जम्मू-कश्मीर में नियमों का पालन न करने पर कई अखबारों पर यूं गिरी गाज

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 34 अखबारों को अपनी सूची से बाहर कर दिया है।

Last Modified:
Monday, 18 January, 2021
kasmirnewspaper545

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 34 अखबारों को अपनी सूची से बाहर कर दिया है। वहीं सर्कुलेशन व प्रकाशन संबंधी अन्य दिशानिर्देशों का पालन न करने के चलते 13 अन्य अखबारों का विज्ञापन रोक दिया है। इसके अलावा, ‘कथित साहित्यिक चोरी’ और ‘दोषपूर्ण सामग्री’ के प्रकाशन की वजह से 17 अन्य समाचार प्रकाशनों को नोटिस जारी किए गए हैं।

न्यूज पोर्टल ‘दिप्रिंट’ की एक खबर के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों ने बताया कि केंद्रशासित प्रदेश के दर्जनों समाचारपत्रों के कामकाज का पता लगाने और जांच करने के लिए चार महीने चली लंबी कवायद के बाद 7 दिसंबर को यह फैसला लिया गया था। प्रदेश प्रशासन ने कहा कि उन्हें इन संगठनों के खिलाफ कथित रूप से कदाचार और विज्ञापन नीति का उल्लंघन किए जाने की शिकायतें मीडिया बिरादरी के भीतर से ही मिल रही थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, यहां 17 अखबार प्रकाशनों को जारी नोटिस में समाचार संगठनों से जून 2020 में जारी नई मीडिया नीति के मानकों का पालन करने को कहा गया है, जिसके तहत सरकार ‘फेक न्यूज, साहित्यिक चोरी और अनैतिक और राष्ट्रविरोधी सामग्री’ के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और मीडिया के अन्य स्वरूपों की सामग्री की जांच करती है।

‘दिप्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उसके पास आधिकारिक दस्तावेज मौजूद हैं, जो दिखाते हैं कि समिति ने इस बात को ध्यान में रखा कि कुछ अखबार मार्च 2020 से कोविड-19 महामारी के कारण अपने मुद्दों को नियमित रूप से प्रकाशित नहीं कर पाए हैं।

एक सरकारी अधिकारी ने ‘दिप्रिंट’ को बताया कि इसके बावजूद भी कई समाचार प्रकाशन कदाचार में लिप्त रहे हैं और अपनी प्रसार संख्या के बारे में गलत जानकारी देते रहे हैं। न्यूज पब्लिकेशन के खिलाफ कार्रवाई सरकार की तरफ से गठित समिति की तरफ से की गई व्यापक जांच और चार महीने लंबी कवायद के बाद की गई है।’

अधिकारी ने कहा, ‘2017-18 से ये पब्लिकेशन विज्ञापन नीति का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन कर रहे हैं और इन्होंने अपने प्रसार, स्वामित्व और प्रकाशन की गुणवत्ता से संबंधित मामलों में अधिकारियों को धोखा देने की कोशिश की है।’

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन पब्लिकेशन पर कार्रवाई की गई है उनमें राइजिंग कश्मीर, गैलेक्सी न्यूज़, कश्मीर इमेजेज और अपना जम्मू शामिल हैं। यह फैसला 15 मई 2020 को गठित सरकार की इम्पैनलमेंट कमेटी ने लिया, जिसमें वित्त विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

वहीं, जम्मू संभाग में मान्यता प्राप्त की सूची से बाहर होने वाले अखबारों में हिल पीपुल, नावीद, दैनिक कश्मीर टाइम्स, स्वर्ण स्मारिका, नई रोशनी, हाइट ऑफ लाइफ, जमीर-ए-खल्क, गैलेक्सी न्यूज़, अपना जम्मू, द अर्थ न्यूज और लोक शक्ति जैसे थोड़े-बहुत नामी अखबार शामिल हैं।

