वरिष्ठ पत्रकारों ने भारतीय भाषाओं में अंतर संवाद की जरूरत पर कुछ यूं दिया जोर

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) में सोमवार को हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 14 September, 2020
Last Modified:
Monday, 14 September, 2020
IIMC

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्‍थान’ (IIMC) में सोमवार को हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर ‘भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद’ विषय पर आयोजित वेबिनार में वरिष्‍ठ पत्रकार एवं माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय, भोपाल के पूर्व कुलपति अच्‍युतानंद मिश्र ने कहा, ‘भाषा का संबंध इतिहास, संस्‍कृति और परंपराओं से है। भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद की परंपरा काफी पुरानी है और ऐसा सैकड़ों वर्षों से होता आ रहा है, यह उस दौर में भी हो रहा था, जब वर्तमान समय में प्रचलित भाषाएं अपने बेहद मूल रूप में थीं। श्रीमद्भगवत गीता में समाहित श्रीकृष्‍ण का संदेश दुनिया के कोने-कोने में केवल अनेक भाषाओं में हुए उसके अनुवाद की बदौलत ही पहुंचा। उन दिनों अंतर-संवाद की भाषा संस्‍कृत थी, तो अब यह जिम्‍मेदारी हिंदी की है।’

मिश्र का यह भी कहना था, ‘भारतीय भाषाओं के बीच अंतर-संवाद में रुकावट अंग्रेजी के कारण आई और इसकी वजह हम भारतीय ही थे, जिन्‍होंने हिंदी या अन्‍य भारतीय भाषाओं के स्‍थान पर अंग्रेजी को अंतर-संवाद का माध्‍यम बना लिया। उन्‍होंने कहा कि हिंदी के विद्वानों, पत्रकारों और संस्‍थाओं को इस दिशा में कार्य करना चाहिए था, लेकिन उन्‍होंने यह जिम्‍मेदारी नहीं निभाई। जब डॉ. राम मनोहर लोहिया ने ‘अंग्रेजी हटाओ’ अभियान शुरू किया, तो उसका आशय ‘हिंदी लाओ’ कतई नहीं था, लेकिन दुर्भाग्‍यवश ऐसा प्रचारित किया गया। इससे राज्‍यों के मन में भ्रांति फैली। इसका निराकरण हिंदी के विद्वानों, पत्रकारों और संस्‍थाओं को करना चाहिए था। अन्‍य भारतीय भाषाओं के हिंदी के करीब आने का कारण मनोरंजन, पर्यटन और प्रकाशन क्षेत्र है। हिंदी की लोकप्रियता का श्रेय हिंदी के बुद्धिजीवियों को नहीं, अपितु इन क्षेत्रों को दिया जाना चाहिए।’

उन्‍होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा घोषित राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति को देखते हुए उससे कुछ अपेक्षाएं हैं। इसमें मातृभाषा में शिक्षा और भारतीय भाषाओं के प्रोत्‍साहन की बात हो रही है, अनुवाद की बात हो रही है। ऐसे में हिंदी से जुड़ी संस्‍थाएं यदि पहल करें तो हिंदी परस्‍पर आदान-प्रदान का व्‍यापक माध्‍यम बन सकती है।

जहां भाषा खत्‍म होती है, वहां संस्‍कृति भी दम तोड़ देती है: अद्वैता काला : मुख्‍य वक्‍ता, पटकथा लेखक एवं स्‍तंभकार अद्वैता काला ने कहा कि जहां भाषा खत्‍म होती है, वहां संस्‍कृति भी उसके साथ दम तोड़ देती है। हमें सभी भाषाओं को महत्‍व देना चाहिए, उन्‍हें समझना चाहिए और उनके संपर्क का माध्‍यम हिंदी है, इसे स्‍वीकार करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि वैसे भाषा बहुत निजी मामला है। इसके माध्‍यम से हम केवल दुनिया से ही नहीं, बल्कि स्‍वयं से भी संवाद करते हैं।

हिंदी की स्थिति की चर्चा करते हुए उन्‍होंने कहा कि फिल्‍मों की पटकथा और संवाद रोमन लिपि में लिखे जाते हैं, क्‍योंकि लोग हिंदी की लिपि नहीं पढ़ पाते, जबकि हिंदी मीडिया की पहुंच बहुत व्‍यापक है। सुश्री काला ने बताया कि उनकी खुद की हिंदी भी हिंदी में लेखन से जुड़ने के बाद ही बेहतर हुई और उन्‍हें लगता है कि शिक्षा प्रणाली यदि सही रही होती तो ऐसा नहीं होता। उनका सुझाव है कि बच्‍चों को अंग्रेजी और हिंदी के साथ-साथ कोई न कोई क्षेत्रीय भाषा भी पढ़ाई जानी चाहिए।

