मीडिया में आने वाली हेल्थ की खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा सही है?

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश ने कहा, एक गलत खबर बहुत कुछ बर्बाद कर सकती है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 05 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 05 November, 2019
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अखबार के पन्ने पलटते-पलटते कभी न कभी आपकी नजर किसी ऐसी खबर पर रुकी होगी, जो आपको पतला होने के राज, गोरे होने के नुस्खे या फिर मधुमेह को मात देने के तरीके बताती है। अमूमन ऐसी खबरों को हम केवल इसलिए सही मान लेते हैं, क्योंकि वह मीडिया में आई हैं और उनके अनुसार अपने खान-पान में बदलाव कर लेते हैं, लेकिन क्या ये सही है? 

क्या आम जनता तक स्वास्थ्य से जुड़ी खबरें पहुंचाने वाले पत्रकार इतने प्रशिक्षित हैं कि इनकी खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा किया जा सकता है? हाल ही में हुए एक ऑनलाइन पोल से यह सवाल खड़ा हो गया है। दिल्ली में बीते दिनों नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन आयोजित किया गया था, जिसमें देश भर के कई हेल्थ जर्नलिस्ट शामिल हुए। इस मौके पर पत्रकारों का ज्ञान परखने के लिए उनसे कुछ सवाल पूछे गए, जिसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। अधिकांश पत्रकारों को कम-कैलोरी वाले स्वीटनर, उसके लाभ और बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं पर उसके प्रभाव के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे समय में जब भारत को डायबीटीज की राजधानी कहा जाता है, हेल्थ जर्नलिस्ट का ये हाल बेहद चिंताजनक है। सोचने वाली बात यह भी है कि जब शहर के पत्रकारों की जानकारी इतनी सीमित है, तो फिर ग्रामीण इलाकों में कार्यरत पत्रकारों की स्थिति क्या होगी?

पिछले कुछ वक्त से स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को मीडिया में काफी तवज्जो दी जाने लगी है। अखबारों में इस पर स्पेशल पेज तैयार किये जाते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रखना अच्छी बात है, लेकिन पाठकों या दर्शकों को जागरूक करने वाले पत्रकारों का जागरूक रहना भी जरुरी है। 

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश का भी यही मानना है। नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन में बतौर स्पीकर मौजूद रहे सुरेश हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए ट्रेनिंग की वकालत करते आ रहे हैं। उनके पास ऐसे कई उदाहरण हैं, जो यह बताते हैं कि पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग कोर्स कितना आवश्यक है। जैसे कि पिछले साल केरल में कहर बरपाने वाले निपा वायरस को लेकर कहा गया कि ये फलों से फैल रहा है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था। नतीजा ये हुआ कि लोग इतने डर गए कि फल खाने ही बंद कर दिए। इसी तरह, कुछ साल पहले मीडिया ने भूलवश एएफपी या एक्यूट फ्लेसीड पैरालिसिस को पोलियो बता दिया था, क्योंकि दोनों में समान लक्षण थे।

हेल्थ रिपोर्टरों को किस तरह के कोर्स की जरूरत है, इसका खाका सुरेश पहले ही खींच चुके हैं। आईआईएमसी के महानिदेशक रहते वक्त उन्होंने यूनिसेफ, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के सहयोग से देश का पहला पब्लिक हेल्थ कम्युनिकेशन कोर्स डिजाइन करवाया था, जिसे पीजी डिप्लोमा के सभी पाठ्यक्रमों शामिल किया गया। इसके अलावा, उन्होंने यूनिसेफ के साथ मिलकर मीडिया कर्मियों के लिए कई कार्यशालाएं भी आयोजित की। लेकिन जिस तरह के हालात अभी हैं उसे देखते हुए अब हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य करने की आवश्यकता है, ताकि जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिल सके। 

पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग क्यों जरूरी है इसका सुरेश एक खूबसूरत उदाहरण देते हुए कहते हैं, ‘आज कानून की डिग्री के बिना आप सुप्रीम कोर्ट को कवर नहीं कर सकते, इसी तरह से डिफेंस संवाददाता को सेना कनफ्लिक्ट रिपोर्टिंग का कोर्स कराती है, तो फिर पब्लिक हेल्थ पर कोर्स क्यों नहीं हो सकता? स्वास्थ्य बेहद आवश्यक एवं गंभीर मुद्दा है। यदि आपको इसकी समझ नहीं है और आप अपराध की तरह इसकी सनसनीखेज रिपोर्टिंग करेंगे, तो इसका दूरगामी प्रभाव हमारे दर्शकों, पाठकों और श्रोताओं पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में फैले इन्सेफेलाइटिस या जापानी बुखार और बिहार में कई मौतों के लिए जिम्मेदार इन्सेफेलाइटिस में फर्क है, अब यदि आप बिना इस अंतर को समझे रिपोर्ट करेंगे तो उससे सिर्फ घबराहट फैलेगी।’    

 आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक के अनुसार, ‘स्वास्थ्य के क्षेत्र में साक्ष्य आधारित रिपोर्टिंग होनी चाहिए, क्योंकि उसका परिणाम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। गलत रिपोर्टिंग से बीमारियों को लेकर गलतफ़हमी पैदा होती है। डॉक्टरों के लिए सीएमई (कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) प्रोग्राम चलाया जाता है, जिसमें बड़े से बड़े डॉक्टर शामिल होते हैं और नवीनतम डेवलपमेंट के बारे में समझते हैं। यदि आप 70 के दशक की बात करें तो उस दौर में मधुमेह पीड़ित को चावल से दूर रहने की सलाह दी जाती थी, लेकिन आजकल कम या सीमित मात्रा में इसका सेवन कर लिया जाता है। अब यदि डॉक्टर खुद को अपडेट नहीं करते तो वह सही इलाज कैसे बता पाते? 

इसी तरह पत्रकारों को भी अपने आप को अपडेट रखना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। हम टेक्नोलॉजी अपडेट पर तो ध्यान देते हैं, मगर कंटेंट जो हमने सीखा था उसे ही आगे बढ़ाते रहते हैं। जबकि कंटेंट में भी अपडेशन की जरूरत है। मैंने कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम की तरह कन्टिन्यूइंग मीडिया एजुकेशन प्रोग्राम की पेशकश की है। खासकर छोटे शहरों में, जिला स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों को इसकी बेहद जरूरत है’। केजी सुरेश का मानना है कि जिस तरह से फेक न्यूज को लेकर सरकार, मीडिया हाउस और सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक साथ आये हैं, उसी तरह पब्लिक हेल्थ के मुद्दे पर भी सभी को हाथ मिलाना होगा, तब ही स्वास्थ्य से जुड़ी फर्जी या भ्रामक खबरों पर लगाम लगाई जा सकेगी और पत्रकारों को प्रशिक्षित किया जा सकेगा।   

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जानें, क्यों कपिल शर्मा पर भड़का कायस्थ समाज, दी मुकदमे की चेतावनी

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का कहना है कि यदि कपिल शर्मा ने माफी नहीं मांगी तो उनके शो का बहिष्कार किया जाएगा।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
Kapil Sharma

कॉमेडी किंग कपिल शर्मा इन दिनों विवादों में फंसते नजर आ रहे हैं। दरअसल, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने उन पर कॉमेडी शो में भगवान श्री चित्रगुप्त का मजाक उड़ाने का आरोप लगाते हुए अपना विरोध जताया है।

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने कपिल शर्मा से इस मसले पर माफी मांगने के लिए कहा है। महासभा का यह भी कहना है कि यदि कपिल शर्मा ने माफी नहीं मांगी तो उनके शो का बहिष्कार किया जाएगा। यही नहीं, लॉकडाउन खत्म होने पर कपिल शर्मा के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।

महासभा के पदाधिकारियों का आरोप है कि शनिवार को कपिल शर्मा ने अपने शो के दौरान भगवान श्री चित्रगुप्त के बारे में भद्दा मजाक किया। कपिल शर्मा के इस कदम की भर्त्सना करते हुए महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि इस कृत्य के लिए कपिल शर्मा अगले एपिसोड में पूरे देशवासियों से माफी मांगें।

