देश में पॉडकास्ट और ऑडियो स्ट्रीमिंग का तेजी से बढ़ता बाजार अब ब्रैंड्स की नई पसंद बन रहा है- कम शोर में ज्यादा असर
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Vikas Saxena
अकसर सुबह के समय मेट्रो या लोकल ट्रेन में सफर करते हुए कई लोग ईयरफोन लगाते हैं। जब फोन जेब में होता है, स्क्रीन बंद होती है, लेकिन ऑडियो चलता रहता है- कभी म्यूजिक, तो कभी कोई पॉडकास्ट Spotify या JioSaavn पर। इसी दौरान बीच में कई बार ऑडियो ऐड सुनाई देता है और अकसर लोग उसे स्किप भी नहीं कर पाते, क्योंकि हाथ व्यस्त होते हैं या फोन निकालना आसान नहीं होता। यही वो मौका है, जिस पर आज बड़े-बड़े ब्रैंड्स अपनी नजर टिकाए हुए हैं।
डिजिटल दुनिया में जहां वीडियो ऐड्स स्किप होने की रफ्तार बढ़ती जा रही है, वहां ऑडियो ऐडवर्टाइजिंग (Audio Advertising) एक शांत लेकिन बेहद असरदार माध्यम बनकर उभर रहा है और इस बार आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं।
भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट मार्केट
Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के मुताबिक भारत की पॉडकास्ट इंडस्ट्री "एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है और अगले तीन से पांच साल में कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।" यह ग्रोथ स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, सस्ते डेटा और परिपक्व होती डिजिटल आदतों पर टिकी है।
Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत में पॉडकास्ट श्रोताओं की संख्या 20 करोड़ (200 मिलियन) तक पहुंच गई, जबकि 2024 में यह करीब 10 करोड़ (100 मिलियन) थी। यानी महज एक साल में संख्या दोगुनी हो गई। यह बदलाव मोबाइल डेटा की खपत में तेज उछाल और युवाओं की बढ़ती भागीदारी से आया। (तुलना के लिए: 2024 की एक उपभोक्ता स्टडी में पाया गया था कि केवल 12% भारतीय ही सक्रिय रूप से पॉडकास्ट सुनते थे- यानी इस माध्यम की पहुंच अभी भी बढ़ने की काफी गुंजाइश है।)
इसी के साथ भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट बाजार बन चुका है- चीन और अमेरिका के बाद। मार्केट का साइज देखें तो भारत का पॉडकास्टिंग मार्केट 2025 में 0.8 अरब डॉलर (करीब 6,600 करोड़ रुपये) था और 2026 से 2034 के बीच 28% की सालाना दर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है।
Spotify से लेकर JioSaavn तक- प्लेटफॉर्म्स का विस्तार
भारत में ऑडियो स्ट्रीमिंग के लिए Spotify, JioSaavn, Gaana, Amazon Music और Apple पॉडकास्ट जैसे प्लेटफॉर्म एक के बाद एक अपनी जड़ें जमा रहे हैं।
Spotify भारत में हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेजी में पॉडकास्ट की तेज स्वीकृति के साथ भारतीय ब्रैंड्स को वह चीज दे रहा है जो वे लंबे समय से ढूंढ रहे थे- श्रोताओं का अविभाजित ध्यान, उन पलों में जब कोई और चीज उनसे ध्यान नहीं छीन रही। मार्केट रिसर्च और कंसल्टिंग कंपनी Redseer के मुताबिक, Spotify अब भारत के म्यूजिक स्ट्रीमिंग बाजार में करीब 26% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है।
JioSaavn की बात करें तो उनका प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू साल-दर-साल करीब 30% बढ़ रहा है और ब्रैंड पार्टनरशिप्स भी तेजी से बढ़ रही हैं।
Spotify और JioSaavn जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भारत के 40% से ज्यादा यूजर बेस पॉडकास्ट सुनता है। यह संख्या बताती है कि ऑडियो अब सिर्फ म्यूजिक तक सीमित नहीं रहा- यह एक पूर्ण मीडिया इकोसिस्टम बन चुका है।
Audio Ads क्यों हैं Video Ads से ज्यादा असरदार?
सवाल यह उठता है कि जब वीडियो का जमाना है, तो ब्रैंड्स ऑडियो की तरफ क्यों झुक रहे हैं?
