न्यूज वेबसाइटों के संपादकों का जमावड़ा, हुई डिजिटल दौर पर बात

डिजिटल क्रांति और हिंदी के अन्तःसंबंधों की पहचान के लिए खालसा में आयोजित हुई दो दिवसीय संगोष्ठी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 01 November, 2019
Last Modified:
Friday, 01 November, 2019
Seminar

डिजिटल क्रांति के कारण वर्तमान समय में हर सुविधा और सेवा केवल एक क्लिक या टच पर उपलब्ध है। इस डिजिटलीकरण से हिंदी भी अछूती नहीं रही है। अब तो गूगल भी हिंदी में बोलता है। डिजिटली हिंदी में काम करना बहुत समय तक मुश्किल था, लेकिन स्थिति ने नई करवट ली है। अब फेसबुक हो या गूगल, वह हिंदी में सामग्री उपलब्ध कराने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। धीरे-धीरे हर चीज के डिजिटल हो जाने कारण जहां एक ओर बहुत सकारात्मक असर देखने को मिला है, वहीं बहुत सारी चुनौतियां भी खड़ी हो गई है।

ऐसे और इससे जुड़े अन्य विषयों पर चर्चा करने के लिए उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय और डिजिटल पेमेंट कंपनी ई-पे के संयुक्त तत्वावधान में डिजिटल क्रांति और हिंदी विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में माइक्रोसॉफ्ट के लोकलाइजेशन एंड एक्सेसबिलिटी के निदेशक बालेंदु दाधीच ने हिंदी एवं भारतीय भाषाओँ पर डिजिटल क्रांति के सकारात्मक प्रभावों की चर्चा करते हुए चुनौतियों पर भी चर्चा की।

उन्होंने कहा कि अब भारतीय भाषाओँ को केवल पश्चिमी देशों की प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता बनकर ही नहीं रहना है, बल्कि अब तकनीक प्रदाता के रूप में भी कार्य करना होगा, तभी भारतीय भाषाओँ का और भारत का विकास होगाI थावे विद्यापीठ बिहार के कुलाधिपति प्रो. के.एन. तिवारी ने नयी प्रौद्योगिकी से उपजे प्रश्नों पर चिंता जताते हुए कहा कि अब चिंतन एवं विचार के लिए समय कम बच रहा हैI अध्यक्षीय भाषण श्री गुरू तेगबहादुर खालसा कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष सरदार तरलोचन सिंह ने दिया। उन्होंने हिंदी के साथ भारतीय भाषाओँ के विकास की बात को उठाते हुए कहा कि सभी भारतीय भाषाओँ का विकास होना चाहिए, उन्हें आपस में ही विरोध नहीं करना चाहिएI

श्री गुरु तेगबहादुर खालसा कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जसविंदर सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए डिजिटल दुनिया के विस्तार के विभिन्न  आयामों से परिचित करायाI  उन्होंने ‘स्वयं’ पोर्टल का जिक्र करते हुए ई-लर्निंग के महत्त्व को स्थापित कियाI समापन वक्तव्य देते हुए संगोष्ठी संयोजिका डॉ. स्मिता मिश्र ने कहा कि पहले हिंदी एवं भारतीय भाषा भाषी को कंप्यूटर पर काम करने के लिए मशक्कत करनी पड़ती थी, पर अब भारत के बड़े बाजार के मद्देनजर गूगल अलेक्सा को भी हिंदी बोलनी पड़ रही है ।

इसके बाद प्रथम तकनीकी सत्र विषय ‘डिजिटल यूनिकोडिंग: हिंदी चली नई चाल’ पर आधारित रहाI बालेन्दु दाधीच, डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा, प्रो. संजीव भानावत एवं अलका सिन्हा ने शिक्षा, कॉरपोरेट एवं भाषा के स्तर पर आये बदलावों की चर्चा की। दूसरे सत्र में सोशल मीडिया में हिंदी: लाइक, व्यू और फॉरवर्ड विषय पर चर्चा करने के लिए प्रो. कुमुद शर्मा, प्रशांत उमराव,प्रो. अरुण भगत और आशीष कुमार अंशु मौजूद रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कुमुद शर्मा ने कहा, ‘सोशल मीडिया में भाषा के लिए कोई नियम कायदा नहीं हैं। इस कारण कई प्रकार की समस्याएं भी आ रही हैं। अभिव्यक्ति यंत्र की कैद में आ गई है। उसका नियंत्रण किसी और के हाथ में हैं।'