वहीं, मीडिया वेंचर ‘पार्लियामेंट्री बिजनेस’ (ParliamentaryBusiness) के सीईओ और वरिष्ठ पत्रकार रोहित सक्सेना ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर कपिल शर्मा को माफी मांगने अथवा कानूनी कार्यवाही का सामना करने की चेतावनी दी है।

रोहित सक्सेना द्वारा इस बारे में किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

 

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लॉकडाउन में झूठी खबर फैलाने पर पत्रकार के खिलाफ दर्ज हुआ केस

कोरोनावायरस (Coronavirus) के तेजी से फैलते संक्रमण के बीच लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। ऐसे में इससे जुड़ी निराधार खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
Fake News

कोरोनावायरस (Coronavirus) के तेजी से फैलते संक्रमण के बीच लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। ऐसे में इससे जुड़ी निराधार व झूठी खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं। इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर फर्जी खबर फैलाने के आरोप में हिमाचल प्रदेश में एक समाचार पत्र (Newspaper) के पत्रकार (Journalist) पर मामला दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, नालागढ़ और बरोटीवाला में लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक फंसे हुए हैं। ऐसे में सूबे के नामी अखबार के पत्रकार ने फेसबुक पर दावा किया कि औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, नालागढ़ और बरोटीवाला से 31 मार्च को एक दिन के लिए बसें चलेंगी। यह जानकारी सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर दी गयी, जिसके बाद  पुलिस ने अब फर्जी खबरें फैलाने के आरोप में पत्रकार पर मामला दर्ज किया गया है।

फेसबुक पर फर्जी खबर चलाने के आरोप में पत्रकार पर आईपीसी की धारा 188, 182, 336, 269 और एनडीएमए के एक्ट 54 के तहत बद्दी पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है। बद्दी के एसपी रोहित मलपानी ने बताया कि रिपोर्टर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा कि यहां से विभिन्न हिस्सों में बसें चलाई जा रही हैं।

गौरतलब है कि बद्दी औद्योगिग नगरी है, जहां बड़ी संख्या में लोग फंसे हैं। वहीं सरकार ने अब अंतर जिला में भी एंट्री पर रोक लगा दी है। एसपी ने कहा कि यदि कोई एक जिले से दूसरे जिले में जाने की कोशिश करेगा, तो उसे 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाएगा। सरकार ने लोगों के लिए खाने-रहने की व्यवस्था की है।

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इस गंभीर बीमारी ने छीन ली पत्रकार अनिल कुमार शर्मा की जिंदगी

आगरा के बालूगंज निवासी अनिल कुमार शर्मा का कई दिनों से जयपुर के अस्पताल में चल रहा था इलाज

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
Anil Kumar Sharma

ब्लड कैंसर से जूझ रहे पत्रकार अनिल कुमार शर्मा का शनिवार को निधन हो गया है। वह जयपुर के अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे। आगरा के करियप्पा रोड बालूगंज निवासी अनिल कुमार शर्मा शासन से मान्यताप्राप्त संवाददाता थे। वह इन दिनों अलीगढ़ से पब्लिश होने वाले अखबार ‘राजपथ’ में आगरा के संवाददाता थे। ताजगंज स्थित मोझधाम में रविवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके परिवार में पत्नी, दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं।

ताज प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिल शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अजय शर्मा, महामंत्री उपेन्द्र शर्मा, सचिव पवन तिवारी व कोषाध्यक्ष महेश शर्मा ने अनिल कुमार शर्मा के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।  

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फोटो जर्नलिस्ट की पीट-पीटकर हत्या, सदमे ने ली बुजुर्ग पिता की भी जान

दिल्ली के पांडव नगर इलाके में एक फोटो जर्नलिस्ट की पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है।

Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
beaten

दिल्ली के पांडव नगर इलाके में एक फोटो जर्नलिस्ट की पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक की पहचान 42 वर्षीय गजेंद्र सिंह  के रूप में हुई है। गजेंद्र परिवार के साथ मंडावली इलाके में रहते थे।

गजेंद्र कई दैनिक अखबारों के लिए फ्रीलांस फोटो जर्नलिस्ट के तौर पर काम करते थे। शनिवार रात परिजनों से किसी काम से बाहर जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन वह पूरी रात वापस नहीं लौटे।

