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#MeToo: पत्रकार प्रिया रमानी बोलीं- सच ही मेरा बचाव है, लड़ूंगी केस
#MeToo कैंपेन के तहत अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए विदेश राज्य मंत्री...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
#MeToo कैंपेन के तहत अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए विदेश राज्य मंत्री अकबर ने सोमवार को पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ निजी आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है। हालांकि इसके बाद, पत्रकार प्रिया रमानी ने सोशल मीडिया पर एक बड़ा सा पोस्ट लिखकर अकबर पर पलटवार किया है। उन्होंने लिखा कि मैं अपने खिलाफ मानहानि के आरोपों पर लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं, सच और सिर्फ सच ही मेरा बचाव है।
उन्होंने कहा कि वह राज्यमंत्री द्वारा भेजे गए मानहानि नोटिस का सामना करने के लिए तैयार हैं और उनके पास इससे लड़ने का पूर्ण सत्य ही एकमात्र हथियार है।
अपने ट्विटर अकाउंट पर बयान जारी करते हुए प्रिया ने अकबर के बयान पर निराशा जताते हुए लिखा कि इसमें ‘पीड़ित जिस सदमे और भय से गुजरी हैं’ उसका कोई ख्याल नहीं रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि अकबर डरा धमकाकर और उत्पीड़न करके पीड़ितों को चुपकराना चाहते हैं।
प्रिया ने कहा,‘मैं इस बात से निराश हूं कि राज्यमंत्री अपने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताकर बचने की नाकामयाब कोशिश की है, जबकि उनपर एक दो नहीं बल्कि कई महिलाओं ने उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। मेरे खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला बनाकर अकबर ने अपना स्टैंड साफ कर दिया है। अपने खिलाफ कई महिलाओं द्वारा लगाए गए गंभीर अपराधों पर सफाई देने की बजाए वह उनको धमकाकर और प्रताड़ित कर चुप कराने की कोशिश करते दिख रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘इस समय, यह पूछना ठीक नहीं है कि वे (पीड़ित) अब क्यों बोल रही हैं, क्योंकि हम सभी लांछन और शर्म से परिचित हैं कि यौन अपराध की सजा पीड़ित को कैसे भोगनी पड़ती है। इन महिलाओं की मंशा और इरादे को लेकर उन्हें कलंकित करने के बजाए हमें पुरुष और महिलाओं की भावी पीढ़ी के लिए कार्यस्थल को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।”
रमानी ने केंद्रीय मंत्री द्वारा रविवार को जारी बयान की आलोचना करते हुए कहा कि, 'अकबर द्वारा हाल में जारी बयान ने पीड़ितों की पीड़ा और भय का तनिक भी ध्यान नहीं रखा या उन्होंने सच बोलने की जरूरी ताकत नहीं दिखाई।'
रमानी ने कहा, 'पिछले दो सप्ताह में पत्रकार समेत अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं ने वर्कप्लेस पर कई एडिटर्स, राइटर्स और फिल्म मेकर्स के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इससे पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में महिलाओं का धीरे-धीरे ही सही पर सशक्तिकरण हो रहा है। #Metoo मूवमेंट ने उन्हें आवाज दी है।'
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