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इंटरनेट पर लॉन्च होने वाली ये फिल्म उठाएगी 'ग्रेड' सिस्टम पर सवाल...
इंटरनेट पर लॉन्च होने वाली ये फिल्म उठाएगी 'ग्रेड' सिस्टम पर सवाल...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वो कहते हैं ना कला को कोई बांट नहीं सकता या उसे कोई ग्रेड नहीं दिया जा सकता है। कला तो कला होती है और वो बस आपकी सृजनात्मकता को उभारकर लाती है। इसलिए कला अच्छी या बुरी नहीं होती।
हिंदी फिल्मों में ग्रेड के चलन के बारे में तो आपने सुना ही होगा, ग्रेड मतलब जब फिल्म और कलाकार को उनकी प्रतिभा के मुताबिक एक
समाचार4मीडिया ब्यूरो
9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वो कहते हैं ना कला को कोई बांट नहीं सकता या उसे कोई ग्रेड नहीं दिया जा सकता है। कला तो कला होती है और वो बस आपकी सृजनात्मकता को उभारकर लाती है। इसलिए कला अच्छी या बुरी नहीं होती।
हिंदी फिल्मों में ग्रेड के चलन के बारे में तो आपने सुना ही होगा, ग्रेड मतलब जब फिल्म और कलाकार को उनकी प्रतिभा के मुताबिक एक ग्रेड यानी दर्जा दे दिया जाता है। उस पर एक ठप्पा लगा दिया जाता है। हिंदी फिल्मों में ग्रेड के हिसाब से ही कलाकार और फिल्मों का चयन होता है। अब सवाल ये है कि क्या ऐसा करना सही है। क्या कोई छोटा कलाकार बेहतर काम नहीं कर सकता या कोई छोटी बजट की मामूली सी फिल्म बेहतर नहीं हो सकती है। लेकिन इंडस्ट्री में ऐसा नहीं होता है, यहां फिल्मों को एक ग्रेड दे दिया जाता है। इससे उनकी प्रतिभा और कला को तराशने का एक मौका भी हम खो देते हैं। कुछ इसी बात को आधार बनाकर इसी मुद्दे पर रोशनी डालते हुए शॉर्ट फिल्म निर्माता यश ठाकुर 'ग्रेड' (Grade) नाम की शॉर्ट फिल्म लेकर आ रहे हैं। क्या हमें हक है कि हम किसी की कला को कोई नंबर दें। ग्रेड इस आधार पर की फिल्म में काम कर रहे कलाकार कौन है , कितने पैसे लगाकर फिल्म बनी है और फिल्म में कोई बोल्ड सीन है या साफ फिल्म है। फिल्म अच्छी होती है या बुरी लेकिन फिल्म और कला का दर्जा और ग्रेड बनाना क्या गलत नहीं है ? इन्हीं सवालों को उठाएगी ये फिल्म।
बहुत से कलाकारों और निर्दशक जैसे अनुराग कश्यप, आमिर खान ने बहुत बार इन विषयों को उठाया है, आमिर खान को भी 'डेल्ही बेल्ली' जैसी फिल्म बनाने के बाद काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। क्या हम हिन्दुस्तान में कभी हॉलीवुड या बाकी देशों की तरह स्वच्छंद विचारों के साथ हर तरह की फिल्म बना पायेंगे ? बहुत से सवाल उठे है और उठते रहेंगे। फिल्मों में ग्रेड के विषय पर हिन्दुस्तान में बनी ये फिल्म अपनी तरह की पहली और अनोखी फिल्म है।
यश ठाकुर की फिल्म 'ग्रेड' जो सच्ची घटनाओं पर आधारित है। शायद आपको फिल्मों को ग्रेड की मानसिकता से दूर कर देगी। इस फिल्म को थिएटर में नहीं, बल्कि इंटरनेट पर रीलीज किया जाएगा क्योंकि इस फिल्म में राधिका आप्टे की चर्चित फिल्म पार्च्ड( parched) की तरह बोल्ड सीन्स हैं जो शायद सेंसर बोर्ड कभी पास नहीं करेगा। अगर अजय देवगन की पार्च्ड फिल्म ग्रेड नहीं अवार्ड दिए जायेंगे तो छोटे कलाकार की ऐसी फिल्म को ग्रेड क्यों। फिल्म में लीड रोल की भूमिका निभाई है मृणालिनी चटर्जी ने, जिन्होंने पहले टॉलीवुड में काम किया है। फिल्म का निर्देशन अनूप समद्दार ने किया है। अब देखना ये है कि क्या हिन्दुस्तान की जनता इस फिल्म के नाम के आगे A ,B या C लगाकर इसका ग्रेड बनायेगी या फिर कुछ परिवर्तन आएगा।
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