टीवी9 सत्ता सम्मेलन में बोलीं स्मृति ईरानी: डर ने कभी नहीं रोका

टीवी9 के ‘व्हाट इंडिया थिंक्स टुडे’ समिट में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी की छवि को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी एक पार्टी को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

Last Modified:
Tuesday, 24 March, 2026
TV9 Satta Sammelan


टीवी9 नेटवर्क के विचारों के महामंच ‘व्हाट इंडिया थिंक्स टुडे’ समिट 2026 के दूसरे दिन सत्ता सम्मेलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने बेबाक अंदाज में कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा जीवन को एक अवसर के रूप में देखा है और फैसले लेने से कभी डर नहीं लगा। ‘क्योंकि स्मृति कभी हार नहीं मानती’ सत्र में उन्होंने कहा कि डर इंसान को सीमित कर देता है, लेकिन उन्होंने हमेशा नए अवसरों को अपनाया।

उन्होंने अपने लोकप्रिय टीवी शो के संवाद का जिक्र करते हुए कहा, “रिश्तों के भी रूप बदलते हैं, नए-नए सांचे में ढलते हैं,” और इसे जीवन के अनुभव से जोड़ा। राहुल गांधी की छवि को लेकर पूछे गए सवाल पर स्मृति ईरानी ने कहा कि किसी भी विपक्षी नेता की छवि के लिए किसी एक पार्टी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से राजनीति में हैं और जनता उन्हें अच्छी तरह जानती है, इसलिए उनकी छवि खुद उनके काम और व्यक्तित्व से बनती है। पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि बीजेपी के लिए हर चुनाव अहम होता है, चाहे वह लोकसभा हो, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने हर चुनौती को अवसर में बदला है। इसके साथ ही उन्होंने आगामी चुनावों को लेकर भी आत्मविश्वास जताया और कहा कि हाल के राज्यसभा चुनाव के परिणाम यह संकेत देते हैं कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी।

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वरिष्ठ पत्रकार ध्रुव महंत फिर असम CM हिमंत बिस्वा सरमा के प्रधान प्रेस सचिव नियुक्त

असम सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा की मीडिया और जनसंपर्क टीम में अहम नियुक्तियां की हैं।

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Monday, 18 May, 2026
DhruvaMahanta5412

असम सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा की मीडिया और जनसंपर्क टीम में अहम नियुक्तियां की हैं। वरिष्ठ पत्रकार ध्रुव महंत को एक बार फिर मुख्यमंत्री का प्रधान प्रेस सचिव नियुक्त किया गया है। इस संबंध में शनिवार रात आधिकारिक घोषणा की गई।

इसके साथ ही नवजीत पाटगिरी को भी मुख्यमंत्री के संचार, जनसंपर्क और प्रोटोकॉल विभाग में विशेष कर्तव्यरत अधिकारी (ओएसडी) के रूप में दोबारा नियुक्त किया गया है।

राज्य सरकार का मानना है कि इन नियुक्तियों से मुख्यमंत्री कार्यालय की मीडिया समन्वय व्यवस्था, जनसंपर्क गतिविधियों और संचार तंत्र को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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AI सर्च बनाम मीडिया इंडस्ट्री: क्या पब्लिशर्स के सामने बढ़ रहा अस्तित्व का संकट

गूगल ने मई 2024 में अमेरिका में AI Overview लॉन्च किया था। मई 2025 तक यह फीचर 200 से ज्यादा देशों और 40 भाषाओं तक पहुंच गया। नतीजा? मीडिया इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका।

Last Modified:
Friday, 15 May, 2026
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मान लीजिए आपने गूगल पर सर्च किया- “भारत में महंगाई क्यों बढ़ रही है?” और जवाब आपको वहीं, ऊपर एक बड़े AI बॉक्स में मिल गया। आपने कोई लिंक नहीं खोला, किसी वेबसाइट पर नहीं गए। बस जवाब पढ़ा और पेज बंद कर दिया। यही चीज अब दुनियाभर के पब्लिशर्स के लिए सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है।

2026 में मीडिया इंडस्ट्री एक ऐसी लड़ाई के दौर से गुजर रही है, जो न कोर्टरूम में लड़ी जा रही है और न संसद में, बल्कि गूगल के सर्च रिजल्ट पेज पर। एक तरफ बड़े अखबार, न्यूज वेबसाइट्स, ब्लॉगर और कंटेंट क्रिएटर हैं और दूसरी तरफ Artificial Intelligence (AI) है, जो उन्हीं के कंटेंट को पढ़कर यूजर्स को सीधे जवाब देने लगा है।

Zero-Click का जमाना: जब Click ही नहीं हुई तो पैसा कहां से आएगा?

गूगल ने मई 2024 में अमेरिका में AI Overview (AIO) लॉन्च किया था। मई 2025 तक यह फीचर 200 से ज्यादा देशों और 40 भाषाओं तक पहुंच गया। इसमें भारत की हिंदी, तमिल और तेलुगू जैसी भाषाएं भी शामिल हैं। नतीजा? मीडिया इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका।

प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) ने मार्च 2025 में अमेरिका के 900 लोगों की इंटरनेट इस्तेमाल करने की आदतों को ट्रैक किया और गूगल पर की गई 68 हजार से ज्यादा सर्च का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में सामने आया कि जब AI Overview दिखाई देता है, तो लोग सिर्फ 8 फीसदी मामलों में ही किसी लिंक पर क्लिक करते हैं। जबकि बिना AI Overview के यह आंकड़ा 15 फीसदी था। यानी क्लिक में करीब 47 फीसदी की गिरावट आई। सबसे बड़ी बात यह कि AI Overview में दिए गए स्रोतों पर सिर्फ 1 फीसदी लोगों ने क्लिक किया।

