशानी का आलम यह है कि बेदी ने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए खबर को झूठा करार दे दिया है। वह चाहते हैं कि मीडिया हाउस खबर को तुरंत हटाये और उनसे माफी मांगे।

दरअसल, बॉलीवुड की खबरों की वेबसाइट ‘स्पॉट बॉय’ ने 19 फरवरी को एक न्यूज प्रकाशित की थी। अपनी स्टोरी में निकिता दलवी ने दावा किया कि डब्बू रतनानी के कैलेंडर लॉन्च के मौके पर कबीर बेदी ने सनी लियोनी से मोबाइल नंबर मांगा। हालांकि, उन्हें निराशा हाथ लगी, क्योंकि सनी ने उन्हें अपने बजाये पति का नंबर दे दिया।

‘स्पॉट बॉय’ ने सोशल मीडिया पर स्टोरी शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘डब्बू रतनानी कैलेंडर लॉन्च: वरिष्ठ अभिनेता कबीर बेदी ने सनी लियोनी से उनका मोबाइल नंबर मांगा, लेकिन उन्होंने बदले में अपने पति डेनियल का नंबर देना चुना।’

खबर के सामने आते ही कबीर बेदी नाराज हो गए। उन्होंने ‘स्पॉट बॉय’ के ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर डाली। उन्होंने लिखा, ‘यह खबर पूरी तरह से गलत है कि मैंने सनी लियोनी का नंबर मांगा। डब्बू रतनानी की पार्टी में मैंने उनके पति का नंबर मांगा था और उन्होंने मेरे मोबाइल में डेनियल का नंबर टाइप किया। यह झूठा दावा करने वाले पब्लिकेशन ‘स्पॉट बॉय’ को खबर हटाकर खेद प्रकट करना चाहिए।’

वहीं, कुछ यूजर ने बेदी का समर्थन करते हुए कहा है कि आपको सफाई देने की जरूरत नहीं है। विवेक नाम के एक यूजर ने लिखा है ‘यदि आपने नंबर मांगा भी तो इससे किसी को परेशानी क्यों होनी चाहिए’।

 

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ट्रम्प का दौरा, सरकार की तैयारियां और उलझे दो बड़े पत्रकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे को लेकर सरकार जितनी उत्साहित है, उतनी उत्सुकता मीडिया में भी देखने को मिल रही है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 20 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 20 February, 2020
trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे को लेकर सरकार जितनी उत्साहित है, उतनी उत्सुकता मीडिया में भी देखने को मिल रही है। हालांकि, ये बात अलग है कि पत्रकार अपनी-अपनी तरह से सरकारी तैयारियों का आंकलन कर रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर ‘बीबीसी इंडिया’ के डिजिटल एडिटर मिलिंद खांडेकर जहां ट्रम्प को ‘फील गुड’ कराने की कवायद को गैरजरूरी करार दे रहे हैं,  वहीं ‘एबीपी न्यूज’ के वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी की नजर में यह सब सामान्य है। इसी मतभिन्नता को लेकर दोनों में सोशल मीडिया पर जुबानी जंग छिड़ी हुई है।

दरअसल, खांडेकर ने पहले डोनाल्ड ट्रम्प के उस विडियो पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा था कि अहमदाबाद में एयरपोर्ट से स्टेडियम तक 70 लाख भारतीय उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद उन्होंने ट्रम्प के स्वागत के लिए गुजरात और यूपी सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘जादूगर, आगरा में ट्रंप को यमुना नदी गंदी नहीं दिखेगी और अहमदाबाद में गरीबी। ताजमहल के पास यमुना का गंदा पानी साफ करने के लिए हरिद्वार से गंगा जल छोड़ा जा रहा है। अहमदाबाद में झुग्गियां ढंकने के लिए दीवार पहले ही बन रही है।’

खांडेकर का इस तरह सवाल उठाना शायद सुमित अवस्थी को पसंद नहीं आया। उन्होंने इसके जवाब में लिखा, ‘बॉस! घर में जब मेहमान आते हैं तो कोशिश यही होती है कि घर को साफ सुथरा कर दिया जाये। मेहमान के पसंद के पकवान बनें। कहीं कोई प्लास्टर उखड़ा है या दीवार में सीलन है तो वहां पेंटिंग से छुपा दिया जाता है। फर्श में गड्डा है, तो कालीन डाल छुपा देते हैं। ये तो बहुत सामान्य सी प्रक्रिया है’। इसके बाद तो दोनों में जुबानी जंग छिड़ गई।

मिलिंद खांडेकर ने अपने दूसरे ट्वीट में अवस्थी को जवाब देते हुए लिखा, ‘मेहमान के सामने अच्छा दिखना आपको ‘सामान्य’ लग सकता है। यमुना की गंदगी गंभीर समस्या है। अगर गंगा जल मिलाना ही हल है तो हमेशा के लिए कर दिया जाए।’