अगले दिन जब तलाश शुरू की गई तो वे संजय झील में घायल हालत में मिले। उनके चेहरे पर चोट के गंभीर निशान थे। गजेंद्र की दोनों आंखें बुरी तरह सूजी हुई थीं। इलाज के लिए गजेंद्र को एलबीएस अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, लेकिन देर रात को उन्होंने घर पर दम तोड़ दिया। अगले दिन जब पोस्टमार्टम के बाद परिवार शव का अंतिम संस्कार करके घर लौटा, तो सदमे से गजेंद्र के 84 वर्षीय पिता भवान सिंह की भी मौत हो गई। भवान सिंह भी कई बड़े समाचार पत्रों में फोटो पत्रकार रहे थे और उन्होंने कई अवॉर्ड भी जीते थे। पिता-पुत्र की एकस्मात मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। 

पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और गजेंद्र सिंह पर हमला करने वाले आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस को पता चला है कि गजेंद्र के पास से उसका मोबाइल फोन नहीं मिला है। पुलिस फोन के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

 

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न्यूज चैनल्स के हितों की रक्षा के लिए आगे आया NBF, सरकार के सामने रखीं ये मांग

कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का किया समर्थन

Last Modified:
Tuesday, 24 March, 2020
NBF

न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए किए गए लॉकडाउन व अन्य पहल के तहत देश भर के न्यूज टेलिविजन चैनल्स के हितों की दिशा में सरकार से तत्काल दखल देने की मांग की है।  

इस बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनट सचिवालय, वित्त मंत्रालय, सूचना प्रसारण मंत्रालय आदि को दिए ज्ञापन में ‘एनबीएफ’ ने न्यूज ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर पर पड़ रहे वित्तीय और व्यावसायिक असर का मुकाबला करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है।

इस ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि इस वित्तीय संकट को देखते हुए सरकार को टैक्स में छूट दी जाए। इसके साथ ही जीएसटी की दरों को कम करने, टैक्स जमा करने के लिए कम से कम तीन महीने की छूट देने आदि की मांग भी की गई है। फेडरेशन ने सरकार से मार्च और अप्रैल 2020 के लिए डीडी फ्रीडिश प्लेटफॉर्म पर न्यूज चैनल्स की फीस माफ करने की भी मांग की है।

इस बारे में ‘एनबीएफ’ के प्रेजिडेंट अरनब गोस्वामी का कहना है, ‘कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का एनबीएफ सपोर्ट करता है और पूरी तरह से सरकार के साथ है। वहीं, इस स्थिति में सरकार को न्यूज ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर को बचाने की दिशा में भी कदम उठाने चाहिए, जो हर परिस्थिति में लोगों को सूचनाएं उपलब्ध करा रहा है।’

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'लॉकडाउन' में दिल्ली पुलिस की बर्बरता का शिकार हुए 'आजतक' के ये पत्रकार

कोरोना के बढ़ते संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए दिल्ली को लॉकडाउन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 23 मार्च से 31 मार्च तक ‘लॉकडाउन’ की घोषणा की है

Last Modified:
Monday, 23 March, 2020
beaten

कोरोना के बढ़ते संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए दिल्ली को लॉकडाउन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 23 मार्च से 31 मार्च तक ‘लॉकडाउन’ की घोषणा की है, लेकिन इस दौरान जरूरी सेवाओं से जुड़े सभी लोगों को आवागमन की अनुमति दी गई है, जिनमें मीडियाकर्मी व पत्रकार भी शामिल हैं। प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी लॉकडाउन में फील्ड में काम करने की छूट है।

बावजूद इसके, ऑफिस जाते समय ‘आजतक’ के एक टीवी पत्रकार दिल्ली पुलिस की बर्बरता का शिकार हो गए। ‘आजतक’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं नवीन कुमार ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि जब वे सफदरजंग से नोएडा फिल्म सिटी स्थित अपने कार्यालय जा रहे थे कि तभी दिल्ली पुलिस के लोगों ने उनके कार की चाभी निकाल ली, उनका वॉलेट और फोन छीन लिया। इतना ही नहीं उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं और वैन में डालकर उन्हें पीटा भी गया। एक अपने इस हादसे की पूरी कहानी बताई है, जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं-