जवाब बहुत सीधा है- ध्यान (Attention)। Spotify India ने Dentsu e4m Digital Advertising Report 2026 के हवाले से कहा कि जैसे-जैसे उपभोक्ता नोटिफिकेशन और विजुअल ओवरलोड से बचने के लिए स्क्रीन बंद कर रहे हैं, ऑडियो उनका प्राथमिक साथी बन जाता है- चाहे वे सफर में हों, वर्कआउट कर रहे हों, घर का काम कर रहे हों या खाली पल में हों।
इस रिपोर्ट में एक बेहद दिलचस्प बात कही गई- "आज का सबसे शक्तिशाली स्क्रीन वह है जिसे लोग बंद कर देते हैं।"
आंकड़े इस बात को और मजबूत करते हैं:
- पॉडकास्ट ऐड्स का ब्रैंड रिकॉल रेट 81% तक है। सक्रिय यूजर्स में यह आंकड़ा 86% तक पहुंच जाता है- जो किसी भी मीडिया माध्यम में सबसे ऊंचा है।
- Nielsen की 2025 पॉडकास्ट Ad Effectiveness Report के अनुसार, होस्ट-रीड ऐड्स (जब पॉडकास्ट होस्ट खुद ब्रैंड की बात करता है) प्री-रिकॉर्डेड ऐड्स की तुलना में 68% ज्यादा ब्रैंड रिकॉल देते हैं।
- 66% स्ट्रीमिंग श्रोता वीडियो इंटरप्शन की तुलना में ऑडियो ऐड्स को ज्यादा पसंद करते हैं।
- 72% ऐडवर्टाइजर्स मानते हैं कि पॉडकास्ट ऐड्स, डिजिटल बैनर ऐड्स से ज्यादा भरोसेमंद हैं।
इसके अलावा Oxford Road और Podscribe की एक संयुक्त रिपोर्ट 'Re-Thinking YouTube' में पाया गया कि YouTube पर पॉडकास्ट देखने के मुकाबले ऑडियो डाउनलोड 18% से 25% ज्यादा प्रभावी तरीके से कंज्यूमर एक्शन (खरीदारी) करवाते हैं। मतलब- सुनाई देने वाला ऐड, दिखने वाले ऐड से ज्यादा जेब तक पहुंचता है।
ब्रैंड्स का बढ़ता भरोसा- कौन-कौन आ रहा है मैदान में?
भारत में ऑडियो ऐडवर्टाइजिंग अब केवल स्टार्टअप्स या टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने इस माध्यम पर निवेश कर रहे हैं।
फरवरी 2025 में Durex ने अभय देओल को होस्ट बनाकर अपना पॉडकास्ट लॉन्च किया। दिसंबर 2024 में Tata Steel ने 'FiredUp' नाम से एक कॉर्पोरेट पॉडकास्ट शुरू किया, जिसमें इंडस्ट्री लीडर्स को फीचर किया गया। इसी दौरान RBI ने भी वित्तीय साक्षरता के लिए पॉडकास्ट लॉन्च करने की घोषणा की।
जनवरी 2026 में Saraswat Bank ने Paytunes के साथ मिलकर Spotify, JioSaavn, YouTube Music और 850+ प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल ऑडियो कैंपेन चलाया, जिसमें उन्हें Listen-Through Rate (LTR) में उल्लेखनीय बढ़त मिली।
FMCG, D2C, BFSI, रियल एस्टेट और एड-टेक जैसे सेक्टर 2026 में Spotify India पर सक्रिय रूप से ऑडियो ऐड कैंपेन चला रहे हैं।
वैश्विक तस्वीर- दुनिया भर में $5 अरब का मार्केट
भारत की यह ग्रोथ एक बड़े वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है। Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट का अनुमान है कि पॉडकास्ट और वीडियो-पॉडकास्ट (vodcast) से वैश्विक ऐड रेवेन्यू 2026 में करीब 5 अरब डॉलर तक पहुंचेगा- जो साल-दर-साल करीब 20% की बढ़त है। इस ग्रोथ को भारत, नाइजीरिया और ब्राजील जैसे उभरते मार्केट बड़े पैमाने पर लोकल और मल्टीलिंगुअल कंटेंट के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं।
IAB (Interactive Advertising Bureau) के पॉडकास्ट Ad Revenue Report के मुताबिक अकेले अमेरिका में पॉडकास्ट ऐड स्पेंड 2026 में 3 अरब डॉलर के पार जा चुका है, जबकि वैश्विक खर्च 5 अरब डॉलर को छू चुका है- और यह डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग की औसत ग्रोथ से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है।
भारत की अपनी खासियत- क्षेत्रीय भाषाओं की ताकत
भारत में ऑडियो बूम का एक खास पहलू है- भाषाओं की विविधता।
भारत में 65% से ज्यादा नए पॉडकास्ट श्रोता क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट पसंद करते हैं। नॉन-मेट्रो क्षेत्रों में स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और सस्ते डेटा प्लान्स की वजह से यह बदलाव आया है। ओवर 50% भारतीय पॉडकास्ट श्रोता अपनी मातृभाषा में कंटेंट पसंद करते हैं। यही वजह है कि Spotify और JioSaavn ने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली और भोजपुरी में भी कंटेंट में जोरदार निवेश किया है।
JioSaavn ने पिछले एक साल में भोजपुरी, हरियाणवी और दक्षिण भारतीय भाषाओं में क्षेत्रीय कंटेंट में करीब 40% की बढ़ोतरी की है- ताकि टियर 2 और टियर 3 शहरों के अगले 10 करोड़ यूजर्स को जोड़ा जा सके।
68% भारतीय पॉडकास्ट श्रोता सफर या मल्टीटास्किंग के दौरान ऑडियो कंटेंट सुनते हैं। यही "commute window" ब्रैंड्स के लिए सोने की खान है- क्योंकि इस वक्त श्रोता का ध्यान बंटा नहीं होता।
चुनौतियां भी हैं- सब आसान नहीं
हालांकि ऑडियो ऐडवर्टाइजिंग का भविष्य उज्जवल दिख रहा है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पहली और सबसे बड़ी चुनौती है- मोनेटाइजेशन। Deloitte की रिपोर्ट ने साफ कहा है कि भारत में पेड या सब्सक्रिप्शन-ओन्ली पॉडकास्ट मॉडल को अपनाने में अभी वक्त लगेगा। इसकी जगह, हाइब्रिड मोनेटाइजेशन मॉडल- जिसमें सुपरफैन मेंबरशिप्स, ब्रैंडेंड कंटेंट और लाइव इवेंट्स शामिल हैं- ज्यादा कारगर साबित होंगे।
