अरुणा ने बताया कि एमेजॉन का हिस्सा बन चुका MX प्लेयर इस स्केल का इस्तेमाल ब्रैंड्स को पारंपरिक मेट्रिक्स से आगे ले जाने में कर रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली में आयोजित Pitch CMO Summit के मंच से एमेजॉन MX प्लेयर की डायरेक्टर व टेक एंड मार्केटिंग (प्रोडक्ट) की हेड अरुणा दर्यानानी ने कहा, “स्ट्रीमिंग अब सिर्फ एक आदत नहीं रही। 83% इंटरनेट यूजर्स डिजिटल वीडियो कंटेंट देख रहे हैं। यह प्रवृत्ति केवल शहरी नहीं, बल्कि मेट्रो, टियर 1, टियर 2 और ग्रामीण क्षेत्रों तक फैली हुई है।”
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने एक सवाल से की जिसने तुरंत श्रोताओं का ध्यान खींचा:“आपको पिछले एक दिन, एक हफ्ते या एक महीने में देखे गए कितने विज्ञापन याद हैं?” इस प्रश्न के जरिए उन्होंने इस ओर इशारा किया कि आज उपभोक्ताओं पर कंटेंट की इतनी बमबारी है कि ब्रैंड रिकॉल और यादगार बने रहना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
यहां स्ट्रीमिंग एक निर्णायक भूमिका निभा सकती है। अरुणा ने बताया कि एमेजॉन का हिस्सा बन चुका MX प्लेयर इस स्केल का इस्तेमाल ब्रैंड्स को पारंपरिक मेट्रिक्स से आगे ले जाने में कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे 25 करोड़ यूनिक मंथली यूजर्स हैं और हमारा सिद्धांत है- Big Shows, Bigger Reach” उन्होंने बताया कि उनका सुपरहिट शो ‘आश्रम’ अब तक 280 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
MX प्लेयर अब एमेजॉन के रिच शॉपर इनसाइट्स के साथ मिलकर, डेमोग्राफिक और साइकोग्राफिक डेटा से आगे बढ़ चुका है। अरुणा ने कहा, “शॉपिंग सिग्नल्स आपको बताते हैं कि आपके यूजर वास्तव में किन चीजों की परवाह करते हैं।'' उन्होंने यह भी बताया कि शॉपिंग बिहेवियर पर आधारित विज्ञापन टार्गेटिंग से 33% ज्यादा क्लिक-थ्रू रेट और 20% बेहतर मैसेज एसोसिएशन देखने को मिली है।
उन्होंने मोबाइल-फर्स्ट दर्शकों के लिए डिजाइन किए गए कुछ इंडस्ट्री-फर्स्ट ऐड फॉर्मैट्स भी पेश किए। एक खास फॉर्मैट में ऊपर वीडियो ऐड चलता है और नीचे एमेजॉन का लैंडिंग पेज खुलता है, जिससे यूजर ऐड के दौरान ही प्रोडक्ट से इंटरैक्ट कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “इससे एंगेजमेंट और रिकॉल दोनों बढ़ते हैं।”
उन्होंने Mama Earth के विटामिन C सनस्क्रीन विज्ञापन का उदाहरण दिया जहां “स्क्रीन से संतरे बाहर आते नजर आते हैं” और Hero के कैंपेन की बात की जिसमें ब्रैंड वैल्यूज को कहानी में गहराई से पिरोया गया।
अरुणा ने कहा कि एमेजॉन MX प्लेयर का उद्देश्य सिर्फ रचनात्मक विज्ञापन दिखाना नहीं, बल्कि कहानी का हिस्सा बन जाना है। उन्होंने बताया कि यूजर रिसर्च के जरिए MX प्लेयर ऐसा कंटेंट क्यूरेट करता है जो भावनात्मक और थीमैटिक स्तर पर दर्शकों की जरूरतों को पूरा करे।
उन्होंने बताया, “उम्र चाहे कोई भी हो, हमारे यूजर कहते हैं- ‘जिंदगी तनावभरी है, कुछ मस्ती दिखाओ।” इसी दृष्टिकोण से MX Videsi और कोरियन ड्रामा की लोकप्रियता बढ़ी है, जिनका औसत वॉच टाइम 200 मिनट से ज्यादा है।
प्रेरणादायक कहानियां भी दर्शकों को खूब पसंद आती हैं। उन्होंने कहा, “फिजिक्सवाला’ और ‘हसलर्स’ जैसी रैग्स-टू-रिचेज कहानियों ने हमारे दर्शकों के दिल को छू लिया है।” MX प्लेयर इस साल 100 नए शोज लॉन्च कर रहा है- जो किसी भी भारतीय स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की अब तक की सबसे बड़ी प्रोग्रामिंग स्लेट है।
प्रस्तुति का एक और आकर्षण था “राइज एंड फॉल” नामक एक नया रियलिटी शो, जो इस फेस्टिव सीजन में लॉन्च होने जा रहा है। इस शो में अशनीर ग्रोवर गेम मास्टर की भूमिका में होंगे। शो में पेंटहाउस में रूलर और बेसमेंट में हसलर्स होंगे- यह समाज की असलियत और जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।
अरुणा ने मुस्कराते हुए कहा, “इससे बेहतर इसे कौन पेश कर सकता है अगर अशनीर ग्रोवर नहीं।”
उन्होंने यह भी बताया कि सही समय पर सही कंटेंट देना बेहद जरूरी है। MX प्लेयर अपने बड़े शो एमेजॉन की सेल इवेंट्स के साथ सिंक करता है, जिससे ब्रैंड्स कंटेंट से अवेयरनेस बनाते हैं और एमेजॉन के ई-कॉमर्स ऐड्स के जरिए उसे कन्वर्जन में बदलते हैं।
यह एक फुल-फनल स्ट्रैटेजी है (अवेयरनेस से लेकर परचेज तक) एकीकृत प्लेटफॉर्म पर।
अपने समापन में अरुणा ने ब्रैंड्स को यह सोचने को प्रेरित किया कि एमेजॉन MX प्लेयर सिर्फ ऐड चलाने का जरिया नहीं, बल्कि एक रचनात्मक मंच है, जहां ब्रैंड्स मजबूत कहानियों और गहरी उपभोक्ता कनेक्टिविटी का निर्माण कर सकते हैं।
एमेजॉन ने अपने Prime Video के ‘Shop the Show’ फीचर का विस्तार किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एमेजॉन ने अपने Prime Video के ‘Shop the Show’ फीचर का विस्तार किया है। अब दर्शकों को फिल्म, वेब सीरीज या लाइव स्पोर्ट्स देखते समय स्क्रीन पर नजर आने वाले पसंदीदा प्रोडक्ट्स को खोजने और खरीदने के ज्यादा विकल्प मिलेंगे। कंपनी ने यह सुविधा पिछले साल शुरू की थी, जो उस समय करीब 1,300 टाइटल्स तक सीमित थी। अब यह सुविधा अमेरिका में 8,000 से ज्यादा टाइटल्स तक पहुंच गई है। इसमें Prime Originals, लाइसेंस प्राप्त कंटेंट और लाइव स्पोर्ट्स भी शामिल हैं।
इस विस्तार के साथ एमेजॉन ने दो नए फीचर पेश किए हैं—Shop Tab और Shop the Scene। Shop Tab को Prime Video के X-Ray फीचर में जोड़ा गया है। X-Ray में पहले से ही कलाकारों, ट्रिविया और म्यूजिक जैसी जानकारी मिलती है। अब इसमें Shop का विकल्प भी दिखाई देगा।
अमेरिका में सपोर्टेड डिवाइस पर दर्शक शो या फिल्म देखते समय रिमोट का ‘Up’ बटन दबाकर Shop Tab खोल सकते हैं। यहां उन्हें स्क्रीन पर चल रहे कंटेंट से जुड़े प्रोडक्ट्स देखने का विकल्प मिलेगा।
इसके बाद दर्शक Amazon Shopping App खोल सकते हैं। ऐप स्क्रीन पर चल रहे कंटेंट को पहचानकर उसी सीन से जुड़े प्रोडक्ट्स की फीड दिखाएगा। खरीदारी का पूरा काम मोबाइल फोन पर किया जा सकेगा। दर्शक स्क्रीन पर दिखने वाले QR Code को स्कैन करके या Amazon App में ‘Shop the Show’ सर्च करके भी इस सुविधा तक पहुंच सकते हैं।
यह सुविधा अपने आप काम करने के लिए टीवी या दूसरे लिविंग-रूम डिवाइस और Amazon Shopping App में एक ही Amazon अकाउंट से साइन इन होना जरूरी है।
एमेजॉन ने इसके साथ Shop the Scene फीचर भी शुरू किया है। इसके जरिए दर्शक स्क्रीन पर दिखाई देने वाले किसी खास प्रोडक्ट को पहचानकर उसके जैसे प्रोडक्ट खोज सकते हैं। इसके लिए एमेजॉन की Amazon Lens तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
यह तकनीक किसी सीन में नजर आने वाले कपड़ों, घर की सजावट और दूसरी चीजों को पहचानकर Amazon Shopping App में उनसे मिलते-जुलते प्रोडक्ट दिखा सकती है। फिलहाल अमेरिका में iOS और Android के Amazon Shopping App पर 600 से ज्यादा टाइटल्स में Shop the Scene उपलब्ध है।
उदाहरण के तौर पर, Off Campus देखते समय अगर किसी दर्शक को Hannah द्वारा पहना गया स्वेटर पसंद आता है, तो वह Amazon Shopping App खोलकर शो के स्टोरफ्रंट पर जा सकता है। वहां उस तस्वीर पर टैप करने के बाद Amazon Lens उस स्वेटर से मिलते-जुलते प्रोडक्ट्स दिखा सकता है। दर्शक पसंद आने वाले प्रोडक्ट को कार्ट में जोड़कर फिर से अपना कार्यक्रम देखना जारी रख सकता है।
Prime Video Shopping की वाइस प्रेसिडेंट Michelle Rothman ने कहा कि कंपनी ने देखा है कि ग्राहक अपने पसंदीदा कंटेंट से प्रेरित प्रोडक्ट्स को खोजने में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। नए विस्तार का उद्देश्य प्रोडक्ट खोजने से लेकर उसकी खरीदारी तक की प्रक्रिया को और आसान बनाना है।
Amazon का यह कदम मनोरंजन और ई-कॉमर्स को और करीब लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। अब दर्शक स्क्रीन पर किसी चीज को पसंद करने के बाद उसे खोजने और खरीदने के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया अपनाने के बजाय सीधे Amazon के शॉपिंग अनुभव का इस्तेमाल कर सकेंगे।
भारत में पिछले करीब एक दशक से OTT की लड़ाई काफी हद तक छोटे पर्दे यानी मोबाइल स्क्रीन पर लड़ी जाती रही है। ऐप्स को इस तरह तैयार किया गया कि एक व्यक्ति अपनी पसंद के हिसाब से कंटेंट देख सके।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में पिछले करीब एक दशक से OTT की लड़ाई काफी हद तक छोटे पर्दे यानी मोबाइल स्क्रीन पर लड़ी जाती रही है। ऐप्स को इस तरह तैयार किया गया कि एक व्यक्ति अपनी पसंद के हिसाब से कंटेंट देख सके। मोबाइल पर स्क्रॉल करके कंटेंट ढूंढना और अलग-अलग दर्शक समूहों की पसंद के हिसाब से कंटेंट तैयार करना OTT प्लेटफॉर्म की रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। ऐसे में स्मार्टफोन स्ट्रीमिंग का सबसे बड़ा जरिया बन गया।
