'रेडियो सिटी' का संचानल करने वाली कंपनी 'म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड' को इनकम टैक्स विभाग से एक डिमांड नोटिस मिला है।
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Vikas Saxena
मीडिया कंपनी एचटी मीडिया लिमिटेड (HT Media Limited) ने अपने कुछ एफएम रेडियो स्टेशनों को बंद करने का फैसला लिया है।
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मीडिया कंपनी एचटी मीडिया लिमिटेड (HT Media Limited) ने अपने कुछ एफएम रेडियो स्टेशनों को बंद करने का फैसला लिया है। कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनियों के बोर्ड ने 15 मई 2026 को रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का निर्णय लिया।
इसके तहत मुंबई में चल रहा Radio Nasha 91.9, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के Radio One 94.3 और चेन्नई का Fever 91.9 FM बंद किया जाएगा। इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को लाइसेंस सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कंपनी ने बताया कि ये रेडियो स्टेशन अब आर्थिक और रणनीतिक रूप से फायदे का सौदा नहीं रह गए थे। इसी वजह से इन्हें बंद करने का फैसला लिया गया है।
HT Media के मुताबिक, इन रेडियो स्टेशनों से वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 29.19 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था, जो कंपनी की कुल आय का लगभग 1.62% हिस्सा था।
कंपनी ने कहा कि इन रेडियो स्टेशनों का संचालन 15 जून 2026 तक बंद किए जाने का अनुमान है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी FM रेडियो सेक्टर में नियमों के पालन को मजबूत करने के लिए एक नई इंटर-मिनिस्टीरियल कमेटी (IMC) का गठन किया है।
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Vikas Saxena
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने FM रेडियो के नियमों की निगरानी के लिए नई इंटर-मिनिस्टीरियल कमेटी (IMC) बनाई, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी FM रेडियो सेक्टर में नियमों के पालन को मजबूत करने के लिए एक नई इंटर-मिनिस्टीरियल कमेटी (IMC) का गठन किया है। यह कमेटी उन मामलों की जांच करेगी, जहां प्रोग्राम और ऐडवर्टाइजमेंट कोड के उल्लंघन की शिकायतें मिलती हैं।
यह आदेश 5 मई 2026 को जारी की गईं हैं और इसका उद्देश्य FM रेडियो पॉलिसी 2011 के तहत नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
नई कमेटी में कई मंत्रालयों और संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी को चेयरपर्सन बनाया गया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, उपभोक्ता मामले विभाग, FICCI, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया रेडियो के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
यह कमेटी समय-समय पर बैठक करेगी और उन शिकायतों की सुनवाई करेगी, जो FM रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रम या विज्ञापन कोड के उल्लंघन से जुड़ी होंगी।
सरकार ने साफ किया है कि अगर किसी तरह के नियम उल्लंघन के मामले सामने आते हैं, तो कमेटी जुर्माना लगाने, कंटेंट हटाने या फिर किसी प्रोग्राम/चैनल को तय समय के लिए बंद करने की सिफारिश भी कर सकती है।
हालांकि, किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले संबंधित रेडियो ऑपरेटर को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा।
कमेटी की सिफारिशों के आधार पर अंतिम फैसला सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ही लेगी।
सरकार का कहना है कि इस कदम से FM रेडियो में कंटेंट और विज्ञापन से जुड़े नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित होगा और शिकायतों पर तेज़ी से कार्रवाई हो सकेगी।
रेडियो जॉकी, अभिनेता और टीवी होस्ट सलिल अचार्य अब 'रेडियो सिटी' को छोड़कर 'बिग एफएम' (BIG FM) से जुड़ने जा रहे हैं।
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Samachar4media Bureau
रेडियो जॉकी, अभिनेता और टीवी होस्ट सलिल अचार्य अब 'रेडियो सिटी' से अलग हो सकते हैं और जल्द ही 'बिग एफएम' (BIG FM) से जुड़ने की संभावना है। मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वे नए रेडियो स्टेशन पर नई पारी शुरू कर सकते हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सलिल अचार्य पिछले लंबे समय से रेडियो सिटी 91.1 से जुड़े हुए थे और 2009 से उन्होंने इस नेटवर्क के साथ अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे मुंबई के लोकप्रिय मॉर्निंग शो “कसा काय मुंबई” को आरजे अर्चना के साथ को-होस्ट भी कर चुके हैं।
रेडियो सिटी में अपने करियर के दौरान सलिल अचार्य ने सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि कई सामाजिक अभियानों में भी हिस्सा लिया। उनकी ऑन-एयर मौजूदगी और लोकल कम्युनिटी से जुड़ाव के कारण उन्होंने एक मजबूत श्रोता वर्ग बनाया।
2021 में उन्होंने “Mission Green Mumbai” अभियान में भाग लिया था, जिसके तहत महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों के लिए 41 हजार से ज्यादा आम के बीज इकट्ठा किए गए थे। उसी साल उन्होंने “Chillar Party” नाम के चिल्ड्रन डे इवेंट को भी होस्ट किया था।
रेडियो के अलावा सलिल अचार्य ने टीवी, फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी काम किया है। उन्होंने मोहित सूरी की फिल्म Awarapan से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इसके साथ ही वे BBC Asian Network में फिल्म क्रिटिक और B4U में VJ के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
वे फिटनेस और हेल्थ को लेकर भी काफी एक्टिव रहते हैं और सोशल मीडिया व मीडिया रिपोर्ट्स में उनकी फिटनेस जर्नी को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है।
फिलहाल दोनों तरफ से किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
साल 2026 में भारतीय FM रेडियो इंडस्ट्री एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहां एक तरफ पुरानी पहचान यानी विज्ञापन आधारित कमाई तेजी से सिकुड़ रही है और दूसरी तरफ नए रास्ते धीरे-धीरे खुल रहे हैं।
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Samachar4media Bureau
साल 2026 में भारतीय FM रेडियो इंडस्ट्री एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहां एक तरफ पुरानी पहचान यानी विज्ञापन आधारित कमाई तेजी से सिकुड़ रही है और दूसरी तरफ नए रास्ते धीरे-धीरे खुल रहे हैं। जो मीडियम कभी सुबह की चाय के साथ घरों में गूंजता था, वो आज Spotify, JioSaavn और YouTube जैसे दिग्गजों से मुकाबला कर रहा है। सवाल सिर्फ यह नहीं कि रेडियो जिंदा रहेगा या नहीं सवाल यह है कि यह किस रूप में जिंदा रहेगा?
