अमर उजाला समूह के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत तीन चीजों में छिपी है- कंटेंट, क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) और क्रिएटिविटी (रचनात्मकता)।
by
Vikas Saxena
समाचार4मीडिया के 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में अमर उजाला समूह के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत तीन चीजों में छिपी है- कंटेंट, क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) और क्रिएटिविटी (रचनात्मकता)। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया इन तीनों सिद्धांतों पर कायम रहे तो उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) या किसी नई तकनीक से डरने की जरूरत नहीं है। तकनीक पत्रकारिता की दुश्मन नहीं, बल्कि उसका एक उपयोगी औजार है।
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए विनोद अग्निहोत्री ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि उनसे पहले राकेश, जगदीश, सुमित और शमशेर सहित कई वक्ता पत्रकारिता के लगभग सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से अपनी बात रख चुके हैं। इसलिए वह उन्हीं बातों में अपने कुछ अनुभव और विचार जोड़ना चाहेंगे।
उन्होंने कहा कि "मीडिया" शब्द भी बहुत पुराना नहीं है। पहले पत्रकारिता को केवल "प्रेस" कहा जाता था और वाहनों पर भी "प्रेस" ही लिखा होता था। टेलीविजन के आने के बाद "मीडिया" शब्द प्रचलन में आया। इसी तरह आज जिस "जेन-जी" (Gen Z) की चर्चा होती है, यह भी अपेक्षाकृत नया शब्द है। उन्होंने कहा कि नेपाल आंदोलन के बाद यह शब्द अधिक लोकप्रिय हुआ, जबकि उनके दौर में इस शब्द का इस्तेमाल नहीं होता था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह भी उसी पीढ़ी से निकलकर आए हैं।
विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि उनके अनुसार पत्रकारिता की सफलता तीन 'सी' पर टिकी है- कंटेंट, क्रेडिबिलिटी और क्रिएटिविटी। उन्होंने कहा कि किसी भी मीडिया संस्थान का कंटेंट जितना मजबूत होगा, उसकी विश्वसनीयता जितनी अधिक होगी और उसके प्रस्तुतिकरण में जितना नयापन होगा, वही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वह वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता के साथ आउटलुक पत्रिका में काम करते थे, तब हर अंक के प्रकाशित होने के बाद अगले अंक की योजना बनाने के लिए बैठक होती थी। उस बैठक में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर होता था कि अगली बार नया क्या किया जाए। सभी साथी अपने-अपने सुझाव देते थे, लेकिन अक्सर आलोक मेहता उन सुझावों को खारिज कर देते थे और फिर ऐसा नया विचार रखते थे, जिसे सभी लोग सहजता से स्वीकार कर लेते थे क्योंकि उसमें वास्तव में नवीनता होती थी।
उन्होंने कहा कि आलोक मेहता की हेडलाइन लिखने की शैली भी बेहद अलग थी। कई बार यह देखकर हैरानी होती थी कि इतनी नई और प्रभावी हेडलाइन आखिर उनके दिमाग में कैसे आई। उन्होंने कहा कि उम्र और अनुभव में सबसे वरिष्ठ होने के बावजूद आलोक मेहता ने सीखना कभी नहीं छोड़ा। आज भी वह लगातार खुद को अपडेट रखते हैं, हर विषय पर लिखते हैं और अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से नई पीढ़ी से संवाद करते हैं। विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि किसी भी पत्रकार के लिए लगातार सीखते रहना और समय के साथ खुद को बदलना सबसे बड़ी सीख है।
उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार कंटेंट, विश्वसनीयता और रचनात्मकता को अपनी प्राथमिकता बना लें तो पत्रकारिता के सामने किसी तरह का संकट नहीं होगा। हालांकि आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि अखबारों के सामने नई चुनौती क्या है। उन्होंने कहा कि सुबह जब कोई व्यक्ति अखबार उठाता है तो पहले पन्ने पर छपी अधिकांश खबरें वह पहले से जानता है क्योंकि रातभर वही खबरें टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया पर देख चुका होता है। यहां तक कि अखबार की मुख्य खबर भी उसके लिए नई नहीं रहती। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब अखबार अपने पाठकों को क्या नया देगा।
विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि उनकी पीढ़ी के लोगों को अखबार पढ़ने की आदत है और बिना अखबार पढ़े उनका दिन पूरा नहीं होता। लेकिन नई पीढ़ी अखबारों से इसलिए दूर हो रही है क्योंकि जो जानकारी अखबार में छपती है, वह उन्हें पहले ही मिल चुकी होती है। इसलिए अखबारों को अब ऐसी सामग्री देनी होगी जो पाठकों को नई जानकारी और नया दृष्टिकोण दे सके।
उन्होंने कहा कि उन्हें पत्रकारिता के लगभग सभी माध्यमों- अखबार, पत्रिका, टेलीविजन और डिजिटल- में काम करने का अवसर मिला है। फिलहाल भी वह अमर उजाला डॉट कॉम से जुड़े हैं। इसलिए वह पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि अखबार आज भी पत्रकारिता की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि सुबह किसी भी टीवी चैनल की न्यूज मीटिंग में सभी प्रमुख अखबार सामने रखे जाते हैं और उनकी खबरों पर चर्चा होती है। वहीं शाम को जब अखबार की संपादकीय बैठक होती है तो दिनभर टीवी चैनलों पर चली प्रमुख खबरों और हेडलाइन पर विचार किया जाता है। इससे साफ है कि अखबार और टीवी एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं।
उन्होंने कहा कि जब टेलीविजन आया था, तब यह आशंका जताई गई थी कि अब अखबार बंद हो जाएंगे। बाद में जब डिजिटल मीडिया आया तो यही डर टीवी चैनलों को लेकर भी पैदा हुआ। लेकिन समय ने साबित कर दिया कि तीनों माध्यम एक-दूसरे को मजबूत करते हैं। आज टीवी चैनल अपनी कई ब्रेकिंग खबरों की शुरुआती जानकारी डिजिटल माध्यमों से लेते हैं और बाद में अपने रिपोर्टर से पुष्टि होने पर उसे विस्तार से प्रसारित करते हैं। इस तरह तीनों माध्यम मिलकर पत्रकारिता को आगे बढ़ा रहे हैं।
एआई पर अपनी राय रखते हुए विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि जैसे कभी कंप्यूटर आने पर लोगों को डर था कि इससे नौकरियां खत्म हो जाएंगी, वैसे ही आज एआई को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के दौर में कंप्यूटरीकरण का भी विरोध हुआ था। उस समय लोगों को लगता था कि बैंक कर्मचारियों, रेलवे कर्मचारियों और दूसरे क्षेत्रों के लोगों की नौकरियां चली जाएंगी। लेकिन अगर कंप्यूटर नहीं आया होता तो देश आज इतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ पाता। इसलिए तकनीक को दुश्मन नहीं, बल्कि एक साधन के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एआई को कभी भी "मैनेजिंग एडिटर" नहीं बनाना चाहिए। उसे केवल एक सहायक, सचिव या रिसर्च टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। आज किसी चर्चा या बहस के दौरान अगर किसी तथ्य पर संदेह होता है तो लोग तुरंत चैटजीपीटी जैसे प्लेटफॉर्म पर जाकर उसकी पुष्टि कर लेते हैं। यह सुविधा अच्छी है, लेकिन अंतिम फैसला इंसान को ही लेना चाहिए।
विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी चिंता तकनीक नहीं, बल्कि पढ़ने-लिखने की घटती आदत है। आज लगभग हर जानकारी गूगल या चैटजीपीटी पर उपलब्ध है, लेकिन केवल जानकारी होना और किसी विषय की गहरी समझ होना दोनों अलग-अलग बातें हैं। उनके अनुसार गूगल या एआई सूचना का भंडार हो सकते हैं, लेकिन वे पुस्तकालय का विकल्प नहीं हैं। इतिहास, समाज और संस्कृति की सही समझ केवल अध्ययन और किताबें पढ़ने से ही विकसित होती है। सूचना कहीं से भी मिल सकती है, लेकिन ज्ञान और समझ लगातार पढ़ने से ही आती है। इसलिए नई पीढ़ी को पढ़ने की आदत बनाए रखना बेहद जरूरी है।
विनोद अग्निहोत्री ने आगे कहा कि पत्रकारिता के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती केवल तकनीक या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नहीं है, बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि सूचना और ज्ञान में अंतर होता है। सूचना इंटरनेट से मिल सकती है, लेकिन समाज, इतिहास और संस्कृति की गहरी समझ पढ़ने और अध्ययन से ही विकसित होती है। इसलिए पत्रकारों और नई पीढ़ी के लिए पढ़ने-लिखने की आदत बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आज यह जरूर चिंता का विषय है कि नई पीढ़ी में किताबें पढ़ने की आदत कम हो रही है, लेकिन इसे पूरी तरह निराशाजनक स्थिति नहीं कहा जा सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल के दिनों में एक युवक इरफान का वीडियो काफी चर्चा में रहा। वह कभी स्कूल नहीं गया, लेकिन जिस तरह उसने अपनी बात रखी, उससे साफ होता है कि मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से भी लोग बहुत कुछ सीख रहे हैं। इसलिए तकनीक को पूरी तरह नकारना सही नहीं होगा।
विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि अब सब कुछ खत्म हो जाएगा। समय के साथ मीडिया का स्वरूप जरूर बदल सकता है, लेकिन उसका अस्तित्व समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इंसान की प्रकृति में हमेशा सूचना, ज्ञान और नई जानकारी हासिल करने की इच्छा रहती है। जब तक यह जिज्ञासा बनी रहेगी, तब तक मीडिया भी जीवित रहेगा। अखबार, टेलीविजन और डिजिटल माध्यम खत्म नहीं होंगे, बल्कि समय के साथ उनका स्वरूप बदलता रहेगा।
उन्होंने अपने लंबे पत्रकारिता जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें हिंदी पत्रकारिता के कई बड़े संपादकों के साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने राज माथुर, एस.पी. सिंह, उदयन शर्मा, कन्हैया लाल नंदन और आलोक मेहता जैसे वरिष्ठ संपादकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी से उन्होंने पत्रकारिता के मूल सिद्धांत सीखे। उन्होंने बताया कि प्रभाष जोशी और मनोहर श्याम जोशी के साथ काम करने का अवसर भले न मिला हो, लेकिन उनसे संवाद जरूर रहा।
उन्होंने कहा कि इन वरिष्ठ पत्रकारों से उन्होंने सबसे बड़ी सीख यही ली कि पत्रकारिता में किसी मुद्दे पर जरूरत पड़ने पर स्पष्ट रुख (स्टैंड) लेना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि वह यह नहीं कह रहे कि हर संपादक हमेशा इस्तीफा जेब में लेकर घूमे, लेकिन जब खबरों और कंटेंट की विश्वसनीयता का सवाल हो तो संपादक को अपना पक्ष स्पष्ट रखना चाहिए। पत्रकारिता की विश्वसनीयता इसी से बनती है।
विनोद अग्निहोत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की कवरेज का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान देश के लगभग सभी प्रमुख न्यूज चैनलों ने ऐसी खबरें प्रसारित कर दीं, जिनमें यह दिखाया जाने लगा कि भारतीय सेना कराची और रावलपिंडी तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि उस समय संपादकों को दबाव चाहे किसी भी तरह का रहा हो, लेकिन उन्हें स्पष्ट रूप से कहना चाहिए था कि ऐसी अपुष्ट खबरें नहीं चलाई जाएंगी।
उन्होंने कहा कि उन्हें सबसे अधिक दुख इस बात का हुआ कि कई टीवी चैनलों पर बैठे रक्षा विशेषज्ञ ऐसी बातें कर रहे थे, जबकि वास्तविकता यह थी कि सेना की गतिविधियां अभी अपनी तय सीमाओं से आगे नहीं बढ़ी थीं। लेकिन टीवी स्क्रीन पर कराची और लाहौर तक पहुंचने के दावे किए जा रहे थे। उनके मुताबिक यह भारतीय मीडिया की बड़ी चूक थी और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश के मीडिया की साख को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने कहा कि जब मीडिया अपनी विश्वसनीयता से समझौता करता है तो बाद में उसकी सही खबरों पर भी लोग भरोसा नहीं करते। यही कारण है कि ऐसे समय में लोगों ने भारतीय मीडिया की बजाय अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों की खबरों पर ज्यादा भरोसा करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि एक बार यदि विश्वसनीयता पर आंच आ जाए तो उसे वापस हासिल करना बेहद कठिन हो जाता है।
उन्होंने जंतर-मंतर की हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान उनके कई परिचित लगातार सोशल मीडिया के जरिए उन्हें अपडेट भेज रहे थे। लेकिन जब उन्होंने पूछा कि क्या यह खबर किसी अखबार, न्यूज चैनल या विश्वसनीय वेबसाइट पर भी है, तो जवाब मिला कि वहां तो यह खबर काफी देर बाद आएगी। उन्होंने कहा कि यह धारणा बन चुकी है कि मुख्यधारा का मीडिया कई बार जरूरी खबरें समय पर नहीं दिखाता। उन्होंने माना कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन लोगों के मन में इस तरह का अविश्वास पैदा होना निश्चित रूप से चिंता का विषय है।
विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि आज मीडिया के लिए कई तरह के अपमानजनक शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया और न ही वह इससे सहमत हैं। उनके मुताबिक हर पत्रकार एक ही पेशे का हिस्सा है। आज कोई टीवी में है, कल अखबार में जा सकता है और अखबार में काम करने वाला पत्रकार कल डिजिटल या टीवी में पहुंच सकता है। इसलिए किसी भी माध्यम या पत्रकार को कमतर बताना या पूरी तरह खारिज कर देना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने करियर में कई दंगों की रिपोर्टिंग की है। उस दौर में जब पत्रकार घटनास्थल पर पहुंचते थे तो लोग उन्हें सम्मान देते थे और मानते थे कि पत्रकार दोनों पक्षों की बात निष्पक्षता से सामने रखेगा। लेकिन आज हालात बदल गए हैं। हालांकि उन्होंने जंतर-मंतर पर पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के साथ हुई बदसलूकी की कड़ी निंदा की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि मीडिया जगत को आत्ममंथन करना होगा कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों बन रही हैं और लोगों का भरोसा लगातार क्यों घट रहा है।
