उन्नाव गैंग रेप मामले में पत्रकार ने CBI को सौंपी ये CD...

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्नाव गैंग रेप मामले में...

Last Modified:
Tuesday, 10 July, 2018
cbi

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Calibri;mso-hansi-theme-font:minor-latin;mso-bidi-font-family:Mangal;
mso-bidi-theme-font:minor-bidi">समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

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mso-hansi-theme-font:minor-latin">केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्नाव गैंग
रेप मामले में font-family:" mangal","serif";mso-ascii-font-family:calibri;mso-ascii-theme-font: minor-latin;mso-hansi-font-family:Calibri;mso-hansi-theme-font:minor-latin;
mso-bidi-font-family:Mangal;mso-bidi-theme-font:minor-bidi">एक निजी चैनल के
पत्रकार वीरेंद्र यादव के बयान दर्ज किए हैं। आरोपी विधायक सेंगर पर वीरेंद्र ने
सबसे पहले खबर को प्रमुखता से दिखाया था line-height:115%"">, 115%;font-family:" mangal","serif";mso-ascii-font-family:calibri;mso-ascii-theme-font: minor-latin;mso-hansi-font-family:Calibri;mso-hansi-theme-font:minor-latin;
mso-bidi-font-family:Mangal;mso-bidi-theme-font:minor-bidi">जिसके बाद विधायक के
गुर्गो ने पत्रकार को जान से मारने की धमकी दी थी। अपनी सुरक्षा के लिहाज से
पत्रकार ने शासन सत्ता और उच्चाधिकारियों से सुरक्षा की मांग की थी।

13.0pt;line-height:115%;font-family:" mangal","serif";mso-ascii-font-family: Calibri;mso-ascii-theme-font:minor-latin;mso-hansi-font-family:Calibri;
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minor-bidi">इसी मामले को लेकर सीबीआई ने बीते गुरुवार को वीरेंद्र को मुख्यालय
बुलाकर बयान दर्ज किया। पत्रकार ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी
सीबीआई को दी। साथ ही एक सीडी भी सीबीआई को सौंपी 13.0pt;line-height:115%"">, line-height:115%;font-family:" mangal","serif";mso-ascii-font-family:calibri; mso-ascii-theme-font:minor-latin;mso-hansi-font-family:Calibri;mso-hansi-theme-font:
minor-latin;mso-bidi-font-family:Mangal;mso-bidi-theme-font:minor-bidi"> जिसमें
रेप पीड़िता के पिता की मौत के ठीक पहले का बयान रिकॉर्ड किया था।







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minor-bidi">मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस खबर को चलाने के कारण वीरेंद्र जहां
काम कर रहा था उस चैनल ने उसके काम करने पर रोक लगा दी है। सीबीआई ने इस मामले में
भी चैनल के मालिकों का नाम और नंबर दर्ज कर किया है। सीबीआई चैनल के मालिकों को भी
तलब कर सकती है।

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minor-bidi">समाचार4मीडिया
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minor-bidi">.कॉम
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minor-bidi"> देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल 
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minor-bidi">exchange4media
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minor-bidi">.com
115%;font-family:" mangal","serif";mso-ascii-theme-font:minor-bidi;mso-hansi-theme-font: minor-bidi;mso-bidi-font-family:Mangal;mso-bidi-theme-font:minor-bidi"> की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र
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दुनिया को अलविदा कह गए सीनियर फोटो जर्नलिस्ट संजय त्रिपाठी

हिन्दुस्तान, कानपुर में कार्यरत संजय त्रिपाठी आनन्देश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए गए थे, वहीं दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
Sanjay Tripathi

हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ में कानपुर में कार्यरत वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट संजय त्रिपाठी का शुक्रवार को निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार कानपुर के भैरव घाट पर किया गया।

संजय त्रिपाठी शुक्रवार की सुबह आनन्देश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए गए थे। जैसे ही उन्होंने भगवान के आगे मत्था टेका, उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और वह गिर पड़े। आनन-फानन में संजय को हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जाता है कि कानपुर के चौबेपुर में गुरुवार की देर रात हुई घटना की कवरेज संजय ने ही की थी। इस घटना में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। 

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कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन से जुड़े पूर्व बाल मजदूर को मिला ब्रिटेन का ये प्रतिष्ठित अवॉर्ड

