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क्यों हताश है, निराश है क्यों?
कवि ने इस कविता के द्वारा निराशा के भंवर से निकलकर आगे बढ़ने और जीवन में सफलता पाने के लिए प्रेरित किया है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
उधव कृष्ण, स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक।।
क्यों हताश है, निराश है क्यों?
चिन्ता क्यों तुझे घेरे है?
निराश जीवन में अंधियारा क्यों बिखेरे है?
चिंता को चिता पर रख दे, निराशा को रख जूते की नोंक पर!
जाग....! काम, क्रोध, मोह, त्याग!
ज्ञान का सूर्य उदय कर,
निराशा और चिन्ता को विजय कर।
खिल कर प्रकाश दे, जीवन को सदमार्ग दे!
बना रास्ता खुद का और चल उस पर
पथिक अविचल, अडिग, निर्भय होकर!
सारा अंधियारा छट जाएगा,
जीवन सरस बन जायेगा।
निराशा चिन्ता का जब क्षय होगा,
जीवन मे विजय ही विजय होगा..
मार्ग में जब तू चलेगा दुश्मन देख तुझे डरेगा!
ऐसा कुछ कमाल कर जीवन को इंकलाब कर!
आग में तप कर खुद को रौशन अपने आप कर।
गिरने से क्यों डरता है! उठ कर फिर प्रयास कर,
दीपक बन, प्रकाश कर,
दीपक बन,प्रकाश कर!
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