Similarweb के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2024 से मई 2025 के बीच खबरों से जुड़ी सर्च में “जीरो-क्लिक” सर्च का हिस्सा 56 फीसदी से बढ़कर 69 फीसदी हो गया। आसान शब्दों में कहें तो खबरों से जुड़ी 10 में से करीब 7 सर्च ऐसी रहीं, जिनमें लोग किसी भी वेबसाइट पर नहीं पहुंचे।

वहीं, रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ जर्नलिज्म (Reuters Institute for the Study of Journalism) की जनवरी 2026 की रिपोर्ट और ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है। दुनिया के 51 देशों के 280 मीडिया लीडर्स का सर्वे किया गया, जिनमें 64 एडिटर-इन-चीफ और 64 चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर्स (CEO) शामिल थे। उनका मानना है कि अगले तीन साल में सर्च इंजन से आने वाला ट्रैफिक औसतन 43 फीसदी तक गिर सकता है।

चार्टबीट ने 2,500 से ज्यादा न्यूज वेबसाइट्स के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि नवंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच गूगल सर्च से आने वाले विजिटर्स में 33 फीसदी की गिरावट आई। वहीं, गूगल डिस्कवर से आने वाला ट्रैफिक 21 फीसदी घट गया। अमेरिका में यह गिरावट और ज्यादा, यानी 38 फीसदी रही।

छोटे पब्लिशर्स का हाल सबसे बुरा

इस नुकसान का असर सभी पर एक जैसा नहीं पड़ा। बड़े पब्लिशर्स- जैसे The New York Times, जिसके 2025 के आखिर तक 1.278 करोड़ सब्सक्राइबर्स थे, अभी भी किसी तरह टिके हुए हैं। लेकिन छोटे पब्लिशर्स को सबसे बड़ा झटका लगा। 2025 में छोटे पब्लिशर्स का गूगल रेफरल ट्रैफिक करीब 60 फीसदी तक गिर गया, जबकि बड़े पब्लिशर्स में यह गिरावट 22 फीसदी रही।

Business Insider का ऑर्गेनिक सर्च ट्रैफिक अप्रैल 2022 से अप्रैल 2025 के बीच 55 फीसदी तक गिर गया। हालत ऐसी हुई कि कंपनी को मई 2025 में अपने 21 फीसदी एम्प्लॉयीज की छंटनी करनी पड़ी।

वहीं HuffPost की डेस्कटॉप और मोबाइल साइट्स पर सर्च से आने वाले विजिटर्स की संख्या आधी रह गई। यहां तक कि The New York Times का सर्च ट्रैफिक शेयर भी 2022 के 44 फीसदी से घटकर 2025 में 37 फीसदी पर आ गया।

DMG Media , जो MailOnline और Metro जैसे बड़े ब्रिटिश प्रकाशन चलाती है, ने सितंबर 2025 में बताया कि कुछ खास सर्च में क्लिक-थ्रू रेट 89 फीसदी तक गिर गई।

शिक्षा प्लेटफॉर्म Chegg को तो और बड़ा नुकसान हुआ। जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच कंपनी का गैर-सब्सक्राइबर ट्रैफिक 49 फीसदी तक गिर गया। इसके बाद कंपनी ने गूगल के खिलाफ प्रतिस्पर्धा विरोधी कानून (एंटीट्रस्ट) का मुकदमा भी दायर कर दिया।

Google की AI और SEO का बदलता मॉडल

कभी SEO यानी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन का सीधा मतलब होता था- सही कीवर्ड ढूंढो, अच्छा कंटेंट लिखो, गूगल पर ऊपर जगह बनाओ, ट्रैफिक आएगा और विज्ञापनों से कमाई होगी। यह मॉडल कई सालों तक चलता रहा। लेकिन 2026 तक आते-आते यह मॉडल बुरी तरह बदल चुका है।

Seer Interactive ने जून 2024 से सितंबर 2025 के बीच 42 संस्थाओं की 3,119 जानकारी आधारित सर्च को ट्रैक किया। रिपोर्ट में पाया गया कि जिन सर्च में AI Overview दिखाई देता था, वहां ऑर्गेनिक क्लिक-थ्रू रेट 1.76 फीसदी से गिरकर सिर्फ 0.61 फीसदी रह गई। यानी करीब 61 फीसदी की गिरावट। वहीं पेड क्लिक-थ्रू रेट 19.7 फीसदी से टूटकर 6.34 फीसदी पर आ गई, यानी 68 फीसदी की भारी गिरावट।

Semrush के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की तीसरी तिमाही तक गूगल की करीब 20 से 25 फीसदी सर्च में AI Overview दिखने लगा था। वहीं Gartner का अनुमान है कि 2026 के आखिर तक ऑर्गेनिक सर्च ट्रैफिक का 25 फीसदी हिस्सा AI चैटबॉट्स और वॉइस असिस्टेंट्स की तरफ चला जाएगा।

भारत में भी तेजी से बदलाव दिख रहा है। AI सर्च इंजन Perplexity ने 2024-25 के दौरान 640 फीसदी की बढ़त दर्ज की, खासकर Airtel के साथ साझेदारी के बाद। वहीं ChatGPT अब भारत में प्रोफेशनल्स के बीच दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला प्लेटफॉर्म बन चुका है।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में 58 फीसदी सर्च अब आवाज के जरिए हो रही हैं। लोग हिंदी, तमिल, तेलुगू और बंगाली जैसी भाषाओं में सवाल पूछ रहे हैं।

