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सूचना-प्रसारण मंत्री ने बताया, आकाशवाणी और दूरदर्शन के विकास पर कितना हुआ खर्च!
यूपी के बिजनौर से बसपा सांसद मलूक नागर ने लोकसभा में केंद्र सरकार से सवाल पूछा था कि आकाशवाणी और दूरदर्शन की सेवाओं के विकास को वर्ष 2014 से व्यय की गई धनराशि का ब्यौरा क्या है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
केंद्र सरकार ने ‘प्रसारण अवसंरचना और नेटवर्क विकास’ (BIND) योजना के तहत वित्त वर्ष 2014-15 से 31 दिसंबर 2021 तक प्रसार भारती को 2379.24 करोड़ रुपए सहायता अनुदान (गैर-वेतन) के रूप में प्रदान किए हैं। इस बात की जानकारी सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में दी है।
यूपी के बिजनौर से बसपा सांसद मलूक नागर ने लोकसभा में केंद्र सरकार से सवाल पूछा था कि आकाशवाणी और दूरदर्शन की सेवाओं के विकास को वर्ष 2014 से व्यय की गई धनराशि का ब्यौरा क्या है और ऐसी कौन-कौन सी योजनाएं हैं, जिनके तहत सरकार की नीतियों के बारे में मीडिया को सूचना दी जाती है।
इस पर केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री की ओर से दिए गए जवाब में कहा है गया कि सरकार दूरदर्शन और आकाशवाणी (प्रसार भारती) के बुनियादी ढांचे और सेवाओं का विकास करने, आधुनिकीकरण करने और उन्हें मजबूत करने के प्रति कटिबद्ध है और यह एक सतत प्रक्रिया है।
जवाब में कहा गया कि प्रसार भारती को सहायता अनुदान केंद्रीय क्षेत्रीय स्कीम ‘प्रसारण अवसंरचना और नेटवर्क विकास’ (BIND) के तहत प्रदान किया जाता है। इस स्कीम के घटकों में ट्रांसमीटरों, प्रसारण उपकरण और स्टूडियो का आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण, संवर्धन और प्रतिस्थापन, एफएम विस्तार/प्रतिस्थापन, डीटीएच का विस्तार, संवेदनशील क्षेत्रों में कवरेज को मजबूत बनाना और सामग्री विकास शामिल हैं। इसके अलावा, प्रसार भारती को अनुदान उसके प्रतिनियुक्त पर माने गए कर्मचारियों के वेतन के लिए भी प्रदान किया जाता है।
इसके अलावा बसपा सांसद मलूक नागर ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार का कोई प्रस्ताव आकाशवाणी के अलावा किसी अन्य प्रसारक को भारतीय रेडियो पर प्रसारण करने की अनुमति प्रदान करने का है और यदि है तो उसके कब तक शुरू किए जाने की संभावना है? इस सवाल के जवाब में सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि सरकार ने वर्तमान प्राइवेट एफएम रेडियो नीतिगत दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुसार कंपनी अधिनियम के तहत भारत में पंजीकृत कंपनियों को एफएम रेडियो चैनलों के लिए बोली लगाने और अनुमति प्राप्त करने के लिए पात्र होने की अनुमति दी है। इस समय देश में 386 प्राइवेट एफएम चैनल हैं।
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