प्रसार संबंधी आंकड़ों में हेराफेरी के कारण विगरस न्यूज, स्टेट मॉनीटर और ट्रेड एंड जॉब आदि को सरकार ने सूची से बाहर किया है। कश्मीर में वादी गुलपीश, सदाकत-ए-रहबर, हक नवाज और सद-रंग सेहर सहित आठ समाचार पत्रों के प्रेस पर रोक लगाई गई है।

वहीं, सूची से बाहर किए गए जाने-माने पब्लिकेशन में कश्मीर इमेजेज का जम्मू संस्करण भी शामिल है, जिसने जनवरी 2018 के बाद से एक भी संस्करण प्रकाशित नहीं किया है। इसी तरह दिसंबर 2019 से अखबार की प्रतियां संयुक्त निदेशक के कार्यालय न भेजने के कारण राइजिंग कश्मीर के जम्मू संस्करण के लिए विज्ञापन बंद कर दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक अधिकारी ने ‘दिप्रिंट’ को बताया कि सरकार ने यह कार्रवाई अखबारों के आकार या नाम के आधार पर नहीं बल्कि कथित कदाचार के कारण की है।

एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि प्रसार पर गलत आंकड़े देना, वास्तविक स्वामित्व के बारे में जानकारी छिपाना और छपी सामग्री, कागज की गुणवत्ता (रंगीन अखबारों को अधिक सरकारी धन मिलता है), इंटरनेट या अन्य समाचार पत्रों से प्रकाशन सामग्री की चोरी जैसे कुछ ऐसे कथित उल्लंघन थे जो जांच के दौरान सामने आए।

जांच से जुड़े रहे एक अन्य सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘अखबारों की प्रसार संख्या की जांच के लिए हमारी टीमों ने कई जगहों जैसे अखबार के स्टैंड और वेंडर्स की दुकानों पर छापे मारे और हमने पाया कि कुछ समाचार पत्र केवल सरकारी रिकॉर्ड में ही मौजूद थे। कुछ ऐसे अखबार भी पाए गए जिनकी केवल एक प्रति छापकर सूचना विभाग को भेजी गई थी।’

रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में 164 प्रतिष्ठित प्रकाशन सूचीबद्ध हैं, जिनमें अखबार, मैगजीन, साप्ताहिक और पाक्षिक पत्र-पत्रिकाएं शामिल हैं। इनमें 41 अंग्रेजी दैनिक, 59 उर्दू दैनिक और 56 अंग्रेजी और उर्दू सप्ताहिक हैं।

जम्मू में 84 अंग्रेजी दैनिक, 31 उर्दू और 24 हिंदी दैनिक, 14 बहुभाषी (हिंदी/डोगरी) सप्ताहिक, 37 उर्दू सप्ताहिक और 30 अंग्रेजी सप्ताहिक सहित 248 प्रकाशन सूचीबद्ध हैं।

अब तक, जम्मू में 24 न्यूज पब्लिकेशन को सूची से बाहर किया गया है, 17 को नई मीडिया नीति 2020 अपनाने के लिए नोटिस भेजा गया है और पांच का विज्ञापन निलंबित किया गया है। वहीं, कश्मीर में 10 अखबारों को सूची से बाहर किया गया है और आठ अन्य के विज्ञापन निलंबित कर दिए गए हैं।

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आरोपों में घिरे अपने इस रिपोर्टर को दैनिक भास्कर ने दिखाया बाहर का रास्ता

तमाम आरोपों में घिरे ‘दैनिक भास्कर’ चंडीगढ़ के सिटी चीफ संजीव महाजन को प्रबंधन ने बर्खास्त कर दिया है। प्रबंधन ने संजीव महाजन की बर्खास्तगी की खबर अपने अखबार में भी पब्लिश की है।