उन्होंने कहा कि एक समय पत्रकार किसी भी इलाके का सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता था, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। मीडिया की साख कमजोर होने के पीछे क्या कारण हैं, इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उनके अनुसार यह जिम्मेदारी उन लोगों की है जो मीडिया संस्थानों में फैसले लेने की स्थिति में हैं।
अपने संबोधन के अंत में विनोद अग्निहोत्री ने ब्रेकिंग न्यूज की होड़ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि एक बार सरकार गठन के दौरान दूसरे चैनल पर कैबिनेट की सूची चल रही थी। उनके संस्थान के इनपुट एडिटर ने भी वही खबर चलाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया क्योंकि उनके रिपोर्टर ने अभी तक उसकी पुष्टि नहीं की थी और न ही कोई एजेंसी से आधिकारिक जानकारी आई थी। उन्होंने कहा कि केवल दूसरे चैनल को देखकर अपुष्ट खबर चला देना पत्रकारिता नहीं है।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले खबर दिखाने की अंधी दौड़ न्यूज़रूम के कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डालती है। इससे उनकी रचनात्मकता प्रभावित होती है और कई बार विश्वसनीयता से भी समझौता करना पड़ता है। उनके मुताबिक अगर कोई खबर दो मिनट देर से लेकिन सही तरीके से प्रसारित होती है, तो इससे कोई नुकसान नहीं होता। आम दर्शक एक साथ कई चैनल नहीं देख रहा होता, इसलिए जल्दबाजी की बजाय सही और पुष्ट खबर देना अधिक महत्वपूर्ण है।
विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि पत्रकारिता को लेकर बहुत अधिक निराश होने की जरूरत नहीं है। तकनीक लगातार बदलेगी और मीडिया की मदद करेगी। लेकिन यदि पत्रकारिता कंटेंट, क्रेडिबिलिटी और क्रिएटिविटी, इन तीन मूल सिद्धांतों को बनाए रखेगी तो मीडिया नए स्वरूप में आगे भी मजबूती के साथ चलता रहेगा।
जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) की 50वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चार पूर्ण कालिक निदेशकों (Whole-time Directors) की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है।
by
Vikas Saxena
जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) की 50वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चार पूर्ण कालिक निदेशकों (Whole-time Directors) की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा महेंद्र मोहन गुप्ता को Non-Executive Director के तौर पर आगे भी बनाए रखने की मंजूरी दी गई है।
कंपनी ने 18 सितंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि 50वीं AGM शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC)/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम (OAVM) के जरिए हुई। बैठक में सदस्यों ने इन नियुक्तियों और आगे जारी रखने को मंजूरी दी।
चार पूर्ण कालिक निदेशकों की पांच साल के लिए दोबारा नियुक्ति
बोर्ड की सिफारिश के आधार पर सदस्यों ने चार पूर्ण कालिक निदेशकों को अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने की मंजूरी दी है। इनका नया कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा।
धीरेंद्र मोहन गुप्ता को कंपनी के पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर पांच साल के लिए फिर नियुक्त किया गया है। वह 82 साल के हैं और उन्होंने आर्ट्स में स्नातक की डिग्री ली है। कंपनी के मुताबिक, उन्हें प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 60 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और कंपनी की शुरुआत से ही इसके साथ निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वह महेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं। उनकी यह नियुक्ति रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन होगी।
सुनील गुप्ता को भी पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 64 वर्षीय सुनील गुप्ता ने कॉमर्स में स्नातक और मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह प्रमोटर ग्रुप के सदस्य हैं और 1993 से कंपनी के निदेशक हैं। कंपनी ने बताया कि उनका किसी अन्य निदेशक के साथ कोई संबंध नहीं है। उनकी नियुक्ति भी रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन होगी।
संजय गुप्ता को भी पांच साल के लिए पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 63 वर्षीय संजय गुप्ता ने साइंस में स्नातक की डिग्री ली है और उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और 1993 से कंपनी के निदेशक हैं। वह संदीप गुप्ता के भाई हैं। उनकी नियुक्ति रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन नहीं होगी।
शैलेश गुप्ता को भी पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर अगले पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 57 वर्षीय शैलेश गुप्ता ने कॉमर्स में स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह Promoter Group के सदस्य हैं और 1994 से कंपनी के निदेशक हैं। वह महेंद्र मोहन गुप्ता के बेटे हैं। उनकी नियुक्ति भी रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन नहीं होगी।
कंपनी ने यह भी बताया कि इन चारों निदेशकों को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) या किसी अन्य प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
महेंद्र मोहन गुप्ता गैर-कार्यकारी निदेशक (Non-Executive Director) के तौर पर बने रहेंगे
AGM में सदस्यों ने महेंद्र मोहन गुप्ता को कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर आगे भी बनाए रखने की मंजूरी दी है। उनका नया कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक पांच साल का होगा। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर नहीं होंगे।
महेंद्र मोहन गुप्ता को 1 अक्टूबर 2021 से दो साल के लिए कंपनी का चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) नियुक्त किया गया था। उनका यह कार्यकाल 30 सितंबर 2023 को पूरा हुआ। इसके बाद 1 अक्टूबर 2023 से उन्हें कंपनी का गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (Non-Executive Chairman) बनाया गया। अब उनका गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को समाप्त होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से वह गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर कंपनी में बने रहेंगे।म