विज्ञापन खर्च (AdEx) का संकट:
रेडियो के विज्ञापन खर्च (AdEx) पर अलग-अलग रिपोर्ट्स के आंकड़े अलग हैं यह अंतर पद्धति (methodology) के कारण है, इसलिए दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
वहीं Pitch Madison Advertising Report (PMAR) 2026 रेडियो पर विज्ञापन खर्च को 2025 में अपने Legacy Framework में ₹2,515 करोड़ के आसपास बताती है। इस रिपोर्ट के अनुसार 2026 में रेडियो सहित अन्य पारंपरिक मीडिया -5% से +5% की रेंज में रहेंगे।
दोनों रिपोर्ट्स इस बात पर सहमत हैं कि डिजिटल तेजी से आगे बढ़ रहा है और रेडियो का सापेक्षिक हिस्सा सिकुड़ रहा है। Dentsu के अनुसार 2025 में भारत का कुल विज्ञापन खर्च 8.3% बढ़कर ₹1,21,339 करोड़ तक पहुंचा, जिसमें Digital विज्ञापन खर्च 19% बढ़कर ₹71,621 करोड़ हो गया और कुल विज्ञापन खर्च में उसकी हिस्सेदारी 59% पहुंच गई।
TAM विज्ञापन खर्च के आंकड़े एक सकारात्मक पहलू दिखाते हैं 2025 में रेडियो विज्ञापन वॉल्यूम (ऐड वॉल्यूम) में साल-दर-साल 2% की वृद्धि हुई। 2021 की तुलना में 2025 में प्रति रेडियो स्टेशन औसत विज्ञापन वॉल्यूम 40% बढ़ा है। सर्विस सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसकी कुल रेडियो विज्ञापन वॉल्यूम में 30% हिस्सेदारी रही। प्रॉपर्टीज व रियल एस्टेट कैटेगरी 15% शेयर के साथ शीर्ष पर रही।
एक्सचेंज4मीडिया के अनुसार रियल एस्टेट 2025 में रेडियो का सबसे बड़ा ऐडवर्टाइजर सेक्टर रहा ₹393 करोड़ खर्च के साथ जबकि ऑटो सेक्टर ने 13% की बढ़त के साथ ₹299 करोड़ का योगदान दिया।
Red FM की COO निशा नारायणन के अनुसार 2025 के फेस्टिव सीजन में रेडियो का रेवेन्यू 12–15% बढ़ा और यह सालाना आय का करीब 20–25% लेकर आया। लेकिन बाकी महीनों में रेडियो की कमाई पर दबाव बना रहता है। कुछ विज्ञापनदाता (advertisers) अपना बजट घटाकर Audio OTT प्लेटफॉर्म्स की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं
ENIL (रेडियो मिर्ची) का डिजिटल की ओर बड़ा दांव
ENIL यानी Entertainment Network (India) Ltd, जो रेडियो मिर्ची, मिर्ची लव और कूल एफएम+ जैसे ब्रैंड्स ऑपरेट करता है, इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर 2025) में कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹162.93 करोड़ रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान तिमाही (₹157.13 करोड़) के मुकाबले 3.7% की बढ़त है। हालांकि, कंपनी को ₹6.42 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि Q3 FY25 में ₹9.14 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया गया था, यानी मुनाफे से घाटे में बदलाव दिखा। इस दौरान Domestic EBITDA ₹13.7 करोड़ रहा।
सबसे अहम बात यह रही कि डिजिटल और IP रेवेन्यू का हिस्सा Q3 FY25 के 26.9% से बढ़कर Q3 FY26 में 49.5% हो गया, यानी लगभग दोगुना। डिजिटल रेवेन्यू में 99.9% की सालाना (YoY) ग्रोथ दर्ज की गई। Impact Properties का रेवेन्यू 10.5% बढ़ा, जबकि इंटरनेशनल बिजनेस से ₹5.38 करोड़ का रेवेन्यू आया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर 2025) में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹141 करोड़ रहा, जिसमें 24.3% की साल-दर-साल (YoY) ग्रोथ दर्ज की गई। इस दौरान डिजिटल रेवेन्यू, Core Radio Ad Revenue का 52.5% तक पहुंच गया। वहीं, BSE की standalone फाइलिंग में रेवेन्यू ₹137.75 करोड़ बताया गया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून 2025) में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹117 करोड़ रहा, जो 3% YoY ग्रोथ दर्शाता है। Domestic रेवेन्यू ₹113 करोड़ (3.2% YoY) रहा और EBITDA ₹6.2 करोड़ (3.6% YoY ग्रोथ) दर्ज किया गया। डिजिटल रेवेन्यू ₹21.7 करोड़ रहा, जिसमें 41.2% की YoY बढ़त हुई और यह Core Radio Ad Revenue का 40.7% हिस्सा बन गया (Q1 FY25 में यह 24.8% था)। Events और Solutions बिजनेस में 33% की ग्रोथ दर्ज हुई। 30 जून 2025 तक कंपनी के पास ₹349 करोड़ का कैश रिजर्व था।
ENIL अब खुद को “देश की मल्टी-प्लेटफॉर्म एंटरटेनमेंट कंपनी” के तौर पर पेश कर रहा है। Q3 FY26 के Investor Presentation के अनुसार, कंपनी की पहुंच 63 शहरों में करीब 6 करोड़ श्रोताओं तक है। हर साल 400 से ज्यादा इवेंट्स आयोजित किए जाते हैं, जिनमें 30 लाख से अधिक लोग भाग लेते हैं। कंपनी की सोशल मीडिया रीच 100 मिलियन से ज्यादा है और यह 13 भाषाओं व 25 से अधिक बोलियों में कंटेंट तैयार करती है। साथ ही, कंपनी Gaana ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का भी संचालन करती है।
रेडियो सिटी (Music Broadcast Ltd) चुनौती के बीच डायवर्सिफिकेशन
Q1 FY26 (अप्रैल–जून 2025): इस तिमाही में रेवेन्यू ₹49.32 करोड़ रहा, जो साल-दर-साल (YoY) 17.25% गिरावट दिखाता है। Operating EBITDA ₹8 करोड़ रहा, जिसमें 16.1% मार्जिन दर्ज किया गया। कंपनी को ₹2.17 करोड़ का नेट लॉस हुआ। 30 जून 2025 तक कैश रिजर्व ₹354 करोड़ था। Alternative Revenue Streams (Branded Properties, Digital Ventures, Sponsorships) ने कुल आय में 35% योगदान दिया, जबकि कुल क्लाइंट बेस में इनकी हिस्सेदारी 41% रही।
Q2 FY26 (जुलाई–सितंबर 2025): इस तिमाही में रेवेन्यू ₹37.84 करोड़ रहा, जो YoY 30.9% की गिरावट है। नेट लॉस ₹6.87 करोड़ रहा। H1 FY26 (पहली छमाही) में कुल रेवेन्यू ₹87.17 करोड़ रहा, जो YoY 23.8% कम है, जबकि नेट लॉस ₹9.05 करोड़ दर्ज किया गया। Alternate Revenue Streams का हिस्सा 34% रहा। 30 सितंबर 2025 तक कैश रिजर्व ₹362 करोड़ हो गया।
Q3 FY26 (अक्टूबर–दिसंबर 2025): इस तिमाही में रेवेन्यू ₹46.4 करोड़ रहा। कंपनी ने ₹4.1 करोड़ का मुनाफा (PAT) दर्ज किया और तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर रेवेन्यू में 23% की ग्रोथ हुई। 31 दिसंबर 2025 तक नेट कैश ₹373 करोड़ रहा, जबकि मार्केट शेयर 18% दर्ज किया गया।
उल्लेखनीय है कि रेडियो सिटी का कैश रिजर्व (₹373 करोड़) उसके कुल मार्केट कैप से भी ज्यादा है, जो कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट को दिखाता है।