Last Modified:
Saturday, 06 March, 2021
Dainik Bhaskar

तमाम आरोपों में घिरे ‘दैनिक भास्कर’ चंडीगढ़ के सिटी चीफ संजीव महाजन को प्रबंधन ने बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही प्रबंधन ने संजीव महाजन की बर्खास्तगी की खबर अखबार में भी पब्लिश की है। इस खबर में बताया गया है कि संजीव महाजन, दैनिक भास्कर में रिपोर्टर था, इसके इस कृत्य को देखते हुए संस्थान ने उसे तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। अब वह दैनिक भास्कर का एंप्लॉयी नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घर में घुसकर किडनैप करने, फर्जी व्यक्ति दिखाकर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने के आरोप में पुलिस की एसआईटी टीम ने संजीव महाजन को चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित घर से पिछले दिनों गिरफ्तार किया था।

इस मामले में पुलिस ने संजीव के अलावा एक अन्य आरोपित मनीष गुप्ता को भी गिरफ्तार किया है। मामले के अन्य आरोपितों की तलाश में पुलिस तमाम स्थानों पर छापेमारी कर रही है। इसके साथ ही संजीव महाजन के खिलाफ भी विभिन्न एंगल्स से जांच की जा रही है।

संजीव महाजन की बर्खास्तगी के संबंध में दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर की कॉपी आप यहां देख सकते हैं।

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इन गंभीर आरोपों में घिरे नेशनल बुक ट्रस्ट के संपादक, FIR दर्ज

नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया (National Book Trust of India) के मलयालम विभाग के संपादक रुबिन डीक्रूज के खिलाफ यौन उत्पीड़न का एक मामला दर्ज किया गया है।

Last Modified:
Saturday, 06 March, 2021
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नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया (National Book Trust of India) के मलयालम विभाग के संपादक रुबिन डीक्रूज के खिलाफ यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) का एक मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि दिल्ली में काम कर रही एक मलयाली महिला ने रुबिन डी. क्रूज के खिलाफ यह मामला वसंत कुंज (उत्तर) पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया था।

महिला ने इस कथित तकलीफदेह शारीरिक हमले के बारे में एक फेसबुक (Facebook) पोस्ट भी डाला, जिससे उसे गुजरना पड़ा। महिला ने दावा किया है कि यह घटना 2 अक्टूबर, 2020 को हुई थी। उसने लिखा, ‘मैं हाल में कुछ परेशानियों से गुजर रही हूं । पिछले 25 वर्षो में लोगों में जो आत्मविश्वास और विश्वास पैदा हुआ है, उसे मैंने अपनी जड़ों से तोड़ा है। मैंने कुछ खास लोगों के असली चेहरे देखे, जो फेसबुक का उपयोग करते हैं।’

शिकायतकर्ता महिला का परिचय डी. क्रूज से कॉमन फ्रेंड के द्वारा हुआ था जब वह दिल्ली में एक किराए का घर ढूढ़ रहीं थीं। उनकी हर तरह से मदद करने का आश्वासन देकर डी. क्रूज ने उस महिला को कथित तौर पर अपने घर बुलाया और उस पर यौन हमला करके इस अवसर का फायदा उठाया।

वे लिखती हैं, 'मुझे वाम-प्रगतिशील नकाबपोश का असली चेहरा देखना था जो मानवाधिकारों और समानता के बारे में फेसबुक क्रांति ला रहे हैं। प्रगतिशील, जिन्होंने सार्वजनिक मित्रों और फेसबुक के माध्यम से हुई जान पहचान के नाम पर मुझे भोजन के लिए घर आमंत्रित किया था और एक छोटी मित्रतापूर्ण बातचीत के बाद अपना असली रंग दिखा दिया। अगले कुछ दिनों ने मुझे सिखाया कि शारीरिक रूप से यौन हमला झेलने के बाद सबसे ज्यादा मजबूत लोग भी मानसिक रूप से टूट जाते हैं।'

मैं बहुत थोड़े दोस्तों के लिए ईमानदारी से अपना आभार प्रकट करती हूं, जो अच्छे और बुरे दोनों समय में मेरे साथ खड़े रहे, मेरा परिवार (मेरी 72 साल की मां सहित) जिसने साहस और लोगों के साथ आगे बढ़ने के लिए कहा, जिसमें मेरी काउंसलिंग टीम भी शामिल है। मुझे एक बात सही लगी, उनके जैसे किसी को छोड़ना-मुक्त करना मेरे साथी मनुष्यों के साथ भी अन्याय था।' यह इस तकलीफदेह घटना पर लिखी उनकी लम्बी फेसबुक पोस्ट का एक अंश है।