दूसरी चुनौती है discoverability- यानी सही श्रोता तक सही पॉडकास्ट पहुंचाना। आज लाखों पॉडकास्ट मौजूद हैं, ऐसे में किसी एक को अलग दिखाना आसान नहीं है।
तीसरी चुनौती है मीजरमेंट- यानी ऑडियो ऐड का कितना असर हुआ, यह सही-सही मापना। वीडियो के मुकाबले इसमें अभी थोड़ी दिक्कत है, हालांकि AI टूल्स इसे धीरे-धीरे आसान बना रहे हैं।
भारत में एक और दिलचस्प बात है- यहां फ्री से पेड सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स 2% से भी कम हैं, जबकि विदेशों में यह आंकड़ा करीब 40% तक पहुंच जाता है। इसका मतलब है कि भारत में ऑडियो प्लेटफॉर्म्स की कमाई अभी ज्यादातर विज्ञापन पर ही टिकी हुई है।
AI का प्रवेश- अब ऑडियो ऐड्स और स्मार्ट होंगी
2026 में एक नई क्रांति ऑडियो इंडस्ट्री को और आगे ले जाने वाली है- Artificial Intelligence। AI से पॉडकास्ट प्रोडक्शन और डिस्कवरी दोनों बेहतर होंगे। यह प्रोडक्शन की कठिनाई कम करेगा, क्रिएटिव क्षमता बढ़ाएगा, कंटेंट की विजिबिलिटी सुधारेगा और सही श्रोता को सही पॉडकास्ट से जोड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 की शुरुआत में AI डबिंग का खर्च लगभग $0.30 प्रति मिनट था, जो 2026 में घटकर कई प्लेटफॉर्म्स पर $0.04–$0.08 प्रति मिनट रह गया है। ट्रेडिशनल डबिंग आज भी $5,000 से $15,000 प्रति घंटे के बीच है, जबकि AI डबिंग अक्सर $2–$20 प्रति मिनट में उपलब्ध है और कई ऑर्गनाइजेशंस इससे 90%+ की बचत रिपोर्ट करती हैं। यानी अब मिड-लेवल पॉडकास्ट्स के लिए भी अलग-अलग भाषाओं में कंटेंट बनाना आसान और सस्ता हो गया है। भारत जैसे बहुभाषी देश में यह बदलाव बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
भारतीय पॉडकास्टर्स और क्रिएटर्स- नई अर्थव्यवस्था के नायक
कानों की ताकत को पहचानने का वक्त
भारत में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग का पूरा परिदृश्य बदल रहा है। वीडियो ऐड्स की भीड़ में जब हर ब्रैंड चिल्ला रहा हो, तो जो चुपचाप कानों में उतरे- वही जीतता है।
Spotify India की बात में दम है- "attention, not impressions" मार्केटिंग का अगला दौर होगा। और ऑडियो इसे सबसे बेहतर तरीके से डिलीवर कर सकता है।
200 मिलियन पॉडकास्ट श्रोताओं का देश, क्षेत्रीय भाषाओं की ताकत, कम सब्सक्रिप्शन कन्वर्जन और इसलिए ऐड-सपोर्टेड इकोसिस्टम ये सब मिलकर भारत को ऑडियो ऐडवर्टाइजिंग के लिए एक बेहद उपजाऊ जमीन बनाते हैं। लिहाजा, जो ब्रैंड्स आज इस "साइलेंट बूम" को समझकर निवेश कर रहे हैं, वे कल की दौड़ में आगे हो सकते हैं।
Warner Music Group (WMG) के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) अरमिन जर्जा (Armin Zerza) ने निजी कारणों से अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।
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Samachar4media Bureau
Warner Music Group (WMG) के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) अरमिन जर्जा (Armin Zerza) ने निजी कारणों से अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, कंपनी ने बताया कि वह वित्तीय वर्ष (Fiscal Year) के अंत तक ट्रांजिशन प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा कराने के लिए कंपनी के साथ जुड़े रहेंगे।
कंपनी ने अपने नए CFO की नियुक्ति के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। तब तक ग्लोबल कंट्रोलर और चीफ अकाउंटिंग ऑफिसर (Chief Accounting Officer) लू डिकलर (Lou Dickler) को अंतरिम (Acting) CFO की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
WMG के मुताबिक, लू डिकलर इससे पहले भी अंतरिम CFO की भूमिका निभा चुके हैं। उन्हें वित्तीय मामलों का लंबा अनुभव है और कंपनी के संचालन की गहरी समझ भी है। इसी वजह से उन्हें यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।
इस मौके पर Warner Music Group के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रॉबर्ट किंकल (Robert Kyncl) ने कहा, "अरमिन जर्जा कंपनी के विकास और बदलाव के महत्वपूर्ण दौर में हमारी नेतृत्व टीम के बेहद अहम सदस्य रहे हैं। उन्होंने कंपनी को मजबूत व्यावसायिक और वित्तीय नेतृत्व दिया है। हम उनके योगदान के लिए उनका दिल से धन्यवाद करते हैं और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।"
अरमिन जर्जा के इस्तीफे के बाद अब कंपनी की नजर नए CFO की नियुक्ति पर होगी। तब तक लू डिकलर अंतरिम CFO के तौर पर कंपनी की वित्तीय जिम्मेदारियां संभालेंगे।
भारत में म्यूजिक सुनने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब म्यूजिक इंडस्ट्री की नजर ऐसे लोगों पर है जो इसके लिए पैसे भी खर्च करें।
