होम / प्रिंट / लॉकडाउन और कोविड-19 के बीच कुछ यूं दिख रहा केरल के अखबारों का ‘दम’
लॉकडाउन और कोविड-19 के बीच कुछ यूं दिख रहा केरल के अखबारों का ‘दम’
कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देशभर में किए गए लॉकडाउन के कारण कुछ समय के लिए अखबारों की प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन (वितरण) पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ा।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देशभर में किए गए लॉकडाउन के कारण कुछ समय के लिए अखबारों की प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन (वितरण) पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ा। हालांकि, केरल का मार्केट इसका अपवाद रहा और वहां पर बिना किसी रुकावट के अखबारों का वितरण पहले की तरह जारी रहा। सिर्फ प्रादेशिक भाषा के अखबार ही नहीं, बल्कि अन्य अखबार जिनमें अंग्रेजी अखबार भी शामिल हैं, उन्हें राज्य में अखबारों के वितरण को लेकर किसी भी तरह की परेशानी नहीं हुई। दूसरी ओर, भले ही देश के अन्य हिस्सों में अखबार का सर्कुलेशन फिर से शुरू हो गया है, लेकिन वितरण अभी भी लगभग 75-90% है।
इसका एक प्रमुख कारण अखबारों और सरकार द्वारा फेक न्यूज और गलत इंफॉर्मेशन के प्रसार को रोकने के लिए किया गया प्रयास था कि अखबारों के द्वारा कोविड-19 लोगों तक पहुंच सकता है। इसके लिए सभी अखबारों ने विडियो भी तैयार किए।
इस बारे में ‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए हमने एक रणनीतिक दृष्टिकोण भी अपनाया। इसके लिए हमने विडियो तैयार कर लोगों को बताया कि अखबारों के प्रॉडक्शन में साफ-सफाई समेत तमाम एहतियात बरती जाती हैं। इस विडियो में हमने दिखाया कि यहां पर प्रिंटिंग के लिए ऑटोमैटिक प्रक्रिया अपनाई जाती है और प्रॉडक्शन की प्रक्रिया पूरी तरह से सैनिटाइज होती है। अपने न्यूजपेपर्स के वितरण को लेकर भी हम काफी सख्त प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। अखबारों के ट्रांसपोर्टेशन और हैंडलिंग की पूरी प्रक्रिया में तमाम सुरक्षा उपायों का पान किया जाता है। इस प्रक्रिया में काम करने वाले साथ मुंह पर मास्क और हाथों में दस्तानों का इस्तेमाल करते हैं। इस जागरूकता कैंपेन के अलावा मलयाला मनोरमा ने यह भी सुनिश्चित किया कि इसे प्रिंटिंग के लिए कुछ घंटों पहले भेजा जाए, ताकि डिस्ट्रीब्यूशन में आने वाली बाधा को दूर किया जा सके।’
वहीं, ‘मलयाला मनोरमा’ के वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग, एडवर्टाइजिंग सेल्स) वर्गीस चांडी ने कहा, ‘केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने साफ कहा कि अखबार वितरण प्रभावित नहीं होगा और अखबारों से वायरस नहीं फैलता है, क्योंकि आखिरी छोर तक पूरी एहतियात बरती जाती है। आजकल फेक न्यूज की भरमार है, ऐसे में लोग सही खबर के लिए अखबार तलाशते हैं, क्योंकि अखबारों की विश्वसनीयता बहुत ज्यादा है। यहां के लोग विश्वसनीय सोर्स से इंफॉर्मेशन लेने में विश्वास रखते हैं। केरल की बात करें तो यहां के लोग छपे हुए पर ज्यादा विश्वास करते हैं।’
कुमार का कहना है, ‘इसके अलावा इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी भी अपनी ओर से आगे आई और इंडियन न्यूज पेपर सोसायटी की केरल कमेटी ने सभी मलयालम अखबारों में एक विज्ञापन जारी कर फेक न्यूज से लड़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। इसने भी लोगों के बीच जागरकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई।’
मीडिया इंडस्ट्री पर इस महामारी का सबसे ज्यादा प्रभाव विज्ञापन पर पड़ा है। खासकर प्रिंट मीडिया इससे काफी प्रभावित है। अनुमान है कि प्रिंट एडवर्टाइजिंग में 90 प्रतिशत से ज्यादा की कमी देखने को मिली है और केरल भी इससे अछूता नहीं रहा है। हालाँकि, विज्ञापनदाताओं की कुछ श्रेणियां हैं, जैसे ऑनलाइन एजुकेशन पोर्टल्स और हैंड सैनिटाइजर्स आदि, जो विज्ञापन जारी रखते हैं। इसके अलावा कई ब्रैंड्स ने कोरोनावायरस संबंधित विज्ञापनों का सहारा लिया है।
कुमार का कहना है, प्रिंट मीडिया को वापस ट्रैक पर आने के लिए उचित समय लगेगा और उसमें सभी मोर्चों पर प्रयास करने की जरूरत है, जिसमें मालिक, एंप्लाईज, सरकार और सहायक निकाय आदि शामिल हैं।
केरल में कोरोनावायरस के मामले कम होने के साथ ही चांडी ने उम्मीद जताई है कि केरल के कुछ जिले सरकार द्वारा ग्रीन ज़ोन के रूप में घोषित किए जाने वाले पहले जिलों में शामिल होंगे। चांडी के अनुसार, ‘केरल में एक समाचार पत्र की पहुंच किसी अन्य माध्यम से अधिक है और यह एक मजबूत माध्यम है।हालांकि कई इंडस्ट्री में अभी ठहराव है, हम कहना चाहते हैं कि जब भी एडवर्टाइर्स विज्ञापन के लिए तैयार होंगे, केरल भी पूरी तरह तैयार होगा क्योंकि यह मीडियम तैयार है।’
चांडी का कहना है, ‘एक बड़ी समस्या ये है कि अन्य शहरों में लोगों के बीच ये धारणा है कि यदि मुझे यहां अखबार नहीं मिलता है तो कहीं और भी ऐसा ही होगा, लेकिन केरल में कहानी पूरी तरह अलग है। मेरा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरू और चेन्नई आदि के एडवर्टाइजर्स से कहना है कि अपने मेट्रो शहरों की तुलना केरल से न करें, क्योंकि केरल काफी अलग है। केरल में अखबारों का डिस्ट्रीब्यूशन प्रभावित नहीं हुआ है और यह लगभग सौ प्रतिशत है।’
टैग्स केरल प्रिंट मीडिया मलयाला मनोरमा मातृभूमि वर्गीस चांडी लॉकडाउन कोविड-19 कोरोनावायरस श्रेयम्स कुमार अखबार वितरण