भाषाओं में अंतर-संवाद कोई नई बात नहीं: श्री मुकेश शाह: गुजराती भाषा के ‘साप्‍ताहिक साधना’ के प्रबंध संपादक मुकेश शाह ने कहा कि शब्‍दों को हमने ब्रह्म माना है और भाषाओं में अंतर-संवाद कोई नई बात नहीं है। उन्‍होंने महात्‍मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बापू ने अंग्रेजी में ‘हरिजन’ प्रकाशित किया, लेकिन उसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए उन्‍होंने उसे गुजराती और हिंदी में भी स्‍थापित किया। उन्‍होंने गुजराती में 70 पुस्‍तकों की रचना करने वाले फादर वॉलेस और गुजरात में विद्यालय, महाविद्यालय और विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना करने वाले सयाजीराव गायकवाड़ के योगदान का भी उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कहा कि उत्‍तर-दक्षिण भारत की भाषाओं में व्‍यापक अंतर होने के बावजूद उनमें अंतर-संवाद और अनुवाद होता आया है। उन्‍होंने कहा कि भाषाओं का राष्‍ट्रीय चरित्र के निर्माण में योगदान होता है।

परस्‍पर आदान-प्रदान से ही भाषाएं समृद्ध होती हैं: स्‍नेहशीष सुर: कोलकाता प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष स्‍नेहशीष सुर ने कहा कि हिंदी दिवस पर भारतीय भाषाओं के बीच अंतर-संवाद विषय पर विमर्श का आयोजन करके आईआईएमसी ने दर्शाया कि हिंदी दिवस केवल हिंदी के लिए नहीं है। सभी भाषाओं के बीच संवाद, संपर्क, उनके कल्‍याण तथा विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता के पास बहुत विशाल विरासत और व्‍यावसायिक कौशल है लेकिन यह कौशल अंतरराष्‍ट्रीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए। समस्‍त भाषाएं आगे बढ़ें और उनकी पत्रकारिता आगे बढ़े, यह प्रयास होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि हिंदी भारतीय भाषाओं के बीच संपर्क का माध्‍यम है, इसमें कोई दो राय नहीं है। बीतते समय के साथ हिंदी के साथ अन्‍य भाषाओं के लोगों की भी सहजता बढ़ी है और परस्‍पर आदान-प्रदान से दोनों ही भाषाएं समृद्ध होती हैं।

भाषा ही मेल-मिलाप कराती है: अमीर अली खा: हैदराबाद से प्रकाशित होने वाले उर्दू दैनिक ‘डेली सियासत’ के संपादक अमीर अली खान ने कहा कि पाकिस्‍तान ने जब उर्दू को अपनी राजभाषा बनाया, तो यहां हिंदी और उर्दू में अंतर आ गया। खान ने कहा कि भारत छोटे यूरोप की तरह है, इसे एक ही दिशा में नहीं ले जा सकते। यहां विविध भाषाएं हैं और भाषा ही मेल-मिलाप कराती हैं। उन्‍होंने कहा कि हिंदी की किताबों को उर्दू में अनुवाद कराया जाना चाहिए, लेकिन अन्‍य भाषाओं की पुस्‍तकें भी हिंदी में अनुवाद होनी चाहिए। इससे अंतर-संवाद को बढ़ावा मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि अंतर संवाद को बढ़ावा देने में योगदान प्रदान कर हम खुद को गौरवान्वित समझेंगे।

