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दो हजार की चपत, खा गई थोड़ी गलती
इस कविता के माध्यम से कवि ने बताया है कि कार में सीट बेल्ट न लगाने का किस तरह खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
डॉ. राजेन्द्र मिलन, वरिष्ठ साहित्यकार और कवि।।
गलती पर गलती हुई, कल परसों की बात।
भरतदीप के साथ हम, होन लगी बरसात।
होन लगी बरसात, समय पर हमें पहुंचना।
बैठ चला दी कार, बेल्ट का भूले कसने।
चार कदम न चले, रोक ली गाड़ी चलती।
दो हजार की चपत, खा गई थोड़ी गलती।
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