नए रेवेन्यू सोर्स: सिर्फ बात नहीं, काम भी हो रहा है
इवेंट्स और ब्रैंड एक्टिवेशन- Entertainment Network (India) Ltd (ENIL) आज भारत की बड़ी इवेंट कंपनियों में शामिल हो चुका है। कंपनी हर साल 400 से ज्यादा इवेंट्स- जैसे कॉन्सर्ट, अवॉर्ड शो, ब्रैंड एक्टिवेशन और ऑन-ग्राउंड प्रमोशन—करती है। FY26 की पहली तिमाही में इवेंट्स और सॉल्यूशंस बिजनेस में 33% की बढ़त दर्ज हुई, जबकि दूसरी तिमाही में इवेंट्स और आईपी बिजनेस ने 101.1% की सालाना उछाल दिखाई।
Music Broadcast Ltd (रेडियो सिटी) ने एसमिन्को डॉट इन नाम से एक AI-आधारित इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 60,000 से ज्यादा इन्फ्लुएंसर्स जुड़ चुके हैं और कंपनी ने भारत के टॉप 10,000 विज्ञापनदाताओं के साथ साझेदारी की है।
डिजिटल स्ट्रीमिंग और हाइब्रिड मॉडल- ENIL ने Gaana (गाना) ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को दिसंबर 2023 में टाइम्स इंटरनेट से करीब ₹25 लाख में खरीदा था। इसे इंडस्ट्री में एक तरह की ‘डिस्ट्रेस सेल’ के तौर पर देखा गया, क्योंकि गाना का पीक वैल्यूएशन 580 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका था और उसने 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा फंड जुटाया था। ENIL ने इसे पूरी तरह सब्सक्रिप्शन मॉडल पर शिफ्ट कर दिया। FY26 की तीसरी तिमाही में कंपनी के डिजिटल रेवेन्यू में 99.9% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई।
Radio Mirchi, Red FM और BIG FM जैसे रेडियो नेटवर्क अब अपने ऑन-एयर प्रोग्राम को मोबाइल ऐप, OTT प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर एक साथ स्ट्रीम कर रहे हैं। रेडियो सिटी का प्लैनेट रेडियो सिटी डॉट कॉम, 17 वेब-आधारित स्टेशन और RC स्टूडियो (जियो टीवी पर 24/7 वीडियो चैनल) इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
पॉडकास्ट इंटीग्रेशन- Deloitte की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पॉडकास्ट इंडस्ट्री अगले 3–5 साल में तेजी से बढ़ने वाली है। 2025 में पॉडकास्ट सुनने वालों की संख्या करीब 20 करोड़ तक पहुंच गई, जो 2024 के 10 करोड़ से दोगुनी है। भारत का पॉडकास्ट बाजार 2024 में करीब 560 मिलियन डॉलर (₹4,700 करोड़) का था और 2033 तक इसके 4,248 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें लगभग 25.5% की सालाना ग्रोथ रहेगी।
एफएम रेडियो स्टेशन अब अपने आरजे शो को ऑन-डिमांड पॉडकास्ट के रूप में Spotify, JioSaavn और Apple Podcasts पर उपलब्ध करा रहे हैं। ब्रैंडेड पॉडकास्ट, स्पॉन्सर्ड एपिसोड और पॉडकास्ट विज्ञापन—ये तीनों नए कमाई के स्रोत बन रहे हैं। रेडियो सिटी ने स्पॉटिफाई के साथ 4 राज्यों में एक्सक्लूसिव पार्टनरशिप भी की है।
लाइसेंसिंग और सिंडिकेशन रेवेन्यू- रेडियो मिर्ची जैसे ब्रैंड अब अपने कंटेंट—जैसे जिंगल, आरजे पर्सनालिटी और प्रोग्राम फॉर्मेट—को लाइसेंस पर देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ENIL 13 भाषाओं में कंटेंट तैयार करता है और इंटरनेशनल सिंडिकेशन की ओर भी कदम बढ़ा रहा है। FY26 की तीसरी तिमाही में कंपनी का इंटरनेशनल बिजनेस रेवेन्यू ₹5.38 करोड़ रहा।
डिजिटल रेडियो: बड़ा सपना, धीमी शुरुआत- ट्राई ने 4 ‘ए+’ और 9 ‘ए’ श्रेणी के शहरों में डिजिटल रेडियो के लिए नीलामी की सिफारिश की है, लेकिन इंडस्ट्री अभी भी इसे लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
BIG FM के सीओओ सुनील कुमारन के मुताबिक, डिजिटल रेडियो के सामने हाई कॉस्ट, सीमित डिवाइस (रिसीवर), नियमों की अनिश्चितता और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से कड़ी प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां हैं। वहीं विनीत सिंह हुक्मरानी का कहना था कि उपभोक्ताओं को अलग से डिजिटल रेडियो खरीदने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मोबाइल और ब्लूटूथ ही इस पूरे सेगमेंट को नियंत्रित कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, 2026 को इस दिशा में अहम साल माना जा रहा है, लेकिन बिना सरकारी समर्थन, पर्याप्त डिवाइस उपलब्धता और सही कीमत के, डिजिटल रेडियो का रास्ता अभी लंबा नजर आता है।
छंटनी और लागत कटौती दर्दनाक लेकिन जरूरी?
एक्सचेंज4मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में रेडियो इंडस्ट्री में विभिन्न नेटवर्क्स में लगभग 300 एम्प्लॉयी की छंटनी हुई। रेडियो सिटी ने अकेले 100–150 पद समाप्त किए। Big FM ने करीब 50–70 लोगों की छुट्टी की।
Music Broadcast Ltd ने Q2 FY26 Earnings Call में बताया कि उन्होंने Operating Costs में ₹6–7 करोड़ प्रति तिमाही की बचत हासिल की है बिना Operations को नुकसान पहुंचाए। Q3 FY26 में इसका असर दिखा Revenue QoQ 23% बढ़ा और PAT ₹4.1 करोड़ सकारात्मक रहा।
Tier 2 और Tier 3 शहर उम्मीद की किरण
जहां टियर-1 शहरों में डिजिटल का दबाव रेडियो को पीछे धकेल रहा है, वहीं टियर-2 और टियर-3 शहरों में रेडियो अब भी एक प्रभावशाली माध्यम बना हुआ है। Music Broadcast Ltd (रेडियो सिटी) ने भी माना है कि उसकी ग्रोथ अब टियर-2 और टियर-3 बाजारों की ओर शिफ्ट हो रही है। Pitch Madison Report 2025 के अनुसार, इन शहरों में रेडियो अब भी सबसे किफायती (Cost-Effective) विज्ञापन माध्यम बना हुआ है।
TAM के विज्ञापन आंकड़ों के मुताबिक, ऑटो सेक्टर ने 2025 में रेडियो पर 13% ज्यादा खर्च किया, और यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से इन्हीं बाजारों से आई।
भारतीय रेडियो इंडस्ट्री का भविष्य: 2026 और आगे
EY/Statista (2024) के अनुमान के मुताबिक, भारत की रेडियो इंडस्ट्री 2026 तक करीब ₹2,700 करोड़ तक पहुंच सकती है, जिसमें 7–9% की सालाना (CAGR) ग्रोथ का अनुमान है।
Dentsu Digital Advertising Report 2026 के अनुसार, भारत का कुल विज्ञापन खर्च 2026 में ₹1,30,416 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 7.2% की ग्रोथ होगी। 2027 तक डिजिटल का हिस्सा कुल विज्ञापन खर्च का 70% तक पहुंच सकता है। वहीं, रेडियो और सिनेमा के लिए -5% से +5% के बीच सीमित ग्रोथ का अनुमान जताया गया है।