समस्‍त भाषाएं, राष्‍ट्रीय भाषाएं हैं: प्रो. संजय द्विवेदी: विमर्श के अध्‍यक्ष एवं आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि सरकार की ओर से घोषित नई राष्‍ट्रीय नीति में सभी भारतीय भाषाओं को महत्‍व दिया गया है। हिंदी अकेली राष्‍ट्र भाषा नहीं है, क्‍योंकि समस्‍त भाषाएं इसी राष्‍ट्र के लोगों के द्वारा बोली जाती हैं, लिहाजा वे सभी राष्‍ट्रीय भाषाएं ही हैं। हर जगह संपर्क का माध्‍यम अंग्रेजी बन जाने से नुकसान पहुंचा है, क्‍योंकि बहुत कम लोग हैं, जो अंग्रेजी बोलते हैं। प्रो. द्विवेदी ने ऐसे अनेक विद्वानों का उल्‍लेख किया, जिन्‍होंने  हिंदी और भाषायी पत्रकारिता में अभूतपूर्व योगदान दिया है। नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति की विशेषताएं गिनाते हुए उन्‍होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में अंतर संवाद से वे एक-दूसरे के गुण अपनाएंगी और अंतत: सर्वव्‍यापी, सर्वग्राह्य बनेंगी। इससे भाषायी विद्वेष की भावना का अंत होगा, परंपराओं का समन्‍वय होगा और सभी को सामाजिक न्‍याय तथा आर्थिक न्‍याय प्राप्‍त होगा। उन्‍होंने कहा कि भाषायी विविधता और बहुभाषी समाज आज की आवश्‍यकता है और समस्‍त भाषाओं के लोगों ने ही विश्‍व में अपनी उपलब्धियों के पदचिह्न छोड़े हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत सदैव वसुधैव कुटुम्‍बकम की बात करता आया है और सभी भाषाओं को साथ लेकर चलने के पीछे भी यही भावना है।

भारतीय भाषाओं के बीच संवाद को व्‍यापक रूप से प्रोत्‍साहन दिया जाना चाहिए : प्रो. आनंद प्रधान : आईआईएमसी के भारतीय भाषायी पत्रकारिता विभाग के प्रो. आनंद प्रधान ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच संवाद को व्‍यापक रूप से प्रोत्‍साहन दिया जाना चाहिए। हिंदी दिवस के अवसर पर इस विषय पर विमर्श का आयोजन इस दिशा में काफी महत्‍वपूर्ण है। उन्‍होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में बीच संवाद सैंकड़ों वर्षों से जारी है और इनका विकास भी साथ-साथ ही हुआ है। मसलन, बांग्‍ला और मैथिली में इतनी समानता है कि उनमें अंतर करना मुश्किल है, इसी तरह अवधी और ब्रज भाष तथा हिंदी और उर्दू में भी ऐसा ही है। इस संबंध में उन्‍होंने एक शोध का हवाला दिया। प्रो. प्रधान ने बताया कि हिंदी और उर्दू दैनिकों की भाषा पर हुए एक शोध में देखा गया कि उनमें केवल 23 प्रतिशत शब्‍द ही अलग थे। उन्‍होंने कहा कि वैसे ही हिंदी पत्रकारिता के विकास में मराठी, बांग्‍ला और दक्षिण भारतीय भाषाओं के योगदान की अनदेखी नहीं की जा सकती।

इस कार्यक्रम में आईआईएमसी मुख्‍यालय, क्षेत्रीय केंद्रों के संकाय सदस्‍य, कर्मचारी अधिकारी, भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षु और पूर्व छात्र शामिल हुए।

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नहीं रहे Daily Excelsior के दिल्ली ब्यूरो चीफ डॉ. एचएस पॉल

डॉ. पॉल इस अखबार के साथ तीन दशक से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 December, 2020
Last Modified:
Tuesday, 01 December, 2020
Dr. H S PAUL

उत्तर भारत से पब्लिश होने वाले अंग्रेजी के प्रमुख अखबार ‘डेली एक्सेलसियर’ (Daily Excelsior) के नई दिल्ली ब्यूरो चीफ डॉ. एचएस पॉल का निधन हो गया है। डॉ. पॉल इस अखबार के साथ तीन दशक से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे।

वह ‘स्पेस स्कोप इंटरनेशनल’ (Space Scope International) के प्रेजिडेंट, ‘पॉल मीडिया सर्विसेज’ (Paul Media Services) के सीईओ के साथ-साथ ‘फॉरेन करेसपॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया’ (Foreign Correspondents Club of South Asia), ‘एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया’ (Advertising Standards Council of India) और ‘चेम्सफोर्ड क्लब ऑफ इंडिया’ (Chelmsford Club of India) के मेंबर भी थे।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तमाम स्कूलों, विश्वविद्यालयों व सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित किया गया था। डॉ. पॉल का जन्म 1956 में पंजाब में हुआ था और उन्होंने यूएसए की विक्टोरिया ग्लोबल यूनिवर्सिटी से एडवर्टाइजिंग मैनेजमेंट में डॉक्टरेट की थी।

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पत्रकार और उनके साथी पर सैनिटाइजर डालकर लगाई गई थी आग, हत्याकांड की ये वजह आई सामने

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर का है मामला, पुलिस ने घटना का खुलासा कर तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 December, 2020
Last Modified:
Tuesday, 01 December, 2020
Arrest

