पुरोधा संपादकों की कहानीः हरिवंश की जुबानी

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’...

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Friday, 05 April, 2019
Wardha

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’ कार्यक्रम 27 से 29 मार्च 2019 तक आयोजित किया गया। हरिवंश ने हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन 27 मार्च 2019 की शाम गणेश मंत्री के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। दूसरे दिन 28 मार्च 2019 को हरिवंश ने नारायण दत्त और धर्मवीर भारती पर और तीसरे दिन 29 मार्च 2019 की सुबह प्रभाष जोशी के व्यक्तित्व पर व्याख्यान दिया।

पहले दिन का कार्यक्रम हिंदी विश्वविद्यालय के गालिब सभागार तथा दूसरे व तीसरे दिन का कार्यक्रम जनसंचार विभाग के माधव राव सप्रे सभा कक्ष में आयोजित हुआ। पुरोधा संपादकों का पुण्य स्मरण करते हुए हरिवंश ने कहा कि आज की पत्रकारिता में विचार, मूल्य और चरित्र की कमी है। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता पूंजी प्रधान है, इसलिए वह उन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे पा रही है, जो मानवता के भविष्य के लिए जरूरी हैं।

हरिवंश ने कहा कि आज के पत्रकार तथ्यों की जांच किए बिना खबरें करते हैं। वे देश की आर्थिक स्थिति के बारे में सही बात लिखने से बचते हैं। वे यह भी नहीं बताते कि हमारा देश गंभीर आर्थिक परेशानियों में है और जिस आर्थिक नीति पर चल रहे हैं, उसका भविष्य खतरनाक है। ऐसे मौके पर उन संपादकों का स्मरण जरूरी है, जो विचार और साहस की पत्रकारिता के आखिरी युग की कड़ी थे। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि विकास का मौजूदा रास्ता खतरनाक है। इसलिए सभ्यता को कोई और मार्ग चुनना होगा। ऐसे समय में महात्मा गांधी सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के महत्त्वपूर्ण कथन पागल दौड़ का जिक्र करते हुए कहा कि भौतिक सुविधाओं को जमा करने के लालच में हमारी सभ्यता की नैतिक ऊंचाई एक इंच भी नहीं बढ़ी है। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री, नारायण दत्त, धर्मवीर भारती और प्रभाष जोशी पर गांधी युग का प्रभाव था और वे देश, समाज, भाषा और संस्कृति निर्माण के लिए पत्रकारिता कर रहे थे। उनका उद्देश्य व्यावसायिक नहीं था। इसीलिए वे अपने समय में बहुत सारी बातों को स्पष्ट तौर पर कह सके। गणेश मंत्री के जीवन और कृतित्व का जिक्र करते हुए हरिवंश ने कहा कि वे समाजवादी विचारों से प्रभावित थे। वे डॉ. राम मनोहर लोहिया के अंधभक्त थे। इसके बावजूद वे मार्क्स, गांधी और डॉ. आंबेडकर के गहन अध्येता थे और उन्होंने उनके विचारों को ‘धर्मयुग’ जैसे व्यापक प्रसार वाली पत्रिका में जगह दी। उन्होंने कहा कि गणेश मंत्री का पत्रकारीय जीवन उनके विद्यार्थी जीवन का ही विस्तार है,क्योंकि अध्ययनशीलता उनमें अंत तक बनी रही।

हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज संपादक के होते हुए भी गणेश मंत्री छह लाख प्रसार वाली ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका में न सिर्फ रचनात्मक साहित्य के लिए स्थान निकालते थे, बल्कि राजनीतिक विचारों के लिए भी जगह बना लेते थे। हरिवंश ने बताया कि उन्होंने आपातकाल के दिनों में ‘टाइम्स आफ इंडिया’ समूह में पत्रकारिता शुरू की और उस समय गणेश मंत्री ने उन्हें हतोत्साहित किया था। लेकिन जब उन्हें लगा कि वे पत्रकारिता ही करेंगे तो अपने छोटे भाई के रूप में स्नेह और सहयोग दिया और उनके लेखन व विचारों को गढ़ा। गणेश मंत्री के प्रभाव का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जेल से छूटने के बाद जार्ज फर्नांडीज जैसे नेता ने सबसे पहले गणेश मंत्री को ही इंटरव्यू दिया। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री के पिता राजस्थान सरकार में मंत्री थे पर उनकी सरकारी गाड़ी का उपयोग करने से मना करके गणेश मंत्री ने दर्शा दिया था कि पत्रकार के लिए नैतिकता और चरित्र का कितना महत्त्व होता है। गणेश मंत्री ने एक बार देश के सबसे बड़े उद्योगपति के बेटे की शादी का कार्ड और उसके साथ आया उपहार भी लेने से मना कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि वे उद्योगपति उनके किसी कार्यक्रम में क्या आएंगे और क्या वे उन्हें इतना महंगा उपहार दे पाएंगे। 

