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3 महीने में 20% महंगा हुआ अखबारी कागज, न्यूज पब्लिशर्स ने वित्त मंत्री से की ये अपील
कोरोना महामारी के दौरान मांग-आपूर्ति का असंतुलन पैदा होने से पिछले तीन महीनों में अखबारी कागज की कीमतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
समाचार पत्र प्रकाशकों (News Print Publishers) ने सरकार से न्यूजप्रिंट पर लागू पांच प्रतिशत का आयात शुल्क हटाने की मांग की है। इस बाबत इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (INS) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ज्ञापन सौंपा है। बजट से पहले सौंपे गए इस ज्ञापन में अखबारी कागज के आयात पर सीमा शुल्क कटौती, उद्योग को प्रोत्साहन पैकेज या कम से कम 50 प्रतिशत बढ़े शुल्क के साथ विज्ञापन जारी करने का आग्रह किया है।
समाचार पत्र उद्योग का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान मांग-आपूर्ति का असंतुलन पैदा होने से पिछले तीन महीनों में अखबारी कागज की कीमतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10-15 फीसदी की बढ़ोतरी अगले महीने होने वाली है, जो प्रकाशकों को बुरी तरह प्रभावित करेगी। वहीं, घरेलू उत्पादकों ने पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति के लिए अपने कच्चे माल को स्टॉक कर लिया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट से पहले सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि यदि प्रिंट मीडिया के लिए इस समय प्रोत्साहन पैकेज दे पाना संभव नहीं है, तो विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) को अपने सभी विभागों के विज्ञापन 50 प्रतिशत बढ़े शुल्क के साथ जारी करने पर विचार करना चाहिए। इससे उद्योग को काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा आईएनएस ने भारत के समाचार पत्र पंजीयक (आरएनआई) की प्रसार प्रमाणपत्र वैधता का विस्तार 31 मार्च, 2022 तक करने की मांग की है जिससे डीएवीपी की दरें अगले साल तक समान रहेंगी।
आईएनएस ने कहा कि ऐसा अनुमान है कि प्रिंट मीडिया को मौजूदा स्थिति से उबरने में दो से तीन साल लगेंगे।
इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (आईएनएस) के अध्यक्ष एल आदिमूलम ने कहा कि कोविड-19 महामारी से उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि महामारी के प्रभाव से उबरने के लिए समाचार पत्रों ने लागत घटाने के लिए अपने कई संस्करण बंद किए हैं। साथ ही उन्होंने अखबारों के पृष्ठ भी कम किए हैं और कर्मचारियों को भी हटाना पड़ा है। वहीं, ऐसे समय पर तो ज्यादातर समाचार पत्रों ने उन ग्रामीण क्षेत्रों में अखबार भेजना ही बंद कर दिया है, जहां 50 से कम प्रतियां जाती हैं। वितरण की लागत घटाने के लिए समाचार पत्रों ने यह कदम उठाया है।
आदिमूलम ने कहा कि सरकार ने महामारी के दौरान कुछ उद्योगों की प्रोत्साहन पैकेज से मदद की है। ‘हम भी कुछ प्रोत्साहन की उम्मीद कर रहे हैं।’
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