मीडिया में आने वाली हेल्थ की खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा सही है?

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश ने कहा, एक गलत खबर बहुत कुछ बर्बाद कर सकती है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 05 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 05 November, 2019
Media

अखबार के पन्ने पलटते-पलटते कभी न कभी आपकी नजर किसी ऐसी खबर पर रुकी होगी, जो आपको पतला होने के राज, गोरे होने के नुस्खे या फिर मधुमेह को मात देने के तरीके बताती है। अमूमन ऐसी खबरों को हम केवल इसलिए सही मान लेते हैं, क्योंकि वह मीडिया में आई हैं और उनके अनुसार अपने खान-पान में बदलाव कर लेते हैं, लेकिन क्या ये सही है? 

क्या आम जनता तक स्वास्थ्य से जुड़ी खबरें पहुंचाने वाले पत्रकार इतने प्रशिक्षित हैं कि इनकी खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा किया जा सकता है? हाल ही में हुए एक ऑनलाइन पोल से यह सवाल खड़ा हो गया है। दिल्ली में बीते दिनों नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन आयोजित किया गया था, जिसमें देश भर के कई हेल्थ जर्नलिस्ट शामिल हुए। इस मौके पर पत्रकारों का ज्ञान परखने के लिए उनसे कुछ सवाल पूछे गए, जिसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। अधिकांश पत्रकारों को कम-कैलोरी वाले स्वीटनर, उसके लाभ और बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं पर उसके प्रभाव के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे समय में जब भारत को डायबीटीज की राजधानी कहा जाता है, हेल्थ जर्नलिस्ट का ये हाल बेहद चिंताजनक है। सोचने वाली बात यह भी है कि जब शहर के पत्रकारों की जानकारी इतनी सीमित है, तो फिर ग्रामीण इलाकों में कार्यरत पत्रकारों की स्थिति क्या होगी?

पिछले कुछ वक्त से स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को मीडिया में काफी तवज्जो दी जाने लगी है। अखबारों में इस पर स्पेशल पेज तैयार किये जाते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रखना अच्छी बात है, लेकिन पाठकों या दर्शकों को जागरूक करने वाले पत्रकारों का जागरूक रहना भी जरुरी है। 

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश का भी यही मानना है। नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन में बतौर स्पीकर मौजूद रहे सुरेश हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए ट्रेनिंग की वकालत करते आ रहे हैं। उनके पास ऐसे कई उदाहरण हैं, जो यह बताते हैं कि पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग कोर्स कितना आवश्यक है। जैसे कि पिछले साल केरल में कहर बरपाने वाले निपा वायरस को लेकर कहा गया कि ये फलों से फैल रहा है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था। नतीजा ये हुआ कि लोग इतने डर गए कि फल खाने ही बंद कर दिए। इसी तरह, कुछ साल पहले मीडिया ने भूलवश एएफपी या एक्यूट फ्लेसीड पैरालिसिस को पोलियो बता दिया था, क्योंकि दोनों में समान लक्षण थे।

हेल्थ रिपोर्टरों को किस तरह के कोर्स की जरूरत है, इसका खाका सुरेश पहले ही खींच चुके हैं। आईआईएमसी के महानिदेशक रहते वक्त उन्होंने यूनिसेफ, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के सहयोग से देश का पहला पब्लिक हेल्थ कम्युनिकेशन कोर्स डिजाइन करवाया था, जिसे पीजी डिप्लोमा के सभी पाठ्यक्रमों शामिल किया गया। इसके अलावा, उन्होंने यूनिसेफ के साथ मिलकर मीडिया कर्मियों के लिए कई कार्यशालाएं भी आयोजित की। लेकिन जिस तरह के हालात अभी हैं उसे देखते हुए अब हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य करने की आवश्यकता है, ताकि जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिल सके। 

पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग क्यों जरूरी है इसका सुरेश एक खूबसूरत उदाहरण देते हुए कहते हैं, ‘आज कानून की डिग्री के बिना आप सुप्रीम कोर्ट को कवर नहीं कर सकते, इसी तरह से डिफेंस संवाददाता को सेना कनफ्लिक्ट रिपोर्टिंग का कोर्स कराती है, तो फिर पब्लिक हेल्थ पर कोर्स क्यों नहीं हो सकता? स्वास्थ्य बेहद आवश्यक एवं गंभीर मुद्दा है। यदि आपको इसकी समझ नहीं है और आप अपराध की तरह इसकी सनसनीखेज रिपोर्टिंग करेंगे, तो इसका दूरगामी प्रभाव हमारे दर्शकों, पाठकों और श्रोताओं पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में फैले इन्सेफेलाइटिस या जापानी बुखार और बिहार में कई मौतों के लिए जिम्मेदार इन्सेफेलाइटिस में फर्क है, अब यदि आप बिना इस अंतर को समझे रिपोर्ट करेंगे तो उससे सिर्फ घबराहट फैलेगी।’    

 आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक के अनुसार, ‘स्वास्थ्य के क्षेत्र में साक्ष्य आधारित रिपोर्टिंग होनी चाहिए, क्योंकि उसका परिणाम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। गलत रिपोर्टिंग से बीमारियों को लेकर गलतफ़हमी पैदा होती है। डॉक्टरों के लिए सीएमई (कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) प्रोग्राम चलाया जाता है, जिसमें बड़े से बड़े डॉक्टर शामिल होते हैं और नवीनतम डेवलपमेंट के बारे में समझते हैं। यदि आप 70 के दशक की बात करें तो उस दौर में मधुमेह पीड़ित को चावल से दूर रहने की सलाह दी जाती थी, लेकिन आजकल कम या सीमित मात्रा में इसका सेवन कर लिया जाता है। अब यदि डॉक्टर खुद को अपडेट नहीं करते तो वह सही इलाज कैसे बता पाते? 

इसी तरह पत्रकारों को भी अपने आप को अपडेट रखना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। हम टेक्नोलॉजी अपडेट पर तो ध्यान देते हैं, मगर कंटेंट जो हमने सीखा था उसे ही आगे बढ़ाते रहते हैं। जबकि कंटेंट में भी अपडेशन की जरूरत है। मैंने कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम की तरह कन्टिन्यूइंग मीडिया एजुकेशन प्रोग्राम की पेशकश की है। खासकर छोटे शहरों में, जिला स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों को इसकी बेहद जरूरत है’। केजी सुरेश का मानना है कि जिस तरह से फेक न्यूज को लेकर सरकार, मीडिया हाउस और सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक साथ आये हैं, उसी तरह पब्लिक हेल्थ के मुद्दे पर भी सभी को हाथ मिलाना होगा, तब ही स्वास्थ्य से जुड़ी फर्जी या भ्रामक खबरों पर लगाम लगाई जा सकेगी और पत्रकारों को प्रशिक्षित किया जा सकेगा।   

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दुनिया को अलविदा कह गए बार्क इंडिया से जुड़े जगदीप दिघे

देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली इस संस्था से इसकी शुरुआत से ही जुड़े थे दिघे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 22 November, 2019
Last Modified:
Friday, 22 November, 2019
Jagdeep Dighe.

‘बार्क इंडिया’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (Marcom and Business Development Sales) जगदीप दिघे का मुंबई में निधन हो गया। वह 54 वर्ष के थे। दिघे देश में टीवी दर्शकों की संख्या मापने वाली इस संस्था से इसकी शुरुआत से ही जुड़े थे।

उन्होंने ‘बार्क इंडिया’ के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के साथ मिलकर इस संस्था को स्थापित करने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी। बताया जाता है कि उन्हें वर्ष 2015 में कार्डियक अरेस्ट हुआ था। सही होने के बाद वह फिर ‘बार्क इंडिया’ के साथ काम करने लगे थे।

पूर्व में जगदीप दिघे 13 साल से ज्यादा समय तक ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ के साथ बतौर सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (क्लाइंट सर्विसिंग) काम कर चुके थे। ‘सोनी’ से पहले वह ‘जी टीवी’ में सीनियर मैनेजर (मार्केटिंग सर्विस) के तौर पर काम कर रहे थे। इसके अलावा वह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के साथ बतौर ब्रैंड मैनेजर करीब पांच साल तक अपनी जिम्मेदारी निभा चुके थे।

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ये मुकाम पाने वाला दुनिया का पहला डिजिटल फर्स्ट न्यूज ब्रैंड बना 'द लल्लनटॉप'

पिछले 22 महीनों में तेजी से बढ़े सबस्क्राइबर्स, इस न्यूज पोर्टल के प्रोग्राम टीवी पर भी आते हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
The Lallantop

