मीडिया में आने वाली हेल्थ की खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा सही है?

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश ने कहा, एक गलत खबर बहुत कुछ बर्बाद कर सकती है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 05 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 05 November, 2019
Media

अखबार के पन्ने पलटते-पलटते कभी न कभी आपकी नजर किसी ऐसी खबर पर रुकी होगी, जो आपको पतला होने के राज, गोरे होने के नुस्खे या फिर मधुमेह को मात देने के तरीके बताती है। अमूमन ऐसी खबरों को हम केवल इसलिए सही मान लेते हैं, क्योंकि वह मीडिया में आई हैं और उनके अनुसार अपने खान-पान में बदलाव कर लेते हैं, लेकिन क्या ये सही है? 

क्या आम जनता तक स्वास्थ्य से जुड़ी खबरें पहुंचाने वाले पत्रकार इतने प्रशिक्षित हैं कि इनकी खबरों पर आंखमूंद कर भरोसा किया जा सकता है? हाल ही में हुए एक ऑनलाइन पोल से यह सवाल खड़ा हो गया है। दिल्ली में बीते दिनों नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन आयोजित किया गया था, जिसमें देश भर के कई हेल्थ जर्नलिस्ट शामिल हुए। इस मौके पर पत्रकारों का ज्ञान परखने के लिए उनसे कुछ सवाल पूछे गए, जिसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। अधिकांश पत्रकारों को कम-कैलोरी वाले स्वीटनर, उसके लाभ और बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं पर उसके प्रभाव के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे समय में जब भारत को डायबीटीज की राजधानी कहा जाता है, हेल्थ जर्नलिस्ट का ये हाल बेहद चिंताजनक है। सोचने वाली बात यह भी है कि जब शहर के पत्रकारों की जानकारी इतनी सीमित है, तो फिर ग्रामीण इलाकों में कार्यरत पत्रकारों की स्थिति क्या होगी?

पिछले कुछ वक्त से स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को मीडिया में काफी तवज्जो दी जाने लगी है। अखबारों में इस पर स्पेशल पेज तैयार किये जाते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रखना अच्छी बात है, लेकिन पाठकों या दर्शकों को जागरूक करने वाले पत्रकारों का जागरूक रहना भी जरुरी है। 

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश का भी यही मानना है। नेशनल हेल्थ राइटर्स कन्वेंशन में बतौर स्पीकर मौजूद रहे सुरेश हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए ट्रेनिंग की वकालत करते आ रहे हैं। उनके पास ऐसे कई उदाहरण हैं, जो यह बताते हैं कि पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग कोर्स कितना आवश्यक है। जैसे कि पिछले साल केरल में कहर बरपाने वाले निपा वायरस को लेकर कहा गया कि ये फलों से फैल रहा है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था। नतीजा ये हुआ कि लोग इतने डर गए कि फल खाने ही बंद कर दिए। इसी तरह, कुछ साल पहले मीडिया ने भूलवश एएफपी या एक्यूट फ्लेसीड पैरालिसिस को पोलियो बता दिया था, क्योंकि दोनों में समान लक्षण थे।

हेल्थ रिपोर्टरों को किस तरह के कोर्स की जरूरत है, इसका खाका सुरेश पहले ही खींच चुके हैं। आईआईएमसी के महानिदेशक रहते वक्त उन्होंने यूनिसेफ, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के सहयोग से देश का पहला पब्लिक हेल्थ कम्युनिकेशन कोर्स डिजाइन करवाया था, जिसे पीजी डिप्लोमा के सभी पाठ्यक्रमों शामिल किया गया। इसके अलावा, उन्होंने यूनिसेफ के साथ मिलकर मीडिया कर्मियों के लिए कई कार्यशालाएं भी आयोजित की। लेकिन जिस तरह के हालात अभी हैं उसे देखते हुए अब हेल्थ जर्नलिस्ट के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य करने की आवश्यकता है, ताकि जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिल सके। 

