कांग्रेसी विधायक ने अखबार में दिया ऐसा विज्ञापन, हो गया हंगामा

यह मामला ऐसे समय में हुआ है, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गुजरात के दौरे पर आने वाले हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 28 September, 2019
Last Modified:
Saturday, 28 September, 2019
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गुजरात में कांग्रेसी विधायक की एक हरकत से राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा हुआ है। दरअसल, यहां कच्छ के अबडासा विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक प्रद्युमन सिंह जडेजा ने भाजपा सरकार की प्रशंसा करते एक विज्ञापन अखबार में छपवा दिया है, जिससे कांग्रेस में अंतर्कलह शुरू हो गई है। कांग्रेसी सवाल उठा रहे हैं कि अपनी धुर विरोधी पार्टी की तारीफ क्यों की गई? संभवत: चुनावों के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी कांग्रेसी विधायक ने बाकायदा विज्ञापन देकर भाजपा सरकार की तारीफ की हो।

देखा गया है कि पूर्व में अगर कांग्रेस का कोई विधायक पार्टी छोड़ता था, तभी वह भाजपा का पक्ष लेता था, लेकिन प्रद्युमन सिंह ने कांग्रेस में रहते हुए ही ऐसा कर दिया है। बताया जाता है कि करीब एक माह पूर्व भी जडेजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा सरकार की प्रशंसा की थी। जडेजा का कहना था कि भाजपा सरकार विकास के अच्‍छे काम कर रही है।

अब प्रद्युमन सिंह ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए स्थानीय अखबार में विज्ञापन देकर रूपाणी सरकार की तारीफ की। यह विज्ञापन कच्छ जिले के स्थानीय अखबारों में पब्लिश हुआ है। इस विज्ञापन में विधायक के साथ मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी व उपमुख्‍यमंत्री नितिन पटेल की भी फोटो छपी है।

विज्ञापन छपवाने का मामला ऐसे समय में हुआ है, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गुजरात के दौरे पर आने वाले हैं। बता दें कि, प्रद्युमन सिंह पहले भाजपा में थे। पार्टी द्वारा टिकट न दिए जाने पर वह कांग्रेस में शामिल हो गये थे। भाजपा की तारीफ वाले विज्ञापन के बारे में प्रद्युमन सिंह का कहना है कि उन्‍हें अपने क्षेत्र में विकास कराना है, इसलिए सरकार के साथ बेहतर रिश्‍ते जरूरी हैं। ् आप भी इस विज्ञापन को यहां देख सकते हैं।

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महामारी के बीच मैगजींस ने कुछ इस तरह लड़ी अपने अस्तित्व की ‘जंग’

महामारी ‘कोरोनावायरस’ (कोविड-19) और लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग धंधों के साथ ही प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

Last Modified:
Thursday, 04 June, 2020
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महामारी ‘कोरोनावायरस’ (कोविड-19) और लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग धंधों के साथ ही प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। हालांकि, इस परेशानी के बीच डिजिटल फॉर्मेट की ओर रुख कर मैगजीन बिजनेस काफी हद तक इससे अलग रहने में कामयाब रहा है। जिन पाठकों को अपने वेंडर्स से मैगजींस नहीं मिलीं, उनमें से अधिकांश ने इन्हें ऑनलाइन पढ़ा है। यही नहीं, लॉकडाउन के बाद देश में पहले अनलॉक के बाद भी ज्यादातर मैगजींस द्वारा कम से कम तीन महीने तक और ‘डिजिटल ऑनली’ फॉर्मेट में ही उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है।

महामारी का यह दौर जहां इंडस्ट्री के लिए काफी मुश्किलों भरा रहा है, वहीं मैगजीन बिजनेस से जुड़े लोगों का कहना है कि डिजिटल कंटेंट में नए-नए प्रयोग और क्रिएटिव पैकेजिंग ने इस बिजनेस को बचाए रखा है। इसके अलावा, तिमाही, छमाही और वार्षिक सबस्क्रिप्शन ने यह सुनिश्चित किया है कि अधिकांश ब्रैंड्स के लिए मैगजीन का सर्कुलेशन रेवेन्यू बरकरार रहे। हालांकि, कुछ एडवर्टाइजर्स ने अभी अपने कदम पीछे खींच रखे हैं, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अधिकांश पाठकों द्वारा इस मीडियम को पसंद किए जाने के बाद मार्केटर्स के भी इस माध्यम के साथ कंफर्टेबल हो जाने की संभावना है।         

