मीडिया में आने वाली हेल्थ की खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा सही है?

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश ने कहा, एक गलत खबर बहुत कुछ बर्बाद कर सकती है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 05 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 05 November, 2019
Media

अखबार के पन्ने पलटते-पलटते कभी न कभी आपकी नजर किसी ऐसी खबर पर रुकी होगी, जो आपको पतला होने के राज, गोरे होने के नुस्खे या फिर मधुमेह को मात देने के तरीके बताती है। अमूमन ऐसी खबरों को हम केवल इसलिए सही मान लेते हैं, क्योंकि वह मीडिया में आई हैं और उनके अनुसार अपने खान-पान में बदलाव कर लेते हैं, लेकिन क्या ये सही है? 

क्या आम जनता तक स्वास्थ्य से जुड़ी खबरें पहुंचाने वाले पत्रकार इतने प्रशिक्षित हैं कि इनकी खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा किया जा सकता है? हाल ही में हुए एक ऑनलाइन पोल से यह सवाल खड़ा हो गया है। दिल्ली में बीते दिनों नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन आयोजित किया गया था, जिसमें देश भर के कई हेल्थ जर्नलिस्ट शामिल हुए। इस मौके पर पत्रकारों का ज्ञान परखने के लिए उनसे कुछ सवाल पूछे गए, जिसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। अधिकांश पत्रकारों को कम-कैलोरी वाले स्वीटनर, उसके लाभ और बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं पर उसके प्रभाव के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे समय में जब भारत को डायबीटीज की राजधानी कहा जाता है, हेल्थ जर्नलिस्ट का ये हाल बेहद चिंताजनक है। सोचने वाली बात यह भी है कि जब शहर के पत्रकारों की जानकारी इतनी सीमित है, तो फिर ग्रामीण इलाकों में कार्यरत पत्रकारों की स्थिति क्या होगी?

पिछले कुछ वक्त से स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को मीडिया में काफी तवज्जो दी जाने लगी है। अखबारों में इस पर स्पेशल पेज तैयार किये जाते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रखना अच्छी बात है, लेकिन पाठकों या दर्शकों को जागरूक करने वाले पत्रकारों का जागरूक रहना भी जरुरी है। 

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश का भी यही मानना है। नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन में बतौर स्पीकर मौजूद रहे सुरेश हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए ट्रेनिंग की वकालत करते आ रहे हैं। उनके पास ऐसे कई उदाहरण हैं, जो यह बताते हैं कि पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग कोर्स कितना आवश्यक है। जैसे कि पिछले साल केरल में कहर बरपाने वाले निपा वायरस को लेकर कहा गया कि ये फलों से फैल रहा है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था। नतीजा ये हुआ कि लोग इतने डर गए कि फल खाने ही बंद कर दिए। इसी तरह, कुछ साल पहले मीडिया ने भूलवश एएफपी या एक्यूट फ्लेसीड पैरालिसिस को पोलियो बता दिया था, क्योंकि दोनों में समान लक्षण थे।

हेल्थ रिपोर्टरों को किस तरह के कोर्स की जरूरत है, इसका खाका सुरेश पहले ही खींच चुके हैं। आईआईएमसी के महानिदेशक रहते वक्त उन्होंने यूनिसेफ, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के सहयोग से देश का पहला पब्लिक हेल्थ कम्युनिकेशन कोर्स डिजाइन करवाया था, जिसे पीजी डिप्लोमा के सभी पाठ्यक्रमों शामिल किया गया। इसके अलावा, उन्होंने यूनिसेफ के साथ मिलकर मीडिया कर्मियों के लिए कई कार्यशालाएं भी आयोजित की। लेकिन जिस तरह के हालात अभी हैं उसे देखते हुए अब हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य करने की आवश्यकता है, ताकि जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिल सके। 

पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग क्यों जरूरी है इसका सुरेश एक खूबसूरत उदाहरण देते हुए कहते हैं, ‘आज कानून की डिग्री के बिना आप सुप्रीम कोर्ट को कवर नहीं कर सकते, इसी तरह से डिफेंस संवाददाता को सेना कनफ्लिक्ट रिपोर्टिंग का कोर्स कराती है, तो फिर पब्लिक हेल्थ पर कोर्स क्यों नहीं हो सकता? स्वास्थ्य बेहद आवश्यक एवं गंभीर मुद्दा है। यदि आपको इसकी समझ नहीं है और आप अपराध की तरह इसकी सनसनीखेज रिपोर्टिंग करेंगे, तो इसका दूरगामी प्रभाव हमारे दर्शकों, पाठकों और श्रोताओं पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में फैले इन्सेफेलाइटिस या जापानी बुखार और बिहार में कई मौतों के लिए जिम्मेदार इन्सेफेलाइटिस में फर्क है, अब यदि आप बिना इस अंतर को समझे रिपोर्ट करेंगे तो उससे सिर्फ घबराहट फैलेगी।’    

 आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक के अनुसार, ‘स्वास्थ्य के क्षेत्र में साक्ष्य आधारित रिपोर्टिंग होनी चाहिए, क्योंकि उसका परिणाम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। गलत रिपोर्टिंग से बीमारियों को लेकर गलतफ़हमी पैदा होती है। डॉक्टरों के लिए सीएमई (कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) प्रोग्राम चलाया जाता है, जिसमें बड़े से बड़े डॉक्टर शामिल होते हैं और नवीनतम डेवलपमेंट के बारे में समझते हैं। यदि आप 70 के दशक की बात करें तो उस दौर में मधुमेह पीड़ित को चावल से दूर रहने की सलाह दी जाती थी, लेकिन आजकल कम या सीमित मात्रा में इसका सेवन कर लिया जाता है। अब यदि डॉक्टर खुद को अपडेट नहीं करते तो वह सही इलाज कैसे बता पाते? 

इसी तरह पत्रकारों को भी अपने आप को अपडेट रखना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। हम टेक्नोलॉजी अपडेट पर तो ध्यान देते हैं, मगर कंटेंट जो हमने सीखा था उसे ही आगे बढ़ाते रहते हैं। जबकि कंटेंट में भी अपडेशन की जरूरत है। मैंने कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम की तरह कन्टिन्यूइंग मीडिया एजुकेशन प्रोग्राम की पेशकश की है। खासकर छोटे शहरों में, जिला स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों को इसकी बेहद जरूरत है’। केजी सुरेश का मानना है कि जिस तरह से फेक न्यूज को लेकर सरकार, मीडिया हाउस और सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक साथ आये हैं, उसी तरह पब्लिक हेल्थ के मुद्दे पर भी सभी को हाथ मिलाना होगा, तब ही स्वास्थ्य से जुड़ी फर्जी या भ्रामक खबरों पर लगाम लगाई जा सकेगी और पत्रकारों को प्रशिक्षित किया जा सकेगा।   

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वरिष्ठ पत्रकार के घर पर हमले के संबंध में PCI ने स्वत: लिया ये संज्ञान

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत चक्रवर्ती के घर पर कथित हमले के संबंध में त्रिपुरा के मुख्य सचिव से अपना जवाब प्रस्तुत करने को कहा है

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2020
PCI

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत चक्रवर्ती के घर पर कथित हमले के संबंध में त्रिपुरा के मुख्य सचिव से अपना जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। प्रशांत चक्रवर्ती त्रिपुरा यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट के महासचिव भी हैं।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद ने एक बयान में चक्रवर्ती के घर पर हुए हमले पर चिंता व्यक्त की है।

पीसीआई ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए त्रिपुरा के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में कुछ हमलावरों ने अगरतला में चक्रवर्ती के घर पर हमला कर दिया था, लेकिन पत्रकार हमले के समय घर पर अपने घर पर नहीं थे। लिहाजा हमलवारों ने उनके परिवार के सदस्यों को की पिटाई कर दी थी।

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24 घंटे में कोरोना वायरस ने इस राज्य में छीन ली 2 पत्रकारों की जिंदगी

ओडिशा में कोरोना वायरस की वजह से बीते 24 घंटे में एक और पत्रकार की मौत हो गई

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2020
Journalist587

ओडिशा में कोरोना वायरस की वजह से पिछले 24 घंटे में एक और पत्रकार की मौत हो गई। मृतक पत्रकार की पहचान गजपति जिले के निवासी के.सीएच. रत्नाम के तौर पर हुई है।

