पुरोधा संपादकों की कहानीः हरिवंश की जुबानी

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’...

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Friday, 05 April, 2019
Wardha

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’ कार्यक्रम 27 से 29 मार्च 2019 तक आयोजित किया गया। हरिवंश ने हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन 27 मार्च 2019 की शाम गणेश मंत्री के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। दूसरे दिन 28 मार्च 2019 को हरिवंश ने नारायण दत्त और धर्मवीर भारती पर और तीसरे दिन 29 मार्च 2019 की सुबह प्रभाष जोशी के व्यक्तित्व पर व्याख्यान दिया।

पहले दिन का कार्यक्रम हिंदी विश्वविद्यालय के गालिब सभागार तथा दूसरे व तीसरे दिन का कार्यक्रम जनसंचार विभाग के माधव राव सप्रे सभा कक्ष में आयोजित हुआ। पुरोधा संपादकों का पुण्य स्मरण करते हुए हरिवंश ने कहा कि आज की पत्रकारिता में विचार, मूल्य और चरित्र की कमी है। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता पूंजी प्रधान है, इसलिए वह उन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे पा रही है, जो मानवता के भविष्य के लिए जरूरी हैं।

हरिवंश ने कहा कि आज के पत्रकार तथ्यों की जांच किए बिना खबरें करते हैं। वे देश की आर्थिक स्थिति के बारे में सही बात लिखने से बचते हैं। वे यह भी नहीं बताते कि हमारा देश गंभीर आर्थिक परेशानियों में है और जिस आर्थिक नीति पर चल रहे हैं, उसका भविष्य खतरनाक है। ऐसे मौके पर उन संपादकों का स्मरण जरूरी है, जो विचार और साहस की पत्रकारिता के आखिरी युग की कड़ी थे। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि विकास का मौजूदा रास्ता खतरनाक है। इसलिए सभ्यता को कोई और मार्ग चुनना होगा। ऐसे समय में महात्मा गांधी सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के महत्त्वपूर्ण कथन पागल दौड़ का जिक्र करते हुए कहा कि भौतिक सुविधाओं को जमा करने के लालच में हमारी सभ्यता की नैतिक ऊंचाई एक इंच भी नहीं बढ़ी है। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री, नारायण दत्त, धर्मवीर भारती और प्रभाष जोशी पर गांधी युग का प्रभाव था और वे देश, समाज, भाषा और संस्कृति निर्माण के लिए पत्रकारिता कर रहे थे। उनका उद्देश्य व्यावसायिक नहीं था। इसीलिए वे अपने समय में बहुत सारी बातों को स्पष्ट तौर पर कह सके। गणेश मंत्री के जीवन और कृतित्व का जिक्र करते हुए हरिवंश ने कहा कि वे समाजवादी विचारों से प्रभावित थे। वे डॉ. राम मनोहर लोहिया के अंधभक्त थे। इसके बावजूद वे मार्क्स, गांधी और डॉ. आंबेडकर के गहन अध्येता थे और उन्होंने उनके विचारों को ‘धर्मयुग’ जैसे व्यापक प्रसार वाली पत्रिका में जगह दी। उन्होंने कहा कि गणेश मंत्री का पत्रकारीय जीवन उनके विद्यार्थी जीवन का ही विस्तार है,क्योंकि अध्ययनशीलता उनमें अंत तक बनी रही।

हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज संपादक के होते हुए भी गणेश मंत्री छह लाख प्रसार वाली ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका में न सिर्फ रचनात्मक साहित्य के लिए स्थान निकालते थे, बल्कि राजनीतिक विचारों के लिए भी जगह बना लेते थे। हरिवंश ने बताया कि उन्होंने आपातकाल के दिनों में ‘टाइम्स आफ इंडिया’ समूह में पत्रकारिता शुरू की और उस समय गणेश मंत्री ने उन्हें हतोत्साहित किया था। लेकिन जब उन्हें लगा कि वे पत्रकारिता ही करेंगे तो अपने छोटे भाई के रूप में स्नेह और सहयोग दिया और उनके लेखन व विचारों को गढ़ा। गणेश मंत्री के प्रभाव का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जेल से छूटने के बाद जार्ज फर्नांडीज जैसे नेता ने सबसे पहले गणेश मंत्री को ही इंटरव्यू दिया। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री के पिता राजस्थान सरकार में मंत्री थे पर उनकी सरकारी गाड़ी का उपयोग करने से मना करके गणेश मंत्री ने दर्शा दिया था कि पत्रकार के लिए नैतिकता और चरित्र का कितना महत्त्व होता है। गणेश मंत्री ने एक बार देश के सबसे बड़े उद्योगपति के बेटे की शादी का कार्ड और उसके साथ आया उपहार भी लेने से मना कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि वे उद्योगपति उनके किसी कार्यक्रम में क्या आएंगे और क्या वे उन्हें इतना महंगा उपहार दे पाएंगे। 