कार्यक्रम के दूसरे दिन पूर्वाह्न में नारायण दत्त के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त मूलतः तेलुगूभाषी थे। उनका परिवार कर्नाटक में बसा, जहां उन्होंने कन्नड़ सीखी। फिर नारायण दत्त बंबई (अब मुंबई) आए, जहां उन्होंने मराठी, तमिल सीखी। वे हिंदी के गंभीर अध्येता थे ही और भाषा के मामले में बहुत संवेदनशील थे। नारायण दत्त किसी भी प्रकार की भाषा त्रुटि को बर्दाश्त नहीं करते थे। यह उनके ‘नवनीत’ और ‘पीटीआई’ की हिंदी फीचर सेवा के संपादन के दौरान कई बार साबित हुआ। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त शोध कर्ता भी थे और कांग्रेस के सौ वर्ष पूरे होने पर उन्होंने पीटीआई फीचर से कांग्रेस के इतिहास और उसके अध्यक्षों पर जो शृंखला चलाई, वह सबसे प्रामाणिक दस्तावेज है। रिटायर होने के बाद नारायण दत्त बेहद लोकप्रिय कैलेंडर ‘काल निर्णय’ का संपादन करते थे और वह त्रुटिहीन होता था। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त के बड़े भाई एचवाई शारदा प्रसाद इंदिराजी के प्रेस सलाहकार थे। वे भी सादगी की प्रतिमूर्ति थे। एक बार वे ‘धर्मयुग’ के दफ्तर आए और टाइम्स के अधिकारियों से पूछा-हरिवंश से मिलना है। वे मेरी कुर्सी के सामने आकर बैठ गए और इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि बीमारी के दौरान मैंने नारायण दत्त की सेवा-सुश्रुषा की।

कार्यक्रम के दूसरे दिन अपराह्न धर्मवीर भारती के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती ने कठोर श्रम से ‘धर्मयुग’ को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाया। उन्होंने ‘धर्मयुग’ को सात लाख की प्रसार संख्या तक पहुंचाया और उसे पाठकों की संख्या में परिवर्तित किया जाय तो वह संख्या एक करोड़ तक जाती है। इतना बड़ा पाठक वर्ग धर्मवीर भारती के कठोर श्रम से निर्मित हुआ। वे ठीक सुबह साढ़े नौ बजे दफ्तर आ जाते थे। उनके मन-मस्तिष्क और कार्यालय की आलमारियों में ‘धर्मयुग’ की योजना चलती रहती थी। वे निरंतर अपने उप संपादकों को बुलाकर हर पेज की तात्कालिक और अग्रिम सामग्री और तस्वीर के बारे में तय करते थे। उन्होंने स्वयं 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की रिपोर्टिंग की। बड़े-बड़े नेता और अभिनेता उनसे मिलने के लिए ‘धर्मयुग’ आते थे, किंतु वे काम में इतने मग्न रहते थे कि उनसे नहीं मिल पाते थे। इस वजह से कुछ लोगों द्वारा उन्हें तानाशाह और घमंडी कहकर लांछित किया गया, जबकि उन्होंने मुनादी शीर्षक से कविता लिखकर इंदिराजी की तानाशाही को चुनौती दी थी। वे इतने भावुक और संवेदनशील थे कि जयप्रकाश नारायण पर 4 नवंबर 1974 को पटना में पुलिस लाठी चार्ज की तस्वीर देखकर विचलित हो गए। वह तस्वीर रघुराय ने खींची थी, जिसमें पुलिस जेपी पर लाठी ताने हुई थी। उस तस्वीर को देखकर धर्मवीर भारती चार-पांच दिनों तक भयंकर बेचैन रहे और नौ नवंबर की रात दस बजे मुनादी कविता के रूप में उनका आक्रोश उबल पड़ा। धर्मवीर भारती ने ‘धर्मयुग’ को बनाने के लिए अपने साहित्यकार की बलि चढ़ा दी। यही वजह है कि गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, अंधा युग और कनुप्रिया जैसी श्रेष्ठ रचनाएं धर्मयुग का संपादक बनने से पहले लिखी गईं। हरिवंश ने बताया कि किस तरह उनसे भारतीजी ने ‘धर्मयुग’ की कई आमुख कथाएं लिखवाईं।