इस बदलाव ने SEO इंडस्ट्री की दिशा ही बदल दी है। पहले कीवर्ड रैंकिंग सबसे ज्यादा मायने रखती थी, लेकिन अब “जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन” यानी GEO का दौर शुरू हो गया है। इसका मतलब है कि AI के जवाबों में आपके ब्रैंड या कंटेंट का जिक्र हो, चाहे यूजर आपकी वेबसाइट पर आए या नहीं।

अहरेफ्स की दिसंबर 2025 की स्टडी के मुताबिक, जिन कीवर्ड्स पर AI Overview दिखती है, वहां पहले नंबर पर आने वाली वेबसाइट की क्लिक-थ्रू रेट में 34.5 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई।

Ad Revenue की तस्वीर: पब्लिशर्स का दर्द

पब्लिशर्स का बिजनेस मॉडल काफी सीधा था — ज्यादा ट्रैफिक आएगा, ज्यादा विज्ञापन दिखेंगे और ज्यादा कमाई होगी। लेकिन गूगल के AI सिस्टम ने इस पूरे खेल को बदल दिया है।

अब जब लोग वेबसाइट पर पहुंच ही नहीं रहे, तो विज्ञापन कौन देखेगा? पेज व्यूज कहां से आएंगे? और क्लिक कैसे गिने जाएंगे?

पब्लिशर्स की विज्ञापन कमाई पर दो तरफ से असर पड़ रहा है। पहला, वेबसाइट्स पर ट्रैफिक लगातार घट रहा है। दूसरा, विज्ञापन देने वाली कंपनियां खुद गूगल और Meta जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तरफ जा रही हैं, क्योंकि वहां ग्राहकों को ज्यादा सटीक तरीके से टारगेट किया जा सकता है।

मार्च 2026 की फिक्की-ईवाई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर 2025 में 9 फीसदी बढ़कर 2.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। लेकिन इस बढ़त का सबसे ज्यादा फायदा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को मिला, पारंपरिक टीवी और न्यूज पब्लिशर्स को नहीं।

डिजिटल विज्ञापन बाजार 26 फीसदी बढ़कर 947 अरब रुपये तक पहुंच गया। यानी ब्रैंड्स का पैसा डिजिटल दुनिया में जा रहा है, लेकिन न्यूज वेबसाइट्स पर नहीं, बल्कि गूगल और Meta जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के इकोसिस्टम में।

रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की ‘जर्नलिज्म एंड टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल पब्लिशर्स ने कहा कि अब कमाई के लिए सब्सक्रिप्शन और मेंबरशिप उनकी पहली प्राथमिकता बन चुकी है। 76 फीसदी पब्लिशर्स ने इसे सबसे अहम बताया, जबकि डिस्प्ले विज्ञापन को 68 फीसदी ने दूसरी प्राथमिकता माना। 

पब्लिशर्स भी चुप नहीं बैठे हैं। वे इस संकट से निपटने के लिए कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहे हैं।

  1. AI Licensing Deals: कंटेंट का दाम वसूलो

    बड़े पब्लिशर्स अब AI कंपनियों के साथ समझौते कर रहे हैं। मतलब- AI कंपनियां उनका कंटेंट इस्तेमाल करें और बदले में उन्हें पैसा दें।

    News Corp ने OpenAI के साथ 5 साल की 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा की डील की है। वहीं The New York Times को Amazon की एलेक्सा और रूफस शॉपिंग असिस्टेंट सेवाओं से हर साल करीब 2 से 2.5 करोड़ डॉलर मिल रहे हैं।

    इसके अलावा Associated Press, Time, Fortune, CNN, The Washington Post और Condé Nast जैसी कई बड़ी मीडिया कंपनियां किसी न किसी AI कंपनी के साथ समझौते कर चुकी हैं।

    लेकिन यह मॉडल फिलहाल सिर्फ बड़े खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद दिख रहा है। मिड-साइज पब्लिशर्स को 10 लाख से 50 लाख डॉलर तक की डील मिल सकती है, जो उनके ट्रैफिक नुकसान की भरपाई के लिए काफी नहीं है। वहीं छोटे पब्लिशर्स और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अभी ऐसे समझौतों के दरवाजे लगभग बंद हैं।

    इसी बीच Cloudflare ने “पे पर क्रॉल” नाम का एक मार्केटप्लेस शुरू किया है। इसमें पब्लिशर्स तय कर सकते हैं कि AI कंपनियां उनके कंटेंट को स्कैन करने के बदले कितना पैसा देंगी।

    जून 2025 में Cloudflare के आंकड़ों ने एक चौंकाने वाली तस्वीर दिखाई। गूगल हर 9 से 14 पेज स्कैन करने पर एक विजिटर वेबसाइट को भेजता है। लेकिन OpenAI करीब 1,700 पेज स्कैन करने के बाद सिर्फ एक विजिटर भेजता है। वहीं Anthropic का अनुपात तो 73,000 पेज पर सिर्फ एक विजिटर का रहा।

    यही वजह है कि दुनिया की 79 फीसदी बड़ी न्यूज वेबसाइट्स ने कम से कम एक AI ट्रेनिंग बॉट को ब्लॉक कर दिया है।

  1. सब्सक्रिप्शंस और डायरेक्ट ऑडियंस: प्लेटफॉ़र्म पर नहीं, खुद पर भरोसा

जो पब्लिशर्स AI की मार से बचे हैं, उनका एक कॉमन सिक्रेट है- उन्होंने गूगल पर निर्भरता कम की।