पत्रकारों के लिए ट्रेनिंग क्यों जरूरी है इसका सुरेश एक खूबसूरत उदाहरण देते हुए कहते हैं, ‘आज कानून की डिग्री के बिना आप सुप्रीम कोर्ट को कवर नहीं कर सकते, इसी तरह से डिफेंस संवाददाता को सेना कनफ्लिक्ट रिपोर्टिंग का कोर्स कराती है, तो फिर पब्लिक हेल्थ पर कोर्स क्यों नहीं हो सकता? स्वास्थ्य बेहद आवश्यक एवं गंभीर मुद्दा है। यदि आपको इसकी समझ नहीं है और आप अपराध की तरह इसकी सनसनीखेज रिपोर्टिंग करेंगे, तो इसका दूरगामी प्रभाव हमारे दर्शकों, पाठकों और श्रोताओं पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में फैले इन्सेफेलाइटिस या जापानी बुखार और बिहार में कई मौतों के लिए जिम्मेदार इन्सेफेलाइटिस में फर्क है, अब यदि आप बिना इस अंतर को समझे रिपोर्ट करेंगे तो उससे सिर्फ घबराहट फैलेगी।’    

 आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक के अनुसार, ‘स्वास्थ्य के क्षेत्र में साक्ष्य आधारित रिपोर्टिंग होनी चाहिए, क्योंकि उसका परिणाम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। गलत रिपोर्टिंग से बीमारियों को लेकर गलतफ़हमी पैदा होती है। डॉक्टरों के लिए सीएमई (कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) प्रोग्राम चलाया जाता है, जिसमें बड़े से बड़े डॉक्टर शामिल होते हैं और नवीनतम डेवलपमेंट के बारे में समझते हैं। यदि आप 70 के दशक की बात करें तो उस दौर में मधुमेह पीड़ित को चावल से दूर रहने की सलाह दी जाती थी, लेकिन आजकल कम या सीमित मात्रा में इसका सेवन कर लिया जाता है। अब यदि डॉक्टर खुद को अपडेट नहीं करते तो वह सही इलाज कैसे बता पाते? 

इसी तरह पत्रकारों को भी अपने आप को अपडेट रखना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। हम टेक्नोलॉजी अपडेट पर तो ध्यान देते हैं, मगर कंटेंट जो हमने सीखा था उसे ही आगे बढ़ाते रहते हैं। जबकि कंटेंट में भी अपडेशन की जरूरत है। मैंने कन्टिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम की तरह कन्टिन्यूइंग मीडिया एजुकेशन प्रोग्राम की पेशकश की है। खासकर छोटे शहरों में, जिला स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों को इसकी बेहद जरूरत है’। केजी सुरेश का मानना है कि जिस तरह से फेक न्यूज को लेकर सरकार, मीडिया हाउस और सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक साथ आये हैं, उसी तरह पब्लिक हेल्थ के मुद्दे पर भी सभी को हाथ मिलाना होगा, तब ही स्वास्थ्य से जुड़ी फर्जी या भ्रामक खबरों पर लगाम लगाई जा सकेगी और पत्रकारों को प्रशिक्षित किया जा सकेगा।   

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वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र पटेल का कोरोना से निधन

पिछले कुछ वर्षों से हिंदुस्तान अखबार के आगरा एडिशन में कार्यरत थे बृजेन्द्र पटेल

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Brajendra Patel

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। तमाम लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं और कई लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। कोरोना के संक्रमण के कारण जान गंवाने वालों में कई पत्रकार भी शामिल हैं। ऐसी ही एक दुखद खबर आगरा से आई है। खबर है कि हिन्दुस्तान के आगरा एडिशन में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र पटेल का कोरोना से निधन हो गया है।

कुछ दिनों पूर्व तबीयत खराब होने पर बृजेन्द्र पटेल ने कोविड-19 की जांच कराई थी, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, इसके बाद उन्हें आगरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में थोड़ा सुधार होने पर एक-दो दिन पूर्व उन्हें एसएन अस्पताल, आगरा में भर्ती कराया गया था, जहां शनिवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

