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आज इन खबरों से ‘सजाया’ अखबारों ने अपना फ्रंट पेज
विज्ञापनों की अधिकता के कारण हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स और नवोदय टाइम्स में दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं
नीरज नैयर 6 years ago
धनतेरस पर दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में विज्ञापनों की ‘वर्षा’ हुई है और इस ‘वर्षा’ के बीच दो राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों को सभी ने खूबसूरती से पाठकों के समक्ष पेश किया है। सबसे पहले हिन्दुस्तान की बात करें तो अखबार में तीसरा और पांचवां पेज फ्रंट पेज है। पहले फ्रंट पेज पर पूरे आठ कॉलम चुनाव परिणामों के नाम समर्पित हैं। ‘हरियाणा में भाजपा को झटका’ शीर्षक के साथ लीड को आंकड़ों के साथ पेश किया गया है। इसके अलावा, पेज पर कश्मीर से जुड़ा समाचार है। अदालत का कहना है कि घाटी में पाबंदियों की समीक्षा की जानी चाहिए। दूसरे फ्रंट पेज पर लीड सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। शीर्ष कोर्ट ने संचार कंपनियों से कहा है कि सरकार को 92 हजार करोड़ रुपए का भुगतान करें। साथ ही पेज पर धनतेरस सहित चार अन्य समाचारों को छोटा-छोटा करके लगाया गया है।
आज नवोदय टाइम्स में भी विज्ञापनों की अधिकता के कारण दो फ्रंट पेज बने हैं। पहले फ्रंट पेज की लीड चुनाव परिणाम हैं। चुनाव परिणामों को ‘बॉर्डर पर बीजेपी’ शीर्षक के साथ लगाया गया है। दूसरे फ्रंट पेज पर करतारपुर पर भारत-पाक समझौते को लीड का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा,अयोध्या विवाद,संचार कंपनियों को झटका, सीमा पर गोलीबारी सहित एक सिंगल समाचार भी पेज पर है। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदूवादियों को अपना लिखित नोट दाखिल करने की अनुमति दे दी है।
वहीं, देशबंधु के फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है। लीड ‘बच गई भाजपा की सरकार’ शीर्षक के साथ चुनाव परिणामों को लगाया गया है। करतारपुर पर भारत-पाक समझौता और संचार कंपनियों को झटका भी पेज पर है। एंकर में कुमार पंकज का चुनावी परिणामों पर विश्लेषण है। इसके अलावा, एक अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट को भी प्रमुखता से लगाया गया है। इसके मुताबिक भारत में व्यापार करना अब आसान हो गया है। संक्षिप्त में भी पांच समाचारों को जगह मिली है।
दैनिक जागरण को भी विज्ञापनों के चलते दो फ्रंट पेज बनाने पड़े हैं। पहला फ्रंट पेज चुनाव परिणामों को समर्पित है। दैनिक जागरण ने भाजपा की कम होती सीटों पर ध्यान न देते हुए जीत पर फोकस किया है। ‘हरियाणा और महाराष्ट्र में फिर भाजपा सरकार’ शीर्षक के साथ लीड को आधा पेज जगह मिली है। दूसरे फ्रंट पेज की लीड संचार कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से मिला झटका है। अब उन्हें सरकार को 92 हजार करोड़ रुपए चुकाने होंगे। इसके अलावा, चुनाव परिणामों पर प्रशांत मिश्र की त्वरित टिप्पणी के साथ ही जहरीली होती हवा को भी फ्रंट पेज पर जगह मिली है। गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है।
अब अमर उजाला का रुख करें तो अखबार के फ्रंट पेज पर केवल एक विज्ञापन है। पूरा पेज चुनाव परिणामों के नाम समर्पित किया गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि बाकी प्रमुख खबरों के लिए अखबार ने दूसरा फ्रंट पेज नहीं बनाया है। यानी पाठकों को बाकी के समाचारों के लिए अंदर के पन्नों का रुख करना होगा। ‘महाराष्ट्र में फडनवीस, हरियाणा में बहुमत नहीं...भाजपा बनाएगी जुगाड़ की सरकार’ शीर्षक के साथ लीड को रखा गया है।
आखिर में आज नवभारत टाइम्स को देखें तो अखबार में पांचवें और सातवें पेज को फ्रंट बनाया गया है। पहले फ्रंट पेज की बात करें तो लीड करतारपुर पर भारत-पाक समझौता है। हालांकि, पाकिस्तान ने 20 डॉलर की परमिट फीस माफ नहीं की है। इसके अलावा, कश्मीर पर पाबंदियों की समीक्षा, घाटी में ट्रक ड्राइवरों की हत्या, संचार कंपनियों को देने होंगे 92 हजार करोड़ सहित अन्य समाचारों को सिंगल या संक्षिप्त में जगह मिली है। दूसरा फ्रंट पेज चुनाव परिणामों के नाम है। अखबार ने दिवाली की थीम पर इस खबर को डिजाइन किया है, जो वाकई तारीफ के काबिल है। नवभारत टाइम्स के पहले फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन होने के कारण खबरों वाला भाग ही शो हो रहा है, इसलिए यहां पर खबरों वाले भाग को ही लगाया गया है जबकि दूसरा फ्रंट पेज पूरा शो हो रहा है।
आज का ‘किंग’ कौन?
1: सबसे पहले बात लेआउट की, अधिकांश अखबारों में विज्ञापनों की भरमार है इसलिए ले-आउट के नजरिये से किसी को आंका जाना सही नहीं होगा।
2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो मुख्य फोकस चुनावी परिणामों पर ही किया जा सकता है और इस मामले में आज नवभारत टाइम्स के साथ ही दैनिक जागरण ने बाजी मार ली है।
3: कलात्मक शीर्षक के मामले में नवभारत टाइम्स अपना दबदबा आज भी बनाये हुए है। लीड की हेडलाइन ‘वोटर ने सबको कहा, हैपी दिवाली’ अपने आप में काफी कुछ बयां कर जाता है। इसके अलावा, नवोदय टाइम्स ने भी अच्छा प्रयोग किया है। शीर्षक ‘बॉर्डर पर बीजेपी’ आकर्षक तो है ही, भाजपा की स्थिति को भी दर्शा रहा है।
4: खबरों की बात करें तो अमर उजाला ने निराश किया है। फ्रंट पेज पर केवल चुनाव परिणाम हैं और बाकी खबरों के लिए कोई दूसरा फ्रंट पेज भी नहीं बनाया गया है।
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