वैश्विक स्तर पर रेडियो बाजार 2026 में करीब $56.67 अरब का है और 2035 तक $77.9 अरब तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें 3.6% CAGR की ग्रोथ होगी। भारत की हिस्सेदारी वैश्विक रेडियो ब्रॉडकास्टिंग बाजार में करीब 3.45% है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इसे सबसे ज्यादा ग्रोथ संभावनाओं वाले बाजारों में गिना जा रहा है।
आखिरी बात: विज्ञापन खत्म नहीं हुआ, लेकिन अब अकेला काफी नहीं
एफएम रेडियो की विज्ञापन-आधारित कमाई खत्म नहीं हुई है, यह अब भी इंडस्ट्री की रीढ़ बनी हुई है। Dentsu के अनुसार 2025 में यह आंकड़ा ₹1,501 करोड़ रहा, जबकि Pitch Madison के अनुसार ₹2,515 करोड़। दोनों आंकड़े अलग-अलग मेथडोलॉजी पर आधारित हैं, लेकिन संकेत एक ही है, रेडियो का सापेक्षिक बाजार हिस्सा धीरे-धीरे घट रहा है।
इस दौर में वही कंपनियां आगे टिकेंगी, जो इवेंट्स, डिजिटल, पॉडकास्ट और लाइसेंसिंग जैसे नए रेवेन्यू सोर्स तेजी से विकसित कर रही हैं:
कुल मिलाकर, एफएम रेडियो का भविष्य अब सिर्फ ट्रांसमीटर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्क्रीन, स्पीकर और स्मार्टफोन से भी जुड़ चुका है। जो ब्रॉडकास्टर्स इस बदलाव को समझ गए हैं, उनके लिए 2026 नई शुरुआत का साल है, जबकि जो अब भी सिर्फ स्पॉट विज्ञापन पर निर्भर हैं, उनके लिए कहा जा सकता है कि यह अलर्ट होने का समय है।
डिजिटल युग में जब हर जेब में स्मार्टफोन है, हर हाथ में इंटरनेट है- तब भी एक पुराना माध्यम न सिर्फ जिंदा है, बल्कि संकट की हर घड़ी में सबसे पहले खड़ा होता है। वह माध्यम है- रेडियो।
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Vikas Saxena
डिजिटल युग में जब हर जेब में स्मार्टफोन है, हर हाथ में इंटरनेट है- तब भी एक पुराना माध्यम न सिर्फ जिंदा है, बल्कि संकट की हर घड़ी में सबसे पहले खड़ा होता है। वह माध्यम है- रेडियो। FM हो या AM, ट्रांजिस्टर हो या डिजिटल- रेडियो आज भी उस वक्त आवाज बनता है जब बाकी सब माध्यम चुप हो जाते हैं।
फरवरी 2026 में मनाए गए वर्ल्ड रेडियो डे का थीम था- "Radio and Artificial Intelligence: AI is a tool, not a voice"- यानी रेडियो की आत्मा आज भी इंसान की आवाज है, कोई एल्गोरिदम नहीं। यह थीम अपने आप में इस माध्यम की ताकत और उसकी अटूट प्रासंगिकता का संदेश देती है।
रेडियो का नेटवर्क: आंकड़ों में ताकत
ऑल इंडिया रेडियो (AIR), जिसे आकाशवाणी के नाम से भी जाना जाता है, भारत का सार्वजनिक प्रसारण सेवा संस्थान है। यह प्रसार भारती के अंतर्गत काम करता है और इसका आदर्श वाक्य है- "बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय।" 1936 में स्थापित AIR आज 591 प्रसारण केंद्रों के साथ भारत के लगभग 92 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र और 98 प्रतिशत आबादी तक पहुंचता है।
यह आंकड़ा अपने आप में बहुत बड़ा है। देश का कोई भी अखबार, कोई भी न्यूज चैनल, कोई भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस पहुंच के करीब नहीं आता। AIR 23 भाषाओं और 179 बोलियों में मीडियम वेव, शॉर्ट वेव, FM और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये प्रसारण करता है। इसकी पहुंच शहरी, ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों- सभी जगह है।
अगस्त 2024 में केंद्रीय कैबिनेट ने 234 नए शहरों और कस्बों में 730 नए FM चैनलों को मंजूरी दी, जहां अब तक कोई FM प्रसारण नहीं था। इस विस्तार की रिजर्व प्राइस 784.87 करोड़ रुपये रखी गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक, FM फेज-III पॉलिसी के तहत फिलहाल 119 शहरों में 391 प्राइवेट FM चैनल काम कर रहे हैं।
इसके अलावा, भारत में अब 531 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन सक्रिय हैं, जो जमीनी स्तर पर संचार और सामुदायिक सशक्तिकरण का काम कर रहे हैं।
आपदा में रेडियो: जब सब बंद हो जाता है, रेडियो चलता रहता है
यह सवाल बहुत जरूरी है- जब भूकंप आता है, बाढ़ आती है, तूफान आता है- तो सबसे पहले क्या बंद होता है? बिजली। और बिजली गई तो इंटरनेट गया, मोबाइल नेटवर्क गया, टेलीविजन बंद।
रेडियो आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब प्राकृतिक आपदाएं या संकट की स्थिति बिजली, इंटरनेट सेवाओं या अन्य संचार नेटवर्क को बाधित कर देती हैं, तो रेडियो अक्सर भरोसेमंद और समय पर सूचना देने का सबसे विश्वसनीय स्रोत बना रहता है।
अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) ने इसे स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है। रेडियो ब्रॉडकास्टिंग का बुनियादी ढांचा बहुत मजबूत होता है और आम तौर पर तब भी चालू रहता है जब दूसरी संचार तकनीकें- जैसे दो-तरफा वॉयस और डेटा सेवाएं विफल हो जाती हैं। सार्वजनिक प्रसारकों का यह दायित्व होता है कि वे मुख्य स्थानों पर अतिरिक्त ट्रांसमीटर और स्थानीय पावर जनरेटर रखें, ताकि अन्य आवश्यक सेवाएं बाधित होने के बाद भी प्रसारण लंबे समय तक जारी रह सके।
AIR ने आपदाओं के दौरान जनता को सचेत करने के लिए DRM (Digital Radio Mondiale) तकनीक के साथ इमरजेंसी वार्निंग फंक्शनालिटी (EWF) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। ये परीक्षण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से किए गए।
उत्तराखंड का उदाहरण इस बात की सबसे सटीक मिसाल है। उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में 90.4 FM पर प्रसारित होने वाला "मंदाकिनी की आवाज" स्टेशन पाँच जिलों में करीब 3.5 लाख श्रोताओं तक पहुंचता है। यह स्टेशन बाढ़, भूस्खलन और जंगल की आग जैसी आपदाओं से संबंधित सार्वजनिक सेवा घोषणाओं (PSAs) पर विशेष जोर देता है। वहां के बुजुर्ग श्रोता कहते हैं, "पहले आपदा आती थी, हमें पता नहीं चलता था। अब रेडियो से जान जाते हैं, जान बच जाती है।"
सीमा पर रेडियो: 'रेडियो संगम' की क्रांतिकारी पहल