75 वर्षीय पत्रकार तेलुगू अखबार ‘ईनाडु’ के साथ काम करते थे।

हाल ही में कोरोना से संक्रमित होने के बाद रत्नाम को भुवनेश्वर में बने एक कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां अस्पताल में इलाज के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली।

राज्‍य में कोविड-19 से मरने वाले रत्नाम दूसरे पत्रकार हैं। एक दिन पहले ही, भुवनेश्वर में ही बने  कोविड अस्पताल में उपचार के दौरान 46 वर्षीय पत्रकार प्रियदर्शी पट्टनायक की मौत हो गई थी। वह उड़िया अखबार ‘द समाज’ में कॉरेस्पोंडेंट के तौर पर काम कर रहे थे।

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दुनिया को अलविदा कह गए BBC के हिंदी डिविजन के पूर्व प्रमुख कैलाश बुधवार

भारतीय मूल के पत्रकार और बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के हिंदी डिविजन के पूर्व प्रमुख कैलाश बुधवार का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को लंदन में निधन हो गया

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2020
Kailash-Budhwar

भारतीय मूल के पत्रकार और बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के हिंदी डिविजन के पूर्व प्रमुख कैलाश बुधवार का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को लंदन में निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे। पिछले कुछ समय से वे बीमार चल रहे थे और अस्तपाल में भर्ती थे। उन्होंने जब अंतिम सांस ली तब उनके परिवार के सदस्य उनके साथ थे।

बुधवार ने लंदन में भारतीय उच्चायोग में मीडिया सलाहकार के रूप में भी काम किया था और वह रेडियो और टेलीविजन पर नियमित टिप्पणीकार थे। उन्होंने आकाशवाणी और नेशनल रेडियो नेटवर्क ऑफ इंडिया में भी काम किया था।

1969 में बीबीसी में काम शुरू करने से पहले वे करनाल के सैनिक स्कूल और रांची के विकास विद्यालय में अध्यापक भी रह चुके थे। रंगमंच का शौक उन्हें मुंबई भी ले गया था, जहां कुछ समय तक उन्होंने पृथ्वीराज कपूर के साथ पृथ्वी थिएटर में भी काम किया।

अपनी बुलंद आवाज के लिए पहचाने जाने वाले कैलाश बुधवार हिंदी और तमिल सेवा के प्रमुख बनने वाले पहले भारतीय थे, उनसे पहले इस भूमिका में अंग्रेज अधिकारी हुआ करते थे।

कैलाश बुधवार 1970 के दशक के अंतिम वर्षों में हिंदी और तमिल सेवा के प्रमुख बने थे, और 1991 में रिटायर हुए थे।

यूके एसोसिएशन (आईजेए-यूके) ने अपने श्रद्धांजलि संदेश में कहा, ‘हंसमुख और खुशमिजाज इंसान, ज्ञान पुंज बुधवार इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजेए) यूके के बहुत ही चर्चित और वरिष्ठ सदस्यों में से एक थे।’

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार-स्तंभकार नगीनदास सांघवी, 100 साल की उम्र में निधन

वयोवृद्ध गुजराती पत्रकार, स्तंभकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नगिनदास सांघवी का रविवार को सूरत में निधन हो गया

Last Modified:
Monday, 13 July, 2020
nagindas

वयोवृद्ध गुजराती पत्रकार, स्तंभकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नगिनदास सांघवी का रविवार को सूरत में निधन हो गया। वह 100 वर्ष के थे और अस्थमा से पीड़ित थे। उन्हें पिछले कुछ दिनों से खांसी और सांस लेने की समस्या में दिक्कत हो रही थी। 

न केवल गुजरात, बल्कि देश के जाने-माने नाम वरिष्ठ पत्रकार नागिनदास सांघवी को वर्ष 2019 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पद्मश्री नगिनदास सांघवी जितने ज्ञानी थे, उतने ही सरल स्वाभाव के थे। लोग उन्हें नागिन बापा के उपनाम से संबोधित करते थे। उन्होंने ‘चित्रलेखा’, ‘गुजरात मित्र’, ‘दिव्यभास्कर’ जैसे अखबारों में भी नियमित रूप से लिखा।

