वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल के नाम जुड़ी एक और उपलब्धि

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पत्रकारिता और उनके संदेशों को देश भर में पहुंचाने के प्रयास में जुटे हैं राजेश बादल

Last Modified:
Monday, 03 June, 2019
Rajesh Badal

वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है। दरअसल, देश के प्रतिष्ठित मारवाह स्टूडियो के उपक्रम ‘अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता संस्थान’ ने शनिवार को उन्हें महात्मा गांधी नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया है। इसके संचालक डॉक्टर सुशील भारती ने इस अवसर पर जवाहर लाल नेहरू फोरम की मानद सदस्यता भी प्रदान की।

इस मौके पर राजेश बादल का कहना था, ‘मारवाह स्टूडियो के मुखिया संदीप मारवाह को मुझे इसके लिए निश्चित ही धन्यवाद देना चाहिए। कम लोग ही जानते होंगे कि संदीप करीब 100 संस्थाओं का नेतृत्व कर रहे हैं और हाल ही में कान्स फ़िल्म फेस्टिवल में उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान से नवाजा गया है।

राजेश बादल का यह भी कहना था, ‘गांधी जी के जन्म के डेढ़ सौवें साल में हम सब शिद्दत से महात्मा गांधी की पत्रकारिता को याद कर रहे हैं। क़रीब 55 साल तक गांधीजी एक सक्रिय पत्रकार और संपादक रहे। हम सब उन्हें स्वतंत्रता दिलाने वाले एक महान राष्ट्रप्रेमी और समाजसेवक के रूप में जानते हैं। लेकिन उनकी अखबारनवीसी के बारे में अधिक नहीं जानते। इस एक साल में मेरा प्रयास चल रहा है कि राष्ट्रपिता की पत्रकारिता और उनके संदेशों को देश भर में पहुँचाऊँ। क़रीब एक दर्ज़न राज्यों में व्याख्यानों और परिसंवादों के ज़रिए लोगों तक जा चुका हूँ। सिलसिला अभी भी जारी है। महात्मा गांधी पर 22 साल पहले एक फ़िल्म भी बनाई थी। उसका प्रदर्शन भी अनेक स्थानों पर हुआ है। अब उस फिल्म को एक घंटे की फ़िल्म में बदलने पर काम चल रहा है। शीघ्र ही आप सब उसे देख पाएंगे।’

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1971 में पाक सेना के सरेंडर करने की खबर ब्रेक वाले वरिष्ठ पत्रकार का निधन

न्यूज एजेंसी पीटीआई के पूर्व खेल संपादक के जगन्नाथ राव का रविवार को निधन हो गया

Last Modified:
Monday, 19 April, 2021
Journalist565

न्यूज एजेंसी पीटीआई के पूर्व खेल संपादक के जगन्नाथ राव का रविवार को निधन हो गया। वे 78 साल के थे और पिछले छह साल से कैंसर से जूझ रहे थे।

उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी है। खेल संवाददाता होने के बावजूद राव ने 1971 में पाकिस्तानी सेना के भारतीय सेना के सामने सरेंडर करने की खबर ब्रेक की थी। इसके बाद बांग्लादेश का गठन हुआ था। राव 1964 से 2002 में सेवानिवृत्त होने तक पीटीआई के साथ रहे।

राव ने छह ओलंपिक और दो एशियाई खेलों के अलावा भारतीय क्रिकेट टीम का 1982-83 का पाकिस्तान का एतिहासिक दौरा कवर किया।

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नहीं रहे लेखक-संपादक जी वेंकटसुबैया, 107 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

कन्नड़ के लेखक, संपादक और लेक्सियोग्राफर जी वेंकटसुब्बैया का बेंगलुरु में सोमवार की सुबह निधन हो गया।

Last Modified:
Monday, 19 April, 2021
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कन्नड़ के लेखक, संपादक और लेक्सियोग्राफर जी वेंकटसुब्बैया का बेंगलुरु में सोमवार की सुबह निधन हो गया। वे 107 साल के थे। कन्नड़ भाषा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री व साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया है।

कन्नड़ साहित्यिक क्षेत्र में लोकप्रिय जी वेंकटसुबैया एक लेक्सियोग्राफर, व्याकरणिक और साहित्यिक आलोचक थे। उन्होंने 12 शब्दकोश संकलित किए हैं। उनकी रचनाओं में व्याकरण, कविता, अनुवाद और निबंध सहित कन्नड़ साहित्य के विभिन्न रूप शामिल हैं।