2026 की शुरुआत में एक ऐसी खबर आई जिसने रेडियो की रणनीतिक अहमियत को नई ऊंचाई दी।
जनवरी 2026 में जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास पहला सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थापित किया गया। "रेडियो संगम" नाम का यह स्टेशन भारतीय सेना ने नागरिक प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से LoC से महज एक किलोमीटर दूर केरी गांव में बनाया है।
अधिकारियों के मुताबिक, रेडियो संगम सीमा पर रहने वाले लोगों को विश्वसनीय और सत्यापित जानकारी देने के लिए बनाया गया है, साथ ही यह सीमा पार से आने वाली गलत सूचनाओं और दुश्मन के प्रोपेगेंडा का मुकाबला करने का काम भी करता है। रेडियो संगम शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आपदा तैयारी, सरकारी योजनाओं, संस्कृति और सामुदायिक कल्याण पर कार्यक्रम प्रसारित करता है, ताकि दूरदराज और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोग जागरूक और जुड़े रहें।
यह महज एक रेडियो स्टेशन नहीं है- यह एक सामरिक हथियार है। डिजिटल युग में दुश्मन के झूठ का जवाब रेडियो की सच्ची आवाज से दिया जा रहा है।
इससे पहले जून 2025 में भारतीय सेना ने उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ में "Ibex Tarana 88.4 FM" भी लॉन्च किया था, जो स्थानीय आवाजों को बुलंद करने और शिक्षा, स्वास्थ्य व आपदा तैयारी की जानकारी फैलाने के लिए बनाया गया था।
इंटरनेट बंद, मोबाइल ठप- रेडियो चालू
भारत में इंटरनेट बंद होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। 2025 में भारत में 65 इंटरनेट शटडाउन दर्ज किए गए। जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, राजस्थान जैसे राज्यों में बार-बार इंटरनेट सेवाएं काटी गई हैं। अप्रैल 2026 में भी जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में इंटरनेट शटडाउन लगाया गया।
ऐसी स्थितियों में रेडियो ही एकमात्र माध्यम बचता है जो न सिर्फ सूचना देता है, बल्कि अफवाहों पर भी लगाम लगाता है।
वैश्विक स्तर पर भी यही स्थिति है। Access Now की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया के 52 देशों में कम से कम 313 इंटरनेट शटडाउन हुए- यह 2016 के बाद सबसे ज्यादा संख्या है। ऐसे में जो देश और समाज रेडियो को मजबूत रखे हुए हैं, वे इन डिजिटल ब्लैकआउट की चपेट में कम आते हैं।
चुनाव और रेडियो: जनतंत्र की आवाज
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है- और इस लोकतंत्र को अपनी बात हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए रेडियो से बेहतर कोई माध्यम नहीं है।
शायद भारत ही दुनिया का एकमात्र ऐसा लोकतंत्र है जहां रेडियो न्यूज का एकाधिकार सरकारी माध्यम के पास है। 1.34 अरब से अधिक लोगों के इस विशाल देश में केवल सरकारी स्वामित्व वाला AIR ही रेडियो पर समाचार और करंट अफेयर्स प्रसारित कर सकता है। इसका मतलब यह है कि चुनावों के दौरान भी, देश के सबसे दूरदराज के गांव तक चुनाव संबंधी जानकारी रेडियो के जरिये पहुंचती है।
'मन की बात' इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मन की बात कार्यक्रम 3 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ था। अप्रैल 2026 तक इसके 132 से अधिक एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं। यह कार्यक्रम AIR पर कई भाषाओं में प्रसारित होता है और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचता है। IIM रोहतक द्वारा कराए गए एक सर्वे के अनुसार कम से कम 23 करोड़ लोगों ने इस कार्यक्रम को नियमित रूप से सुना या देखा है और एक अरब से अधिक लोगों ने इसे कम से कम एक बार सुना है।
ग्रामीण भारत में रेडियो बनाम TV बनाम मोबाइल
यह तुलना बहुत जरूरी है क्योंकि अक्सर यह सवाल उठता है- क्या मोबाइल और इंटरनेट ने रेडियो को बेकार कर दिया?
AIR ने कोविड-19 महामारी के दौरान ग्रामीण बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में शैक्षणिक प्रसारण की बड़ी भूमिका निभाई, जब स्कूल बंद थे और डिजिटल पहुंच सीमित थी।
ओडिशा और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में मछुआरे नियमित रूप से AIR के मौसम बुलेटिन पर निर्भर रहते हैं, जिसमें 2019 के चक्रवात फणी के दौरान दी गई जानकारी शामिल है।
राजस्थान के बुंदेलखंड में रेडियो बुंदेलखंड स्टेशन के 150 गांवों में 2.5 लाख से अधिक श्रोता हैं। यहां न टीवी का सिग्नल मजबूत है, न इंटरनेट की गुणवत्ता भरोसेमंद।
रेडियो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे निरक्षर व्यक्ति भी सुन सकता है। TV के लिए बिजली चाहिए, स्मार्टफोन के लिए डेटा चाहिए- लेकिन एक छोटी सी बैटरी से चलने वाला ट्रांजिस्टर हर मौसम, हर आपदा, हर इलाके में काम करता है।
आपदा संचार का नया ढांचा और रेडियो की जगह
भारत सरकार का SACHET (इंटीग्रेटेड अलर्ट सिस्टम) 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में SMS-आधारित अलर्ट भेजता है। Common Alerting Protocol (CAP) के जरिये यह रेडियो, TV, साइरन, SMS और इंटरनेट अलर्ट के साथ एकीकृत हो सकता है। यानी सरकार खुद रेडियो को आपदा संचार के मुख्य स्तंभों में से एक मानती है।
AIR के डिजिटल रेडियो (DRM) से लैस 1.3 करोड़ से अधिक नई कारें भारत की सड़कों पर हैं। Maruti Suzuki, Hyundai, Toyota, MG Motor, Mahindra और Mercedes Benz जैसी कंपनियां अपने इन्फोटेनमेंट सिस्टम में DRM का इस्तेमाल कर रही हैं। यानी रेडियो अब डिजिटल होकर और शक्तिशाली हो गया है।
'रेडियो मैन ऑफ इंडिया' और सांस्कृतिक विरासत
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के गजरौला निवासी राम सिंह बौद्ध, जिन्हें "रेडियो मैन ऑफ इंडिया" के नाम से जाना जाता है, उन्हें 2025 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया का सबसे बड़ा रेडियो संग्रह- 1,257 रेडियो सेट- रखने के लिए मान्यता दी। यह रेडियो के प्रति उस प्रेम की कहानी है जो पीढ़ियों में उतरी हुई है।
क्या रेडियो आज भी सबसे भरोसेमंद माध्यम है?
