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टेक्नोलॉजी से भागो मत, उसे अपनाओ और खुद को दोबारा गढ़ो: पुनीत कुकरेजा, टाइम्स इंटरनेट
IMC के मौके पर 'दि इम्पीरियल' होटल में आयोजित सम्मेलन के दौरान टाइम्स इंटरनेट के वाइस प्रेजिडेंट पुनीत कुकरेजा ने सब्सक्रिप्शन आधारित मीडिया बिजनेस के विकास, चुनौतियों और रणनीतियों पर गहराई से बात की।
Vikas Saxena 6 months ago
इंडियन मैगजीन कांग्रेस (IMC) 2025 के मौके पर 'दि इम्पीरियल' होटल में आयोजित सम्मेलन के दौरान टाइम्स इंटरनेट के वाइस प्रेजिडेंट पुनीत कुकरेजा ने सब्सक्रिप्शन आधारित मीडिया बिजनेस के विकास, चुनौतियों और रणनीतियों पर गहराई से बात की। उन्होंने अपने 15–16 वर्षों के करियर अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजार में लगातार भुगतान कराने का मॉडल कैसे काम करे, यही उनका सबसे बड़ा जुनून रहा है।
'एक बार नहीं, बार-बार और ज्यादा पेमेंट कराना है असली चुनौती'
पुनीत ने अपने करियर की शुरुआत MagicBricks.com से की थी, जहां प्रॉपर्टी लिस्टिंग के लिए मालिकों से ₹20,000 तक लिए जाते थे और फिर होमसीकर से भी पेमेंट की मांग होती थी। बाद में Amazon में iPad और लैपटॉप जैसे महंगे प्रोडक्ट्स बेचने का अनुभव मिला। उन्होंने बताया कि Economic Times में सब्सक्रिप्शन यात्रा की शुरुआत 2018 में की गई, जब ARPU (average revenue per user) गिर रहा था और MAU (monthly active users) स्थिर हो गए थे। ऐसे में ET Prime, ET Markets और Masterclasses जैसे उत्पाद लॉन्च किए गए।
'सब्सक्रिप्शन सिर्फ एक्सेस नहीं, वैल्यू का वादा है'
उन्होंने कहा कि सब्सक्रिप्शन मॉडल का फोकस केवल कंटेंट एक्सेस पर नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे एक 'वैल्यू सर्कल' में बदलना चाहिए, जो यूजर को कोई बेहतर निर्णय लेने में मदद करे। उनका मानना है कि यदि कोई यूजर उनके टूल्स या आर्टिकल्स की मदद से प्रमोशन पा ले, बेहतर निवेश कर ले, तो वही सबसे बड़ी सफलता है।
पुनीत ने स्पष्ट कहा कि शुरुआत में उन्होंने कीमत कम रखने की गलती की, लेकिन बाद में समझ आया कि टारगेट यूजर बेस बहुत अलग है और उन्हें वैल्यू के अनुसार ही प्राइसिंग करनी चाहिए। उन्होंने ET Prime जैसे प्रोडक्ट्स को ₹2,000–₹2,500 की कीमत पर लॉन्च किया और Masterclasses को हमेशा प्रीमियम रखा।
'रीटेंशन की अहमियत- 60% रेवेन्यू पहले से तय होता है'
पुनीत के मुताबिक, आज 60% रेवेन्यू पहले दिन से तय रहता है, क्योंकि यूजर रीटेंशन मजबूत है। उन्होंने समझाया कि सिर्फ यूजर एक्सेस पर ध्यान देना गलत है, असली काम तब शुरू होता है जब कोई यूजर पेमेंट कर देता है। उन्होंने सब्सक्राइबर को 'जिम मेंबरशिप' से जोड़ा- एक दिन जिम जाकर कोई फिट नहीं होता, उसी तरह सब्सक्राइबर को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म से जोड़े रखना जरूरी है।
AI के युग में बदलाव जरूरी
उन्होंने बताया कि किस तरह AI मीडिया कंपनियों के पारंपरिक मॉडल को चुनौती दे रहा है। जहां पहले 'information advantage' ही USP थी, वहीं अब ChatGPT, Gemini जैसे टूल्स ने उस बढ़त को खत्म कर दिया है। ऐसे में टाइम्स इंटरनेट ने AI को अपनाते हुए खुद को नया रूप देना शुरू कर दिया है।
AI के कुछ प्रयोग जो टाइम्स इंटरनेट कर रहा है:
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ET Markets AI TV Anchor: पूरी तरह AI पर आधारित फाइनेंशियल वीडियो, जिसमें डेटा, एंकर और एनालिसिस ऑटोमेटेड हैं।
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AI-Generated Songs and Faceless Videos: बिना किसी क्रिएटिव टीम के AI द्वारा गाने और वीडियो बनाए गए।
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Tailored AI Agents: भविष्य में यूजर्स को ChatGPT जैसे AI एजेंट ET प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे, जो प्लेटफॉर्म के कंटेंट के अनुरूप जवाब देंगे।
'हर यूजर की सब्सक्रिप्शन वजह अलग होती है'
उन्होंने बताया कि सब्सक्राइबर्स को 5–6 अलग-अलग 'कोहोर्ट्स' में बांटा जाता है- जैसे 'सुपरफैन', 'सुपरडॉर्मेंट', 'सिर्फ कमेंट पढ़ने वाले', आदि। हर ग्रुप को कस्टम मैसेजिंग और वैल्यू-आधारित nudges भेजे जाते हैं ताकि यूजर जुड़ा रहे।
तीन प्रमुख सीख:
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सिर्फ रिटेंशन ट्रैकिंग काफी नहीं — हर यूजर की यात्रा को पर्सनलाइज करना जरूरी।
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सामान्य प्रेरक संकेत (nudges) असरदार नहीं होते — हर यूजर के अपने अलग-अलग कारण होते हैं।"
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पहले 7 दिन निर्णायक होते हैं — पहले सप्ताह में ही यह पता चल जाता है कि कौन सा यूजर रीन्यू करेगा और कौन नहीं।
पुनीत कुकरेजा ने कहा, 'जिंदगी बहुत जटिल नहीं है, बस मजबूत वैल्यू क्रिएट कीजिए, एक अच्छा रीटेंशन इंजन बनाइए और AI की मदद से खुद को लगातार रीइनवेंट करते रहिए।'
यहां देखें वीडियो:
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