कार्यक्रम के दूसरे दिन पूर्वाह्न में नारायण दत्त के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त मूलतः तेलुगूभाषी थे। उनका परिवार कर्नाटक में बसा, जहां उन्होंने कन्नड़ सीखी। फिर नारायण दत्त बंबई (अब मुंबई) आए, जहां उन्होंने मराठी, तमिल सीखी। वे हिंदी के गंभीर अध्येता थे ही और भाषा के मामले में बहुत संवेदनशील थे। नारायण दत्त किसी भी प्रकार की भाषा त्रुटि को बर्दाश्त नहीं करते थे। यह उनके ‘नवनीत’ और ‘पीटीआई’ की हिंदी फीचर सेवा के संपादन के दौरान कई बार साबित हुआ। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त शोध कर्ता भी थे और कांग्रेस के सौ वर्ष पूरे होने पर उन्होंने पीटीआई फीचर से कांग्रेस के इतिहास और उसके अध्यक्षों पर जो शृंखला चलाई, वह सबसे प्रामाणिक दस्तावेज है। रिटायर होने के बाद नारायण दत्त बेहद लोकप्रिय कैलेंडर ‘काल निर्णय’ का संपादन करते थे और वह त्रुटिहीन होता था। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त के बड़े भाई एचवाई शारदा प्रसाद इंदिराजी के प्रेस सलाहकार थे। वे भी सादगी की प्रतिमूर्ति थे। एक बार वे ‘धर्मयुग’ के दफ्तर आए और टाइम्स के अधिकारियों से पूछा-हरिवंश से मिलना है। वे मेरी कुर्सी के सामने आकर बैठ गए और इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि बीमारी के दौरान मैंने नारायण दत्त की सेवा-सुश्रुषा की।

कार्यक्रम के दूसरे दिन अपराह्न धर्मवीर भारती के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती ने कठोर श्रम से ‘धर्मयुग’ को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाया। उन्होंने ‘धर्मयुग’ को सात लाख की प्रसार संख्या तक पहुंचाया और उसे पाठकों की संख्या में परिवर्तित किया जाय तो वह संख्या एक करोड़ तक जाती है। इतना बड़ा पाठक वर्ग धर्मवीर भारती के कठोर श्रम से निर्मित हुआ। वे ठीक सुबह साढ़े नौ बजे दफ्तर आ जाते थे। उनके मन-मस्तिष्क और कार्यालय की आलमारियों में ‘धर्मयुग’ की योजना चलती रहती थी। वे निरंतर अपने उप संपादकों को बुलाकर हर पेज की तात्कालिक और अग्रिम सामग्री और तस्वीर के बारे में तय करते थे। उन्होंने स्वयं 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की रिपोर्टिंग की। बड़े-बड़े नेता और अभिनेता उनसे मिलने के लिए ‘धर्मयुग’ आते थे, किंतु वे काम में इतने मग्न रहते थे कि उनसे नहीं मिल पाते थे। इस वजह से कुछ लोगों द्वारा उन्हें तानाशाह और घमंडी कहकर लांछित किया गया, जबकि उन्होंने मुनादी शीर्षक से कविता लिखकर इंदिराजी की तानाशाही को चुनौती दी थी। वे इतने भावुक और संवेदनशील थे कि जयप्रकाश नारायण पर 4 नवंबर 1974 को पटना में पुलिस लाठी चार्ज की तस्वीर देखकर विचलित हो गए। वह तस्वीर रघुराय ने खींची थी, जिसमें पुलिस जेपी पर लाठी ताने हुई थी। उस तस्वीर को देखकर धर्मवीर भारती चार-पांच दिनों तक भयंकर बेचैन रहे और नौ नवंबर की रात दस बजे मुनादी कविता के रूप में उनका आक्रोश उबल पड़ा। धर्मवीर भारती ने ‘धर्मयुग’ को बनाने के लिए अपने साहित्यकार की बलि चढ़ा दी। यही वजह है कि गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, अंधा युग और कनुप्रिया जैसी श्रेष्ठ रचनाएं धर्मयुग का संपादक बनने से पहले लिखी गईं। हरिवंश ने बताया कि किस तरह उनसे भारतीजी ने ‘धर्मयुग’ की कई आमुख कथाएं लिखवाईं।

कार्यक्रम के चौथे सत्र में 29 मार्च 2019 को पूर्वाह्न हरिवंश ने प्रभाष जोशी के रचनात्मक अवदान पर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रभाष जोशी प्रामाणिक पत्रकारिता के जीवंत उदाहरण थे। समझ, दृष्टि, भाषा संस्कार, संचार कौशल जैसे विशिष्ट गुणों में प्रभाष जोशी एक आदर्श थे, उनके जैसा अब तक कोई दूसरा नहीं हुआ है। आज बहुत कम लोग हैं जो सही को सही कहने का साहस रखते हैं, प्रभाष जोशी वैसी ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वे जहां भी होते थे सिर्फ उनकी मौजूदगी ही प्रभावपूर्ण होती थी। हरिवंश जी ने कहा कि मुल्क के बुनियादी सवालों पर देशज ज्ञान से किसी समस्या का हल निकालने वाले प्रभाष जी जैसा दूसरा कोई पत्रकार अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभाष जी जमीनी हकीकत की लोक समझ रखते थे। वे हिंदी के अकेले ऐसे संपादक थे, जिन्होंने अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के तीन संस्करणों का संपादन करने के बाद हिंदी पत्रकारिता की और ‘जनसत्ता’ के संस्थापक संपादक बने थे। रामनाथ गोयनका के साथ लगभग 20 वर्षों तक काम करने वाले प्रभाष जोशी अकेले संपादक थे। इतने वर्षों तक कोई संपादक गोयनका के साथ काम नहीं कर पाता था।