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भारत में म्यूजिक सुनने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब म्यूजिक इंडस्ट्री की नजर ऐसे लोगों पर है जो इसके लिए पैसे भी खर्च करें। EY और इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री (IMI) की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा कमाई (मॉनेटाइजेशन) की कोशिशें इसी तरह जारी रहीं, तो देश में पेड म्यूजिक सब्सक्राइबरों की संख्या 2028 तक बढ़कर 2.8 से 3 करोड़ (28-30 मिलियन) तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में भारत में करीब 1.4 करोड़ (14 मिलियन) पेड म्यूजिक सब्सक्राइबर थे। यह तब है, जब म्यूजिक देश में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले डिजिटल मनोरंजन माध्यमों में शामिल है।
15 हजार से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स पर किए गए सर्वे में सामने आया कि 96 फीसदी लोग अपने स्मार्टफोन पर म्यूजिक सुनते हैं। इनमें से 80 फीसदी लोग हर दिन एक घंटे से ज्यादा समय म्यूजिक स्ट्रीमिंग या सुनने में बिताते हैं।
हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती इन श्रोताओं को पेड सब्सक्राइबर में बदलने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 38 फीसदी लोगों ने कभी म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विस के लिए भुगतान किया है, जबकि 86 फीसदी लोग किसी न किसी वीडियो OTT प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन ले चुके हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी बड़ी वजह मुफ्त में उपलब्ध म्यूजिक और फ्री व प्रीमियम म्यूजिक सर्विस के बीच बहुत कम अंतर होना है। यही कारण है कि लोग भुगतान करने की बजाय मुफ्त विकल्पों का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में इस क्षेत्र में बड़े अवसर भी दिखाई देते हैं। 61 फीसदी लोगों ने कहा कि अगर मुफ्त विकल्प उपलब्ध न हों और सब्सक्रिप्शन की कीमत किफायती हो, तो वे म्यूजिक स्ट्रीमिंग के लिए भुगतान करने को तैयार हैं। वहीं, 39 फीसदी लोगों का कहना है कि वे ऐसी स्थिति में भी मुफ्त या पायरेटेड स्रोतों का इस्तेमाल करना पसंद करेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, 60 फीसदी लोग अभी भी म्यूजिक सुनने के लिए समर्पित डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। हालांकि, नए गाने खोजने के लिए लोग तेजी से शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे हैं, जो बदलती उपभोक्ता आदतों का संकेत है।
IMI के अध्यक्ष ब्लेज़ फर्नांडिस ने कहा कि भारत के म्यूजिक इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने के लिए उपभोक्ताओं का मजबूत समर्थन जरूरी है। उनके मुताबिक, पेड सब्सक्रिप्शन सिर्फ एक सेवा का शुल्क नहीं, बल्कि कलाकारों और भारतीय संगीत विरासत में किया गया निवेश है।
IMI के चेयरमैन विक्रम मेहरा ने कहा कि यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारतीय उपभोक्ता अच्छी गुणवत्ता वाले कंटेंट के लिए भुगतान करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि IMI डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर पेड ऑडियो इकोसिस्टम को मजबूत करेगा, ताकि भारत दुनिया के शीर्ष पांच म्यूजिक बाजारों में अपनी जगह बना सके।
EY इंडिया में मीडिया और एंटरटेनमेंट लीडर आशीष फेरवानी ने कहा कि म्यूजिक भारत में सबसे लोकप्रिय डिजिटल मनोरंजन माध्यमों में से एक है। उनका मानना है कि बेहतर जागरूकता, प्रीमियम सेवाओं में स्पष्ट अंतर और नए इनोवेटिव फीचर्स के जरिए पेड सब्सक्रिप्शन की रफ्तार और तेज की जा सकती है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट बताती है कि भारत में म्यूजिक स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री के लिए आने वाले वर्षों में बड़ा अवसर मौजूद है। अब चुनौती नए श्रोता जोड़ने से ज्यादा मौजूदा श्रोताओं को यह भरोसा दिलाने की है कि बेहतर म्यूजिक अनुभव के लिए भुगतान करना फायदे का सौदा है।
'रेडियो सिटी' की पैरेंट कंपनी म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड ने अपनी वरिष्ठ प्रबंधन टीम को मजबूत करते हुए अनुरिता पटेल और मिली शाह को सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल के रूप में नामित किया है।
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Vikas Saxena
'रेडियो सिटी' की पैरेंट कंपनी म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड (Music Broadcast Limited) ने अपनी वरिष्ठ प्रबंधन टीम (Senior Management) को मजबूत करते हुए अनुरिता पटेल और मिली शाह को सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल (Senior Management Personnel) के रूप में नामित किया है। यह फैसला कंपनी के निदेशक मंडल की 22 जुलाई 2026 को हुई बैठक में लिया गया।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि यह निर्णय नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश के आधार पर लिया गया है। दोनों की नई जिम्मेदारियां 22 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई हैं।
कौन हैं अनुरिता पटेल और मिली शाह?