जिस पर अवस्थी का ट्वीट था, ‘बात मुझे सामान्य लगने या ना-लगने की नहीं है! बस जानना चाह रहा हूं कि क्या जब तक गंगा-यमुना या सभी नदियां जब तक पूरी तरह स्वच्छ ना हो जायें तब तक किसी विदेशी मेहमान को भारत नहीं बुलाना चाहिये? क्या कभी किसी और मेहमान के लिये ऐसी तैयारियां नहीं की गईं? या विरोध के लिये विरोध जरूरी है?’!

अवस्थी के इस ट्वीट को शायद बीबीसी इंडिया के डिजिटल एडिटर ने तंज के रूप में लिया, लिहाजा जवाब तो बनता था। उन्होंने आगे लिखा, ‘आप का तर्क अपनी जगह ठीक है। मैं उसका सम्मान करता हूं लेकिन तथ्यों को रखना या रिपोर्ट करना कब से ‘विरोध’ की श्रेणी में आ गया।’

अब बारी सुमित अवस्थी की थी, उन्होंने बाकायदा खांडेकर के सभी ट्वीट पर एक नजर डाली और एक नए सवाल के साथ सामने आये। अवस्थी ने पूछा, ‘सर... ‘जादूगर’ शब्द के बारे में क्या कहेंगे? ये कमेंट था, कटाक्ष था, व्यंग्य था या ये भी तथ्य था!! और हां, ये किसके लिये था? कौन है जादूगर’?? इसके बाद से दोनों तरह खामोशी है। न खांडेकर ने कोई जवाब दिया है और न ही अवस्थी ने कोई नया सवाल पूछा है, हालांकि, खामोशी कितनी देर तक कायम रहेगी, कहना मुश्किल है। वैसे केवल यही दो नहीं ट्रम्प के दौरे को लेकर कई अन्य पत्रकार भी शब्दों की अदला-बदली में मशगूल हैं।

 

 

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‘कठघरे’ में आया ‘आप की अदालत’, तो इन पत्रकारों ने दिया करारा जवाब

‘इंडिया टीवी’ के चर्चित शो ‘आप की अदालत’ को कठघरे में खड़ा करके सोशल मीडिया पर उसके बहिष्कार का अभियान चलाया जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 19 February, 2020
AapkiAdalat

‘इंडिया टीवी’ के चर्चित शो ‘आप की अदालत’ को कठघरे में खड़ा करके सोशल मीडिया पर उसके बहिष्कार का अभियान चलाया जा रहा है। ट्विटर पर यह मुद्दा लगातार ट्रेंडिंग में बना हुआ है और लोग वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘इंडिया टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के समर्थन और विरोध में अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

इस अभियान की शुरुआत ‘आप की अदालत’ के 15 फरवरी के एपिसोड के बाद हुई, जिसमें आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर को बतौर अतिथि आमंत्रित किया गया था। इस दौरान रजत शर्मा ने कई तीखे सवाल पूछे, खासकर आसाराम बापू से जुड़ा उनका सवाल उनके भक्तों को पसंद नहीं आया और उन्होंने रजत शर्मा और उनके चैनल को हिंदू विरोधी ही करार दे डाला। करीब 30 वर्षों से रजत शर्मा ‘आप की अदालत’ होस्ट करते आ रहे हैं और संभवतः यह पहला मौका है जब उन पर इस तरह के आरोप लगे हैं।

‘इंडिया टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ ने श्रीश्री से शाहीन बाग, सीरिया, राम मंदिर और यमुना नदी के किनारे आयोजित ‘विश्व संस्कृति समारोह‘ को लेकर उनकी संस्था आर्ट ऑफ लिविंग पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा लगाये गए 15 करोड़ के जुर्माने के बारे में पूछा। साथ ही उन्होंने आसाराम बापू का जिक्र करते हुए पूछा कि कैसे इस तरह का व्यक्ति स्व-घोषित भगवान बन सकता है और लाखों अनुयायी उसकी पूजा करते हैं?