हरिवंश ने बताया कि बिल गेट्स और स्टीव जॉब्स ने अपने-अपने क्षेत्रों में जो उल्लेखनीय कार्य किया है वैसा ही कार्य प्रभाष जोशी ने हिंदी पत्रकारिता में किया है। प्रभाष जी ने उच्च स्तर का ‘जनसत्ता’ अखबार निकाला, जिसकी पंच लाइन ‘सबकी खबर ले, सबको खबर दे’ वर्तमान में भी प्रासंगिक बनी हुई है। इस अखबार में उनके द्वारा लिखा जाने वाला कॉलम ‘कागद कारे’ बहुत लोकप्रिय हुआ। एक बार धर्मवीर भारती ने जनसत्ता अखबार को देखकर कहा था, ‘यह अद्वितीय अखबार है।‘ हर व्याख्यान के बाद हरिवंश ने श्रोताओं के प्रश्नों के जवाब भी दिए। हरिवंश के विभिन्न व्याख्यान कार्यक्रमों की अध्यक्षता कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र और सप्रे संग्रहालय, भोपाल के संस्थापक विजय दत्त श्रीधर ने की। सप्रे संग्रहालय, भोपाल की निदेशक डा. मंगला अनुजा और आवासीय लेखिका डा. पुष्पिता अवस्थी ने भी पुरोधा संपादकों पर अपने विचार रखे। विभिन्न सत्रों का संचालन राजेश लेहकपुरे, धरवेश कठेरिया, अशोक मिश्र और रेणु सिंह ने किया। स्वागत भाषण और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कृष्णकुमार सिंह, प्रो. मनोज कुमार, अरुण कुमार त्रिपाठी, संदीप कुमार वर्मा और वैभव उपाध्याय ने किया। विषय प्रवर्तन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत पुरोधा संपादकों के छायाचित्रों पर पुष्पांजलि अर्पण से हुई। जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने कुलगीत और स्वागत लोकगीत भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने प्रतिदिन अपना प्रायोगिक अखबार ‘मीडिया समय’ निकाला। विद्यार्थियों के प्रायोगिक रेडियो बुलेटिन ‘वर्धा वाणी’ एवं प्रायोगिक टेलिविजन बुलेटिन ‘वर्धा दर्शन’ का प्रतिदिन प्रसारण किया गया।

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हिंदी पखवाड़े का समापन कुछ यूं करेगा प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान IIMC

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘भारतीय जन संचार संस्थान’ (IIMC) में आयोजित हिंदी पखवाड़े का समापन 28 सिंतबर को आयोजित एक वेबिनार से होगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 25 September, 2020
Last Modified:
Friday, 25 September, 2020
IIMC

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘भारतीय जन संचार संस्थान’ (IIMC) में आयोजित हिंदी पखवाड़े का समापन 28 सिंतबर को आयोजित एक वेबिनार से होगा, जिसका विषय है ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय भाषाएं’। इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख विद्धान अपने विचार व्यक्त करेंगे।

भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि इस वेबिनार में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री मुख्य अतिथि होंगे, जबकि अध्यक्षता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा करेंगे। कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखिका और दैनिक हिन्दुस्तान की कार्यकारी संपादक जयंती रंगनाथन मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगी। वेबिनार के प्रमुख वक्ताओं के तौर पर ‘नवभारत टाइम्स’, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, ‘दैनिक जागरण’, नई दिल्ली के सह-संपादक अनंत विजय और पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी जयशंकर बाबू अपने विचार प्रकट करेंगे।

प्रो. द्विवेदी ने इस आयोजन के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हाल ही में घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारत सरकार ने भारतीय भाषाओं के सम्मान के लिए विशेष कदम उठाए हैं। भारतीय भाषाओं की प्रगति से ही राष्ट्र गौरव और समाज के आत्मविश्वास एवं स्वाभिमान में भी वृद्धि होगी। भारतीय भाषाओं को सम्मान मिलने से न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव हो सकते हैं, बल्कि इससे रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो सकती है। इसलिए संस्थान ने इस वर्ष हिंदी पखवाड़े का आयोजन भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाने की भावना के साथ किया है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि इस वर्ष हमारा ये प्रयास था कि हिंदी पखवाड़ा संवाद और विमर्श का प्रबल माध्यम सिद्ध हो। इसलिए इस बार हमने हिंदी पखवाड़े की शुरुआत ‘भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद’ विषय पर चर्चा से की। हर वर्ष की तरह इस बार भी हिंदी पखवाड़े के तहत भारतीय जन संचार संस्थान में हिंदी पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं की प्रदर्शनी, निबंध प्रतियोगिता, हिंदी टिप्पणी एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिता, हिंदी काव्य पाठ प्रतियोगिता, हिंदी टंकण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस बार पखवाड़े के दौरान भारतीय सूचना सेवा प्रशिक्षुओं के लिए एक कार्यशाला का आयोजन भी किया गया, ताकि उन्हें रोजमर्रा के सरकारी कामकाज को हिंदी में करने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जा सके।

