सोशल मीडिया पर पोस्ट को लेकर पुलिस के एक्शन से सुप्रीम कोर्ट नाराज, कही ये बात

कोलकाता पुलिस को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम नागरिकों को सरकार की आलोचना करने के लिए प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2020
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों की आलोचना करने और कथित रूप से राजनीतिक तंत्र को बदनाम करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए दूरदराज के लोगों को पुलिस द्वारा समन भेजने के चलन पर चिंता जाहिर की है। कोलकाता पुलिस को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम नागरिकों को सरकार की आलोचना करने के लिए प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में कहा, ‘सरकारी तंत्र की आलोचना और उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट्स डालने पर हम नागरिकों को देश के एक कोने से दूसरे कोने नहीं भेज सकते हैं।’ पुलिस को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ऐसी पोस्ट को आधार बनाकर लोगों को एक कोने से दूसरे कोने घसीटने की हरकत बंद करें। हम बोलने की स्वतंत्रता (Freedom Of Speech) पर रोक नहीं लगने देंगे।’

दरअसल, दिल्ली निवासी रोशनी बिस्वास (29) ने लॉकडाउन के मानदंडों को लागू नहीं करने को लेकर सोशल पोस्ट्स के जरिये पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की थी। इन पोस्ट में महिला ने कोरोना महामारी के बीच कोलकाता के भीड़भाड़ वाले राजा बाजार इलाके की तस्वीर शेयर की थीं और लॉकडाउन के नियमों को लेकर ममता सरकार की ढिलाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद बंगाल पुलिस ने महिला को समन जारी करते हुए कड़ी चेतावनी दी थी।

पुलिस ने इस संबंध में विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत भड़काने का आरोप लगाते हुए एक प्राथमिकी दर्ज की थी। चूंकि उस इलाके में एक समुदाय विशेष की ज़्यादा आबादी है, इसलिए पुलिस ने पोस्ट को सांप्रदायिक नफरत भरा करार दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता ने सबसे पहले मई के महीने में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने महिला की फेसबुक पोस्ट को लेकर उसे पूछताछ के लिए पुलिस के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा था। रोशनी ने अपने वकील महेश जेठमलानी के माध्यम से पुलिस द्वारा उन्हें समन जारी करने को चुनौती दी और कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल पुलिस को फटकार लगाई है।

लोगों को संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (A) के तहत दी जाने वाली बोलने की आजादी के अधिकार का हवाला देते हुए जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, ‘सीमा को पार न करें। भारत को स्वतंत्र देश बने रहने दीजिए। सुप्रीम कोर्ट के रूप में हम बोलने की आज़ादी की रक्षा के लिए यहां हैं। संविधान ने इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट बनाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य आम नागरिकों को प्रताड़ित न करें।'

पीठ का यह भी कहना था, ‘सरकार की आलोचना वाले सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए रोशनी को पुलिस द्वारा समन भेजना बोलने के अधिकार के साथ छल है। किसी भी नागरिक पर सिर्फ यह कहने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है कि सरकार कोरोना महामारी से निपट पाने में असफल सिद्ध हो रही है।’ पीठ ने कहा, ‘कल को कोलकाता, चेन्नई, मुंबई और मणिपुर की पुलिस भी यही करेगी और देश के सभी राज्यों के लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए समन भेजने लगेगी’।

राज्य सरकार के काउंसिल ने इसके बाद बीच का रास्ता निकालते हुए कहा कि कोलकाता पुलिस दिल्ली जाकर महिला से पूछताछ करेगी। इसलिए महिला को जांच में सहयोग करने को कहा जाए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस पर रजामंदी दी।

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जल्द बदल सकता है Facebook का नाम: रिपोर्ट

कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग 28 अक्टूबर को इस बारे में घोषणा कर सकते हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 October, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 October, 2021
Facebook

सोशल नेटवर्किंग साइट ‘फेसबुक’ को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से खबर मिली है कि कंपनी अब अपना नाम बदलने पर विचार कर रही है। ऐसी खबरें हैं कि कंपनी अपनी छवि में बदलाव लाने के प्रयास कर रही है और इसी के तहत नया नाम रखा जा सकता है।