कार्यक्रम के चौथे सत्र में 29 मार्च 2019 को पूर्वाह्न हरिवंश ने प्रभाष जोशी के रचनात्मक अवदान पर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रभाष जोशी प्रामाणिक पत्रकारिता के जीवंत उदाहरण थे। समझ, दृष्टि, भाषा संस्कार, संचार कौशल जैसे विशिष्ट गुणों में प्रभाष जोशी एक आदर्श थे, उनके जैसा अब तक कोई दूसरा नहीं हुआ है। आज बहुत कम लोग हैं जो सही को सही कहने का साहस रखते हैं, प्रभाष जोशी वैसी ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वे जहां भी होते थे सिर्फ उनकी मौजूदगी ही प्रभावपूर्ण होती थी। हरिवंश जी ने कहा कि मुल्क के बुनियादी सवालों पर देशज ज्ञान से किसी समस्या का हल निकालने वाले प्रभाष जी जैसा दूसरा कोई पत्रकार अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभाष जी जमीनी हकीकत की लोक समझ रखते थे। वे हिंदी के अकेले ऐसे संपादक थे, जिन्होंने अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के तीन संस्करणों का संपादन करने के बाद हिंदी पत्रकारिता की और ‘जनसत्ता’ के संस्थापक संपादक बने थे। रामनाथ गोयनका के साथ लगभग 20 वर्षों तक काम करने वाले प्रभाष जोशी अकेले संपादक थे। इतने वर्षों तक कोई संपादक गोयनका के साथ काम नहीं कर पाता था।

हरिवंश ने बताया कि बिल गेट्स और स्टीव जॉब्स ने अपने-अपने क्षेत्रों में जो उल्लेखनीय कार्य किया है वैसा ही कार्य प्रभाष जोशी ने हिंदी पत्रकारिता में किया है। प्रभाष जी ने उच्च स्तर का ‘जनसत्ता’ अखबार निकाला, जिसकी पंच लाइन ‘सबकी खबर ले, सबको खबर दे’ वर्तमान में भी प्रासंगिक बनी हुई है। इस अखबार में उनके द्वारा लिखा जाने वाला कॉलम ‘कागद कारे’ बहुत लोकप्रिय हुआ। एक बार धर्मवीर भारती ने जनसत्ता अखबार को देखकर कहा था, ‘यह अद्वितीय अखबार है।‘ हर व्याख्यान के बाद हरिवंश ने श्रोताओं के प्रश्नों के जवाब भी दिए। हरिवंश के विभिन्न व्याख्यान कार्यक्रमों की अध्यक्षता कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र और सप्रे संग्रहालय, भोपाल के संस्थापक विजय दत्त श्रीधर ने की। सप्रे संग्रहालय, भोपाल की निदेशक डा. मंगला अनुजा और आवासीय लेखिका डा. पुष्पिता अवस्थी ने भी पुरोधा संपादकों पर अपने विचार रखे। विभिन्न सत्रों का संचालन राजेश लेहकपुरे, धरवेश कठेरिया, अशोक मिश्र और रेणु सिंह ने किया। स्वागत भाषण और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कृष्णकुमार सिंह, प्रो. मनोज कुमार, अरुण कुमार त्रिपाठी, संदीप कुमार वर्मा और वैभव उपाध्याय ने किया। विषय प्रवर्तन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत पुरोधा संपादकों के छायाचित्रों पर पुष्पांजलि अर्पण से हुई। जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने कुलगीत और स्वागत लोकगीत भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने प्रतिदिन अपना प्रायोगिक अखबार ‘मीडिया समय’ निकाला। विद्यार्थियों के प्रायोगिक रेडियो बुलेटिन ‘वर्धा वाणी’ एवं प्रायोगिक टेलिविजन बुलेटिन ‘वर्धा दर्शन’ का प्रतिदिन प्रसारण किया गया।

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वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र पटेल का कोरोना से निधन