डी.क्रूज सोशल मीडिया पर अपने प्रगतिशील विचारों के लिए भी जाने जाते हैं। यौन उत्पीड़न की शिकायत दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज स्टेशन में 21 फरवरी, 2020 को की गयी थी। इस मामले ने अपनी तरफ लोगों का ध्यान तब खींचा जब पीड़ित लड़की ने इस बारे में फेसबुक पोस्ट लिखकर लोगों को बताया।

इस मामले में दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के डीसीपी, इंजीत प्रताप सिंह का कहना है कि रुबिन डी. क्रूज के खिलाफ धारा 354 (महिला के साथ मारपीट या आपराधिक बल लगाने का इरादा) के तहत फरवरी में वसंत कुंज उत्तर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि आरोपी और पीड़ित दोनों, जो विवाहित हैं, एक-दूसरे को जानते हैं। महिला का बयान दर्ज कर लिया गया है और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


 

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118 करोड़ रुपए के शेयर वापस खरीदेगा जागरण प्रकाशन

प्रिंट मीडिया कंपनी ‘जागरण प्रकाशन’ ने मंगलवार को कहा कि उसके निदेशक मंडल ने निवेशकों से 118 करोड़ रुपए के शेयर वापस खरीदने को मंजूरी दी है।

Last Modified:
Friday, 05 March, 2021
Jagran

प्रमुख हिन्दी समाचार पत्र ‘दैनिक जागरण’ का प्रकाशन करने वाली प्रिंट मीडिया कंपनी ‘जागरण प्रकाशन’ ने मंगलवार को कहा कि उसके निदेशक मंडल ने निवेशकों से 118 करोड़ रुपए के शेयर वापस खरीदने को मंजूरी दी है।

शेयर बाजार को भेजी गई नियामकीय सूचना में उसने कहा है, ‘कंपनी के निदेशक मंडल ने... कंपनी के पूर्ण चुकता दो रुपए के अंकित मूल्य वाले कुल 118 करोड़ रुपए तक के इक्विटी शेयरों को वापस खरीदने को मंजूरी दी है। यह खरीद कंपनी के शेयरधारकों, उनके लाभार्थी स्वामियों से 60 रुपए प्रति शेयर तक के दाम पर नकद भुगतान के साथ होगी। शेयरों की यह खरीद कंपनी के प्रवर्तकों, प्रवर्तक समूह के सदस्यों और नियंत्रण वाले व्यक्तियों को छोड़कर अन्य शेयरधारकों से की जाएगी। शेयर खरीद की प्रक्रिया खुले बाजार से स्टॉक एक्सचेंज प्रणाली के जरिए होगी।’

कंपनी के मुताबिक, खुले बाजार से होने वाली इस खरीद में 1,96,66,666 शेयरों की खरीद होने का अनुमान है जो कि कंपनी के चुकता शेयरों का 6.99 प्रतिशत होगा। जागरण प्रकाशन ने कहा है कि इस खरीद प्रक्रिया के बारे में समयसीमा और अन्य सांविधिक ब्यौरा आने वाले समय में जारी किया जाएगा।  

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पीटर मुखर्जी ने यूं खोला टीवी इंडस्ट्री में अपने अनुभवों का 'पिटारा'

स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी ने पिछले दिनों अपना संस्मरण 'Starstruck: Confessions of a TV Executive' जारी किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 25 February, 2021
Last Modified:
Thursday, 25 February, 2021
Peter Mukerjea