कंपनी के अनुसार, अनुरिता पटेल फिलहाल नेशनल प्रोग्रामिंग की प्रमुख (Head – National Programming) हैं। वहीं, मिली शाह कंपनी में कमर्शियल और एडमिनिस्ट्रेशन विभाग का नेतृत्व कर रही हैं।
अब दोनों को सेबी (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के तहत आधिकारिक तौर पर सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल का दर्जा दिया गया है।
नौकरी की शर्तों में कोई बदलाव नहीं
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नई नियुक्ति (Appointment) नहीं है। अनुरिता पटेल और मिली शाह पहले से ही कंपनी में पूर्णकालिक (Full-time) कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके पदनाम और पहचान में बदलाव किया गया है, लेकिन नौकरी की शर्तों, वेतन या अन्य सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
बोर्ड बैठक में लिया गया फैसला
Music Broadcast Limited के बोर्ड की बैठक 22 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई और 4:30 बजे समाप्त हुई। बैठक में दोनों अधिकारियों को वरिष्ठ प्रबंधन का दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
कंपनी ने यह जानकारी SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत बीएसई (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भेजी है।
गौरतलब है कि Music Broadcast Limited देश के प्रमुख एफएम रेडियो नेटवर्क Radio City का संचालन करती है और रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में उसकी मजबूत मौजूदगी है।
म्यूजिक कंपनी Tips Music Limited ने अपने प्रस्तावित शेयर बायबैक (Share Buyback) को फिलहाल टालने का फैसला किया है।
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म्यूजिक कंपनी Tips Music Limited ने अपने प्रस्तावित शेयर बायबैक (Share Buyback) को फिलहाल टालने का फैसला किया है। हालांकि, इसके साथ ही कंपनी ने वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) में आय (Revenue) में साल-दर-साल मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की है।
पहली तिमाही में आय 1.07 अरब रुपये पहुंची
कंपनी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसका रेवेन्यू 1.07 अरब रुपये (करीब 107 करोड़ रुपये) रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 881 मिलियन रुपये (करीब 88.1 करोड़ रुपये) था।
इस तरह कंपनी की आय में सालाना आधार पर उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली, जो उसके म्यूजिक कारोबार के लगातार मजबूत प्रदर्शन को दर्शाती है।
शेयर बायबैक फिलहाल टला
कंपनी ने एक अलग घोषणा में बताया कि उसने अपने प्रस्तावित शेयर बायबैक को फिलहाल स्थगित (Deferred) कर दिया है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि बायबैक अब कब किया जाएगा या इसे टालने के पीछे क्या वजह है।
फिलहाल बायबैक की नई समय-सीमा या अन्य शर्तों को लेकर भी कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।
हालांकि, बायबैक टालने के फैसले के बावजूद कंपनी की पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि उसके मुख्य म्यूजिक कारोबार से होने वाली आय में लगातार मजबूती बनी हुई है।
यदि आप Apple Music का इस्तेमाल करते हैं, तो अब इसके लिए आपको पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। Apple ने भारत में अपने Student, Individual और Family प्लान्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है।
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यदि आप Apple Music का इस्तेमाल करते हैं, तो अब इसके लिए आपको पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। Apple ने भारत में अपने Student, Individual और Family प्लान्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी का कहना है कि म्यूजिक के लाइसेंस (Music Licensing) की बढ़ती लागत के चलते यह फैसला लिया गया है।
नई कीमतों के अनुसार, Student प्लान अब 59 रुपये की जगह 69 रुपये प्रति माह का हो गया है। वहीं Individual प्लान की कीमत 119 रुपये से बढ़ाकर 139 रुपये प्रति माह कर दी गई है।
इसके अलावा, Family प्लान, जिसमें एक साथ छह सदस्य Apple Music का इस्तेमाल कर सकते हैं, अब 179 रुपये की जगह 229 रुपये प्रति माह में मिलेगा।
Apple ने अपने Apple One सब्सक्रिप्शन बंडल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है। Apple One Individual प्लान अब 175 रुपये की जगह 195 रुपये प्रति माह का हो गया है। कंपनी ने अन्य Apple One प्लान्स की कीमतें भी बढ़ाई हैं।
Apple के मुताबिक, यह बदलाव दुनिया भर में बढ़ रही म्यूजिक लाइसेंसिंग लागत के कारण किया गया है। कंपनी ने इसे वैश्विक स्तर पर लागू किए जा रहे प्राइस अपडेट का हिस्सा बताया है। भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप जैसे कई बाजारों में भी Apple Music की कीमतें बढ़ाई गई हैं।
हालांकि, कंपनी ने कीमत बढ़ाने के साथ किसी नए फीचर या अतिरिक्त सुविधा का ऐलान नहीं किया है।