लेकिन अब भारत में स्ट्रीमिंग की अगली बड़ी लड़ाई बड़ी स्क्रीन पर होती दिखाई दे रही है। कनेक्टेड टीवी यानी इंटरनेट से जुड़ा टीवी तेजी से सिर्फ बड़े शहरों या संपन्न परिवारों तक सीमित नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे भारत में मनोरंजन देखने के एक बड़े तरीके के रूप में उभर रहा है। घर का टीवी अब डिजिटल हो रहा है, स्ट्रीमिंग ज्यादा सामूहिक अनुभव बन रही है और टीवी व OTT के बीच का अंतर भी लगातार कम हो रहा है।
इसी बदलाव के बीच ZEE5 का नया बदलाव खास नजर आता है। पहली नजर में यह प्लेटफॉर्म के पूरे प्रोडक्ट में किया गया बड़ा बदलाव है। ZEE5 ने मोबाइल और कनेक्टेड टीवी दोनों के लिए अपने अनुभव को नए तरीके से डिजाइन किया है। इसमें बेहतर पर्सनलाइजेशन, AI की मदद से कंटेंट खोजने की सुविधा, बेहतर विजुअल नेविगेशन और ज्यादा साफ व तेज इंटरफेस शामिल है।
लेकिन थोड़ा करीब से देखें तो इसमें एक बड़ी रणनीति भी नजर आती है। ZEE5 अब खुद को सिर्फ एक व्यक्ति के लिए बने OTT प्लेटफॉर्म के तौर पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार के मनोरंजन के प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार करता दिख रहा है।
कनेक्टेड टीवी पर खास फोकस
ZEE5 के नए बदलाव की चर्चा में मोबाइल अनुभव पर काफी ध्यान जाना स्वाभाविक है, लेकिन कनेक्टेड टीवी पर किया गया बदलाव शायद इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। नया CTV इंटरफेस ऐसा लगता है कि इसे खास तौर पर बड़ी स्क्रीन के लिए बनाया गया है, न कि मोबाइल वाले प्रोडक्ट को टीवी पर दिखाने के लिए। कंटेंट की तस्वीरें बड़ी और ज्यादा आकर्षक हैं। नेविगेशन को ज्यादा आसान और विजुअल बनाया गया है। कैटेगरी को दूर से टीवी स्क्रीन पर भी आसानी से समझा जा सकता है और कंटेंट खोजने के लिए कम कदम उठाने पड़ते हैं।
इस अनुभव में बड़ी स्क्रीन की जरूरत के मुताबिक विजुअल क्वालिटी और स्केल है, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिलने वाली पर्सनलाइजेशन की सुविधा भी बरकरार रहती है। यह अंतर काफी महत्वपूर्ण है। मोबाइल आमतौर पर एक व्यक्ति का निजी डिवाइस होता है, लेकिन टीवी ऐसा नहीं है।
भारत के किसी घर में एक ही टीवी पर दोपहर में सात साल का बच्चा कार्टून देख सकता है। माता-पिता अपना पसंदीदा टीवी शो देख सकते हैं। कोई युवा अंग्रेजी फिल्म या Korean drama देख सकता है और शाम को पूरा परिवार फिल्म, मनोरंजन कार्यक्रम या किसी बड़े खेल आयोजन के लिए एक साथ टीवी के सामने बैठ सकता है। यानी एक स्क्रीन पर अलग-अलग उम्र और पसंद के लोगों की जरूरतें पूरी करनी होती हैं।
शायद यही वजह है कि ZEE5 ने अपने नए प्रोडक्ट में कंटेंट को पांच अलग-अलग मनोरंजन यूनिवर्स में बांटा है- Premium एंटरटेनमेंट, Free 5, KidZ, TV और स्पोर्ट्स। मोबाइल पर इससे कंटेंट खोजना आसान होता है, लेकिन कनेक्टेड टीवी पर इसका असर और ज्यादा हो सकता है, क्योंकि यह उस तरह से मेल खाता है जैसे भारतीय परिवार वास्तव में मनोरंजन देखते हैं।
कनेक्टेड टीवी अब सिर्फ बड़े शहरों की कहानी नहीं
ZEE5 का यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत में कनेक्टेड टीवी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अब इसकी अगली ग्रोथ सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है। Smart TV, सस्ता ब्रॉडबैंड और स्ट्रीमिंग की बढ़ती पहुंच के कारण कनेक्टेड टीवी Tier 1 और Tier 2 शहरों तक भी पहुंच रहा है। इसके साथ ही Free और ad-supported स्ट्रीमिंग भी उन परिवारों के लिए डिजिटल मनोरंजन का एक रास्ता बन रही है, जो पारंपरिक टीवी से डिजिटल देखने की ओर बढ़ रहे हैं।
ऐसे में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के लिए मुकाबले का मतलब भी बदल रहा है। लड़ाई अब सिर्फ इस बात की नहीं है कि ग्राहक के मोबाइल में कौन सा OTT ऐप मौजूद है। अब यह भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि टीवी ऑन करने के बाद कोई परिवार सबसे पहले कौन सा ऐप खोलता है।
ZEE5 इस बदलाव को समझता हुआ दिखाई देता है। कनेक्टेड टीवी पर उसका निवेश बताता है कि वह महानगरों के साथ-साथ Tier 1 और Tier 2 शहरों में बढ़ रहे कनेक्टेड परिवारों के बीच भी घर की स्क्रीन पर ज्यादा जगह बनाना चाहता है।
इसके कंटेंट की व्यापकता भी इसी रणनीति से जुड़ी दिखाई देती है। प्लेटफॉर्म पर सात भाषाओं में Premium Content, टेलीविजन कंटेंट, बच्चों के लिए मनोरंजन, स्पोर्ट्स, English Films, Korean और Chinese Dramas, Anime, Free एंटरटेनमेंट, News और Creators से जुड़ा कंटेंट शामिल है। इस तरह ZEE5 सिर्फ एक सामान्य OTT सेवा की तरह नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए डिजिटल मनोरंजन की जगह बनने की कोशिश करता दिखाई देता है।
पांच मनोरंजन यूनिवर्स, एक परिवार
एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्य ZEE5 का इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से कर सकते हैं। कोई Premium Hindi Web Series देख सकता है। कोई अपना पसंदीदा टीवी शो देख सकता है। बच्चा KidZ में जाकर Cartoon और Animation देख सकता है। कोई Korean Content या Anime देख सकता है। English Film पसंद करने वाले दर्शक के लिए भी अलग कंटेंट मौजूद है।
वहीं, जब कोई बड़ा स्पोर्ट्स Event होता है तो यही स्क्रीन पूरे परिवार के लिए साझा मनोरंजन का जरिया बन सकती है। यह रणनीति उस OTT मॉडल से काफी अलग है जिसमें किसी एक Genre या किसी खास Audience Segment को ध्यान में रखकर प्लेटफॉर्म तैयार किया जाता है।
इससे सब्सक्रिप्शन की वैल्यू को देखने का तरीका भी बदल सकता है। सवाल सिर्फ यह नहीं रह जाता कि एक व्यक्ति को देखने के लिए पर्याप्त कंटेंट मिल रहा है या नहीं। सवाल यह भी है कि क्या एक ही घर में रहने वाले अलग-अलग लोगों के पास प्लेटफॉर्म पर बार-बार लौटने की पर्याप्त वजह है।
इस नजरिए से ZEE5 के पांच एंटरटेनमेंट Universes सिर्फ Design का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह पूरे परिवार को ध्यान में रखकर बनाई गई रणनीति नजर आती है।
Free 5 से नए दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश
पूरी तरह से नए रूप में पेश किया गया Free 5 इस रणनीति में एक और अहम हिस्सा जोड़ता है। ZEE5 Free 5 को फिल्मों, सीरीज, Korean और Chinese Dramas, Anime, Micro Dramas, News और Creator Ecosystem जैसे कई तरह के मुफ्त मनोरंजन कंटेंट के साथ आगे बढ़ा रहा है।
इससे प्लेटफॉर्म को सब्सक्रिप्शन के बाहर भी नए दर्शकों तक पहुंचने का रास्ता मिलता है। कोई व्यक्ति बिना पैसे दिए ZEE5 पर आ सकता है, Free 5 के जरिए कंटेंट देख सकता है और धीरे-धीरे पूरे प्लेटफॉर्म से जुड़ सकता है।
कनेक्टेड टीवी पर यह अवसर और दिलचस्प हो जाता है। जैसे-जैसे Connected Screens भारत में बढ़ रही हैं, Free एंटरटेनमेंट पारंपरिक टीवी की आदत और OTT की पसंद के बीच एक पुल का काम कर सकता है।
Advertisers के लिए भी यह मॉडल महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इसमें घर की बड़ी स्क्रीन का असर डिजिटल प्लेटफॉर्म की Audience Segmentation और Addressability के साथ जुड़ता है।
English Content से एक और Audience को जोड़ने की कोशिश
ZEE5 अपने नए इंग्लिश कंटेंट स्लेट के जरिए एक अलग तरह के दर्शक वर्ग को भी जोड़ रहा है। प्लेटफॉर्म पर Global Cinema और Digital Premieres पेश किए जा रहे हैं, जिनमें Bob Odenkirk, Seth Rogen, Penélope Cruz, Edward Norton, Angelina Jolie, Jude Law, Glen Powell, Scarlett Johansson और Adam Driver जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकार शामिल हैं।
सात भारतीय भाषाओं में प्रीमियम कंटेंट और बड़े टीवी कंटेंट के साथ अंग्रेजी सिनेमा का जुड़ना घर के किसी दूसरे सदस्य के लिए भी ZEE5 खोलने की वजह बन सकता है। यहीं से पूरे परिवार वाली रणनीति और साफ दिखाई देती है।
जरूरी नहीं कि परिवार के सभी लोग एक ही कंटेंट देखें। कोशिश यह है कि परिवार के हर सदस्य को अपनी पसंद का कुछ न कुछ कंटेंट मिले। और जब मौका आए तो वही स्क्रीन पूरे परिवार को एक साथ भी जोड़ सके।
ज्यादा कंटेंट नहीं, आसान Discovery भी जरूरी
हालांकि सिर्फ कंटेंट की बड़ी संख्या काफी नहीं है। OTT प्लेटफॉर्म पिछले कई वर्षों में अपने Catalogue को लगातार बड़ा करते रहे हैं। लेकिन इसका एक असर यह भी हुआ है कि कई बार बहुत ज्यादा विकल्प दर्शकों के लिए परेशानी पैदा कर देते हैं। ज्यादा कंटेंट का मतलब कई बार ज्यादा स्क्रॉलिंग भी हो जाता है। यहीं ZEE5 का AI, Personalisation और Visual Discovery पर किया गया निवेश महत्वपूर्ण हो जाता है।
