मीडिया में आने वाली हेल्थ की खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा सही है?

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश ने कहा, एक गलत खबर बहुत कुछ बर्बाद कर सकती है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 05 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 05 November, 2019
Media

अखबार के पन्ने पलटते-पलटते कभी न कभी आपकी नजर किसी ऐसी खबर पर रुकी होगी, जो आपको पतला होने के राज, गोरे होने के नुस्खे या फिर मधुमेह को मात देने के तरीके बताती है। अमूमन ऐसी खबरों को हम केवल इसलिए सही मान लेते हैं, क्योंकि वह मीडिया में आई हैं और उनके अनुसार अपने खान-पान में बदलाव कर लेते हैं, लेकिन क्या ये सही है? 

क्या आम जनता तक स्वास्थ्य से जुड़ी खबरें पहुंचाने वाले पत्रकार इतने प्रशिक्षित हैं कि इनकी खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा किया जा सकता है? हाल ही में हुए एक ऑनलाइन पोल से यह सवाल खड़ा हो गया है। दिल्ली में बीते दिनों नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन आयोजित किया गया था, जिसमें देश भर के कई हेल्थ जर्नलिस्ट शामिल हुए। इस मौके पर पत्रकारों का ज्ञान परखने के लिए उनसे कुछ सवाल पूछे गए, जिसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। अधिकांश पत्रकारों को कम-कैलोरी वाले स्वीटनर, उसके लाभ और बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं पर उसके प्रभाव के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे समय में जब भारत को डायबीटीज की राजधानी कहा जाता है, हेल्थ जर्नलिस्ट का ये हाल बेहद चिंताजनक है। सोचने वाली बात यह भी है कि जब शहर के पत्रकारों की जानकारी इतनी सीमित है, तो फिर ग्रामीण इलाकों में कार्यरत पत्रकारों की स्थिति क्या होगी?

पिछले कुछ वक्त से स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को मीडिया में काफी तवज्जो दी जाने लगी है। अखबारों में इस पर स्पेशल पेज तैयार किये जाते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रखना अच्छी बात है, लेकिन पाठकों या दर्शकों को जागरूक करने वाले पत्रकारों का जागरूक रहना भी जरुरी है। 

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश का भी यही मानना है। नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन में बतौर स्पीकर मौजूद रहे सुरेश हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए ट्रेनिंग की वकालत करते आ रहे हैं। उनके पास ऐसे कई उदाहरण हैं, जो यह बताते हैं कि पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग कोर्स कितना आवश्यक है। जैसे कि पिछले साल केरल में कहर बरपाने वाले निपा वायरस को लेकर कहा गया कि ये फलों से फैल रहा है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था। नतीजा ये हुआ कि लोग इतने डर गए कि फल खाने ही बंद कर दिए। इसी तरह, कुछ साल पहले मीडिया ने भूलवश एएफपी या एक्यूट फ्लेसीड पैरालिसिस को पोलियो बता दिया था, क्योंकि दोनों में समान लक्षण थे।

हेल्थ रिपोर्टरों को किस तरह के कोर्स की जरूरत है, इसका खाका सुरेश पहले ही खींच चुके हैं। आईआईएमसी के महानिदेशक रहते वक्त उन्होंने यूनिसेफ, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के सहयोग से देश का पहला पब्लिक हेल्थ कम्युनिकेशन कोर्स डिजाइन करवाया था, जिसे पीजी डिप्लोमा के सभी पाठ्यक्रमों शामिल किया गया। इसके अलावा, उन्होंने यूनिसेफ के साथ मिलकर मीडिया कर्मियों के लिए कई कार्यशालाएं भी आयोजित की। लेकिन जिस तरह के हालात अभी हैं उसे देखते हुए अब हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य करने की आवश्यकता है, ताकि जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिल सके। 

पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग क्यों जरूरी है इसका सुरेश एक खूबसूरत उदाहरण देते हुए कहते हैं, ‘आज कानून की डिग्री के बिना आप सुप्रीम कोर्ट को कवर नहीं कर सकते, इसी तरह से डिफेंस संवाददाता को सेना कनफ्लिक्ट रिपोर्टिंग का कोर्स कराती है, तो फिर पब्लिक हेल्थ पर कोर्स क्यों नहीं हो सकता? स्वास्थ्य बेहद आवश्यक एवं गंभीर मुद्दा है। यदि आपको इसकी समझ नहीं है और आप अपराध की तरह इसकी सनसनीखेज रिपोर्टिंग करेंगे, तो इसका दूरगामी प्रभाव हमारे दर्शकों, पाठकों और श्रोताओं पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में फैले इन्सेफेलाइटिस या जापानी बुखार और बिहार में कई मौतों के लिए जिम्मेदार इन्सेफेलाइटिस में फर्क है, अब यदि आप बिना इस अंतर को समझे रिपोर्ट करेंगे तो उससे सिर्फ घबराहट फैलेगी।’    

 आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक के अनुसार, ‘स्वास्थ्य के क्षेत्र में साक्ष्य आधारित रिपोर्टिंग होनी चाहिए, क्योंकि उसका परिणाम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। गलत रिपोर्टिंग से बीमारियों को लेकर गलतफ़हमी पैदा होती है। डॉक्टरों के लिए सीएमई (कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) प्रोग्राम चलाया जाता है, जिसमें बड़े से बड़े डॉक्टर शामिल होते हैं और नवीनतम डेवलपमेंट के बारे में समझते हैं। यदि आप 70 के दशक की बात करें तो उस दौर में मधुमेह पीड़ित को चावल से दूर रहने की सलाह दी जाती थी, लेकिन आजकल कम या सीमित मात्रा में इसका सेवन कर लिया जाता है। अब यदि डॉक्टर खुद को अपडेट नहीं करते तो वह सही इलाज कैसे बता पाते? 

इसी तरह पत्रकारों को भी अपने आप को अपडेट रखना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। हम टेक्नोलॉजी अपडेट पर तो ध्यान देते हैं, मगर कंटेंट जो हमने सीखा था उसे ही आगे बढ़ाते रहते हैं। जबकि कंटेंट में भी अपडेशन की जरूरत है। मैंने कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम की तरह कन्टिन्यूइंग मीडिया एजुकेशन प्रोग्राम की पेशकश की है। खासकर छोटे शहरों में, जिला स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों को इसकी बेहद जरूरत है’। केजी सुरेश का मानना है कि जिस तरह से फेक न्यूज को लेकर सरकार, मीडिया हाउस और सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक साथ आये हैं, उसी तरह पब्लिक हेल्थ के मुद्दे पर भी सभी को हाथ मिलाना होगा, तब ही स्वास्थ्य से जुड़ी फर्जी या भ्रामक खबरों पर लगाम लगाई जा सकेगी और पत्रकारों को प्रशिक्षित किया जा सकेगा।   

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कोविड-19 ने छीन ली एक और पत्रकार की जिंदगी

कोरोना से त्रिपुरा में पत्रकार की मौत का पहला मामला, निजी चैनल में बतौर वीडियो जर्नलिस्ट कार्यरत थे जितेंद्र देबबर्मा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
Jitendra Debbarma

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस वायरस की चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं तमाम लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं।

अब कोरोनावायरस के कारण त्रिपुरा में एक पत्रकार की मौत का पहला मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार रात अस्पताल में कोरोनावायरस संक्रमित एक स्थानीय न्यूज चैनल के पत्रकार जितेंद्र देबबर्मा की मौत हो गई।

जितेंद्र देबबर्मा 46 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटियां तथा अन्य सदस्य हैं। बताया जाता है कि जितेंद्र देबबर्मा हल्के बुखार की वजह से करीब एक हफ्ते से घर पर ही अलग रहकर उपचार करा रहे थे, लेकिन उन्होंने कोरोना टेस्ट नहीं कराया था।

सांस लेने संबंधी समस्याओं के कारण सोमवार रात को उन्हें त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद मुख्यालय के खुमुलवंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उनका कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आया। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया, लेकिन धीरे-धीरे उनकी हालत बिगड़ती गई और अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

जितेंद्र देबबर्मा के निधन पर ‘जर्नलिस्ट फोरम असम’ (JFA) समेत तमाम पत्रकारों ने दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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पत्रकार के बेटे का अपहरण, अपहर्ताओं ने मांगी 45 लाख की फिरौती