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इंडिया टुडे ग्रुप से विदाई लेकर एंकर निदा अहमद ने जॉइन किया ये चैनल

इंडिया टुडे ग्रुप के हिंदी न्यूज चैनल ‘तेज’ को हाल ही में अलविदा कहने वाली न्यूज एंकर निदा अहमद ने अब अपनी नई पारी का आगाज कर दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 24 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 24 September, 2020
nida

इंडिया टुडे ग्रुप के हिंदी न्यूज चैनल ‘तेज’ को हाल ही में अलविदा कहने वाली न्यूज एंकर निदा अहमद ने अब अपनी नई पारी का आगाज कर दिया है। वे अब ‘जी यूपी-उत्तराखंड ’ में एंकर की भूमिका निभाती नजर आएंगी। उन्हें यहां प्रड्यूसर की जिम्मेदारी दी गई है।

बता दें कि वे अक्टूबर, 2018 से ‘तेज’ न्यूज चैनल की टीम हिस्सा थी। यूपी-उत्तराखंड के रीजनल न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ से वे यहां पहुंची थीं। ‘तेज’ में वे सीनियर एसोसिएट प्रड्यूसर के साथ-साथ एंकरिंग की भी जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं। ‘समाचार प्लस’ में उन्होंने बतौर एंकर करीब दो साल काम किया।

निदा अहमद ने अपने करियर की शुरुआत क्राइम रिपोर्टर के रूप में की। 'तेज' और 'समाचार प्लस' के अतिरिक्त निदा 'ईटीवी नेटवर्क' और 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' में भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने यहां अगस्त 2015 से मई, 2016 तक एंकरिंग की भूमिका निभाई, जबकि इसके पहले  निदा 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' से अपने करियर की शुरुआत बतौर असिसटेंट प्रड्यूसर की थी, जहां से ही उन्होंने एंकरिंग की बारीकियों को सीखा और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका निभाई।

आज निदा अहमद की गिनती मीडिया की उभरती तेज तर्रार एंकर में की जाने लगी है। समाजिक सेवा में भी निदा का ​​योगदान हमेशा सराहनीय रहा है। गरीब बच्चों की मदद के लिये निदा को स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया जा  चुका है। निदा अहमद को मीडिया इंडस्ट्री में भी काफी पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

 

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‘न्यूज24’ से अलग होकर आकाश वत्स ने अब यहां शुरू की नई पारी

हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज24’ के आउटपुट डेस्क में सीनियर प्रड्यूसर के पद से हाल ही में विदाई लेने वाले आकाश वत्स ने अब अपनी नई पारी की घोषणा कर दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 24 September, 2020
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Thursday, 24 September, 2020
Akash

हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज24’ के आउटपुट डेस्क में सीनियर प्रड्यूसर के पद से हाल ही में विदाई लेने वाले आकाश वत्स ने अब अपनी नई पारी की घोषणा कर दी है। बता दें कि ‘टीवी9 भारतवर्ष’ में बतौर सीनियर प्रड्यूसर वे अपनी नई पारी का आगाज कर रहे हैं। वे आउटपुट टीम के साथ मिलकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

आकाश ‘न्यूज नेशन’ से ‘न्यूज24’ पहुंचे थे। बतौर सीनियर प्रड्यूसर वे ‘न्यूज नेशन’ में बहुत ही कम समय रहे। इससे पहले वे ‘जी हिन्दुस्तान’ में प्रड्यूसर की भूमिका में थे। यहां रहते हुए उन्होंने कई राज्यों में रिपोर्टिंग भी की। जून, 2018 में वे ‘इंडिया न्यूज’ से अलग होकर ही यहां आए थे।

आकाश 'इंडिया न्यूज' के साथ सितंबर, 2016 में बतौर प्रड्यूसर जुड़े थे। इसके पहले वे 'समाचार प्लस यूपी/उत्तराखंड' में कार्यरत थे। यहां उन्होंने ढ़ाई साल तक अपना योगदान दिया। 

आकाश वत्स ने आर.जे. के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने 'नेपाल वन' टीवी, 'नेटवर्क टेन' और' समाचार प्लस' में एंकरिंग भी कर चुके हैं। वे वॉयस ओवर के लिए भी जाने जाते हैं और तमाम पैकेजेज में अपनी आवाज दे चुके हैं।

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पत्रकार की बेटी को दबंगों ने जिंदा जलाया, इलाज के दौरान हुई मौत

यूपी के सुलतानपुर जिले में पत्रकार की बेटी को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है। सुल्तानपुर जिले के बल्दीराय थाना क्षेत्र में सोमवार को कुछ दबंगों ने पत्रकार की बेटी को जिंदा जला दिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 23 September, 2020
journalist

यूपी के सुलतानपुर जिले में पत्रकार की बेटी को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है। सुल्तानपुर जिले के बल्दीराय थाना क्षेत्र में सोमवार को कुछ दबंगों ने पत्रकार की बेटी को जिंदा जला दिया, जिसके बाद देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने बताया कि बेटी घर के बाहर नल पर पानी भरने गई थी, तभी उसे जला दिया। परिजनों ने आरोपियों और पुलिस की मिलीभगत का आरोप भी लगाया।