करीब 50 वर्षीय बृजेन्द्र पटेल कानपुर के मूल निवासी थे। लगभग 25 वर्षों से मीडिया में सक्रिय बृजेन्द्र अब तक दैनिक आज, अमर उजाला और सहारा समेत तमाम मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके थे। करीब दो साल से वह हिंदुस्तान, आगरा में अपनी भूमिका निभा रहे थे।  

बृजेन्द्र पटेल के निधन पर डॉ. अनिल दीक्षित, विनोद भारद्वाज, पीपी सिंह, अवधेश माहेश्वरी, ताज प्रेस क्लब के महासचिव उपेंद्र शर्मा और राज कुमार दंडौतिया सहित तमाम पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है। 

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PTI के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Death

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन हो गया। उनके पारिवारिक सदस्यों ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि जमालुद्दीन अहमद का निधन हाल में एक बीमारी की वजह से नई दिल्ली में हुआ।

जमालुद्दीन अहमद 2007-2008 के दौरान मध्यप्रदेश के भोपाल में पीटीआई के ब्यूरो प्रमुख रहे। उन्होंने साथ ही यहां कई समाचार पत्रों के लिए भी काम किया।

वहीं  आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अहमद के निधन पर दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना ईश्वर से की।

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कोरोना ने निगल ली दैनिक जागरण के युवा पत्रकार अंकित शुक्ल की जिंदगी

हिंदी अखबार दैनिक जागरण के लखनऊ एडिशन में कार्यरत युवा पत्रकार अंकित शुक्ल का कोरोना से शुक्रवार की सुबह निधन हो गया।

Last Modified:
Friday, 16 April, 2021
ankitshukla6546

हिंदी अखबार दैनिक जागरण के लखनऊ एडिशन में कार्यरत युवा पत्रकार अंकित शुक्ल का कोरोना से शुक्रवार की सुबह निधन हो गया। वे करीब 35 साल के थे और विधि संवाददाता के तौर पर दैनिक जागरण में कानूनी मामलों को कवर करते थे। 

बताया जाता है कि कुछ दिनों पूर्व तबीयत खराब होने पर अंकित को लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें कोविड-19 के इलाज के लिए बने स्पेशल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। 

जानकारी के मुताबिक, अंकित लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर रहते थे। परिवार में पत्नी व एक बेटी है। पत्नी भी कोविड पॉजिटिव हैं और फिलहाल होम आइसोलेशन में हैं।

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Covid-19 के खिलाफ ‘जंग’ में राजनांदगांव प्रेस क्लब कुछ यूं निभा रहा भागीदारी

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। दिन प्रतिदिन आ रहे आंकड़े बेहद खौफनाक और डराने वाले हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 April, 2021
Last Modified:
Wednesday, 14 April, 2021
Covid Care Centre

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। दिन प्रतिदिन आ रहे आंकड़े बेहद खौफनाक और डराने वाले हैं। हालत यह है कि इस संक्रमण की चपेट में आकर तमाम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, वहीं विभिन्न अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने के लिए बेड की कमी भी बनी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में अपनी भागीदारी निभाते हुए छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव प्रेस क्लब ने अपने परिसर को अस्पताल में तब्दील कर दिया है। छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में बेड की कमी के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है।

30 बेड वाले कोरोना देखभाल केंद्र में तब्दील प्रेस क्लब के इस परिसर में कोविड-19 पीड़ितों का मुफ्त इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा उनके नाश्ते व खाने का भी मुफ्त इंतजाम किया गया है।

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अज्ञात लोगों ने गोली मारकर की पत्रकार की हत्या

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में शनिवार शाम एक पत्रकार की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

Last Modified:
Tuesday, 13 April, 2021
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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में शनिवार शाम एक पत्रकार की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना करक पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के भीतर बथानी खेल क्षेत्र में हुई।

डॉन न्यूज की एक रिपोर्ट में बताया गया कि मृतक की पहचान स्थानीय अखबार Sada-e-lawaghir के संयुक्त संपादक वसीम आलम के रूप में हुई है।

पीड़िता की मां की ओर से दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, आलम पर यह हमला तब हुआ, जब वह अपनी बाइक से घर लौट रहा था। उसे बथानी खेल स्थित एक सरकारी स्कूल के पास निशाना बनाया गया। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