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के डीन एवं अध्यक्ष प्रोफेसर अरुण भगत ने सोशल मीडिया की भाषा की ओर ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि सोशल मीडिया हमारी ताकत हो सकती है। इसके लिए हमें इंटरनेट पर हिंदी में शुद्ध जानकारी पहुंचाना आवश्यक है। अधिवक्ता एवं सोशल मीडिया एक्टिविस्ट प्रशांत उमराव ने लाइक, व्यू और फॉरवर्ड के लिए अपनी बौद्धिकता का प्रयोग करने की सलाह दी। इस माध्यम की ताकत पहचान कर उसे जुड़े कानूनों  की  भी जानकारी रखने  की बात कही। पत्रकार आशीष कुमार अंशु ने फेक न्यूज का सन्दर्भ लेते हुए सोशल मीडिया के प्रयोग में सावधानी बरतने की बात कही। सामानांतर सत्र में दूरदर्शन के पूर्व कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अमरनाथ अमर ने रेडियो, टेलिविजन में डिजिटल क्रांति से आये बदलावों को रेखांकित किया I

दूसरे दिन का प्रथम सत्र डिजिटल मीडिया में भाषाई परिदृश्य’ पर केन्द्रित था। एनडीटीवी के कार्यकारी संपादक प्रियदर्शन ने कहा कि हर शब्द के गहरे अर्थ होते हैं, इस लिए शब्दों का सही प्रयोग आवश्यक है। भाषा अनुभव से विपन्न होती जा रही है, इसलिए भाषा में अनुभव का होना आवश्यक है। भाषा बदल रही है एक वक्त पर हम नहीं जानते थे कि सेल्फी क्या है, पर आज का बच्चा भी जानता है सेल्फी क्या है? शब्दों के नए प्रयोग पर बात करते हुए प्रसिद्ध सिने विश्लेषक एवं इकनॉमिक टाइम्स में भाषा प्रभारी दिनेश श्रीनेत ने कहा कि कूल और गांधीगिरी जैसे शब्द पहले नहीं थे, जो अब भाषा का अभिन्न अंग बनते जा रहे हैं। डिजिटल माध्यम दूर होते हुए भी दो तरफा संवाद है, जो लेखक और पाठक को जोड़ने का काम करता है। पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट पर महिला लेखिकाओं की संख्या बढ़ी है जो डिजिटल क्रान्ति की ही देन हैं।

अमर उजाला.कॉम के सम्पादक जयदीप कर्णिक ने कहा कि इंटरनेट ने जानकारी, सूचना और ज्ञान को जोड़ने का काम किया है। उनका कहना था कि भाषिक प्रयोग यदि बाजार से न आकर व्यक्ति विशेष के भीतर से उपजे तो भाषा का स्तर उत्तम होता है। उन्होंने हिंदी ही नहीं अन्य भारतीय भाषाओं को भी इंगित किया और बताया कि हिंदी के बाद इंटरनेट पर तमिल दूसरी भाषा है और मराठी तीसरी, जिसमें अधिक कंटेंट लिखा जा रहा है। सत्र का मॉडरेशन करते हुए डॉ. राजकुमार ने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर उकसाने वाली भाषा का प्रयोग अधिक हो रहा है।

विशेष सत्र के रूप में डिजिटल क्रान्ति और गुरुनानक देव के संदेशों का प्रसार शीर्षक से बात शुरू हुई, इसमें आजतक के न्यूज एंकर सईद अंसारी ने कहा कि गुरु नानक देव जी का ‘एक ओंकार’ और ‘नाम जपना’ सबसे बेहतर शिक्षाएं हैं। युवाओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है। डिजिटल प्लेटफार्म से भी नौकरियां प्राप्त की जा सकती हैं। पत्रकार के धर्म पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि पत्रकार को सच्चाई से रूबरू कराने वाला होना चाहिए। गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं पर बात करते हुए प्रसिद्ध रंगकर्मी रवि तनेजा ने कहा कि बाबा नानक के विचारों की आज सबसे ज्यादा जरूरत है, क्योंकि वे कहते हैं सबका भला हो। उनका कहना था कि हम तकनीक के गुलाम तो हैं, पर डिजिटल क्रान्ति ने हमें निर्भय भी बनाया है। अध्यक्षीय सम्बोधन में डॉ. जसविंदर सिंह ने कहा कि डिजिटल प्लेटफार्मों का सही प्रयोग करना आवश्यक है। इसके माध्यम से गुरु नानक जी के सन्देशों का प्रचार करना सरल हुआ है। पंजाबी साहित्यकार डॉ. हरबंस सिंह ने कहा कि बाबा नानक वे व्यक्ति थे, जिनमें  अपनी बात रखने का साहस था ।