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में कुछ अज्ञात लोगों ने एक पत्रकार के नौ साल के बेटे का अपहरण कर लिया। फिरौती के लिये अपहर्ताओं ने 45 लाख रुपए देने की मांग की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Crime

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में कुछ अज्ञात लोगों ने एक पत्रकार के नौ साल के बेटे का अपहरण कर लिया। फिरौती के लिये अपहर्ताओं ने 45 लाख रुपए देने की मांग की है। सोमवार को पुलिस ने इसकी जानकारी दी है।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बच्चे का अपहरण रविवार की शाम सात बजे के करीब हुआ जब वह महबूबाबाद शहर में स्थित अपने घर के बाहर खेल रहा था। अपहर्ता मोटरसाइकिल पर सवार होकर आये थे और बच्चे को उठा ले गए। पुलिस के मुताबिक, बच्चा संभवत: उनको जानता था।

बाद में अपहर्ताओं ने इंटरनेट के माध्यम से फोन पर बच्चे की मां से संपर्क किया और उसकी रिहाई के लिये पैसे मांगे।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसके लिए दस टीमें गठित की गई हैं और अपहर्ताओं और बच्चे का पता लगाने के लिये सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक, महबूबाबाद शहर के कृष्णा कॉलोनी निवासी में रंजीत कुमार का परिवार रहता है। रंजीत कुमार पेशे से पत्रकार हैं। उनका 9 वर्षीय बड़ा बेटा दीक्षित रेड्डी का रविवार शाम 6.30 बजे के आसपास बाइक सवार अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया। इसके बाद अपहर्ताओं ने रंजीत को फोन करके 45 लाख रुपए की फिरौती मांगी। साथ ही पुलिस को इस बात की जानकारी देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की भी धमकी भी दी है। फोन करने वाले ने यह भी बताया है कि उसके लोग अब भी उसी एरिया में है।

 

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इस बीमारी ने निगल ली वरिष्ठ पत्रकार हैदर अली की जिंदगी

उत्तर प्रदेश के जाने-माने उर्दू अखबार ‘आग’ के फाउंडर और वरिष्ठ पत्रकार हैदर अली का शनिवार की रात निधन हो गया।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Haider Ali

उत्तर प्रदेश के जाने-माने उर्दू अखबार ‘आग’ के फाउंडर और वरिष्ठ पत्रकार हैदर अली का शनिवार की रात निधन हो गया। करीब 51 वर्षीय हैदर अली एरा मेडिकल कॉलेज समूह के उर्दू दैनिक ‘आग’ और हिंदी दैनिक ‘इन्किलाबी नजर’ का मैनेजमेंट देखने के साथ मान्यता प्राप्त राज्य मुख्यालय पत्रकार भी थे।

बताया जाता है कि हैदर अली करीब तीन साल से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से जूझ रहे थे। शुरू में वह इलाज के लिए मुंबई के टाटा अस्पताल व दिल्ली में भी गए थे, लेकिन बाद में वह लखनऊ लौट आए थे।

हैदर अली के परिवार में बुजुर्ग माता-पिता और दो बेटे हैं। रविवार की सुबह उनके पार्थिव शरीर को अब्बास बाग के कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। हैदर अली के निधन से आग अखबार के साथ-साथ पत्रकार जगत में शोक की लहर है। तमाम पत्रकारों ने हैदर अली के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है।  

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ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे पर iTV Foundation और Dettol की सराहनीय पहल

ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे (15 अक्टूबर) मनाने और कोविड-19 के दौरान लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए ‘आईटीवी फाउंडेशन’की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी(CSR) विंग ने सराहनीय पहल शुरू की है।

Last Modified:
Friday, 16 October, 2020
india-news595

ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे (15 अक्टूबर) मनाने और कोविड-19 के दौरान लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए ‘आईटीवी फाउंडेशन’ (iTV Foundation) की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) विंग ने ‘डिटॉल’ (Dettol) के साथ मिलकर एक पहल शुरू की है।