The New Yorker ने 2025 में रिकॉर्ड कमाई, रिकॉर्ड मुनाफा और रिकॉर्ड सब्सक्राइबर्स हासिल किए। वहीं The New York Times के 2025 के आखिर तक 1.278 करोड़ सब्सक्राइबर्स हो चुके थे। कंपनी का लक्ष्य 2027 तक इसे बढ़ाकर 1.5 करोड़ तक पहुंचाने का है।

Time मैगजीन का अनुमान है कि 2026 में उसकी कुल कमाई का 50 फीसदी हिस्सा इवेंट्स से आएगा, जबकि 2023 में यह हिस्सा 28 फीसदी था। वहीं Bloomberg Media के ग्लोबल फोरम्स से 2025 में स्पॉन्सरशिप कमाई में 30 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 76 फीसदी मीडिया लीडर्स का कहना है कि अब वे चाहते हैं कि उनके कर्मचारी “क्रिएटर्स” की तरह काम करें। यानी सिर्फ खबर लिखना नहीं, बल्कि ऑडियंस के साथ सीधा जुड़ाव बनाना भी जरूरी हो गया है।

इसके अलावा 50 फीसदी पब्लिशर्स अब क्रिएटर पार्टनरशिप्स पर काम कर रहे हैं, ताकि नए दर्शकों तक पहुंच बनाई जा सके।

  1. SEO का नया अवतार: GEO (Generative Engine Optimization)
पहले SEO का मतलब था — गूगल के टॉप 10 रिजल्ट्स में जगह बनाओ। लेकिन अब दौर GEO यानी “जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन” का है। अब कोशिश यह होती है कि AI के जवाबों में आपकी वेबसाइट या कंटेंट का जिक्र आए।

रिसर्च बताती है कि जिन वेबसाइट्स का नाम AI ओवरव्यू में आता है, उनकी ऑर्गेनिक क्लिक-थ्रू रेट 35 फीसदी ज्यादा रहती है। वहीं पेड क्लिक-थ्रू रेट 91 फीसदी तक बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिस कंटेंट का ढांचा साफ और व्यवस्थित होगा — जैसे सवाल-जवाब फॉर्मेट, छोटे हेडिंग्स और लिस्ट्स — उसे AI ज्यादा आसानी से समझता है और अपने जवाबों में ज्यादा इस्तेमाल करता है।

ग्रोथ मेमो के फरवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, किसी आर्टिकल के शुरुआती 30 फीसदी हिस्से से ही 44 फीसदी AI सिटेशंस आती हैं। यानी अब आर्टिकल की शुरुआती लाइनें पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई हैं।

भारत में यह बदलाव एक बड़े मौके की तरह भी देखा जा रहा है। हिंदी और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में AI द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कंटेंट की अभी कमी है। गूगल का AI सिस्टम अब हिंदी में भी जवाब देने लगा है, लेकिन हिंदी कंटेंट क्रिएटर्स अभी GEO के हिसाब से कंटेंट तैयार नहीं कर रहे। ऐसे में जो लोग जल्दी इस दिशा में काम करेंगे, उन्हें सबसे बड़ा फायदा मिल सकता है।

ChatGPT से Traffic: उम्मीद कम, हकीकत और कम

कुछ लोगों को लगता है कि अगर गूगल से ट्रैफिक कम हो रहा है, तो उसकी भरपाई ChatGPT जैसे AI प्लेटफॉर्म्स से हो जाएगी।

सितंबर से नवंबर 2025 के बीच ChatGPT ने पब्लिशर्स को करीब 1.2 अरब आउटगोइंग रेफरल्स भेजे, जो पिछले साल के मुकाबले 52 फीसदी ज्यादा थे। सुनने में यह आंकड़ा अच्छा लगता है, लेकिन असली तस्वीर अलग है।

कंडक्टर की रिसर्च के मुताबिक, सभी AI प्लेटफॉर्म्स मिलकर भी पब्लिशर्स के कुल ट्रैफिक का सिर्फ 1 फीसदी हिस्सा ही भेज पा रहे हैं।

वहीं रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि अकेला गूगल, ChatGPT के मुकाबले 500 गुना ज्यादा रेफरल्स भेजता है। अगर गूगल सर्च और गूगल डिस्कवर को साथ जोड़ दें, तो यह अंतर 1,300 गुना तक पहुंच जाता है।

यानी AI सर्च अभी नया ट्रैफिक स्रोत नहीं बन पाया है। उल्टा, उसने पब्लिशर्स का पुराना ट्रैफिक कम कर दिया है।

भारत के पब्लिशर्स के लिए क्या मायने रखता है?

भारत में internet users की संख्या 2025 के अंत तक 1.03 billion यानी एक अरब तीन करोड़ पार कर गई। यहाँ digital news market 2026 के अंत तक $1 billion revenue generate करने का अनुमान है।

लेकिन AI का असर भारत पर भी उतना ही गहरा है। Perplexity अब India में US से भी बड़ा market बन गया है। ChatGPT फरवरी 2026 तक 900 मिलियन वीकली एक्टिव यूजर्स तक पहुंच गया और भारत में भी 10 करोड़ weekly users। Google AI Overviews 40 भाषाओं में हैं जिनमें हिंदी भी शामिल है।

भारत के हिंदी न्यूज़ पोर्टल्स, regional language sites और छोटे digital पब्लिशर्स — जो Google Search से अपना ज़्यादातर traffic पाते थे — अब एक बड़े transition के मुहाने पर खड़े हैं।

असली सवाल: कंटेंट बनाने वाले को पैसा कौन देगा?

