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ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन का यह कदम कई प्रकाशकों को नहीं आया रास
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन के द्वारा अखबारों के वितरण की गणना के तौर पर फ्री व कॉम्प्लीमेंट्री कॉपीज को शामिल करने का फैसला कुछ प्रकाशकों को रास नहीं आ रहा।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (एबीसी) के द्वारा अखबारों के वितरण की गणना (सर्कुलेशन ऑडिट) के तौर पर फ्री व कॉम्प्लीमेंट्री कॉपीज (नि:शुल्क व रियायत दरों पर दी गईं प्रतियां) को शामिल करने का फैसला कुछ प्रकाशकों (पब्लिशर्स) को रास नहीं आ रहा। जनवरी से जून 2022 तक के लिए सर्कुलेशन के आंकड़ों में पेड/सब्सक्राइब किए गए अखबारों के अलावा फ्री व कॉम्प्लीमेंट्री कॉपीज को भी शामिल किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, ‘डेली थांथी’ व एबीसी का संस्थापक सदस्य ‘द हिंदू’ व कुछ ऐसे ही प्रकाशकों ने जनवरी से जून सर्कुलेशन ऑडिट से खुद को अलग करने का फैसला किया है, क्योंकि वे चाहते हैं कि एबीसी पुरानी पद्धति का ही पालन करे, यानी अखबारों की वितरित की गई उन्हीं कुल प्रतियों को अपनी गणना में शामिल करे, जिनका भुगतान किया गया हो।
सूत्रों का यह भी कहना है कि दो प्रमुख अंग्रेजी दैनिकों ने भी अपने कुछ संस्करणों को एबीसी की रिपोर्टिंग से बाहर करने का विकल्प चुना है, जो कार्यप्रणाली (methodology) से संबंधित नहीं हैं।
तमिल अखबार ‘दीनामलर’ के प्रकाशक एल. आदिमूलम ने कहा, ‘एबीसी दो साल के अंतराल के बाद फिर सामने आया है। कई तथाकथित प्रमुख अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों को शामिल नहीं किया गया है। तमिलनाडु के अंग्रेजी दैनिक इस ऑडिट में शामिल नहीं हुए हैं। तमिलनाडु में केवल दो प्रमुख भाषाई दैनिक अखबारों के जनवरी से जून 2022 के सर्कुलेशन के आंकड़ों को ही प्रमाणित किया गया है।’
एबीसी के इस कदम के बारे में बात करते हुए एक प्रमुख अखबार के शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘अब तक, एबीसी केवल उन प्रतियों की ही गणना कर रहा था, जिनकी पूरी कीमत दी गई थी। केवल पूरा भुगतान वाले ही अखबारों के नंबर प्रकाशित किए जाते थे।’
उन्होंने कहा कि फ्री व कॉम्प्लीमेंट्री प्रतियों की गणना को शामिल कर लेने से अखबारों के सर्कुलेशन की पूरी ऑडिटिंग प्रक्रिया विफल हो जाएगी। अधिकारी ने कहा, ‘बहुत से प्रकाशकों ने एबीसी से ठीक ही कहा है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।’
इस कदम के बारे में बताते हुए अधिकारी ने कहा कि नेट पेड सर्कुलेशन के आंकड़े ही एक अखबार की ताकत को दर्शाते हैं। रीडरशिप सर्वे में तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसी को अखबार मुफ्त में मिला है या रियायती मूल्य पर क्योंकि वे केवल पाठकों की संख्या गिन रहे होते हैं। वैसे एबीसी को कहा जा रहा है कि वह बिकी हुई प्रतियों की गणना करें, न कि फ्री या रियायत में दी हुई प्रतियों की। उन्होंने यह कहते हुए तर्क दिया कि इस कदम से उन प्रकाशनों को नुकसान होगा, जिनके पास रियायत में या मुफ्त में देने वाली प्रतियां हैं।
वहीं, इंडस्ट्री से जुड़े एक सीनियर व्यक्ति ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि वे मुफ्त प्रतियों को शामिल कर रहे हैं। लेकिन 'रद्दी दर' से नीचे बेची गई प्रतियों को शायद इसमें शामिल किया है। इसका मतलब यह है कि उन्होंने इस बार एबीसी डेटा में मार्केटिंग गतिविधियों को शामिल किया है, जैसे बहुत ही कम दर पर छह महीने की सदस्यता देना। हालांकि, मेरा मानना है कि जिनके पास छिपाने के लिए कुछ है, वही इससे दूर भाग रहे हैं।’
इस बीच, सूत्रों का कहना है कि एबीसी नाराज प्रकाशकों को शांत करने का प्रयास कर रहा है और उनसे ऑडिट से पीछे नहीं हटने का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें अगली ऑडिट अवधि (जुलाई से सितंबर के बीच) के लिए मुफ्त/ रियायत में दी हुई प्रतियों पर विचार नहीं करना शामिल है।
आईपीजी मीडियाब्रैंड्स इंडिया के सीईओ शशि सिन्हा, जो एबीसी की प्रबंधन परिषद का हिस्सा हैं, ने इस बात से इनकार किया कि किसी अखबार के प्रकाशक ने ऑडिट प्रक्रिया से हाथ खींच लिया है।
एबीसी व सकाल मीडिया समूह के चेयरमैन प्रताप पवार ने भी कहा कि उन्हें ऑडिट से किसी प्रकाशन के हटने की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ हितधारकों के पास कुछ मुद्दे हो सकते हैं, जिन्हें हल करने के लिए एबीसी प्रतिबद्ध है।
पवार ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि यह जानकारी (ऑडिट से हटने वाले अखबार) सच है, यह सिर्फ और सिर्फ एक अफवाह है। इस तरह की परिस्थिति को लेकर कुछ मुद्दे हो सकते हैं और कुछ लोगों को दिक्कतें भी हो सकती हैं। एक संगठन के तौर पर एबीसी का काम है इसका समाधान करना। कोई भी पॉलिसी एक व्यक्ति तय नहीं करता, बल्कि इसके पीछ एक पूरी टीम होती है।’
उन्होंने इस तथ्य से भी इनकार किया कि ऑडिट पद्धति में कोई बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा, ‘जब तक समिति इसे मंजूरी नहीं देती, तब तक बदलाव नहीं किया जा सकता है। मैं डिसिजन मेकर नहीं हूं। यहां तक कि अगर कोई ऐसा मुद्दा है, जिसे मैं अभी तक नहीं जानता, तो हम उस पर चर्चा करेंगे।’
नवंबर 2021 में, एबीसी ने अपने प्रकाशक सदस्यों को जनवरी से जून 2022 की अवधि के लिए सर्कुलेशन के ऑडिट को फिर से शुरू करने के बारे में जानकारी देते हुए एक अधिसूचना जारी की थी। एबीसी ने सभी प्रकाशक सदस्यों से 'ए गाइड टू एबीसी ऑडिट' (A Guide to ABC Audit) में निर्धारित ब्यूरो के ऑडिट दिशानिर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया था।
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