पुरोधा संपादकों की कहानीः हरिवंश की जुबानी

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’...

Last Modified:
Friday, 05 April, 2019
Wardha

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’ कार्यक्रम 27 से 29 मार्च 2019 तक आयोजित किया गया। हरिवंश ने हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन 27 मार्च 2019 की शाम गणेश मंत्री के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। दूसरे दिन 28 मार्च 2019 को हरिवंश ने नारायण दत्त और धर्मवीर भारती पर और तीसरे दिन 29 मार्च 2019 की सुबह प्रभाष जोशी के व्यक्तित्व पर व्याख्यान दिया।

पहले दिन का कार्यक्रम हिंदी विश्वविद्यालय के गालिब सभागार तथा दूसरे व तीसरे दिन का कार्यक्रम जनसंचार विभाग के माधव राव सप्रे सभा कक्ष में आयोजित हुआ। पुरोधा संपादकों का पुण्य स्मरण करते हुए हरिवंश ने कहा कि आज की पत्रकारिता में विचार, मूल्य और चरित्र की कमी है। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता पूंजी प्रधान है, इसलिए वह उन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे पा रही है, जो मानवता के भविष्य के लिए जरूरी हैं।

हरिवंश ने कहा कि आज के पत्रकार तथ्यों की जांच किए बिना खबरें करते हैं। वे देश की आर्थिक स्थिति के बारे में सही बात लिखने से बचते हैं। वे यह भी नहीं बताते कि हमारा देश गंभीर आर्थिक परेशानियों में है और जिस आर्थिक नीति पर चल रहे हैं, उसका भविष्य खतरनाक है। ऐसे मौके पर उन संपादकों का स्मरण जरूरी है, जो विचार और साहस की पत्रकारिता के आखिरी युग की कड़ी थे। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि विकास का मौजूदा रास्ता खतरनाक है। इसलिए सभ्यता को कोई और मार्ग चुनना होगा। ऐसे समय में महात्मा गांधी सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के महत्त्वपूर्ण कथन पागल दौड़ का जिक्र करते हुए कहा कि भौतिक सुविधाओं को जमा करने के लालच में हमारी सभ्यता की नैतिक ऊंचाई एक इंच भी नहीं बढ़ी है। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री, नारायण दत्त, धर्मवीर भारती और प्रभाष जोशी पर गांधी युग का प्रभाव था और वे देश, समाज, भाषा और संस्कृति निर्माण के लिए पत्रकारिता कर रहे थे। उनका उद्देश्य व्यावसायिक नहीं था। इसीलिए वे अपने समय में बहुत सारी बातों को स्पष्ट तौर पर कह सके। गणेश मंत्री के जीवन और कृतित्व का जिक्र करते हुए हरिवंश ने कहा कि वे समाजवादी विचारों से प्रभावित थे। वे डॉ. राम मनोहर लोहिया के अंधभक्त थे। इसके बावजूद वे मार्क्स, गांधी और डॉ. आंबेडकर के गहन अध्येता थे और उन्होंने उनके विचारों को ‘धर्मयुग’ जैसे व्यापक प्रसार वाली पत्रिका में जगह दी। उन्होंने कहा कि गणेश मंत्री का पत्रकारीय जीवन उनके विद्यार्थी जीवन का ही विस्तार है,क्योंकि अध्ययनशीलता उनमें अंत तक बनी रही।

हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज संपादक के होते हुए भी गणेश मंत्री छह लाख प्रसार वाली ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका में न सिर्फ रचनात्मक साहित्य के लिए स्थान निकालते थे, बल्कि राजनीतिक विचारों के लिए भी जगह बना लेते थे। हरिवंश ने बताया कि उन्होंने आपातकाल के दिनों में ‘टाइम्स आफ इंडिया’ समूह में पत्रकारिता शुरू की और उस समय गणेश मंत्री ने उन्हें हतोत्साहित किया था। लेकिन जब उन्हें लगा कि वे पत्रकारिता ही करेंगे तो अपने छोटे भाई के रूप में स्नेह और सहयोग दिया और उनके लेखन व विचारों को गढ़ा। गणेश मंत्री के प्रभाव का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जेल से छूटने के बाद जार्ज फर्नांडीज जैसे नेता ने सबसे पहले गणेश मंत्री को ही इंटरव्यू दिया। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री के पिता राजस्थान सरकार में मंत्री थे पर उनकी सरकारी गाड़ी का उपयोग करने से मना करके गणेश मंत्री ने दर्शा दिया था कि पत्रकार के लिए नैतिकता और चरित्र का कितना महत्त्व होता है। गणेश मंत्री ने एक बार देश के सबसे बड़े उद्योगपति के बेटे की शादी का कार्ड और उसके साथ आया उपहार भी लेने से मना कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि वे उद्योगपति उनके किसी कार्यक्रम में क्या आएंगे और क्या वे उन्हें इतना महंगा उपहार दे पाएंगे। 