इस सवाल का जवाब आंकड़े खुद देते हैं:
आवाज जो कभी नहीं रुकती
डिजिटल दुनिया में रेडियो को "पुराना" कहना उतना ही गलत है जितना यह कहना कि हवा अब जरूरी नहीं। जब सब बंद होता है- जब नेटवर्क टूटता है, बिजली जाती है, इंटरनेट कटता है- तब एक छोटा सा ट्रांजिस्टर रेडियो करोड़ों लोगों की जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन सकता है।
आपदा में यह सचेत करता है। चुनाव में यह जागरूक करता है। युद्ध में यह सच बोलता है। और रोजमर्रा की जिंदगी में- यह साथ देता है।
वर्ल्ड रेडियो डे 2026 की थीम ने एक सच कहा- AI एक उपकरण है, रेडियो की आवाज नहीं। क्योंकि रेडियो की आवाज इंसानी है, जमीनी है, भरोसेमंद है।
रेडियो मरा नहीं है- रेडियो अमर है।
'रेडियो सिटी' (Radio City) का संचालन करने वाली कंपनी 'म्यूजिक ब्रॉडकास्ट' (Music Broadcast Ltd) ने अपनी बोर्ड कमेटियों में बड़ा बदलाव किया है।
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Vikas Saxena
'रेडियो सिटी' (Radio City) का संचालन करने वाली कंपनी 'म्यूजिक ब्रॉडकास्ट' (Music Broadcast Ltd) ने अपनी बोर्ड कमेटियों में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 27 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में कई अहम कमेटियों के पुनर्गठन (re-constitution) की मंजूरी दे दी है।
कंपनी ने ऑडिट कमेटी, नॉमिनेशन और रेम्युनरेशन कमेटी और CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) कमेटी में नए सदस्यों को शामिल किया है और कुछ पदों पर बदलाव किए हैं।
ऑडिट कमेटी की कमान अब रवि सरदाना के पास होगी, जबकि अनुज पुरी को नॉमिनेशन और रेम्युनरेशन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। वहीं CSR कमेटी की अगुवाई शैलेश गुप्ता करेंगे।
इस बदलाव में कुछ नए मेंबर्स को भी शामिल किया गया है, जिससे कंपनी की गवर्नेंस और फैसले लेने की प्रक्रिया को और मजबूत करने की कोशिश की गई है।

एफएम चैनल 'रेडियो मिर्ची' का संचालन करने वाली कंपनी 'एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड' (ENIL) ने इनकम टैक्स विभाग के एक बड़े टैक्स डिमांड के खिलाफ अपील दायर की है।
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Vikas Saxena
एफएम चैनल 'रेडियो मिर्ची' का संचालन करने वाली कंपनी 'एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड' (ENIL) ने इनकम टैक्स विभाग के एक बड़े टैक्स डिमांड के खिलाफ अपील दायर की है।
कंपनी को 27 मार्च 2026 को इनकम टैक्स विभाग की ओर से असेसमेंट ऑर्डर मिला था, जिसमें साल 2023-24 के लिए करीब 113.20 करोड़ रुपये (ब्याज समेत) का टैक्स देने को कहा गया था।
अब कंपनी ने 26 अप्रैल 2026 को इस आदेश के खिलाफ अपील दाखिल कर दी है। कंपनी का कहना है कि वह टैक्स विभाग के इस फैसले से सहमत नहीं है और उसके पास इसे चुनौती देने के लिए मजबूत कानूनी आधार हैं।
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि इस मामले का फिलहाल उसके कारोबार या वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
देश में पॉडकास्ट और ऑडियो स्ट्रीमिंग का तेजी से बढ़ता बाजार अब ब्रैंड्स की नई पसंद बन रहा है- कम शोर में ज्यादा असर
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Vikas Saxena
अकसर सुबह के समय मेट्रो या लोकल ट्रेन में सफर करते हुए कई लोग ईयरफोन लगाते हैं। जब फोन जेब में होता है, स्क्रीन बंद होती है, लेकिन ऑडियो चलता रहता है- कभी म्यूजिक, तो कभी कोई पॉडकास्ट Spotify या JioSaavn पर। इसी दौरान बीच में कई बार ऑडियो ऐड सुनाई देता है और अकसर लोग उसे स्किप भी नहीं कर पाते, क्योंकि हाथ व्यस्त होते हैं या फोन निकालना आसान नहीं होता। यही वो मौका है, जिस पर आज बड़े-बड़े ब्रैंड्स अपनी नजर टिकाए हुए हैं।
डिजिटल दुनिया में जहां वीडियो ऐड्स स्किप होने की रफ्तार बढ़ती जा रही है, वहां ऑडियो ऐडवर्टाइजिंग (Audio Advertising) एक शांत लेकिन बेहद असरदार माध्यम बनकर उभर रहा है और इस बार आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं।
भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट मार्केट
Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के मुताबिक भारत की पॉडकास्ट इंडस्ट्री "एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है और अगले तीन से पांच साल में कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।" यह ग्रोथ स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, सस्ते डेटा और परिपक्व होती डिजिटल आदतों पर टिकी है।
Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत में पॉडकास्ट श्रोताओं की संख्या 20 करोड़ (200 मिलियन) तक पहुंच गई, जबकि 2024 में यह करीब 10 करोड़ (100 मिलियन) थी। यानी महज एक साल में संख्या दोगुनी हो गई। यह बदलाव मोबाइल डेटा की खपत में तेज उछाल और युवाओं की बढ़ती भागीदारी से आया। (तुलना के लिए: 2024 की एक उपभोक्ता स्टडी में पाया गया था कि केवल 12% भारतीय ही सक्रिय रूप से पॉडकास्ट सुनते थे- यानी इस माध्यम की पहुंच अभी भी बढ़ने की काफी गुंजाइश है।)
इसी के साथ भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट बाजार बन चुका है- चीन और अमेरिका के बाद। मार्केट का साइज देखें तो भारत का पॉडकास्टिंग मार्केट 2025 में 0.8 अरब डॉलर (करीब 6,600 करोड़ रुपये) था और 2026 से 2034 के बीच 28% की सालाना दर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है।
Spotify से लेकर JioSaavn तक- प्लेटफॉर्म्स का विस्तार
भारत में ऑडियो स्ट्रीमिंग के लिए Spotify, JioSaavn, Gaana, Amazon Music और Apple पॉडकास्ट जैसे प्लेटफॉर्म एक के बाद एक अपनी जड़ें जमा रहे हैं।
Spotify भारत में हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेजी में पॉडकास्ट की तेज स्वीकृति के साथ भारतीय ब्रैंड्स को वह चीज दे रहा है जो वे लंबे समय से ढूंढ रहे थे- श्रोताओं का अविभाजित ध्यान, उन पलों में जब कोई और चीज उनसे ध्यान नहीं छीन रही। मार्केट रिसर्च और कंसल्टिंग कंपनी Redseer के मुताबिक, Spotify अब भारत के म्यूजिक स्ट्रीमिंग बाजार में करीब 26% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है।
JioSaavn की बात करें तो उनका प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू साल-दर-साल करीब 30% बढ़ रहा है और ब्रैंड पार्टनरशिप्स भी तेजी से बढ़ रही हैं।
Spotify और JioSaavn जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भारत के 40% से ज्यादा यूजर बेस पॉडकास्ट सुनता है। यह संख्या बताती है कि ऑडियो अब सिर्फ म्यूजिक तक सीमित नहीं रहा- यह एक पूर्ण मीडिया इकोसिस्टम बन चुका है।
Audio Ads क्यों हैं Video Ads से ज्यादा असरदार?
सवाल यह उठता है कि जब वीडियो का जमाना है, तो ब्रैंड्स ऑडियो की तरफ क्यों झुक रहे हैं?