उदाहरण के लिए ‘अमर चित्र कथा’ (Amar Chitra Katha) के ऐप पर यूजर्स की संख्या में काफी ग्रोथ देखी गई है। इस बारे में ‘अमर चित्र कथा प्राइवेट लिमिटेड’ की प्रेजिडेंट और सीओओ प्रीति व्यास का कहना है, ‘हमने अपने ऐप को 30 दिनों के लिए फ्री कर दिया और हमें इसके काफी अभूतपूर्व परिणाम देखने को मिले। एक लाख यूजर्स से बढ़कर यह संख्या 5.5 लाख हो गई।’ ‘अमर चित्र कथा’ की ओर से ‘Tinkle comics’, ‘National Geographic’ मैगजीन और ‘National Geographic Traveller India’ भी पब्लिश की जाती है।  

ब्रैंड ने अपनी कंटेंट ऑफरिंग में किस तरह की नई पहल कीं और प्रिंट एडिशन से पाठकों तक ऑडियो और विजुअल भी उपलब्ध कराया, के बारे में व्यास का कहना है कि प्रिंटिंग भले ही महंगी हो लेकिन आइडियाज नहीं। यही नहीं, रीडर्स को अपने साथ जोड़े रखने के लिए पब्लिशर्स ने दो इश्यू के बीच अंतर को भी कम किया।  

व्यास का कहना है, ‘प्रिंटिंग और सर्कुलेशन को लेकर तमाम बाध्यताएं होती हैं, जबकि ऑनलाइन पब्लिशिंग में ऐसा नहीं है। इसलिए हम अपने पाठकों को 15 दिन तक का इंतजार नहीं कराना चाहते थे। दो हफ्ते में 48 पेज पाठकों को उपलब्ध कराने के बजाय हमने हर हफ्ते 20 पेज उपलब्ध कराए। इससे हमने पाठकों को जोड़े रखा।’

वहीं, नवाचारों (innovations) के बारे में केरल से पब्लिश होने वाली फैमिली एंटरटेनमेंट मैगजीन ‘मनोरमा वीकली’ (Manorama Weekly) ने पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रत्येक इश्यू के साथ सब्जी के बीच मुफ्त में बांटे। इस बारे में ‘मलयाला मनोरमा’ (Malayala Manorama) के वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग सेल्स) वर्गीस चांडी का कहना है कि इस स्ट्रैटेजी की बदौलत मैगजीन की बिक्री में 30 प्रतिशत का इजाफा हो गया। चांडी के अनुसार, ‘यह बीज राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए थे, जिनका उद्देश्य स्थानीय उपज को बढ़ावा देना था, ताकि लोग अपनी छत पर या खाली जगह में सब्जियां उगा सकें। इसके साथ ही मैगजीन ने विभिन्न आर्टिकल्स के जरिये यह भी बताया कि कैसे इन बीजों को लगाना है और उनकी देखभाल करनी है। इस पहल की जबर्दस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली और पाठक हमसे जुड़े रहे।’  