अपने अनूठे कंटेंट के लिए पहचाने जाने वाले डिजिटल फर्स्ट न्यूज ब्रैंड 'द लल्लनटॉप' ने एक खास मुकाम हासिल कर लिया है। जारी प्रेस रिलीज के अनुसार 'द लल्लनटॉप' के यूट्यूब पर एक करोड़ सबस्क्राइबर्स हो गए हैं। बताया जाता है कि यह दुनिया का पहला डिजिटल फर्स्ट न्यूज ब्रैंड है, जिसके 10 मिलियन सबस्क्राइबर्स हो गए हैं (सोर्स: विडूली रिपोर्ट, टॉप 10 डिजिटल फर्स्ट ऑरिजिनल न्यूज चैनल्स ऑन यूट्यूब)। चार जनवरी 2018 को इसके 10 लाख सबस्क्राइबर्स थे और इसके बाद महज 22 महीनों में कई बड़े नामों को पीछे छोड़ते हुए इसने यह आंकड़ा छू लिया है।

'द लल्लनटॉप' के बारे में कहा जाता है कि इसकी सबसे बड़ी यूएसपी इसका यूज़र कनेक्ट है। यह बेहद ही आसान भाषा में यूजर्स को जटिल से जटिल विषय समझाने में माहिर है, जिसे दर्शक काफी पसंद करते हैं। फरवरी 2017 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में पहली बार 'द लल्लनटॉप' ने ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके तरह दर्शकों को बिना कांट-छांट के लाइव रिपोर्टिंग के जरिये समस्त सामग्री परोसी गई। यूपी के बाद हुए गुजरात और हिमाचल के चुनावों में 'द लल्लनटॉप' ने चुनावी रिपोर्टिंग की। लोकसभा चुनावों में 'द लल्लनटॉप' ने आधे से ज्यादा भारत कवर किया।

यह देश का इकलौता न्यूज पोर्टल है, जिसके प्रोग्राम टीवी पर भी आते हैं। ‘तेज’ चैनल पर 'द लल्लनटॉप' के दो प्रोग्राम आते हैं। इनमें सोमवार से शुक्रवार रात नौ बजे ‘द लल्लनटॉप शो’ और शनिवार की रात नौ बजे ‘द लल्लनटॉप क्विज शो’ आता है। 'द लल्लनटॉप' के हर विडियो को यूट्यूब पर औसतन 2.2 लाख व्यूज मिलते हैं। लगभग हर हफ्ते इसका कोई न कोई विडियो इंडिया में ट्रेंड कर रहा होता है।

'द लल्लनटॉप'  में 'पॉलिटिकल किस्से' के द्वारा इतिहास के दिलचस्प किस्सों को रोचक अंदाज में बयां किया जाता है, वहीं अफवाहों, फर्जी और भ्रामक खबरों के लिए 'द लल्लनटॉप' के 'पड़ताल' में तमाम वायरल कंटेंट का फैक्ट चेक होता है। 'किताब वाला' शो में लेखकों से गुप्तगू की जाती है, वहीं 'साइंसकारी' में विज्ञान को आसान शब्दों में समझाया जाता है। हर हफ्ते आने वाले 'नेता नगरी' शो में वरिष्ठ टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई के साथ हफ्ते भर की तमाम राजनीतिक उठापटक का विश्लेषण किया जाता है। 'अर्थात' में जहां इकनॉमी को लेकर चर्चा की जाती है, वहीं 'आसान भाषा में' के तहत बहुत सी कठिन चीजों को सरल भाषा में समझाया जाता है। फिर चाहे सेंसेक्स की एबीसीडी हो या क्रिकेट में बॉल स्पिन होने का गणित।

 

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'न्यूज नेशन’ परिवार से जुड़े अतुल कुलश्रेष्ठ को मातृशोक

92 साल की उम्र में हुआ निधन, समाज के कमजोर व वंचित वर्ग की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहती थीं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Urmla-Kulshrestha

‘न्यूज नेशन’ परिवार से जुड़े और ‘एक्स्ट्रामार्क्स’ के फाउंडर अतुल कुलश्रेष्ठ की मां उर्मिला कुलश्रेष्ठ का 15 नवंबर को निधन हो गया है। वह 92 साल की थीं। उर्मिला कुलश्रेष्ठ अजमेर की रहने वाली थीं और समाजसेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। समाज के कमजोर व वंचित वर्ग की मदद के लिए वह हमेशा तैयार रहती थीं। उन्होंने दिव्यांगों की सहायता के लिए काफी काम किया था।

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पत्रकार के परिजनों के लिए सरकार ने बदली अपनी ये नीति

पिछले साल सड़क दुर्घटना में हो गई थी मौत, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिवंगत पत्रकार के परिजनों को दस लाख रुपए का चेक सौंपा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Arvind Kejriwal