जवाब बहुत सीधा है- ध्यान (Attention)। Spotify India ने Dentsu e4m Digital Advertising Report 2026 के हवाले से कहा कि जैसे-जैसे उपभोक्ता नोटिफिकेशन और विजुअल ओवरलोड से बचने के लिए स्क्रीन बंद कर रहे हैं, ऑडियो उनका प्राथमिक साथी बन जाता है- चाहे वे सफर में हों, वर्कआउट कर रहे हों, घर का काम कर रहे हों या खाली पल में हों।
इस रिपोर्ट में एक बेहद दिलचस्प बात कही गई- "आज का सबसे शक्तिशाली स्क्रीन वह है जिसे लोग बंद कर देते हैं।"
आंकड़े इस बात को और मजबूत करते हैं:
- पॉडकास्ट ऐड्स का ब्रैंड रिकॉल रेट 81% तक है। सक्रिय यूजर्स में यह आंकड़ा 86% तक पहुंच जाता है- जो किसी भी मीडिया माध्यम में सबसे ऊंचा है।
- Nielsen की 2025 पॉडकास्ट Ad Effectiveness Report के अनुसार, होस्ट-रीड ऐड्स (जब पॉडकास्ट होस्ट खुद ब्रैंड की बात करता है) प्री-रिकॉर्डेड ऐड्स की तुलना में 68% ज्यादा ब्रैंड रिकॉल देते हैं।
- 66% स्ट्रीमिंग श्रोता वीडियो इंटरप्शन की तुलना में ऑडियो ऐड्स को ज्यादा पसंद करते हैं।
- 72% ऐडवर्टाइजर्स मानते हैं कि पॉडकास्ट ऐड्स, डिजिटल बैनर ऐड्स से ज्यादा भरोसेमंद हैं।
इसके अलावा Oxford Road और Podscribe की एक संयुक्त रिपोर्ट 'Re-Thinking YouTube' में पाया गया कि YouTube पर पॉडकास्ट देखने के मुकाबले ऑडियो डाउनलोड 18% से 25% ज्यादा प्रभावी तरीके से कंज्यूमर एक्शन (खरीदारी) करवाते हैं। मतलब- सुनाई देने वाला ऐड, दिखने वाले ऐड से ज्यादा जेब तक पहुंचता है।
ब्रैंड्स का बढ़ता भरोसा- कौन-कौन आ रहा है मैदान में?
भारत में ऑडियो ऐडवर्टाइजिंग अब केवल स्टार्टअप्स या टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने इस माध्यम पर निवेश कर रहे हैं।
फरवरी 2025 में Durex ने अभय देओल को होस्ट बनाकर अपना पॉडकास्ट लॉन्च किया। दिसंबर 2024 में Tata Steel ने 'FiredUp' नाम से एक कॉर्पोरेट पॉडकास्ट शुरू किया, जिसमें इंडस्ट्री लीडर्स को फीचर किया गया। इसी दौरान RBI ने भी वित्तीय साक्षरता के लिए पॉडकास्ट लॉन्च करने की घोषणा की।
जनवरी 2026 में Saraswat Bank ने Paytunes के साथ मिलकर Spotify, JioSaavn, YouTube Music और 850+ प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल ऑडियो कैंपेन चलाया, जिसमें उन्हें Listen-Through Rate (LTR) में उल्लेखनीय बढ़त मिली।
FMCG, D2C, BFSI, रियल एस्टेट और एड-टेक जैसे सेक्टर 2026 में Spotify India पर सक्रिय रूप से ऑडियो ऐड कैंपेन चला रहे हैं।
वैश्विक तस्वीर- दुनिया भर में $5 अरब का मार्केट
भारत की यह ग्रोथ एक बड़े वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है। Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट का अनुमान है कि पॉडकास्ट और वीडियो-पॉडकास्ट (vodcast) से वैश्विक ऐड रेवेन्यू 2026 में करीब 5 अरब डॉलर तक पहुंचेगा- जो साल-दर-साल करीब 20% की बढ़त है। इस ग्रोथ को भारत, नाइजीरिया और ब्राजील जैसे उभरते मार्केट बड़े पैमाने पर लोकल और मल्टीलिंगुअल कंटेंट के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं।
IAB (Interactive Advertising Bureau) के पॉडकास्ट Ad Revenue Report के मुताबिक अकेले अमेरिका में पॉडकास्ट ऐड स्पेंड 2026 में 3 अरब डॉलर के पार जा चुका है, जबकि वैश्विक खर्च 5 अरब डॉलर को छू चुका है- और यह डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग की औसत ग्रोथ से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है।
भारत की अपनी खासियत- क्षेत्रीय भाषाओं की ताकत
भारत में ऑडियो बूम का एक खास पहलू है- भाषाओं की विविधता।
भारत में 65% से ज्यादा नए पॉडकास्ट श्रोता क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट पसंद करते हैं। नॉन-मेट्रो क्षेत्रों में स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और सस्ते डेटा प्लान्स की वजह से यह बदलाव आया है। ओवर 50% भारतीय पॉडकास्ट श्रोता अपनी मातृभाषा में कंटेंट पसंद करते हैं। यही वजह है कि Spotify और JioSaavn ने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली और भोजपुरी में भी कंटेंट में जोरदार निवेश किया है।
JioSaavn ने पिछले एक साल में भोजपुरी, हरियाणवी और दक्षिण भारतीय भाषाओं में क्षेत्रीय कंटेंट में करीब 40% की बढ़ोतरी की है- ताकि टियर 2 और टियर 3 शहरों के अगले 10 करोड़ यूजर्स को जोड़ा जा सके।
68% भारतीय पॉडकास्ट श्रोता सफर या मल्टीटास्किंग के दौरान ऑडियो कंटेंट सुनते हैं। यही "commute window" ब्रैंड्स के लिए सोने की खान है- क्योंकि इस वक्त श्रोता का ध्यान बंटा नहीं होता।
चुनौतियां भी हैं- सब आसान नहीं
हालांकि ऑडियो ऐडवर्टाइजिंग का भविष्य उज्जवल दिख रहा है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पहली और सबसे बड़ी चुनौती है- मोनेटाइजेशन। Deloitte की रिपोर्ट ने साफ कहा है कि भारत में पेड या सब्सक्रिप्शन-ओन्ली पॉडकास्ट मॉडल को अपनाने में अभी वक्त लगेगा। इसकी जगह, हाइब्रिड मोनेटाइजेशन मॉडल- जिसमें सुपरफैन मेंबरशिप्स, ब्रैंडेंड कंटेंट और लाइव इवेंट्स शामिल हैं- ज्यादा कारगर साबित होंगे।
दूसरी चुनौती है discoverability- यानी सही श्रोता तक सही पॉडकास्ट पहुंचाना। आज लाखों पॉडकास्ट मौजूद हैं, ऐसे में किसी एक को अलग दिखाना आसान नहीं है।
तीसरी चुनौती है मीजरमेंट- यानी ऑडियो ऐड का कितना असर हुआ, यह सही-सही मापना। वीडियो के मुकाबले इसमें अभी थोड़ी दिक्कत है, हालांकि AI टूल्स इसे धीरे-धीरे आसान बना रहे हैं।
भारत में एक और दिलचस्प बात है- यहां फ्री से पेड सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स 2% से भी कम हैं, जबकि विदेशों में यह आंकड़ा करीब 40% तक पहुंच जाता है। इसका मतलब है कि भारत में ऑडियो प्लेटफॉर्म्स की कमाई अभी ज्यादातर विज्ञापन पर ही टिकी हुई है।
AI का प्रवेश- अब ऑडियो ऐड्स और स्मार्ट होंगी