महेंद्र मोहन गुप्ता 85 साल के हैं और उन्होंने कॉमर्स में स्नातक की डिग्री ली है। कंपनी के अनुसार, उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 65 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और कंपनी की शुरुआत से ही इसके साथ निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वह शैलेश गुप्ता के पिता और धीरेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं।
कंपनी ने बताया कि महेंद्र मोहन गुप्ता को भी SEBI या किसी अन्य प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।
by
Samachar4media Bureau
देश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार द हिंदू (The Hindu) ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह से जुड़े एक विज्ञापन के प्रकाशन पर अपने पाठकों से बिना शर्त माफी मांगी है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।
अखबार ने अपने माफीनामे में इस विज्ञापन को “offensive front-page advertisement” और “deeply offensive advertisement” बताया। द हिंदू ने कहा कि उसे इस विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार के निदेशक एन. राम (N. Ram) की ओर से भी इस मामले को लेकर जानकारी साझा की गई है।
Apology -- This is a screenshot of the front page of today’s Delhi edition of The Hindu. The apology that appears on this page has been published on the front page of all the editions of The Hindu. pic.twitter.com/manZfhQkER
— N. Ram (@nramind) September 13, 2026
यह था पूरा मामला: दरअसल, 12 सितंबर के द हिंदू के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों के फ्रंट पेज पर डेरा सच्चा सौदा की ओर से एक पूरे पेज का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। इसका शीर्षक था “What is Dera Sacha Sauda? (Facts vs Fiction)”। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ लगे आरोपों और मामलों को लेकर डेरा की ओर से अपना पक्ष रखा गया था। विज्ञापन में उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर साजिश का दावा भी किया गया था। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा की ओर से सामाजिक कार्यों को लेकर कई आंकड़े भी दिए गए थे। इनमें नशे से लोगों को बाहर निकालने, पेड़ लगाने, रक्तदान और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से जुड़े दावे शामिल थे।
राम रहीम को लेकर क्या है मामला?: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को वर्ष 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें 20 साल की सजा सुनाई थी। विज्ञापन प्रकाशित होने के समय वह 21 दिन की फरलो पर जेल से बाहर थे। इसी पृष्ठभूमि में द हिंदू के फ्रंट पेज पर इस विज्ञापन के प्रकाशन को लेकर पत्रकारों और सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने सवाल उठाए। इसके बाद द हिंदू ने अपने पाठकों से इस विज्ञापन को प्रकाशित करने के लिए बिना शर्त माफी मांगी।
द हिंदू ने क्या कहा?: 13 सितंबर को फ्रंट पेज पर प्रकाशित अपने माफीनामे में अखबार ने कहा कि उसे दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में “डेरा सच्चा सौदा क्या है? (तथ्य बनाम कल्पना)” शीर्षक से प्रकाशित आपत्तिजनक फ्रंट-पेज विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार ने विज्ञापन में किए गए उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख और दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ “ड्रग माफिया और डेरा के विरोधी ताकतों” की ओर से साजिश का दावा किया गया था।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है।
by
Vikas Saxena
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है। कंपनी ने बताया कि 8 सितंबर 2026 को 8,708 OCDs को 16,02,011 इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट किया गया है। इन शेयरों की कुल राशि 85 करोड़ रुपये है।
इस कन्वर्जन के बाद HMVL को StockGro में 2.48 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह हिस्सेदारी OCDs के इक्विटी शेयरों में कन्वर्जन के जरिए हासिल हुई है।
StockGro में नहीं हुआ नया कैश निवेश
कंपनी के मुताबिक, यह लेन-देन OCDs को इक्विटी शेयरों में बदलने के रूप में हुआ है। यानी इस चरण में 85 करोड़ रुपये का कोई नया नकद निवेश करने की बात नहीं कही गई है। HMVL ने पहले StockGro में निवेश के तहत ये OCDs रखे हुए थे, जिन्हें अब शेयरों में बदला गया है।
निवेश का उद्देश्य क्या है?
कंपनी ने बताया है कि इस निवेश का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही कंपनी में निवेश के जरिए भविष्य में पूंजी पर रिटर्न हासिल करना है। इसके साथ ही HMVL की ओर से कंपनी के मीडिया एसेट्स का लाभ उठाने की भी बात कही गई है।
StockGro क्या करती है?
Assetgro Fintech Pvt Ltd, जिसे StockGro के नाम से जाना जाता है, फिनटेक सेक्टर में काम करती है। कंपनी के अनुसार, StockGro एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो निवेश सलाह, ज्ञान साझा करने और कम्युनिटी आधारित बातचीत को एक ही इकोसिस्टम में जोड़ता है।
इसके प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड निवेश सलाहकारों और यूजर्स के बीच बातचीत की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने इसे भारत का पहला ऐसा प्लेटफॉर्म बताया है जो इन अलग-अलग सुविधाओं को एक साथ जोड़ता है।
StockGro का कारोबार बढ़ा
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, StockGro का टर्नओवर पिछले तीन वित्त वर्षों में बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का टर्नओवर 99 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 125.51 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 में 231.10 करोड़ रुपये हो गया।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह लेन-देन रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन नहीं है। साथ ही HMVL के प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप या ग्रुप कंपनियों की StockGro में कोई रुचि नहीं है। इस कन्वर्जन के लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं थी।
भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है।
by
Samachar4media Bureau
भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी का मकसद BCCL के अखबारों और डिजिटल प्रकाशनों की खबरों को ChatGPT के जरिए ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुंचाना है। खास बात यह है कि ChatGPT पर दिखाई जाने वाली खबरों के साथ मूल प्रकाशन और खबर की पूरी रिपोर्ट तक पहुंचने के लिए सीधे लिंक भी दिए जाएंगे।
इस साझेदारी के तहत BCCL के चुनिंदा प्रकाशनों, जिनमें The Times of India और The Economic Times शामिल हैं, की सामग्री संबंधित सवालों के जवाब में ChatGPT पर दिखाई जा सकेगी। जहां किसी खबर का संक्षिप्त सार या कुछ हिस्सा दिखाया जाएगा, वहां संबंधित प्रकाशन का नाम भी बताया जाएगा और मूल खबर का सीधा लिंक दिया जाएगा। इससे पाठक पूरी खबर और उसका संदर्भ BCCL के प्लेटफॉर्म पर जाकर देख सकेंगे।
अंग्रेजी के साथ भारतीय भाषाओं की खबरें भी होंगी शामिल
यह साझेदारी सिर्फ लाइव खबरों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें BCCL के अंग्रेजी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाली अन्य सामग्री भी शामिल होगी। हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।
BCCL के लिए इस साझेदारी में खबर के मूल स्रोत और उसकी पहचान को बनाए रखने पर खास जोर दिया गया है। BCCL के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और बोर्ड मेंबर मोहित जैन ने कहा कि इस साझेदारी से पाठकों को BCCL के अलग-अलग प्रकाशनों की पत्रकारिता खोजने में मदद मिलेगी, साथ ही मूल खबर के स्रोत, संदर्भ और पहचान को भी बरकरार रखा जाएगा।
वहीं, OpenAI के मीडिया पार्टनरशिप्स के वाइस प्रेसिडेंट वरुण शेट्टी ने कहा कि साझेदारी से ChatGPT के यूजर्स BCCL के अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं के प्रकाशनों की खबरें स्पष्ट स्रोत जानकारी और मूल खबर के सीधे लिंक के साथ खोज सकेंगे।
सिर्फ खबरों तक पहुंच नहीं, AI के दूसरे इस्तेमाल पर भी काम
BCCL और OpenAI की साझेदारी केवल ChatGPT पर खबरें दिखाने तक सीमित नहीं है। दोनों कंपनियां BCCL के अलग-अलग उत्पादों, पाठक सेवाओं और आंतरिक कामकाज में OpenAI की तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाशेंगी।
इसमें पुराने समाचारों और आर्काइव को खोजने, रिसर्च, डेटा विश्लेषण, अनुवाद, पाठक सेवाओं और कारोबारी कामकाज जैसे क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं शामिल हैं।
न्यूजरूम में AI इस्तेमाल पर संपादकीय नियंत्रण बरकरार रहेगा
BCCL ने साफ किया है कि उसके न्यूजरूम में AI का इस्तेमाल होने की स्थिति में संबंधित प्रकाशनों के संपादकीय नियमों और नीतियों का पालन किया जाएगा। साथ ही हर स्तर पर मानवीय निगरानी भी बनी रहेगी।
BCCL के प्रकाशनों का संपादकीय नियंत्रण पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा। खबर क्या होगी, उसकी जांच कैसे होगी, उसे कैसे संपादित किया जाएगा और कब प्रकाशित किया जाएगा, इसका फैसला संपादक और पत्रकार ही करेंगे। OpenAI को BCCL के कवरेज या संपादकीय रुख तय करने में कोई भूमिका नहीं होगी।
AI के दौर में बदल रहा है खबरों तक पहुंचने का तरीका
यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब जनरेटिव AI लोगों के लिए जानकारी और खबरें खोजने का एक नया माध्यम बनता जा रहा है। ऐसे में मीडिया कंपनियों के सामने खबर के मूल स्रोत, सही श्रेय, मूल रिपोर्ट तक पाठकों की पहुंच और संपादकीय स्वतंत्रता जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
BCCL और OpenAI की यह साझेदारी इसी बदलते माहौल का हिस्सा है। इसमें एक ओर ChatGPT के जरिए BCCL की पत्रकारिता को नए पाठकों तक पहुंचाने पर जोर है, तो दूसरी ओर पाठकों को पूरी खबर और उसका मूल संदर्भ देखने के लिए BCCL की वेबसाइट और प्लेटफॉर्म पर वापस भेजने की व्यवस्था भी रखी गई है।
OpenAI दुनिया भर के प्रकाशकों के साथ ऐसी साझेदारियों के जरिए विश्वसनीय जानकारी तक लोगों की पहुंच बेहतर करने और समाचार व प्रकाशन के कामकाज में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है। BCCL के लिए यह साझेदारी पाठकों तक खबरों की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ प्रकाशन और कारोबारी कामकाज के कई क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल का रास्ता भी खोलती है।
TAM AdEx की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान प्रिंट में विज्ञापन के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सिर्फ 2% कम हुई है।
by
Samachar4media Bureau
साल 2026 के शुरुआती सात महीनों में प्रिंट विज्ञापन बाजार लगभग स्थिर रहा है। TAM AdEx की जनवरी-जुलाई 2026 बनाम जनवरी-जुलाई 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान प्रिंट में विज्ञापन के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सिर्फ 2% कम हुई है। यानी प्रिंट विज्ञापन में इस दौरान कोई बड़ी गिरावट नहीं देखने को मिली।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रिंट विज्ञापन में शिक्षा क्षेत्र सबसे आगे रहा। कुल ऐड स्पेस में शिक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी 20% रही। इसके बाद सेवा क्षेत्र 15% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ऑटो और बैंकिंग व वित्तीय सेवाएं भी प्रिंट में प्रमुख विज्ञापन देने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे।
शीर्ष पांच क्षेत्रों ने मिलकर प्रिंट की कुल ऐड स्पेस में 66% से ज्यादा हिस्सेदारी दर्ज की। वहीं, कॉरपोरेट/ब्रैंड छवि शीर्ष 10 क्षेत्रों में शामिल होने वाला एकमात्र नया क्षेत्र रहा। जनवरी-जुलाई 2025 की तुलना में इस साल भी शीर्ष चार क्षेत्रों ने अपनी जगह बरकरार रखी।
कारों का विज्ञापन सबसे ज्यादा, मल्टीपल कोर्सेज में सबसे बड़ी बढ़त
कैटेगरीज की बात करें तो कारें प्रिंट विज्ञापन में सबसे बड़ी श्रेणी बनी हुई हैं। शीर्ष 10 कैटेगरीज ने मिलकर कुल प्रिंट ऐड स्पेस का करीब 48% हिस्सा हासिल किया। इस दौरान चार कैटेगरीज ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया, जबकि खुदरा दुकानें-कपड़े/टेक्सटाइल/फैशन ने शीर्ष 10 कैटेगरीज में जगह बनाई।
शीर्ष 10 कैटेगरीज में शिक्षा से जुड़ी तीन कैटेगरीज और ऑटो से जुड़ी दो कैटेगरीज शामिल रहीं। वहीं, जनवरी-जुलाई 2025 की तुलना में ऐड स्पेस में वास्तविक बढ़ोतरी के मामले में मल्टीपल कोर्सेज श्रेणी सबसे आगे रही। इसके बाद खुदरा दुकानें-ज्वेलर्स और ई-कॉमर्स-अन्य सेवाओं का नंबर रहा।
मारुति सुजुकी लगातार दूसरी बार सबसे बड़ा विज्ञापनदाता
विज्ञापनदाताओं की रैंकिंग में Maruti Suzuki India ने लगातार दूसरे साल शीर्ष स्थान हासिल किया है। जनवरी-जुलाई 2025 के शीर्ष 10 विज्ञापनदाताओं में शामिल सात कंपनियां इस साल भी शीर्ष 10 में बनी रहीं। इस साल SBS Biotech, GCMMF और Renault India ने शीर्ष 10 विज्ञापनदाताओं की सूची में नई जगह बनाई है।