सड़क दुर्घटना में दिवंगत हुए ‘नवोदय टाइम्स’ के पत्रकार रमेश कुमार के परिवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दस लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी है। दिल्ली सचिवालय में शुक्रवार को केजरीवाल ने रमेश कुमार के पिता विजय कुमार व पत्नी सीमा देवी को चेक प्रदान किया। मूलरूप से झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले रमेश कुमार (45) दिल्ली के पांडव नगर इलाके में पत्नी सीमा, दो बेटियों व एक बेटे के साथ रह रहे थे। पिछले साल तीन अक्टूबर को आईटीओ के पास गलत दिशा से आ रही गाड़ी ने उनकी मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी। हादसे में रमेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। काफी दिनों तक इलाज के बाद उनका निधन हो गया था।

रमेश कुमार के निधन के बाद उनके परिवार के सामने बच्चों की शिक्षा व रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए तमाम पत्रकारों ने अरविंद केजरीवाल से संपर्क किया था। इसके बाद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार की नीतियों में बदलाव कर रमेश कुमार के परिवार को दस लाख रुपए का चेक सौंपा। बता दें कि पूर्व में इस तरह के मामलों में दिल्ली सरकार की नीति के अनुसार पत्रकारों के परिजनों को आर्थिक सहायता के नाम पर बेहद कम राशि देने का प्रावधान था।

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टकराव के बढ़ते मामले रोकने के लिए सफदरजंग अस्पताल ने अपनाया ये तरीका

अस्पताल में आए दिन मरीजों, तीमारदारों व डॉक्टरों के बीच टकराव व तनाव के मामलों को देखते हुए लिया निर्णय

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 13 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Safdarjung Hospital

अस्पतालों में आए दिन मरीजों-उनके तीमारदारों व डॉक्टरों के बीच टकराव व तनाव के मामले सामने आते रहते हैं। इन घटनाओं को देखते हुए सफदरजंग अस्पताल में नई पहल शुरू की गई है। इसके तहत अस्पताल में बुधवार को अस्पताल प्रशासन और स्वयंसेवी संस्था ‘आओ साथ चलें’ ने मिलकर काउंसलिंग सेवा शुरू की है।

इसके तहत अस्पताल में कई जगहों पर हेल्प कियोस्क लगाए गए हैं, जिनमें काउंसलर मौजूद रहेंगे और अस्पताल में आने वाले मरीजों और परिजनों की काउंसलिंग करेंगे, ताकि डॉक्टरों और मरीजों के बीच आपसी समझ को बढ़ाया जा सके।

अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि अस्पताल में रोजाना लगभग 50 हजार मरीज आते हैं। उपलब्ध संसाधनों में अस्पताल द्वारा मरीजों का बेहतर उपचार करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन कई बार गलतफहमी व आपसी संवाद में कमी की वजह से डॉक्टर और मरीजों के बीच तनाव हो जाता है। अस्पताल में इस तरह की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए ही काउंसलिंग सेवा शुरू की गई है। सफदरजंग अस्पताल में इस कार्यक्रम के संचालक डॉ. अनिल गोयल ने बताया कि काउंसलर को अस्पताल प्रशासन के साथ ही डॉक्टरों की टीम अपना सहयोग देगी। अस्पताल के डॉक्टर्स द्वारा काउंसलर्स को प्रशिक्षित भी किया जाएगा।

वहीं, ‘आओ साथ चलें’ संस्था के राष्ट्रीय संयोजक विष्णु मित्तल का कहना है कि अभी दस काउंसलर नियुक्त किए गए हैं और धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि संस्था की ओर से राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मरीजों की मदद के लिए अस्पताल प्रशासन के साथ मिलकर पहले से ही काम किया जा रहा है। वहां ओपीडी और इमरजेंसी के अलावा कैंसर वार्ड में मरीजों की सहायता के लिए वॉलिंटियर्स की तैनाती की गई है।

इस सेवा के उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय कार्यवाह भारत भूषण ने इस पहल से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने का आह्वान किया। वहीं, आरएसएस के दिल्ली प्रचार प्रमुख रितेश अग्रवाल ने कहा कि इस अभियान को धीरे-धीरे दिल्ली के सभी अस्पतालों में शुरू किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष मोनिका पंत, आरके पनपालिया, सुनील मित्तल सहित स्वयंसेवी संस्था से जुड़े लोग और सफदरजंग अस्पताल के विभिन्न विभागों के एचओडी उपस्थित थे।

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रामनाथ गोयनका लेक्चर की तिथि घोषित, ये होंगे मुख्य वक्ता