यह सिर्फ बिजनेस मॉडल का मामला नहीं है, बल्कि पत्रकारिता के अस्तित्व का सवाल बन चुका है।

अगर पब्लिशर्स कमाई नहीं कर पाएंगे, तो वे रिपोर्टर्स नहीं रख पाएंगे। रिपोर्टर्स नहीं होंगे, तो ग्राउंड रिपोर्टिंग कम हो जाएगी। और जब ग्राउंड रिपोर्टिंग ही नहीं होगी, तो एआई के पास इस्तेमाल करने के लिए ओरिजिनल कंटेंट भी नहीं बचेगा। बिना ओरिजिनल कंटेंट के एआई सिस्टम भी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे।

यानी यह एक खतरनाक चक्र बनता जा रहा है, जो पूरे कंटेंट इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है।

Cloudflare के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Matthew Prince ने जुलाई 2025 में पब्लिशर्स को ऐसे टूल्स दिए, जिनकी मदद से वे एआई बॉट्स को ब्लॉक कर सकते हैं। नए Cloudflare ग्राहकों के लिए यह सुविधा डिफॉल्ट रूप से शुरू की गई।

इसका मतलब है कि अब पब्लिशर्स अपने कंटेंट को एआई कंपनियों के लिए मुफ्त में उपलब्ध नहीं कराना चाहते। वे अपने कंटेंट की अहमियत और कमी दोनों बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन गूगल को पूरी तरह ब्लॉक करना आसान नहीं है, क्योंकि सर्च बाजार में उसकी हिस्सेदारी 90 फीसदी से ज्यादा है। अगर कोई पब्लिशर गूगल को ब्लॉक कर दे, तो उसकी वेबसाइट इंटरनेट पर लगभग गायब जैसी हो सकती है।

आगे का रास्ता

Dotdash Meredith के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर Neil Vogel का कहना है कि AI प्लेटफॉर्म्स को पब्लिशर्स और क्रिएटर्स को उनके कंटेंट का उचित पैसा देना होगा। वहीं Condé Nast के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Roger Lynch ने कहा कि OpenAI के साथ साझेदारी से पारंपरिक सर्च से होने वाले कमाई के नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो रही है।

लेकिन छोटे पब्लिशर्स की सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि उनके पास न तो OpenAI जैसी बड़ी कंपनियों के साथ डील है और न ही Condé Nast जैसा बड़ा ब्रैंड नाम।

ऐसे में 2026 में पब्लिशर्स के सामने टिके रहने के लिए कुछ ही रास्ते बचे हैं। जैसे — सब्सक्रिप्शन और मेंबरशिप बढ़ाना, अपनी ऑडियंस के साथ सीधा रिश्ता बनाना जिसे कोई प्लेटफॉर्म छीन न सके, न्यूजलेटर्स को कमाई का मजबूत जरिया बनाना, इवेंट्स और वास्तविक अनुभवों पर निवेश करना और जीईओ यानी “जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन” सीखना।

रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में एक और दिलचस्प बात सामने आई। पब्लिशर्स अब सबसे ज्यादा निवेश YouTube पर करना चाहते हैं। 2025 में इसका नेट स्कोर 52 था, जो 2026 में बढ़कर 74 हो गया। इससे साफ है कि मीडिया इंडस्ट्री तेजी से वीडियो पत्रकारिता की तरफ बढ़ रही है।

एक युग का अंत, एक नई शुरुआत

जिस क्लिक इकॉनमी पर पिछले 20 साल की डिजिटल पत्रकारिता टिकी हुई थी, वह अब तेजी से बदल रही है। AI ने सामान्य कंटेंट को लगभग एक जैसी चीज बना दिया है। अब साधारण सवालों के जवाब AI खुद देने लगा है।

ऐसे में वही पत्रकारिता टिक पाएगी, जिसमें ओरिजिनल रिपोर्टिंग हो, एक्सक्लूसिव आंकड़े हों, विशेषज्ञों का विश्लेषण हो और ऐसा कंटेंट हो जिसे AI आसानी से कॉपी न कर सके।

2026 की मीडिया दुनिया की सबसे बड़ी चिंता यही है — “इनविजिबल पब्लिशर”। यानी वह पब्लिशर जो कंटेंट तो बना रहा है, जवाब भी उसी के कंटेंट से तैयार हो रहे हैं, लेकिन लोग उसकी वेबसाइट तक पहुंच ही नहीं रहे।

हालांकि इतिहास बताता है कि हर बड़ी तकनीकी क्रांति के समय मीडिया इंडस्ट्री ने खुद को बदला है। जब रेडियो आया तो अखबारों को डर लगा। टीवी आया तो रेडियो को खतरा महसूस हुआ। इंटरनेट आया तो टीवी इंडस्ट्री चिंतित हो गई। लेकिन हर दौर में मीडिया ने खुद को नए तरीके से ढाला।

अब AI सर्च के दौर में भी पब्लिशर्स को खुद को बदलना होगा। सिर्फ गूगल के हिसाब से नहीं, बल्कि अपने पाठकों और दर्शकों की जरूरतों के हिसाब से।

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OTT आधारित TV सेवाओं पर ETV ने TRAI को दिए बड़े सुझाव

ETV ने TRAI से ALTD और FAST प्लेटफॉर्म्स के लिए हल्के नियामकीय ढांचे की मांग की है। साथ ही प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स पर गैर-भेदभाव और निष्पक्ष व्यवहार के सख्त नियम लागू करने की सिफारिश की है।