ब्रैंड की बात करें तो Allen Career Inst जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान प्रिंट में सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाला ब्रैंड रहा। इसके बाद LIC of India दूसरे स्थान पर रहा। पूरी अवधि के दौरान प्रिंट माध्यम में 1.08 लाख से ज्यादा ब्रैंडों ने विज्ञापन दिया। शीर्ष 10 ब्रैंडों में तीन ऑटो क्षेत्र और तीन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे।
हिंदी और अंग्रेजी प्रकाशनों का दबदबा कायम
प्रिंट विज्ञापन में भाषा के मामले में भी पिछले साल की स्थिति लगभग वैसी ही रही। शीर्ष तीन प्रकाशन भाषाओं की रैंकिंग में साल-दर-साल कोई बदलाव नहीं हुआ। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के प्रकाशनों ने मिलकर जनवरी-जुलाई 2025 और जनवरी-जुलाई 2026, दोनों अवधियों में प्रिंट विज्ञापन की मात्रा का 60% से ज्यादा हिस्सा हासिल किया।
सेल्स प्रमोशन का भी बड़ा हिस्सा
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान सेल्स प्रमोशन से जुड़े विज्ञापनों की प्रिंट ऐड स्पेस में हिस्सेदारी 28% रही।
सेल्स प्रमोशन वाले विज्ञापनों में एक साथ कई तरह के प्रमोशन (Multiple Promotion) सबसे आगे रहे, जिनकी हिस्सेदारी 45% रही। इसके बाद छूट से जुड़े प्रमोशन (Discount Promotion) का नंबर आया। दोनों प्रमोशन फॉर्मेट्स ने मिलकर सेल्स प्रमोशन से जुड़े विज्ञापनों की कुल जगह का 85% हिस्सा हासिल किया।
कुल मिलाकर, TAM AdEx के आंकड़े बताते हैं कि 2026 के पहले सात महीनों में प्रिंट विज्ञापन में मामूली गिरावट के बावजूद इस माध्यम की स्थिति काफी हद तक स्थिर रही। शिक्षा, सेवा और ऑटो जैसे क्षेत्रों का प्रिंट में दबदबा बना हुआ है, जबकि Maruti Suzuki, Allen Career Inst और LIC जैसे बड़े विज्ञापनदाताओं और ब्रैंडों की मजबूत मौजूदगी कायम है।
दैनिक भास्कर समूह की कंपनी D.B. Corp Limited की 30वीं सालाना आम बैठक यानी AGM में शेयरधारकों ने बैठक में रखे गए सभी चार प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।
by
Vikas Saxena
दैनिक भास्कर समूह की कंपनी D.B. Corp Limited की 30वीं सालाना आम बैठक यानी AGM में शेयरधारकों ने बैठक में रखे गए सभी चार प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने 2 सितंबर 2026 को शेयर बाजारों को इसकी जानकारी दी।
कंपनी के मुताबिक, AGM 2 सितंबर को सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और दोपहर 12:48 बजे तक चली। बैठक में शेयरधारकों ने रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग के जरिए मतदान किया।
सभी चार प्रस्तावों को मिली मंजूरी
कंपनी ने बताया कि स्वतंत्र जांचकर्ता की रिपोर्ट के आधार पर AGM में रखे गए चारों प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए। पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को खत्म हुए वित्त वर्ष के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय परिणामों को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 15.98 करोड़ वोट पड़े, जबकि केवल 160 वोट इसके खिलाफ रहे। यानी प्रस्ताव को करीब 99.99% वोट के साथ मंजूरी मिली।
पवन अग्रवाल की दोबारा निदेशक के रूप में नियुक्ति
दूसरे प्रस्ताव में पवन अग्रवाल की रोटेशन के आधार पर दोबारा निदेशक के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उन्हें दोबारा नियुक्त किए जाने के पक्ष में करीब 15.27 करोड़ वोट पड़े, जबकि करीब 9.57 लाख वोट विरोध में रहे। प्रस्ताव को 99.38% वोट मिले।
कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक को भी मंजूरी
तीसरे प्रस्ताव में कंपनी के कॉस्ट ऑडिटर को दिए जाने वाले पारिश्रमिक को मंजूरी देने की बात थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में करीब 16.02 करोड़ वोट पड़े और सिर्फ 721 वोट इसके खिलाफ रहे। प्रस्ताव को करीब 99.9995% वोट के साथ मंजूरी मिली।
सुधीर अग्रवाल की फिर नियुक्ति
AGM का सबसे अहम प्रस्ताव सुधीर अग्रवाल की दोबारा नियुक्ति से जुड़ा था। शेयरधारकों ने उन्हें कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर फिर नियुक्त करने और उनके पारिश्रमिक को मंजूरी दे दी है। सुधीर अग्रवाल की नया कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2031 तक यानी पांच साल तक रहेगा।
इस प्रस्ताव के पक्ष में करीब 15.28 करोड़ वोट पड़े, जबकि करीब 7.96 लाख वोट इसके खिलाफ रहे। कुल मतदान में से करीब 99.48% वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
AGM में कितने शेयरधारक जुड़े?
कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 की रिकॉर्ड डेट पर कुल 42,349 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 12 प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप और 66 सार्वजनिक शेयरधारक शामिल हुए। कंपनी ने बताया कि चारों प्रस्ताव शेयरधारकों के जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए हैं।
बिजनेस मैगजीन ‘BW Businessworld’ के नवीनतम अंक में भारतीय कारोबारी जगत को प्रभावित करने वाले दो बड़े बदलावों पर विस्तृत विश्लेषण प्रकाशित किया गया है।
by
Samachar4media Bureau
जानी-मानी बिजनेस मैगजीन ‘BW Businessworld’ के नवीनतम अंक में भारतीय कारोबारी जगत को प्रभावित करने वाले दो बड़े बदलावों पर विस्तृत विश्लेषण प्रकाशित किया गया है। इनमें टाटा समूह में जारी नेतृत्व परिवर्तन और फिनटेक सेक्टर का तेजी से वित्तीय बुनियादी ढांचे (Financial Infrastructure) के रूप में उभरना शामिल है।
इस अंक की प्रमुख कवर स्टोरी ‘Back To Tata’ है, जिसमें रतन टाटा के बाद और टाटा संस के अगले चेयरमैन की नियुक्ति से पहले आकार ले रहे संस्थागत बदलावों का विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही BW Businessworld के Festival of Fintech 2026 पर आधारित एक विशेष फिनटेक पैकेज भी प्रकाशित किया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पेमेंट्स, लेंडिंग, वेल्थटेक, इंश्योरटेक और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को विस्तार से समझाया गया है।
अगले चेयरमैन से आगे की सोच पर केंद्रित है ‘Back To Tata’: कवर स्टोरी केवल संभावित चेयरमैन उम्मीदवारों की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल पर केंद्रित है कि भविष्य का टाटा समूह कैसा होगा और अगले पेशेवर नेता को किस तरह की जिम्मेदारियां विरासत में मिलेंगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘Back To Tata’ किसी पारिवारिक प्रबंधन व्यवस्था की वापसी का संकेत नहीं देती। इसके बजाय यह बताती है कि नोएल टाटा के नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट्स एक बार फिर उस संस्थागत केंद्र के रूप में उभरे हैं, जो समूह के दीर्घकालिक उद्देश्य, जोखिम लेने की क्षमता और पेशेवर प्रबंधन से अपेक्षाओं को स्पष्ट करने की भूमिका निभा रहे हैं।