दिल्ली के ‘द ग्रांड बालरूम’ होटल में आयोजित किया जाएगा कार्यक्रम

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 13 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Indian Express

इंडियन एक्सप्रेस समूह की ओर से चौथे ‘रामनाथ गोयनका लेक्चर’ (The Fourth Ramnath Goenka Lecture) का आयोजन दिल्ली में 14 नवंबर को किया जाएगा। ‘द ग्रांड बालरूम’ (The Grand Ballroom) होटल में होने वाले इस कार्यक्रम में केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ‘BEYOND THE DELHI DOGMA: INDIAN FOREIGN POLICY IN A CHANGING WORLD’ पर अपने विचार रखेंगे।  

शाम छह बजे से कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बाद शाम सात बजे से लेक्चर शुरू होगा। इसके बाद ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के कंट्रीब्यूटिंग एडिटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज के डायरेक्टर  डॉ. सी राजामोहन के साथ परिचर्चा होगी।

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सरकार के इस कदम के विरोध में एकजुट हुए पत्रकार, किया प्रदर्शन

प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने हाथों में नारे लिखी हुई तख्तियां भी ले रखी थीं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 12 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
Media

कश्मीर में इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में कश्मीरी पत्रकारों के एक संगठन ने मंगलवार को श्रीनगर प्रेस क्लब में प्रदर्शन किया। इस दौरान पत्रकारों ने अपने हाथों में लैपटॉप के साथ तख्तियां भी ले रखी थीं, जिन पर नारे लिखे हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पत्रकारों का कहना था कि इलाके में इंटरनेट सेवाएं करीब 100 दिनों से बंद हैं। ऐसे में यहां के पत्रकार काफी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि कश्मीर में पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से वहां बॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट पर रोक लगी हुई है। सरकार ने पत्रकारों के लिए एक मीडिया सेंटर स्थापित किया है, लेकिन पत्रकार हाईस्पीड ब्रॉडबैंड की बहाली की मांग कर रहे हैं।

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TOI के पूर्व पत्रकार आरसी श्रीवास्तव ने दुनिया को कहा अलविदा

लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। लखनऊ स्थित अपने आवास पर ली अंतिम सांस

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 12 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
Death

वरिष्ठ पत्रकार और लखनऊ में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के विशेष संवाददाता रहे आरसी श्रीवास्तव का निधन हो गया है। उन्होंने सोमवार की रात 3/5, ऑफिसर्स कॉलोनी कैसरबाग, लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर अंतिम सांस ली।

करीब 80 वर्षीय आरसी श्रीवास्तव लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार की दोपहर बाद बैकुंठधाम में किया जाएगा। आरसी श्रीवास्तव के परिवार में पत्नी, एक बेटा व एक बेटी है।

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नहीं रहे दैनिक जागरण से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार आरके वर्मा, अंतिम संस्कार आज

काफी समय से ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे थे आरके वर्मा। इन दिनों बेटे के पास गुरुग्राम में रह रहे थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 12 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
RK Verma

'दैनिक जागरण' से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार आरके वर्मा का सोमवार को निधन हो गया है। 60 वर्षीय आरके वर्मा करीब एक साल से ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे थे। मंगलवार की सुबह करीब दस बजे मदनपुरी में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मूलरूप से फर्रुखनगर (गुरुग्राम) के रहने वाले आरके वर्मा 'दैनिक जागरण' से करीब 20 साल से जुड़े हुए थे और बतौर संवाद सहयोगी फर्रुखनगर से खबरें कवर करते थे। इन दिनों वह अपने बेटे के पास गुरुग्राम में रह रहे थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

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इकनॉमिक टाइम्स के कंसल्टिंग एडिटर अभीक बर्मन के बारे में आई ये बुरी खबर

बर्मन ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1993 में ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ अखबार से बतौर फीचर राइटर की थी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
Abheek Barman

वरिष्ठ पत्रकार और ‘इकनॉमिक टाइम्स’ के कंसल्टिंग एडिटर अभीक बर्मन का रविवार को निधन हो गया है। बर्मन ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1993 में ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ अखबार से बतौर फीचर राइटर की थी। इसके बाद उन्होंने 'इकनॉमिक टाइम्स' का दामन थाम लिया।

बाद में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में बतौर एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) उन्होंने अपनी जिम्मेदारी संभाली। पत्रकार के साथ-साथ बर्मन एक अच्छे लेखक भी थे। बर्मन ने कोलकाता के ‘प्रेजिडेंसी कॉलेज’ से स्नातक की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने ‘दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स’ से मास्टर्स डिग्री ली थी।

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