‘इंडियन रीडरशिप सर्वे की चौथी तिमाही’ (IRS 2019 Q4 figures) के आंकड़ों के अनुसार, देश में टॉप 20 मैगजीन में से करीब आधी के पास रीडर्स बढ़े हैं। उदाहरण के लिए, पिछली चार तिमाहियों में ‘इंडिया टुडे’ (अंग्रेजी) की ग्रोथ में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। ‘The Sportstar’, ‘General Knowledge Today’, ‘Diamond Cricket Today’, ‘Ananda Vikatan’, ‘Champak (Hindi)’, ‘Filmfare’, ‘Balarama’ और ‘Kumudam’ आदि मैगजींस की ग्रोथ पिछली तिमाहियों में लगातार बढ़ी है। लेकिन बात जब अर्थव्यवस्था की हो तो अन्य तमाम बिजनेस की तरह कोविड-19 के प्रभाव से मैगजीन भी अछूती नहीं रही हैं। अमर चित्र कथा ने सिर्फ 10 प्रतिशत बिजनेस किया है, जैसा कि वे आमतौर पर करते हैं। इस बारे में व्यास का कहना है कि हमारी एडिटोरियल टीम द्वारा की गईं वर्कशॉप की काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। जिन लोगों ने इसे अटैंड किया उन्होंने एक सेशन के लिए 500 और पांच दिन के सेशन के लिए 1499 रुपए का भुगतान किया। 30-40 प्रतिभागियों के साथ ये वर्कशॉप्स अच्छी चल रही हैं और कुछ खर्चों को पूरा भी कर रही हैं। वहीं एडवर्टाइजर्स के बारे में व्यास ने उम्मीद जताई कि अगले तीन से छह महीनों में एडवर्टाइजर्स वापस आएंगे।

वहीं, केरल के बारे में चांडी का कहना है, ‘स्थानीय पाठकों ने मैगजींस पढ़ना कभी बंद नहीं किया है। चूंकि हमारे पास कंटेंट है, पाठक हैं और राज्य के समर्थन के साथ अच्छी पहुंच है, इसकी वजह से हम कोविड-19 का सामना अच्छी तरह से कर सके हैं। ब्रैंड्स को बेहतर रिटर्न के लिए इस तरफ देखना चाहिए। एजुकेशनल से लेकर ऑटोमोबाइल्स, एफएमसीजी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ सेक्टर्स मैगजींस में पहले विज्ञापन देंगे।’

एक्सपर्ट्स का कहना है कि लग्जरी ब्रैंड्स भी मैगजींस पर अपने विज्ञापन देना जारी रखेंगे, क्योंकि अब बिजनेस दोबारा से शुरू होने लगेंगे। हालांकि, एडवर्टाइजर्स के इस वर्ग को लुभाने के लिए मैगजींस को अपनी पेशकश में तमाम नई पहल करनी होंगी।

रीडर्स और एडवर्टाइजर्स को लेकर कोविड-19 के बाद की स्ट्रैटेजी के बारे में ‘Dentsu One’ के प्रेजिडेंट हरजोत सिंह नारंग का कहना है, ‘कोविड-19 के बाद मार्केट में बने रहने के लिए मैगजींस को लगभग अल्ट्रा ग्लैमरस बुक्स की तरह होना पड़ेगा। अपने अपनी सोच और कंटेंट में और ज्यादा गहराई लानी पड़ेगी।’ उनका कहना है, ‘अल्ट्रा प्रीमियम और लग्जरी ब्रैंड्स चुनिंदा मैगजींस का इस्तेमाल करना और उन्हें विज्ञापन देना जारी रखेंगे।’

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मुंबई में इस तारीख से फिर शुरू हो सकती है अखबारों की डोर टू डोर डिलीवरी

सरकार ने कहा है कि कोविड-19 के खतरे को देखते हुए सुरक्षा के तौर पर डिलीवरी ब्वॉय को हैंड सैनिटाइजर्स और मास्क उपलब्ध कराए जाएंगे

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2020
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मुंबई में सात जून से अखबारों की घर-घर जाकर (डोर टू डोर) डिलीवरी फिर से शुरू हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस तरह के संकेत दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने कहा है कि कोविड-19 के खतरे को देखते हुए सुरक्षा के तौर पर डिलीवरी ब्वॉय को हैंड सैनिटाइजर्स और मास्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

बता दें कि कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए वेंडर्स द्वारा घर-घर जाकर अखबार बांटने से इनकार करने के बाद तमाम अखबार मालिकों ने 23 मार्च को मुंबई में अखबार के पब्लिकेशन और डिस्ट्रीब्यूशन का काम बंद कर दिया था। लोकल ट्रेन सेवाएं रद्द होने से समाचार पत्रों के सर्कुलेशन का काम और अधिक कठिन हो गया था।

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13 भाषाओं में मैगजीन पब्लिश करेगी मोदी सरकार, ये है बड़ी वजह

पहले इस मैगजीन की शुरुआत एक जून से की जानी थी, लेकिन कोविड-19 की वजह से नहीं हो पाई, नई तारीख की अभी नहीं की गई है घोषणा