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में पत्रकार राकेश सिंह निर्भीक (46) समेत दो लोगों की घर में जलकर हुई मौत के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर से राकेश सिंह के घर में आग लगाई गई थी, जिसमें झुलसकर राकेश सिंह और उनके दोस्त पिंटू साहू की मौत हो गई थी।

पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। हत्याकांड की साजिश रचने वाले कुछ अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है। पकड़े गए आरोपितों के नाम विशुनीपुर निवासी ललित मिश्र, अकरम अली उर्फ अब्दुल कादिर व कलवारी निवासी केशवानंद मिश्र उर्फ रिंकू हैं।

यह भी पढ़ें: पत्रकार की मौत के बाद पत्नी ने उठाई ये मांग, दी आत्मदाह की चेतावनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस का कहना है कि दुश्मनी के चलते घर में आग लगाकर दोनों की हत्या की गई। बताया जाता है कि राकेश सिंह अपनी खबरों में गांव की कमियां और भ्रष्टाचार उजागर करते थे। केशवानंद मिश्र उर्फ रिंकू की मां कलवारी गांव की प्रधान हैं। ऐसे में यहां की कमियां उजागर करना उसे नागंवार गुजरा। वहीं, पिंटू ने ललित मिश्र को अपनी पुरानी कार बेची थी, जिसका करीब दो लाख रुपया वह नहीं दे रहा था। बार-बार पैसा मांगने से ललित नाराज हो गया।

ललित व रिंकू ने मिलकर इस हत्याकांड की साजिश रची। ललित ने अपने साथी अकरम को भी इस साजिश में शामिल कर लिया। पुलिस के अनुसार, अकरम के खिलाफ श्रावस्ती के थाना इकौना में जलाकर मार डालने व गैंगस्टर के मुकदमे चल रहे हैं। पुलिस ने तीनों आरोपितों को जेल भेज दिया है।

गौरतलब है कि 27 नवंबर की रात्रि राकेश और उसके मित्र पिंटू साहू घर के कमरे में थे। राकेश की पत्नी बच्चों के साथ मायके गई हुईं थी। तभी रात्रि में संदिग्ध हालात में राकेश सिंह के घर में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। कमरे की एक दीवार भी धमाके के साथ क्षतिग्रस्त हो गई। झुलसने के चलते पिंटू साहू की मौके पर ही मौत हो गई। मौके पर पहुंची फायर सर्विस तथा पुलिस की टीम ने आग पर काबू पाया और राकेश को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में रेफर कर दिया गया, जहां शनिवार को उनकी भी मौत हो गई।

अस्पताल में भर्ती राकेश सिंह ने मरने से पूर्व पुलिस को बताया था कि दबंगों ने उनके घर में आग लगाई है। राकेश सिंह का कहना था कि कुछ नकाबपोश लोग उनके घर में घुसे थे और मारपीट के बाद वहां आग लगा दी। राकेश सिंह की मौत के बाद उनकी पत्नी विभा सिंह ने पुलिस-प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि दो दिन के अंदर हत्यारोपितों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अपनी दोनों बेटियों के साथ आत्मदाह कर लेंगी।

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पत्रकार की मौत के बाद पत्नी ने उठाई ये मांग, दी आत्मदाह की चेतावनी

जिला प्रशासन ने पत्रकार के परिजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी, हरसंभव मदद करने का दिया आश्वासन

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 30 November, 2020
Last Modified:
Monday, 30 November, 2020
Vibha SIngh

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में घर में आग लगने से पत्रकार राकेश सिंह निर्भीक (45) की मौत के बाद पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर परिवार में रोष है। पत्रकार की पत्नी विभा सिंह ने हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। विभा सिंह ने पुलिस-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के अंदर हत्यारोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अपनी दोनों बेटियों के साथ आत्मदाह कर लेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय विधायक पलटू राम ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के साथ पीड़ित परिवार के घर जाकर जिला प्रशासन द्वारा प्रदान की गई पांच लाख रुपये की सहायता राशि का चेक पत्रकार की पत्‍नी को सौंपा। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकार की पत्नी को हत्यारोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है। बलरामपुर चीनी मिल्स प्रबंधन ने विभा सिंह को नौकरी देने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही प्रशासन ने राकेश सिंह की बेटियों को मुफ्त शिक्षा दिलाने का भी भरोसा दिया है।