सामाजिक सरोकार के लिए गिरिडीह जिले के दुलिया करमबाल गांव के आदिवासी युवा नीरज मुर्मू को ग्रेट ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2020
neeraj45454

सामाजिक सरोकार के लिए गिरिडीह जिले के दुलिया करमबाल गांव के आदिवासी युवा नीरज मुर्मू को ग्रेट ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। 21 वर्षीय मुर्मू को यह सम्मान गरीब और हाशिए के बच्‍चों को शिक्षित करने के लिए दिया गया है।

बता दें कि नीरज मुर्मू कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन (KSCF) द्वारा संचालित गिरिडीह जिले के दुलिया करमबाल मित्र ग्राम के पूर्व बाल मजदूर थे।

इस अवॉर्ड से हर साल 09 से 25 उम्र की उम्र के उन बच्‍चों और युवाओं को सम्‍मानित किया जाता है, जिन्‍होंने अपनी नेतृत्‍व क्षमता का परिचय देते हुए सामाजिक बदलाव में असाधारण योगदान दिया हो।

नीरज दुनिया के उन 25 बच्‍चों में शामिल हैं जिन्‍हें इस गौरवशाली अवॉर्ड से सम्‍मानित किया गया। नीरज के प्रमाणपत्र में इस बात का विशेष रूप से उल्‍लेख है कि दुनिया बदलने की दिशा में उन्होंने नई पीढ़़ी को प्रेरित और गोलबंद करने का महत्वपूर्ण काम किया है। कोरोना महामारी सकंट की वजह से उन्हें यह अवॉर्ड डिजिडल माध्यम द्वारा आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया।  

गरीब आदिवासी परिवार का नीरज 10 साल की उम्र में ही परिवार का पेट पालने के लिए अभ्रक खदानों में बाल मजदूरी करने लगा। लेकिन, बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के कार्यकर्ताओं ने जब उसे बाल मजदूरी से मुक्‍त कराया, तब उनकी दुनिया ही बदल गई। गुलामी से मुक्त होकर नीरज सत्यार्थी आंदोलन के साथ मिलकर बाल मजदूरी के खिलाफ अलख जगाने लगे। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझा और लोगों को समझा-बुझा कर उनके बच्चों को बाल मजदूरी से छुड़ाकर स्कूलों में दाखिला कराया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई जारी रखते हुए नीरज ने गरीब बच्चों के लिए अपने गांव में एक स्‍कूल की स्‍थापना की है, जिसके माध्यम से वह तकरीबन 200 बच्‍चों को समुदाय के साथ मिलकर शिक्षित करने में जुटे हुए हैं। नीरज ने 20 बाल मजदूरों को भी अभ्रक खदानों से मुक्‍त कराया है।

डायना अवॉर्ड मिलने पर नीरज कहते हैं, ‘इस अवॉर्ड ने मेरी जिम्‍मेदारी को और बढ़ा दिया है। मैं उन बच्‍चों को स्‍कूल में दाखिला दिलाने के काम में और तेजी लाऊंगा, जिनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई है। साथ ही अब मैं बाल मित्र ग्राम के बच्‍चों को भी शिक्षित करने पर अपना ध्‍यान केंद्रित करूंगा।’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं, ‘नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्‍यार्थी मेरे आदर्श हैं और उन्‍हीं के विचारों की रोशनी में मैं बच्चों को शिक्षित और अधिकार संपन्‍न बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा हूं।’

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अमेरिकी मीडिया कंपनियों को लेकर चीन ने चली ये जवाबी चाल

अमेरिका ने पहले चीन के चार शीर्ष सरकारी मीडिया संस्थानों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र करार दिया और ‘विदेशी मिशन’ की श्रेणी में डाल दिया था। अब चीन ने इसका जवाब दिया है।

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2020
china

अमेरिका ने हाल ही में चीन के चार शीर्ष सरकारी मीडिया संस्थानों पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र करार दिया और ‘विदेशी मिशन’ की श्रेणी में डाल दिया था। लिहाजा इसे देखते हुए अब चीन ने एसोसिएट प्रेस सहित चार अमेरिकी मीडिया कंपनियों से उनके कर्मचारियों और कारोबार की जानकारी मांगी है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उसने यह कदम अमेरिका द्वारा चीन के मीडिया संस्थानों पर की गई कार्रवाई के विरोध में उठाया है।