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2020
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अपनी योजनाओं और उपलब्धियों पर प्रकाश डालने और उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। ‘द प्रिंट’ (The Print) में छपी एक खबर के मुताबिक मोदी सरकार इसके लिए जल्द ही ‘न्यू इंडिया समाचार’ (New India Samachar) के नाम से एक मैगजीन पब्लिश करने जा रही है।

यह पाक्षिक (fortnightly) मैगजीन हिंदी-अंग्रेजी समेत 13 भाषाओं में पब्लिश की जाएगी और उसे सूचना प्रसारण मंत्रालय की मीडिया यूनिट ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन’ (Bureau of Outreach Communication) के द्वारा पब्लिश किया जाएगा। मैगजीन के पब्लिकेशन के लिए प्रिंटर का चयन खुली निविदाओं (open bids) के आधार पर किया जाएगा।

‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मैगजीन का एडिटोरियल कंटेंट ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ (Press Information Bureau) द्वारा उपलब्ध कराए जाने की संभावना है। बताया जाता है कि ‘रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया’ (RNI) ने इसके टाइटल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है।

बताया जाता है कि पहले इस मैगजीन का पहला इश्यू एक जून को आना था, लेकिन कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण इसमें देरी हो गई। हालांकि, अभी नई तारीख की घोषणा नहीं की गई है। शुरू में इसकी करीब एक लाख प्रतियां पब्लिश की जाएंगी, जिन्हें बाद में बढ़ाया जा सकता है। इस मैगजीन को देश भर की तमाम पंचायतों के साथ ही स्कूल-कॉलेजों में भेजे जाने की योजना भी बनाई जा रही है।

 

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जानें, हर साल क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस

हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में 30 मई का खास महत्व है। यही कारण है कि 30 मई को हर साल हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

Last Modified:
Saturday, 30 May, 2020
Journalism Day

हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में 30 मई का खास महत्व है। यही कारण है कि 30 मई को हर साल हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। दरअसल, इसी दिन वर्ष 1826 को पंडित युगल किशोर शुक्ल ने पहले हिंदी अखबार ‘उदंड मार्तण्ड’ का प्रकाशन किया था। उस दौरान अंग्रेजी, फारसी और बांग्ला में तो अनेक पत्र निकल रहे थे, लेकिन हिंदी में एक भी पत्र नहीं निकलता था। इसलिए 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन शुरू किया गया। मूल रूप से कानपुर के रहने वाले पंडित युगल किशोर शुक्ल ने इसे कलकत्ता (अब कोलकाता) से एक साप्ताहिक अखबार के तौर पर शुरू किया था। इसके प्रकाशक और संपादक भी वह खुद थे। यह अखबार हर हफ्ते मंगलवार को पाठकों तक पहुंचता था।

'उदन्त मार्तण्ड' के पहले अंक की 500 प्रतियां छपी। हिंदी भाषी पाठकों की कमी की वजह से उसे ज्यादा पाठक नहीं मिल सके। इसके अलावा हिंदी भाषी राज्यों से दूर होने के कारण उन्हें समाचार पत्र डाक द्वारा भेजना पड़ता था। डाक दरें बहुत ज्यादा होने की वजह से इसे हिंदी भाषी राज्यों में भेजना भी आर्थिक रूप से महंगा सौदा हो गया था। पैसों की तंगी की वजह से 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन बहुत दिनों तक नहीं हो सका और आखिरकार 4 दिसम्बर 1826 को इसका प्रकाशन बंद कर दिया गया।

यह अखबार ऐसे समय में प्रकाशित हुआ था, जब हिंदी भाषियों को अपनी भाषा के पत्र की आवश्यकता महसूस हो रही थी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर ‘उदन्त मार्तण्ड‘ का प्रकाशन किया गया था। वह ऐसा दौर था जब भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने का बीड़ा पत्रकारिता ने अपने कंधों पर उठाया था। देश की आजादी से लेकर, साधारण आदमी के अधि‍कारों की लड़ाई तक, हिंदी भाषा की कलम से इंसाफ की लड़ाई लड़ी गई। वक्त बदलता रहा और पत्रकारिता के मायने और उद्देश्य भी बदलते रहे, लेकिन हिंदी भाषा से जुड़ी पत्रकारिता में लोगों की दिलचस्पी कम नहीं हुई, क्योंकि इसकी एक खासियत यह भी रही है कि इस क्षेत्र में हिंदी के बड़े लेखक, कवि और विचारक भी आए। हिंदी के बड़े लेखकों ने संपादक के रूप में अखबारों की भाषा का मानकीकरण किया और उसे सरल-सहज रूप देते हुए कभी उसकी जड़ों से कटने नहीं दिया।