शर्मा ने यह भी कहा कि आसाराम वास्तव में धर्म की आड़ में अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे थे। अपने अवैध हितों के लिए उन्होंने कई शहरों में आश्रमों का निर्माण करने के लिए जबरन भूमि प्राप्त की थी। इसके जवाब में श्रीश्री ने कहा, ‘ऐसे व्यक्ति न 'संत' (देवता) हैं, न ही ज्ञानी (बुद्धिमान व्यक्ति), और न ही धार्मिक हैं। यदि संत के वेश में कोई अपराध करता है, तो उसकी सजा आम आदमी की तुलना में दोगुनी होनी चाहिए’। रजत शर्मा के सवाल और श्रीश्री का जवाब सुनते ही आसाराम बापू के समर्थक आग बबूला हो गए और ट्विटर पर #BoycottAapkiAdalatShow ट्रेंड करने लगा।

हालांकि, रजत शर्मा को यूं घिरता देख उनके समर्थन में भी लोग सामने आये, जिसमें कई पत्रकार भी शामिल हैं। ट्विटर पर #IStandWithRajatSharma भी ट्रेंड कर रहा है। ‘इंडिया टीवी’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर सुशांत सिन्हा ने रजत शर्मा को हिंदू-विरोधी करार देने वालों को जमकर निशाने पर लिया। उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किये हैं। अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘आसाराम के बारे में सवाल पूछने से कोई पत्रकार हिन्दू विरोधी नहीं हो जाता’।

इसी तरह चैनल की एंकर मीनाक्षी जोशी ने भी हमलावरों पर पलटवार किया है। वहीं, इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा ने लिखा है, ‘रजत जी को लगभग दो दशक से नजदीक से काम करते हुए देखा है और सीखा है। जो भी उनके सामने आया, उससे तीखे से तीखे सवाल पूछे, लेकिन कभी किसी का धर्म नही देखा। हां, सम्मान हर धर्म का करते जरूर देखा। जो लोग उन्हें धर्म के चश्मे से देखना चाह रहे हैं उन पर तरस आता है’।

इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, उन्होंने ट्वीट किया है ‘हैरान हुई कि ट्विटर पर रजत शर्मा को #AntiHindu बता कर उनके शो को बॉयकॉट की बात की जा रही है। 26 साल से रजत जी को जानता हूं। आपके लाख मतभेद हों उनसे पर जब वो अदालत में सवाल पूछते हैं तो वो किसी को नहीं छोड़ते’।

आप की अदालत के इस पूरे शो को आप यहां देख सकते हैं। 

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सुधीर चौधरी के इस ‘सोशल’ ट्वीट को सियासी रंग देने का प्रयास

सुधीर चौधरी के ट्वीट को कांग्रेस सरकार पर हमले के रूप में भी देखा जा रहा है। जबकि ऐसे मामलों में राजनीतिक चश्मा उतारकर देखने की जरूरत है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 19 February, 2020
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सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले विडियो से लोग कुछ वक्त तक जुड़ाव महसूस करते हैं फिर उसे भूलकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन ‘जी न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के साथ ऐसा नहीं है। चौधरी केवल शब्दों में अपनी भावनाओं को बयां करने तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि वह सबकुछ करने का प्रयास करते हैं जो एक जिम्मेदार नागरिक को करना चाहिए।

हाल ही में उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर एक बच्चे का विडियो शेयर करते हुए उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने की इच्छा दर्शाई। उन्होंने लिखा, ‘इस बच्चे की बातें सुनकर सरकार पता नहीं शर्मिंदा होगी या नहीं लेकिन मैं बहुत शर्मिंदा हूं। अगर आपके पास इस होनहार बच्चे की पूरी जानकारी है तो मुझे भेजिए मैं इसकी पढ़ाई का पूरा खर्चा उठाऊंगा’। चौधरी यदि चाहते, तो अन्य लोगों की तरह सिर्फ ‘शब्द खर्च’ करके वाहवाही बंटोर सकते थे, मगर उन्होंने बच्चे के भविष्य के बारे में सोचा, जो शायद उनकी मदद से संवर सकता है।

सुधीर चौधरी के बच्चे का विडियो शेयर करने के बाद जहां कुछ ने उन्हें सराहा, वहीं कुछ ने विडियो को पुराना बताते हुए उन पर कटाक्ष भी किये। इसमें कोई शक नहीं कि विडियो काफी पुराना है, क्योंकि इसकी पुष्टि 2017 में यही विडियो शेयर करने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार ने की है, लेकिन इससे बच्चे के प्रति चौधरी की भावनाएं तो झूठी नहीं हो जातीं? उन्होंने बच्चे की व्यथा को सुना और उसकी मदद की इच्छा प्रकट की। और इसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है।

चौधरी के इस ‘सोशल’ ट्वीट को सियासी रंग देने का प्रयास भी किया गया है। युवा कांग्रेस के नेता अमन दुबे ने चौधरी के ट्वीट के जवाब में लिखा, ‘आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ये विडियो काफी पुराना है और इसे एबीपी न्यूज के पत्रकार ब्रिजेश राजपूत ने 2017 में शेयर किया था। जिस समय का यह विडियो है, उस दौरान मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह की सरकार थी, क्या आप अब भी उनकी सरकार पर शर्मिंदा हैं’? 