करक पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। इस हमले में संदिग्ध के तौर पर मृतक के पिता का नाम भी सामने आया है।

डॉन के मुताबिक, वसीम आलम के पिता न तो अस्पताल में मौजूद थे और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। अधिकारी ने आगे कहा कि वसीम आलम अपने परिवार से अलग रह रहे थे। हालांकि पत्रकार की मां ने एफआईआर में किसी का नाम नहीं लिया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमें अब तक कोई भी ऐसा सुराग नहीं मिला है जिससे पता चलता है कि पत्रकार की हत्या पत्रकारिता के काम के लिए की गई है।’

बता दें कि दुनिया में पत्रकारों के लिए पाकिस्तान सबसे खतरनाक जगहों में से एक माना जाता है। काउंसिल ऑफ पाकिस्तान न्यूजपेपर एडिटर्स (CPNE) की मीडिया फ्रीडम रिपोर्ट 2020 के मुताबिक, पिछले साल पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कम से कम 10 पत्रकारों की हत्या कर दी गई और कई अन्य को धमकी दी गई, कुछ का अपहरण किया गया, प्रताड़ित किया गया और गिरफ्तार किया गया था।

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तीस साल तक ‘द हिन्दू’ को अपना योगदान देने वाले वयोवृद्ध पत्रकार का निधन

वयोवृद्ध पत्रकार जी.एन. श्रीनिवासन का सोमवार को तमिलनाडु के मायलापुर में उनके बेटे के घर पर निधन हो गया।

Last Modified:
Tuesday, 13 April, 2021
Death

वयोवृद्ध पत्रकार जी.एन. श्रीनिवासन का सोमवार को तमिलनाडु के मायलापुर में उनके बेटे के घर पर निधन हो गया। उन्होंने साल 1953 से 30 साल तक अंग्रेजी दैनिक ‘द हिन्दू’ को अपना योगदान दिया।

दोस्तों के बीच उन्हें जीएनएस के नाम से जाना जाता था। उन्होंने अक्टूबर 2020 में अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश किया।

उनकी बेटी संध्या रवि मोहन ने कहा कि श्रीनिवासन की आयु से संबंधित बीमारियों से मृत्यु हुई है। वे अंत तक अपने काम को लेकर सक्रिय रहे। उन्होंने मीडिया को बताया कि उनके पिताजी ने पूर्व मुख्यमंत्री कामराज, एम. करुणानिधि और एम.जी. रामचंद्रन का साक्षात्कार किया और उनके साथ यात्रा भी की थी। उन्होंने 1976 में स्थापित सरकारिया आयोग की कार्यवाही को भी कवर किया था, जिसे लेकर उनकी संतुलित रिपोर्टिंग की सराहना भी की गई थी।

श्रीनिवासन ने त्रिपलीकेन स्थित ‘द हिन्दू हाई स्कूल’ से अध्ययन किया और पचायप्पा कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

जीएनएस ने अपने करियर की शुरुआत की  ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ से स्टेनोग्राफर के तौर पर शुरू की थी। बाद में वे यहां रिपोर्टर बन गए थे। इसके बाद में उन्होंने ‘द हिन्दू’ जॉइन किया और सबसे पहले 1953 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की चेन्नई यात्रा को कवर किया। ‘द हिन्दू’ से रिटायर होने के बाद, उन्होंने पांच साल तक प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के साथ कानूनी संवाददाता के तौर पर काम किया। जीएनएस ने मद्रास रिपोर्टर्स गिल्ड के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के रूप में भी अपना योगदान दिया है।

 

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नहीं रहे FCB-Ulka समूह के पूर्व MD और CEO अनिल कपूर

तमाम उपलब्धियों के बीच वह अगस्त 2019 में ‘FCB Worldwide’ (Foote, Cone & Belding) बोर्ड, न्यूयॉर्क के मेंबर नियुक्त किए गए थे।