इस विशेष पैकेज में एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल का भी आंकड़ों के आधार पर संतुलित मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 के बीच टाटा समूह का राजस्व 2.1 गुना बढ़ा, जबकि कर पश्चात लाभ (PAT) में 5.4 गुना वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 2.6 गुना बढ़ा।
रिपोर्ट में समूह के नए व्यवसायों के प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला गया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और अग्राटास (Agratas) ने वित्त वर्ष 2026 में संयुक्त रूप से लगभग 2.39 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि इनका कुल संयुक्त घाटा 29,924 करोड़ रुपये रहा।
वहीं, इस बदलाव के दौर में टाटा संस ने 31,961 करोड़ रुपये के कर पश्चात लाभ, 21,841 करोड़ रुपये की शुद्ध नकद राशि (Net Cash) और शून्य उधारी के साथ प्रवेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय क्षमता नहीं, बल्कि पूंजी आवंटन, क्रियान्वयन और संस्थागत समन्वय की है।
इस विषय पर BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ तथा एक्सचेंज4मीडिया समूह के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि टाटा समूह केवल भारत की सबसे बड़ी कारोबारी संस्थाओं में से एक नहीं है, बल्कि यह उद्यम, पेशेवर प्रबंधन, स्वामित्व और सार्वजनिक उद्देश्य के बीच एक विशिष्ट संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि समूह का अगला अध्याय महत्वाकांक्षा और जवाबदेही के साथ-साथ विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के संतुलन पर आधारित होना चाहिए। कवर पैकेज में डॉ. अनुराग बत्रा के लेख भी शामिल हैं, जिनमें नोएल टाटा की भूमिका को एक ऑपरेटर, निर्माता और टाटा मूल्यों के संरक्षक के रूप में परखा गया है।
वित्तीय सेवाएं बन रही हैं बुनियादी ढांचा: इस अंक का फिनटेक विशेषांक ‘The Infrastructuralisation Of Finance’ शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तीय सेवाओं को उपभोक्ता केंद्रित सेवाओं से आगे बढ़ाकर आधुनिक अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे में बदल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, UPI, Aadhaar, Account Aggregators, ONDC और Open Credit Enablement Network (OCEN) जैसे प्लेटफॉर्म और प्रणालियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से, भुगतान, ऋण, बीमा और निवेश जैसी सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ गहराई से जोड़ रही हैं।
विशेष पैकेज में यह भी बताया गया है कि वित्तीय सेवाएं अब धीरे-धीरे उपभोक्ताओं के लिए अदृश्य लेकिन हर जगह मौजूद बुनियादी व्यवस्था बनती जा रही हैं। इसका प्रभाव यात्रा बुकिंग, ई-कॉमर्स, सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म, गिग इकॉनमी और एंटरप्राइज सिस्टम्स तक देखा जा सकता है।
रिपोर्ट में MSMEs, पहली बार ऋण लेने वाले ग्राहकों और वित्तीय रूप से कम सेवाएं प्राप्त करने वाले वर्गों के लिए उभर रहे अवसरों का भी विश्लेषण किया गया है। इसमें यह समझाया गया है कि सहमति आधारित कैश-फ्लो डेटा किस तरह पारंपरिक जमानत और क्रेडिट इतिहास का पूरक बन रहा है।
इस विश्लेषण में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) की प्रबंध निदेशक एवं सीईओ प्रवीणा राय सहित भुगतान, एम्बेडेड फाइनेंस, डिजिटल सार्वजनिक प्रणालियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कई विशेषज्ञों के विचार शामिल किए गए हैं।
‘India’s Fintech Architects’ को भी मिली जगह: फिनटेक विशेषांक में ‘India’s Fintech Architects’ शीर्षक के तहत उन संगठनों और उद्योग नेताओं को भी स्थान दिया गया है, जिन्हें BW Businessworld Festival of Fintech 2026 में सम्मानित किया गया।
इन पुरस्कारों के माध्यम से लेंडिंग प्लेटफॉर्म, पेमेंट सॉल्यूशंस, वित्तीय समावेशन, ग्राहक अनुभव, फिनटेक उत्पाद, वेल्थटेक, इंश्योरटेक, फिनटेक में एआई के उपयोग, स्टार्टअप्स और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता दी गई। पुरस्कारों के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन नवाचार, कारोबारी प्रभाव, विस्तार क्षमता, ग्राहक मूल्य, सुशासन, तकनीकी उत्कृष्टता, बाजार में अलग पहचान और व्यापक वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान जैसे मानकों के आधार पर किया गया।
BW Businessworld की ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर नूर फातिमा वारसिया ने कहा कि टाटा समूह और फिनटेक, दोनों ही वर्तमान समय में महत्वपूर्ण संस्थागत बदलावों के दौर से गुजर रहे हैं। एक ओर टाटा समूह अपने अगले चरण के लिए स्वामित्व, उद्देश्य और पेशेवर प्रबंधन के संतुलन को परिभाषित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर फिनटेक क्षेत्र व्यवधान पैदा करने वाले उद्योग से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे और संस्थान निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। BW Businessworld का यह नवीनतम अंक डिजिटल और प्रिंट दोनों फॉर्मेट्स में उपलब्ध है।
अंतिम अंक में प्रकाशित संपादकीय ‘अलविदा नहीं, जुड़ाव की नई शुरुआत’ के जरिए अखबार ने पाठकों को भावुक संदेश देते हुए अपनी यात्रा के एक नए पड़ाव की घोषणा की।
by
Samachar4media Bureau
दिल्ली-एनसीआर की शामों को खबरों से जोड़ने वाला हिंदी का चर्चित शाम का अखबार ‘सांध्य टाइम्स’ अब प्रकाशित नहीं होगा। करीब 46 वर्षों तक पाठकों तक दिनभर की ताजा खबरें पहुंचाने वाले इस अखबार ने अपने अंतिम संस्करण के साथ प्रकाशन पर विराम लगा दिया। अंतिम अंक में प्रकाशित संपादकीय ‘अलविदा नहीं, जुड़ाव की नई शुरुआत’ के जरिए अखबार ने पाठकों को भावुक संदेश देते हुए अपनी यात्रा के एक नए पड़ाव की घोषणा की।
संपादकीय में कहा गया है कि पिछले 46 वर्षों से दिल्ली-एनसीआर की हर हलचल, विचार और जनसरोकार के मुद्दों पर अखबार ने अपने पाठकों के साथ एक मजबूत रिश्ता कायम किया। बदलते दौर और सूचना के नए माध्यमों के विस्तार के बीच पत्रकारिता की इस यात्रा को अब एक नए मोड़ पर ले जाने का फैसला किया गया है। हालांकि अखबार ने यह भी स्पष्ट किया कि जनसरोकार, निष्पक्षता और लोगों की आवाज बनने का उसका संकल्प आगे भी बना रहेगा।