  • इस पहल के तहत आईटीवी नेटवर्क के चैनल्स पर हैंडवॉशिंग और इसके महत्व को लेकर एक स्पेशल प्रोग्रामिंग शुरू की गई है। 
  • उत्तर प्रदेश के जिलों में डिटॉल साबुन बांटे गए हैं।
  • दर्शकों के लिए विशेष प्रतियोगिता शुरू की गई है, इसके तहत दर्शक हाथ धोते हुए अपनी तस्वीरें/वीडियो शेयर करेंगे और चयनित विजेताओं को एक साल के लिए ‘डिटॉल’ साबुन मुफ्त मिलेगा।

ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे पर कोविड19 (COVID 19) के बीच स्वच्छता के प्रति जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘हाथ धोना रोके कोरोना’ (#HaathDhonaRokeyCorona) अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि हम सभी सामान्य दिखने वाली स्वच्छता की आदतों को अपनाकर स्वस्थ एवं आरोग्यपूर्ण जीवन जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि हाथ धोना हमारे व्यवहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे हम विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बच सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम सब हैंडवॉशिंग का महत्व सामान्य दिनचर्या के रूप में जानते हैं। लेकिन, आधुनिक जीवन शैली के कारण बहुत बार लोग इन सभी क्रियाकलापों से दूरी बना लेते हैं। इसका परिणाम हमारे सामने अनेक बीमारियों के रूप में सामने आ जाता है।

वहीं इस मौके पर उन्होंने ‘यू-राइज पोर्टल’ (U-Rise portal) के माध्यम से छात्रों को संबोधित किया और सभी छात्रों, फैकेल्टी मेंबर्स, ऑफिसर्स और स्टॉफ को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर, iTV नेटवर्क के संस्थापक कार्तिकेय शर्मा ने कहा, ‘हाथ की सफाई बार-बार करते रहना चाहिए, साथ ही स्वच्छता प्रणाली को मजबूत रखना चाहिए। हैंडवॉशिंग सुविधाएं बिना किसी भेदभाव के दुनिया के हर कोनें तक पहुंचनी चाहिए। यह एक समय है, जब हर इंसान को एक साथ आना होगा और मानवता दिखानी होगी। COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए अपनी भागीदारी निभानी होगी।’

iTV फाउंडेशन ने इस पहल के तहत 10 लाख डेटॉल हैंडवाश किट और 1 लाख मास्क डोनेट करने का संकल्प लिया है।

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कोरोना काल में मीडियाकर्मियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सामूहिक हवन

आगरा में यमुना आरती स्थल व्यू पॉइंट पार्क, यमुना नदी के तट पर शहर के तमाम मीडियाकर्मियों के अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सामूहिक हवन का आयोजन किया गया।

Last Modified:
Friday, 16 October, 2020
Event

आगरा में यमुना आरती स्थल व्यू पॉइंट पार्क, यमुना नदी के तट पर शहर के तमाम मीडियाकर्मियों के अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पुरुषोत्तम मास के समापन पर सामूहिक हवन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वैदिक सूत्रम के चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम द्वारा कराया गया।

सामूहिक यज्ञ के समापन पर पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि पुराणों शास्त्रों में बताया गया है कि पुरुषोत्तम मास या अधिक मास के समापन पर व्रत-उपवास, दान-पूजा और यज्ञ-हवन करने से मनुष्य के सारे पाप कर्मों का नाश होकर कई गुना पुण्यफल प्राप्त होता है। अधिक मास में तीर्थस्थलों की परिक्रमा और स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष और अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।

उन्होंने बताया कि जिस माह में सूर्य की संक्रांति नहीं होती, वह अधिक मास कहलाता है। इस मास में खासतौर पर सर्वमांगलिक कार्य वर्जित माने गए है, लेकिन यह माह धर्म-कर्म के कार्य करने में बहुत फलदायी है। इस मास में किए गए धार्मिक आयोजन पुण्य फलदायी होने के साथ ही दूसरे माहों की अपेक्षा करोड़ गुना अधिक फल देने वाले माने गए हैं।