Last Modified:
Monday, 12 April, 2021
Anil Kapoor

DraftFCB+ Ulka के चेयरमैन एमरेटस (Chairman Emeritus) अनिल कपूर का निधन हो गया है। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। वह ‘एफसीबी-उलका’ (FCB-Ulka) ग्रुप के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ (former Managing Director & CEO) थे। तमाम उपलब्धियों के बीच वह अगस्त 2019 में ‘FCB Worldwide’ (Foote, Cone & Belding) बोर्ड, न्यूयॉर्क के मेंबर नियुक्त किए गए थे।

अनिल कपूर को याद करते हुए ‘आईपीजी मीडियाब्रैंड्स’ (IPG Mediabrands) के सीईओ शशि सिन्हा का कहना है, ‘वह मेरे मार्गदर्शक और मित्र से भी बढ़कर थे, जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाने में काफी मदद की। इस दुख की भरपाई नहीं की जा सकती है। दुख की इस घड़ी में मैं पीड़ित परिवार के साथ हूं और भगवान से पीड़ित परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूं।’

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जिंदगी की जंग हार गए पत्रकार शिवनंदन साहू

कौशाम्बी जिले के दारानगर नगर पंचायत के रहने वाले शिवनंदन साहू का शनिवार की शाम निधन हो गया है।

Last Modified:
Monday, 12 April, 2021
Shivnandan Sahu

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में आजतक के पत्रकार शिवनंदन साहू का निधन हो गया है। कौशाम्बी जिले के दारानगर नगर पंचायत के रहने वाले शिवनंदन साहू को बुखार और सांस लेने में दिक्कत के कारण जिला अस्पताल, मंझनपुर में भर्ती करवाया गया था।

यहां उपचार के बाद साहू को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया था, जहां शनिवार शाम को अस्पताल के बाहर ही उनकी मौत हो गई। शिवनंदन साहू के निधन पर तमाम लोगों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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कोरोना से जिंदगी की जंग हार गए वरिष्ठ पत्रकार कपिल दत्ता

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार कपिल दत्ता का शुक्रवार सुबह दिल्ली के एक अस्पताल में कोरोना की वजह से निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 10 April, 2021
Kapil

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार कपिल दत्ता का शुक्रवार सुबह दिल्ली के एक अस्पताल में कोरोना की वजह से निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वह करीब 10 दिन पहले कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गए थे, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के विमहंस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उपचार के दौरान उन्हें निमोनिया हुआ और शुक्रवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। 

मीडिया के उनके सहकर्मियों ने यह जानकारी दी। नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष पंकज पराशर ने कहा कि दत्ता को हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

नोएडा मीडिया क्लब ने एक बयान में कहा, ‘वरिष्ठ पत्रकार और एक अच्छे इंसान कपिल दत्ता सर का दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। आज सुबह उनकी मृत्यु हो गई। भगवान उनके परिवार और दोस्तों को इस नुकसान को सहने की ताकत दें। वह हम में से कई लोगों के लिए पिता तुल्य थे।’

बता दें कि कपिल दत्ता 65 वर्ष के थे और करीब 3 दशकों से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में रिपोर्टिंग कर रहे थे। वह अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के लंबे अरसे से संवाददाता थे और आज कल पीटीआई से जुड़े हुए थे। कपिल दत्ता के निधन से दिल्ली-एनसीआर के पत्रकारों में शोक की लहर है। सोशल मीडिया के जरिए तमाम लोग शोक संदेश जारी कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है-

 

 

 

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राजीव मित्तल

शुक्रवार की देर रात लखनऊ में एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली।

Last Modified:
Saturday, 10 April, 2021
Rajiv Mittal

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राजीव मित्तल का निधन हो गया है। उन्होंने शुक्रवार की देर रात लखनऊ में एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजीव मित्तल को कई वर्षों से अस्थमा की समस्या थी। पत्रकारिता में 35 वर्ष से अधिक समय तक सक्रिय रहे राजीव मित्तल हिंदुस्तान, नई दुनिया, सहारा, जनसत्ता, दैनिक जागरण, अमर उजाला आदि अखबारों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके थे। वह 15 साल से भी ज्यादा समय तक संपादक रहे।

राजीव मित्तल के निधन पर तमाम लोगों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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