मंगलवार रात बल्दीराय थाना क्षेत्र का टरणसा मजरे ऐंजर गांव छावनी में तब्दील था। भारी संख्या में पुलिस बल लगाकर पत्रकार प्रदीप सिंह की बेटी श्रद्धा सिंह का अंतिम संस्कार कराया गया। यहां लोगों की भारी भीड़ जमा थी। वहीं इस बीच जेल में बंद मृतक युवती के पत्रकार पिता ने परोल पर पहुंचकर अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। उन्होंने इस दौरान बल्दीराय थाने के प्रभारी और देहली बाजार चौकी इंचार्ज पर गंभीर आरोप लगाए। फिलहाल पुलिस ने हत्याकांड से जुड़े चार में से तीन आरोपियों को पकड़ने की बात कही है।

जानकारी के मुताबिक, सोमवार शाम जब पत्रकार की बेटी श्रद्धा सिंह दरवाजे पर लगे नल से पानी भर रही थी, तभी परसौली के रहने वाले आरोपी सुभाष, महंथ और जय करन वहां पहुंचे। इन सभी ने सरेआम उसे बंधक बनाकर दरवाजे पर ही उसे जला दिया और फरार हो गए। आग की लपटों से घिरी बेटी की आवाज सुनकर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। आनन-फानन में उसे लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र धनपत गंज लेकर आए। श्रद्धा सिंह 90% जल चुकी थी, लिहाजा इस अवस्था में उसका मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान हुआ और फिर डॉक्टर्स ने उसे ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। जहां रात में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

वहीं, लड़की के पिता पत्रकार प्रदीप सिंह ने एसओ बल्दीराय पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले जो एफआईआर हुई थी, उसमें आजतक पुलिस ने कोई गिरफ्तारी नहीं की। एसओ बल्दीराय ने धारा बदल दी। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने का ये नतीजा है कि आज उनका मनोबल बढ़ा है।

प्रदीप ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में जो घटना हुई उसमें चौकी इंचार्ज ने बदलाव कर नई तहरीर ली है। पहली तहरीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। सभी के पास मौजूद है नहीं होगी तो हम उपलब्ध करा देंगे। चौकी इंचार्ज खुर्शीद अहमद पूरी तरह से विरोधियों से मिले हुए हैं। उन्होंने ये भी कहा कि एसओ ने मुकदमा 302 में चार्जशीट किया है, जबकि मुकदमा 304 का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 जून को हुई घटना में स्थानीय पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगा था। बाद में प्रदीप की पत्नी अर्चना की तहरीर पर आईजी रेंज फैजाबाद डॉक्टर संजीव गुप्ता के निर्देश पर जानलेवा हमले समेत आईपीसी की 10 धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें बेटी के हत्यारोपी भी शामिल हैं। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बाद में 307 की धारा आरोपियों पर से हटा दी गई थी, जो हत्यारोपियों के लिए संजीवनी का काम कर गई।  

फिलहाल सोमवार को बेटी श्रद्धा को जिंदा जलाने वाले दरिंदों के खिलाफ पुलिस ने मां की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से दी गई जानकारी के अनुसार नामजद 3 आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जबकि एक आरोपी पिछले एक महीने से हरियाणा में रह रहा है।  

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युवाओं को मीडिया की बारीकियों से कुछ यूं रूबरू कराएगा श्री अधिकारी ब्रदर्स ग्रुप

इस कार्यकम का उद्देश्य युवाओं को मीडिया के बारे में शिक्षित करना है। कार्यक्रम को गवर्नेंस नाउ के एमडी कैलाश अधिकारी होस्ट करेंगे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
SAB Group

‘श्री अधिकारी ब्रदर्स’ (SAB) समूह ने युवाओं को मीडिया के बारे में शिक्षित करने के लिए 'मास्टरमाइंड्स' (Masterminds) नाम से एक कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इस कार्यक्रम को ‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance now) के एमडी कैलाश अधिकारी होस्ट करेंगे। इस कार्यक्रम के द्वारा युवाओं को इंडस्ट्री लीडर्स व विषय विशेषज्ञों से मीडिया की बारीकियां सीखने का मौका मिलेगा। देश में महंगी होती जा रही शिक्षा व सीटों की सीमित उपलब्धता के बीच सभी को मुफ्त शिक्षा सुलभ बनाने की दिशा में समूह द्वारा यह पहला कदम है।

'मास्टरमाइंड्स' की लॉन्चिंग के मौके पर ‘सब ग्रुप’ (SAB Goup)के मैनेजिंग डायरेक्टर मार्कंड अधिकारी मार्कंड अधिकारी ने कहा,‘डिजिटल युग में तेजी से बदल रहीं सभी चीजों की तरह शिक्षा का भी एक नया रूप सामने आया है। अब वो दिन नहीं रहे जब शिक्षा केवल औपचारिक संस्थानों (Formal Institution) में जाकर ग्रहण करने तक सीमित थी। आजकल शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है और इसके साथ ही सभी चीजों को तेजी से व्यापक होने की जरूरत है। मुझे लगता है कि यह तरीका सिर्फ एजुकेशन के बारे में नहीं है बल्कि अनंत ज्ञान के बारे में जानकारी जुटाने के लिए हैं। ऐसे में हमने महसूस किया कि हमें एक मंच के माध्यम से युवाओं को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक पहल करने की जरूरत है। इसके लिए ही यह शुरुआत की गई है।’

