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'टीवी पत्रकारिता में आ रही विश्वसनीयता की कमी को लेकर हमें समझनी होगी ये बात'
सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एंड एनालिसिस की ओर से आयोजित ‘मीडिया मंथन 2019’ में वरिष्ठ पत्रकारों ने रखे अपने विचार
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
नई दिल्ली के न्यू महाराष्ट्र सदन में मंगलवार को ‘मीडिया मंथन 2019’ का आयोजन किया गया। ‘सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एंड एनालिसिस’ (CMRA) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में तमाम पत्रकारों और दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कई कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ ही आईआईएमसी, माखनलाल चतुर्वेदी, श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने भी शिकरत की।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल का कहना था कि वर्तमान में मीडिया व्यावसायीकरण के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में वह सामाजिक उत्तरदायित्वों को पीछे छोड़ता जा रहा है। उनका कहना था कि किसी भी परिस्थिति में पत्रकार और पत्रकारिता के विद्यार्थियों को अपने सकारात्मक विचारों और राष्ट्रीयता की सोच को कभी मरने नहीं देना चाहिए। नागरिक संशोधन विधेयक के बारे में उनका कहना था कि विरोधी ताकतों द्वारा इस मुद्दे पर आम जनता को गुमराह करके धर्म के नाम पर बांटा जा रहा हैं। इसके साथ ही उन्होंने व्यावसायिक मीडिया के दुष्परिणामों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में खोजी पत्रकारिता दम तोड़ रही है।
पहले सत्र के वक्ता उमेश उपाध्याय ने बताया कि वर्तमान में टेलिविजन पत्रकारिता सिर्फ डिबेट तक सीमित होकर रह गई है। मीडिया ने अपने सिद्धांतों को भुलाकर समाज में नकारात्मक भाव को बढ़ाने वाली सामग्री को ज्यादा महत्व देना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में टीवी पत्रकारिता की विश्वसनीयता में कमी आयी है।
दूरदर्शन के वरिष्ठ संपादक अशोक श्रीवास्तव का कहना था कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों में वैचारिक मंथन होना बहुत जरूरी है। आज की मुख्य धारा की मीडिया का स्वरूप अराजकवादी हो चुका है। टीवी चैनल्स के डिबेट कार्यक्रमों में हिन्दू मुस्लिम का मुद्दा प्रमुखता से दिखाया जा रहा है। इस तरह की डिबेट का मकसद सिर्फ टीआरपी को बढ़ाना है। इसके चलते तमाम मीडिया चैनल्स झूठे तथ्यों को जनता को दिखाकर गुमराह करने का कार्य कर रहे हैं।
‘ऑर्गेनाइजर’ के संपादक व वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर ने ब्रेकिंग न्यूज की अवधारणा को समाज के लिए घातक बताया। उनका कहना था कि टीआरपी के कारण मीडिया तथ्यों की जांच किए बिना ही समाचारों को दिखा रहा है। इस कारण फेक न्यूज तेजी से फैल रही है। उन्होंने मीडिया को सकारात्मक दिशा में कार्य करने की सलाह दी ।
द्वितीय सत्र के वक्ता विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने संस्कृति को जीवन मूल्य बताते हुए कहा कि वर्तमान में भारतीय संस्कृति की सुरक्षा के तमाम सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में मीडिया को संस्कृति से संबंधित विषयों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, ताकि भारतीय संस्कृति को संग्रहित किया जा सके। उन्होंने बताया कि पारिवारिक संस्कृति के अभाव का ही नतीजा है कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है। आलोक कुमार का कहना था कि सभ्यता आती-जाती रहती है, जबकि संस्कृति निरन्तर चलती रहती है।
‘आईआईएमसी’ के पूर्व महानिदेशक के.जी सुरेश ने कहा कि समाज के अच्छे मुद्दों को मीडिया में लाकर सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देना होगा। साथ ही उन्होंने नारी सशक्तिकरण को विकसित करने पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम संयोजक रविन्द्र चौधरी ने कहा कि मीडिया के अंदर राष्ट्रीय विचारों का प्रवाह होना चाहिए। सीएमआरए संगठन की उपयोगिता और उद्देश्य के बारे में बताते हुए उन्होंने सामाजिक,सांस्कृतिक विषयों पर चिंतन करने की जरूरत बताया। मंच का संचालन कर रहे शेखर त्रिवेदी ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
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