2026 में एक नई क्रांति ऑडियो इंडस्ट्री को और आगे ले जाने वाली है- Artificial Intelligence। AI से पॉडकास्ट प्रोडक्शन और डिस्कवरी दोनों बेहतर होंगे। यह प्रोडक्शन की कठिनाई कम करेगा, क्रिएटिव क्षमता बढ़ाएगा, कंटेंट की विजिबिलिटी सुधारेगा और सही श्रोता को सही पॉडकास्ट से जोड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 की शुरुआत में AI डबिंग का खर्च लगभग $0.30 प्रति मिनट था, जो 2026 में घटकर कई प्लेटफॉर्म्स पर $0.04–$0.08 प्रति मिनट रह गया है। ट्रेडिशनल डबिंग आज भी $5,000 से $15,000 प्रति घंटे के बीच है, जबकि AI डबिंग अक्सर $2–$20 प्रति मिनट में उपलब्ध है और कई ऑर्गनाइजेशंस इससे 90%+ की बचत रिपोर्ट करती हैं। यानी अब मिड-लेवल पॉडकास्ट्स के लिए भी अलग-अलग भाषाओं में कंटेंट बनाना आसान और सस्ता हो गया है। भारत जैसे बहुभाषी देश में यह बदलाव बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
भारतीय पॉडकास्टर्स और क्रिएटर्स- नई अर्थव्यवस्था के नायक
कानों की ताकत को पहचानने का वक्त
भारत में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग का पूरा परिदृश्य बदल रहा है। वीडियो ऐड्स की भीड़ में जब हर ब्रैंड चिल्ला रहा हो, तो जो चुपचाप कानों में उतरे- वही जीतता है।
Spotify India की बात में दम है- "attention, not impressions" मार्केटिंग का अगला दौर होगा। और ऑडियो इसे सबसे बेहतर तरीके से डिलीवर कर सकता है।
200 मिलियन पॉडकास्ट श्रोताओं का देश, क्षेत्रीय भाषाओं की ताकत, कम सब्सक्रिप्शन कन्वर्जन और इसलिए ऐड-सपोर्टेड इकोसिस्टम ये सब मिलकर भारत को ऑडियो ऐडवर्टाइजिंग के लिए एक बेहद उपजाऊ जमीन बनाते हैं। लिहाजा, जो ब्रैंड्स आज इस "साइलेंट बूम" को समझकर निवेश कर रहे हैं, वे कल की दौड़ में आगे हो सकते हैं।
ललित गंगवार कंपनी के शुरुआती सदस्यों में से एक हैं और उन्होंने पॉकेट एफएम के बिजनेस को अलग-अलग बाजारों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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Samachar4media Bureau
ऑडियो कंटेंट प्लेटफॉर्म ‘पॉकेट एफएम’ (Pocket FM) ने अपने फाउंडिंग टीम मेंबर ललित गंगवार को प्रमोट करते हुए चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) के पद पर नियुक्त किया है।
नई भूमिका में ललित गंगवार कंपनी के ऑडियो बिजनेस के सभी ग्लोबल ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसमें विभिन्न बाजारों में विस्तार, ग्रोथ स्ट्रैटेजी, मोनेटाइजेशन और एग्जिक्यूशन जैसे अहम पहलू शामिल होंगे।
बता दें कि पॉकेट एफएम एक लोकप्रिय ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म है, जो स्टोरीज, ऑडियो सीरीज और इमर्सिव कंटेंट के लिए जाना जाता है। अब कंपनी अपने इंटरनेशनल विस्तार को और तेज करने की दिशा में काम कर रही है।
ललित गंगवार कंपनी के शुरुआती सदस्यों में से एक हैं और उन्होंने पॉकेट एफएम के बिजनेस को अलग-अलग बाजारों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका में कंपनी के विस्तार का नेतृत्व किया और वहां बिजनेस को तैयार किया।
कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ रोहन नायक ने कहा कि ललित शुरुआत से ही कंपनी की ग्रोथ के केंद्र में रहे हैं। उन्होंने कंपनी के विस्तार और ग्रोथ इंजन को मजबूत किया है। उनका अनुभव और स्ट्रैटेजिक सोच उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त बनाती है।
वहीं, ललित गंगवार ने अपनी नई भूमिका को लेकर कहा कि पॉकेट एफएम हमेशा से इस विश्वास पर काम करता रहा है कि मजबूत कहानियां सीमाओं को पार कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि वह इस जिम्मेदारी को लेकर उत्साहित हैं और आगे कंपनी को ग्लोबल स्तर पर मजबूत करने, एआई आधारित स्टोरीटेलिंग में निवेश बढ़ाने और मोनेटाइजेशन को मजबूत करने पर फोकस करेंगे।
प्रसार भारती ने Akashvani के लिए नया कंटेंट सोर्सिंग फ्रेमवर्क लॉन्च किया है, जिससे स्वतंत्र क्रिएटर्स और प्रोडक्शन हाउस अब रेडियो प्रोग्राम बना सकेंगे और नए रेवेन्यू मॉडल का हिस्सा बनेंगे।
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Samachar4media Bureau
प्रसार भारती ने आकाशवाणी के लिए नया कंटेंट सोर्सिंग फ्रेमवर्क पेश करते हुए स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स, प्रोडक्शन हाउस और राइट्स होल्डर्स के लिए रेडियो के दरवाजे खोल दिए हैं। यह कदम सार्वजनिक प्रसारक के कंटेंट मॉडल में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत आकाशवाणी अब बाहरी स्रोतों से कंटेंट लेकर अपने प्रोग्राम्स को विविध और समृद्ध बनाएगा। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट बढ़ाना और निजी भागीदारी के जरिए नए रेवेन्यू स्रोत तैयार करना है।
इस फ्रेमवर्क में तीन प्रमुख मॉडल शामिल हैं- रेवेन्यू शेयरिंग, स्पॉन्सर्ड और ग्रैटिस। रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल में कंटेंट क्रिएटर और प्रसार भारती विज्ञापन आय साझा करेंगे, जबकि स्पॉन्सर्ड मॉडल में निर्माता तय शुल्क देकर प्रसारण समय का उपयोग कर सकेंगे। वहीं ग्रैटिस मॉडल में कोई शुल्क नहीं होगा, लेकिन कंटेंट का व्यावसायिक उपयोग प्रसार भारती के पास रहेगा।
आकाशवाणी ने रेडियो ड्रामा, डॉक्यूमेंट्री, पॉडकास्ट, क्विज और म्यूजिक जैसे कई फॉर्मेट्स के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। कंटेंट हिंदी, अंग्रेजी और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किया जा सकता है। इस पहल की खास बात इसका विकेंद्रीकृत मॉडल है, जिसमें देशभर के 50 से अधिक क्षेत्रीय केंद्रों के जरिए प्रस्तावों का मूल्यांकन और क्रियान्वयन किया जाएगा।
प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 31 मई 2026 तय की गई है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ऑडियो कंटेंट की खपत तेजी से बढ़ रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है।