प्लेटफॉर्म के मुताबिक, नए डिजाइन को तैयार करने से पहले मोबाइल और कनेक्टेड टीवी दोनों पर Consumer Research की गई। इसमें यह समझने की कोशिश की गई कि दर्शक कंटेंट कैसे खोजते हैं, कैसे ब्राउज करते हैं और किस तरह उससे जुड़ते हैं।
नए अनुभव का फोकस ऐप खोलने और कंटेंट चलाने के बीच का समय और प्रक्रिया कम करने पर दिखाई देता है। सुनने में यह आसान लगता है, लेकिन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए यह लगातार चुनौती बनी हुई है।
अगर ZEE5 इतने बड़े कैटलॉग को बच्चे, टीवी देखने वाले दर्शक, Premium OTT Consumer और English Film Audience सभी के लिए आसान बना पाता है, तो यह सिर्फ इंटरफेस डिजाइन में बदलाव नहीं होगा। यह कंटेंट की जटिलता को आसान बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम हो सकता है।
OTT की लड़ाई अब एक अलग दिशा में
ZEE5 पहले से ही अपनी एंटरटेनमेंट Offering का दायरा बढ़ा रहा है। FIFA World Cup Rights हासिल करने से लेकर सात भाषाओं में कंटेंट स्लेट तैयार करने तक, प्लेटफॉर्म अपने एंटरटेनमेंट प्रपोजिशन को बड़ा कर रहा है। अब Redesigned App, नया English Slate और Revamped Free 5 इन सभी हिस्सों को एक ज्यादा स्पष्ट Ecosystem में लाते दिखाई देते हैं।
इस पूरे बदलाव की बड़ी तस्वीर यह है कि भारत में स्ट्रीमिंग ने पिछले कई वर्षों में दर्शकों को Genre, Language, Demographics और Individual Viewing Preferences के आधार पर अलग-अलग हिस्सों में बांटा है। ZEE5 अब इन्हीं अलग-अलग दर्शक समूहों को एक ही प्लेटफॉर्म पर वापस लाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोग एक ही कंटेंट देखें। रणनीति यह है कि एक ही घर में रहने वाले अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग एंटरटेनमेंट Worlds उपलब्ध हों।
मोबाइल इस रणनीति का अहम हिस्सा बना रहेगा, लेकिन कनेक्टेड टीवी में किया गया बड़ा निवेश बताता है कि भारतीय स्ट्रीमिंग की अगली महत्वपूर्ण लड़ाई घर के लिविंग रूम में भी लड़ी जाएगी।
अगर नया अनुभव किसी परिवार के एक सदस्य को वेब सीरीज, दूसरे को टेलीविजन, तीसरे को अंग्रेजी सिनेमा, बच्चे को कार्टूंस और पूरे परिवार को स्पोर्ट्स या फैमिल शो के लिए ZEE5 खोलने की वजह देता है, तो यह OTT में वैल्यू को देखने का तरीका बदल सकता है। यानी बात सिर्फ एक दर्शक के लिए एक सब्सक्रिप्शन की नहीं रह जाएगी, बल्कि पूरे परिवार के लिए एक एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम की होगी।
मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है। लोग घरों में बंद हुए और OTT प्लेटफॉर्म्स ने अपनी सबसे बड़ी छलांग लगाई। Netflix, Amazon Prime, Disney+ Hotstar, सब एकसाथ भारतीय दर्शकों के ड्रॉइंग रूम में घुस आए। जब थिएटर खुले, तो सवाल यह था कि क्या दर्शक वापस आएंगे? आंकड़े कहते हैं, हां, लेकिन पुरानी शर्तों पर नहीं।
थिएटर की वापसी: रिकॉर्ड तोड़ा, पर खाली कुर्सियां अभी भी बोल रही हैं
Ormax Media की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 भारतीय बॉक्स ऑफिस का अब तक का सबसे बड़ा साल रहा। कुल ग्रॉस बॉक्स ऑफिस ₹13,395 करोड़ रहा, यह इतिहास में पहली बार था जब भारतीय बॉक्स ऑफिस ₹13,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया और 2023 के ₹12,226 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। 37 फिल्में ₹100 करोड़ का क्लब पार कर गईं, जो 2024 की 22 फिल्मों से काफी ज्यादा थीं। 2026 में यह गति जारी है, जनवरी-मार्च 2026 में ₹3,440 करोड़ का बॉक्स ऑफिस दर्ज हुआ, जो 2025 की समान अवधि से 17% अधिक है।
तुलना के लिए देखें: 2024 में कुल बॉक्स ऑफिस ₹11,833 करोड़ था, जो 2023 (₹12,226 करोड़) के बाद दूसरा सबसे बड़ा साल था। 2019 (कोविड-पूर्व) में यह आंकड़ा ₹10,948 करोड़ था।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है। संख्याएं बड़ी दिखती हैं क्योंकि टिकट की कीमतें बढ़ी हैं। 2019 में औसत टिकट मूल्य (ATP) ₹106 था, 2024 में ₹134 और 2025 में यह ₹161 हो गया, यानी 2019 के मुकाबले 52% की बढ़ोतरी। लेकिन दर्शकों की संख्या (फुटफॉल) उलटी दिशा में गई। 2019 में 103 करोड़ दर्शक थिएटर पहुंचे थे, जो 2024 में 88.3 करोड़ और 2025 में घटकर 83.2 करोड़ रह गए, 2019 की तुलना में 19% की गिरावट।
भारत में कुल 10,033 स्क्रीन हैं (2025)। PVR INOX, देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन, 111 शहरों में 1,749 स्क्रीन संचालित करती है। सिंगल स्क्रीन थिएटर की हालत ज्यादा चिंताजनक है, हर साल करीब 150 सिंगल स्क्रीन बंद होते हैं, जबकि नए मल्टीप्लेक्स स्क्रीन जुड़ते रहते हैं।
OTT: उछाल के बाद परिपक्वता का दौर
कोविड के दौरान जो OTT क्रांति आई, वह 2025-26 में एक नए चरण में है, तेज ग्रोथ की जगह अब रणनीतिक विस्तार ने ली है।
JioHotstar, फरवरी 2025 में JioCinema और Disney+ Hotstar के विलय से बना यह प्लेटफॉर्म, IPL 2025 तक 30 करोड़ सब्सक्राइबर तक पहुंचा और मार्च 2026 तक MAU 55 करोड़ (550 मिलियन) हो गए। IPL 2026 ने नए रिकॉर्ड बनाए, ओपनिंग वीकेंड में ही 51.5 करोड़ दर्शकों तक रीच (reach) बनी, वॉच-टाइम 2025 के मुकाबले 26% बढ़ा, और लीग स्टेज के दौरान cumulative रीच 1.1 अरब पार कर गई (IPL 2025 की फाइनल रीच 1.19 अरब थी)। डिजिटल रीच 15%, CTV रीच 25% और रीजनल लैंग्वेज वॉच-टाइम 42% बढ़ा। JioHotstar का FY26 में परिचालन राजस्व ₹31,048 करोड़ और PBT ₹3,228 करोड़ रहा।
Amazon Prime Video के भारत में करीब 2.5-3 करोड़ पेड सब्सक्राइबर हैं। Netflix के भारत में 2 करोड़ (20 मिलियन) पेड सब्सक्राइबर हो गए हैं, जो 2021 के महज 55 लाख से काफी वृद्धि है। Netflix का भारत में राजस्व 2025 में $905 मिलियन (लगभग ₹7,600 करोड़) तक पहुंचने का HSBC का अनुमान था।
OTT का मुद्रीकरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। Ormax OTT Audience Report 2025 के अनुसार कुल OTT यूजर्स 60.1 करोड़ के पार हैं, लेकिन active paid subscriptions केवल 14.82 करोड़ हैं, बाकी बड़ी संख्या मुफ्त या विज्ञापन-सहित कंटेंट पर निर्भर है।
AVOD बनाम SVOD का संघर्ष अब और स्पष्ट है। Amazon Prime Video ने 2025 में भारत में विज्ञापन-सहित बेस प्लान शुरू किया। Statista के अनुसार भारत का OTT वीडियो बाजार 2026 में $4.96 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, और 2030 तक $6.76 अरब होने की संभावना है।
बड़ी फिल्में: थिएटर की असली लाइफलाइन
थिएटर बिजनेस का एक कड़वा सच यह है कि वह अब कुछ बड़ी इवेंट फिल्मों पर टिका है।
2024 की टॉप फिल्में: 'पुष्पा 2: द रूल' ₹1,403 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) के साथ सबसे बड़ी हिट रही। 'कल्कि 2898 AD' लगभग ₹758 करोड़ और 'स्त्री 2' ₹740 करोड़ डोमेस्टिक ग्रॉस पर रहीं।
2025 की टॉप फिल्में: 'धुरंधर' (₹950 करोड़) ने अब तक की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म का रिकॉर्ड बनाया, 'स्त्री 2' के ₹698 करोड़ के आंकड़े को पार करते हुए। 'कांतारा: ए लेजेंड चैप्टर 1' और 'छावा' भी ₹500 करोड़+ क्लब में रहीं। 'सैयारा', 'कूली' और एनिमेटेड फिल्म 'महावतार नरसिम्हा' ₹300 करोड़+ पर रहीं।
2026 की शुरुआत: 'धुरंधर: द रिवेंज' (मार्च 2026) ने ₹1,375 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) कमाकर हिंदी फिल्मों का नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया, वर्ल्डवाइड यह ₹1,813 करोड़ ($200 मिलियन+) तक पहुंची।
हिंदी सिनेमा के लिए उल्लेखनीय बात: 2025 में 93% हिंदी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मूल हिंदी फिल्मों से आया, डब दक्षिण भारतीय फिल्मों पर निर्भरता 31% (2024) से घटकर मात्र 7% रह गई।
मिड-बजट सिनेमा: OTT ने छीना, OTT ने दिया
20-80 करोड़ बजट वाली फिल्मों की कहानी सबसे दिलचस्प है। कोविड के बाद के कुछ वर्षों में OTT प्लेटफॉर्म्स ने इन फिल्मों के लिए "गारंटीड डील" दी, रिलीज से पहले ही पैसे मिल जाते थे। इससे निर्माता थिएटर रिलीज का जोखिम उठाने से बचने लगे।
लेकिन 2025 में पासा पलटा। OTT प्लेटफॉर्म्स अब ज्यादा सतर्क और चयनात्मक हो गए हैं। उन्होंने थिएटर-अप्रूव्ड फिल्मों को तरजीह देनी शुरू की है, जिसका मतलब है कि अच्छा थिएटरी प्रदर्शन OTT डील की कीमत बढ़ाता है। 'धुरंधर: द रिवेंज' जैसी फिल्म के डिजिटल अधिकार JioHotstar ने ₹150 करोड़ में खरीदे, जो पहली फिल्म से लगभग दोगुना था। यह बदलाव मिड-बजट फिल्मों को एक बार फिर थिएटर रिलीज की ओर धकेल रहा है।
थिएटरी विंडो: अदृश्य युद्ध जारी है
पहले फिल्में थिएटर में 8-12 हफ्ते रहती थीं। कोविड के बाद यह खिड़की सिकुड़ी। आज स्थिति यह है:
हिंदी फिल्में आम तौर पर 6-8 हफ्ते बाद OTT पर आती हैं, लेकिन कमजोर फिल्में कभी-कभी 4 हफ्ते में ही चली जाती हैं। तेलुगु और तमिल इंडस्ट्री में 3-4 हफ्ते की विंडो सामान्य हो चुकी है।
