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भारत-अरब के संबंधों को और मजबूती देती अमर हसन की इस किताब का हुआ विमोचन
‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (ICCR) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया इस किताब का विमोचन
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (ICCR) की ओर से अमर हसन द्वारा अरबी भाषा में अनुवादित किताब ‘मजमा उल बहरीन ऑफ दारा शिकोह’ (Majma Ul Bahrain Of Dara Shikoh) का नौ सितंबर को विमोचन किया गया। नई दिल्ली स्थित ‘ICCR’ के आजाद भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस किताब का विमोचन किया।
‘ICCR’ के प्रेजिडेंट डॉ. बिनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में नेपाल के प्रसिद्ध गजल गायक आनंद कार्की के गीत ‘अतुल्य भारत देश मेरा’ का विमोचन भी किया गया। ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के तहत इस गीत का विमोचन करते हुए उपराष्ट्रपति ने दारा शिकोह को प्रतिभाशाली, कुशल कवि और संस्कृत विद्वान बताते हुए कहा कि वह सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता के प्रणेता थे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के पास दूसरों के विचारों के लिए ‘सहिष्णुता’ की एक शानदार विरासत है और एक ऐसी संस्कृति है जो बहुलवाद और समन्वयवाद का प्रतीक है। यह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए हमेशा प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक से लेकर मुगल प्रिंस दारा शिकोह तक के भारतीय शासकों ने भारत में सहिष्णुता की संस्कृति का अनुकरण किया।
उन्होंने कहा कि दारा शिकोह ने विभिन्न धर्मों के बीच संवाद को बेहतर बनाने का प्रयास किया और अपनी विरासत को पुनर्जीवित करने और सामाजिक एकता के लिए अपने आध्यात्मिक विचार को लागू करने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति का कहना था कि भारत ने हमेशा 'वसुधैव कुटुम्बकम' के सिद्धांत में विश्वास किया है, जिसका शाब्दिक अर्थ है कि दुनिया एक परिवार है।
इस बारे में अमर हसन ने बताया कि यह किताब पहली बार वर्ष 1655 में प्रकाशित हुई थी। फारसी भाषा में लिखी यह पुस्तक मुगल राजकुमार दारा शिकोह द्वारा किए गए नौ वर्षों के गहन शोध और अध्ययन का परिणाम थी। इस पुस्तक में हिंदू धर्म (वेदांत) और इस्लाम (सूफीवाद) के विश्वास की तुलना की गई है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को अरबी भाषा में अनुवादित करने का मुख्य उद्देश्य अरब पाठकों को भारत की बेहतर समझ बनाने में मदद करने का एक प्रयास है। इस प्रकार इस पुस्तक का भारत और अरब के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में योगदान देने का लक्ष्य है।
कार्यक्रम में ‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ के डीजी कुमार तुहिन समेत तमाम गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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