यह 2022 के बाद Apple Music की पहली वैश्विक प्राइस बढ़ोतरी है। वहीं भारत में पिछले दो वर्षों के भीतर यह दूसरी बार है जब Apple ने अपने म्यूजिक सब्सक्रिप्शन की कीमतें बढ़ाई हैं। इससे पहले 2024 के आखिर में कंपनी ने Individual प्लान की कीमत 99 रुपये से बढ़ाकर 119 रुपये की थी।
कीमतें बढ़ने के बावजूद Apple Music की मौजूदा सुविधाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। इनमें बिना विज्ञापन (Ad-Free) म्यूजिक सुनने की सुविधा, ऑफलाइन डाउनलोड, Spatial Audio, Lossless Audio और 10 करोड़ (100 मिलियन) से ज्यादा गानों की लाइब्रेरी शामिल है। कुछ देशों में स्टूडेंट प्लान लेने वालों को पहले की तरह Apple TV+ का लाभ भी मिलता रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में कंटेंट और लाइसेंसिंग की लागत लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से कई स्ट्रीमिंग कंपनियां अपने सब्सक्रिप्शन प्लान महंगे कर रही हैं। भारत में भी डिजिटल मनोरंजन सेवाओं पर बढ़ता खर्च अब उपभोक्ताओं के लिए एक नई चुनौती बनता जा रहा है, जिसे उद्योग जगत में 'स्ट्रीमफ्लेशन' (Streamflation) कहा जा रहा है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी एफएम रेडियो चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों और विज्ञापनों की निगरानी करने वाली इंटर-मिनिस्टीरियल कमेटी (IMC) का दायरा बढ़ा दिया है
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Samachar4media Bureau
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी एफएम रेडियो चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों और विज्ञापनों की निगरानी करने वाली इंटर-मिनिस्टीरियल कमेटी (IMC) का दायरा बढ़ा दिया है। मंत्रालय ने 15 जुलाई 2026 को नया आदेश जारी किया है, जिसने 5 मई 2026 के पुराने आदेश की जगह ले ली है।
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब कम्युनिटी रेडियो स्टेशन (CRS) भी इस समिति के अधिकार क्षेत्र में आ गए हैं। इससे पहले यह समिति केवल निजी एफएम रेडियो स्टेशनों से जुड़े मामलों की ही जांच करती थी।
अब दो तरह के रेडियो स्टेशनों की होगी निगरानी
मई 2026 में गठित IMC केवल प्राइवेट एफएम रेडियो फेज-III पॉलिसी, 2011 के तहत काम कर रही थी। इसका काम निजी एफएम रेडियो स्टेशनों द्वारा कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता (Programme & Advertisement Code) के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की जांच करना था।
लेकिन 15 जुलाई के नए आदेश के बाद अब यही समिति 13 फरवरी 2024 की कम्युनिटी रेडियो पॉलिसी के तहत आने वाले कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की शिकायतों और नियमों के उल्लंघन की भी समीक्षा करेगी।
यानी अब एक ही समिति निजी एफएम रेडियो नेटवर्क और गैर-लाभकारी कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों- दोनों से जुड़े मामलों पर अपनी सिफारिशें देगी।
समिति को बनाया गया और मजबूत
मंत्रालय ने समिति की संरचना में भी बदलाव किया है।
पहले समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव/संयुक्त सचिव में से कोई एक करता था। अब अतिरिक्त सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को स्थायी रूप से अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि संयुक्त सचिव (इंडस्ट्री) के लिए अलग सदस्य का पद बनाया गया है।
इस बदलाव के साथ समिति के सदस्यों की संख्या 9 से बढ़कर 10 हो गई है।
समिति में पहले की तरह गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों का विभाग, एफआईसीसीआई (FICCI), प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और आकाशवाणी (AIR) के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। इसके अलावा मंत्रालय का एक डिप्टी सेक्रेटरी या डायरेक्टर सदस्य-सचिव (Member Convener) की भूमिका निभाएगा।
नियमों में तकनीकी गलती भी सुधारी
नए आदेश में मंत्रालय ने एक तकनीकी त्रुटि भी ठीक की है।
5 मई के आदेश में निजी एफएम रेडियो पर कार्रवाई से जुड़े प्रावधान का हवाला देते समय क्लॉज 24.2 लिखा गया था, जबकि सही प्रावधान क्लॉज 24.1 है। 15 जुलाई के आदेश में इस गलती को सुधार दिया गया है।
इसके साथ ही कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों पर कार्रवाई के लिए अलग प्रावधान भी जोड़ा गया है।
कम्युनिटी रेडियो पॉलिसी भी की गई संलग्न
मई के आदेश में संबंधित नियमों का केवल उल्लेख किया गया था, लेकिन जुलाई के आदेश के साथ 13 फरवरी 2024 की कम्युनिटी रेडियो पॉलिसी को पूरी तरह संलग्न (Annexure-I) किया गया है।
इस पॉलिसी में कम्युनिटी रेडियो से जुड़े कई अहम नियम शामिल हैं, जैसे—
नियम तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई?
कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों के लिए चरणबद्ध दंड व्यवस्था भी तय की गई है।
समिति के पास क्या होंगे अधिकार?
IMC का काम अंतिम फैसला देना नहीं है। समिति शिकायतों की जांच कर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को भेजेगी। अंतिम निर्णय सरकार ही लेगी।
समिति जरूरत पड़ने पर—
हालांकि किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित रेडियो स्टेशन को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
क्या है इसका मतलब?
