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नए साल में अब रेडियो इंडस्ट्री की उम्मीदों को कुछ यूं लगेंगे 'पंख'
नई उम्मीदों को लेकर नया साल शुरू हो चुका है। रेडियो इंडस्ट्री को भी नए साल से तमाम उम्मीदें हैं
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
नई उम्मीदों को लेकर नया साल शुरू हो चुका है। रेडियो इंडस्ट्री को भी नए साल से तमाम उम्मीदें हैं। रेडियो इंडस्ट्री के वर्तमान हालात पर नजर डालें तो ‘फिक्की फ्रेम्स-ईवाई रिपोर्ट’ (FICCI Frames-EY report) के अनुसार, देश में 70 प्रतिशत से ज्यादा रेडियो कंटेंट मोबाइल पर सुना जाता है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मेट्रो शहरों में 10 में से सात, जबकि गैर मेट्रो शहरों में 10 में से छह व्यक्ति सफर करते समय मोबाइल फोन पर रेडियो सुनते हैं। रेडियो सुनने वालों के इस बढ़ते हुए ट्रेंड को देखकर एडवर्टाइजर्स भी उसी के अनुसार अपनी रणनीति तय करेंगे। पिछले साल की बात करें तो रेडियो स्टेशनों द्वारा कई सफल कैंपेन चलाए गए। इनमें ‘92.7 बिग एफएम’ द्वारा ‘धुन बदलके तो देखो’ भी शामिल रहा। खास बात यह रही कि मात्र चार मेट्रो शहरों में ही 1.84 करोड़ श्रोताओं तक इसकी पहुंच हो गई।
कुछ स्टेशन न सिर्फ एडवर्टाइजर्स को विज्ञापनों के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध कराते हैं, बल्कि वे ऑन ग्राउंड एक्टिविटीज और डिजिटल कैंपेन के द्वारा क्रिएटिव सॉल्यूशंस भी उपलब्ध कराते हैं। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने रेडियो इंडस्ट्री के दिग्गजों से वर्ष 2019 की चुनौतियों और इस साल की उम्मीदों के बारे में विस्तार से बातचीत की।
‘रेड एफएम’ (RED FM) के नेशनल मार्केटिंग हेड रजत उप्पल का कहना है कि रेवेन्यू के हिसाब से देखें तो अन्य माध्यमों की तरह रेडियो के लिए साल 2019 काफी मुश्किलों भरा रहा है। उप्पल के
रेडियो इंडस्ट्री में पिछले साल आए ट्रेंड्स के बारे में ‘रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड’ (RBNL) के सीईओ अब्राहम थॉमस का कहना है कि चुनौतियों व सफलता
रेडियो द्वारा चलाए गए उन अभियानों के बारे में, जिन्होंने वर्ष 2019 में काफी प्रभाव डाला, ‘रेडियो सिटी’ के सीईओ अशित कुकियन ने कहा कि अपने ब्रैंड की विचारधारा ‘रग
आने वाले समय में रेडियो इंडस्ट्री के बड़े बदलावों के बारे में कुकियन ने कहा, ‘वैश्विक रूप से देखें तो रेडियो प्लेयर्स द्वारा इंटरनेट रेडियो की शक्ति का इस्तेमाल किया जाएगा, यह यूजर्स की रेडियो सुनने की आदतों के आधार पर प्लेलिस्ट तैयार करने में मददगार होगा। रेडियो कंपनियां प्रोग्रामैटिक एडवर्टाइजिंग और एक्सक्लूसिव कंटेंट के इस्तेमाल को बढ़ाने पर फोकस करेंगी। वे टार्गेट ऑडियंस के साथ ही ब्रैंड कनेक्ट को और मजबूती देंगी। जहां तक रीजनल प्लेयर्स की बात है तो मेरा मानना है कि अपनी पहुंच को विस्तार देने और एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए वे बड़े प्लेयर्स के साथ स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप करेंगे।’
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