बताया जाता है कि कंपनी द्वारा मेटावर्स (metaverse) तैयार करने के उद्देश्य की दिशा में यह कवायद की जा रही है। जानकारों के मुताबिक मेटावर्स इस तरह की तकनीक है, जिसमें मनुष्य डिजिटल जगत में वर्चुअली प्रवेश कर सकेगा। यह कुछ ऐसा महसूस होगा जैसे आप किसी से बात कर रहे हैं तो वह आपके सामने ही बैठा है, जबकि असल में दोनों लोग इंटरनेट के जरिए मीलों दूर से जुड़े हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि फेसबुक के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कथित तौर पर 28 अक्टूबर को कंपनी के वार्षिक कनेक्ट सम्मेलन में नाम परिवर्तन के विषय पर चर्चा करने की योजना बनाई है। लेकिन रिपोर्ट्स का कहना है कि इस बारे में जल्द ही घोषणा की जा सकती है।

हाल ही में इस तरह की रिपोर्ट्स भी आई थीं कि फेसबुक एक मेटावर्स या एक साझा आभासी दुनिया (shared virtual world) बनाने की योजना बना रहा है, जिसे लोग इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस कर सकते हैं।

बताया जाता है कि फेसबुक की रीब्रैंडिंग के जरिये विभिन्न सोशल मीडिया ऐप जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म्स को एक छतरी के नीचे लाया जा सकता है। हालांकि, फेसबुक के प्रवक्ता ने इस बारे में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

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Google ने ये 3 Apps किए बैन, आप भी फोन से करें तुरंत डिलीट

टेक कंपनी गूगल ने हाल ही में 150 से ज्यादा खतरनाक ऐप्स को बैन किया था, लेकिन अब गूगल ने फिर प्ले स्टोर (Play Store) से तीन खतरनाक ऐप्स को हटा दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 October, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 October, 2021
Google

टेक कंपनी गूगल ने हाल ही में 150 से ज्यादा खतरनाक ऐप्स को बैन किया था, लेकिन अब गूगल ने फिर प्ले स्टोर (Play Store) से तीन खतरनाक ऐप्स को हटा दिया है। गूगल ने यह कदम यूजर्स की प्राइवेसी और उनकी सुरक्षा के मद्देनजर उठाया है, लिहाजा इन इन ऐप्स को तुरंत अपने फोन से डिलीट कर देना चाहिए।

ये तीनों ऐप फोटो एडिटिंग से जुड़े हुए हैं और इनके नाम हैं– Magic Photo Lab – Photo Editor, Blender Photo Editor-Easy Photo Background Editor और Pix Photo Motion Edit 2021.

इस साल Google I/O में कंपनी ने बताया था कि अभी 3 बिलियन एक्टिव एंड्रॉयड डिवाइस है। खतरनाक ऐप्स को बैन करके गूगल यूजर्स को सेफ रखना चाहता है। जिन ऐप्स को बैन किया गया है वो यूजर्स की पर्सनल जानकारी और पैसे चुराते थे।

 

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भारत में समाचार प्रकाशकों के लिये गूगल ने शुरू की यह पहल

यह कार्यक्रम जीएनआई (गूगल समाचार पहल) कार्यक्रमों के अंतर्गत नवीनतम पहल है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 06 October, 2021
Last Modified:
Wednesday, 06 October, 2021
googlenews

आईटी कंपनी गूगल ने मंगलवार को स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्न समुदाय के लिये मूल खबरें देने वाले छोटे व मझोले स्तर के समाचार प्रकाशकों को समर्थन देने को लेकर गूगल समाचार पहल विज्ञापन लैब ( Google News Initiative Advertising Lab) शुरू करने की घोषणा की।

गूगल ने ‘ब्लॉगपोस्ट’ में लिखा है कि कार्यक्रम के तहत टीमों के तकनीकी और उत्पाद प्रशिक्षण के साथ-साथ संगठन के डिजिटल विज्ञापन राजस्व को बढ़ाने में मदद करने के लिए तकनीकी कार्यान्वयन पर ध्यान दिया जाएगा। यह पहल उन प्रकाशकों को ध्यान में रखकर की गयी, जहां संस्थान में (न्यूज रूम) 100 लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