करीब 46 वर्षों तक प्रकाशित रहा सांध्य टाइम्स राजधानी में हिंदी शाम के अखबार की एक मजबूत पहचान बनकर उभरा था। उस दौर में जब डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल न्यूज का चलन नहीं था, तब दफ्तरों से लौटते लोगों और बाजारों में मौजूद पाठकों के लिए दिनभर की ताजा खबरों का प्रमुख माध्यम सांध्य टाइम्स ही हुआ करता था। स्थानीय खबरों, नागरिक समस्याओं, अपराध, राजनीति और जनहित के मुद्दों पर इसकी विशेष पकड़ मानी जाती थी।
टाइम्स समूह के इस प्रकाशन ने दिल्ली-एनसीआर की स्थानीय पत्रकारिता को मजबूत पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लंबे समय तक राजधानी के पाठकों के बीच लोकप्रिय बना रहा।
अंतिम संस्करण के प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर भी पत्रकारों, पूर्व कर्मचारियों और पाठकों ने अपनी यादें साझा कीं। कई लोगों ने इसे हिंदी पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण अध्याय के अंत के रूप में देखा। अखबार के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी अंतिम संस्करण को लेकर पोस्ट साझा की गई, जिस पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
Hello Readers! Here is #FrontPage of today's Sandhya Times pic.twitter.com/ug7sqHAfXp
— सान्ध्य टाइम्स (@SandhyaTimes4u) August 31, 2026
अंतिम अंक में प्रकाशित संपादकीय 'अलविदा नहीं, जुड़ाव की नई शुरुआत' में सांध्य टाइम्स ने अपने पाठकों को यह संदेश दिया:
पिछले 46 वर्षों से दिल्ली-एनसीआर की हर धड़कन की खबरों, विचारों और आपसे जुड़े तमाम मुद्दों पर बेखौफ कलम से रोशनी करने वाला आपका अखबार 'सांध्य टाइम्स' अब अपनी इस यात्रा को विराम दे रहा है। चार दशकों से भी लंबे इस अटूट रिश्ते से आपने हमें जो प्यार, विश्वास और अपनापन दिया, उसके लिए हम आपके सदैव आभारी रहेंगे।
पिछले दिनों लगातार आठ सप्ताह तक चले एक जटिल संघर्ष के बावजूद हम डटे रहे। बदलते दौर और सूचना के नए माध्यमों के साथ हमने अपनी पत्रकारिता यात्रा को एक नए मोड़ देने का निर्णय लिया है।
'सांध्य टाइम्स' के पन्ने भले ही अब आपके हाथों में न हों, लेकिन जनसरोकार, निष्पक्षता और आपकी आवाज बनने का हमारा संकल्प कायम रहेगा।
हमारा और आपका यह सफर यहीं समाप्त नहीं होता। आप 'नवभारत टाइम्स' (NBT) के माध्यम से हमारे साथ लगातार जुड़े रहेंगे। आपकी समस्याएं, आपके मुद्दे और आपके शहर की हर खबर को पहले की तरह पूरी मजबूती और प्रामाणिकता के साथ नवभारत टाइम्स से उठाते रहेंगे।
46 वर्षों के इस शानदार सफर में हमारा साथी बनने के लिए आप सभी पाठकों का हृदय से धन्यवाद।
— संपादकीय टीम, सांध्य टाइम्स
English Headline जागरण प्रकाशन को हरियाणा के हिसार के एक्साइज व टैक्सेशन ऑफिसर की ओर से ₹21.73 लाख के कथित GST बकाये को लेकर कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) मिला है।
by
Vikas Saxena
जागरण प्रकाशन (Jagran Prakashan Limited) को हरियाणा के हिसार के एक्साइज व टैक्सेशन ऑफिसर की ओर से ₹21.73 लाख के कथित GST बकाये को लेकर कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) मिला है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह नोटिस 26 अगस्त 2026 को प्राप्त हुआ है।
यह नोटिस Central Goods and Services Tax Act, 2017 की धारा 74 के तहत जारी किया गया है। इसमें कंपनी से पूछा गया है कि कथित GST मांग के साथ धारा 50 के तहत ब्याज और धारा 74 के तहत जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए।
2020-21 की अवधि से जुड़ा है मामला
कंपनी के मुताबिक, यह मामला वित्त वर्ष 2020-21 की अवधि से संबंधित है। नोटिस में मुख्य तौर पर कंपनी की ओर से लिए गए Input Tax Credit (ITC) की पात्रता को लेकर टैक्स भुगतान या स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि, जागरण प्रकाशन ने कहा है कि कानूनी सलाह लेने के बाद उसका मानना है कि यह कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) टिकाऊ नहीं है और मामले में कंपनी का पक्ष मजबूत है।
तय समय में देगी जवाब
कंपनी ने बताया कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर इस नोटिस का उचित जवाब दाखिल करेगी। साथ ही, जरूरत पड़ने पर कंपनी इस मामले के खिलाफ दूसरे कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेगी।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर असर नहीं
जागरण प्रकाशन ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्थिति में इस नोटिस का कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार या अन्य गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी के अनुसार, कानूनी सलाह के आधार पर उसका मानना है कि नोटिस में उठाई गई मांग उचित नहीं है और उसके पास मामले में मजबूत आधार हैं। इसलिए फिलहाल इस नोटिस से किसी वित्तीय प्रभाव की आशंका नहीं है।
कंपनी ने यह जानकारी SEBI Listing Regulations के Regulation 30 के तहत शेयर बाजारों को दी है।
भारत में अगले तीन से चार महीनों में तीन नए फाइनेंशियल डेली लॉन्च होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस पब्लिकेशंस, कुमुदम और दिनमलर बिजनेस न्यूज सेगमेंट में उतरने की तैयारी में हैं।
by
Samachar4media Bureau
भारतीय मीडिया इंडस्ट्री में फाइनेंशियल न्यूज सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ने वाली है। अगले तीन से चार महीनों के दौरान तीन नए बिजनेस डेली लॉन्च होने की संभावना है। Express Publications (Madurai), Kumudam और Dinamalar अपने-अपने बिजनेस अखबार शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।
एक्सप्रेस पब्लिकेशंस (Express Publications), जो The New Indian Express का प्रकाशन करता है, अक्टूबर के अंत तक एक नया राष्ट्रीय बिजनेस अखबार लॉन्च करने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इसे राष्ट्रीय वित्तीय दैनिक के तौर पर पेश किया जाएगा। इसके लॉन्च के बाद देश में राष्ट्रीय स्तर के फाइनेंशियल डेली की संख्या छह हो जाएगी।
नए अखबार के संपादकीय नेतृत्व की जिम्मेदारी फिलहाल The New Indian Express के तमिलनाडु एडिटर रंजनाथन को दिए जाने की बात सामने आई है। वह कोच्चि से नए बिजनेस डेली के एडिटर के तौर पर काम संभाल सकते हैं।
वहीं, कुमुदम (Kumudam) सितंबर के मध्य तक चेन्नई से तमिल और अंग्रेजी भाषा में बिजनेस डेली शुरू करने की तैयारी कर रहा है। समूह की यह पहल दक्षिण भारत के बिजनेस न्यूज मार्केट में उसकी मौजूदगी को मजबूत कर सकती है।
इसके अलावा दिनमलर (Dinamalar) भी बिजनेस अखबारों के सेगमेंट में प्रवेश करने की योजना बना रहा है। समूह साल के अंत तक तमिल भाषा में अपना बिजनेस डेली लॉन्च कर सकता है।