मल्टीप्लेक्स चेन्स इसका विरोध कर रही हैं। कई बड़े मल्टीप्लेक्स ने 8 हफ्ते से कम विंडो वाली फिल्मों को स्क्रीन देने से मना कर दिया। 'धुरंधर: द रिवेंज' IPL 2026 की समाप्ति के बाद (मई-जून 2026) JioHotstar पर आने का अनुमान है, यानी करीब 10 हफ्ते की थिएटरी विंडो।
थिएटर अब 'अनुभव' बेच रहे हैं
जब कंटेंट OTT पर मिलने लगा, तो थिएटर ने रणनीति बदली, वे अब सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि अनुभव बेचते हैं। IMAX ने भारत में फरवरी 2025 तक 31 स्क्रीन स्थापित किए हैं और 14 और आने वाले हैं। 4DX, रिक्लाइनर स्क्रीन, Premium Large Format (PLF), ये सब प्रीमियम टिकट के साथ F&B राजस्व बढ़ाने का तरीका हैं। PVR INOX अब फिल्म रिलीज से ज्यादा F&B और प्रीमियम फॉर्मेट से कमाई करने की ओर बढ़ रही है।
रीजनल सिनेमा: असली विजेता
अगर कोई सबसे ज्यादा फायदे में रहा, तो वह है रीजनल सिनेमा। 2024 में मलयालम सिनेमा ने पहली बार ₹1,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया और बाजार हिस्सेदारी 5% से दोगुनी होकर 10% हो गई; 2025 में यह गति बनी रही। कन्नड़ सिनेमा 2025 की एकमात्र दक्षिण भारतीय भाषा रही जिसने फुटफॉल में वृद्धि दर्ज की। गुजराती सिनेमा ने 2025 में 189% की वृद्धि के साथ ₹242 करोड़ का आंकड़ा छुआ।
OTT पर भी रीजनल कंटेंट की मांग बढ़ी है। JioHotstar और Netflix दोनों ही क्षेत्रीय भाषाओं में ओरिजिनल कंटेंट पर जोर दे रहे हैं। 'मंजुम्मेल बॉयज' (मलयालम), 'कांतारा', 'RRR' जैसी फिल्मों ने दिखाया कि भाषा अब बाधा नहीं है।
विज्ञापन बाजार: डिजिटल का बोलबाला
Ipsos के अनुसार, FY2025 में भारत का कुल विज्ञापन बाजार ₹1,11,000 करोड़ पार कर गया, जिसमें डिजिटल का हिस्सा ₹49,000 करोड़ (44% share) रहा, 20% की वार्षिक वृद्धि के साथ। FY2026 में यह 15% बढ़कर ₹56,400 करोड़ (कुल खर्च का 46%) तक पहुंचने का अनुमान है। CTV विज्ञापन खर्च 2022 के ₹450 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 2024 में ₹1,500 करोड़ हो गया, और 2025 में ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था, 2027 तक ₹3,500 करोड़ का लक्ष्य है।
थिएटर विज्ञापन भी धीरे-धीरे लौट रहे हैं, लेकिन डिजिटल की तुलना में उनका हिस्सा अभी बहुत कम है।
अब केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, साथ काम करने का दौर
2025-26 के आंकड़े एक स्पष्ट तस्वीर देते हैं, OTT और थिएटर अब एक-दूसरे के दुश्मन नहीं, बल्कि एक ही इकोसिस्टम के दो हिस्से हैं। बड़ी स्पेक्टेकल फिल्में थिएटर के लिए हैं, वहां बड़ा पर्दा, IMAX, 4DX, और सामूहिक अनुभव का कोई विकल्प नहीं। मिड-बजट और सीरीज कंटेंट OTT का प्राकृतिक घर बन रहा है।
लेकिन चुनौतियां असली हैं। फुटफॉल 2019 से 19% नीचे है और गिरावट जारी है। टिकटों की बढ़ती कीमतों के दम पर ग्रोथ हासिल करने की भी एक सीमा है। OTT प्लेटफॉर्म्स के पास 60 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 14.82 करोड़ लोग ही पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेते हैं। वहीं, दूसरी तरफ सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की संख्या लगातार घट रही है और कई थिएटर बंद हो रहे हैं।
अगले पांच साल में जो इंडस्ट्री उभरेगा, वह न पुराना थिएटर-प्रधान होगा, न पूरी तरह OTT-केंद्रित। यह होगा एक हाइब्रिड एंटरटेनमेंट अर्थव्यवस्था, जिसमें सिनेमाघर प्रीमियम अनुभव केंद्र होंगे, और OTT रोज़ की कहानियों का घर।
Netflix की सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के निर्माताओं की नई डॉक्यूमेंट्री ‘द लास्ट सैल्यूट’ भारतीय वायुसेना के साथ MiG-21 की 62 साल की असाधारण विरासत को सम्मान देती है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Netflix की सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को दुनियाभर में शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। छह एपिसोड वाली यह सीरीज लगातार दो सप्ताह से Netflix की ग्लोबल टॉप-10 नॉन-इंग्लिश टीवी लिस्ट में बनी हुई है। सीरीज 40 देशों में टॉप-10 में जगह बनाने में कामयाब रही है, जबकि 10 देशों में इसे नंबर-1 स्थान मिला है।
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को इसकी कहानी, दमदार अभिनय, हवाई एक्शन और भारतीय वायुसेना के प्रामाणिक चित्रण के लिए आलोचकों और दर्शकों की ओर से खूब सराहा गया है। इसी सीरीज में नजर आने वाला प्रतिष्ठित MiG-21 अब ‘द लास्ट सैल्यूट’ में खुद कहानी के केंद्र में है।
MiG-21 की 62 साल की विरासत को सलाम: ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के निर्माताओं की नई डॉक्यूमेंट्री ‘द लास्ट सैल्यूट’ भारतीय वायुसेना के साथ MiG-21 की 62 साल की असाधारण विरासत को सम्मान देती है। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में MiG-21 को कारगिल युद्ध के दौरान गोल्डन एरो स्क्वाड्रन के साथ उड़ते हुए दिखाया गया है। यह उस प्रतिष्ठित विमान को उसके रिटायर होने से पहले एक्शन में फिल्माए जाने का आखिरी मौका भी था।
‘द लास्ट सैल्यूट’ इसी विमान को एक भावनात्मक विदाई देती है। फिल्म में भारतीय वायुसेना और देश के साथ MiG-21 के लंबे सफर के साथ-साथ उन पीढ़ियों के फाइटर पायलटों के रिश्ते को भी सामने लाया गया है, जिन्होंने इसे उड़ाया।
फिल्म का निर्देशन कुशल श्रीवास्तव ने किया है, जबकि इसका निर्माण मिहिका रौत्रे और अंतरा श्रीवास्तव ने किया है। दोनों ‘मैचबॉक्स शॉट्स’ से जुड़ी हैं, जो ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की प्रोडक्शन कंपनी भी है। ‘द लास्ट सैल्यूट’ का प्रीमियर Netflix पर 26 अगस्त को हुआ।
डॉक्यूमेंट्री में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह के साथ कई दशकों तक MiG-21 उड़ाने वाले पायलटों को भी शामिल किया गया है। इसमें उनकी निजी यादों, अनकही कहानियों और पहले कभी न देखे गए पलों के जरिए इस विमान की विरासत को सामने लाया गया है।
आलोक श्रीवास्तव की भावनात्मक थीम कविता: ‘द लास्ट सैल्यूट’ की शुरुआत प्रख्यात कवि आलोक श्रीवास्तव की लिखी कविता से होती है, जिसे अभिनेता शरद केलकर ने अपनी आवाज दी है। इस कविता की साहित्यिक खूबसूरती ने डॉक्यूमेंट्री के लुक और फील को और प्रभावशाली बनाया है।
आलोक श्रीवास्तव ने कहा, ‘मैं इस फिल्म का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं, जो हमारे बहादुर दिलों की गाथा है। मैं कुशल श्रीवास्तव का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे अपनी रचनात्मक यात्रा का हिस्सा बनाया। मैं यह देखकर हैरान हूं कि शरद केलकर की आवाज में कविता को इतना पसंद किया जा रहा है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि फिल्म को इतना सम्मान और पहचान मिल रही है।’
बता दें कि आलोक श्रीवास्तव समकालीन हिंदी के प्रमुख कवि, लेखक और फिल्म गीतकार हैं। वह हिंदी-उर्दू कविता की खूबसूरती को आधुनिक दर्शकों के करीब लाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी भाषा सरल, काव्यात्मक और भावनात्मक है, जिसकी वजह से उनका काम साहित्यिक पाठकों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर युवाओं तक भी पहुंचता है।
उनका चर्चित कविता संग्रह ‘आमीन और आसान’, जिसे पेंगुइन इंडिया ने प्रकाशित किया है, ने उन्हें समकालीन कविता की महत्वपूर्ण आवाज के रूप में स्थापित किया। ‘अम्मा’ और ‘बाबू जी’ पर उनकी कविताएं Instagram, Facebook और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से साझा और उद्धृत की जाती हैं। माता-पिता, घर और रिश्तों पर उनकी कविताएं अपने सार्वभौमिक भावनात्मक जुड़ाव के कारण दर्शकों से खास कनेक्शन बनाती हैं।
उनकी कविताओं का पाठ अमिताभ बच्चन और आशुतोष राणा कर चुके हैं, जबकि उनके गीतों को जगजीत सिंह, पंकज उधास और हरिहरन जैसे चर्चित कलाकारों ने आवाज दी है।
Netflix ने जताई खुशी: Netflix की इंडिया सीरीज हेड तान्या बामी ने ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को मिल रहे प्यार और ‘द लास्ट सैल्यूट’ को लेकर कहा कि वह देश, दुनिया और सशस्त्र बलों से मिल रही प्रतिक्रिया से बेहद उत्साहित और अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि Netflix भारतीय वायुसेना के साथ अपने सहयोग को ‘द लास्ट सैल्यूट’ के जरिए आगे बढ़ा रहा है। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के दौरान पायलटों की बातचीत में MiG-21 इतना महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया था कि उसकी विरासत को अलग से तलाशना जरूरी लगा। ‘द लास्ट सैल्यूट’ भारतीय वायुसेना के साथ MiG-21 के 62 वर्षों और उन पीढ़ियों के पायलटों को श्रद्धांजलि है, जिनके लिए यह विमान सिर्फ एक मशीन नहीं था।