 

अब चूंकि विडियो में नजर आ रहा बच्चा खुद को मध्यप्रदेश के रीवा का बता रहा है, इसलिए सुधीर चौधरी के ट्वीट को कांग्रेस सरकार पर हमले के रूप में भी देखा जा रहा है। जबकि ऐसे मामलों में राजनीतिक चश्मा उतारकर देखने की जरूरत है। यदि चौधरी सिर्फ और सिर्फ ‘सरकार की शर्मिंदगी’ पर बात करते, तो उनके ट्वीट को ‘हमला’ माना जा सकता था, लेकिन उन्होंने बच्चे की शिक्षा का खर्चा उठाने का ऐलान सार्वजानिक रूप से किया है। वह चाहते हैं कि बच्चा आर्थिक चिंता से मुक्त होकर आगे पढ़ सके और इस ‘चाहत’ को नफरत नहीं बल्कि प्यार की जरूरत है।

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जामिया कांड: ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट से बैकफुट पर आए कई पत्रकार

जामिया कांड में अचानक आए उबाल में प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले अधिकांश लोग ‘इंडिया टुडे’ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से बैकफुट पर आ गए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 19 February, 2020
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जामिया कांड में अचानक आए उबाल में प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले अधिकांश लोग ‘इंडिया टुडे’ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से बैकफुट पर आ गए हैं। ‘इंडिया टुडे’ ने सोशल मीडिया पर पुलिस बर्बरता की वायरल हो रही क्लिपिंग का अनकट विडियो सामने रखा है, जिसमें दिखाया गया है कि नकाब पहने, हाथों में पत्थर लिए कुछ लोग लाइब्रेरी में जाकर छिपते हैं। इसके बाद पुलिस उनके पीछे आती है और लाठीचार्ज होता है। जबकि पहले विडियो में केवल पुलिस का लाठीचार्ज दिखाया गया था। इस नए विडियो से पहले की थ्योरी गड़बड़ा गई है। इसलिए जो लोग केंद्र और दिल्ली पुलिस पर हमलावर हो रहे थे, उन्होंने फिलहाल अपने जुबानी घोड़ों की लगाम खींच ली है।

इस फेहरिस्त में कई पत्रकार भी शामिल हैं। पहला विडियो जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस की जमकर आलोचना हुई। फ्रीलांस पत्रकार स्मिता शर्मा ने अपने ट्वीट में दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने लिखा, ‘दिल्ली पुलिस तुम्हें शर्म आनी चाहिए। आपके राजनीतिक मास्टर्स तो आते-जाते रहेंगे लेकिन इस घटना ने पुलिस पर एक कभी न मिटने वाला दाग लगा दिया है। इस कथित क्रूरता के लिए किसी भी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता’।

वहीं, पत्रकार राणा अयूब ने लिखा, ‘मुझे याद नहीं कि अपने देश को लेकर मैं आखिरी बार कब इतनी निराश थी। पुलिस ने उन असहाय छात्रों को निशाना बनाया, जिन्होंने बचने के लिए एक पवित्र जगह में शरण ली थी’।

इसी तरह रेडियो जॉकी सायमा ने भी अपने ही अंदाज में पुलिस पर कटाक्ष किया। उन्होंने विडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया ‘वे आए और कहा- तुम्हारे साथ, तुम्हारे लिए, हमेशा। और चले गए। 15 दिसंबर की शाम उन्होंने जामिया के छात्रों पर गुलाब बरसाए (जैसा कि आप देख सकते हैं)। लाइब्रेरी का एक्सक्लूसिव विडियो फुटेज, जहां पुलिस अपना जादू दिखा रही है। अब हमें दिखाओ कि बस कौन जला रहा है’?

दिल्ली पुलिस पर शब्दबाण चलाने वालों में वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने कहा ‘ये वही दिल्ली पुलिस है जो तमंचा लेकर शाहीनबाग पहुंचे लड़कों के आगे-पीछे हाथ बांधे खड़ी थी। जामिया में घुसकर ऐसे लाठियां बरसा रही है जैसे किसी ने 'निर्देश' दिया हो तो कि जो मिले उसे कूट देना। लानत है इस पुलिस पर जो 'साम्प्रदयिक' हो चुकी है।’

इसी तरह ‘टीवी9’ (TV9) के पूर्व समूह संपादक विनोद कापड़ी ने भी पुलिस पर हमला बोला। लेकिन अब जब ‘इंडिया टुडे’ ने वायरल क्लिपिंग का अनकट विडियो अपनी स्पेशल रिपोर्ट में दिखा दिया है, तो सभी संभलकर चल रहे हैं।