10 मार्च, 1920 को भावनगर में जन्म नगिनदास संघवी की शिक्षा दीक्षा वही हुई थी। उन्होंने राजनीति विज्ञान का अध्ययन किया था और मुंबई के मीठीबाई कॉलेज में राजनीति विज्ञान के प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए। राजनीतिक आलोचना के विषय पर वे जिस स्पष्टता के साथ बोल सकते हैं वह गुण शायद ही आज के लेखकों में पाया जाता है। उन्होंने 1962 में कॉलम लिखना शुरू किया और यह पिछले हफ्ते तक जारी रहा। उन्होंने मोरारी बापू के साथ भी काम किया है और गीता, राजनीति, नरेंद्र मोदी सहित कई जटिल विषयों पर किताबें लिखी हैं, जो पाठकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। उन्होंने महात्मा गांधी, गुजरात और अन्य विषयों पर कई किताबें लिखी थीं।

देश के प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट करके नगीनदास सांघवी को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने गुजराती में ट्विट करके लिखा, ‘श्री नगिनदास संघवी एक प्रबुद्ध लेखक-विचारक थे। उनके लेख और किताबें इतिहास और दर्शन की समझ और राजनीतिक घटनाओं का विश्लेषण करने की असाधारण क्षमता का परिचय देती हैं। उनकी मृत्यु से दुखी हूं। शोक संतप्त परिवार और उनके बड़े पाठकों को सांत्वना … ओम शांति !!’

उनकी बहुचर्चित किताबों में ‘रामायण’, ‘महात्मा गांधी’, ‘सरदार पटेल’ और ‘नरेंद्र मोदी’ शामिल हैं। विशेष अध्ययन के आधार पर उन्होंने ‘योग का इतिहास’ और ‘गीता विमर्श’ और ‘महामानव कृष्ण’ सहित कुल 18 किताबें लिखी और 29 परिचय पुस्तिकाएं लिखी।

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नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े प्रोफेसर अरुण कुमार भगत, निभाएंगे यह भूमिका

तीन वर्षों के लिए गठित यह बोर्ड ऑफ ट्रस्टी राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली के लिए नीति निर्धारण करने वाली सर्वोच्च समिति है|

Last Modified:
Monday, 13 July, 2020
Arun Kumar Bhagat

मोतिहारी (बिहार) स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग में डीन के रूप में कार्यरत प्रोफेसर अरुण कुमार भगत को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली (नेशनल बुक ट्रस्ट) का न्यासी सदस्य नामित किया गया है| मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत काम करने वाले उच्च शिक्षा विभाग की ओर से उन्हें नामित किया गया है। विभाग की ओर से कुल 14 साहित्यकारों, पत्रकारों और शिक्षाविदों को बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में शामिल किया गया है| तीन वर्षों के लिए गठित यह बोर्ड ऑफ ट्रस्टी राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली के लिए नीति निर्धारण करने वाली सर्वोच्च समिति है|

बता दें कि भारत की सर्वोच्च एवं स्वायत्तशासी साहित्यिक संस्था ‘साहित्य अकादमी, दिल्ली’ के लिए भी उन्हें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा पांच वर्षों की सदस्यता के लिए नामित किया जा चुका है| इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ की कार्यकारिणी और साधारण सभा के लिए भी नामित किया गया था| इसके अलावा उन्हें गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया है|

प्रोफेसर भगत करीब दो दर्जन किताबों का लेखन व संपादक कर चुके हैं। गाजियाबाद स्थित इंदिरापुरम में रहने वाले प्रोफेसर भगत के अखबार व पत्रिकाओं में लगातर आलेख प्रकाशित होते रहते हैं।

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पत्रकारों को निशाना बनाए जाने पर PCI खफा, लिया ये स्टेप

‘भारतीय प्रेस परिषद’ (पीसीआई) ने पिछले दिनों विभिन्न राज्यों में पत्रकारों को ‘निशाना’ बनाए जाने की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया है।

