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तमाम आंदोलनों से रूबरू कराती वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री की इस पुस्तक ने दी 'दस्तक'
नई दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (IIC) के मल्टीपरपज हॉल में बुधवार की शाम आयोजित एक कार्यक्रम में इस पुस्तक को लॉन्च किया गया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
वरिष्ठ पत्रकार और ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री की पुस्तक ‘आंदोलनजीवी’ (किसान संघर्ष और आजाद भारत के जन आंदोलन) ने मार्केट में दस्तक दे दी है। नई दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (IIC) के मल्टीपरपज हॉल में बुधवार की शाम आयोजित एक कार्यक्रम में इस पुस्तक को लॉन्च किया गया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद और ‘जदयू’ के प्रधान महासचिव केसी त्यागी, पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ राजनेता जनार्दन द्विवेदी और वरिष्ठ पत्रकार (पद्मश्री) आलोक मेहता विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद रहे। इसके अलावा देश के कई प्रमुख आंदोलनों में अहम भूमिका निभा चुके डॉ. सत्येंद्र सिंह और रण सिंह आर्य भी मंचासीन अतिथियों में शामिल रहे। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था, लेकिन किन्हीं कारणोंवश वह नहीं आ सके।
‘पाखी’ पब्लिशिंग हाउस की ओर से प्रकाशित 'आंदोलनजीवी' की लॉन्चिंग के मौके पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए पुस्तक के लेखक विनोद अग्निहोत्री का कहना था कि यह पुस्तक देश में किसानों के आंदोलन की एक लंबी यात्रा का वृतांत प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का शीर्षक तमाम किसानों के उन संघर्षों के प्रति समर्पित है, जो देश की आजादी के बाद से अब तक हुए हैं। पुस्तक में हाल ही में हुए किसान आंदोलन की कहानी भी शामिल है। उन्होंने इस पुस्तक को लिखने का श्रेय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने सहयोगी रहे वरिष्ठ पत्रकारों और धर्मपत्नी अंजू पांडेय अग्निहोत्री को दिया।
'आंदोलनजीवी' का विमोचन करने के अवसर पर डॉ. मुरलीमनोहर जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल समझ आधारित उद्योगों का विकास हो रहा है, लेकिन कृषि पीछे छूट रही है। उन्होंने लोगों को सचेत करते हुए कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति से केवल देश ही नहीं, दुनिया के क़ई हिस्सों पर अस्तित्व का संकट मंडरा सकता है, इसलिए समय रहते हुए इसकी गंभीरता को समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को सम्मान दिए बिना किसी देश की व्यवस्था सुदृढ़ नहीं रह सकती।
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि अपने पत्रकारिता और राजनीतिक जीवन में उन्होंने स्वयं कई आंदोलन किए हैं, लिहाजा इस तरह के आंदोलनों के महत्व को वह समझते हैं। उन्होंने कहा कि आज देश के कुछ पत्रकार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के भी विरोध में आ गए हैं, लेकिन यह किसानों के लिए दुर्भाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि जब तक इस देश में आंदोलनजीवी रहेंगे, तब तक देश का लोकतंत्र जीवित रहेगा।
इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी का कहना था कि देश में हुए किसान आंदोलनों पर आंदोलनजीवी एक बेहतरीन पुस्तक है। इसे परिपक्व अनुभव के साथ बेहद उत्साह के साथ लिखा गया है। पुस्तक के शीर्षक कारण कई बार आंदोलनों के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की अपेक्षित चर्चा से छूट जाने का खतरा रहता है, लेकिन इससे आंदोलनों के चित्रण पर कोई असर नहीं पड़ा है और यही पुस्तक की सफलता है। उन्होंने कहा कि देश के कई अन्य महत्वपूर्ण आंदोलनों पर भी विस्तार के साथ लिखा जाना चाहिए।
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि देश ने आजादी से लेकर अब तक कई बड़े आंदोलन देखे हैं, इसके बाद भी देश के किसानों की समस्याओं का अंत नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि तमाम आंदोलनों के नाम पर कुछ लोग अपना लाभ उठाने की कोशिश करते आए हैं, आंदोलनजीवी जैसी पुस्तकों में इन लोगों के बारे में भी लिखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन ‘पाखी’ पब्लिशिंग हाउस की मुख्य कार्यकारी अधिकारी शोभा अक्षर ने किया। इस मौके पर भाजपा नेता वरुण गांधी, वरिष्ठ पत्रकार अकु श्रीवास्तव, आशुतोष और संतोष भारतीय समेत तमाम गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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