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम को ‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाश अधिकारी होस्ट करेंगे, जो विजिनरी टॉक सीरीज के तहत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं देश की जानी-मानी शख्सियतों का इंटरव्यू कर रहे हैं। ‘गवर्नेंस नाउ’ के प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कर जूम (Zoom) के जरिये इस कार्यक्रम में शामिल हुआ जा सकता है। बता दें कि महामारी की शुरुआत में प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए ‘श्री अधिकारी ब्रदर्स’ ने ‘the Sri Adhikari Brothers initiative 2.0’ पहल शुरू की थी। इस पहल के तहत समूह द्वारा तमाम श्रमिकों के हुनर की पहचान कर उन्हें आर्थिक रूप से मदद का बीड़ा उठाया गया। 

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आकाशवाणी व दूरदर्शन में तमाम बड़े पदों पर कार्यरत रहे अरुण कुमार वर्मा का निधन

बिहार की मीडिया के जाने-माने नाम वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार वर्मा का निधन हो गया है। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
Arun Kumar Verma

बिहार की मीडिया के जाने-माने नाम वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार वर्मा का निधन हो गया है। ‘आकाशवाणी’ और ’दूरदर्शन न्यूज’ पटना में न्यूज एडिटर रह चुके अरुण कुमार वर्मा (68) पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। पटना के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। पीआईबी (PIB) पटना के पूर्व जॉइंट डायरेक्टर/डायरेक्टर और बिहार स्टेट इंफॉर्मेशन कमिश्नर, पटना रह चुके अरुण कुमार वर्मा ने सोमवार को इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।

‘भारतीय सूचना सेवा’ (इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस) में चयन के बाद अरुण कुमार वर्मा को ‘आकाशवाणी’ पटना में असिस्टेंट न्यूज एडिटर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद वे यहां पर न्यूज एडिटर, डिप्टी डायरेक्टर (न्यूज), जॉइंट डायरेक्टर/डायरेक्टर (न्यूज) बने। इसके अलावा उन्होंने ‘दूरदर्शन’ पटना में भी न्यूज एडिटर और जॉइंट डायरेक्टर/डायरेक्टर (न्यूज) के पद पर भी कार्य किया था।  

‘इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस’ में चयन से पूर्व अरुण कुमार वर्मा ने बिहार सरकार के एक विभाग में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में भी काम किया था। अरुण कुमार वर्मा के निधन पर तमाम पत्रकारों व गणमान्य लोगों ने शोक जताते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है।

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मीडिया एजुकेशन के भविष्य की दिशा पर दिग्गजों ने कुछ यूं रखी अपनी राय

आईआईएमसी की ओर से 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारत में पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा की भविष्य की दिशा' विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
Media Education

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) द्वारा सोमवार को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारत में पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा की भविष्य की दिशा' विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र’ के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, ‘मीडिया शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मीडिया एजुकेशन काउंसिल की आवश्यकता है। इसकी मदद से न सिर्फ पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के पाठ्यक्रम में सुधार होगा, बल्कि मीडिया इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार पत्रकार भी तैयार किये जा सकेंगे।'

डॉ. जोशी का यह भी कहना था कि नई शिक्षा नीति में कहीं भी मीडिया या पत्रकारिता शब्द का जिक्र नहीं है, लेकिन हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रेरणा लेते हुए जनसंचार और पत्रकारिता शिक्षा के भविष्य के बारे में सोचना होगा। उन्होंने कहा, अख्तर अंसारी का एक शेर है, 'अब कहां हूं कहां नहीं हूं मैं, जिस जगह हूं वहां नहीं हूं मैं, कौन आवाज दे रहा है मुझे, कोई कह दो यहां नहीं हूं मैं।' यानी जो कहीं नहीं है, वो हर जगह है। जैसे शिक्षा नीति में मीडिया शब्द न होकर भी हर जगह है। उन्होंने कहा कि तकनीक ने मीडिया को भी बदल दिया है। आज स्कूलों में 3डी तकनीक से पढ़ाई हो रही है।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पॉइंट 11 की चर्चा करते हुए कहा, ‘हमें होलिस्टिक एजुकेशन पर ध्यान देना होगा। इस संदर्भ में अगर हम भारतीय संस्कृति की बात करें, तो प्राचीन काल में भारतीय शिक्षा-क्रम का क्षेत्र बहुत व्यापक था। शिक्षा में कलाओं की शिक्षा भी अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखती थीं और इनमें चौंसठ कलाएं महत्वपूर्ण हैं। अगर हम देखें तो ये कलाएं आज हमारे अत्याधुनिक समाज का हिस्सा हैं।’ 