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2026
OTT Regulation

क्षेत्रीय ब्रॉडकास्टर ईनाडु टेलीविजन प्राइवेट लिमिटेड (Eenadu Television Private Limited - ETPL) ने एप्लिकेशन आधारित लिनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सेवाओं के लिए “लाइट-टच” यानी हल्के नियामकीय ढांचे की मांग की है। हालांकि कंपनी ने साथ ही यह भी कहा है कि प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स पर सख्त गैर-भेदभाव नियम लागू किए जाने चाहिए, ताकि ब्रॉडकास्टर्स, खासकर क्षेत्रीय चैनलों के हित सुरक्षित रह सकें।

TRAI को भेजे अपने सुझावों में ETPL ने कहा कि इंटरनेट आधारित टीवी वितरण प्रणाली पारंपरिक केबल और DTH नेटवर्क से पूरी तरह अलग है, इसलिए उस पर पुराने प्रसारण नियम लागू नहीं किए जाने चाहिए। हालांकि कंपनी ने चेतावनी दी कि कई ऐप आधारित प्लेटफॉर्म अब डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स (DPOs) की तरह काम कर रहे हैं, इसलिए उनकी जवाबदेही तय होना जरूरी है।

ETPL ने मांग की कि सभी ऐप प्रदाताओं को कंटेंट उपलब्धता, डिस्कवरी और व्यावसायिक व्यवहार में समानता सुनिश्चित करनी चाहिए। कंपनी ने कहा कि किसी भी प्रकार का “आर्म-ट्विस्टिंग” या भेदभावपूर्ण व्यवहार कंटेंट प्रदाताओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रॉडकास्टर्स पहले से ही केबल टीवी नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट, MIB गाइडलाइंस और IT एक्ट जैसे कानूनों के तहत नियंत्रित हैं। ऐसे में उन पर अतिरिक्त नियम थोपने के बजाय प्लेटफॉर्म स्तर पर नियमन किया जाना चाहिए।

ETPL ने ALTD प्लेटफॉर्म्स के लिए ऑथराइजेशन सिस्टम लागू करने का भी समर्थन किया। इसके तहत भारत में रजिस्ट्रेशन, स्वामित्व खुलासा, बैंक गारंटी और “मस्ट-कैरी” जैसे नियम लागू करने की सिफारिश की गई है। विदेशी ALTD ऑपरेटर्स को भारतीय इकाई या जॉइंट वेंचर के जरिए काम करने की बात भी कही गई है।

कंपनी ने TRAI को चेतावनी दी कि अत्यधिक नियमन से डिजिटल वीडियो इकोसिस्टम में इनोवेशन और निवेश प्रभावित हो सकता है। ETPL ने अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां FAST और ALTD सेवाओं के लिए हल्का नियामकीय मॉडल अपनाया गया है।

साथ ही कंपनी ने कहा कि ALTD व्यूअरशिप को फिलहाल पारंपरिक टीवी रेटिंग सिस्टम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इंटरनेट आधारित देखने का तरीका टीवी से अलग है। मामले को लेकर TRAI की आगे की प्रक्रिया पर मीडिया इंडस्ट्री की नजर बनी हुई है।

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Panorama Studios की सब्सिडियरी कंपनी ने इस फिल्म के एयरबोर्न राइट्स किए हासिल

एयरबोर्न राइट्स का मतलब उन अधिकारों से है, जिनके जरिए फिल्मों को एयरलाइंस और फ्लाइट एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म्स पर दिखाया जा सकता है।

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2026
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फिल्म और कंटेंट कंपनी पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल (Panorama Studios International Limited) ने जानकारी दी है कि उसकी सहायक कंपनी Panorama Studios Inflight LLP ने शॉर्ट फिल्म ‘Yaan’ के एयरबोर्न राइट्स के लिए समझौता किया है।

कंपनी के मुताबिक यह एग्रीमेंट फिल्ममेकर सतीश शर्मा के साथ किया गया है। इसके तहत Panorama Studios Inflight LLP को फिल्म ‘Yaan’ के एयरबोर्न राइट्स पूरी दुनिया, भारत समेत, एक्सक्लूसिव आधार पर मिल गए हैं।

एयरबोर्न राइट्स का मतलब उन अधिकारों से है, जिनके जरिए फिल्मों को एयरलाइंस और फ्लाइट एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म्स पर दिखाया जा सकता है।

शॉर्ट फिल्म ‘Yaan’ में सुखराम भाभर, कमली भाभर, मास्टर सुरेश और मोहन भूरिया जैसे कलाकार नजर आए हैं। फिल्म का निर्देशन भी सतीश शर्मा ने किया है।

कंपनी ने कहा है कि यह समझौता उसके कंटेंट पोर्टफोलियो को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है।

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'Jio Platforms' के मैनेजिंग डायरेक्टर बने आकाश अंबानी

जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने आकाश अंबानी को पांच वर्षों के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। कंपनी जल्द ही संभावित पब्लिक लिस्टिंग के लिए Sebi के पास DRHP दाखिल कर सकती है।

Last Modified:
Wednesday, 13 May, 2026
aakaashambani

जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने आकाश अंबानी (Akash Ambani) को पांच साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) नियुक्त किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने यह फैसला संभावित पब्लिक लिस्टिंग की तैयारियों के बीच लिया है।

