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डॉ. विजय दर्डा की नई किताब ने दी ‘दस्तक’, इन मायनों में है खास
नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित ‘कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया’ के स्पीकर हॉल में 30 मई को इस किताब का विमोचन किया गया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
लोकमत मीडिया ग्रुप के चेयरमैन व राज्यसभा के पूर्व सदस्य डॉ. विजय दर्डा की किताब- रिंगसाइड: अप, क्लोज एंड पर्सनल ऑन इंडिया एंड बियॉन्ड (RINGSIDE: Up, Close and Personal on India and Beyond) ने मार्केट में दस्तक दे दी है। नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित ‘कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया’ के स्पीकर हॉल में 30 मई को इस किताब का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पूर्व सलाहकार व लेखक डॉ. संजय बारू के मुख्य आतिथ्य में इस किताब का विमोचन हुआ। इस दौरान मंच पर ‘द प्रिंट’ के फाउंडर और एडिटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता, जाने-माने एंकर, इंडिया टुडे टेलीविजन के कंसल्टिंग एडिटर व पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई और लोकमत मीडिया समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेंद्र दर्डा मौजूद रहे।
पुस्तक विमोचन के बाद राजदीप सरदेसाई ने डॉ. विजय दर्डा से उनकी किताब को लेकर चर्चा भी की। इस चर्चा के दौरान डॉ. विजय दर्डा का कहना था कि पार्टी नेतृत्व से सवाल पूछना बगावत नहीं है। लोकतंत्र के नाते यह किसी भी व्यक्ति का अधिकार है। इसके साथ ही डॉ. दर्डा का यह भी कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे की तुलना में शशि थरूर बेहतर विकल्प होते।
देश की राजनीति में डॉ. विजय दर्डा के योगदान और इस किताब की चर्चा करते हुए डॉ. संजय बारू ने डॉ. विजय दर्डा की निष्पक्ष पत्रकारिता का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि चाहे आर्टिकल लेखन हो अथवा संसद में सवाल पूछने की बात हो, डॉ. विजय दर्डा हमेशा अपनी बात मुखर तरीके से रखने के लिए जाने जाते हैं। विदर्भ के लिए दर्डा के निरंतर प्रयासों का भी उन्होंने जिक्र किया। इस पर दर्डा का कहना था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यह प्रयास देर-सबेर जरूर सफल होंगे।
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर का कहना था कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में असहिष्णुता बढ़ रही है, विशेष रूप से आलोचना के लिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक वर्ग और मीडिया के बीच संबंधों में धीरे-धीरे कमी आई है। थरूर के अनुसार, ‘इससे लोकतंत्र के आदर्शों को नुकसान पहुंचा है, यहां तक कि इससे प्रगति बाधित हुई है। राजनीतिक दलों, मीडिया घरानों, प्रोफेशनल्स और अन्य हितधारकों को तमाम मुद्दों को हल करने और देश को आगे बढ़ने में मदद करने के लिए मिलकर काम करने की सख्त जरूरत है।’
इस मौके पर शेखर गुप्ता ने क्षेत्रीय भारतीय पत्रकारिता की बढ़ती ताकत और प्रभाव के बारे में बात की। उनका कहना था, ‘भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहां अखबारों के पाठक बढ़ रहे हैं, क्योंकि देश भर के लोग साक्षर हो रहे हैं और खबरों से जुड़े रहना चाहते हैं। इनमें मराठी, गुजराती से लेकर तेलुगु भाषा तक के पाठक शामिल हैं, जिनकी संख्या अंग्रेजी पब्लिकेशंस के पाठकों से कहीं अधिक है।’ शेखर गुप्ता का कहना था कि उन्होंने जानबूझकर 'वर्नाक्यूलर' शब्द से परहेज किया, क्योंकि राष्ट्र के निर्माण में देश की सभी भाषाएं समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।’
कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य प्रफुल्ल पटेल, BW बिजनेसवर्ल्ड व एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा, लोकसभा सदस्य वरुण गांधी, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, ‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (ICCR) के प्रेजिडेंट डॉ. बिनय सहस्रबुद्धे, बीएसपी नेता दानिश अली और सीपीआई के नेता डी. राजा समेत तमाम वरिष्ठ राजनेता, नौकरशाह और वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे।
बता दें कि यह पुस्तक दर्डा के साप्ताहिक लेखों का एक संकलन है, जो वर्ष 2011 और वर्ष 2016 के बीच लोकमत मीडिया समूह के समाचार पत्रों और देश के अन्य प्रमुख राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दैनिक अखबारों में प्रकाशित हुए थे। इस किताब में विज्ञान, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, सामाजिक विकास, खेल, कला, संस्कृति, विदेश नीति और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े शोधपूर्ण आलेख हैं। इसके अलावा इसमें प्रख्यात व्यक्तित्वों के बारे में टिप्पणियां भी शामिल हैं जिन्होंने भारत और दुनिया में सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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