जी वेंकटसुब्बैया का जन्म 23 अगस्त 1913 में मांड्या जिले के गंजम गांव के श्रीरंगपटना में हुआ था। वे आठ भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर थे। उनके पिता गंजम थिमनियाह एक प्रसिद्ध कन्नड़ और संस्कृत विद्वान थे। जी वेंकटसुब्बैया को अपने पिता से ही कन्नड़ के प्रति प्रेम की प्रेरणा मिली थी। जी वेंकटसुब्बैया की प्राथमिक स्कूली शिक्षा दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक के बन्नूर और मधुगिरि के शहरों में हुई है। कन्नड़ में पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने मांड्या में एक नगरपालिका स्कूल में बतौर शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। इसके बाद वे दावणगेरे के एक हाई स्कूल और मैसूरु में महाराजा कॉलेज में पढ़ाने चले गए। फिर वे  बेंगलुरु के विजया कॉलेज में शिफ्ट हो गए। 1973 में जी वेंकटसुब्बैया ने विजया कॉलेज से सेवानिवृत्त होने के बाद इसके मुख्य संपादक के रूप में कन्नड़-टू-कन्नड़ शब्दकोश पर काम करने की जिम्मेदारी ली। उन्होंने 2011 में बेंगलुरु में आयोजित 77वें अखिल भारतीय कन्नड़ साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की थी।

जी वेंकटसुब्बैया को उनके स्मारकीय साहित्यिक कृतियों के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया जिनमें पद्मश्री, पम्पा पुरस्कार, साहित्य अकादमी द्वारा भाषा सम्मान, कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार और कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार शामिल हैं।  

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वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र पटेल का कोरोना से निधन

पिछले कुछ वर्षों से हिंदुस्तान अखबार के आगरा एडिशन में कार्यरत थे बृजेन्द्र पटेल

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Brajendra Patel

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। तमाम लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं और कई लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। कोरोना के संक्रमण के कारण जान गंवाने वालों में कई पत्रकार भी शामिल हैं। ऐसी ही एक दुखद खबर आगरा से आई है। खबर है कि हिन्दुस्तान के आगरा एडिशन में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र पटेल का कोरोना से निधन हो गया है।

कुछ दिनों पूर्व तबीयत खराब होने पर बृजेन्द्र पटेल ने कोविड-19 की जांच कराई थी, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, इसके बाद उन्हें आगरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में थोड़ा सुधार होने पर एक-दो दिन पूर्व उन्हें एसएन अस्पताल, आगरा में भर्ती कराया गया था, जहां शनिवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

करीब 50 वर्षीय बृजेन्द्र पटेल कानपुर के मूल निवासी थे। लगभग 25 वर्षों से मीडिया में सक्रिय बृजेन्द्र अब तक दैनिक आज, अमर उजाला और सहारा समेत तमाम मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके थे। करीब दो साल से वह हिंदुस्तान, आगरा में अपनी भूमिका निभा रहे थे।  

बृजेन्द्र पटेल के निधन पर डॉ. अनिल दीक्षित, विनोद भारद्वाज, पीपी सिंह, अवधेश माहेश्वरी, ताज प्रेस क्लब के महासचिव उपेंद्र शर्मा और राज कुमार दंडौतिया सहित तमाम पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है। 

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PTI के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Death

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन हो गया। उनके पारिवारिक सदस्यों ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि जमालुद्दीन अहमद का निधन हाल में एक बीमारी की वजह से नई दिल्ली में हुआ।

जमालुद्दीन अहमद 2007-2008 के दौरान मध्यप्रदेश के भोपाल में पीटीआई के ब्यूरो प्रमुख रहे। उन्होंने साथ ही यहां कई समाचार पत्रों के लिए भी काम किया।

वहीं  आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अहमद के निधन पर दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना ईश्वर से की।

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कोरोना ने निगल ली दैनिक जागरण के युवा पत्रकार अंकित शुक्ल की जिंदगी

हिंदी अखबार दैनिक जागरण के लखनऊ एडिशन में कार्यरत युवा पत्रकार अंकित शुक्ल का कोरोना से शुक्रवार की सुबह निधन हो गया।