इसमें कहा गया है कि कार्यक्रम के तहत 800 तक छोटे एवं मझोले समाचार प्रकाशकों का चयन किया जाएगा और उनकी सामग्री प्रबंधन प्रणाली, वेबसाइट और विज्ञापन सेटअप के अनुकूलन चीजों को करने के लिये मार्गदर्शन को लेकर उनके साथ मिलकर काम किया जाएगा।

यह कार्यक्रम जीएनआई (गूगल समाचार पहल) कार्यक्रमों के अंतर्गत नवीनतम पहल है। इसमें गूगल सभी आकार-प्रकार के समाचार संगठनों के साथ सीधे काम कर रही है ताकि नए उत्पादों, कार्यक्रमों और भागीदारी को विकसित किया जा सके जिससे समाचार प्रकाशकों को अपने व्यवसाय को बढ़ाने में मदद मिल सके।

नए कार्यक्रम के लिये आवेदन पांच नवंबर, 2021 तक दिये जा सकेंगे।

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घंटों परेशान रहे फेसबुक, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम यूजर्स, कंपनी ने यूं जताया खेद

तकनीकी खराबी के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप सोमवार को करीब छह घंटे तक पूरी दुनिया में बंद रहे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 05 October, 2021
Last Modified:
Tuesday, 05 October, 2021
Social Media

तकनीकी खराबी के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप सोमवार की रात से करीब छह घंटे तक पूरी दुनिया में बंद रहे। इसके कारण इन तीनों प्लेटफॉर्म्स के अरबों यूजर्स को परेशानियों का सामना करना पड़ा। मंगलवार की तड़के करीब साढ़े चार बजे फेसबुक ने सेवाएं फिर से बहाल होने की जानकारी दी। इसके साथ ही कंपनी यूजर्स को हुई असुविधा के लिए माफी भी मांगी। 

बता दें कि यह समस्या सोमवार की रात करीब 9.15 बजे सामने आई थी। इसके बाद लोगों ने तुरंत ट्विटर पर प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। अपनी सेवाओं के बंद होने की घोषणा करने के लिए तीनों प्लेटफार्म्स ने भी ट्विटर का सहारा लिया।

फेसबुक ने एक ट्वीट में कहा, ‘हम जानते हैं कि कुछ लोगों को हमारे ऐप्स और उत्पादों को एक्सेस करने में परेशानी हो रही है। हम चीजों को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए काम कर रहे हैं और किसी भी असुविधा के लिए हम क्षमा चाहते हैं।’

वॉट्सऐप ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर कहा, ‘हम जानते हैं कि कुछ लोग इस समय वॉट्सऐप पर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हम चीजों को वापस सामान्य करने के लिए काम कर रहे हैं और जल्द से जल्द अपडेट भेजेंगे। धैर्य बनाए रखने के लिए आपका धन्यवाद।’   

वहीं, इंस्टाग्राम ने ट्वीट किया, ‘इंस्टाग्राम और दोस्तों के लिए अभी थोड़ा समय कठिन है और आपको उनका उपयोग करने में समस्या हो सकती है। हम इस समस्या को दूर करने में जुटे हैं।’

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसबुक के ‘डोमेन नेम सिस्टम’ (DNS) में खराबी के कारण यह परेशानी हुई। फेसबुक के पूर्व मुख्य सुरक्षा अधिकारी एलेक्स स्टैमोस (Alex Stamos) जो अब स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के इंटरनेट ऑब्जर्वेटरी के निदेशक हैं, के अनुसार इस समस्या का कारण नेटवर्क मैनेजमेंट सिस्टम का खराब कॉन्फ़िगरेशन या कोड पुश हो सकता है।  

यूजर्स को विभिन्न वेबसाइट्स और सर्विसेज की वास्तविक जानकारी प्रदान करने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ’डाउनडिटेक्टर’ (Downdetector), ने वॉट्सऐप के लिए लगभग 80,000 और फेसबुक के लिए 50,000 से अधिक रिपोर्ट दर्ज की हैं।