नई शिक्षा नीति है एक क्रांतिकारी कदम: कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. गीता बामजेई ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी कदम है। प्रो. बामजेई ने कहा कि अगर हम इस शिक्षा नीति को सही तरह से अपनाते हैं, तो ये नीति हमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की तरफ ले जाएगी। उन्होंने कहा कि इस शिक्षा नीति से ज्ञान और कौशल के माध्यम से एक नए राष्ट्र का निर्माण होगा। मीडिया शिक्षा के परिदृश्य पर चर्चा करते हुए प्रो. बामजेई ने कहा, ‘अब समय आ गया है कि हमें जनसंचार शिक्षा में बदलाव करना चाहिए। हमें पत्रकारिता के नए पाठ्यक्रमों का निर्माण करना चाहिए, जो आज के समय के हिसाब से हों।‘ उन्होंने कहा कि हमें अपना विजन बनाना होगा कि पत्रकारिता के शिक्षण को हम किस दिशा में लेकर जाना चाहते हैं।

मीडिया शिक्षण में चल रही है स्पर्धा: नवभारत, इंदौर के पूर्व संपादक प्रो. कमल दीक्षित ने कहा कि मीडिया शिक्षण में एक स्पर्धा चल रही है। अब हमें यह तय करना होगा कि हमारा लक्ष्य स्पर्धा में शामिल होने का है, या फिर बेहतर पत्रकारिता शिक्षण का माहौल बनाने का है। प्रो. दीक्षित ने कहा कि आज के समय में पत्रकारिता बहुत बदल गई है, इसलिए पत्रकारिता शिक्षा में भी बदलाव आवश्यक है। आज लोग जैसे डॉक्टर से अपेक्षा करते हैं, वैसे पत्रकार से भी सही खबरों की अपेक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि हम ऐसे कोर्स बनाएं, जिनमें कंटेट के साथ साथ नई तकनीक का भी समावेश हो। प्रो. दीक्षित ने कहा कि हमें यह तय करना होगा कि पत्रकारिता का मकसद क्या है। क्या हमारी पत्रकारिता बाजार के लिए है, कॉरपोरेट के लिए है, सरकार के लिए है या फिर समाज के लिए है। अगर हमें सच्चा लोकतंत्र चाहिए तो पत्रकारिता को अपने लक्ष्यों के बारे में बहुत गहराई से सोचना होगा।

जो चीज 'चैलेंज' करती है, वहीं 'चेंज' करती है: हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रो. कंचन मलिक का कहना था कि अगर हम नई शिक्षा नीति का गहन अध्ययन करें, तो हम पाएंगे इसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आत्मनिर्भर बनने पर जोर देती है। इसे हम इस तरह समझ सकते हैं, कि 'जो चीज आपको चैलेंज करती है, वही आपको चेंज करती है।' प्रो. मलिक ने कहा कि जनसंचार शिक्षा का प्रारूप बदलना हमारे लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रेरणा लेकर हम यह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया शिक्षा का काम सिर्फ छात्रों को ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री के हिसाब से तैयार भी करना है। मीडिया शिक्षकों को इस विषय पर ध्यान देना होगा।

न्यू मीडिया है अब न्यू नॉर्मल: न्यू मीडिया पर अपनी बात रखते हुए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की प्रोफेसर पी. शशिकला ने कहा कि न्यू मीडिया अब न्यू नॉर्मल है। हम सब जानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण लाखों नौकरियां गई हैं। इसलिए हमें मीडिया शिक्षा के अलग अलग पहलुओं पर ध्यान देना होगा। हमें बाजार के हिसाब से प्रोफेशनल तैयार करने चाहिए।

क्षेत्रीय भाषाओं पर ध्यान देने की जरूरत: मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एहतेशाम अहमद खान ने कहा कि नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं पर ध्यान देने की बात कही गई है। जनसंचार शिक्षा के क्षेत्र में भी हमें इस पर ध्यान देना होगा। मीडिया शिक्षा के संस्थानों को तकनीक के हिसाब से खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंचार संस्थान को इस विषय पर सभी मीडिया संस्थानों का मार्गदर्शन का काम करना चाहिए।

समाज के विकास के लिए संवाद आवश्यक: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कृपाशंकर चौबे ने कहा कि किसी भी समाज को आगे ले जाने और उसके विकास के लिए संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति गुणवत्ता की बात करती है। इसके साथ ही हमें शिक्षा के बाजारीकरण और महंगी होती शिक्षा पर लगाम लगानी होगी। संवाद और संचार का भारतीय मॉडल: भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने कहा कि यह देश में पहला मौका है, जब हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में जनसंचार शिक्षा के बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य एक बेहतर दुनिया बनाना है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि मीडिया शिक्षा की यात्रा को वर्ष 2020 में 100 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन हमें अभी भी बहुत काम करना बाकी है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा के पास विदेशी मॉडल की तुलना में बेहतर संचार मॉडल हैं। इसलिए हमें संवाद और संचार के भारतीय मॉडल के बारे में बातचीत शुरू करनी चाहिए। इसके अलावा भारत की शास्त्रार्थ परंपरा पर भी हमें चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण चिंता का विषय है। इसके खिलाफ सभी लोगों को एकत्र होना चाहिए। हमें समाज के अंतिम आदमी के लिए शिक्षा के द्वार खोलने चाहिए। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जनसंचार शिक्षा में हमें क्षेत्रीय भाषाओं पर काम करने की जरूरत है।