यह भी पढ़ें: संदिग्ध परिस्थितियों में घर में आग लगने से पत्रकार समेत दो की मौत

गौरतलब है कि 27 नवंबर की रात्रि राकेश और उसके मित्र पिंटू साहू घर के कमरे में थे। राकेश की पत्नी बच्चों के साथ मायके गई हुईं थी। तभी रात्रि में संदिग्ध हालात में राकेश सिंह के घर में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। कमरे की एक दीवार भी धमाके के साथ क्षतिग्रस्त हो गई। झुलसने के चलते पिंटू साहू की मौके पर ही मौत हो गई। मौके पर पहुंची फायर सर्विस तथा पुलिस की टीम ने आग पर काबू पाया और राकेश को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में रेफर कर दिया गया, जहां शनिवार को उनकी भी मौत हो गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अस्पताल में भर्ती राकेश सिंह ने मरने से पूर्व पुलिस को बताया कि दबंगों ने उनके घर में आग लगाई है। राकेश सिंह का कहना था कि कुछ नकाबपोश लोग उनके घर में घुसे थे और मारपीट के बाद वहां आग लगा दी।

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संदिग्ध परिस्थितियों में घर में आग लगने से पत्रकार समेत दो की मौत

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में एक पत्रकार के घर में आग लग गई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 28 November, 2020
Last Modified:
Saturday, 28 November, 2020
Fire

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में एक पत्रकार के घर में आग लग गई। आग में जलने से पत्रकार समेत दो लोगों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरी वारदात को अंजाम देने का आरोप दबंगों पर लगा है। बताया जाता है कि आग इतनी भीषण थी कि घर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और दीवार टूट कर गिर गई।

घटना कोतवाली देहात क्षेत्र के कलवारी गांव की है। पुलिस को शुक्रवार की रात करीब 11:30 बजे पत्रकार राकेश सिंह निर्भीक (45) के मकान में भीषण आग लगने और आग से मकान का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया

पुलिस को मकान के क्षतिग्रस्त हिस्से में राकेश सिंह के मित्र पिंटू साहू का जला हुआ शव बरामद हुआ, जो घटना के समय उनके घर में ही मौजूद थे। वहीं, राकेश सिंह 90 प्रतिशत से ज्यादा झुलस गए थे। राकेश सिंह को पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में रेफर कर दिया गया, जहां शनिवार को उनकी भी मौत हो गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अस्पताल में भर्ती राकेश सिंह ने मरने से पूर्व पुलिस को बताया कि दबंगों ने उनके घर में आग लगाई है। राकेश सिंह का कहना था कि कुछ नकाबपोश लोग उनके घर में घुसे थे और मारपीट के बाद वहां आग लगा दी।

बताया जाता है कि घटना के समय राकेश सिंह की पत्नी दो बेटियों के साथ मायके गई हुई थीं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

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पत्रकार की मौत के मामले में महिला दारोगा गिरफ्तार

यूपी के उन्नाव जिले में पत्रकार की मौत के मामले में एक महिला दारोगा को गिरफ्तार किया गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
Crime

यूपी के उन्नाव जिले में पत्रकार की मौत के मामले में एक महिला दारोगा को गिरफ्तार किया गया है। महिला दारोगा के खिलाफ पत्रकार को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।

एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार का शव 12 नवंबर को रेलवे लाइन पर मिला था, जिसके बाद परिजनों ने महिला दारोगा पर हत्या का आरोप लगाया था।

पुलिस को जांच में महिला दारोगा से पत्रकार की वॉट्सऐप चैटिंग सहित अन्य साक्ष्य मिले हैं, जिसके बाद पुलिस ने महिला दारोगा के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं एक आरोपी सिपाही ​फरार बताया जा रहा है।

बता दें कि उन्नाव कोतवाली अंतर्गत एबीनगर के रहने वाले पत्रकार सूरज पांडेय का शव 12 नवंबर को सदर कोतवाली क्षेत्र के शराब मिल के सामने लखनऊ-कानपुर रेलवे ट्रैक पर मिला था। सूरज की मां लक्ष्मी पांडेय ने महिला दारोगा सुनीता चौरसिया व सूरज के बीच नजदीकी का खुलासा किया था। महिला दारोगा व महिला थाना में तैनात सिपाही अमर सिंह पर हत्या व हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था, जिसके बाद एसपी ने मामले की जांच के लिए पुलिस की एक टीम गठित कर दी थी।

पत्रकार की मौत के मामले में आत्महत्या की कहानी ​सामने आ रही थी. इसके बाद 18 नवंबर को लखनऊ की एफएसएल टीम (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) के संयुक्त निदेशक जी खान ने तीन सदस्यीय टीम के साथ रेलवे ट्रैक का निरीक्षण किया।