फेसबुक के सह-संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने यूजर्स को हुई परेशानी के लिए माफी मांगी है। इन तीनों प्लेटफॉर्म्स की सेवाओं में आई दिक्कत एवं करोड़ों यूजर्स को हुई परेशानी के लिए उन्होंने अफसोस जताया है। इस तकनीकी खामी की जानकारी देते हुए जुकरबर्ग ने कहा कि इनकी सेवाएं बहाल होना शुरू हो गई हैं और लोग करीब छह घंटे के व्यावधान के बाद इनका इस्तेमाल करना शुरू कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी खामी की वजह से यूजर्स घंटों तक फेसबुक, इंस्टाग्राम और वाट्सऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाए।

जुकरबर्ग ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखे एक पोस्ट में कहा, 'फेसबुक, इंस्टाग्राम और वाट्सऐप एवं मैसेंजर अब दोबारा वापस आ रहे हैं। इन सेवाओं में हुई दिक्कत दुखद है। आप जिन लोगों के बारे में सोचते और चिंता करते हैं उनसे जुड़े रहने के लिए आप इन सेवाओं पर कितना निर्भर हैं, इसे हम जानते हैं।'

गौरतलब है कि स्मार्टफोन के प्रसार और सस्ते डेटा की उपलब्धता के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारत में यूजर्स की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। वॉट्सऐप के भारत में 53 करोड़ यूजर्स हैं। इसके बाद 44.8 करोड़ यूजर्स के साथ यूट्यूब का नंबर आता है। फेसबुक के 41 करोड़ यूजर्स हैं, जबकि इंस्टाग्राम और ट्विटर के क्रमश: 21 करोड़ और 1.75 करोड़ यूजर्स हैं।

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इस फिल्म को लेकर दीपक चौरसिया ने जतायी नाराजगी, यूजर्स का मिला समर्थन

अभिनेता प्रतीक गांधी की एक नई आने वाली फिल्म विवादों में घिरती हुई नजर आ रही है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 20 September, 2021
Last Modified:
Monday, 20 September, 2021
Deepak54548

अभिनेता प्रतीक गांधी ने सोनी लिव (Sony Liv) की वेब सीरीज ‘स्कैम 1992’ में हर्षद मेहता का किरदार निभाकर पूरे देश के सिनेमा प्रेमियों को अपना दीवाना बना लिया था। उन्हें इस वेब सीरीज में अभिनय के बाद पूरे देश में पहचान मिली और कई अवॉर्ड भी उन्हें प्राप्त हुए, लेकिन अब उनके एक नई आने वाली फिल्म विवादों में घिरती हुई नजर आ रही है।

उनकी आने वाली फिल्म का नाम पहले ‘रावण लीला’ था, जिसे बाद में ‘भवई’ कर दिया गया। फिल्म के ट्रेलर के आने के बाद से ही मेकर्स पर हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया जा रहा है।

दरअसल फिल्म की कहानी के मुताबिक, प्रतीक गांधी को रामलीला में रावण का किरदार निभाते हुए दिखाया गया है, जो उसी रामलीला में सीता का किरदार निभाने वाली लड़की से प्यार करने लगता है। रावण और हिंदू देवी-देवताओं के बीच संवाद और उसे फिल्माए जाने को लेकर भी लोगों में आक्रोश है। इस फिल्म में श्री राम के किरदार को कमतर दिखाया गया है।

वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने भी ट्वीट कर इस पूरे मसले पर अपनी राय दी है। उन्होंने लिखा, ‘रावणलीला’ उर्फ ‘भवई’ के ट्रेलर में रावण और मां सीता के किरदारों में प्यार दिखाने की कोशिश नीचता की हद है। कला के नाम पर पूज्य मूल्यों, आस्था के प्रतीकों के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त से परे है। मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता का कड़ा विरोध हो। ऐसे फिल्मों को बैन करना चाहिए।

दीपक चौरसिया के इस ट्वीट का लोग समर्थन कर रहे हैं और फिल्म को प्रतिबंधित करने की मांग उठाई जा रही है। बता दें इस फिल्म के प्रदर्शन की तारीख 1 अक्टूबर रखी गई है।

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ANI पर उठे इन सवालों को लेकर एडिटर स्मिता प्रकाश ने जताई नाराजगी, यूं किया ‘पलटवार’

पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के दलित होने को लेकर हो रही मीडिया कवरेज पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 20 September, 2021
Last Modified:
Monday, 20 September, 2021
Smita Prakash

पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के दलित होने को लेकर हो रही मीडिया कवरेज पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। दरअसल, पंजाब के इतिहास में चन्नी पहले दलित मुख्यमंत्री हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू के समर्थन से चन्नी सीएम बन रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों को इस पूरे मसले पर हो रही मीडिया कवरेज से एतराज था।

बार-बार नए सीएम के साथ-साथ दलित शब्द का प्रयोग कुछ लोगों को नागवार गुजरा। इसी बीच बीजेपी यूपी के मीडिया पैनलिस्ट प्रशांत उमराव ने एक ट्वीट करते हुए न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ (ANI) पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने लिखा, ‘बॉम्बे हाई कोर्ट के एक निर्णय को आधार मानकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नें सभी मीडिया संस्थानों को परामर्श पत्र भेज कर कहा था कि समाचारों में 'दलित' शब्द की जगह अनुसूचित जाति शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए, जो कि संवैधानिक है। फिर भी ‘ANI’ जैसे संस्थान वैमनस्यता फैला रहे हैं।

उनके इस ट्वीट पर ‘ANI’ की एडिटर स्मिता प्रकाश ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने जवाब देते हुए लिखा कि आपको सिर्फ ANI दिखता है। इसके बाद उन्होंने लिखा कि हर अखबार दलित शब्द का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने अपने ट्वीट में कुछ बड़े अखबारों के स्क्रीनशॉट भी इस्तेमाल किए, जिसमें साफ-साफ दलित जैसे शब्दों का प्रयोग बखूबी किया जा रहा है। स्मिता प्रकाश के इस ट्वीट की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। इस विषय पर अधिकांश लोगों का यह मत है कि इस कमी को दूर करने के लिए सिर्फ एक संस्था नहीं बल्कि सभी संस्थानों को आगे आना होगा, तभी इस देश और समाज से ये भेद नष्ट होगा।

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फेसबुक इंडिया ने पूर्व IAS अधिकारी राजीव अग्रवाल को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

इससे पहले वह ऑनलाइन टैक्सी सेवा प्रदाता ‘उबर’ में पब्लिक पॉलिसी हेड (भारत और दक्षिण एशिया) के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 20 September, 2021
Last Modified:
Monday, 20 September, 2021
Facebook India

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) ने पूर्व आईएएस अधिकारी राजीव अग्रवाल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कंपनी ने उन्हें पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर बनाया है। कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अग्रवाल भारत में फेसबुक के लिए महत्वपूर्ण नीति विकास पहलों (policy development initiatives) को परिभाषित करेंगे और उनका नेतृत्व करेंगे।

अपनी इस भूमिका में वह यूजर्स सेफ्टी, डाटा प्रोटेक्शन और प्राइवेसी व इंटरनेट गवर्नेंस को कवर करने वाली तमाम पहलों का नेतृत्व करेंगे। वह ‘फेसबुक इंडिया’ के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन को रिपोर्ट करेंगे और भारत की लीडरशिप टीम का हिस्सा होंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह इस पद पर अंखी दास की जगह लेंगे, जिन्होंने एक विवाद में फंसने के बाद पिछले साल अक्टूबर में इस्तीफा दे दिया था।

अग्रवाल को भारतीय प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस) के रूप में 26 वर्षों का अनुभव है। वह उत्तर प्रदेश राज्य के नौ जिलों में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत रहे हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (वाणिज्य मंत्रालय) में संयुक्त सचिव के रूप में बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) पर भारत की पहली राष्ट्रीय नीति का संचालन किया और देश के बौद्धिक संपदा कार्यालयों के डिजिटल परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वह अन्य देशों के साथ आईपीआर पर भारत के प्रमुख वार्ताकार होने के अलावा भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार मंच से भी जुड़े रहे हैं। ‘फेसबुक इंडिया’ से पहले ऑनलाइन टैक्सी सेवा प्रदाता ‘उबर’ में पब्लिक पॉलिसी हेड (भारत और दक्षिण एशिया) के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