कार्यक्रम के दूसरे दिन पूर्वाह्न में नारायण दत्त के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त मूलतः तेलुगूभाषी थे। उनका परिवार कर्नाटक में बसा, जहां उन्होंने कन्नड़ सीखी। फिर नारायण दत्त बंबई (अब मुंबई) आए, जहां उन्होंने मराठी, तमिल सीखी। वे हिंदी के गंभीर अध्येता थे ही और भाषा के मामले में बहुत संवेदनशील थे। नारायण दत्त किसी भी प्रकार की भाषा त्रुटि को बर्दाश्त नहीं करते थे। यह उनके ‘नवनीत’ और ‘पीटीआई’ की हिंदी फीचर सेवा के संपादन के दौरान कई बार साबित हुआ। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त शोध कर्ता भी थे और कांग्रेस के सौ वर्ष पूरे होने पर उन्होंने पीटीआई फीचर से कांग्रेस के इतिहास और उसके अध्यक्षों पर जो शृंखला चलाई, वह सबसे प्रामाणिक दस्तावेज है। रिटायर होने के बाद नारायण दत्त बेहद लोकप्रिय कैलेंडर ‘काल निर्णय’ का संपादन करते थे और वह त्रुटिहीन होता था। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त के बड़े भाई एचवाई शारदा प्रसाद इंदिराजी के प्रेस सलाहकार थे। वे भी सादगी की प्रतिमूर्ति थे। एक बार वे ‘धर्मयुग’ के दफ्तर आए और टाइम्स के अधिकारियों से पूछा-हरिवंश से मिलना है। वे मेरी कुर्सी के सामने आकर बैठ गए और इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि बीमारी के दौरान मैंने नारायण दत्त की सेवा-सुश्रुषा की।

कार्यक्रम के दूसरे दिन अपराह्न धर्मवीर भारती के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती ने कठोर श्रम से ‘धर्मयुग’ को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाया। उन्होंने ‘धर्मयुग’ को सात लाख की प्रसार संख्या तक पहुंचाया और उसे पाठकों की संख्या में परिवर्तित किया जाय तो वह संख्या एक करोड़ तक जाती है। इतना बड़ा पाठक वर्ग धर्मवीर भारती के कठोर श्रम से निर्मित हुआ। वे ठीक सुबह साढ़े नौ बजे दफ्तर आ जाते थे। उनके मन-मस्तिष्क और कार्यालय की आलमारियों में ‘धर्मयुग’ की योजना चलती रहती थी। वे निरंतर अपने उप संपादकों को बुलाकर हर पेज की तात्कालिक और अग्रिम सामग्री और तस्वीर के बारे में तय करते थे। उन्होंने स्वयं 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की रिपोर्टिंग की। बड़े-बड़े नेता और अभिनेता उनसे मिलने के लिए ‘धर्मयुग’ आते थे, किंतु वे काम में इतने मग्न रहते थे कि उनसे नहीं मिल पाते थे। इस वजह से कुछ लोगों द्वारा उन्हें तानाशाह और घमंडी कहकर लांछित किया गया, जबकि उन्होंने मुनादी शीर्षक से कविता लिखकर इंदिराजी की तानाशाही को चुनौती दी थी। वे इतने भावुक और संवेदनशील थे कि जयप्रकाश नारायण पर 4 नवंबर 1974 को पटना में पुलिस लाठी चार्ज की तस्वीर देखकर विचलित हो गए। वह तस्वीर रघुराय ने खींची थी, जिसमें पुलिस जेपी पर लाठी ताने हुई थी। उस तस्वीर को देखकर धर्मवीर भारती चार-पांच दिनों तक भयंकर बेचैन रहे और नौ नवंबर की रात दस बजे मुनादी कविता के रूप में उनका आक्रोश उबल पड़ा। धर्मवीर भारती ने ‘धर्मयुग’ को बनाने के लिए अपने साहित्यकार की बलि चढ़ा दी। यही वजह है कि गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, अंधा युग और कनुप्रिया जैसी श्रेष्ठ रचनाएं धर्मयुग का संपादक बनने से पहले लिखी गईं। हरिवंश ने बताया कि किस तरह उनसे भारतीजी ने ‘धर्मयुग’ की कई आमुख कथाएं लिखवाईं।