‘MiG-21 सिर्फ विमान नहीं, एक भावना था’: ‘मैचबॉक्स शॉट्स’ के निर्माता संजय रौत्रे ने कहा कि ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ ने दर्शकों को भारतीय वायुसेना की कहानी के एक अनकहे और अविश्वसनीय अध्याय से परिचित कराया है और दुनियाभर से मिली प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है। उन्होंने कहा कि सीरीज बनाते समय महसूस हुआ कि MiG-21 सिर्फ एक विमान नहीं था, बल्कि कई पीढ़ियों के वायु योद्धाओं के लिए एक भावना था। ‘द लास्ट सैल्यूट’ इसी कहानी को आगे बढ़ाती है और MiG-21 तथा उसे उड़ाने वाले कई पीढ़ियों के फाइटर पायलटों के बीच के असाधारण रिश्ते को सामने लाती है।
‘मशीन नहीं, उसके साथ जुड़े लोगों की कहानी’: निर्देशक कुशल श्रीवास्तव ने कहा कि पूर्व वायुसेना अधिकारी और फिल्मकार के तौर पर MiG-21 को श्रद्धांजलि देते समय वह ऐसी फिल्म नहीं बनाना चाहते थे, जो तकनीकी जानकारियों या जार्गन में उलझ जाए। उनके मुताबिक, वह एक फाइटर पायलट और उसकी मशीन के बीच के भावनात्मक रिश्ते को दिखाना चाहते थे। उनका उद्देश्य ऐसी दुनिया तैयार करना था, जो मूल रूप से निजी और तकनीकी होने के बावजूद हर किसी के लिए भावनात्मक रूप से समझने योग्य हो।
Sun TV Network ने तेजी से बढ़ते माइक्रो-ड्रामा और शॉर्ट-फॉर्म एंटरटेनमेंट सेगमेंट में कदम रखा है। कंपनी ने अपने मौजूदा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Sun NXT के अंदर ही Sun NXT Shorts लॉन्च किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Sun TV Network ने तेजी से बढ़ते माइक्रो-ड्रामा और शॉर्ट-फॉर्म एंटरटेनमेंट सेगमेंट में कदम रखा है। कंपनी ने अपने मौजूदा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Sun NXT के अंदर ही Sun NXT Shorts लॉन्च किया है। इसका फोकस खास तौर पर मोबाइल पर कंटेंट देखने वाले Gen Z और युवा दर्शकों पर है।
Sun NXT Shorts में ओरिजिनल शॉर्ट-फॉर्म सीरीज के साथ डब की गई इंटरनेशनल सीरीज और Sun TV Network की पुरानी फिल्मों व टीवी सीरियल्स को नए शॉर्ट फॉर्मेट में पेश किया जाएगा।
चार भाषाओं में मिलेगा कंटेंट
Sun NXT Shorts पर कंटेंट तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में उपलब्ध होगा। कंपनी का कहना है कि इसका मकसद ऐसे दर्शकों तक पहुंचना है जो मोबाइल, टीवी और दूसरे डिजिटल स्क्रीन पर कम समय में मनोरंजन कंटेंट देखना पसंद करते हैं।
खास बात यह है कि Sun TV Network ने इसके लिए कोई अलग ऐप लॉन्च नहीं किया है। कंपनी ने Sun NXT के अंदर ही Shorts सेक्शन शुरू किया है। इससे उसे अपने मौजूदा सब्सक्राइबर्स और विशाल कंटेंट लाइब्रेरी का फायदा मिलेगा।
पुराने कंटेंट को भी मिलेगा नया अंदाज
Sun TV Network अपने पुराने कंटेंट को भी नए फॉर्मेट में पेश करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी की लाइब्रेरी में मौजूद फिल्मों और लोकप्रिय Sun TV सीरियल्स को रीमास्टर, रिसाइज और री-एडिट किया जाएगा। लंबी फिल्मों और टीवी एपिसोड को छोटे और तेज रफ्तार वाले एपिसोड में बदला जाएगा, ताकि दर्शक इन्हें कम समय में आसानी से देख सकें।
Sun NXT पर फिलहाल 65,000 घंटे से ज्यादा का मल्टीलिंगुअल कंटेंट मौजूद है। ऐसे में कंपनी के पास Shorts के लिए कंटेंट का एक बड़ा भंडार पहले से उपलब्ध है।
‘दर्शक कंटेंट अलग तरीके से देख रहे हैं’
Sun TV Network की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर काव्या मारन ने कहा कि दर्शक सिर्फ ज्यादा कंटेंट नहीं देख रहे हैं, बल्कि उसे देखने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। अब लोग अलग-अलग स्क्रीन पर छोटे-छोटे समय में कंटेंट देखना पसंद कर रहे हैं और वे आसान व तेज अनुभव चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि Sun NXT Shorts इसी बदलते व्यूइंग पैटर्न को ध्यान में रखकर कंपनी की रणनीतिक पहल है।
भारत में बढ़ रहा है माइक्रो-ड्रामा का चलन
भारत में OTT और एंटरटेनमेंट कंपनियां तेजी से माइक्रो-ड्रामा और वर्टिकल शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट पर प्रयोग कर रही हैं। स्मार्टफोन पर कम समय में कंटेंट देखने की आदत बढ़ने के साथ इस तरह के फॉर्मेट की लोकप्रियता भी बढ़ रही है।
खास तौर पर युवा दर्शक छोटे और तेजी से आगे बढ़ने वाले वीडियो और एपिसोड पसंद कर रहे हैं। ऐसे में पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स के लिए भी यह अपने पुराने कंटेंट को नए तरीके से इस्तेमाल और कमाई करने का मौका बन गया है।
टीवी सीरियल्स और फिल्मों को छोटे एपिसोड में बदलने के अलावा कंपनियां मोबाइल दर्शकों के लिए नए ओरिजिनल शॉर्ट-फॉर्म शो भी तैयार कर रही हैं।
मारन ग्रुप से जुड़ी एक और माइक्रो-ड्रामा पहल
Sun TV Network का यह कदम ऐसे समय आया है जब KadhaiShorts नाम का एक मल्टीलिंगुअल माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म भी लॉन्च हो चुका है। इसे पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन के बेटे करण दयानिधि मारन ने शुरू किया है। इस तरह मारन ग्रुप से जुड़े कारोबार की ओर से शॉर्ट-फॉर्म एंटरटेनमेंट और माइक्रो-ड्रामा सेगमेंट में यह एक और अहम पहल है।
युवा दर्शकों को जोड़ने की कोशिश
Sun TV Network के पास क्षेत्रीय भाषाओं में बड़ा कंटेंट कलेक्शन और कई लोकप्रिय टीवी फ्रेंचाइजी हैं। कंपनी अब इसी ताकत का इस्तेमाल युवा दर्शकों को अपने साथ जोड़ने के लिए करना चाहती है।
Sun NXT Shorts के जरिए कंपनी पारंपरिक टीवी, Connected TV और मोबाइल स्क्रीन के बीच बदलते व्यूइंग पैटर्न को पकड़ने की कोशिश कर रही है। अगर दर्शकों को यह नया फॉर्मेट पसंद आता है, तो Sun TV Network के लिए अपने पुराने कंटेंट से नए दर्शक और नई कमाई दोनों हासिल करने का रास्ता खुल सकता है।
Netflix एक बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रहा है। The New York Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Netflix अपने ऐप पर दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की सर्विस भी उपलब्ध कराने की संभावना तलाश रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
स्ट्रीमिंग की दुनिया में Netflix एक बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रहा है। The New York Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Netflix अपने ऐप पर दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की सर्विस भी उपलब्ध कराने की संभावना तलाश रहा है। इनमें Peacock और Fox One जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, अभी यह सिर्फ शुरुआती बातचीत और आंतरिक चर्चा के स्तर पर है। Netflix ने किसी भी प्लेटफॉर्म के साथ डील की पुष्टि नहीं की है।
Netflix का बदल सकता है मॉडल
अब तक Netflix का मुख्य फोकस अपने खुद के Originals और दूसरे लाइसेंस्ड कंटेंट को दर्शकों तक पहुंचाने पर रहा है। लेकिन नए मॉडल के तहत यूजर्स Netflix के ऐप से ही दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को सब्सक्राइब कर सकते हैं या उन प्लेटफॉर्म का कुछ कंटेंट Netflix के इंटरफेस पर देख सकते हैं।
अगर ऐसा होता है तो Netflix सिर्फ एक स्ट्रीमिंग सर्विस नहीं रहेगा, बल्कि कई स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को एक जगह लाने वाले मार्केटप्लेस की तरह काम कर सकता है।
यह मॉडल कुछ हद तक Amazon Prime Video और Roku के मॉडल जैसा होगा, जहां यूजर्स एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग स्ट्रीमिंग सर्विस को खोज और सब्सक्राइब कर सकते हैं।
Peacock और Fox One पर नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, Netflix की चर्चाओं में Peacock और Fox One का नाम सामने आया है। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि इनमें से किसी प्लेटफॉर्म के साथ Netflix की डील जल्द होने वाली है।
कंपनी किस तरह का कमर्शियल मॉडल अपनाएगी, यानी सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई कैसे बांटी जाएगी या दूसरे प्लेटफॉर्म की सर्विस Netflix ऐप में किस तरह दिखाई जाएगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
फ्रांस में पहले ही शुरू हो चुका है टेस्ट
Netflix इस तरह के मॉडल को पूरी तरह नया नहीं मान रहा है। कंपनी ने जून में फ्रांस में ब्रॉडकास्टर TF1 के लाइव चैनल और स्ट्रीमिंग कंटेंट को अपने ऐप में शामिल किया था।
Netflix के को-सीईओ ग्रेग पीटर्स ने जुलाई में कंपनी की अर्निंग्स कॉल के दौरान बताया था कि TF1 के साथ शुरुआती नतीजे अच्छे रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि अगर इस तरह की साझेदारी Netflix, उसके यूजर्स और पार्टनर्स के लिए फायदेमंद रहती है तो कंपनी दूसरे बाजारों में भी ऐसे मॉडल पर विचार कर सकती है।