सामूहिक यज्ञ में रिवर कनेक्ट अभियान के प्रमुख वरिष्ठ पत्रकार बृज खण्डेलवाल, श्री मथुराधीश मंदिर के नंदन श्रोतिय, जुगल किशोर व अभिनव श्रोतिय का सहयोग रहा। पार्षद अनुराग चतुर्वेदी व रिवर कनेक्ट अभियान के श्रवण कुमार, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, पत्रकार प्रवीन शर्मा, मुकेश शर्मा, राहुल राज, दीपक राजपूत, पत्रकार जगन प्रसाद तेहरिया, वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेन्द्र पटेल आदि मौजूद रहे। सभी ने पत्रकारों के लिए यमुना मैया से प्रार्थना की, क्योंकि कोरोना काल में कई पत्रकारों पर संकट आ चुका है और कई दिवंगत हो चुके हैं। हवन के समापन पर सभी ने श्रीहरि विष्णु से देश को कोरोना रूपी संकट से जल्दी मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।

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नहीं रहे जाने-माने खेल पत्रकार किशोर भीमनी

खेल पत्रकार के साथ किशोर भीमनी जाने-माने क्रिकेट कॉमेंटेटर भी थे। 80 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 15 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 15 October, 2020
Kishore Bhimani

वरिष्ठ खेल पत्रकार और जाने माने क्रिकेट कॉमेंटेटर किशोर भीमनी (Kishore Bhimani) का गुरुवार को निधन हो गया। वह 80 साल के थे। किशोर भीमनी खेल पत्रकारिता की दुनिया में एक बड़ा नाम थे और क्रिकेट कॉमेंट्री की अपनी विशिष्ट शैली के लिए काफी मशहूर थे। स्पोर्ट्स कॉमेंट्री के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2103 में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया था।   

किशोर भीमनी के निधन पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई और सागरिका घोष समेत तमाम पत्रकारों और खेल जगत से जुड़ीं कई हस्तियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

 

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हाई कोर्ट ने पत्रकार के खिलाफ दर्ज FIR को किया खारिज, कही ये बात

जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट ने श्रीनगर में एक अखबार के पत्रकार पर कथित फर्जी खबर लिखने के मामले में दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2020
Court

जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट ने श्रीनगर में एक अखबार के पत्रकार पर कथित फर्जी खबर लिखने के मामले में दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किसी ऐसी घटना के बारे में बताना, जिसे सच मानने के लिए रिपोर्टर के पास सही वजह है, अपराध नहीं हो सकता।

जस्टिस संजय धर की एकल पीठ ने यह भी कहा कि मीडिया द्वारा ‘घटनाओं की निष्पक्ष और स्पष्ट रिपोर्टिंग’ पर केवल इसलिए अंकुश नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि इससे किसी वर्ग के व्यक्तियों के व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

दरअसल, एक अंग्रेजी दैनिक के पत्रकार एम. सलीम पंडित ने तीन अप्रैल को ‘Stone pelters in J&K now target tourists, four women injured’ शीर्षक से खबर पब्लिश की थी। इस खबर में उन्होंने बताया था कि पथराव करने वालों ने पर्यटकों को निशाना बनाया जिसमें चार महिलाएं घायल हो गई हैं।

इस खबर को लेकर टूरिज्म व्यवसाय से जुड़े लोगों ने पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, ‘ऐसा ‘शांतिपूर्ण पर्यटन सीजन’ को बाधित करने और देश के नागरिकों के बीच ‘डर का माहौल बनाने’ के दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया गया था।’ पत्रकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग की थी।

इस मामले में  हाई कोर्ट की पीठ ने कहा कि उपरोक्त दस्तावेज जो जांच के रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, स्पष्ट रूप से बताते हैं कि याचिकाकर्ता के पास यह मानने के लिए उचित आधार थे कि समाचार रिपोर्ट, जिसे उन्होंने प्रकाशित किया था, सत्य तथ्यों पर आधारित है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने एम. सलीम पंडित के खिलाफ दायर एफआईआर खारिज कर दी।

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पत्रकार हत्याकांड में आरोपित गिरफ्तार, वारदात को अंजाम देने के पीछे बताई यह वजह

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में करीब पांच दिन पूर्व हुए पत्रकार हत्याकांड का पुलिस ने सोमवार को खुलासा कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 13 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2020
Arrest

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में करीब पांच दिन पूर्व हुए पत्रकार हत्याकांड का पुलिस ने सोमवार को खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से हत्याकांड में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिया है। पकड़े गए हत्यारोपित का नाम शीबू उर्फ सैफुल हक पुत्र रेहनुल हक निवासी महगांव है।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में शीबू ने बताया कि उसने इस हत्याकांड को इसलिए अंजाम दिया क्योंकि फराज ने उसके बारे में मुखबिरी की थी। इस वजह से उसे जेल जाना पड़ा था। जेल से आने के बाद इसी बात से नाराज होकर उसने फराज की हत्या कर दी। पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर शीबू को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।