Last Modified:
Friday, 16 April, 2021
ankitshukla6546

हिंदी अखबार दैनिक जागरण के लखनऊ एडिशन में कार्यरत युवा पत्रकार अंकित शुक्ल का कोरोना से शुक्रवार की सुबह निधन हो गया। वे करीब 35 साल के थे और विधि संवाददाता के तौर पर दैनिक जागरण में कानूनी मामलों को कवर करते थे। 

बताया जाता है कि कुछ दिनों पूर्व तबीयत खराब होने पर अंकित को लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें कोविड-19 के इलाज के लिए बने स्पेशल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। 

जानकारी के मुताबिक, अंकित लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर रहते थे। परिवार में पत्नी व एक बेटी है। पत्नी भी कोविड पॉजिटिव हैं और फिलहाल होम आइसोलेशन में हैं।

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Covid-19 के खिलाफ ‘जंग’ में राजनांदगांव प्रेस क्लब कुछ यूं निभा रहा भागीदारी

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। दिन प्रतिदिन आ रहे आंकड़े बेहद खौफनाक और डराने वाले हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 April, 2021
Last Modified:
Wednesday, 14 April, 2021
Covid Care Centre

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। दिन प्रतिदिन आ रहे आंकड़े बेहद खौफनाक और डराने वाले हैं। हालत यह है कि इस संक्रमण की चपेट में आकर तमाम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, वहीं विभिन्न अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने के लिए बेड की कमी भी बनी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में अपनी भागीदारी निभाते हुए छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव प्रेस क्लब ने अपने परिसर को अस्पताल में तब्दील कर दिया है। छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में बेड की कमी के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है।

30 बेड वाले कोरोना देखभाल केंद्र में तब्दील प्रेस क्लब के इस परिसर में कोविड-19 पीड़ितों का मुफ्त इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा उनके नाश्ते व खाने का भी मुफ्त इंतजाम किया गया है।

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अज्ञात लोगों ने गोली मारकर की पत्रकार की हत्या

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में शनिवार शाम एक पत्रकार की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

Last Modified:
Tuesday, 13 April, 2021
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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में शनिवार शाम एक पत्रकार की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना करक पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के भीतर बथानी खेल क्षेत्र में हुई।

डॉन न्यूज की एक रिपोर्ट में बताया गया कि मृतक की पहचान स्थानीय अखबार Sada-e-lawaghir के संयुक्त संपादक वसीम आलम के रूप में हुई है।

पीड़िता की मां की ओर से दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, आलम पर यह हमला तब हुआ, जब वह अपनी बाइक से घर लौट रहा था। उसे बथानी खेल स्थित एक सरकारी स्कूल के पास निशाना बनाया गया। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

करक पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। इस हमले में संदिग्ध के तौर पर मृतक के पिता का नाम भी सामने आया है।

डॉन के मुताबिक, वसीम आलम के पिता न तो अस्पताल में मौजूद थे और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। अधिकारी ने आगे कहा कि वसीम आलम अपने परिवार से अलग रह रहे थे। हालांकि पत्रकार की मां ने एफआईआर में किसी का नाम नहीं लिया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमें अब तक कोई भी ऐसा सुराग नहीं मिला है जिससे पता चलता है कि पत्रकार की हत्या पत्रकारिता के काम के लिए की गई है।’

बता दें कि दुनिया में पत्रकारों के लिए पाकिस्तान सबसे खतरनाक जगहों में से एक माना जाता है। काउंसिल ऑफ पाकिस्तान न्यूजपेपर एडिटर्स (CPNE) की मीडिया फ्रीडम रिपोर्ट 2020 के मुताबिक, पिछले साल पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कम से कम 10 पत्रकारों की हत्या कर दी गई और कई अन्य को धमकी दी गई, कुछ का अपहरण किया गया, प्रताड़ित किया गया और गिरफ्तार किया गया था।

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तीस साल तक ‘द हिन्दू’ को अपना योगदान देने वाले वयोवृद्ध पत्रकार का निधन

वयोवृद्ध पत्रकार जी.एन. श्रीनिवासन का सोमवार को तमिलनाडु के मायलापुर में उनके बेटे के घर पर निधन हो गया।