शीना बोरा मर्डर केस में चार साल की सजा काट चुके मीडिया टाइकून पीटर मुखर्जी ने टेलिविजन इंडस्ट्री में अपने दिनों को याद करते हुए एक संस्मरण जारी किया है। ‘Starstruck: Confessions of a TV Executive’ नाम से जारी इस संस्मरण में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) के पूर्व सीईओ मुखर्जी ने इंडस्ट्री में अपने अनुभवों और तमाम उथल-पुथल के बारे में बताया है। हालांकि, इस किताब से ऐसे लोगों को कुछ निराशा हो सकती है, जो उम्मीद कर रहे थे कि मुखर्जी अपनी सौतेली बेटी शीना बोरा हत्याकांड में जेल में बिताए गए समय के बारे में जानकारी शेयर करेंगे। इसके बजाय मुखर्जी ने इस संस्मरण में इंडस्ट्री में अपनी तीन दशक लंबी यात्रा का जिक्र किया है, जिसने तमाम उतार-चढ़ाव देखे हैं। मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक द्वारा अधिग्रहीत किए जाने के एक दिन बाद मुखर्जी ने स्टार इंडिया जॉइन किया था।

अपने संस्मरण में मुखर्जी लिखते हैं कि 90 के दशक की शुरुआत में अमेरिकी शो ‘बेवॉच’ (Baywatch) जैसे शोज का बोलबाला था। लेकिन यह सोच भारत में काम नहीं कर रही थी। उस समय मर्डोक ने मुखर्जी को एक छोटे टीवी चैनल को दुनिया के बड़े चैनल के रूप में विकसित करने का काफी मुश्किल काम सौंपा। मुखर्जी के इस संस्मरण के अनुसार, वास्तविकता में न तो मर्डोक और न ही स्टार के संस्थापक रिचर्ड ली ने भारत से बहुत उम्मीद की थी, क्योंकि उनकी नजर में यह उनके व्यापार मॉडल के लिए उपयुक्त बाजार नहीं था।

अपनी किस किताब में स्टार इंडिया से जुड़ी आकांक्षाओं और इसे ऊंचाई तक ले जाने के दौरान अपने संघर्षों का जिक्र किया है। मुखर्जी के अनुसार, ’मैं चाहता था कि स्टार टीवी को मीडिया इंडस्ट्री में पसंदीदा नियोक्ता के रूप में देखा जाए, खासकर भारत में।’ कर्मचारियों की नजर में स्टार की प्रतिष्ठा मुखर्जी के लिए महत्वपूर्ण थी। उनका मानना था कि कर्मचारियों का सम्मान देश में एक शानदार ब्रैंड के रूप में स्टार इंडिया के निर्माण के दीर्घकालिक कार्य में मदद करेगा।

अपनी किताब में मुखर्जी लिखते हैं कि प्रतिष्ठित शो कौन बनेगा करोड़पति को शुरू में एक लाख के पुरस्कार के साथ कौन बनेगा लखपति का नाम दिया गया था, लेकिन दर्शकों की रुचि बढ़ाने के लिए मर्डोक ने खुद इस राशि को एक करोड़ बढ़ा दिया था। मुखर्जी ने स्टार के साथ एकता कपूर के दिनों को भी याद किया जिन्होंने अपने धारावाहिकों के द्वारा भारतीय टेलिविजन इंडस्ट्री में क्रांति ला दी थी। अपने इस संस्मरण में मुखर्जी ने अपने कुछ पूर्व साथियों का भी जिक्र किया है, जो आज इंडस्ट्री में काफी ऊंचाइयों पर हैं। इनमें राज नायक, मोनिका टाटा, अजय विद्यासागर, सिद्धार्थ रॉय कपूर, विकास खनचंदानी जैसे नाम शामिल हैं।  

एक मीडिया टाइकून के रूप में मुखर्जी के बीते दिनों पर इस किताब को वेस्टलैंड ने पब्लिश किया है। 296 पेज के इस संस्मरण को पिछले दिनों जारी किया गया है।

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इस वजह से विरोध में उतरे पत्रकार, राज्य में नहीं छपा अखबार