वहीं, सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस पर वार करने वालों पर पलटवार भी शुरू हो गया है। पूर्व पत्रकार मोनिका ने ताजा विडियो शेयर करते हुए लिखा है ‘इस नए विडियो ने प्रोपेगंडा फैलाने वालों के झूठ को उजागर कर दिया है, जो अभी भी छेड़छाड़ की गई क्लिपिंग को वायरल कर रहे हैं।’

इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरदाना ने ट्वीट किया है, ‘जामिया लाइब्रेरी में पुलिसिया पिटाई का आधा विडियो देख के उछल पड़ने वाले होशियार चंद अब सकते में हैं, पर हार नहीं मानेंगे। अभी शार्पशूटरों से कहा जाएगा ‘फैक्ट चेक’ कर दो कि पहले का विडियो और पिटाई का विडियो-अलग अलग साल के हैं।’

यहां देखें  इंडिया टुडे का एक्सक्लूसिव विडियो:

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पत्रकारों को पसंद नहीं आया बीजेपी नेता का ‘पाकिस्तानी राग’, यूं की खिंचाई

आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले कपिल मिश्रा अपने ट्वीट को लेकर खबरनवीसों के निशाने पर आ गए हैं

Last Modified:
Friday, 24 January, 2020
Kapil Mishra

आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले कपिल मिश्रा अपने ट्वीट को लेकर खबरनवीसों के निशाने पर आ गए हैं। कई पत्रकारों ने अपने-अपने अंदाज में मिश्रा की खिंचाई की है। दरअसल, भाजपा नेता ने दिल्ली विधानसभा चुनाव को भारत-पाकिस्तान के मैच से जोड़ते हुए ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा है, ‘8 फरवरी को दिल्ली की सड़कों पर हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का मुकाबला होगा’।

दरअसल, कपिल अपनी पुरानी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कुछ न कुछ बोलते रहते हैं और कई लोगों को यह सब सुनने की आदत भी हो गई है, लेकिन कपिल मिश्रा का इस तरह से हिन्दुस्तान-पाकिस्तान करना पत्रकारों को बिल्कुल भी रास नहीं आया।

स्वतंत्र पत्रकार स्मिता शर्मा ने कपिल पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, ‘छुपाना भी नहीं आता, जताना भी नहीं आता...हमें तुमसे मुहब्बत है...बताना भी नहीं आता...पाकिस्तान ना होता तो पता नहीं कितनों के सियासी करियर का क्या होता।’

स्मिता की तरह ही ‘एनडीटीवी इंडिया’ के रिपोर्टर सोहित मिश्रा ने भी भाजपा नेता को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कपिल मिश्रा के ट्वीट के जवाब में कहा, ‘आखरी बार बिना पाकिस्तान का नाम लिए कब चुनाव लड़ा गया था? सही जवाब देने वाले को उचित इनाम दिया जाएगा।’

‘एनडीटीवी’ के विदेश मामलों के संपादक उमाशंकर सिंह ने भी कपिल के बयान पर उन्हें निशाना बनाया है। उन्होंने लिखा है ‘इस नफ़रती नासूर को आईना दिखाया जाए’? इसके साथ ही सिंह ने कपिल मिश्रा का पुराना विडियो शेयर किया है जिसमें वह कहते नजर आ रहे हैं ‘क्या संघ की शाखाओं में आजकल ऐसा हिन्दू धर्म सिखाया जा रहा है कि उर्दू को देखते ही डर जाए, भड़क जाए? अगर कोई सोचता है कि दिल्ली की गंगा जमुनी संस्कृति को बर्बाद कर देगा तो वह ग़लतफ़हमी है। दिल्ली ने हमेशा ऐसी ताक़तों को उनकी सही जगह दिखाई है।” यह विडियो संभवतः तब का है जब मिश्रा आम आदमी पार्टी का हिस्सा थे।

वहीं, CNN-न्यूज18 की पॉलिटिकल एडिटर माया शकील ने अपने ही अंदाज में कपिल मिश्रा को जवाब दिया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है, ‘दिल्ली की सड़कों पर क्यों? यह फ़िरोज शाह कोटला स्टेडियम में खेला जा सकता है। भारत और पाकिस्तान में शांति के लिए क्रिकेट कूटनीति सबसे बेहतर तरीका है।’ साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग को टैग करते हुए मिश्रा के बयान पर गौर करने को कहा है।

उधर पत्रकारों के विरोध के बीच, चुनाव आयोग ने भी कपिल मिश्रा के बयानों को गंभीरता से लिया है। आयोग ने भाजपा नेता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उमाशंकर सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी देते हुए कहा है ‘कपिल मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मिश्रा अपने नफरती बयानों का किसी भी तरह बचाव नहीं कर सकता। आचारसंहिता के इस अतिगंभीर उल्लंघन के कारण मिश्रा की उम्मीदवारी रद्द होनी चाहिए। #ECI कठोर कार्रवाई कर ऐसे तत्वों को कड़ा संदेश देगा ये महज खानापूर्ति है’?