पिछले कुछ वर्षों से हिंदुस्तान अखबार के आगरा एडिशन में कार्यरत थे बृजेन्द्र पटेल

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Brajendra Patel

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। तमाम लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं और कई लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। कोरोना के संक्रमण के कारण जान गंवाने वालों में कई पत्रकार भी शामिल हैं। ऐसी ही एक दुखद खबर आगरा से आई है। खबर है कि हिन्दुस्तान के आगरा एडिशन में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र पटेल का कोरोना से निधन हो गया है।

कुछ दिनों पूर्व तबीयत खराब होने पर बृजेन्द्र पटेल ने कोविड-19 की जांच कराई थी, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, इसके बाद उन्हें आगरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में थोड़ा सुधार होने पर एक-दो दिन पूर्व उन्हें एसएन अस्पताल, आगरा में भर्ती कराया गया था, जहां शनिवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

करीब 50 वर्षीय बृजेन्द्र पटेल कानपुर के मूल निवासी थे। लगभग 25 वर्षों से मीडिया में सक्रिय बृजेन्द्र अब तक दैनिक आज, अमर उजाला और सहारा समेत तमाम मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके थे। करीब दो साल से वह हिंदुस्तान, आगरा में अपनी भूमिका निभा रहे थे।  

बृजेन्द्र पटेल के निधन पर डॉ. अनिल दीक्षित, विनोद भारद्वाज, पीपी सिंह, अवधेश माहेश्वरी, ताज प्रेस क्लब के महासचिव उपेंद्र शर्मा और राज कुमार दंडौतिया सहित तमाम पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है। 

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PTI के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Death

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन हो गया। उनके पारिवारिक सदस्यों ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि जमालुद्दीन अहमद का निधन हाल में एक बीमारी की वजह से नई दिल्ली में हुआ।

जमालुद्दीन अहमद 2007-2008 के दौरान मध्यप्रदेश के भोपाल में पीटीआई के ब्यूरो प्रमुख रहे। उन्होंने साथ ही यहां कई समाचार पत्रों के लिए भी काम किया।

वहीं  आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अहमद के निधन पर दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना ईश्वर से की।

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कोरोना ने निगल ली दैनिक जागरण के युवा पत्रकार अंकित शुक्ल की जिंदगी

हिंदी अखबार दैनिक जागरण के लखनऊ एडिशन में कार्यरत युवा पत्रकार अंकित शुक्ल का कोरोना से शुक्रवार की सुबह निधन हो गया।

Last Modified:
Friday, 16 April, 2021
ankitshukla6546

हिंदी अखबार दैनिक जागरण के लखनऊ एडिशन में कार्यरत युवा पत्रकार अंकित शुक्ल का कोरोना से शुक्रवार की सुबह निधन हो गया। वे करीब 35 साल के थे और विधि संवाददाता के तौर पर दैनिक जागरण में कानूनी मामलों को कवर करते थे। 

बताया जाता है कि कुछ दिनों पूर्व तबीयत खराब होने पर अंकित को लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें कोविड-19 के इलाज के लिए बने स्पेशल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। 

जानकारी के मुताबिक, अंकित लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर रहते थे। परिवार में पत्नी व एक बेटी है। पत्नी भी कोविड पॉजिटिव हैं और फिलहाल होम आइसोलेशन में हैं।

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Covid-19 के खिलाफ ‘जंग’ में राजनांदगांव प्रेस क्लब कुछ यूं निभा रहा भागीदारी

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। दिन प्रतिदिन आ रहे आंकड़े बेहद खौफनाक और डराने वाले हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 April, 2021
Last Modified:
Wednesday, 14 April, 2021
Covid Care Centre

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। दिन प्रतिदिन आ रहे आंकड़े बेहद खौफनाक और डराने वाले हैं। हालत यह है कि इस संक्रमण की चपेट में आकर तमाम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, वहीं विभिन्न अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने के लिए बेड की कमी भी बनी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में अपनी भागीदारी निभाते हुए छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव प्रेस क्लब ने अपने परिसर को अस्पताल में तब्दील कर दिया है। छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में बेड की कमी के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है।

30 बेड वाले कोरोना देखभाल केंद्र में तब्दील प्रेस क्लब के इस परिसर में कोविड-19 पीड़ितों का मुफ्त इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा उनके नाश्ते व खाने का भी मुफ्त इंतजाम किया गया है।

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अज्ञात लोगों ने गोली मारकर की पत्रकार की हत्या

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में शनिवार शाम एक पत्रकार की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