ये भी पढ़ें: निशाने पर आया चीनी मीडिया, 'विदेशी मिशन' पर हैं ये संगठन

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बुधवार को घोषणा की कि ‘एसोसिएट प्रेस’ (एपी), ‘यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल’, ‘सीबीएस’ और ‘नेशनल पब्लिक रेडियो’ के पास अपने कर्मचारियों, वित्तीय परिचालन, अचल संपत्ति  व कुछ अन्य मामलों की जानकारी देने के लिए सात दिन का समय है।

झाओ ने अपनी नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘यह रेखांकित करना जरूरी है कि चीन द्वारा उठाया गया उपरोक्त कदम पूरी तरह से वैध रक्षात्मक कार्रवाई है। अमेरिका ने चीनी मीडिया एजेंसियों पर अपने देश में बिना कारण दमनात्मक कार्रवाई कर उसे इसके लिए मजबूर किया है।’

झाओ ने कहा, 'हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह अपनी गलती को सुधारे और चीनी मीडिया संस्थानों का राजनीतिक दमन रोक और उन पर लगाए गए अनुचित प्रतिबंधों को हटाए।'

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से चीन और अमेरिका एक-दूसरे के मीडिया संस्थानों और उनके कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले अमेरिका ने चीन के चार मीडिया संस्थानों को ‘विदेशी मिशन’ का दर्जा दे दिया था। इससे पहले वह फरवरी में भी पांच चीनी मीडिया संस्थानों को ‘विदेश मिशन’ का दर्जा दे चुका था। उधर, मार्च में चीन ने अमेरिका के दो दर्जन पत्रकारों को निष्कासित कर दिया था, जिन पत्रकारों को देश छो़ड़ने के लिए कहा गया था, उनमें ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’, ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के रिपोर्टर थे। इतना ही नहीं ‘वाइस ऑफ अमेरिका’ और ‘टाइम’ मैगजीन को चीन में अपने कार्यों के बारे में विवरण देने को कहा गया था। चीन की इस कार्रवाई के बाद वॉशिंगटन ने चीन के चार मीडिया संस्थानों को अपने कर्मचारियों को कम करने का आदेश दिया था।

वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों में आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर भी पहले से तनातनी चल रही है। माना जा रहा है कि अब इस कदम से यह तनातनी और बढ़ेगी।  

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पत्रकार के साथ हुई इस घटना की मीडिया संगठनों ने की निंदा, उठाई ये मांग

इस पूरी घटना की निंदा करते हुए मीडिया संगठनों का कहना है कि इस तरह की तमाम शिकायतें पहले भी प्राप्त हुई हैं।

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
HOFE DADA

अरुणाचल प्रदेश में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार पर हुए हमले की ‘द अरुणाचल प्रेस क्लब’ (The Arunachal Press Club), ‘द अरुणाचल प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स’ (the Arunachal Pradesh Union of Working Journalists), ‘द अरुणाचल इलेक्ट्रॉनिक एंड डिजिटल मीडिया एसोसिएशन’ (the Arunachal Electronic & Digital Media Association) और ‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ (IJU) ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

बताया जाता है कि न्यूज वेबसाइट ‘ज्योलू न्यूज’ (Gyoloo News) में कार्यरत पत्रकार होफे दादा (Hofe Dada) सोमवार को लेखी गांव में ‘एसएमएस स्मेलटर्स लिमिटेड’ (SMS Smelters Ltd) कंपनी पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से चार लोगों ने उन्हें टोका और उनमें से एक व्यक्ति ने दादा को थप्पड़ मार दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब दादा ने पीटे जाने का कारण पूछा तो उन व्यक्तियों ने कथित रूप से दादा से सवाल किया कि क्यों पत्रकार बार-बार कंपनी पर सवाल क्यों खड़े करते हैं।    

दादा ने उनसे कहा कि वह तो सिर्फ ऐसे मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे लोग प्रभावित हैं। इसके बाद दादा को वह परिसर छोड़ने के लिए कहा गया, साथ ही चेतावनी दी गई कि ऐसा न करने पर उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। आरोप यह भी है कि उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि दादा को वरिष्ठ पत्रकार तोंगम रीना की तरह अंजाम भुगतना पड़ेगा, जिन्हें वर्ष 2012 में गोली मारी गई थी। इस मामले में दाकान ने निर्जुली पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

