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इस अखबार की नजर में मक्खन जैसी हैं गाजियाबाद की सड़कें, आप क्या कहते हैं?

सोशल मीडिया पर सीएम साहब को हकीकत और छलावे के बीच का अंतर समझा रहे हैं लोग

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर आपकी गाड़ी भले ही हिचकोले खाती चल रही हो, लेकिन सरकार की नजर में सबकुछ ठीक है। वैसे बदहाल सड़कों को ‘खुशहाल’ बताने में मीडिया भी पीछे नहीं है। उसे भी लगता है कि सपा का ‘उत्तम प्रदेश’ योगीराज में ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ बन गया है। हालांकि, पूरा का पूरा मीडिया आंख बंद करके एक दिशा में दौड़ा जा रहा है, ऐसा भी नहीं है। कुछ को सड़कों के गड्ढे भी दिखते हैं, लेकिन सरकार उन्हें देखना नहीं चाहती।

फिलहाल सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय द्वारा किए गए एक ट्वीट को लेकर चर्चा चल रही है। वैसे इसे चर्चा से ज्यादा कटाक्ष कहना बेहतर होगा, क्योंकि लोग सीएम साहब को हकीकत और छलावे के बीच का अंतर समझा रहे हैं। अब आपको भी यह सवाल बेचैन कर रहा होगा कि आखिर हमारे सीएम साहब ने ऐसा क्या लिख दिया। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार सड़कों को गड्ढों से शत प्रतिशत मुक्त करने के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है, झटका लगा क्या? कुछ ऐसा ही झटका सोशल मीडिया यूजर्स को लगा, जब उन्होंने सीएम ऑफिस का वह ट्वीट पढ़ा, जिसमें लिखा था, ‘सूबे की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के अभियान में मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी शत प्रतिशत सफल रहे हैं। एक तरह से सूबे के विकास का यह एक ऐसा फेस है, जिससे लगता है कि उत्तर प्रदेश की बराबरी में और कौन होगा’।

इस झटके की तीव्रता तब और बढ़ गई, जब ट्वीट के साथ पोस्ट किये गए एक अखबार की कटिंग पर नजर गई। अखबार का नाम है दैनिक ‘हिंट’, जो सरकार को पसंद आने वाले शब्दों में यह बयां कर रहा है कि सूबे खासकर गाजियाबाद की सड़कें मक्खन जैसी हो गई हैं। ये संपादकीय अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने लिखा है।

दैनिक ‘हिंट’ में छपे इस संपादकीय को आप यहां पढ़ सकते हैं-

संभव है अखबार ने जमीनी हकीकत जानी हो। उसके पत्रकारों ने गड्ढों वाली सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाई हों, तब इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया हो कि ‘सबकुछ ठीक’ है, लेकिन जनता को सबकुछ ठीक नहीं लग रहा। यही वजह है कि ट्विटर यूजर्स खबर लिखने वाले और सरकार के बाशिंदों को प्रदेश की सड़कों की असल स्थिति जानने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। क्या दोनों में से कोई यह चैलेंज लेगा? यह देखने वाली बात होगी।

अब जरा पढ़ लेते हैं कि लोगों को नाराज करने वाली खबर का मजमून आखिर है क्या। तो शंभूनाथ शुक्ल का पहले पेज पर प्रकाशित संपादकीय कहता है, ‘योगीजी ने जो कहा, किया...गाजियाबाद शहर में गलियों की वे सड़कें, जो वर्षों से टूटी-फूटी पड़ी थीं, और जिन पर इतने खड्डे थे कि दिन में भी लोग गिरते-पड़ते चल पाते थे, वे सब अपने योगीजी कि कृपा से ऐसी हो गई हैं कि अब लोग उन पर फर्राटा भरते हुए निकलते हैं।’ वैसे, सरकार की तारीफ यहीं खत्म नहीं होती और भी बहुत कुछ कहा गया है, लेकिन सार समझने के लिए इतना काफी है।

गाजियाबाद से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘हिंट’ का यह तारीफी संदेश बदहाल सड़कों की मार झेल रहे लोगों को कुछ ऐसा लगा, जैसे-अपने फिसल जाने पर खिलखिलाकर हंसते दूसरों को देखकर लगता है। लिहाजा, उन्होंने भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने केवल शब्दबाण ही नहीं दागे, बल्कि साक्ष्य स्वरूप तस्वीरें भी चस्पा कीं, ताकि खबर लिखने वाले को भी समझ आ जाए कि जिन सड़कों की बातें कही गई हैं, वो न सपा के ‘उत्तम प्रदेश’ में थीं और न ही योगी के ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ में हैं।

अनगपाल सिंह नामक यूजर ने सीएम को टैग करते हुए लिखा है, ‘आपको झूठी जानकारी दी जा रही है। यदि हकीकत देखनी है तो एक बार गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के De-Notified709b हाईवे पर आएं। यहां आठ किलोमीटर टुकडे की हालत भयंकर बनी हुई है। हर तरफ गंदगी, अतिक्रमण, गड्डे, धूल-मिट्टी, ट्रैफिक जाम है।’

वहीं दिनेश यादव ने लिखा है, ‘आओ भाजपाइयों रायबरेली घुमाएं, शरीर के सारे बल निकल जाएंगे, इतने गड्ढे हैं, यही पता नही चलता कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।’ जिस पर कटाक्ष करते हुए ओंकार नाथ यादव ने ट्वीट दागा है, ‘भाई-जब गड्ढ़े का विकास हुआ तो तालाब बन गया' गड्ढा कहां रह गया? उसका तो तालाब नाम हो गया. योगी जी की बात मे सच्चाई हैँ! गड्ढा मुक्त सड़क’।

ये महज कुछ उदाहरण हैं कि किस तरह लोगों को दैनिक ‘हिंट’ का यह संपादकीय पसंद नहीं आया, जिसे अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने लिखा है। आम जनता के अलावा, राजनेताओं ने भी इस संपादकीय पर तीखे बाण चलाये। इस दौड़ में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह सबसे आगे रहे। आईपी सिंह ने सीएम कार्यालय के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘कैसा ‘ओछा’ अखबार चुना है @myogiadityanath जी को खुश करने के लिए। इस अखबार का संपादक भी इसे नहीं पढ़ता होगा। व्यक्ति नहीं तो सीएम पद की ही इज्जत रखते। मुख्यमंत्री का मजाक उनका ही आधिकारिक अकाउंट बना रहा है। बाकियों ने झूठ छापने से मना कर दिया?’

हालांकि, विरोध में अव्वल आने की जद्दोजहद में आईपी सिंह जिन शब्दों का प्रयोग कर बैठे, वो भी ट्विटर यूजर्स को नागवार गुजरे हैं। कई लोगों ने उन्हें भाषा पर संयम रखने की नसीहत दी है। 

 

 


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