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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अब फेसबुक में इस बड़े पद पर काम करेंगे अविनाश पंत

पंत को इंडस्ट्री में काम करने का करीब 22 साल का अनुभव है और पूर्व में वह तमाम बड़े ब्रैंड्स के साथ काम कर चुके हैं

Last Modified:
Friday, 24 January, 2020
Avinash Pant

सोशल नेटवर्किंग साइट ‘फेसबुक’ (Facebook) ने भारत में अपनी लीडरशिप टीम को और मजबूती देते हुए इसमें एक और चेहरे को शामिल किया है। खबर है कि अविनाश पंत को फेसबुक इंडिया का मार्केटिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।

बताया जाता है कि कंपनी में मार्केटिंग डायरेक्टर का यह नया पद होगा। इसके तहत पंत को फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप समेत कंपनी के सभी एप्स की कंज्यूमर मार्केटिंग की दिशा में काम करना होगा। पंत को इंडस्ट्री में काम करने का करीब 22 साल का अनुभव है और पूर्व में वह ‘नाइकी’ (Nike), ‘कोका कोला’ (Coca-Cola), ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ (The Walt Disney Company) और ‘रेड बुल’ (Red Bull) जैसे बड़े ब्रैंड्स के साथ काम कर चुके हैं।

फेसबुक में नई जिम्मेदारी से पहले वह ‘रेड बुल’ कंपनी में मार्केटिंग डायरेक्टर (इंडिया) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’ (IIM) अहमदाबाद के छात्र रह चुके पंत भारत में फेसबुक के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन को रिपोर्ट करेंगे।   

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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पत्रकार रोहिणी सिंह के विरोध में ट्रोलर्स कर बैठे यह गलती, अब उड़ रहा मजाक

क्या ब्राजील के राष्ट्रपति को गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने का सरकार का फैसला सही है? सोशल मीडिया पर यह सवाल पूछा जा रहा है

Last Modified:
Monday, 20 January, 2020
Rohini SIngh

क्या ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो को गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने का मोदी सरकार का फैसला सही है? सोशल मीडिया पर यह सवाल पूछा जा रहा है। पत्रकार रोहिणी सिंह ने सरकार के इस फैसले को कठघरे में खड़ा किया है। आपको बता दें कि पिछले साल वरिष्ठ पत्रकार करन थापर ने भी अपने एक लेख में इस निर्णय पर नाखुशी जाहिर की थी। रोहिणी ने अपने ट्वीट में कहा है, ‘गणतंत्र दिवस समारोह का अतिथि वह व्यक्ति है, जिसने एक महिला सांसद से कहा था कि वह उसका बलात्कार नहीं करेगा, क्योंकि वह इसके लायक नहीं है। और बाद में उसने कहा था कि वह बदसूरत है और बलात्कार के लायक नहीं है। एक ऐसे व्यक्ति को अतिथि के रूप में आमंत्रित करना जो बलात्कार को प्रोत्साहित करता है, हर भारतीय महिला के गाल पर थप्पड़ के समान है’।

रोहिणी सिंह के इस ट्वीट को अब तक नौ हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। अधिकांश ने अपने कमेंट में उनकी बात से सहमति जताई है। हालांकि, उनका विरोध करने वालों की भी कोई कमी नहीं है, लेकिन इस विरोध में कई ऐसी गलती कर बैठे हैं, जो उनके मजाक की वजह बन गई है।

रोहिणी सिंह ने अपने पहले ट्वीट में केवल अतिथि के चुनाव पर सवाल उठाये थे, उनके नाम का जिक्र नहीं किया था। इस वजह से रोहिणी सिंह का विरोध करने वालों को समझ ही नहीं आया कि बात किस की हो रही है और उन्होंने अपने आप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को मुख्य अतिथि समझ लिया। इस आधे-अधूरे ज्ञान के चलते कई ने तो ट्रम्प को अपने ट्वीट में टैग करके रोहिणी को अमेरिकी वीसा न देने की अपील भी कर डाली। इन ट्रोलर्स का कहना था कि चूंकि रोहिणी सिंह उनके बारे में झूठ फैला रही हैं, इसलिए उन्हें भविष्य में वीसा न दिया जाए।