एफएसएल टीम द्वारा 21 नवंबर को रिपोर्ट सौंपी गई, जिसमें आत्महत्या की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं महिला दारोगा के साथ मोबाइल फोन पर हुई बात और वॉट्सऐप चैटिंग समेत अन्य साक्ष्य भी जांच टीम को मिले। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पत्रकार को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में महिला दारोगा को बीती देर रात गिरफ्तार कर लिया। एसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि जल्द ही आरोपी सिपाही अमर सिंह को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

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एक जैसी दिखने वाली न्यूज एंकर्स की बातचीत सुनकर लोग रह गए हैरान, जानें पूरा मामला

तकनीकी के मामले में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। लगभग हर क्षेत्र में तकनीकी का बोलबाला है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 23 November, 2020
Last Modified:
Monday, 23 November, 2020
NewsAnchor54

तकनीकी के मामले में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। लगभग हर क्षेत्र में तकनीकी का बोलबाला है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है। रोबोट पत्रकार के आविष्कार के बाद अब इस दिशा में तमाम नए प्रयोग हो रहे हैं। इसी कड़ी में अब दक्षिण कोरिया (South Korea) का नाम भी जुड़ गया है। अब इस एशियाई देश के एक टीवी चैनल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के माध्यम से चलने वाली देश की पहली न्यूज एंकर (News Anchor) को अपने दर्शकों के सामने पेश किया है। ये AI एंकर दक्षिण कोरिया की ही न्यूज एंकर किम जू-हा (Kim Ju-ha) का प्रतिबिंब है।

इस AI न्यूज एंकर को कोरियाई न्यूज चैनल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रॉडक्शन कंपनी ‘मनी ब्रेन’ के साथ मिलकर बनाया है। ये दक्षिण कोरिया की पहली AI के माध्यम से चलने वाली न्यूज एंकर है। इस AI न्यूज एंकर का न केवल चेहरा ही किम की तरह है, बल्कि इसकी आवाज भी किम की तरह ही है। ये किम के छोटे से छोटे हावभाव की भी नकल करती है।

6 नवंबर को न्यूज टेलिकास्ट के दौरान AI किम ने असली किम के साथ बातचीत भी की। इस बातचीत को सुनकर लोग हैरान हो गए क्योंकि दोनों का चेहरा और आवाज एक जैसे ही थे।

टेलिकास्ट के दौरान AI किम ने बताया कि उसे गहन अध्ययन के साथ बनाया गया और असली किम के वीडियो दिखाए गए, जिससे वो उसके बोलने का तरीका और उसके हाव-भाव को सीख सके। AI किम ने बताया कि वो असली किम की तरह ही न्यूज पढ़ सकती है।

न्यूज कंपनी ने अपने बयान में कहा कि AI न्यूज एंकर प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति के लिए कारगर साबित होगी। इस नई तकनीक के माध्यम से कंपनी श्रम और उत्पादन लागत में भी आसानी से कटौती कर सकती है।

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI न्यूज एंकर इंसान की जगह पूरी तरह से नहीं ले पाएंगे। सियोल के एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने इस बारे में कहा कि टीवी पर AI एंकर को देखना कई लोगों को अजीब सा अनुभव दे सकता है जिसके कारण असली न्यूज एंकर्स की नौकरी को ज्यादा खतरा नहीं है।

प्रोफेसर ने कहा कि AI एंकर भले ही हमसे बहुत अलग नहीं हैं मगर वो हमारी तरह भी नहीं हैं। अगर इंसान को ये पता चल जाए कि जिसे वो टीवी पर देख रहा है वो असली नहीं है तो वो उसे तुरंत नकार देगा।

आपको बता दें कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से चलने वाली कोरिया की ये न्यूज एंकर दुनिया की पहली एंकर नहीं है। दो साल पहले चीन (China) ने भी एक AI न्यूज एंकर का निर्माण किया था।

यहां देखें वीडियो:

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IIMC: इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों से रूबरू होंगे छात्र, जानेंगे कई अहम तथ्य

कोरोनावायरस के कारण इस साल वर्चुअल रूप से आयोजित किया जाएगा यह कार्यक्रम, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर करेंगे शुभारंभ

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 21 November, 2020
Last Modified:
Saturday, 21 November, 2020
IIMC

देश के प्रमुख मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) का सत्रारंभ समारोह 23 नवंबर से 27 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार 23 नवंबर को सुबह 10.30 बजे केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर करेंगे। कोरोना के कारण इस वर्ष पांच दिवसीय सत्रारंभ समारोह ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है।