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न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए माकपा सांसद ने पीएम मोदी से की ये अपील

कोरोना महामारी के चलते देशभर में लॉकडाउन जारी है। ऐसे में कई इंडस्ट्री को नुकसान उठाना पड़ा है, जिनमें  न्यूजपेपर इंडस्ट्री भी शामिल है, जिसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
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कोरोना महामारी के चलते देशभर में लॉकडाउन जारी है। ऐसे में कई इंडस्ट्री को नुकसान उठाना पड़ा है, जिनमें  न्यूजपेपर इंडस्ट्री भी शामिल है, जिसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अब माकपा की ओर से कोयम्बटूर लोकसभा के सदस्य पी.आर. नटराजन इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद करने की अपील की है।

पी.आर. नटराजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्यूजपेपर इंडस्ट्री को राहत मुहैया कराने के लिए जरूरी  कदम उठाने की मांग की है। माकपा के सांसद ने मोदी को हाल ही में एक पत्र लिखकर उन्हें इंडस्ट्री की चुनौतियों से अवगत कराया और कहा कि कई अखबारों ने पहले ही पेजों की संख्या कम कर दी है। यहां तक कि कई एडिशन भी बंद करने पड़ गए हैं।

उन्होंने कहा कि जिस इंडस्ट्री ने लाखों रोजगार को दिया, आज वह लॉकडाउन के प्रभावों की वजह से दम तोड़ रही है, क्योंकि इसकी वजह से उसका ऐड रेवन्यू प्रभावित हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजपेपर इंडस्ट्री की यह स्थिति लंबे समय तक बने रहने की उम्मीद है।

नटराजन ने कहा कि पार्टी के सांसदों ने न्यूजपेपर के संगठनों द्वारा जारी किए उन प्रस्तावों का समर्थन किया है, जिसमें न्यूजप्रिंट पर सीमा शुल्क माफ करने, अखबारों के लिए दो साल तक टैक्स छोड़ने, अखबारों को सरकारी विज्ञापन के बकाये के भुगतान के लिए कदम उठाने और ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन (बीओसी) की विज्ञापन दरों में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का आग्रह किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस तरह के मदद की अपील की थी। उन्होंने मोदी को लिखे एक पत्र में कहा था, ‘विज्ञापन राजस्व में कमी और कोविड-19 महामारी के चलते सर्कुलेशन प्रभावित हुआ है और वे खर्च भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।’ उन्होंने कहा था, ‘न्यूजप्रिंट और आयात होने वाले अन्य कच्चे सामान पर लगने वाले सीमा शुल्क को वर्ष के बाकी समय के लिए माफ कर दिया जाए।’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्यूजपेपर इंडस्ट्री को राहत मुहैया कराने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।   

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प्रिंट प्रकाशन बंद करने के तीने महीने बाद ‘प्लेब्वॉय’ ने लिया ये बड़ा फैसला

महामारी बन चुके कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अफरा-तफरी मचा दी है। हाल ये है कि ग्लोबल स्तर पर प्रिंट मीडिया भी इसके खौफ से अछूता नहीं रहा है

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
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महामारी बन चुके कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अफरा-तफरी मचा दी है। हाल ये है कि ग्लोबल स्तर पर प्रिंट मीडिया भी इसके खौफ से अछूता नहीं रहा है। ऐसे में प्रसिद्ध अमेरिकी मैगजीन ‘प्लेब्वॉय’ (Playboy) से एक बड़ी खबर सामने आई है। ‘प्लेब्वॉय’ ने प्रिंट प्रकाशन बंद करने के करीब तीने महीने बाद ही अब अपने एडिटोरियल स्टाफ के एक बड़े हिस्से को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वैसे बताया जा रहा है कि  मैगजीन ने अब अपने 25 एम्प्लॉयीज की छंटनी कर दी है।   

