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न्यूजपेपर इंडस्ट्री के फ्यूचर को लेकर क्या है दिग्गजों का आकलन, पढ़ें यहां

कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से देश में पिछले दिनों किए गए लॉकडाउन के कारण प्रिंट मीडिया भी प्रभावित हुआ है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago

कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से देश में किए गए लॉकडाउन के कारण प्रिंट मीडिया भी काफी प्रभावित हुआ है। हालांकि, अब अधिकांश स्थानों पर अनलॉक 1.0 की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अखबारों की पब्लिशिंग और सर्कुलेशन का काम भी अपने सामान्य रूप में वापस लौट रहा है। ‘एडवर्टाइजिंग क्लब बेंगलुरु’ (Advertising Club Bangalore) की ओर से ‘Re-imagining Print’ पर आयोजित लाइव चैट के दौरान इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों का कहना था कि देश में अखबारों का सर्कुलेशन करीब 70-75 प्रतिशत तक हो गया है। इस दौरान पैनल में ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम और ‘दैनिक भास्कर ग्रुप’ के प्रमोटर और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल बतौर स्पीकर शामिल थे और इसे ऐड क्लब की मैनेजिंग पार्टनर राधिका रमानी ने मॉडरेट किया।

इस मौके पर गिरीश अग्रवाल का कहना था, ‘लॉकडाउन के पहले हफ्ते में अखबारों का सर्कुलेशन काफी प्रभावित हुआ था। इसके दो कारण थे। पहला तो यह कि नेशनल लॉकडाउन के कारण लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि अखबार कैसे डिलीवर होंगे। दूसरा कारण यह था कि सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ने लगी थी कि अखबारों की वजह से कोरोनावायरस फैल सकता है। एक सप्ताह में यह दोनों चीजें स्पष्ट हो गईं। उस समय सर्कुलेशन 60-65 प्रतिशत गिर गया था और अप्रैल तक यह करीब 70-75 प्रतिशत पर वापस आ गया, जबकि मई-जून में अधिकांश अखबारों ने 80 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर लिया।’ अनुमान है कि बाकी का 20-25 प्रतिशत सर्कुलेशन भी अगले एक-दो महीने में पटरी पर वापस आ जाएगा। मलयाला मनोरमा (Malayala Manorama) पहले ही 97 प्रतिशत वापसी कर चुका है।  

वहीं, सुंदरम के अनुसार, कोविड-19 की शुरुआत एक शहरी घटना के रूप में हुई और इसलिए शुरुआती दौर में गैर शहरी केंद्रों की तुलना में प्रमुख शहरों में इसका सबसे ज्यादा असर देखा गया। सुंदरम ने कहा, ‘मैं इस मुद्दे को दो तरह से (एक तो घरों पर जाने वाली कॉपी और दूसरी होटल, एयरलाइंस अथवा एयरपोर्ट्स आदि में जाने वाली इंस्टीट्यूशनल कॉपी) रखना चाहता हूं। मुझे लगता है कि इंस्टीट्यूशनल कॉपियां इतनी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं और इन्हें पटरी पर आने में समय लगेगा, क्योंकि इन दिनों ज्यादातर घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) हो रहा है। ऐसे में हम हाउसहोल्ड कॉपियों यानी घरों पर डिलीवर की जाने वाली कॉपियों पर फोकस कर रहे हैं और इस दिशा में काफी काम किया जा चुका है। हम अपनी कॉपियों की संख्या दोगुनी कर रहे हैं और महामारी के दौरान हम 65 प्रतिशत सर्कुलेशन का आंकड़ा पार कर चुके हैं।’

कोविड-19 के बारे में शोर नवंबर 2019 में शुरू हुआ था। किसी भी अखबार समूह को इस बात की आशंका नहीं थी कि वायरस इस हद तक संकट पैदा करेगा। इनमें से अधिकांश यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनके पास न्यूजप्रिंट का पर्याप्त स्टॉक हो। सुंदरम ने कहा, ‘हमारे पास पर्याप्त संसाधन थे और स्टॉक को सही तरीके से डिस्ट्रीब्यूट किया गया।’ उन्होंने कहा, ‘पॉलिसी के तहत हम हमेशा 45 से 75 दिनों का स्टॉक रखते हैं। पिछले 18 महीनों में न्यूजप्रिंट की कीमतों में नरमी को देखते हुए हमने अच्छी इन्वेंट्री विकसित कर ली थी। अप्रैल की शुरुआत में हमारे पास करीब 70-80 प्रतिशत स्टॉक था।’ सुंदरम का कहना था कि जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो उस समय अखबार का डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता थी।   

वहीं, अग्रवाल का कहना था, ‘हम मेक इन इंडिया में विश्वास रखते हैं। हम 50 प्रतिशत न्यूजप्रिंट इंडिया से लेते हैं, जबकि बाकी का 50 प्रतिशत बाहर से आयात करते हैं। हम 65 स्थानों से अखबार पब्लिश करते हैं। शुरुआत के दो हफ्तों में न्यूजप्रिंट को मार्केट में भेजना मुश्किल था, यह समस्या अब हल हो गई है। मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि लॉकडाउन के दौरान देश का कोई भी न्यूजपेपर ऑर्गनाइजेशन बंद नहीं हुआ।’

रेवेन्यू के मुद्दे पर अग्रवाल ने कहा, ‘अखबार का 75 प्रतिशत रेवेन्यू एडवर्टाइजिंग से और 25 प्रतिशत रेवेन्यू सर्कुलेशन से आता है। कोविड के दौरान एडवर्टाजिंग बिल्कुल नहीं थी और 75 प्रतिशत रेवेन्यू 10 से 30 प्रतिशत रह गया था। हमने पेजों की संख्या घटाई, जिससे पब्लिशिंग कॉस्ट कम हुई और सब्सिडी शून्य हो गई। इन वजहों से ही हम 10 से 30 प्रतिशत रेवेन्यू के साथ सर्वाइव कर सके।’


टैग्स गिरीश अग्रवाल दैनिक भास्कर बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड बीसीसीएल शिवकुमार सुंदरम ऐड क्लब बेंगलुरु डीबी कॉर्प DAINIK BHASKAR
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