 

 

 

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‘जनता कर्फ्यू में इस मीडिया संस्थान ने भी निभाई सामाजिक जिम्मेदारी

कोरोना के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता कर्फ्यू की अपील पर अमल करने वालों में आम जनता के साथ-साथ कुछ मीडिया संस्थान भी शामिल रहे।

Last Modified:
Monday, 23 March, 2020
Newspaper

कोरोना के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जनता कर्फ्यू की अपील की थी। इस अपील पर अमल करने वालों में आम जनता के साथ-साथ कुछ मीडिया संस्थान भी शामिल रहे। इन संस्थानों में रविवार को काम नहीं हुआ। ऐसा अमूमन कम ही देखने को मिलता है कि मीडिया हाउस पूरी तरह बंद रहें, लेकिन चूंकि यह तेजी से पैर पसार रहे कोरोना वायरस को कमजोर करने की अपील थी, इसलिए संस्थानों ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए काम बंद रखा।

मध्यप्रदेश से प्रकाशित होने वाला हिंदी दैनिक ‘प्रजातंत्र’ भी इस कड़ी में शामिल रहा। सोमवार को अखबार का अंक पाठकों के हाथों में नहीं पहुंचा। हालांकि, इसकी सूचना पहले ही पाठकों तक पहुंचा दी गई थी। खास बात यह है कि अखबार प्रबंधन ने आगे के लिए भी तैयारी की है, ताकि कोरोना के चक्र को तोड़ने की सरकारी कोशिशों परवान चढ़ाया जा सके। प्रबंधन की तरफ से सभी कर्मियों को एक संदेश भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि ‘23 मार्च से सरकुलेशन/ एचआर और मार्केटिंग विभाग घर से ही काम करेंगे।

अकाउंट विभाग से कोई एक व्यक्ति 11-2 बजे तक ही आए। रिपोर्टर सुबह की मीटिंग संपादक/ सिटी चीफ के साथ वॉट्सऐप ग्रुप पर ही करें। रिपोर्टर अपनी खबरें घर से ही दिन में भेज दें। उन्हें दफ्तर आना है या नहीं, इस पर 2 बजे संपादक से बात कर लें। रिपोर्टर फील्ड पर ना जाएं। फोन पर ही सूचना ले लें, खुद को एक्सपोज बिलकुल ना करें’। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि डेस्क स्टाफ जल्द काम निपटाकर घर जा सकता है। साथ ही यह हिदायत भी दी गई है कि जल्दी जाने का यह मतलब बाहर घूमना नहीं होना चाहिए। ऐसा करके आप अपने और अपने परिवार एवं साथियों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं।

कोरोना का खतरा जितना अन्य लोगों को है, उतना ही पत्रकारों को भी, लिहाजा ‘प्रजातंत्र’ प्रबंधन का यह फैसला दर्शाता है कि उसे अपने कर्मियों की चिंता है। इस संबंध में अखबार के भोपाल ब्यूरो चीफ धमेंद्र पैगवार ने कहा, ‘अखबार के एडिटर-इन-चीफ हेमंत शर्मा खुद भी रिपोर्टर रहे हैं, इसलिए वह समझते हैं कि एक रिपोर्टर को खबरों की तलाश में क्या कुछ करना पड़ता है। उन्होंने हमें कई तरह की सहूलियतें प्रदान की हैं, ताकि हम कोरोना के प्रकोप से बचें रहें और वायरस में फैलाव की वजह न बनें।’

‘प्रजातंत्र’ की तरह ‘प्रदेश टुडे’ ने भी जनता कर्फ्यू को ध्यान में रखते हुए रविवार को कामकाज बंद रखा। अखबार ने अपने 21 मार्च के अंक में इसकी सूचना दी थी, जिसमें कहा गया था कि ‘प्रदेश टुडे के 14 संस्करणों का कामकाज रविवार को बंद रहेगा। कोरोना से निपटने के लिए प्रधानमंत्री की अपील का हम समर्थन करते हैं।’