रोहिणी ने अपने ट्वीट में इसकी जानकारी देते हुए लिखा है ‘आज कुछ आईटी सेल ट्रोलर्स ने खुद को विदेश नीति विशेषज्ञ साबित करते हुए यह बताने का प्रयास किया कि मैं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को कितना कम समझती हूं। पहले कोई आईटी सेल वालों को बताए कि गणतंत्र दिवस का अतिथि कौन है।’ उन्होंने आगे लिखा ‘मैंने ट्वीट किया था कि महिलाओं के खिलाफ गलत सोच रखने वाला व्यक्ति गणतंत्र दिवस समारोह का अतिथि कैसे हो सकता है और कुछ ट्रोलर्स ने ट्रम्प को टैग करते हुए यह कहना शुरू कर दिया कि मुझे अमेरिकी वीसा न दिया जाए, क्योंकि मैं उनके बारे में दुष्प्रचार कर रही हूं। जबकि ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो अतिथि हैं न कि ट्रम्प। आईटी ट्रोलर्स अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का कारण हैं।’

रोहिणी के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए रितुराज पुरोहित नामक यूजर ने करन थापर का प्रकाशित लेख पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि के चुनाव पर सवाल उठाये थे। अपने लेख में थापर ने जायर बोलसोनारो के उन बयानों का जिक्र किया है, जो महिलाओं के प्रति उनकी सोच को दर्शाता है। यह लेख बिजनेस स्टैंडर्ड में पिछले साल प्रकाशित हुआ था।

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जानिए, क्यों ट्विटर पर राहुल कंवल और दैनिक भास्कर की हो रही आलोचना

सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स एक्टिव हैं। वे आए दिन किसी न किसी को ढूंढकर निशाना बना रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर ‘इंडिया टुडे’ के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल और हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ हैं।

Last Modified:
Monday, 13 January, 2020
rahulkanwal

पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू होने और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के कैंपस में 5 जनवरी को हुई हिंसा के बाद से सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स एक्टिव हैं। वे आए दिन किसी न किसी को ढूंढकर निशाना बना रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर ‘इंडिया टुडे’ के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल और हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ हैं।

दरअसल, राहुल कंवल और दैनिक भास्कर को ट्रोल किए जाने की वजह बताने से पहले ये बता दें कि ‘इंडिया टुडे’ की स्पेशल इन्वे​स्टिगेटिव टीम (SIT) ने अपनी तफ्तीश JNU Tapes में संभावित हमलावरों की पहचान की है। इस स्टिंग ऑपरेशन में एबीवीपी कार्यकर्ता अक्षत अवस्थी ने हिंसा के लिए खुद लड़के जुटाने की बात स्वीकारी है, जिसके बाद से ही उसके पत्रकारों को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना भी बनाया जा रहा है। स्टिंग ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाने वाले जमशेद खान और नितिन जैन के बाद कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई और अब राहुल कंवल पर शाब्दिक हमले हो रहे हैं।

अब बात करते हैं राहुल कंवल को ट्रोल किए जाने के पीछे की वजह पर। दरअसल, यूं तो जेएनयू में 5 जनवरी को छात्रों के साथ हुई हिंसा के कुछ दिनों बाद से ही राहुल कंवल ट्विटर पर पर ट्रोल किए जा रहे हैं। लेकिन इस बार वे ‘वंदे मातरम’ को लेकर ट्रोल हो रहे हैं। ट्विटर पर उनका एक विडियो तेजी से वायरल किया जा रहा है, जिसमें वह न्यूज रूम में दो शख्स से बात करते दिखाई दे रहे हैं। इस विडियो में उन्होंने प्रशांत भूषण का भी नाम लिया है। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'सर आपने वंदे मातरम के नारे लगाए... वह एंटी नेशनल है।'

दरअसल, इस विडियो के सामने आते ही #RahulKanwalExposed और  #VandeMataram ट्रेंड कराया जा रहा है। इस ट्रेंड के साथ ही राहुल कंवल की आलोचना भी की जा रही है और उनकी पत्रकारिता पर कई लोग सवाल भी उठा रहे हैं।

 

 

 

 

वहीं, विडियो वायरल होने के बाद राहुल कंवल ने एक ट्वीट को रिट्वीट कर जवाब भी दिया, जिसमें दावा किया कि जिस विडियो क्लिप को ट्विटर पर जमकर शेयर किया जा रहा है, वह अधूरा है। हालांकि इसके बाद राहुल कंवल ने विडियो का पूरा हिस्सा जारी किया और लोगों को सच्चाई से अवगत कराया। बता दें कि यह विडियो फरवरी, 2016 यानी करीब चार साल पुराना है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि एसआईटी ने उन वकीलों को बेनकाब किया था, जिन्होंने कैमरे के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने कन्हैया कुमार को अदालत में पेश किए जाने के दौरान पीटा, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। वकीलों ने वंदे मातरम कहते हुए कन्हैया कुमार को पीटा। किसी को पीट देना और फिर वंदे मातरम गा देना राष्ट्र विरोधी है और यह मैं फिर कहूंगा। जय हिंद।