बढ़ती स्ट्रीमिंग फीस के बीच बड़ा कदम
Netflix का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब दर्शकों के लिए स्ट्रीमिंग मार्केट काफी बिखर गया है। अलग-अलग कंटेंट के लिए लोगों को कई OTT प्लेटफॉर्म के सब्सक्रिप्शन लेने पड़ते हैं।
उदाहरण के लिए, Peacock ने हाल ही में अपने अलग-अलग प्लान की कीमतें बढ़ाई हैं। उसका Ad-supported Select प्लान अब 8.99 डॉलर प्रति महीने, प्रीमियम प्लान 12.99 डॉलर और प्रीमियम प्लस प्लान 19.99 डॉलर का हो गया है।
ऐसे में अगर Netflix एक ही ऐप के जरिए कई स्ट्रीमिंग सर्विस तक पहुंच देने लगता है तो यूजर्स के लिए कंटेंट ढूंढना और अलग-अलग सेवाओं को मैनेज करना आसान हो सकता है।
Netflix बना सकता है बड़ा Streaming Hub
Netflix लगातार अपने प्लेटफॉर्म को सिर्फ फिल्मों और सीरीज देखने की जगह से आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है। कंपनी भारत में भी अपने कंटेंट पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है और इस महीने साउथ इंडियन कंटेंट पर खास फोकस बढ़ाया है। इसके अलावा Netflix विज्ञापन कारोबार और यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने के दूसरे तरीकों पर भी काम कर रहा है।
फिलहाल दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को अपने ऐप में शामिल करने का विचार शुरुआती चरण में है। लेकिन अगर Netflix इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो उसका ऐप सिर्फ Netflix Originals और लाइसेंस्ड कंटेंट तक सीमित नहीं रहेगा। वह कई स्ट्रीमिंग सेवाओं को एक जगह लाने वाला बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है।
इससे Netflix का मुकाबला Amazon और Roku जैसे एक ही जगह पर कई स्ट्रीमिंग सेवाएं उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म से बढ़ सकता है। साथ ही, स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री में एक ही प्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा सेवाएं देने की होड़ भी तेज हो सकती है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) ने OTT प्लेटफॉर्म्स को ड्रग्स और नशीले पदार्थों से जुड़े सीन को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) ने OTT प्लेटफॉर्म्स को ड्रग्स और नशीले पदार्थों से जुड़े सीन को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने कहा है कि जब भी किसी OTT कंटेंट में नशीले पदार्थों के सेवन या इस्तेमाल को दिखाया जाए, उस दौरान दर्शकों को ड्रग्स के नुकसान के बारे में चेतावनी देना जरूरी होगा।
मंत्रालय ने 24 अगस्त 2026 को जारी एडवाइजरी में कहा कि यह चेतावनी साफ, पढ़ने योग्य और प्रमुख तरीके से दिखाई जानी चाहिए, ताकि दर्शक इसे आसानी से देख और समझ सकें।
स्क्रीन पर दिखाना होगा यह चेतावनी संदेश
OTT प्लेटफॉर्म्स को ड्रग्स के सेवन वाले सीन के दौरान यह चेतावनी दिखाने के लिए कहा गया है: “Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No to Drugs.” यानी इसका मतलब है कि अवैध नशीले पदार्थ स्वास्थ्य को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा का कारण बन सकते हैं। ड्रग्स को 'ना' कहें।
मंत्रालय के मुताबिक, चेतावनी का फॉन्ट, रंग और आकार ऐसा होना चाहिए, जिसे दर्शक आसानी से पढ़ सकें। साथ ही इसे स्क्रीन पर पर्याप्त समय तक दिखाना होगा, ताकि इसका संदेश प्रभावी तरीके से दर्शकों तक पहुंच सके।
2024 की एडवाइजरी का भी दिया हवाला
मंत्रालय ने अपनी नई एडवाइजरी में 26 नवंबर 2024 को जारी की गई पिछली एडवाइजरी का भी हवाला दिया है। उस समय OTT प्लेटफॉर्म्स को फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य कंटेंट में नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस के चित्रण को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी।
प्लेटफॉर्म्स से कहा गया था कि ऐसे कंटेंट में Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 (NDPS Act) के प्रावधानों का पालन किया जाए। इसके अलावा जहां जरूरी हो, वहां सही कंटेंट क्लासिफिकेशन, चेतावनी और डिस्क्लेमर भी दिए जाएं।
मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म्स को यह भी सलाह दी थी कि वे ड्रग्स के इस्तेमाल से होने वाले खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए पब्लिक हेल्थ मैसेज और डिस्क्लेमर को शामिल करने पर विचार करें।
OTT प्लेटफॉर्म्स के Code of Ethics का भी जिक्र
नई एडवाइजरी में मंत्रालय ने Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए बनाए गए Code of Ethics का भी उल्लेख किया है।
इसके मुताबिक, डिजिटल पब्लिशर्स को ऐसा कोई कंटेंट ट्रांसमिट, पब्लिश या प्रदर्शित नहीं करना चाहिए, जो मौजूदा कानूनों के तहत प्रतिबंधित हो या किसी सक्षम अदालत के आदेश के खिलाफ हो।
24 अगस्त 2026 या उसके बाद जारी कंटेंट पर लागू होगी एडवाइजरी
मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि 24 अगस्त 2026 या उसके बाद प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित या रिलीज किए जाने वाले सभी संबंधित कंटेंट में इन निर्देशों का पालन किया जाए। मंत्रालय का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य दर्शकों के बीच ड्रग्स के खतरों को लेकर जागरूकता बढ़ाना और OTT प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदार सामाजिक संदेश को बढ़ावा देना है।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
मंत्रालय के निर्देशों का पालन नहीं करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ Food Safety and Standards Act नहीं, बल्कि लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की बात कही गई है। यहां मुख्य रूप से डिजिटल कंटेंट और नशीले पदार्थों से जुड़े कानूनों का पालन महत्वपूर्ण होगा।
यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स पर फिल्मों, वेब सीरीज और दूसरे डिजिटल कंटेंट की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का फोकस अब केवल कंटेंट की उपलब्धता पर नहीं, बल्कि ड्रग्स जैसे संवेदनशील विषयों के चित्रण और उससे जुड़े सामाजिक संदेश पर भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
भारत में कंटेंट देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है और माइक्रोड्रामा अब सिर्फ एक नया ट्रेंड नहीं रह गया है। यह लोगों के रोजमर्रा के मनोरंजन का हिस्सा बनता जा रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में कंटेंट देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है और माइक्रोड्रामा अब सिर्फ एक नया ट्रेंड नहीं रह गया है। यह लोगों के रोजमर्रा के मनोरंजन का हिस्सा बनता जा रहा है। ShareChat और Moj ने Kantar के साथ मिलकर ‘State of Microdrama in India’ रिपोर्ट जारी की है, जिसमें माइक्रोड्रामा के बढ़ते चलन, दर्शकों की पसंद और विज्ञापन के लिए इसकी संभावनाओं का खुलासा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 80% दर्शक माइक्रोड्रामा पसंद कर रहे हैं, जबकि 86% दर्शक रोजाना 15 मिनट से ज्यादा समय इसे देखने में बिताते हैं। वहीं, 54% दर्शक दोबारा माइक्रोड्रामा देखने के लिए लौटते हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह फॉर्मेट अब लोगों के लिए सिर्फ नया या आकर्षक कंटेंट नहीं, बल्कि नियमित मनोरंजन का हिस्सा बन चुका है।
विज्ञापन के लिए भी माइक्रोड्रामा बना मजबूत प्लेटफॉर्म
रिपोर्ट में माइक्रोड्रामा को ब्रैंड्स के लिए भी एक प्रभावी विज्ञापन माध्यम बताया गया है। इसके मुताबिक, माइक्रोड्रामा में विज्ञापन देखने वाले दर्शकों में 84% ब्रैंड रिकॉल और 82% खरीदारी की इच्छा (Purchase Intent) दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े पारंपरिक शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट के मुकाबले बेहतर हैं। यानी माइक्रोड्रामा न सिर्फ दर्शकों को जोड़ रहा है, बल्कि ब्रैंड्स को भी अपनी बात ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाने का मौका दे रहा है।
सोशल मीडिया फीड से मिल रहा है माइक्रोड्रामा
माइक्रोड्रामा की लोकप्रियता बढ़ने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, 77% दर्शक सोशल मीडिया फीड के जरिए माइक्रोड्रामा खोजते हैं।
इससे पता चलता है कि सोशल मीडिया सिर्फ कंटेंट देखने का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि नए कंटेंट फॉर्मेट को दर्शकों तक पहुंचाने का एक बड़ा जरिया भी बन चुका है।
सिर्फ कम आय वाले दर्शकों तक सीमित नहीं
माइक्रोड्रामा को लेकर यह धारणा भी टूट रही है कि इसे मुख्य रूप से कम आय वाले या कैजुअल दर्शक देखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 68% माइक्रोड्रामा दर्शक ऐसे परिवारों से आते हैं, जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है।