पुलिस का दावा है कि शीबू, फराज से रंजिश रखता था। वर्ष 2019 में गोकशी के मामले में फराज ने उसे जेल भिजवा दिया था। जेल से आने के बाद वह फराज की हत्या करने के लिए मौका तलाश रहा था। मौका मिलते ही शीबू ने सात अक्टूबर को गोली मारकर फराज की हत्या कर दी है। पुलिस के अनुसार, शीबू पर इससे पहले भी दो मुकदमे दर्ज हैं। इन मुकदमों में वह जमानत पर है।

यह भी पढ़ें: बेखौफ बदमाशों के निशाने पर आया पत्रकार, गोली मारकर हत्या

गौरतलब है कि सात अक्टूबर को कौशांबी जिले में पत्रकार फराज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मलाक मोहिनिद्दीनपुर गांव निवासी फराज असलम एक हिंदी साप्ताहिक अखबार में बतौर जिला संवाददाता काम कर रहे थे। हत्याकांड की ये वारदात पूरामुफ्ती थाना क्षेत्र के महगाव कस्बे से पैगंबरपुर गांव जाने वाली रोड की है। बुधवार की दोपहर वह पैगंबरपुर गांव से अपने घर बाइक से जा रहे थे। हाई-वे पर पहुंचने से पहले ही गांव के बाहर बदमाशों ने उन्हें घेरकर गोली मार दी थी, जिसमें फराज असलम की मौके पर ही मौत हो गई थी।

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कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में एकजुट हुए IIMC एम्प्लॉयीज, ली ये शपथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोनावायरस के खिलाफ सतर्क रहने के लिए शुरू किए गए जन आंदोलन के तहत सोमवार को भारतीय जनसंचार संस्थान के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने जागरूक रहने की शपथ ली।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2020
IIMC

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ सतर्क रहने के लिए शुरू किए गए जन आंदोलन के तहत सोमवार को भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने जागरुक रहने की शपथ ली।

इस मौके पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने सभी लोगों के साथ मिलकर ये संकल्प लिया कि वह कोराना के प्रसार को रोकने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरतेंगे। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि हम एक साथ मिलकर ही कोविड-19 के खिलाफ इस लड़ाई को जीत सकते हैं। कार्यक्रम में संस्थान के अपर महानिदेशक श्री सतीश नम्बूदिरीपाद, प्रो. आनंद प्रधान, प्रो. अनुभूति यादव, प्रो. सुनेत्रा सेन नारायण एवं श्रीमती नवनीत कौर आदि मौजूद थे।

बता दें कि प्रधानमंत्री द्वारा गुरुवार को कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए इस जन आंदोलन की शुरुआत की गई है। आगामी त्योहारों और सर्दियों के मौसम के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के पुनः खुलने के मद्देनजर यह अभियान शुरू किया गया है। इस जन आंदोलन के जरिए मास्क पहनने, दो गज की दूरी का पालन करने और लगातार हाथों की सफाई करने का संदेश दिया जाएगा।

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पत्रकार पर हमला, पुलिस ने दो आरोपितों के खिलाफ लिया ये एक्शन

रिपोर्ट फाइल करने के लिए एक अस्पताल के पास खड़े हुए थे पीड़ित पत्रकार

Last Modified:
Monday, 12 October, 2020
Attack

ओडिशा के भद्रक जिले में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा एक पत्रकार पर हमले का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पकड़े गए आरोपितों की पहचान देवेंद्र मोहपात्रा और महेंद्र मोहपात्रा के रूप में हुई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों आरोपितों ने धमानगर इलाके में स्थानीय अखबार के पत्रकार संजीव मोहंती पर कथित रूप से उस समय हमला कर दिया था, जब वे रिपोर्ट फाइल करने के लिए एक अस्पताल के पास खड़े थे। आरोप है कि देवेंद्र ने संजीव मोहंती को बचाने आए उनके कुछ पत्रकार साथियों पर भी हमला कर दिया था।

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