हालांकि ‘प्लेब्वॉय’ के एक प्रवक्ता ने कहा कि  66 साल बाद मार्च में प्रिंट पत्रिका बंद की गई थी और इस समय किसी भी तरह से छंटनी की कोई भी योजना नहीं बनाई गई थी। लेकिन मीडिया आउटलेट को इसमें बदलाव के लिए बहुत ज्यादा समय की जरूरत नहीं थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 25 एडिटोरियल स्टाफ की नौकरी गई है और ये उसके डिजिटल ऑपरेशन से जुड़े हुए थे। वैसे ये प्लेब्वॉय के संपादकीय कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि यह पहले से ही फ्रीलॉन्स जर्नलिस्ट के साथ काम करता है। पिछले कुछ सालों में इसने अपने एडिटोरियल स्टाफ को कम कर दिया है।

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Hindustan Times ने 27% एम्प्लॉयीज को दिखाया बाहर का रास्ता: सोर्स

सूत्रों का कहना है कि कुछ हफ्ते पहले सैलरी में कटौती की घोषणा के बाद ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) ने अब 130 एम्प्लॉयीज को बाहर का रास्ता दिखा दिया है

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2020
HT

कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण रोकथाम के लिए पूरा लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा है, जिसका सीधा असर तमाम इंडस्ट्री पर देखने को मिल रहा है। देश में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में मीडिया इंडस्ट्री भी इस संकट से अछूती नहीं है। सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कुछ हफ्ते पहले सैलरी में कटौती की घोषणा के बाद ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) ने अब 130 एम्प्लॉयीज को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बता दें कि निकाले गए एम्प्लॉयीज उसके सभी एडिशंस के एडिटोरियल, मार्केटिंग और सेल्स डिपार्टमेंट में शामिल हैं।

एक करीबी सूत्र ने बताया कि एचटी (HT) ने यह फैसला मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म McKinsey की सलाह पर लिया है, जिसके मुताबिक उसे कुल स्टाफ से 27 फीसदी कम करना है। ये 27 फीसदी एम्प्लॉयीज ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) और उसके बिजनेस न्यूजपेपर ‘मिंट’ (Mint) के हैं।

हालांकि हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media.com) ने जब इसकी पुष्टि के लिए HT के मैनेजमेंट से संपर्क साधा तो उन्होंने कर्मचारियों की छंटनी की खबरों का खंडन किया है।

 

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पाठकों को पढ़ने को नहीं मिलेंगे अब ये दो बड़े अखबार

एक अखबार ने अपना कामकाज बंद कर दिया है, जबकि दूसरा अखबार एक जून को बंद हो जाएगा

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2020
Newspapers

‘सकाल मीडिया ग्रुप’ (Sakal Media Group) अपने अखबार ‘सकाल टाइम्स’ (Sakal Times)  और ‘गोमांतक टाइम्स’ (Gomantak Times) को बंद करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुणे से निकलने वाले अंग्रेजी अखबार ‘सकाल टाइम्स’ का आखिरी एडिशन 27 मई को निकाला गया जबकि गोवा से निकलने वाले ‘गोमांतक टाइम्स’ का आखिरी एडिशन एक जून को पब्लिश होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कंपनी के पास इन दोनों अखबारों के डिजिटल एडिशन जारी रखने की भी कोई योजना नहीं है। बताया जाता है कि लॉकडाउन के बाद से दोनों अखबारों के एंप्लाईज की सैलरी में भी कटौती कर दी गई थी। एडिटोरियल डिपार्टमेंट में कई पत्रकारों की नौकरी जाने के साथ ही मराठी डिवीजन के सहयोग से यहां का कामकाज चलाया जा रहा था।  

बता दें कि ‘सकाल टाइम्स’ की शुरुआत मई 2008 में हुई थी, जबकि  ‘गोमांतक टाइम्स’ वर्ष 1986 में गोवा में शुरू हुआ था और इसे वर्ष 2000 में सकाल पेपर्स ने टेकओवर कर लिया था।