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि इस पांच दिवसीय आयोजन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वी. मुरलीधरन, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सुभाष घई, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मीडिया निदेशक एवं प्रेजिडेंट उमेश उपाध्याय, पटकथा लेखक और स्तंभकार सुश्री अद्धैता काला, दूरदर्शन के महानिदेशक मयंक अग्रवाल, हांगकांग बैप्टिस्ट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर दया थुस्सु, अमेरिका की हार्टफर्ड यूनिसर्विटी के प्रोफेसर संदीप मुप्पिदी जैसी जानी-मानी हस्तियां नए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगी।

इसके अलावा हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक सुकुमार रंगनाथन, ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा, ऑर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर, गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज, चेन्नई के निदेशक डॉ. जेके बजाज, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रो. सिद्धार्थ शेखर सिंह, उद्यमी आदित्य झा, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के डायरेक्टर (लोकेलाइजेशन) बालेंदु शर्मा दाधीच, गुडऐज के प्रमोटर माधवेंद्र पुरी दास, रिलायंस के कम्युनिकेशन चीफ रोहित बंसल, ईयरशॉट डॉट इन के फाउंडर अभिजीत मजूमदार, न्यूजजेप्ल्स के फाउंडर शलभ उपाध्याय, एसोसिएटेड प्रेस टीवी की साउथ एशिया हेड सुश्री विनीता दीपक एवं नेटवर्क 18 के मैनेजिंग एडिटर ब्रजेश सिंह भी समारोह में हिस्सा लेंगे।      

कार्यक्रम के समापन सत्र में आईआईएमसी के पूर्व छात्र नए विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। इन पूर्व छात्रों में ‘आजतक’ के न्यूज डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद, ‘न्यूज नेशन’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया एवं ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के इस सीज़न की पहली करोड़पति नाज़िया नसीम शामिल हैं। कार्यक्रम का प्रसारण आईआईएमसी के फेसबुक पेज पर किया जाएगा।

गौरतलब है कि आईआईएमस अपने नए विद्यार्थियों के स्वागत और उन्हें मीडिया, जनसंचार, विज्ञापन एवं जनसंपर्क के क्षेत्र में करियर बनाने के तहत मार्गदर्शन दिलाने के लिए प्रतिवर्ष सत्रारंभ कार्यक्रम का आयोजन करता है।

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जिंदगी की जंग हार गए न्यूज नेशन के पत्रकार अमित विराट

न्यूज नेशन से एक बुरी खबर सामने आई है। दरअसल, यहां रीजनल न्यूज चैनल में काम करने वाले टीवी पत्रकार अमित विराट का निधन हो गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
Last Modified:
Friday, 20 November, 2020
Amit Virat

न्यूज नेशन से एक बुरी खबर सामने आई है। दरअसल, यहां रीजनल न्यूज चैनल में काम करने वाले टीवी पत्रकार अमित विराट का निधन हो गया है।

जानकारी के मुताबिक अमित पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। बताया जा रहा है कि उनके हार्ट और फेफड़ों में दिक्कत थी और पिछले चार महीने से वे इस समस्या से जूझ रहे थे। दिल्ली के जीवी पंत हॉस्पिटल में उन्होंने इसी महीने हार्ट सर्जरी करवाई थी, लेकिन इस बीच वे कोरोना से संक्रमित हो गए थे, जिसके बाद उन्हें नोएडा के जेपी हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।

वर्ष 2012 मे भी अमित की हार्ट सर्जरी दिल्ली के राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल मे सकुशल की जा चुकी थी, पुनः 8 साल बाद फिर से वह अपने इस हार्ट की इस पीड़ा से ग्रसित थे।

वहीं इस बीच वे कोरोना से भी संक्रमित हो गए थे। दिल्ली के बदरपुर के रहने वाले विराट शादीशुदा थे और उनका एक बेटा है। विराट को मीडिया इंडस्ट्री में करीब 15 वर्षों का अनुभव था। वे ईटीवी-यूपी में काम कर चुके थे।

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इन आरोपों में मीडिया फर्म का मैनेजर और डायरेक्टर गिरफ्तार

इस मामले में आयकर अधिकारी की ओर से सूरत के एक थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
Last Modified:
Friday, 20 November, 2020
Arrest