वहीं दूसरी तरफ, दैनिक भास्कर भी ट्रोलर्स के निशाने पर है। ट्रोलर्स बायकाट दैनिक भास्कर’ (#BoycottDainikBhaskar)  हैशटैग चलाकर इसे ट्रेंड कराने में कामयाब रहे। दरअसल 11 जनवरी यानी शनिवार को ग्वालियर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के समर्थन में जनजागरण मंच द्वारा एक रैली का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इसी रैली की कवरेज को दैनिक भास्कर ने अपने अखबार में जगह दी, जिसकी हेडिंग थी- ‘सीएए का समर्थन...500 मीटर लंबी रैली, 4 किलोमीटर पैदल चले लोग’  

बस ‘500 मीटर लंबी रैली’ वाली बात ट्रोलर्स को दिल पर लग गई और सवाल खड़े करते हुए अखबार को निशाने पर ले लिया। ट्रोलर्स का कहना है कि रैली 500 मीटर नहीं, बल्कि इससे बहुत ही ज्यादा बड़ी थी।  

 

 

 

 

 

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सोशल मीडिया पर घिरे वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता, यूं मानी गलती

‘द प्रिंट’ की इस खबर पर प्रोफेसर शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और न्यूज पोर्टल के पत्रकार के साथ अपनी बातचीत का ऑडियो भी जारी किया

Last Modified:
Monday, 06 January, 2020
Shekhar Gupta

‘द प्रिंट’ की एक खबर को लेकर वेबसाइट के एडिटर-इन-चीफ और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता मुश्किल में घिर गए हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने खबर में हुई गलती पर खेद प्रकट किया, लेकिन इसका कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है। प्रोफेसर वशी मंत शर्मा ने शेखर गुप्ता की माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

दरअसल, आईआईटी कानपुर के जिस प्रोफेसर ने फैज की नज्म ‘हम देखेंगे‘ गाने वाले छात्रों के खिलाफ पिछले महीने शिकायत दर्ज कराई थी, वह वशी शर्मा ही हैं। शेखर गुप्ता के न्यूजपोर्टल ‘द प्रिंट’ ने इस संबंध में हाल ही में एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसमें प्रोफेसर को ‘लव जिहाद’ और मुस्लिम विरोधी बताते हुए कहा गया था कि वह दलितों के उत्थान के भी पक्षधर नहीं हैं।

‘द प्रिंट’ की इस खबर पर प्रोफेसर शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और न्यूज पोर्टल के पत्रकार के साथ अपनी बातचीत का ऑडियो भी जारी किया। शर्मा ने अपने ट्वीट में शेखर गुप्ता, खबर लिखने वाले प्रशांत श्रीवास्तव और उन्नति शर्मा को टैग करते हुए लिखा, ‘मैं आपके रिपोर्टर के साथ बातचीत का अनकट ऑडियो पोस्ट कर रहा हूं, कृपया ध्यान से सुनें और जो लिखा गया है उससे तुलना करें।’ प्रोफेसर वशी मंत शर्मा ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये, जिसके बाद शेखर गुप्ता आगे आये और उन्होंने खबर में हुई गलती के लिए खेद प्रकट किया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा ‘आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर वशी मंत शर्मा के प्रोफाइल में हमने गलती से उन्हें भी ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया, जो दलित उत्थान की निंदा करता है। हम इस गलती पर खेद प्रकट करते हुए उनसे माफी मांगते हैं’।

हालांकि, शेखर गुप्ता की माफी का प्रोफेसर पर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। शेखर को जवाबी ट्वीट में वशी मंत शर्मा ने कहा, ‘शेखर गुप्ता मुझे आपकी माफी स्वीकार नहीं है। आपने तब माफी मांगी, जब मैंने आपके पत्रकार के साथ अपनी बातचीत सामने लाकर आपका झूठ उजागर किया।’

इसके साथ ही प्रोफेसर ने ‘द प्रिंट’ की खबर में अपने ऊपर लगे प्रत्येक आरोप की सफाई भी दी है। सोशल मीडिया पर ‘इस गलती’ के लिए द प्रिंट और शेखर गुप्ता को निशाना बनाया जा रहा है। पेशे से वकील अनिरुद्ध नामक यूजर ने तो प्रोफेसर को शेखर गुप्ता पर केस करने की सलाह दी है।   

‘द प्रिंट’ द्वारा भूल सुधार के बाद प्रकाशित की गई स्टोरी आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं:

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