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कोरोना के संक्रमण ने छीन ली दो पत्रकारों की जिंदगी

दुनियाभर के कई देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहे है। ये संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। इसकी वजह से स्पेन में दो खेल पत्रकारों की मौत हो गई है।

Last Modified:
Saturday, 21 March, 2020
Accident Death

दुनियाभर के कई देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहे है। ये संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। इसकी वजह से स्पेन में दो खेल पत्रकारों की मौत हो गई है। इसकी जानकारी अंतरराष्ट्रीय खेल पत्रकार संघ (एआईपीएस) ने दी है।

संघ के मुताबिक, 59 साल के जोस मारिया कैनडेला और 78 साल के थॉमस डिएज वाल्डेस की गुरुवार को इस भयंकर बीमारी की वजह से मौत हो गई। जोस रेडियो नेशनल डे स्पेन (आरएनई) के लिए काम करते थे, तो वहीं थॉमस मोटरप्वाइंट नेटवर्क एडिटर्स के महानिदेशक थे। वह साथ ही 30 साल तक स्पेन के अखबार एएस के रिपोर्टर भी थे।

आरएनई ने बताया कि जोस का निधन कोरोना वायरस के कारण हुआ है। वह अपने घर में अकेले मृत पाए गए। जोस के दोस्त और एआईपीएस के सदस्य प्रिटो ने कहा कि उनका आज यानि शुक्रवार को जांच होनी थी लेकिन इससे पहले ही वो खत्म हो गए। उन्होंने कहा कि वह कमजोरी महसूस कर रहे थे, लेकिन उनकी जांच शुक्रवार को होनी थी। वे यहां स्पेन में जांच नहीं कर रहे हैं। उनके भाई ने आखिरी बार उनसे बात की थी।

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कोरोना के कहर से नहीं बचा यह मीडियाकर्मी, गई जान

दुनियाभर में कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर इस बीमारी के कहर का सामना कर रहे हैं।

Last Modified:
Saturday, 21 March, 2020
nbs

दुनियाभर में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 2,77000 के करीब हो गई है, वहीं 10,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अभी तक करीब 86000 लोग पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। सबसे ज्यादा जानें इटली में गई हैं। वहीं इस बीच कोरोना वायरस ने अमेरिकी मीडियाकर्मी लैरी एडवर्थ की भी जान ले ली है।

लैरी एडवर्थ एनबीसी न्‍यूज में कार्यरत थे और वे इन दिनों कोरोना वायरस से संक्रमित थे। इस बात की एनबीसी न्‍यूज के चेयरमैन एंड्रू लैक ने दी। उन्‍होंने बताया कि लैरी पहले से बीमार चल रहे थे और इसी बीच कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए।

लैरी ने मिडटाउन मैनहट्टन स्थित नेटवर्क के 30 रॉकफेलर प्लाजा कार्यालय के उपकरण कक्ष में काम करते थे। लैरी ने इससे पहले करीब 25 साल तक एनबीसी न्‍यूज के ऑडियो टेक्‍नीशियन के रूप में भी काम किया था।

गौरतलब है कि दुनियाभर में कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर इस बीमारी के कहर का सामना कर रहे हैं। अब तक अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमण से 252 लोगों की मौत हो गई है। यही नहीं इस बीमारी से अब तक अमेरिका में करीब 20 हजार लोग संक्रमित हुए हैं।  

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जीवन के कई 'रंगों' का सार है युवा पत्रकार हिमानी का ये कथा संग्रह

बीते दस सालों से मीडिया की दुनिया में कार्यरत पत्रकार और लेखिका हिमानी का लघु कथा संग्रह 'नमक' इन दिनों चर्चा में है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 18 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 18 March, 2020
HIMANI

अमृत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार।।

बीते दस सालों से मीडिया की दुनिया में कार्यरत पत्रकार और लेखिका हिमानी का लघु कथा संग्रह 'नमक' इन दिनों चर्चा में है। इस कथा संग्रह की टैगलाइन है जिंदगी को चाहिए 'नमक'। इस टैगलाइन का पूरा सार कथा संग्रह की छोटी-छोटी कहानियों में मिलता है।