करीब ढाई महीने के भीतर मंत्रालय ने IMC को पहले से ज्यादा व्यापक और मजबूत बना दिया है। अब यह समिति सिर्फ निजी एफएम रेडियो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देशभर के 500 से अधिक कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों से जुड़े कंटेंट विवादों और शिकायतों की भी समीक्षा करेगी।
इस बदलाव के साथ निजी एफएम और कम्युनिटी रेडियो- दोनों क्षेत्रों के लिए कंटेंट निगरानी का एक साझा मंच तैयार हो गया है, जिसमें कानून, मीडिया, उद्योग, उपभोक्ता संरक्षण और सरकारी विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी होगी।
शबनम मजूमदार के पास टेलीकॉम, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं (BFSI) तथा मीडिया एवं एंटरटेनमेंट सेक्टर में दो दशक से अधिक का अनुभव है।
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Samachar4media Bureau
म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म गाना (Gaana) ने शबनम मजूमदार को डायरेक्टर– पार्टनरशिप्स एंड अलायंसेज के पद पर नियुक्त किया है। अपनी नई भूमिका में वह कंपनी के लिए रेवेन्यू पार्टनरशिप्स का नेतृत्व करेंगी। साथ ही स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स विकसित करने, नए पार्टनरशिप अवसरों का विस्तार करने और व्यावसायिक सहयोग के जरिए गाना के इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने पर उनका मुख्य फोकस रहेगा।
शबनम मजूमदार के पास टेलीकॉम, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं (BFSI) तथा मीडिया एवं एंटरटेनमेंट सेक्टर में दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्हें स्ट्रैटेजिक बी2बी (B2B) पार्टनरशिप्स, रेवेन्यू ग्रोथ, मार्केट एक्सपेंशन, गो-टू-मार्केट स्ट्रैटेजी, ग्लोबल अकाउंट मैनेजमेंट और एंटरप्राइज सेल्स जैसे क्षेत्रों में महारत हासिल है।
गाना से जुड़ने से पहले वह ZEE5 में एसोसिएट डायरेक्टर– स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स (डिजिटल) के पद पर कार्यरत थीं। वहां उन्होंने टेलीकॉम, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP), फिनटेक और ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ साझेदारियों के माध्यम से सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू बढ़ाने पर काम किया।
अपने करियर के दौरान शबनम Vodafone India, G4S, 92.7 Big FM, HSBC, ICICI Prudential Life Insurance और Max Life Insurance जैसी जानी-मानी कंपनियों से भी जुड़ी रही हैं।
उन्होंने बड़े पैमाने पर बिजनेस डेवलपमेंट और पार्टनरशिप से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया है। इनमें एंटरप्राइज टेलीकॉम कॉन्ट्रैक्ट्स, ओटीटी (OTT) सब्सक्रिप्शन पार्टनरशिप्स, एडवरटाइजिंग सेल्स, स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप्स और भारत सहित अन्य उभरते बाजारों में मार्केट एक्सपेंशन से जुड़ी पहल शामिल हैं।
कॉर्पोरेट करियर के अलावा शबनम मजूमदार पशु कल्याण और सामुदायिक सेवा से भी सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। वह 'The Philanthropist & The Happy Dog' नामक एक एनिमल रेस्क्यू ट्रस्ट की संस्थापक हैं, जो बेसहारा पशुओं के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए काम करता है।
'सारेगामा इंडिया' की वित्तीय स्थिति पर भरोसा जताते हुए CARE Ratings ने कंपनी की लंबी अवधि (Long Term) की बैंक सुविधाओं की CARE AA- (स्टेबल आउटलुक) रेटिंग को बरकरार रखा है।
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Vikas Saxena
म्यूजिक व एंटरटेनमेंट कंपनी 'सारेगामा इंडिया' (Saregama India) की वित्तीय स्थिति पर भरोसा जताते हुए CARE Ratings ने कंपनी की लंबी अवधि (Long Term) की बैंक सुविधाओं की CARE AA- (स्टेबल आउटलुक) रेटिंग को बरकरार रखा है। वहीं, कंपनी की शॉर्ट टर्म बैंक सुविधाओं को CARE A1+ रेटिंग दी गई है, जो इस श्रेणी की सबसे ऊंची रेटिंग मानी जाती है।
कंपनी ने इस संबंध में स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी देते हुए बताया कि 26 जून 2026 को CARE Ratings ने अपनी समीक्षा पूरी करने के बाद यह रेटिंग जारी की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की 100 करोड़ रुपये की लॉन्ग टर्म बैंक सुविधाओं को CARE AA-; Stable रेटिंग के साथ दोबारा पुष्टि (Reaffirmed) मिली है। हालांकि, इस सुविधा की राशि पहले के 101.50 करोड़ रुपये से घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दी गई है।
इसके अलावा, 130 करोड़ रुपये की शॉर्ट टर्म बैंक सुविधा को पहली बार CARE A1+ रेटिंग दी गई है। वहीं, 3.50 करोड़ रुपये की दूसरी शॉर्ट टर्म बैंक सुविधा की CARE A1+ रेटिंग भी पहले की तरह बरकरार रखी गई है।
CARE Ratings ने यह रेटिंग कंपनी के वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों और हालिया परिचालन प्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर दी है।
कुल मिलाकर, CARE Ratings ने 233.50 करोड़ रुपये की बैंक सुविधाओं का मूल्यांकन किया है। इनमें 100 करोड़ रुपये की लॉन्ग टर्म सुविधाएं और 133.50 करोड़ रुपये की शॉर्ट टर्म सुविधाएं शामिल हैं।
आमतौर पर CARE AA- रेटिंग का मतलब होता है कि कंपनी की दीर्घकालिक कर्ज चुकाने की क्षमता मजबूत है और जोखिम का स्तर कम है। वहीं, CARE A1+ शॉर्ट टर्म उधारी के लिए सर्वोच्च रेटिंग मानी जाती है, जो बताती है कि कंपनी की अल्पकालिक भुगतान क्षमता भी काफी मजबूत है।
कंपनी ने अपनी नियामकीय फाइलिंग में कहा है कि यह जानकारी SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के तहत निवेशकों और शेयरधारकों को उपलब्ध कराई जा रही है।