Last Modified:
Tuesday, 13 April, 2021
Death

वयोवृद्ध पत्रकार जी.एन. श्रीनिवासन का सोमवार को तमिलनाडु के मायलापुर में उनके बेटे के घर पर निधन हो गया। उन्होंने साल 1953 से 30 साल तक अंग्रेजी दैनिक ‘द हिन्दू’ को अपना योगदान दिया।

दोस्तों के बीच उन्हें जीएनएस के नाम से जाना जाता था। उन्होंने अक्टूबर 2020 में अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश किया।

उनकी बेटी संध्या रवि मोहन ने कहा कि श्रीनिवासन की आयु से संबंधित बीमारियों से मृत्यु हुई है। वे अंत तक अपने काम को लेकर सक्रिय रहे। उन्होंने मीडिया को बताया कि उनके पिताजी ने पूर्व मुख्यमंत्री कामराज, एम. करुणानिधि और एम.जी. रामचंद्रन का साक्षात्कार किया और उनके साथ यात्रा भी की थी। उन्होंने 1976 में स्थापित सरकारिया आयोग की कार्यवाही को भी कवर किया था, जिसे लेकर उनकी संतुलित रिपोर्टिंग की सराहना भी की गई थी।

श्रीनिवासन ने त्रिपलीकेन स्थित ‘द हिन्दू हाई स्कूल’ से अध्ययन किया और पचायप्पा कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

जीएनएस ने अपने करियर की शुरुआत की  ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ से स्टेनोग्राफर के तौर पर शुरू की थी। बाद में वे यहां रिपोर्टर बन गए थे। इसके बाद में उन्होंने ‘द हिन्दू’ जॉइन किया और सबसे पहले 1953 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की चेन्नई यात्रा को कवर किया। ‘द हिन्दू’ से रिटायर होने के बाद, उन्होंने पांच साल तक प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के साथ कानूनी संवाददाता के तौर पर काम किया। जीएनएस ने मद्रास रिपोर्टर्स गिल्ड के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के रूप में भी अपना योगदान दिया है।

 

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नहीं रहे FCB-Ulka समूह के पूर्व MD और CEO अनिल कपूर

तमाम उपलब्धियों के बीच वह अगस्त 2019 में ‘FCB Worldwide’ (Foote, Cone & Belding) बोर्ड, न्यूयॉर्क के मेंबर नियुक्त किए गए थे।

Last Modified:
Monday, 12 April, 2021
Anil Kapoor

DraftFCB+ Ulka के चेयरमैन एमरेटस (Chairman Emeritus) अनिल कपूर का निधन हो गया है। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। वह ‘एफसीबी-उलका’ (FCB-Ulka) ग्रुप के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ (former Managing Director & CEO) थे। तमाम उपलब्धियों के बीच वह अगस्त 2019 में ‘FCB Worldwide’ (Foote, Cone & Belding) बोर्ड, न्यूयॉर्क के मेंबर नियुक्त किए गए थे।

अनिल कपूर को याद करते हुए ‘आईपीजी मीडियाब्रैंड्स’ (IPG Mediabrands) के सीईओ शशि सिन्हा का कहना है, ‘वह मेरे मार्गदर्शक और मित्र से भी बढ़कर थे, जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाने में काफी मदद की। इस दुख की भरपाई नहीं की जा सकती है। दुख की इस घड़ी में मैं पीड़ित परिवार के साथ हूं और भगवान से पीड़ित परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूं।’

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जिंदगी की जंग हार गए पत्रकार शिवनंदन साहू

कौशाम्बी जिले के दारानगर नगर पंचायत के रहने वाले शिवनंदन साहू का शनिवार की शाम निधन हो गया है।

Last Modified:
Monday, 12 April, 2021
Shivnandan Sahu

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में आजतक के पत्रकार शिवनंदन साहू का निधन हो गया है। कौशाम्बी जिले के दारानगर नगर पंचायत के रहने वाले शिवनंदन साहू को बुखार और सांस लेने में दिक्कत के कारण जिला अस्पताल, मंझनपुर में भर्ती करवाया गया था।

यहां उपचार के बाद साहू को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया था, जहां शनिवार शाम को अस्पताल के बाहर ही उनकी मौत हो गई। शिवनंदन साहू के निधन पर तमाम लोगों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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