बताया जा रहा है कि जियो प्लेटफॉर्म्स जल्द ही भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India - Sebi) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकती है। कंपनी के बोर्ड ने 9 अप्रैल को हुई बैठक में आकाश अंबानी की नियुक्ति को मंजूरी दी थी। 7 मई को कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) में जमा दस्तावेजों के अनुसार, यह नियुक्ति शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन होगी।

आकाश अंबानी अक्टूबर 2014 में रिलायंस जियो इन्फोकॉम (Reliance Jio Infocomm) के बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में शामिल हुए थे। जून 2022 से वह रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा वह जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड का भी हिस्सा हैं।

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‘संगबाद प्रतिदिन’ के संस्थापक टुटू बोस का निधन

कोलकाता से प्रकाशित प्रमुख बंगाली समाचारपत्र ‘संगबाद प्रतिदिन’ (Sangbad Pratidin) के संस्थापक और मशहूर मीडिया उद्यमी स्वपन साधन बोस उर्फ टुटू बोस का मंगलवार रात निधन हो गया।

Last Modified:
Wednesday, 13 May, 2026
Tu Tu Bose

कोलकाता से प्रकाशित प्रमुख बंगाली समाचारपत्र ‘संगबाद प्रतिदिन’ (Sangbad Pratidin) के संस्थापक और मशहूर मीडिया उद्यमी स्वपन साधन बोस उर्फ टुटू बोस का मंगलवार रात निधन हो गया। वह करीब 78 वर्ष के थे। बताया जा रहा है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।

टुटू बोस भारतीय मीडिया और फुटबॉल जगत की एक बेहद प्रभावशाली शख्सियत थे। उन्होंने वर्ष 1992 में बंगाली भाषा के दैनिक समाचारपत्र ‘संगबाद प्रतिदिन’ की स्थापना की थी। यह अखबार जल्द ही पश्चिम बंगाल के प्रमुख समाचारपत्रों में शामिल हो गया। वर्तमान में उनके बेटे श्रीनजॉय बोस इस प्रकाशन के एडिटर-इन-चीफ हैं।

‘संगबाद प्रतिदिन’ की शुरुआत को क्षेत्रीय भाषा मीडिया के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है। उस दौर में क्षेत्रीय भाषाओं में समाचारों की बढ़ती मांग को देखते हुए टुटू बोस ने प्रकाशन क्षेत्र में प्रवेश किया और अपनी अलग पहचान बनाई।

मीडिया जगत के अलावा टुटू बोस भारतीय फुटबॉल प्रशासन में भी बेहद सक्रिय रहे। वह देश के प्रतिष्ठित फुटबॉल क्लब मोहन बागान सुपर जायंट के पूर्व अध्यक्ष थे। उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक क्लब के प्रशासन में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने सचिव से लेकर अध्यक्ष तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

टुटू बोस को भारतीय फुटबॉल के सबसे प्रभावशाली प्रशासकों में गिना जाता था। उनके नेतृत्व में मोहन बागान ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं और क्लब की लोकप्रियता लगातार बढ़ी।

इसके अलावा वह वर्ष 2005 से 2011 तक राज्यसभा सदस्य भी रहे। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने ‘एशियन एज’ के कोलकाता संस्करण की शुरुआत में भी भूमिका निभाई थी। साथ ही दुबई में ‘रेडियो एशिया नेटवर्क’ का संचालन भी उनसे जुड़ा रहा।

टुटू बोस के निधन की खबर सामने आने के बाद मीडिया, खेल और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई पत्रकारों, खेल प्रशासकों और सामाजिक हस्तियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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प्रसिद्ध लेखक और मैनेजमेंट गुरु राधाकृष्णन पिल्लई का निधन

प्रसिद्ध लेखक और लीडरशिप कोच राधाकृष्णन पिल्लई का कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। ‘चाणक्य’ विषय पर उनकी किताबों और व्याख्यानों ने हजारों छात्रों और प्रोफेशनल्स को प्रेरित किया।

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
Radhakrishnan Pillai

प्रसिद्ध लेखक, लीडरशिप मेंटर और नॉलेज कोच राधाकृष्णन पिल्लई (Radhakrishnan Pillai) का सोमवार रात निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उन्हें मैंगलोर (Mangalore) में कार्डियक अरेस्ट आया था। वह 50 वर्ष के थे।

21 नवंबर 1974 को जन्मे राधाकृष्णन पिल्लई अपने लेखन और व्याख्यानों के जरिए चाणक्य की नीतियों और भारतीय दर्शन को आधुनिक दौर के पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कुल 24 किताबें लिखीं, जिनमें चाणक्य पर आधारित उनकी पुस्तकें सबसे अधिक चर्चित रहीं। उनकी कई किताबें बेस्टसेलर भी बनीं।

राधाकृष्णन पिल्लई देशभर के साहित्यिक कार्यक्रमों, मैनेजमेंट फोरम्स और कॉलेज आयोजनों में लोकप्रिय वक्ता के रूप में पहचाने जाते थे। नेतृत्व, रणनीति, प्रबंधन और भारतीय दर्शन पर उनके विचारों ने हजारों छात्रों, प्रोफेशनल्स और बिजनेस लीडर्स को प्रभावित किया। परिवार की ओर से जारी शोक संदेश में उन्हें “एक खूबसूरत आत्मा” बताया गया। परिवार ने कहा कि उनके विचार, मूल्य और प्रेरणा हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।

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गैर हिंदी भाषी युवाओं को पत्रकारिता से जोड़ रहे हैं रविशंकर रवि