कार्यक्रम के चौथे सत्र में 29 मार्च 2019 को पूर्वाह्न हरिवंश ने प्रभाष जोशी के रचनात्मक अवदान पर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रभाष जोशी प्रामाणिक पत्रकारिता के जीवंत उदाहरण थे। समझ, दृष्टि, भाषा संस्कार, संचार कौशल जैसे विशिष्ट गुणों में प्रभाष जोशी एक आदर्श थे, उनके जैसा अब तक कोई दूसरा नहीं हुआ है। आज बहुत कम लोग हैं जो सही को सही कहने का साहस रखते हैं, प्रभाष जोशी वैसी ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वे जहां भी होते थे सिर्फ उनकी मौजूदगी ही प्रभावपूर्ण होती थी। हरिवंश जी ने कहा कि मुल्क के बुनियादी सवालों पर देशज ज्ञान से किसी समस्या का हल निकालने वाले प्रभाष जी जैसा दूसरा कोई पत्रकार अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभाष जी जमीनी हकीकत की लोक समझ रखते थे। वे हिंदी के अकेले ऐसे संपादक थे, जिन्होंने अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के तीन संस्करणों का संपादन करने के बाद हिंदी पत्रकारिता की और ‘जनसत्ता’ के संस्थापक संपादक बने थे। रामनाथ गोयनका के साथ लगभग 20 वर्षों तक काम करने वाले प्रभाष जोशी अकेले संपादक थे। इतने वर्षों तक कोई संपादक गोयनका के साथ काम नहीं कर पाता था।

हरिवंश ने बताया कि बिल गेट्स और स्टीव जॉब्स ने अपने-अपने क्षेत्रों में जो उल्लेखनीय कार्य किया है वैसा ही कार्य प्रभाष जोशी ने हिंदी पत्रकारिता में किया है। प्रभाष जी ने उच्च स्तर का ‘जनसत्ता’ अखबार निकाला, जिसकी पंच लाइन ‘सबकी खबर ले, सबको खबर दे’ वर्तमान में भी प्रासंगिक बनी हुई है। इस अखबार में उनके द्वारा लिखा जाने वाला कॉलम ‘कागद कारे’ बहुत लोकप्रिय हुआ। एक बार धर्मवीर भारती ने जनसत्ता अखबार को देखकर कहा था, ‘यह अद्वितीय अखबार है।‘ हर व्याख्यान के बाद हरिवंश ने श्रोताओं के प्रश्नों के जवाब भी दिए। हरिवंश के विभिन्न व्याख्यान कार्यक्रमों की अध्यक्षता कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र और सप्रे संग्रहालय, भोपाल के संस्थापक विजय दत्त श्रीधर ने की। सप्रे संग्रहालय, भोपाल की निदेशक डा. मंगला अनुजा और आवासीय लेखिका डा. पुष्पिता अवस्थी ने भी पुरोधा संपादकों पर अपने विचार रखे। विभिन्न सत्रों का संचालन राजेश लेहकपुरे, धरवेश कठेरिया, अशोक मिश्र और रेणु सिंह ने किया। स्वागत भाषण और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कृष्णकुमार सिंह, प्रो. मनोज कुमार, अरुण कुमार त्रिपाठी, संदीप कुमार वर्मा और वैभव उपाध्याय ने किया। विषय प्रवर्तन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत पुरोधा संपादकों के छायाचित्रों पर पुष्पांजलि अर्पण से हुई। जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने कुलगीत और स्वागत लोकगीत भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने प्रतिदिन अपना प्रायोगिक अखबार ‘मीडिया समय’ निकाला। विद्यार्थियों के प्रायोगिक रेडियो बुलेटिन ‘वर्धा वाणी’ एवं प्रायोगिक टेलिविजन बुलेटिन ‘वर्धा दर्शन’ का प्रतिदिन प्रसारण किया गया।