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राष्ट्र स्तरीय इस प्रतियोगिता के लिए रचनाएं आमंत्रित

इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए 18 अक्टूबर 2020 तक अपनी प्रविष्टि भेजी जा सकती हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2020
Last Modified:
Monday, 21 September, 2020
Writing

बेटी बचाओ अभियान के तहत महिला बाल विकास एवं जनकल्याण समिति ‘सरोकार’ की ओर से ‘बिटिया के जन्मदिन के बधाई गीत लेखन’ राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रविष्टि भेजने की अंतिम तारीख 18 अक्टूबर 2020 रखी गई है।

इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

1: प्रतिभागी अपनी मौलिक रचना ही भेजें। रचना के साथ मौलिकता का प्रमाण लिखित में देना आवश्यक है।

2: रचनाएं हिंदी अथवा भारत की किसी भी लोकभाषा में हो सकती हैं।

3: एक या एक से अधिक रचनाएं भेजी जा सकती हैं।

4: प्रतियोगी द्वारा भेजी गई रचनाएं उनके नाम के साथ सरोकार के अभियान में उपयोग की जा सकेंगी।

5: अपनी रचना ई-मेल- sarokarzindagi@gmail.com अथवा वॉट्सऐप नंबर- 9926311225 पर लिखित में भेजी जा सकती हैं।

6: रचना के साथ अपनी एक रंगीन तस्वीर और परिचय में अपना नाम, उम्र, जेंडर, व्यवसाय, मोबाइल नंबर, ई-मेल तथा रचना की भाषा का उल्लेख अनिवार्य है। ऐसा न करने पर रचना अस्वीकृत कर दी जाएगी।

7: चयनित सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों को सरोकार की ओर से एक प्रमाण पत्र और साथ उन्हें सरोकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रचना की प्रस्तुति करने का अवसर दिया जाएगा।

इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए मोबाइल नंबर-9926311225 अथवा sarokarzindagi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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कोरोना ने निगल ली प्रसार भारती के पूर्व ADG अभय कुमार पाधी की जिंदगी

कोरोनावायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। तमाम लोग इसके कारण अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं कोरोना के संक्रमण से पीड़ित कई लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2020
Last Modified:
Monday, 21 September, 2020
Abhay Padhi

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। तमाम लोग इसके कारण अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं कोरोना के संक्रमण से पीड़ित कई लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। ओडिशा से खबर है कि ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) के पूर्व एडीजी (Additional Director General) अभय कुमार पाधी (Abhay Kumar Padhi) का कोविड-19 की चपेट में आकर सोमवार को निधन हो गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 71 वर्षीय पाधी ने कुछ दिन पूर्व कोविड-19 का टेस्ट कराया था, जो पॉजिटिव आया था। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए ओडिशा के बारगढ़ कस्बे में स्थित कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार को उन्होंने आखिरी सांस ली।

रिपोर्टिस के अनुसार, पाधी ने प्रसार भारती को वर्ष 1976 में जॉइन किया था। उन्होंने ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) और ‘दूरदर्शन’ (DD) के साथ भी काम किया था। उन्होंने 1970 में गंगाधर मेहर कॉलेज से स्नातक और संबलपुर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रसारण एजेंसी में अपना करियर शुरू किया था। पूर्व में वह ‘आईआईएमसी’ (IIMC) ढेंकनाल में गेस्ट फैकल्टी भी रहे थे।  

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इस मंच पर जुटेंगे मीडिया जगत के दिग्गज, तमाम पहलुओं पर होगी चर्चा

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) 21 सितंबर को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारत में पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा की भविष्य की दिशा' विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन करने जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
IIMC

प्रमुख मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) 21 सितंबर को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारत में पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा की भविष्य की दिशा' विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन करने जा रहा है। वेबिनार का आयोजन गूगल मीट पर शाम चार बजे से 5:45 बजे तक किया जाएगा।

इस वेबिनार में मीडिया शिक्षा एवं पत्रकारिता क्षेत्र के बुद्धिजीवी भाग लेंगे। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे तथा वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. गीता बामजेई कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगी। कार्यक्रम की शुरुआत ‘आईआईएमसी’ के महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी के वक्तव्य से होगी।

प्रोफेसर द्विवेदी ने बताया कि इस वेबिनार में नवभारत, इंदौर के पूर्व संपादक प्रोफेसर कमल दीक्षित, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कंचन मलिक, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्विद्यालय के प्रोफेसर कृपाशंकर चौबे, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की प्रोफेसर पी. शशिकला एवं मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एहतेशाम अहमद खान भी अपने विचार रखेंगे।   

संस्थान की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, वेबिनार का संचालन ‘आईआईएमसी’ के भारतीय भाषायी पत्रकारिता के विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद प्रधान करेंगे। रेडियो एवं टेलिविजन विभाग की प्रो.शाश्वती गोस्वामी धन्यवाद ज्ञापन करेंगी।

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