राजीव अग्रवाल की नियुक्ति के बारे में अजीत मोहन का कहना है, ‘मैं इस बात से उत्साहित हूं कि पब्लिक पॉलिसी टीम का नेतृत्व करने के लिए राजीव हमारे साथ जुड़ रहे हैं। अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के साथ राजीव पारदर्शिता, जवाबदेही, सशक्त और सुरक्षित समुदायों (safe communities) के निर्माण के हमारे मिशन को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।‘

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ANI के ब्यूरो चीफ कर बैठे ऐसा ट्वीट, ‘फजीहत’ के बाद मांगनी पड़ी माफी

न्यूज एजेंसी ‘एशियन न्यूज इंटरनेशनल’ (ANI) के ब्यूरो चीफ नवीन कपूर एक खबर को लेकर आलोचकों के निशाने पर आ गए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Sunday, 12 September, 2021
Last Modified:
Sunday, 12 September, 2021
Naveen Kapoor Tweet

न्यूज एजेंसी ‘एशियन न्यूज इंटरनेशनल’ (ANI) के नेशनल ब्यूरो चीफ नवीन कपूर एक खबर को लेकर आलोचकों के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, उन्होंने एक ट्वीट में अफगान राजनेता डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला के गिरफ्तार होने और उन्हें अज्ञात जगह पर लेकर जाने की बात कही थी। उनके इस ट्वीट के बारे में जब चर्चा होने लगी तो खुद डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने ट्वीट कर इस खबर को भ्रामक बता दिया। डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने एक ट्वीट करते हुए लिखा कि उनके बारे में चलाई जा रही यह न्यूज पूरी तरह से आधारहीन है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि पत्रकारिता में फैक्ट्स को चेक कर लेना चाहिए। मैं इन खबरों का खंडन करता हूं। डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला के इस ट्वीट के बाद आलोचक नवीन कपूर की आलोचना करने लगे।

हालांकि नवीन कपूर ने भी एक ट्वीट कर माफी मांग ली है। नवीन कपूर ने ट्वीट करते हुए लिखा,  ‘मुझे यह न्यूज एक विश्वसनीय सूत्र से ही मिली, लेकिन शायद उसने मुझे बहका दिया। जैसे ही मुझे मेरी गलती के बारे में पता चला मैंने उसे हटा दिया है। मुझे खुशी है कि आप स्वस्थ हैं।

आपको बता दें कि अब पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा है और ऐसे में आए दिन किसी न किसी की हत्या की न्यूज़ आती रहती है लेकिन समाचार4 मीडिया का मानना है कि खबर जब तक पुख्ता नहीं हो, उसे पब्लिश नहीं करना चाहिए।

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भारत में डिजिटल न्यूज स्टार्टअप के लिए गूगल ने शुरू किया प्रोत्साहन कार्यक्रम

टेक कंपनी गूगल ने गुरुवार को देश में स्वतंत्र स्थानीय या एकल विषय पर केंद्रित पत्रकारिता संगठनों के लिए एक प्रोत्साहन कार्यक्रम की घोषणा की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 10 September, 2021
Last Modified:
Friday, 10 September, 2021
Google

टेक कंपनी गूगल ने गुरुवार को देश में स्वतंत्र स्थानीय या एकल विषय पर केंद्रित पत्रकारिता संगठनों के लिए एक प्रोत्साहन कार्यक्रम ‘जीएनआई स्टार्टअप लैब इंडिया’ (Google News Initiative Startups Lab India) की घोषणा की।

अपनी जीएनआई पहल के तहत गूगल न्यूज चार महीने का कार्यक्रम शुरू करेगी, जो स्वतंत्र स्थानीय या एकल विषय पर केंद्रित पत्रकारिता संगठनों को गहन शिक्षण, कौशल प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के जरिए वित्तीय तथा परिचालन स्थिरता हासिल करने में मदद करेगा।

गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि इकोस ( Echos) (एक वैश्विक नवाचार प्रयोगशाला) और डिजीपब न्यूज इंडिया फाउंडेशन (DIGIPUB News India Foundation) के साथ साझेदारी में बनाया गया जीएनआई स्टार्टअप लैब इंडिया (GNI Startups Lab India) कार्यक्रम स्थानीय और वंचित समुदायों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली पत्रकारिता की मदद करेगा।

ब्लॉग पोस्ट के मुताबिक सभी भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाले समाचार संगठन स्टार्टअप कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन 18 अक्टूबर 2021 तक किया जा सकता है और भारत में पहले समूह के रूप में 10 स्वतंत्र डिजिटल समाचार प्रकाशकों का चयन किया जाएगा।

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सोशल मीडिया पर परोसे जा रहे फर्जी कंटेंट को लेकर SC ने जताई चिंता, कही ये बात

देश में जिस तेजी से वेब पोर्टल, यू-ट्यूब चैनल और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के जरिये सांप्रदायिकता फैलाई जा रही है, उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 03 September, 2021
Last Modified:
Friday, 03 September, 2021
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देश में जिस तेजी से वेब पोर्टल, यू-ट्यूब चैनल और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के जरिये सांप्रदायिकता फैलाई जा रही है, उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। एक मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को कोर्ट ने कहा कि इस तरह की मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं है। वे अपनी पसंद की कोई भी चीज प्रकाशित-प्रसारित कर सकते हैं।

चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि वह बिना किसी जिम्मेदारी के आम लोगों, जजों और संस्थाओं को बदनाम करने वाली खबरें चलाते हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट के आधार के बारे में पूछे जाने पर वे जवाब नहीं देंगे।

कोर्ट ने कहा कि यदि आप यू-ट्यूब पर जाते हैं तो पाएंगे कि वहां कितनी फर्जी खबरें और विकृतियां हैं? वहां कोई नियंत्रण नहीं है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह इस पर लगाम लगाने के लिए वेब पोर्टल और अन्य संगठनों पर जवाबदेही तय करने के बारे में वास्तव में गंभीर है।

बता दें कि पीठ ने ये टिप्पणियां जमीयत उलेमा-ए-हिंद सहित अन्य द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाओं में केंद्र सरकार को फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने और मीडिया के एक वर्ग के खिलाफ सांप्रदायिक नफरत परोसने व कट्टरता फैलाने के लिए सख्त कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

इस मामले में पहले ही कोर्ट सरकार से यह कह चुका है कि उसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए फेक न्यूज फैलाने पर नियंत्रण की व्यवस्था बनानी चाहिए। गुरुवार को सरकार की तरफ से जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और समय की मांग की गई। इसी दौरान कोर्ट ने यू-ट्यूब चैनल और सोशल मीडिया का भी मसला उठा दिया।

सॉलिसीटर जनरल के अलावा मामले में एक पक्ष के लिए पेश हुए वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने भी इससे सहमति जताई। उन्होंने कहा कि टीवी चैनलों पर नियंत्रण के लिए पहले से केबल टीवी रेगुलेशन एक्ट, 1995 है। उसी के तहत तब्लीगी जमात मामले में याचिकाकर्ता कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लेकिन वेब मीडिया अभी भी स्वच्छंद है।

वहीं, सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि वेब और सोशल मीडिया पर आवंछित गतिविधियों पर नियंत्रण के 'इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स, 2021' बनाया गया है। लेकिन इसके प्रावधानों को अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने दिल्ली, बॉम्बे, मद्रास, कलकत्ता और केरल हाई कोर्ट में चुनौती दे दी है। कुछ मामलों में हाई कोर्ट ने मीडिया के खिलाफ कार्रवाई पर रोक भी लगा दी है। मेहता ने निवेदन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने सभी मामलों की सुप्रीम कोर्ट में एक साथ सुनवाई के लिए आवेदन दिया है। कोर्ट उसे जल्द सुने।

इस दौरान मामले के एक याचिकाकर्ता ने अपनी प्रार्थना को संशोधित कर दोबारा दाखिल करने का निवेदन किया, ताकि आज कही जा रही बातों पर भी आगे चर्चा हो सके। कोर्ट ने इसकी अनुमति देते हुए सुनवाई 6 हफ्ते के लिए टाल दी।

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