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इस खबर को लेकर मीडिया से नाराज हुए राष्ट्रपति, कही ये बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया से नाराजगी जगजाहिर है। मीडिया के प्रति एक बार फिर उनकी नाराजगी सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2020
trump4

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया से नाराजगी जगजाहिर है। मीडिया के प्रति एक बार फिर उनकी नाराजगी सामने आई है। दरअसल, मीडिया में कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित देश की स्थिति के बीच ट्रंप के गोल्फ खेलने की खबर सामने आई थी। लिहाजा इसी खबर को लेकर ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधा है। ट्रंप ने मीडिया पर हमला बोलते हुए कहा कि मुझे पता था कि यह होगा।

राष्ट्रपति ने इस मामले पर सफाई देते हुए ट्वीट में लिखा, ‘बाहर निकलने के लिए या थोड़ा व्यायाम करने के लिए मैं हर वीकेंड पर गोल्फ खेलता हूं। फर्जी और भ्रष्टाचारी न्यूज ने इसको ऐसे दिखाया जिससे यह पाप की तरह लगने लगा।’

ट्रंप ने आगे लिखा, 'मीडिया ने यह क्यों नहीं कहा कि मैंने तीन महीने बाद पहली बार गोल्फ खेला है और अगर मैं तीन वर्ष बाद भी गोल्फ खेलता तब भी वे इसी तरह से ही कहते। वे नफरत और बेईमानी के आदि हो चुके है तथा वे वास्तव में विक्षिप्त हैं।'

अमेरिका के प्रमुख प्रकाशनों ने दरअसल देश में कोरोना वायरस से एक लाख लोगों की मौत के बीच ट्रम्प के वर्जीनिया में गोल्फ खेले जाने को लेकर उनकी कड़ी आलोचना की थी जिसको लेकर उन्होंने यह ट्विट किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका (Coronavirus in America) में अबतक कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 17 लाख पहुंच गई है, जबकि मौत का आंकड़ा 99,459 हो गया है। कोविड-19 (COVID-19) से 3 लाख 53 हजार लोग ठीक भी हुए हैं।

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MakeMyTrip से अलग होकर अनंत पटेल ने इस OTT प्लेटफॉर्म के साथ शुरू की नई पारी

MakeMyTrip के अनंत पटेल अब ‘डिज्नी+ हॉटस्टार’ (Disney+ Hotstar) के साथ जुड़ गए हैं। उन्हें यहां मार्केटिंग डायरेक्टर बनाया गया है

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
Anant Patel

MakeMyTrip के अनंत पटेल अब ‘डिज्नी+ हॉटस्टार’ (Disney+ Hotstar) के साथ जुड़ गए हैं। उन्हें यहां मार्केटिंग डायरेक्टर बनाया गया है। पटेल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट को अपडेट कर इस बात की जानकारी दी है।

उन्हें एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है और उनका पिछला असाइनमेंट  MakeTyTrip के साथ था, जहां वे मार्केटिंग में असोसिएट डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत थे। वे पिछले चार वर्षों तक इसकी कंपनी के साथ जुड़े हुए थे।

ट्रैवेल पोर्टल से पहले, पटेल विभिन्न पदों पर रहते हुए OLX, Hungama और JUSTDIAL जैसी कंपनियों के साथ जुड़े हुए थे।

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ खेल पत्रकार डॉ. स्वरूप बाजपेयी

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ खेल पत्रकार और समीक्षक डॉ. स्वरूप बाजपेयी का रविवार को निधन हो गया। वे  78 वर्ष के थे और बाजपेयी पिछले कुछ समय से गले के कैंसर से पीड़ित थे