इस पूरी घटना की निंदा करते हुए मीडिया संगठनों का कहना है कि इस तरह की तमाम शिकायतें पहले भी प्राप्त हुई हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश पुलिस से इस पूरे मामले की जांच करने की अपील की है। ‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ (IJU) का कहना है कि पुलिस को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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ABP न्यूज नेटवर्क के इस चैनल ने पूरे किए 15 साल, यूं बनाई लोगों के दिलों में जगह

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ का बंगाली न्यूज चैनल ‘एबीपी आनंद’ अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रहा है।

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
ABP News Network

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ABP News Network) का बंगाली न्यूज चैनल ‘एबीपी आनंद’ (ABP Ananda) अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रहा है। अपनी शुरुआत से ही यह चैनल स्थानीय और ऑनग्राउंड रिपोर्टिंग में आगे रहा है, बल्कि बंगाल के लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाने में भी कामयाब रहा है। इस समय में चैनल ने बेस्ट बंगाल के मार्केट में अपनी मजबूत ब्रैंड इक्विटी तैयार की है। चैनल ने ब्रॉडकास्‍ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया की रेटिंग में लगातार सात हफ्ते तक नंबर वन रहने के बाद इस संख्या को लगातार न सिर्फ बनाए रखने बल्कि आगे बढ़ाने की योजना भी बनाई है। टॉप फाइव बांग्ला न्यूज चैनल्स की बार्क की वीकली लिस्ट में लगातार दिखाई देने वाले पांच चैनलों में से, एबीपी आनंद सबसे अधिक सुसंगत और सबसे ज्यादा देखा जाने वाला रहा है।

बताया जाता है कि अपने तमाम यादगार शोज की बदौलत यह चैनल अपने व्युअर्स की खासी पसंद रहा है और दर्शकों तक पहुंच के मामले में 13 हफ्तों तक लगातार (Source: BARC, TG - NCCS 2+, Mkt- WB, Wk 12-24’2020, Cume. Reach in Cr.) पूरे पश्चिम बंगाल में नंबर वन चैनल रहा है। चैनल के अनुसार, इसने न सिर्फ जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (GECs) को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि न्यूज ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में भी काफी बेहतर कर रहा है।

चैनल की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, तमाम मुश्किलों के दौरान यह लोगों के साथ मिलकर खड़ा रहा है और उन्हें दुख व संकट से निकालने में मदद की है। यही नहीं, देश-दुनिया में कहर बरपा रहे कोविड-19 के दौरान भी यह चैनल लोगों को देश-दुनिया के साथ उनके जिलों/कस्बों से जुड़े न्यूज अपडेट्स देने में भी आगे रहा है।  

इसके अलावा, महामारी के दौरान विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हाल ही में ‘एबीपी आनंद’ ने राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के साथ-साथ आईसीएसई (ICSE) और आइएससी (ISC) के नौवीं और 12वीं कक्षाओं के छात्रों के लिए वर्चुअल कक्षाएं प्रसारित की हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार, एबीपी आनंद के कुछ लोकप्रिय कार्यक्रमों में ‘खैबर पास फूड फेस्टिवल’ (Khaibar Pass Food Festival) शामिल है। यह कोलकाता के सबसे बड़े ऑनग्राउंड फूड फेस्टिवल्स में शामिल है जो बंगाल के फूड कल्चर को दर्शाता है। इसकी सफलता ने नॉर्थ बंगाल, साउथ बंगाल और नॉर्थ 24 परगनाओं में तीन अन्य खैबर पास कार्यक्रम (Khaibar Pass Events) का मार्ग प्रशस्त किया। इसके अलावा बंगाल की जानी-मानी हस्तियों को सम्मानित करने के लिए एक अवॉर्ड शो सेरा बंगाली (Sera Bangali) और विभिन्न विषयों पर लोगों को गहराई से जानकारी देने के लिए एक डिबेट शो ‘जुक्ती टोको’ (Jukti-Tokko) भी इसकी पेशकश में शामिल है। बताया जाता है कि इन स्पेशल पहल के जरिये ‘एबीपी आनंद’ कोलकाता में घर-घर में जाना माना नाम और देशभर के बंगाली ऑडियंस का सबसे विश्वासपात्र बन गया है।

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कोरोना ने छीन ली इस टीवी पत्रकार की जिंदगी

मुख्यमंत्री सहायता कोष से पत्रकार के परिजनों को दी जाएगी पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
E Velmurugan