इसके अलावा, 64% दर्शक साल में दो से ज्यादा बार यात्रा करते हैं, जबकि 63% के पास अपना घर है। यानी माइक्रोड्रामा देखने वाले दर्शकों का आधार काफी व्यापक है और इसमें अलग-अलग आर्थिक वर्गों के लोग शामिल हैं।
ज्यादा देखने वाले दर्शक ऑनलाइन ज्यादा खर्च करते हैं
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि माइक्रोड्रामा के ज्यादा कंटेंट देखने वाले दर्शक हर महीने ऑनलाइन कम सक्रिय दर्शकों की तुलना में ज्यादा खर्च करते हैं।
इससे संकेत मिलता है कि जैसे-जैसे दर्शक माइक्रोड्रामा की एपिसोडिक कहानियों से ज्यादा जुड़ते हैं, वैसे-वैसे प्लेटफॉर्म, क्रिएटर्स और ब्रैंड्स के लिए इस फॉर्मेट की व्यावसायिक संभावनाएं भी बढ़ती जाती हैं।
शॉर्ट वीडियो की सुविधा और लंबी कहानी का मजा
ShareChat और Moj की Chief Business Officer Neha Markanda ने कहा कि माइक्रोड्रामा अब एक अलग एंटरटेनमेंट कैटेगरी के रूप में विकसित हो रहा है।
उनके मुताबिक, दर्शक सिर्फ छोटे वीडियो नहीं चाहते, बल्कि ऐसी कहानियां पसंद कर रहे हैं जो मोबाइल पर आसानी से देखी जा सकें और साथ ही उनमें लंबी कहानी जैसा जुड़ाव और भावनात्मक गहराई भी हो।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में माइक्रोड्रामा क्रिएटर्स को ज्यादा बेहतर कहानियां बनाने, ब्रैंड्स को कहानी के जरिए दर्शकों से जुड़ने और प्लेटफॉर्म्स को लंबे समय तक ऑडियंस एंगेजमेंट बढ़ाने के नए मौके दे सकता है।
भारत के डिजिटल कंटेंट बाजार में बड़ा बदलाव
Kantar South Asia के मीडिया व एनालिटिक्स के हेड इबू इसाक (Ebu Isaac) ने कहा कि रिसर्च के दौरान माइक्रोड्रामा का तेजी से उभरना भारत के डिजिटल कंटेंट लैंडस्केप में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल पर बार-बार कंटेंट देखने की आदत और एपिसोडिक कहानियों के आकर्षण ने माइक्रोड्रामा के लिए मजबूत एंगेजमेंट तैयार किया है। आने वाले समय में यह कैटेगरी लोगों के मनोरंजन के तरीके और ब्रैंड्स के लिए दर्शकों का ध्यान खींचने की रणनीति को बदल सकती है।
14 शहरों में हुई स्टडी
‘State of Microdrama in India’ रिपोर्ट के लिए 4 से 25 मई 2026 के बीच देश के 14 शहरों में 1,045 लोगों के बीच क्वांटिटेटिव स्टडी की गई।
इसमें 18 से 44 साल की उम्र के स्मार्टफोन और सोशल मीडिया यूजर्स को शामिल किया गया। रिसर्च में अलग-अलग NCCS A, B और C सेगमेंट के लोगों को शामिल किया गया।
विज्ञापन की प्रभावशीलता और दर्शकों का ध्यान समझने के लिए 21 से 29 मई 2026 के बीच 450 लोगों के साथ अलग से Attention Module भी किया गया। इसमें माइक्रोड्रामा, लॉन्ग-फॉर्म कंटेंट और शॉर्ट वीडियो/रील्स में दर्शकों के ध्यान की तुलना की गई।
माइक्रोड्रामा के लिए बढ़ रहे हैं नए मौके
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि माइक्रोड्रामा अब सिर्फ छोटे-छोटे वीडियो का फॉर्मेट नहीं रह गया है। कहानी, मोबाइल की सुविधा और लगातार नए एपिसोड देखने की आदत इसे तेजी से लोकप्रिय बना रही है।
ऐसे में आने वाले समय में क्रिएटर्स के लिए नई कहानियां बनाने, प्लेटफॉर्म्स के लिए यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने और ब्रैंड्स के लिए कहानी के जरिए ग्राहकों से जुड़ने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
मीडिया और एंटरटनमेंट कंपनियां अब ऐसी सुविधाओं पर ज्यादा निवेश कर रही हैं, जिनसे सुनने और देखने में परेशानी वाले लोगों के लिए (Accessibility Features) OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखना आसान हो सके।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फजल, असिटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत की मीडिया और एंटरटनमेंट कंपनियां अब ऐसी सुविधाओं पर ज्यादा निवेश कर रही हैं, जिनसे सुनने और देखने में परेशानी वाले लोगों के लिए (Accessibility Features) OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखना आसान हो सके। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी OTT प्लेटफॉर्म के लिए प्रस्तावित दिशानिर्देशों ने इंडस्ट्री को स्ट्रीमिंग सेवाओं को ज्यादा समावेशी बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया है।
हालांकि प्रस्तावित दिशानिर्देशों में इन सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का रोडमैप दिया गया है, लेकिन देश के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पहले ही उपशीर्षक और बंद कैप्शन से आगे बढ़कर पहुंच आसान बनाने वाली सुविधाओं का विस्तार कर रहे हैं। कंपनियां अब इसे केवल नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं, बल्कि अपने प्रॉडक्ट को बेहतर बनाने और दूसरों से अलग पहचान देने वाली सुविधा के रूप में देख रही हैं। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कई भाषाओं में इंटरफेस, सांकेतिक भाषा की व्याख्या और आवाज के जरिए कंटेंट खोजने जैसी सुविधाओं को प्लेटफॉर्म में शामिल किया जा रहा है।
यह बदलाव दिखाता है कि पहले पहुंच आसान बनाने वाली सुविधाओं को केवल नियमों का पालन करने के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब इन्हें प्रॉडक्ट डिजाइन, यूजर्स एक्सपीरियंस और कंटेंट खोजने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से फरवरी में जारी प्रस्तावित दिशानिर्देशों में OTT प्रकाशकों को चरणबद्ध तरीके से अपनी कंटेंट को ज्यादा सुलभ बनाने के लिए कहा गया है। इसके तहत बंद कैप्शन, ऑडियो विवरण और भारतीय सांकेतिक भाषा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके यूजर इंटरफेस सहायक तकनीकों को समर्थन दें। ढांचे के तहत प्लेटफॉर्म को ऐसी कंटेंट की पहचान करने और समय के साथ उसे दर्शकों के लिए आसानी से खोजने योग्य बनाने पर भी काम करना होगा।
पहुंच आसान बनाना अब प्रॉडक्ट रणनीति का हिस्सा
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नियामक ढांचे ने तकनीक, कंटेंट और प्रॉडक्ट टीमों के बीच पहुंच आसान बनाने को लेकर बातचीत तेज कर दी है। अब OTT कंपनियां किसी कार्यक्रम या फिल्म के जारी होने के बाद इन सुविधाओं को जोड़ने के बजाय प्रॉडक्ट तैयार करने के दौरान ही इन्हें शामिल कर रही हैं।
उदाहरण के तौर पर, जियोस्टार का कहना है कि पहुंच आसान बनाना अब उसके स्ट्रीमिंग अनुभव को तैयार करने का एक बुनियादी सिद्धांत बन गया है।
जियोहॉटस्टार के मुख्य प्रॉडक्ट अधिकारी भरत राम ने कहा, "जियोस्टार में पहुंच आसान बनाना कोई ऐसी सुविधा नहीं है जिसे हम बाद में जोड़ते हैं, बल्कि यह एक डिजाइन सिद्धांत है, जो तय करता है कि हम अपने प्रॉडक्ट्स और अनुभवों को कैसे तैयार करते हैं।"
प्लेटफॉर्म पहले से ही 12 भाषाओं में प्रमुख खेल आयोजनों के साथ भारतीय सांकेतिक भाषा की व्याख्या और ऑडियो विवरण की सुविधा देता है। कई फिल्में और धारावाहिक भी ऑडियो विवरण और बंद कैप्शन के साथ उपलब्ध हैं।
राम ने कहा कि कंपनी मिशन एक्सेसिबिलिटी और इंडिया साइनिंग हैंड्स जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर अपने प्रॉडक्ट्स में पहुंच आसान बनाने वाली सुविधाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। साथ ही इन सुविधाओं को प्लेटफॉर्म की मूल तकनीकी व्यवस्था में भी शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "OpenAI के साथ हमारी साझेदारी अलग-अलग यूजर्स की जरूरतों के लिए कंटेंट खोजने की प्रक्रिया को ज्यादा सहज और बातचीत जैसी बनाने में मदद कर रही है।"
कंपनी अलग तरह से सोचने और सीखने वाले यूजर्स के लिए भी सुविधाएं विकसित करने में निवेश कर रही है। इससे पता चलता है कि पहुंच को अब केवल नियमों का पालन करने के बजाय समावेशी डिजाइन के व्यापक नजरिए से देखा जा रहा है।
राम के मुताबिक, पहुंच आसान बनाने के लिए मूल रूप से विकसित की गई कई सुविधाओं, जैसे उपशीर्षक, कई भाषाओं का अनुभव और आवाज के जरिए कंटेंट खोजने की सुविधा ने सभी दर्शकों के देखने के अनुभव को बेहतर बनाया है।
उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे भारत का पहुंच संबंधी तंत्र विकसित हो रहा है, हम स्ट्रीमिंग के भविष्य को सिर्फ ज्यादा व्यक्तिगत बनाने के बजाय डिजाइन के स्तर पर समावेशी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
प्लेटफॉर्म उपशीर्षक से आगे बढ़कर कर रहे नए प्रयोग
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया से पता चलता है कि नियमों का पालन अब केवल अनिवार्य पहुंच संबंधी सुविधाओं तक सीमित नहीं है।
नेटफ्लिक्स का कहना है कि उसके दुनियाभर के करीब एक-तिहाई सदस्य कंटेंट खोजने और देखने के लिए पहले से ही पहुंच संबंधी सुविधाओं और उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। इससे पता चलता है कि ये सुविधाएं अब मुख्यधारा का हिस्सा बन चुकी हैं।