Last Modified:
Friday, 10 July, 2020
PCI

‘भारतीय प्रेस परिषद’ (पीसीआई) ने पिछले दिनों विभिन्न राज्यों में पत्रकारों को ‘निशाना’ बनाए जाने की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया है। पीसीआई ने सबसे पहले हिमाचल प्रदेश में पंजाब केसरी के रिपोर्टर सोमदेव शर्मा का मामला उठाया है। इस मामले में सोमदेव शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सोमदेव शर्मा ने राज्य में एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले लोगों को लेकर कथित रूप से प्रशासनिक ढिलाई के बारे में रिपोर्टिंग की थी। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रेस काउंसिल ने हिमाचल प्रदेश की सरकार से अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।

इसी तरह, छत्तीसगढ़ में ‘बस्तर की आवाज’ (Bastar Ki Awaaz) के रिपोर्टर नीरज शिवहरे को कथित रूप से निशाना बनाया गया और उन्हें प्रशासन की ओर से नोटिस दिया गया। बताया जाता है कि नीरज शिवहरे ने अपनी रिपोर्ट में एक महिला की दुर्दशा को बयां किया था, जिसे कोविड-19 के दौरान भोजन की व्यवस्था के लिए अपने घर का सामान बेचना पड़ा था।

इस बारे में अधिकारियों का कहना था कि इससे प्रशासन की छवि धूमिल हुई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में ‘जनसंदेश टाइम्स’ (Jansandesh Times) के रिपोर्टर विजय विनीत और एडिटर-इन-चीफ सुभाष राय को लॉकडाउन के दौरान लोगों की समस्याओं से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

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पत्रकारों पर हमले की बढ़ती घटनाओं का मीडिया संगठनों ने किया कड़ा विरोध, रखी ये मांग

पत्रकारों पर हो रहे हमलों की ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ और ‘जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Attack

रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों पर हो रहे हमले की ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (Journalist Association of India) और ‘जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (Journalists Federation of India) ने कड़े शब्दों में निंदा की है। ताजा मामला अरुणाचल प्रदेश का है, जहां कुछ लोगों ने रिपोर्टिंग के लिए गए एक पत्रकार पर हमला कर दिया था। 

बताया जाता है कि न्यूज वेबसाइट ‘ज्योलू न्यूज’ (Gyoloo News) में कार्यरत पत्रकार होफे दादा (Hofe Dada) पिछले दिनों लेखी गांव में ‘एसएमएस स्मेलटर्स लिमिटेड’ (SMS Smelters Ltd) कंपनी पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से चार लोगों ने उन्हें टोका और उनमें से एक व्यक्ति ने दादा को थप्पड़ मार दिया। आरोप यह भी है कि उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि दादा को वरिष्ठ पत्रकार तोंगम रीना की तरह अंजाम भुगतना पड़ेगा, जिन्हें वर्ष 2012 में गोली मारी गई थी। इस मामले में दादा ने निर्जुली पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने होफे दादा पर हमले के मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपित का नाम नांगराम टापू है और वह ‘एसएमएस स्मेलटर्स लिमिटेड’ कंपनी का सिक्योरिटी ऑफिसर है।

‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (JAI) के सेक्रेट्री जनरल एच.के. सेठी का कहना है, ‘इन दिनों मीडिया पर हमले के साथ-साथ उसे डराने-धमकाने के प्रयास के मामले बढ़ रहे हैं और सरकार को सभी मीडियाकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को जांच में तेजी लानी चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए कि दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई हो सके।

वहीं, ‘जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (Journalists Federation of India) ने भी इस घटना का विरोध किया है। फेडरेशन का कहना है, ‘होफे दादा पर हमले ने साबित कर दिया है कि देश में पत्रकारों को तुरंत बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने और आपराधिक न्याय प्रणाली को ज्यादा जवादेब बनाए जाने की जरूरत है। फेडरेशन विभिन्न निकायों और सरकारों से मांग करता है कि यह सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक न्याय प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए कि पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान किसी तरह का भय न रहे।’

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पत्रकार की मौत पर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जताया गहरा दुख, दिया ये बयान

दिल्ली में सोमवार को हुई युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत पर ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ ने गहरा दुख जताया है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
JAI