Last Modified:
Tuesday, 13 April, 2021
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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में शनिवार शाम एक पत्रकार की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना करक पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के भीतर बथानी खेल क्षेत्र में हुई।

डॉन न्यूज की एक रिपोर्ट में बताया गया कि मृतक की पहचान स्थानीय अखबार Sada-e-lawaghir के संयुक्त संपादक वसीम आलम के रूप में हुई है।

पीड़िता की मां की ओर से दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, आलम पर यह हमला तब हुआ, जब वह अपनी बाइक से घर लौट रहा था। उसे बथानी खेल स्थित एक सरकारी स्कूल के पास निशाना बनाया गया। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

करक पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। इस हमले में संदिग्ध के तौर पर मृतक के पिता का नाम भी सामने आया है।

डॉन के मुताबिक, वसीम आलम के पिता न तो अस्पताल में मौजूद थे और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। अधिकारी ने आगे कहा कि वसीम आलम अपने परिवार से अलग रह रहे थे। हालांकि पत्रकार की मां ने एफआईआर में किसी का नाम नहीं लिया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमें अब तक कोई भी ऐसा सुराग नहीं मिला है जिससे पता चलता है कि पत्रकार की हत्या पत्रकारिता के काम के लिए की गई है।’

बता दें कि दुनिया में पत्रकारों के लिए पाकिस्तान सबसे खतरनाक जगहों में से एक माना जाता है। काउंसिल ऑफ पाकिस्तान न्यूजपेपर एडिटर्स (CPNE) की मीडिया फ्रीडम रिपोर्ट 2020 के मुताबिक, पिछले साल पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कम से कम 10 पत्रकारों की हत्या कर दी गई और कई अन्य को धमकी दी गई, कुछ का अपहरण किया गया, प्रताड़ित किया गया और गिरफ्तार किया गया था।

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तीस साल तक ‘द हिन्दू’ को अपना योगदान देने वाले वयोवृद्ध पत्रकार का निधन

वयोवृद्ध पत्रकार जी.एन. श्रीनिवासन का सोमवार को तमिलनाडु के मायलापुर में उनके बेटे के घर पर निधन हो गया।

Last Modified:
Tuesday, 13 April, 2021
Death

वयोवृद्ध पत्रकार जी.एन. श्रीनिवासन का सोमवार को तमिलनाडु के मायलापुर में उनके बेटे के घर पर निधन हो गया। उन्होंने साल 1953 से 30 साल तक अंग्रेजी दैनिक ‘द हिन्दू’ को अपना योगदान दिया।

दोस्तों के बीच उन्हें जीएनएस के नाम से जाना जाता था। उन्होंने अक्टूबर 2020 में अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश किया।

उनकी बेटी संध्या रवि मोहन ने कहा कि श्रीनिवासन की आयु से संबंधित बीमारियों से मृत्यु हुई है। वे अंत तक अपने काम को लेकर सक्रिय रहे। उन्होंने मीडिया को बताया कि उनके पिताजी ने पूर्व मुख्यमंत्री कामराज, एम. करुणानिधि और एम.जी. रामचंद्रन का साक्षात्कार किया और उनके साथ यात्रा भी की थी। उन्होंने 1976 में स्थापित सरकारिया आयोग की कार्यवाही को भी कवर किया था, जिसे लेकर उनकी संतुलित रिपोर्टिंग की सराहना भी की गई थी।

श्रीनिवासन ने त्रिपलीकेन स्थित ‘द हिन्दू हाई स्कूल’ से अध्ययन किया और पचायप्पा कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

जीएनएस ने अपने करियर की शुरुआत की  ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ से स्टेनोग्राफर के तौर पर शुरू की थी। बाद में वे यहां रिपोर्टर बन गए थे। इसके बाद में उन्होंने ‘द हिन्दू’ जॉइन किया और सबसे पहले 1953 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की चेन्नई यात्रा को कवर किया। ‘द हिन्दू’ से रिटायर होने के बाद, उन्होंने पांच साल तक प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के साथ कानूनी संवाददाता के तौर पर काम किया। जीएनएस ने मद्रास रिपोर्टर्स गिल्ड के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के रूप में भी अपना योगदान दिया है।

 

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नहीं रहे FCB-Ulka समूह के पूर्व MD और CEO अनिल कपूर