गुजरात की सूरत पुलिस ने मीडिया फर्म ‘संकेत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Sanket Media Pvt Ltd) के डायरेक्टर सीताराम अदुकिया और मैनेजर मुख्तार बेग को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने सरकारी विज्ञापन एजेंसी ‘विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय’ (डीएवीपी) और निजी विज्ञापनदाताओं के सामने कंपनी के स्वामित्व वाले अखबार ‘सत्यम टाइम्स’ (Satyam Times) का अधिक सर्कुलेशन दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर कंपनी के बहीखाते में गलत आंकड़े दर्ज किए। यह अखबार गुजराती व अंग्रेजी भाषा में पब्लिश होता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में आयकर अधिकारी की ओर से धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस एफआईआर में कहा गया था कि फर्जी आंकड़ों की मदद से वर्ष 2008-09 से 21 अक्टूबर 2020 के बीच मीडिया फर्म ने सरकार एजेंसियों से 70 लाख रुपये और विभिन्न विज्ञापन एजेंसियों से दो करोड़ रुपये के विज्ञापन हासिल किए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच में आयकर अधिकारियों को पता चला था कि सत्यम टाइम्स के गुजराती एडिशन का डेली सर्कुलेशन 23500 कॉपियां और अंग्रेजी एडिशन का डेली सर्कुलेशन छह हजार कॉपियां दिखाया गया था, जबकि गुजराती एडिशन का सर्कुलेशन छह सौ कॉपियां और अंग्रेजी का शून्य से 290 कॉपियां था।

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दो पत्रकारों के खिलाफ FIR, झूठी खबर फैलाने का लगा आरोप

दो निजी चैनलों के पत्रकारों पर यूपी की फतेहपुर पुलिस ने खबर को तोड़ मरोड़कर गलत तरीके से पेश करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
Last Modified:
Friday, 20 November, 2020
FIR

दो निजी चैनलों के पत्रकारों पर यूपी की फतेहपुर पुलिस ने खबर को तोड़ मरोड़कर गलत तरीके से पेश करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। ये एफआईआर धारा सिंह यादव नामक शख्स और भारत समाचार चैनल के पत्रकार के खिलाफ दर्ज की गई है। इसकी शिकायत असोथर थाना के प्रभारी रणजीत बहादुर सिंह ने की थी।

दरअसल बीते सोमवार फतेहपुर के असोथर थाने के एक गांव में दो सगी बहनों का शव तालाब में मिला था, जिसके बाद परिजनों ने रेप के बाद मर्डर का शक जताया था। इसके बाद स्थानीय मीडिया ने भी मर्डर व रेप की शंका जताई थी जिसे पुलिस ने पूरी तरह से खारिज कर दिया और दो चैनलों के पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज कर ली।

असोथर थाना के प्रभारी रणजीत बहादुर सिंह ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया कि जब वह चिचनी गांव में गश्त पर थे, तब उन्हें पता चला कि एक निजी चैनल के पत्रकार और धारा सिंह यादव ट्विटर पर दो नाबालिग लड़कियों की हत्या की झूठी खबर फैला रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'दोनों लड़कियों की मौत सिंघाड़ा तोड़ते वक्त तालाब में गिरकर डूबने से हो गई थी। लेकिन पत्रकार दलित और अन्य समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे थे। पत्रकार ट्विटर पर आधारहीन खबरें फैला रहे थे कि लड़कियों के हाथ और पैर बंधे हुए मिले थे और उनके साथ बलात्कार किया गया और उनकी आंखें निकाल ली गईं। इससे दलित और अन्य समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ रही थी।

उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि नाबालिग लड़कियों की डूबने से मौत हो गई और उनकी आंखों और शरीर के अन्य हिस्सों को कोई नुकसान नहीं हुआ। बता दें कि चिचनी में एक तालाब में दो नाबालिग बहनें मृत पाई गईं थी और परिवार ने बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन पुलिस ने कहा था कि लड़कियों की मौत डूबने से हुई है।  

वहीं फतेहपुर जिले के एसपी प्रशांत वर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों बच्चियों की मौत पानी में डूबने से हुई है। रेप और हत्या की पुष्टि नहीं हुई है। आंखें फोड़ने और हाथ-पैर बंधे होने की बात केवल अफवाह थी।

जानिए, क्या है मामला

दरअसल बीते सोमवार फतेहपुर के छिछनी गांव में रहने वाली दो बहनें खेत गई थीं लेकिन काफी समय तक घर नहीं लौटीं तो परिजनों ने दोनों की तलाश शुरू की। काफी देर तक सूचना न मिलने पर वे परेशान हो गए। शाम को कुछ ग्रामीणों ने तालाब में दो शव देखे तो घर वालों को सूचना दी जिसके बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई।

दोनों में एक लड़की के चोट के निशान भी दिखे जिसके बाद परिजनों को रेप व मर्डर की आशंका हुई। मंगलवार को पुलिस ने दोनों का पोस्टमॉर्टम कराया तो मौत का कारण डूबना बताया गया, वहीं रेप की पुष्टि भी नहीं हुई।  

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