‘दैनिक पूर्वोदय’ के संपादक रविशंकर रवि पिछले दो दशकों से पूर्वोत्तर भारत में हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने अखबार को पत्रकारिता और हिंदी शिक्षा की पाठशाला बना दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
Dainik Purvoday

पूर्वोत्तर भारत में हिंदी पत्रकारिता को मजबूत पहचान दिलाने वाले वरिष्ठ पत्रकार और ‘दैनिक पूर्वोदय’ के संपादक रविशंकर रवि आज एक ऐसे नाम बन चुके हैं, जिन्होंने पत्रकारिता को केवल खबरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज, शिक्षा और भाषा से जोड़ने का काम किया। लगभग चार दशकों की सक्रिय पत्रकारिता और पिछले 21 वर्षों से ‘दैनिक पूर्वोदय’ के संपादक के रूप में उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में हिंदी पत्रकारिता की नई धारा तैयार की है।

रविशंकर रवि की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह मानी जाती है कि उन्होंने अपने अखबार को हिंदी पत्रकारिता की एक जीवंत पाठशाला में बदल दिया। पूर्वोत्तर के हजारों ऐसे छात्र, जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं है, उनके प्रयासों से हिंदी पत्रकारिता से जुड़े और रोजगार के नए अवसरों तक पहुंचे। आज पूर्वोत्तर के कई विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थी ‘दैनिक पूर्वोदय’ में इंटर्नशिप करते हैं, जहां उन्हें रिपोर्टिंग, संपादन, भाषा शैली, डिजिटल मीडिया और तकनीकी कार्यप्रणाली का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

पिछले वर्ष ही करीब सौ विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें अधिकतर गैर हिंदीभाषी थे। ऐसे समय में जब मीडिया उद्योग प्रशिक्षित युवाओं की कमी से जूझ रहा है, रविशंकर रवि नई पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके प्रयासों का असर अकादमिक जगत में भी दिखाई देता है। ‘दैनिक पूर्वोदय’ को गौहाटी विश्वविद्यालय के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना इसकी बड़ी मिसाल माना जा रहा है। यह किसी क्षेत्रीय हिंदी समाचार पत्र के लिए विशेष उपलब्धि है।

रविशंकर रवि ने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत 1986 में ‘नवभारत टाइम्स’ के पटना संस्करण से की थी। इसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने हमेशा यह कोशिश की कि पूर्वोत्तर केवल उग्रवाद या सीमाई तनाव की खबरों तक सीमित न रहे, बल्कि उसकी संस्कृति, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाएं भी देश के सामने आएं।

डिजिटल दौर में भी उन्होंने ‘फोकस पूर्वोत्तर’ नाम से यूट्यूब चैनल शुरू कर पूर्वोत्तर की खबरों को हिंदी दर्शकों तक पहुंचाने का नया माध्यम तैयार किया। साथ ही वे विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों में हिंदी पत्रकारिता पर व्याख्यान देकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी करते हैं।

पूर्वोत्तर भारत में हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में रविशंकर रवि का योगदान एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह साबित किया कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज और भाषा को जोड़ने का मजबूत माध्यम भी हो सकती है।

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विश्वसनीयता और निष्पक्षता पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत: हरिवंश नारायण सिंह

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने संसद टीवी (Sansad TV) और भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के सहयोग से शुरू किए गए पहले विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
Harivansh Singh Ji

देश में मीडिया शिक्षा और संसदीय पत्रकारिता को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने संसद टीवी (Sansad TV) और भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के सहयोग से शुरू किए गए पहले विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

यह पहल मीडिया शिक्षा और इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य IIMC के विद्यार्थियों को संसदीय प्रसारण मीडिया की कार्यप्रणाली, पत्रकारिता के व्यावहारिक पहलुओं और मीडिया इंडस्ट्री के प्रोफेशनल माहौल से परिचित कराना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को संसद टीवी में काम करने और संसदीय पत्रकारिता को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि मीडिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी साख और भरोसा होता है, इसलिए पत्रकारों को रिपोर्टिंग में उच्चतम स्तर की विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति के सचिव और संसद टीवी के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) अमित खरे भी मौजूद रहे। साथ ही IIMC की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौर, संस्थान के फैकल्टी सदस्य और अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

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ईटीवी नेटवर्क में साईं कृष्णा का प्रमोशन, अब संभालेंगे वाइस प्रेजिडेंट की जिम्मेदारी

साईं कृष्णा इस प्रमोशन से पहले ETV Win के बिजनेस हेड के रूप में काम कर रहे थे।

Last Modified:
Monday, 11 May, 2026
enadu Sai Krishna

ईनाडु टेलीविजन प्राइवेट लिमिटेड (ETV) ने साईं कृष्णा को वाइस प्रेजिडेंट के पद पर प्रमोट किया है। साईं कृष्णा इस प्रमोशन से पहले ETV Win के बिजनेस हेड के रूप में काम कर रहे थे। उनके नेतृत्व में फरवरी 2023 में ETV Win को लॉन्च किया गया था।

नेटवर्क के मुताबिक, ETV Win की शुरुआत तेलुगु स्टोरीटेलिंग को केंद्र में रखकर की गई थी। प्लेटफॉर्म को खास तौर पर फैमिली ऑडियंस के लिए तैयार किया गया, न कि केवल व्यक्तिगत मोबाइल व्यूइंग के लिए। इसके साथ ही CTV एक्सपीरियंस को भी प्राथमिकता दी गई।

साईं कृष्णा की इस पदोन्नति को नेटवर्क में उनकी अहम भूमिका और योगदान के तौर पर देखा जा रहा है।

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