देश में कोरोनावयरस (कोविड-19) पीड़ितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस महामारी की चपेट में आकर अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं तमाम लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। कोविड-19 की चपेट में आने वालों में तमाम मीडियाकर्मी भी शामिल हैं।

कोविड-19 की चपेट में आकर जान गंवाने वालों की लिस्ट में एक नाम और शामिल हो गया है। दरअसल, तमिलनाडु के एक न्यूज चैनल में सीनियर वीडियोग्राफर के तौर पर कार्यरत ई वेलमुरूगन (E Velmurugan) का कोविड-19 की चपेट में आकर निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,  तकरीबन 41 वर्षीय वेलमुरूगन चेन्नई स्थित राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल (RGGGH) में भर्ती थे, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें 14 जून को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।  

ई वेलमुरूगन के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा है। वेलमुरूगन के निधन के बाद मुख्यमंत्री ईके पलनीस्वानी, उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और डीएमके प्रेजिडेंट एमके स्टालिन समेत तमाम राजनेताओं और पत्रकारों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

यही नहीं, ईके पलनीस्वानी ने मुख्यमंत्री राहत कोष से वेलमुरूगन के परिवार को पांच लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। वहीं तीन अन्य मंत्रियों सी विजयभास्कर, डी जयकुमार और कादंबर सी राजू ने भी घोषणा की है कि वे पीड़ित पत्रकार के परिवार को अपनी जेब से 50-50 हजार रुपए देंगे। वेलमुरूगन की पत्नी राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में कॉन्ट्रैक्ट पर नर्स का काम करती हैं, उनकी नौकरी को सरकार ने स्थायी कर दिया है।

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वरिष्ठ पत्रकार गोविंद सिंह को मिली इस विवि के पत्रकारिता विभाग की कमान

मूलतः पिथौरागढ़ के रहने वाले गोविंद सिंह पहले भी इस यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

Last Modified:
Monday, 29 June, 2020
Govind Singh

तमाम मीडिया संस्थानों में अहम पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके वरिष्ठ पत्रकार गोविंद सिंह ने अब अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्होंने उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी, हल्द्वानी के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष के रूप में जॉइन कर लिया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में गोविंद सिंह ने इस खबर की पुष्टि की है।  

मूलतः पिथौरागढ़ के रहने वाले गोविंद सिंह ने अपने करियर की शुरुआत देहरादून के ‘इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च’ (आईसीएआर) में बतौर अनुवादक की थी। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वर्ष 1982 में टाइम्स में बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट मुंबई से की। वहां धर्मयुग और नवभारत टाइम्स में भी उन्होंने काम किया। नवभारत के बाद वे आईडीबीआई, कोलकाता में हिंदी अधिकारी बने। वर्ष 1990 में सहायक संपादक के रूप में नभाटा, दिल्ली पहुंचे और 1999 तक यहां रहे। नवभारत के बाद गोविंद सिंह ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की ओर रुख किया और डिप्टी एडिटर के रूप में पहले जी न्यूज फिर आजतक पहुंचे। आजतक में वह सीनियर प्रड्यूसर के रूप में रिसर्च डिपार्टमेंट के हेड बने।

आजतक के बाद वर्ष 2002 में गोविंद सिंह ने एसोसिएट एडिटर के रूप में आउटलुक जॉइन किया और फिर अमेरिकन एंबेसी की हिंदी मैगजीन स्पैम के एडिटर के रूप में नई पारी शुरू की। 2005 में गोविंद सिंह अमर उजाला के एसोसिएट एडिटर बने। बाद में यहां उन्हें सीनियर एसोसिएट एडिटर फिर एग्जिक्यूटिव एडिटर बना दिया गया। जहां से वे हिन्दुस्तान के कार्यकारी संपादक बने।

हिन्दुस्तान के बाद गोविंद सिंह ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में बतौर प्रोफेसर नई पारी शुरू की। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू में अपनी सेवाएं दीं और अब फिर से उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में उन्होंने वापसी की है। इस बार उन्हें पत्रकारिता विभाग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। प्रो. सिंह ने करीब 15 वर्षों तक दिल्‍ली विश्वविद्यालय में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में पत्रकारिता का अध्यापन कार्य किया है। समाचार4मीडिया की ओर से नई पारी के लिए गोविंद सिंह को शुभकामनाएं।  