पत्रकारों ने इस घटना का विरोध किया और कार्य बहिष्कार कर दिया, जिसके चलते मणिपुर में रविवार को कोई अखबार प्रकाशित नहीं हुआ

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 15 February, 2021
Last Modified:
Monday, 15 February, 2021
Newspaper4545

मणिपुर में शनिवार 13 फरवरी की शाम दैनिक ‘पोकनाफाम’ के स्थानीय कार्यायल पर एक हथगोला फेंका गया, लेकिन कोई विस्फोट नहीं हुआ और उसे सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इस बीच कार्यालय में एक अज्ञात बदमाश ने लूटपाट भी की। इस घटना के संबंध में फिलहाल अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

वहीं, दूसरी तरफ मणिपुर के पत्रकारों ने इस घटना का विरोध किया और कार्य बहिष्कार कर दिया, जिसके चलते मणिपुर में रविवार को कोई अखबार प्रकाशित नहीं हुआ और न ही टीवी पर खबरें प्रसारित हुईं।

ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन (AMWJU) और एडिटर्स गिल्ड मणिपुर (EGM) ने हमले की निंदा की, जिसके बाद दोनों ही संगठनों ने कार्य बहिष्कार का फैसला किया था।

उधर, पुलिस ने बताया कि यह घटना शाम 6.30 बजे  इम्फाल पश्चिम जिले के केशिमपत थियाम लेइकाई स्थित समाचार पत्र ‘पोकनाफाम’ के कार्यालय में हुई। पुलिस ने कहा कि ग्रेनेड का सेफ्टी पिन बरकरार पाया गया। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि ग्रेनेड एक महिला द्वारा फेंका गया था, जो मोपेड पर आई थी। राज्य पुलिस के बम विशेषज्ञों ने विस्फोटक हथियार को मौके से हटा दिया।

घटना के पीछे अपराधियों को पकड़ने के लिए मणिपुर पुलिस द्वारा तलाशी अभियान चलाया गया है। क्षेत्र के सभी मीडिया हाउसों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

पोकनाफम के संपादक अरीबम रोबिन्द्रो शर्मा ने कहा कि उन्हें किसी से भी तरह की धमकी या कुछ ऐसा नहीं मिला है, जो संदिग्ध हो।

इस हमले के विरोध में कीशामपाट थियाम लीकाई में पत्रकारों ने धरना दिया। बाद में मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह को एक ज्ञापन सौंपा गया और उनसे यह सुनिश्चित करने की अपील की गई कि राज्य में प्रेस स्वतंत्र रूप से काम कर पाए।

पुलिस के अनुसार हमले की वजह पता नहीं चल पाई है। किसी संगठन ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

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एक साथ आगे आए सात प्रमुख अखबार, स्टेकहोल्डर्स के लिए लिखा ये लेटर

इस लेटर पर ‘अमर उजाला’, ‘ईनाडु’, ‘हिन्दुस्तान’, ‘साक्षी’, ‘दैनिक जागरण’ ‘दैनिक भास्कर’ और ‘मलयाला मनोरमा’ के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 05 February, 2021
Last Modified:
Friday, 05 February, 2021
Newspaper

पिछले काफी समय से रुकी हुई भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे गति पकड़ रही है। तमाम अन्य बिजनेस के साथ भारतीय भाषाई अखबारों की ग्रोथ भी बढ़ रही है। ऐसे में अब सात प्रमुख भाषाई अखबार अपने स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) के लिए एक कॉमन लेटर के जरिये एक साथ आगे आए हैं। इस लेटर में कहा गया है कि कोविड-19 से पहले की तुलना में सर्कुलेशन 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है और 80 प्रतिशत से ज्यादा एडवर्टाइजिंग रिकवरी हो चुकी है।