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HT की नेशनल एडिटर पद्मा राव ने संस्थान को कहा अलविदा, बताई ये वजह

अंग्रेजी अखबार ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) की नेशनल एडिटर पद्मा राव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी घोषणा की है।

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
Padma Rao

अंग्रेजी अखबार ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) की नेशनल एडिटर पद्मा राव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी घोषणा की है। इस पोस्ट में पद्मा राव ने स्पष्ट किया है कि उन्हें कंपनी द्वारा हटाया नहीं गया है।

सोशल मीडिया पर की गई अपनी पोस्ट में राव ने बताया है कि वह एक ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन के साथ दिल्ली में एक इंटरनेशनल एडिटोरियल असाइनमेंट संभालने जा रही हैं।

पद्मा राव की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के अनुसार, ‘एचटी ने कल कथित तौर पर कई लोगों को हटा दिया है (यदि यह सही है तो यह काफी बुरा है, लेकिन इस बारे में सिर्फ वॉट्सऐप पर उड़ती हुई खबरें आ रही है और मुझे इस बारे में कहीं से कोई पुष्टि नहीं हुई है)। हालांकि, मैं आपको बता दूं कि मुझे हटाया नहीं गया है। मैंने पिछले हफ्ते खुद ही एचटी से इस्तीफा दे दिया था और एक जून से मैं नई पारी शुरू करने जा रही हूं। मैं एक ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन के साथ दिल्ली में एक इंटरनेशनल एडिटोरियल असाइनमेंट संभालने जा रही हूं। यह नौकरी एक महीने पहले ही फाइनल हो गई थी और मैं अपना इस्तीफा सौंपने से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी होने का इंतजार कर रही थी। मैं एचटी को बहुत भारी मन से छोड़ रही हूं। मुझे अपनी नई नौकरी को काफी चुनौतीपूर्ण और रोमांचक होने की उम्मीद है। आपको इस बारे में जल्द ही और जानकारी मिल जाएगी।’

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कोरोना ने छीन ली ‘नईदुनिया’ अखबार के प्रबंध संपादक राजेन्द्र तिवारी की जिंदगी

हिंदी दैनिक अखबार ‘नईदुनिया’ से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि इस महामारी की चपेट में आकर अखबार के प्रबंध संपादक राजेन्द्र तिवारी का निधन हो गया है

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
rajendra-tiwari

कोरोना की कवरेज में अहम भूमिका निभा रहे हिंदी दैनिक अखबार ‘नईदुनिया’ से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि इस महामारी की चपेट में आकर वरिष्ठ पत्रकार व अखबार के प्रबंध संपादक राजेन्द्र तिवारी का निधन हो गया है। वे 82 वर्ष के थे। मिली जानकारी के मुताबिक, राजेन्द्र तिवारी भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे। कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे पिछले 4 दिनों से वेंटिलेटर पर थे।

बताया जा रहा है कि उनकी किडनी और लंग्स ने काम करना बंद कर दिया था, जिसके बाद आज (बुधवार) सुबह 8 बजे अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

बता दें कि ‘नईदुनिया’ इंदौर से बंटवारे के तहत भोपाल में दैनिक ‘नईदुनिया’ का मालिकाना हक नरेन्द्र तिवारी जी के बेटे राजेन्द्र तिवारी को मिला था। 1994 से वे लगातार भोपाल में दैनिक ‘नईदुनिया’ का प्रकाशन व संपादन कर रहे थे। वे अपने पीछे पुत्र अपूर्व तिवारी को छोड़ गए हैं। बुधवार दोपहर 12:30 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया।

राजेन्द्र तिवारी के निधन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पहले नईदुनिया इंदौर और बाद में वर्ष 1991 से भोपाल से दैनिक नईदुनिया के प्रकाशन में श्री राजेन्द्र तिवारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मध्यप्रदेश की हिंदी पत्रकारिता में श्री राजेन्द्र तिवारी द्वारा दी गई सेवाएं स्मरणीय रहेंगी। वहीं मुख्यमंत्री ने स्व. राजेंद्र तिवारी की आत्मा की शांति और शोकाकुल तिवारी परिवार को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

 

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