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
Dr. Swaroop Bajpai

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ खेल पत्रकार और समीक्षक डॉ. स्वरूप बाजपेयी का रविवार को निधन हो गया। वे  78 वर्ष के थे और बाजपेयी पिछले कुछ समय से गले के कैंसर से पीड़ित थे। इसकी वजह से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता चला गया और उन्होंने रविवार को आखिरी सांस ली।

क्रिकेट के प्रसिद्ध सांख्यिकीविद रहे डॉ. बाजपेयी को क्रिकेट का चलता फिरता इनसाइक्लोपीडिया माना जाता था। उनके परिवार में पत्नी के अलावा 5 बेटियां और 1 बेटा है।

एक सप्ताह के भीतर शहर में ख्यात खेल हस्तियों के दुनिया से विदा होने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले बास्केटबॉल के पूर्व नेशनल खिलाड़ी और नए बॉस्केटबॉल कॉम्पलेक्स के कर्णधार भूपेंद्र बंडी जी का निधन हुआ था और अब डॉ. बाजपेयी हमारे बीच नहीं रहे हैं।

डॉ. बाजपेयी कई दशक तक ‘नईदुनिया’ अखबार से जुड़े रहे। यही नहीं,  उन्होंने 1983 से 2005 तक ‘नईदुनिया’ की खेल पत्रिका 'खेल हलचल' का जिम्मा भी संभाला। वे शहर के ऐसे शख्स थे, जिन्हें क्रिकेट के आंकड़ें मुंह जुबानी याद रहते थे।

1999 में डॉ. बाजपेयी ने वन-डे क्रिकेट विश्व कप पर पुस्तक का प्रकाशन भी किया। उन्होंने इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई पूरी की और फिर बाद में यहीं पर इतिहास के विभागाध्यक्ष रहे। उन्हें कॉलेज से इस कदर लगाव था कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वहीं पढ़ाते रहे।

डॉ. बाजपेयी मध्य भारत के एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने होलकर कालीन क्रिकेट और कुश्ती पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। उन्हें कविताओं का भी शौक था। छात्र जीवन में वे राजनीति में भी सक्रिय रहे।

हमेशा हंसमुख और लोगों की मदद में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले डॉ. बाजपेयी के अचानक निधन से इंदौर का पूरा खेल जगत स्तब्ध है। मध्यप्रदेश टेबल टेनिस संगठन के आजीवन अध्यक्ष पद्मश्री अभय छजलानी के अलावा, चेयरमैन ओम सोनी, अर्जुन अवॉर्डी कृपाशंकर बिश्नोई ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका अंतिम संस्कार सोमवार सुबह 9 बजे रामबाग मुक्तिधाम में होगा।

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कोरोना की चपेट में आए न्यूज चैनल के एंप्लाई की मौत

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अपनी जान जोखिम में डालकर रिपोर्टिंग कर रहे तमाम मीडियाकर्मी भी इस महामारी की चपेट में आ रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
Corona

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन तमाम लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। कोरोना के संक्रमण के कारण कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसी तरह की एक खबर अब मुंबई से आई है, जहां कोरोना की चपेट में आए इलेक्ट्रॉनिक चैनल के एंप्लाई रोशन डायस (Roshan Dias) का शुक्रवार को निधन हो गया।

बता दें कि रोशन डायस का अप्रैल में कोरोना टेस्ट करवाया गया था। इस टेस्ट में करीब 53 मीडियाकर्मी कोरोना पॉजिटिव मिले थे। रोशना का कोरोना टेस्ट भी पॉजिटिव आया था और उन्हें आइसोलेशन वार्ड में क्वारंटाइन किया गया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां पर उन्होंने शुक्रवार को दम तोड़ दिया।

करीब 46 वर्षीय रोशन डायस के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। रोशन डायस मुंबई में ‘टीवी9मराठी चैनल’ के आईटी विभाग में कार्यरत थे। इससे पहले वह ‘स्टार न्यूज’ में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके थे।

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सैन्य अधिकारी ने चैनल कर्मियों के संक्रमित होने की फैलायी झूठी खबर, मामला दर्ज