तमाम उपलब्धियों के बीच वह अगस्त 2019 में ‘FCB Worldwide’ (Foote, Cone & Belding) बोर्ड, न्यूयॉर्क के मेंबर नियुक्त किए गए थे।

Last Modified:
Monday, 12 April, 2021
Anil Kapoor

DraftFCB+ Ulka के चेयरमैन एमरेटस (Chairman Emeritus) अनिल कपूर का निधन हो गया है। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। वह ‘एफसीबी-उलका’ (FCB-Ulka) ग्रुप के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ (former Managing Director & CEO) थे। तमाम उपलब्धियों के बीच वह अगस्त 2019 में ‘FCB Worldwide’ (Foote, Cone & Belding) बोर्ड, न्यूयॉर्क के मेंबर नियुक्त किए गए थे।

अनिल कपूर को याद करते हुए ‘आईपीजी मीडियाब्रैंड्स’ (IPG Mediabrands) के सीईओ शशि सिन्हा का कहना है, ‘वह मेरे मार्गदर्शक और मित्र से भी बढ़कर थे, जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाने में काफी मदद की। इस दुख की भरपाई नहीं की जा सकती है। दुख की इस घड़ी में मैं पीड़ित परिवार के साथ हूं और भगवान से पीड़ित परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूं।’

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जिंदगी की जंग हार गए पत्रकार शिवनंदन साहू

कौशाम्बी जिले के दारानगर नगर पंचायत के रहने वाले शिवनंदन साहू का शनिवार की शाम निधन हो गया है।

Last Modified:
Monday, 12 April, 2021
Shivnandan Sahu

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में आजतक के पत्रकार शिवनंदन साहू का निधन हो गया है। कौशाम्बी जिले के दारानगर नगर पंचायत के रहने वाले शिवनंदन साहू को बुखार और सांस लेने में दिक्कत के कारण जिला अस्पताल, मंझनपुर में भर्ती करवाया गया था।

यहां उपचार के बाद साहू को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया था, जहां शनिवार शाम को अस्पताल के बाहर ही उनकी मौत हो गई। शिवनंदन साहू के निधन पर तमाम लोगों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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कोरोना से जिंदगी की जंग हार गए वरिष्ठ पत्रकार कपिल दत्ता

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार कपिल दत्ता का शुक्रवार सुबह दिल्ली के एक अस्पताल में कोरोना की वजह से निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 10 April, 2021
Kapil

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार कपिल दत्ता का शुक्रवार सुबह दिल्ली के एक अस्पताल में कोरोना की वजह से निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वह करीब 10 दिन पहले कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गए थे, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के विमहंस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उपचार के दौरान उन्हें निमोनिया हुआ और शुक्रवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। 

मीडिया के उनके सहकर्मियों ने यह जानकारी दी। नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष पंकज पराशर ने कहा कि दत्ता को हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

नोएडा मीडिया क्लब ने एक बयान में कहा, ‘वरिष्ठ पत्रकार और एक अच्छे इंसान कपिल दत्ता सर का दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। आज सुबह उनकी मृत्यु हो गई। भगवान उनके परिवार और दोस्तों को इस नुकसान को सहने की ताकत दें। वह हम में से कई लोगों के लिए पिता तुल्य थे।’

बता दें कि कपिल दत्ता 65 वर्ष के थे और करीब 3 दशकों से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में रिपोर्टिंग कर रहे थे। वह अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के लंबे अरसे से संवाददाता थे और आज कल पीटीआई से जुड़े हुए थे। कपिल दत्ता के निधन से दिल्ली-एनसीआर के पत्रकारों में शोक की लहर है। सोशल मीडिया के जरिए तमाम लोग शोक संदेश जारी कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है-

 

 

 

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राजीव मित्तल

शुक्रवार की देर रात लखनऊ में एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली।

Last Modified:
Saturday, 10 April, 2021
Rajiv Mittal

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राजीव मित्तल का निधन हो गया है। उन्होंने शुक्रवार की देर रात लखनऊ में एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजीव मित्तल को कई वर्षों से अस्थमा की समस्या थी। पत्रकारिता में 35 वर्ष से अधिक समय तक सक्रिय रहे राजीव मित्तल हिंदुस्तान, नई दुनिया, सहारा, जनसत्ता, दैनिक जागरण, अमर उजाला आदि अखबारों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके थे। वह 15 साल से भी ज्यादा समय तक संपादक रहे।

राजीव मित्तल के निधन पर तमाम लोगों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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