पॉकेट एफएम (Pocket FM) के CEO रोहन नायक (Rohan Nayak) ने कहा कि Pocket TV को बंद नहीं किया गया, बल्कि यह एक बीटा प्रयोग था जिसने अपना उद्देश्य पूरा कर लिया।
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Samachar4media Bureau
पॉकेट एफएम (Pocket FM) के सह-संस्थापक (Co-founder) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रोहन नायक (Rohan Nayak) ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि कंपनी ने अचानक अपने माइक्रोड्रामा (Microdrama) प्लेटफॉर्म Pocket TV को बंद कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Pocket TV को शुरुआत से ही एक बीटा (Beta) प्रयोग के रूप में लॉन्च किया गया था और उसने अपना निर्धारित उद्देश्य पूरा कर लिया।
लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा किए गए एक पोस्ट में रोहन नायक (Rohan Nayak) ने कहा कि "Pocket FM shuts down Pocket TV" जैसी सुर्खियां वास्तविक स्थिति को गलत तरीके से पेश करती हैं। उन्होंने लिखा कि कंपनी ने Pocket TV को करीब पांच महीने तक बीटा प्रोडक्ट के रूप में चलाया, इस दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं और उसके बाद इसे बंद कर दिया।
रोहन नायक (Rohan Nayak) के मुताबिक, इस प्रयोग से कंपनी को यह समझने में मदद मिली कि माइक्रोड्रामा (Microdrama) प्लेटफॉर्म पर नए यूजर्स को जोड़ना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन उन्हें लंबे समय तक बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि असली समस्या यूजर एक्विजिशन (User Acquisition) नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म रिटेंशन (Long-term Retention) है।
उन्होंने माइक्रोड्रामा उद्योग के मौजूदा बिजनेस मॉडल पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस कैटेगरी में कई कंपनियां भारी ग्राहक अधिग्रहण खर्च, डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns) और ऑटो-रिन्यूअल (Auto-renewal) जैसे तरीकों के सहारे कारोबार चला रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी बिजनेस की सफलता केवल इसलिए है क्योंकि सब्सक्रिप्शन रद्द करना जानबूझकर मुश्किल बनाया गया है, तो वह वास्तविक प्रोडक्ट-मार्केट फिट (Product-Market Fit) नहीं है।
रोहन नायक (Rohan Nayak) ने दावा किया कि पॉकेट एफएम (Pocket FM) के 50 प्रतिशत से अधिक यूजर्स 12 महीने बाद भी प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी का डेली एक्टिव यूजर (Daily Active User) बेस कई समर्पित माइक्रोड्रामा प्लेटफॉर्म्स से बड़ा है, जबकि कंपनी मार्केटिंग पर अपेक्षाकृत कम खर्च करती है।
उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि "रिटेंशन एक रणनीति है, जबकि वायरल होना सिर्फ एक घटना है।" साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि Pocket TV से मिली सीख के आधार पर कंपनी ने माइक्रोड्रामा कैटेगरी के लिए एक नया दृष्टिकोण तैयार किया है और इससे जुड़े नए ऐलान जल्द किए जाएंगे।
म्यूजिक और एंटरटेनमेंट कंपनी Saregama India ने अपने वित्तीय नेतृत्व (Finance Leadership) को मजबूत करने के लिए मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) पद पर नई नियुक्तियों की घोषणा की है।
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Vikas Saxena
म्यूजिक और एंटरटेनमेंट कंपनी Saregama India ने अपने वित्तीय नेतृत्व (Finance Leadership) को मजबूत करने के लिए मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) पद पर नई नियुक्तियों की घोषणा की है। कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) ने 24 जून 2026 को हुई बैठक में अभिषेक कपूर को कंपनी के नए चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक (Key Managerial Personnel) नियुक्त करने को मंजूरी दी।
कंपनी के अनुसार, अभिषेक कपूर 15 जुलाई 2026 से CFO का पद संभालेंगे। उनके कार्यभार ग्रहण करने तक वित्तीय नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के लिए कुलदीप कोठारी को तत्काल प्रभाव से अंतरिम चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (Interim CFO) नियुक्त किया गया है। वह 24 जून 2026 से 14 जुलाई 2026 तक इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।
Saregama ने बताया कि ये नियुक्तियां कंपनी अधिनियम, 2013 और सेबी के लिस्टिंग नियमों के अनुपालन के तहत की गई हैं, ताकि CFO के पद पर किसी प्रकार का खालीपन न रहे और कंपनी के वित्तीय संचालन में निरंतरता बनी रहे।
अभिषेक कपूर वित्तीय क्षेत्र के अनुभवी प्रोफेशनल हैं और उन्हें 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मीडिया एवं एंटरटेनमेंट, एफएमसीजी, बेवरेज और मैन्युफैक्चरिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों की सूचीबद्ध कंपनियों में काम किया है। वह चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और IIM कोझिकोड से स्ट्रेटेजी मैनेजमेंट में विशेष शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में वह Sula Vineyards Limited में मुख्य वित्तीय अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
वहीं, कुलदीप कोठारी के पास वित्त, लेखा, ट्रेजरी, बजटिंग, वित्तीय रिपोर्टिंग, टैक्सेशन और नियामकीय अनुपालन जैसे क्षेत्रों में 23 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह पिछले सात वर्षों से Saregama India से जुड़े हुए हैं और कंपनी के वित्त विभाग में कई महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिकाएं निभा चुके हैं।