दिल्ली में सोमवार को हुई युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत पर ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (Journalist Association of India) ने गहरा दुख जताया है। ‘दिल्ली जनर्लिस्ट एसोसिएशन’ (JAI) की ओर से किए गए ट्वीट में संस्था के सेक्रेट्री जनरल एच.के. सेठी का कहना है, ‘युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत से मैं काफी दुखी व स्तब्ध हूं। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मेरी संवेदनाएं तरुण सिसोदिया के परिवार के साथ हैं। भगवान उनके परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।’

बता दें कि दिल्ली स्थित ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (एम्स) की चौथी मंजिल से कूदकर सोमवार को तरुण सिसोदिया (34) ने आत्महत्या कर ली थी। तरुण दिल्ली में दैनिक भास्कर अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत थे और भजनपुरा इलाके में रहते थे।

यह भी पढ़ें: दिल्ली में कोरोना से मौत के आंकड़ों का 'खुलासा' करने वाले पत्रकार ने मौत को लगाया गले

तरुण पिछले दिनों कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आ गए थे। इस कारण इलाज के लिए उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले तरुण के परिवार में पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं।

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शराब पीकर हंगामा करने से रोका तो पत्रकार का कर दिया ये हाल

रॉड से किए गए हमले में पत्रकार के हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2020
Dhananjay Pratap

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार की रात शराब पीने और उपद्रव करने से रोकने पर पत्रकार पर हमला करने के मामले में तीन आरोपितों को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मोहित, अनमोल और चिराग के रूप में हुई है। बताया जाता है कि मोहित सक्सेना प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है, जबकि अनमोल और चिराग इंजीनियरिंग के छात्र हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल में अयोध्या नगर निवासी धनंजय प्रताप सिंह एक अखबार में कार्यरत हैं। शनिवार की रात इलाके में कुछ लोग शराब पीकर हंगामा कर रहे थे। इस बात का विरोध करने पर उन लोगों ने रॉड से धनंजय प्रताप सिंह पर हमला कर दिया। इस हमले में धनंजय घायल हो गए। उनके हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। अस्पताल में भर्ती धनंजय की हालत स्थिर बनी हुई है।  

बता दें कि कुछ दिनों पूर्व ही शराब के लिए रुपये न देने पर कुछ बदमाशों ने दो छात्रों की हत्या कर दी थी। राज्य में खराब कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए विपक्ष ने सरकार पर तमाम आरोप लगाए थे। अब धनंजय प्रताप सिंह के हमलावरों की गिरफ्तारी होने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है।

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दिल्ली में कोरोना से मौत के आंकड़ों का 'खुलासा' करने वाले पत्रकार ने मौत को लगाया गले

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की चौथी मंजिल से कूदकर सोमवार को एक पत्रकार ने आत्महत्या कर ली।

Last Modified:
Monday, 06 July, 2020
Suicide

दिल्ली स्थित ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (एम्स) की चौथी मंजिल से कूदकर सोमवार को एक पत्रकार ने आत्महत्या कर ली। पत्रकार की पहचान तरुण सिसोदिया के रूप में हुई है। करीब 34 वर्षीय तरुण दिल्ली में दैनिक भास्कर अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत थे। तरुण पिछले दिनों कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आ गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के भजनपुरा निवासी तरुण को 24 जून को एम्स के ट्रॉमा सेंटर की चौथी मंजिल पर स्थित कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया था। सोमवार की दोपहर करीब दो बजे तरुण एम्स की चौथी मंजिल से कूद गए। इस घटना में वह बुरी तरह घायल हो गए। गंभीर हालत में तरुण को आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

बताया जाता है कि मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले तरुण पिछले दिनों कोरोना की चपेट में आ गए थे, जिस कारण वह काफी तनाव में चल रहे थे। करीब तीन साल पहले ही तरुण की शादी हुई थी। उनके दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की उम्र 2 साल है और दूसरे की उम्र मात्र कुछ ही महीने है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह काफी दिनों से अपने घर पर ही थे। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को लेकर ही रिपोर्टिंग की थी। अपनी खबर में तरुण ने बताया था कि दिल्ली सरकार कह रही है कि अब तक 982 मौत कोरोना से हुई है, जबकि 1500 से ज्यादा डेडबॉडी का अंतिम संस्कार श्मशान और कब्रिस्तानों में हो चुका है। तरुण द्वारा पिछले दिनों किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

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