लेटर में कहा गया है, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी रिकवरी कर रही है। वैक्सीन अभियान गति पकड़ रहा है और जीएसटी कलेक्शन भी अच्छी ग्रोथ दिखा रहा है। देश के टियर-दो और टियर-तीन मार्केट इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अखबारों का सर्कुलेशन भी बढ़ रहा है और यह जितना कोविड-19 से पहले था, उसके 80-90 प्रतिशत लेवल तक पहुंच गया है, इसके साथ ही एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू भी कोविड-19 से पहले की तुलना में 80 प्रतिशत ग्रोथ प्राप्त कर चुका है।’

इस लेटर पर हस्ताक्षर करने वालों में ‘अमर उजाला’ के राजुल माहेश्वरी, ‘ईनाडु’ के आई वेंकट, ‘हिन्दुस्तान’ के राजीव बेओत्रा, ‘साक्षी’ के विनय माहेश्वरी, ‘दैनिक जागरण’ के शैलेष गुप्ता, ‘दैनिक भास्कर’ के गिरीश अग्रवाल और ‘मलयाला मनोरमा’ के जयंत मैमन मैथ्यू शामिल हैं।

इस रिकवरी के बारे में ‘दैनिक भास्कर ग्रुप’ के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘टियर दो और टियर तीन शहरों की ग्रोथ की वजह से भारतीय भाषाई अखबार पूरे मार्केट की ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अब जब मार्केट्स सामान्य स्थिति में पहुंचे हैं और तेजी से खुल रहे हैं, अखबारों का सर्कुलेशन स्तर भी कोविड-19 से पहले की तुलना में लगभग 85-87 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके अलावा समाचार पत्रों की विश्वसनीयता और भरोसा एक प्रमुख प्लस पॉइंट के रूप में उभरा है। खासकर फेक न्यूज के माहौल के बीच जिस तरह अखबारों ने अपनी विश्वसनीयत बनाए रखी है, ऐसे में अखबारों की संपादकीय शक्ति को मार्केट्स और पाठकों द्वारा सराहा जा रहा है।’

इस लेटर में अखबारों की ग्रोथ के साथ ही उसके कारणों पर भी बात की गई है। इस लेटर को आप यहां पढ़ सकते हैं।

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आम बजट से न्यूजपेपर इंडस्ट्री की टूटी उम्मीदें

प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री इस बजट में न्यूजप्रिंट पर कस्टम ड्यूटी में पांच प्रतिशत छूट मिलने का इंतजार कर रही थी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 01 February, 2021
Last Modified:
Monday, 01 February, 2021
Budget 2021

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सोमवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2021 के दौरान न्यूजपेपर पब्लिशर्स को कुछ राहत नहीं मिली है। कोरोनावायरस (कोविड-19) के मद्देनजर इस साल प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री का सर्कुलेशन काफी प्रभावित हुआ है और इससे मुनाफे में कमी आई है। ऐसे में प्रिंट इंडस्ट्री इस बजट में अखबारों और मैगजींस में इस्तेमाल होने वाले कागज यानी न्यूजप्रिंट पर कस्टम ड्यूटी में पांच प्रतिशत छूट मिलने का इंतजार कर रही थी। हालांकि, बजट में इस तरह की कोई घोषणा नहीं की गई है।

बता दें कि पिछली साल प्रिंट मीडिया प्लेयर्सन ने उस समय राहत की सांस ली थी, जब न्यूजप्रिंट पर कस्टम ड्यूटी दस प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गई थी। कस्टम ड्यूटी में कटौती से पब्लिशर्स के लिए लागत में भारी कमी आई थी।

हालांकि, जुलाई 2019 से पहले न्यूजपेपर बिजनेस में इस कैटेगरी के लिए किसी तरह की कस्टम ड्यूटी नहीं थी। ऐसे में पिछले साल कस्टम ड्यूटी में की गई कटौती की घोषणा का स्वागत किया गया था, क्योंकि इससे न्यूजप्रिंट में प्रति टन 1500 से 1700 रुपये की बचत हुई थी। देश में वर्तमान में सालाना रूप से 2.5 मिलियन टन न्यूजप्रिंट की मांग है।

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बिजनेस स्टैंडर्ड में अब नई भूमिका में नजर आएंगे एके भट्टाचार्य