सोशल मीडिया पर कोरोना से जुड़ीं अफवाहों का प्रसार तेजी से हो रहा है। इसी बीच एक शरारती युवक ने एक टीवी चैनल के कर्मचारियों के कोरोना पॉजिटिव होने की अफवाह फैला दी

Last Modified:
Saturday, 23 May, 2020
Corona

सोशल मीडिया पर कोरोना से जुड़ीं अफवाहों का प्रसार तेजी से हो रहा है। इसी बीच एक शरारती युवक ने एक टीवी चैनल के कर्मचारियों के कोरोना पॉजिटिव होने की अफवाह फैला दी, जिसके बाद उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हो गई है।

बता दें कि यह खबर उत्तर प्रदेश के नोएडा इलाके की है। इस मामले में पुलिस ने राजेश नामक युवक के खिलाफ थाना फेस-2 में मुकदमा दर्ज किया है।

अपर पुलिस उपायुक्त अंकुर अग्रवाल के मुताबिक, सेक्टर-85 स्थित एक निजी चैनल में काम करने वाले राहुल खन्ना ने थाना फेस-2 में रिपोर्ट दर्ज कराई है कि राजेश नामक युवक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर 20 मई को एक विवादित पोस्ट डाला।

शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने अपने पोस्ट में लिखा कि एक चैनल के बाद अब दूसरे चैनल के 19 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव निकले। आरोपी ने लिखा कि यदि कोई संबंधित चैनल का कर्मचारी किसी के आसपास रहता है, तो उससे दूरी बनाएं। उन्होंने बताया कि उक्त पोस्ट के बाद संबंधित चैनल के अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग से अपने कर्मचारियों की जांच करवाई। जांच में सामने आया कि वर्तमान में चैनल का कोई भी कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव नहीं है। अपर उपायुक्त ने बताया कि थाना फेस- दो में आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

अपर उपायुक्त ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला की आरोपी आगरा जिले में है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपी राजेश को देर रात गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि आरोपी सेना में राडार अधिकारी के रूप में काम करता है और उसे आगरा जिले से गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी को गौतमबुद्ध नगर अदालत में पेश किया जा रहा है।

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कोरोना के खिलाफ 'जंग' में यूं भागीदारी निभा रही पर्वतीय भ्रातृ समाज सेवा समिति

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में लाजपतनगर पर्वतीय भ्रातृ समाज सेवा समिति के कार्यकर्ता जी-जान से जुटे हुए हैं

Last Modified:
Friday, 22 May, 2020
Good Initiative

वैश्विक महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित साहिबाबाद में लाजपतनगर पर्वतीय भ्रातृ समाज सेवा समिति के कार्यकर्ता जी-जान से जुटे हुए हैं। इसके तहत संस्था की पूरी टीम लगातार प्रभावित लोगों की मदद कर रही है। इसके तहत पहले तो संस्था की ओर से आसपास की कॉलोनियों को कोरोना मुक्त करने के लिए हर घर को सैनिटाइज किया गया, फिर भूखे-प्यासे प्रवासी श्रमिकों के लिए भोजन का इंतजाम किया गया।

संस्था के कार्यकर्ताओं द्वारा लगभग 400 लोगों को भोजन के पैकेट वितरण किए गए, जिनमें सामुदायिक भवन लाजपतनगर में ठहराए गए 55 श्रमिकों से लेकर अर्थला मोहन नगर व शालीमार गार्डन तक सभी जगह श्रमिकों को भोजन वितरण किया गया। इसी कड़ी में समाज द्वारा अलग-अलग जगह राह गुजरते प्रवासी मजदूर श्रमिकों को पानी की बोतल, बिस्किट के पैकेट वितरित किए गए।