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कोरोना ने निगल ली एक और पत्रकार की जिंदगी

देश-दुनिया में कोहराम मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) ने एक और पत्रकार की जिंदगी निगल ली

Last Modified:
Monday, 29 June, 2020
ChandraShekhar

देश-दुनिया में कोहराम मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) ने एक और पत्रकार की जिंदगी निगल ली। खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर का कोरोना की वजह से निधन हो गया है। वे दिल्ली के लोकनायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में भर्ती थे।

वे ‘इंडिया न्यूज’, ‘जी न्यूज’, ‘हमार टीवी’ और ‘न्यूज वर्ल्ड इंडिया’ में काम कर चुके थे। मूल रूप से बिहार के रहने वाले चंद्रशेखर अपने पीछे बुजुर्ग मां, पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं।

बताया जाता है कि कुछ समय पूर्व चंद्रशेखर की नौकरी चली गई थी। इससे वह काफी आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। इन दिनों वह नौकरी की तलाश में जुटे हुए थे। इस बीच वह कोरोना की चपेट में आ गए और उनका निधन हो गया।

बता दें कि कोरोनावायरस की चपेट में आकर देश में अब तक तमाम लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें तमाम मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। हाल ही में ‘आजतक’ की डिजिटल विंग में कार्यरत पत्रकार हुमा खान की भी कोरोना की चपेट में आकर मौत हो चुकी है।

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इतनी कम उम्र में जिंदगी की जंग हार गईं पत्रकार हुमा खान

काफी दिनों से मुरादाबाद से कर रही थीं वर्क फ्रॉम होम, जांच कराने पर पॉजिटिव निकला था कोरोना टेस्ट

Last Modified:
Monday, 29 June, 2020
Huma Khan

देश में कोरोनायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन इसकी चपेट में आकर कई लोगों की मौत हो रही है। खबर है कि इस महामारी के कारण हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ में कार्यरत महिला पत्रकार हुमा खान की मौत हो गई है।

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद की रहने वाली हुमा खान ‘आजतक’ की ऑनलाइन विंग में काम करती थीं। वह यहां करीब डेढ़ साल से कार्यरत थीं। कोरोनावायरस (कोविड-19) औऱ लॉकडाउन के कारण सुरक्षा की दृष्टि से 'आजतक' ने अपने कई एम्प्लॉयीज को घर से काम ( वर्क फ्रॉम होम ) करने की अनुमति दे रखी है। इसके तहत वे लंबे समय से घर से ही काम कर रही थीं।

22 जून को तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने अपना कोरोना टेस्ट कराया था, जो पॉजिटिव निकला। इसके बाद 24 जून को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 26 जून को उनका निधन हो गया। करीब 31 वर्षीय हुमा खान इससे पहले ‘न्यूज 18’  की अंग्रेजी वेबसाइट में नौकरी कर रही थीं। हुमा की इस तरह से मौत के बाद उनके सहकर्मी स्तब्ध हैं और सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

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महज इतनी सी बात पर पत्रकार की कर दी जमकर पिटाई

पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
Attack

पत्रकार के साथ रास्ते में मारपीट का मामला सामने आया है। घटना पंजाब के जीरकपुर (Zirakpur) इलाके की है। ‘द ट्रिब्यून’ (The Tribune) में छपी खबर के मुताबिक, पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

पुलिस को दी अपनी शिकायत में ढकोली निवासी पत्रकार सज्जन देव शर्मा ने बताया कि 24 जून को वह अपनी कार से किसी काम से बाहर जा रहे थे। रास्ते में आरोपित यशपाल शर्मा ने अपनी कार बीच सड़क पर गेट खोलकर खड़ी कर रखी थी। सज्जन देव ने अपनी शिकायत में बताया कि जब उसने वहां से गुजरने के लिए अपनी कार का हॉर्न बजाया तो यशपाल नाराज हो गया और गालीगलौच करने लगा। इसके बाद यशपाल ने अपने बेटे और एक अन्य व्यक्ति को मौके पर बुलाकर सज्जन देव के साथ मारपीट शुरू कर दी।

मारपीट के दौरान रॉड से किए गए हमले में घायल पीड़ित को उपचार के लिए ढकोली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां गंभीर हालत को देखते हुए उसे चंडीगढ़ सेक्टर-दो स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया। मामले में जांच जारी है।

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