इससे पहले वह एडिटोरियल डायरेक्टर और उससे पहले अखबार के एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 01 February, 2021
Last Modified:
Monday, 01 February, 2021
AK Bhattacharya

एके भट्टाचार्य को ‘बिजेनस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड’ (Business Standard Private Limited) में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और एडिटोरियल डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह एडिटोरियल डायरेक्टर और उससे पहले अखबार के एडिटर थे।

इसके साथ ही कंपनी ने अपने बोर्ड में कुछ नए बदलाव भी किए हैं। इसके तहत ‘स्टार इंडिया’ (Star India) के पूर्व चेयरमैन और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर व ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ के पूर्व प्रेजिडेंट उदय शंकर को बतौर नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर कंपनी बोर्ड में शामिल किया गया है।

वहीं, शिवेंद्र गुप्ता को कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह कंपनी के सीईओ थे।

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बिजनेस स्टैंडर्ड में शिवेंद्र गुप्ता को मिली अब नई जिम्मेदारी

नई जिम्मेदारी मिलने से पहले वह कंपनी में चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर के पद पर काम कर रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 01 February, 2021
Last Modified:
Monday, 01 February, 2021
Shivendra Gupta

‘बिजनेस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड’ (Business Standard Private Limited) ने शिवेंद्र गुप्ता को मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया है। नई जिम्मेदारी मिलने से पहले वह कंपनी में सीईओ के पद पर काम कर रहे थे।

इसके साथ ही कंपनी ने अपने बोर्ड में कुछ नए बदलाव भी किए हैं। इसके तहत ‘स्टार इंडिया’ (Star India) के पूर्व चेयरमैन और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर व ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ के पूर्व प्रेजिडेंट उदय शंकर को बतौर नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर कंपनी बोर्ड में शामिल किया गया है।

वहीं, एके भट्टाचार्य को कंपनी का एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और एडिटोरियल डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह एडिटोरियल डायरेक्टर और उससे पहले अखबार के एडिटर थे।

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‘दैनिक भास्कर’ का अनूठा प्रयास, अपने इस अंक को बनाया खास

हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ पाठकों के लिए कुछ न कुछ नया और अलग करने का प्रयास करता रहता है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 28 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 28 January, 2021
dainikbhaskar54542

हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ पाठकों के लिए कुछ न कुछ नया और अलग करने का प्रयास करता रहता है। इसी कवायद के तहत उसने 25 जनवरी को भीलवाड़ा में एक कीर्तिमान रचा है। बताया जा रहा है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी अखबार का फ्रंट पेज बाकायदा कपड़े से ही तैयार किया गया है। कपड़े पर ही खबरों का प्रकाशन हुआ है। यह अंक 204 पेजों का प्रकाशित किया गया है।

ऐसा इसलिए, क्योंकि राजस्थान का भीलवाड़ा शहर ‘टेक्सटाइल सिटी’ के नाम से पूरे विश्व में मशहूर है। दरअसल ‘दैनिक भास्कर’ ने अपने भीलवाड़ा संस्करण के 15वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में पाठकों के लिए यह गौरवशाली अंक तैयार किया है। वस्त्रनगरी के रूप में ख्यात भीलवाड़ा के पाठकों को यह सौगात सोमवार के अंक में मिली। दैनिक भास्कर के मुताबिक, इस अंक की थीम गौरवशाली इसलिए रखी गई, क्योंकि ये भीलवाड़ा के संपूर्ण गौरव को बताने का प्रयास किया गया है।

बता दें कि इस विशेष अंक में ग्राउंड रिपोर्ट के अलावा ऐसी कहानियों का समावेश किया गया है, जिसने यह महसूस कराया कि भीलवाड़ा कितना गौरवशाली और वैभवशाली है। साथ ही ऐसी खबरें प्रकाशित की गई, जिससे पाठकों को यह पता चला कि भीलवाड़ा की पहुंच दुनिया में कहां-कहां तक है।  

 

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