पिछले एक साल में स्ट्रीमिंग कंपनी ने पहुंच संबंधी सुविधाओं में अपना निवेश काफी बढ़ाया है। केवल 2025 में ही उसने 34 भाषाओं में 13,000 घंटे से ज्यादा ऑडियो विवरण जोड़े। यह साल-दर-साल 30 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि है।
उसके संग्रह में अब 30 से ज्यादा भाषाओं में उपशीर्षक, सुनने में परेशानी वाले लोगों के लिए उपशीर्षक, ऑडियो विवरण और डबिंग की सुविधा उपलब्ध है।
कंपनी ने "भाषा के आधार पर खोज" सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए सदस्य अलग-अलग उपकरणों पर खोज पट्टी से भाषा के साथ-साथ पहुंच संबंधी सुविधाओं के आधार पर भी फिल्में और कार्यक्रम खोज सकते हैं।
यह सुविधा दिखाती है कि अब पहुंच को सिर्फ कंटेंट चलाने तक सीमित रखने के बजाय उसे खोजने की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
नेटफ्लिक्स के देखने के आंकड़े भी इस बदलाव को दिखाते हैं। करीब एक दशक पहले मंच पर गैर-अंग्रेजी भाषा की कंटेंट कुल देखने का 10 प्रतिशत से भी कम थी। आज यह एक-तिहाई से ज्यादा है। वहीं 2025 में करीब 70 प्रतिशत देखने का हिस्सा ऐसे सदस्यों का था, जिन्होंने अपने देश के बाहर बनाई गई कंटेंट देखी।
कंपनी ने नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के साथ मिलकर विशेष स्क्रीनिंग भी आयोजित की हैं, जिनमें पहले से शामिल ऑडियो विवरण की सुविधा थी।
नेटफ्लिक्स की मूल कंटेंट में दृष्टिबाधित दर्शकों के लिए चेहरे के भाव, जगह और दृश्यों में बदलाव जैसी दृश्य चीजों का वर्णन करने वाली आवाज भी शामिल होती है। इसके अलावा मंच स्क्रीन रीडर, सहायक सुनने वाले उपकरण और अपनी जरूरत के अनुसार बदले जा सकने वाले उपशीर्षकों को भी समर्थन देता है।
सोनी और जी भी पहुंच संबंधी योजना के साथ आगे बढ़ रहे
अन्य प्रसारक और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी बदलते नियामक माहौल के साथ पहुंच संबंधी सुविधाओं को मजबूत कर रहे हैं।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क की डिजिटल सेवाओं, जिनमें सोनीलिव और क्रंचीरोल शामिल हैं, के लिए तैयार योजना में सहायक तकनीकों के साथ बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है। इसमें बेहतर स्क्रीन रीडर समर्थन, कीबोर्ड से संचालन, रंगों के अंतर को बेहतर करना और सभी के लिए आसान इंटरफेस डिजाइन शामिल हैं।
कंपनी प्रॉडक्ट तैयार करने की प्रक्रिया में ही पहुंच संबंधी सुविधाओं को शामिल करने पर जोर दे रही है। इसके लिए लगातार परीक्षण और यूजर्स की प्रतिक्रिया का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि इसे केवल एक बार की नियम पालन प्रक्रिया न माना जाए।
वहीं जी एंटरटेनमेंट का कहना है कि वह मंत्रालय की ओर से तय समय-सारणी के अनुसार पहुंच संबंधी सुविधाएं लागू कर रहा है।
कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, "एक जिम्मेदार इंडस्ट्री पार्टनर के तौर पर जी, सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों का पालन कर रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रयास कर रहा है कि उसके कंटेंट प्रस्ताव सभी मंचों पर हर उपभोक्ता के लिए आसानी से उपलब्ध हों।"
उन्होंने कहा, "हम मंत्रालय की ओर से तय समय-सारणी के अनुसार नई पहुंच संबंधी सुविधाओं को शामिल करने की प्रक्रिया में हैं। हम एक सही मायने में समावेशी और सुलभ एंटरटनमेंट व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि हमारी आकर्षक कंटेंट देश के हर दर्शक के लिए बिना किसी रुकावट के उपलब्ध हो सके।"
नियमों का पालन बढ़ा रहा नए प्रयोगों का दायरा
इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों का कहना है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्तावित दिशानिर्देशों ने पहुंच संबंधी सुविधाओं के लिए एक साझा ढांचा तैयार किया है और कंपनियों को नए प्रयोग करने की गुंजाइश भी दी है।
उपशीर्षक और ऑडियो विवरण से आगे बढ़कर प्लेटफॉर्म अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंटेंट खोज, कई भाषाओं में संचालन, बातचीत के जरिए खोज, पहुंच संबंधी संकेतक और यूजर की जरूरत के अनुसार बदले जा सकने वाले इंटरफेस में भी निवेश कर रहे हैं।
मंत्रालय के ढांचे में प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि सुलभ कंटेंट को संकेतकों, फिल्टर और खोज सुविधा के जरिए आसानी से खोजा जा सके। साथ ही पहुंच संबंधी क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
यह बदलाव इस बात में भी दिखाई दे रहा है कि स्ट्रीमिंग कंपनियां आज पहुंच को किस तरह देख रही हैं। अब इसे पर्दे के पीछे नियमों का पालन करने वाली व्यवस्था के बजाय प्लेटफॉर्म के पूरे अनुभव का हिस्सा बनाया जा रहा है। कंपनियां सिफारिश करने वाली व्यवस्थाओं को बेहतर कर रही हैं, कंटेंट से जुड़ी जानकारी बढ़ा रही हैं और अलग-अलग जरूरत वाले यूजर्स के लिए संचालन को ज्यादा आसान बना रही हैं।
नई पीढ़ी की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से इन प्रयासों को और तेजी मिलने की उम्मीद है। इससे स्वचालित उपशीर्षक, ऑडियो विवरण, भाषा अनुवाद और आवाज के जरिए बातचीत को बेहतर बनाया जा सकता है।
पूरी इंडस्ट्री्ट्री में हो रहा बदलाव
भारत के OTT इंडस्ट्री के लिए पहुंच आसान बनाना अब सिर्फ नियामक नियमों का पालन करने की मजबूरी नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने का एक तरीका भी बनता जा रहा है।
दिव्यांग लोगों के लिए शुरुआत में विकसित की गई सुविधाएं- जैसे उपशीर्षक, कई भाषाओं वाले इंटरफेस, आवाज के जरिए संचालन और बातचीत के जरिए कंटेंट खोजने की सुविधा- अब आम दर्शकों के बीच भी तेजी से इस्तेमाल हो रही हैं। इसकी वजह यह है कि लोग अलग-अलग उपकरणों, भाषाओं और परिस्थितियों में कंटेंट देख रहे हैं।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्तावित दिशानिर्देशों ने भले ही इस बदलाव को शुरू करने के लिए नियामक दबाव दिया हो, लेकिन इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया बताती है कि इससे कहीं बड़ा बदलाव हो रहा है।
जैसे-जैसे स्ट्रीमिंग सेवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, कंपनियां यह समझ रही हैं कि अगली बड़ी चुनौती सिर्फ बेहतर और प्रीमियम कंटेंट तैयार करना नहीं है। अब यह भी जरूरी है कि हर दर्शक के लिए कंटेंट सुलभ हो, उसे आसानी से खोजा जा सके और हर व्यक्ति उसे बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल कर सके।
हिन्दुस्तान टाइम्स (HT) मीडिया समूह के OTT प्लेटफॉर्म OTTplay के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) इंदरप्रीत सिंह ने कंपनी छोड़ दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिन्दुस्तान टाइम्स (HT) मीडिया ग्रुप के OTT प्लेटफॉर्म OTTplay के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) इंदरप्रीत सिंह ने कंपनी छोड़ दी है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिए साझा की।
इंदरप्रीत सिंह ने लिखा कि आज हिन्दुस्तान टाइम्स में उनका आखिरी दिन है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान Mint Premium, HT Premium और OTTplay जैसे तीन अलग-अलग बिजनेस वेंचर्स पर काम किया। उनके मुताबिक, इन तीनों प्लेटफॉर्म को शुरुआत से तैयार किया गया, कई चुनौतियों का सामना किया गया और समय-समय पर उन्हें नए सिरे से विकसित भी किया गया।
उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स ने उन्हें यह सिखाया कि किसी बिजनेस को बड़े स्तर तक कैसे पहुंचाया जाए, ग्राहकों को लंबे समय तक कैसे जोड़ा जाए और ऐसे दर्शकों के लिए कैसे काम किया जाए, जो सिर्फ उसी कंटेंट के लिए भुगतान करते हैं जिसे वे वास्तव में मूल्यवान मानते हैं।
इंदरप्रीत सिंह ने अपनी पोस्ट में अपनी टीम, कंपनी के नेतृत्व और बिजनेस पार्टनर्स का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सफर अकेले संभव नहीं था। टीम ने हर विचार पर खुलकर चर्चा की, नेतृत्व ने नए आइडियाज पर भरोसा जताया और पार्टनर्स ने हर कदम पर साथ दिया।
गौरतलब है कि इंदरप्रीत सिंह का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ महीने पहले Hindustan Media Ventures Limited (HMVL) ने अपने OTT एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म OTTplay के लिए नए सब्सक्रिप्शन पैक बंद करने का फैसला किया था। कंपनी ने 31 मार्च 2026 से नए सब्सक्रिप्शन ऑफर रोक दिए थे और कहा था कि वह इस बिजनेस की दीर्घकालिक संभावनाओं की समीक्षा कर रही है।
इंदरप्रीत सिंह ने दिसंबर 2020 में HT Media जॉइन किया था। लगभग साढ़े पांच साल के कार्यकाल के बाद अब उन्होंने कंपनी से विदाई ले ली है।