समाज के अध्यक्ष भूपेन्द्र न्याल, महासचिव देवेंद्र जोशी व उनकी पूरी टीम का कहना है, ‘हम यथासंभव जरूरतमंदों की सेवा करते रहेंगे। इस कार्य मे हमारी मातृ शक्ति का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। इस महामारी के दौरान लगाए गए रक्तदान शिविर के बाद संस्था के पास फोन आया कि किसी व्यक्ति की जान खतरे में है और उसे खून की सख्त आवश्यकता है। संस्था के कार्यकर्ताओं द्वारा तुरंत फोर्टिस अस्पताल में जाकर रक्तदान किया गया। मानव सेवा से बढ़ कर कोई सेवा नहीं है। हम हर व्यक्ति तक संदेश पहुंचाना चाहते है कि इस संकट की घड़ी में आगे आएं और जरूरतमंदों की मदद करें।

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CMRA ने पत्रकार बृजेश श्रीवास्तव पर जताया भरोसा, सौंपी ये जिम्मेदारी

पत्रकारिता के क्षेत्र में राष्ट्रीय विचारों के प्रवाह के लिए कार्यरत संस्था ‘सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एंड एनालिसिस’ (CMRA) ने बृजेश श्रीवास्तव को अपनी राष्ट्रीय टीम में शामिल कर लिया है

Last Modified:
Friday, 22 May, 2020
Brijesh

पत्रकारिता के क्षेत्र में राष्ट्रीय विचारों के प्रवाह के लिए कार्यरत संस्था ‘सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एंड एनालिसिस’ (CMRA) ने बृजेश श्रीवास्तव को अपनी राष्ट्रीय टीम में शामिल कर लिया है। बता दें कि इस संस्था ने उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य नियुक्त किया है।

काशी हिन्दू विश्वविश्वविद्यालय से शिक्षा पूर्ण करने के बाद बृजेश सामाजिक और पत्रकारिता जगत से जुड़ गए। उन्होंने कई वर्ष काशी में पत्रकारिता क्षेत्र  की संस्था विश्व संवाद केन्द्र के प्रमुख का दायित्व निर्वहन किया। बृजेश अमर उजाला, नोएडा में कार्यरत रह चुके हैं, साथ ही आर्थिक जगत की पत्रिका ‘निवेश मंथन’ के सहायक संपादक के तौर पर भी काम किया है। वर्तमान में बृजेश श्रीवास्तव मीडिया सलाहकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।

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कोरोना वायरस के गढ़ में शुरू हुआ संसद का सालाना सत्र, सभी पत्रकारों को कराना होगा टेस्ट

ऐसे में अब ये आदेश जारी किया गया है कि हर पत्रकार को यहां कोरोना वायरस का टेस्ट कराना जरूरी है

Last Modified:
Friday, 22 May, 2020
corona

कोरोना वायरस (Coronavirus) के गढ़ रहे चीन अब वापस पटरी पर लौटने लगा है। शुक्रवार को शुरू हुए चीनी संसद के सालाना सत्र को कवर करने के लिए आसपास के देशों से कई पत्रकार पहुंच रहे हैं। ऐसे में अब ये आदेश जारी किया गया है कि हर पत्रकार को यहां कोरोना वायरस का टेस्ट कराना जरूरी है।

संसद में पत्रकारों की एंट्री के लिए कुछ ही सीटें बुक की गई हैं, बाकि अन्य को वीडियो लिंक के जरिए ही वहां से जुड़ना होगा। बुधवार को यहां हॉन्गकॉन्ग, ताइवान समेत अन्य पड़ोस के देशों से पत्रकार पहुंचे। बुधवार को जो टेस्ट हुए हैं, उनमें सभी का रिजल्ट नेगेटिव आया है। इसके बाद अब यहां हर किसी का एसिड टेस्ट करवाया जा रहा है, जिसके बाद पत्रकारों को कुछ घंटे आइसोलेशन में रहना होगा। सिर्फ पत्रकार ही नहीं बल्कि हर किसी को यहां इस टेस्ट को करना होगा।

बताया जा रहा है कि यहां करीब तीन हजार लोग जुटेंगे, जो चीन के अलग-अलग हिस्सों से आ रहे हैं। इस दौरान मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर नई गाइडलाइन्स जारी की गई हैं।

बता दें कि कोरोना की वजह से चीनी संसद का सालाना सत्र करीब 78 दिनों के लिए टल गया था, जो अब शुक्रवार से शुरू हो गया है। इस सत्र में मौजूदा चुनौतियों, आर्थिक चुनौती और दुनिया में कोरोनावायरस की स्थिति को लेकर चर्चा होनी है।