इन कहानियों को इस तरह शब्दों में पिरोया गया है कि हर एक कहानी अपनी ही जिंदगी में घटता हुए एक पल मालूम होती है। किसी भी कहानी में किसी भी किरदार को कोई नाम नहीं दिया गया है। हर कहानी में एक लड़का है या एक लड़की या फिर दो लड़कियों की बातचीत।

संवाद की शैली में लिखी गई ये कहानियां कहीं-कहीं आम बातचीत जैसी लगती हैं और कहीं-कहीं कम शब्दों में ताउम्र के लिए एक गहरा असर छोड़ जाती हैं। कथा संग्रह 'नमक' में 80 कहानियां हैं। इन कहानियों को पढ़ते हुए अक्सर चंद्रधर शर्मा गुलेरी की मशहूर कहानी ‘उसने कहा था’ की याद आती है, जिसके संवाद सीधे दिल पर असर करते हैं और फिर पूरी कहानी चाहे भूल भी जाएं, वो संवाद कभी भी यादाश्त से गायब नहीं होते। इस कथा संग्रह में भी ऐसे कई संवाद हैं।

'मैं आज तक कभी इतना रॉन्गसाइड नहीं चली, जितना तुमने मुझे चलवा दिया

न सड़क पर, न जिंदगी में।' 

कहानी 'रॉन्गसाइड' से

पता है ऑर्गेज्म क्या होता है? लड़की ने पूछा

'मेरे लिए तो तुम्हारा खुश होना ऑर्गेज्म होता है... 'लड़के ने जवाब दिया।

कहानी 'ऑर्गेज्म' से

'यहां बहुत ज्यादा गर्मी है। चटक धूप रहती है। घर से बाहर निकलने को जी ही नहीं चाहता। मुझे गर्मी बिलकुल पसंद नहीं है।' लड़के ने खत में लिखा

'इस पर परेशान क्यों होना, मौसम तो बदलते रहते हैं।' लड़की ने जवाब भेजा

कहानी 'मौसम' में

'तुम्हारा जाना मेरे लिए कयामत जैसा था।

और तुम्हारा न जा पाना, तुम्हारे लिए कयामत जैसा होता।

मैंने अपनी कयामत बुला ली।' लड़की ने कहा।

 कहानी 'कयामत' से

80 कहानियों की इस किताब को सात भागों में बांटा गया है। हर भाग के साथ चित्रकार प्रीतिमा वत्स ने चित्रांकन के जरिये दो लोगों के बीच के संबंधों को दिखाने की कोशिश की है। शुरुआती भाग में बेहद मासूम से पलों की कहानियां हैं, तो आखिरी भागों में दर्द और पीड़ा के लम्हों में छिपे प्यार की तड़प को दिखाने वाली कहानियां। कुछ लोग इन कहानियों को लप्रेक शैली से जोड़ सकते हैं, लेकिन इन कहानियों को पढ़ने के बाद ये लप्रेक से ज्यादा छायाचित्र की तरह लगते हैं, जिन्हें पढ़ने का अनुभव पाठक को नई सी ताजगी देता है।

वक्त की कमी के चलते अक्सर किताबें पढ़ने का शौक पूरा न कर पाने वाले लोगों के लिए ये किताब बिलकुल सही है। अगर हिसाब-किताब के अंदाज में बताया जाए तो इस कथा संग्रह की 80 कहानियों को पढ़ने के लिए सिर्फ 80 मिनट चाहिए, लेकिन बदले में ये कहानियां जीवन भर के लिए एक खास अहसास दे जाती हैं।

कथा संग्रह का नाम ‘नमक’ रखे जाने के पीछे की एक वजह इसकी शीर्षक कहानी नमक से भी समझ आती है और दूसरी वजह को लेखिका ने किताब की भूमिका में बहुत खूबसूरती से बयां किया है, जिसे पढ़ते ही किताब को पढ़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने में काफी मदद मिलती है।

इस किताब को Authors pride publication ने पब्लिश किया है। 100 पृष्ठों वाली इस किताब की कीमत 125 रुपए रखी गई है। 

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