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न्यूजपेपर इंडस्ट्री के फ्यूचर को लेकर क्या है दिग्गजों का आकलन, पढ़ें यहां
कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से देश में पिछले दिनों किए गए लॉकडाउन के कारण प्रिंट मीडिया भी प्रभावित हुआ है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से देश में किए गए लॉकडाउन के कारण प्रिंट मीडिया भी काफी प्रभावित हुआ है। हालांकि, अब अधिकांश स्थानों पर अनलॉक 1.0 की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अखबारों की पब्लिशिंग और सर्कुलेशन का काम भी अपने सामान्य रूप में वापस लौट रहा है। ‘एडवर्टाइजिंग क्लब बेंगलुरु’ (Advertising Club Bangalore) की ओर से ‘Re-imagining Print’ पर आयोजित लाइव चैट के दौरान इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों का कहना था कि देश में अखबारों का सर्कुलेशन करीब 70-75 प्रतिशत तक हो गया है। इस दौरान पैनल में ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम और ‘दैनिक भास्कर ग्रुप’ के प्रमोटर और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल बतौर स्पीकर शामिल थे और इसे ऐड क्लब की मैनेजिंग पार्टनर राधिका रमानी ने मॉडरेट किया।
कोविड-19 के बारे में शोर नवंबर 2019 में शुरू हुआ था। किसी भी अखबार समूह को इस बात की आशंका नहीं थी कि वायरस इस हद तक संकट पैदा करेगा। इनमें से अधिकांश यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनके पास न्यूजप्रिंट का पर्याप्त स्टॉक हो। सुंदरम ने कहा, ‘हमारे पास पर्याप्त संसाधन थे और स्टॉक को सही तरीके से डिस्ट्रीब्यूट किया गया।’ उन्होंने कहा, ‘पॉलिसी के तहत हम हमेशा 45 से 75 दिनों का स्टॉक रखते हैं। पिछले 18 महीनों में न्यूजप्रिंट की कीमतों में नरमी को देखते हुए हमने अच्छी इन्वेंट्री विकसित कर ली थी। अप्रैल की शुरुआत में हमारे पास करीब 70-80 प्रतिशत स्टॉक था।’ सुंदरम का कहना था कि जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो उस समय अखबार का डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता थी।
वहीं, अग्रवाल का कहना था, ‘हम मेक इन इंडिया में विश्वास रखते हैं। हम 50 प्रतिशत न्यूजप्रिंट इंडिया से लेते हैं, जबकि बाकी का 50 प्रतिशत बाहर से आयात करते हैं। हम 65 स्थानों से अखबार पब्लिश करते हैं। शुरुआत के दो हफ्तों में न्यूजप्रिंट को मार्केट में भेजना मुश्किल था, यह समस्या अब हल हो गई है। मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि लॉकडाउन के दौरान देश का कोई भी न्यूजपेपर ऑर्गनाइजेशन बंद नहीं हुआ।’
रेवेन्यू के मुद्दे पर अग्रवाल ने कहा, ‘अखबार का 75 प्रतिशत रेवेन्यू एडवर्टाइजिंग से और 25 प्रतिशत रेवेन्यू सर्कुलेशन से आता है। कोविड के दौरान एडवर्टाजिंग बिल्कुल नहीं थी और 75 प्रतिशत रेवेन्यू 10 से 30 प्रतिशत रह गया था। हमने पेजों की संख्या घटाई, जिससे पब्लिशिंग कॉस्ट कम हुई और सब्सिडी शून्य हो गई। इन वजहों से ही हम 10 से 30 प्रतिशत रेवेन्यू के साथ सर्वाइव कर सके।’
टैग्स गिरीश अग्रवाल दैनिक भास्कर बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड बीसीसीएल शिवकुमार सुंदरम ऐड क्लब बेंगलुरु डीबी कॉर्प DAINIK BHASKAR