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार मनोहर एस. देसाई

वरिष्ठ पत्रकार मनोहर एस. देसाई का मुंबई के उप-नगर थाणे में निधन हो गया। वे 86 वर्ष थे और लंबे समय से बीमारी से ग्रसित थे

Last Modified:
Friday, 22 May, 2020
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वरिष्ठ पत्रकार मनोहर एस. देसाई का मुंबई के उप-नगर थाणे में निधन हो गया। वे 86 वर्ष थे और लंबे समय से बीमारी से ग्रसित थे। उन्हें डिमेंशिया और किडनी से संबंधित बीमारियां थी। देसाई के परिवार वालों ने गुरुवार को इस बात की जानकारी दी। देसाई अपनी पत्नी के साथ, लंबे समय से मुंबई में रह रहे थे। 

देसाई का जन्म कर्नाटक के बेलगाम में साल 1934 में हुआ था। उन्होंने दक्षिण-मध्य मुंबई में स्थित फीनिक्स मिल्स में एक बुनकर के रूप में अपने काम की शुरुआत की थी। इसके बाद 1956 में ऑल इंडिया रेडिया पर कन्नड़ ड्रामों में कई किरदार निभाए। फिर उन्होंने बैंगलुरू के ‘डेक्कन हेराल्ड’ अखबार में बॉम्बे के संवाददाता के रूप में कार्य करना शुरू किया। 

इसके बाद कुछ वर्षों तक कई अन्य अखबारों में काम किया और फिर उन्होंने 1964 में मुंबई के ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ समूह के प्रसिद्ध फिल्म और बॉलीवुड अखबार 'स्क्रीन' में शामिल हो गए। अपने लंबे करियर में, उन्होंने घरेलू फिल्म कार्यक्रमों के अलावा मास्को, ताशकंद, बर्लिन, लंदन और पेरिस में अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों को कवर किया।

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प्रो. संजय द्विवेदी को MCU में मिली नई जिम्मेदारी

देश के जाने-माने पत्रकार और मीडिया शिक्षक प्रो. संजय द्विवेदी 10 वर्ष से अधिक समय तक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय ( MCU) के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष भी रहे हैं।

Last Modified:
Thursday, 21 May, 2020
Sanjay Dwivedi

देश के जाने-माने पत्रकार और मीडिया प्रोफेसर संजय द्विवेदी को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का प्रभारी कुलपति नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे विश्वविद्यालय के कुलसचिव की जिम्मेदारी निभा रहे थे। प्रो. द्विवेदी 10 वर्ष से अधिक समय तक विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष भी रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रो. संजय द्विवेदी लंबे समय तक सक्रिय पत्रकारिता में रहे हैं। उन्हें प्रिंट, बेव और इलेक्ट्रॉनिक, तीनों ही मीडिया में कार्य करने का वृहद अनुभव है। उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’, ‘हरिभूमि’, ‘नवभारत’, ‘स्वदेश’, ‘इंफो इंडिया डाट काम’ और छत्तीसगढ़ के पहले सेटलाइट चैनल ‘जी-24 छत्तीसगढ़’ जैसे मीडिया संगठनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली।

मुंबई, रायपुर, बिलासपुर और भोपाल में लगभग 14 साल सक्रिय पत्रकारिता में रहने के बाद प्रो. द्विवेदी शिक्षा क्षेत्र से जुड़े। फरवरी-2009 में वे विश्वविद्यालय से जुड़े थे। विश्वविद्यालय में उन्होंने विभागाध्यक्ष एवं कुलसचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों कार्य किया।

प्रो. द्विवेदी 12 वर्षों से नियमित जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ के कार्यकारी संपादक भी हैं। विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नियमित तौर पर राजनीतिक, सामाजिक और मीडिया के मुद्दों पर लेखन करते हैं। उन्होंने अब तक 25 पुस्तकों का लेखन और संपादन भी किया है। वे विभिन्न विश्वविद्यालयों की अकादमिक समितियों एवं मीडिया से संबंधित संगठनों में सदस्य एवं पदाधिकारी भी हैं।

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