दिन का दूसरे एवं अंतिम तकनीकी सत्र ‘डिजिटल दौर का हिंदी सिनेमा:हिंदी जरूरी या मजबूरी’ पर केन्द्रित था, जिसके चर्चाकर रहे ‘न्यूज18 डिजिटल’ के सम्पादक  दया शंकर मिश्र,  इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ.सर्वेशदत्त त्रिपाठी और ‘इंडिया टुडे’ के संपादकI  सत्र का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं मीडियाविद डॉ.प्रकाश उप्रैती ने किया। सिनेमा और डिजिटल दौर के संदर्भ में बात करते हुए शिवकेश मिश्र ने कहा डिजिटल दौर ने सिनेमा में खलबली मचा दी है। साथ ही साथ इसने सिनेमा और लोगों के बीच एक गहरी खाई को पाट दिया है और सिनेमा को आसान बनाया है। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ. सर्वेशदत्त त्रिपाठी ने बताया डिजिटलाइजेशन किसी भी माध्यम के लिए खतरा नहीं है। बल्कि यह उसे तकनीकी रूप से समृद्ध कर रहा है। डिजिटल दौर का सिनेमा हमारे सिनेमा को समृद्ध भी करता है और कमजोर भीI  दयाशंकर मिश्र ने डिजिटल से पूर्व पूर्व और डिजिटल से बाद सिनेमा के बादलों को रेखांकित करते हुए कहा कि क्लासिक सिनेमा में भी अभद्रताएं थीं। नायिक को लुभाने के लिए  नायक द्वारा उसे छेड़ा जाना आवश्यक था। नया सिनेमा ज्यादा बोल्ड है, उसमें पारंपरिक फ़िल्टर कमजोर हो गए हैं। वर्तमान समाज बदल रहा है इस लिए सिनमा को भी बदलना तो होगा ही। बदलते दौर में सिनेमा की नई बुलंदियों को छूने में डिजिटल दौर कारगर होगा। डॉ. पी अरुण ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए हिंदी सिनेमा एवं अन्य भारतीय भाषाओँ के सिनेमा के पारस्परिक संबंधों का उल्लेख किया I

संगोष्ठी के समापन सत्र के मुख्य अतिथि इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय(IGNOU) के उप-कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने डिजिटल तकनीक के आगमन से ई-लर्निंग एवं ई-कंटेंट के महत्त्व को शिक्षा के सन्दर्भ में स्थापित कियाI उन्होंने शिक्षा में डिजिटल क्रांति से आये सकारात्मक बदलावों की चर्चा करते हुए कहा कि इग्नू में प्रत्येक वर्ष लगभग दो लाख विद्यार्थी प्रवेश लेते हैंI इतनी बड़ी संख्या को कंटेंट एवं अन्य सूचना उपलब्ध करना डिजिटल तकनीक के माध्यम से संभव हो पाया है I विशेष अतिथि प्रोफेसर संजीव भानावत ने अपने विशेष वक्तव्य में इस आशंका से इनकार किया कि ई-लर्निंग के दौर में शिक्षक का महत्त्व समाप्त हो जायेगाI  कार्यक्रम का संचालन करते हुए संगोष्ठी सह–संयोजक डॉ. अमरेन्द्र पाण्डेय ने शिक्षा, साहित्य एवं सूचना क्रांति के अंत:संबंधों को रेखांकित किया I कॉलेज के पूर्व विद्वत परिषद् के सदस्य डॉ नचिकेता सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया I

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जर्नलिस्ट सिद्दीकी कप्पन को SC ने मां से बातचीत करने की दी इजाजत

हाथरस जाते वक्त गिरफ्तार किए गए जर्नलिस्ट सिद्दीकी कप्पन को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मां से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करने की इजाजत दे दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 23 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 23 January, 2021
Samachar4media

हाथरस जाते वक्त गिरफ्तार किए गए जर्नलिस्ट सिद्दीकी कप्पन को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मां से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करने की इजाजत दे दी है। वहीं कप्पन की रिहाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई अगले हफ्ते के लिए टाल दी है।

केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पेश हुए और उन्होंने कहा कि कप्पन की मां की हालत बहुत खराब है और वह बेहोशी की हालत में अपने बेटे से बात करना चाहती हैं, उन्हें देखना चाहती हैं, जिसके चलते इस संबंध में अर्जी लगाई गई है।  कृपया कप्पन को उनकी मां से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत करने दी जाए।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बोबडे की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। जब मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर सहमति जताई कि कप्पन की मां को उनसे बात करने दी जाए।

इस दौरान यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि इसे उत्तर प्रदेश सरकार पर छोड़ दिया जाए। अथॉरिटी इस मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सहूलियत की संभावना को देखेगी।

वहीं, इससे पहले यूपी सरकार ने कप्पन की जमानत का विरोध किया और कहा कि कप्पन पर पीएफआई के मेंबर होने का आरोप है। हाथरस कांड के समय शांति भंग करने का आरोप है।
 

केरल बेस्ड जर्नलिस्ट कप्पन को तब गिरफ्तार किया गया था, तब वे हाथरस जा रहे थे जहां एक युवती का गैंग रेप करने के बाद हत्या कर दी गई थी। PFI से संबध रखने के आरोप में कप्पन को हाथरस कांड के बाद यहां जाते समय गिरफ्तार किया गया था।

कप्पन की गिरफ्तारी के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में 2 दिसंबर को यूपी सरकार ने कहा था कि मामले की छानबीन के दौरान कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हाथरस में दलित के गैंग रेप और मौत के बाद जर्नलिस्ट हाथरस जा रहा था तभी यूपी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। यूपी सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि कप्पन जिस अखबार में काम करने की बात कर रहे हैं वह दो साल पहले ही बंद हो चुका है। योगी सरकार ने एफिडेविट में कहा है कि पत्रकार संघ कप्पन की असलियत छिपाने की कोशिश कर रहा है।

   

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आरईसी ने किया राजभाषा गोष्ठी का आयोजन

निगम कार्यालय नई दिल्ली में 21 जनवरी 2021 को आयोजित गोष्ठी में राजभाषा के अधिकाधिक प्रयोग पर दिया गया बल

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 23 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 23 January, 2021
Seminar

बिजली मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम ‘आरईसी लिमिटेड’ (REC Limited) द्वारा 21 जनवरी 2021 को निगम कार्यालय, नई दिल्ली में राजभाषा गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. सुमीत जैरथ, सचिव, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार थे।

इस मौके पर डॉ. सुमीत जैरथ ने कहा कि राजभाषा के प्रति अनुराग और लगाव राष्ट्र प्रेम का ही एक रूप है। उन्होंने राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए 12 ‘प्र’ यानी प्रेरणा, प्रोत्साहन, प्रेम, पुरस्कार, प्रशिक्षण, प्रयोग, प्रचार, प्रसार, प्रबंधन, प्रमोशन, प्रतिबद्धता और प्रयास की भूमिका पर चर्चा करते हुए कार्यालय में राजभाषा के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। इस मौके पर उन्होंने आरईसी द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।

गोष्ठी में बीएल मीणा, निदेशक (सेवा), राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय), आरईसी के सीएमडी संजय मल्होत्रा, निदेशक (तकनीकी) संजीव कुमार गुप्ता, निदेशक (वित्त) अजय चौधरी, मुख्य सतर्कता अधिकारी श्रीमती सुनीता सिंह एवं मुख्यालय के सभी विभागाध्यक्ष भी शामिल हुए। साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के प्रमुख भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे। इस मौके पर आरईसी में किए जा रहे राजभाषा कार्यों की संक्षिप्त प्रस्तुति भी दी गई।

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हादसे ने छीन ली एक पत्रकार की जिंदगी, दूसरा लड़ रहा जिंदगी की जंग

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में गुरुवार रात हुई सड़क दुर्घटना में एक पत्रकार की मौत हो गई है जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 23 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 23 January, 2021
Accident

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में गुरुवार रात हुई सड़क दुर्घटना में एक पत्रकार की मौत हो गई है जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि मृतक पत्रकार का नाम सोहम मल्लिक है, जबकि मयूख रंजन घोष नाम का एक और संवाददाता गंभीर रूप से घायल है।

पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि गुरुवार रात सोहम मलिक और मयूखरंजन घोष दोनों ही एक ही बाइक पर लौट रहे थे, तभी लॉर्ड्स मोड़ पर यह दुर्घटना घटी। अंदेशा लगाया जा रहा है कि बाइक फिसली और वह सड़क के किनारे एक पेड़ से टकरा गई, जिसकी वजह से ये हादसा हुआ। वहीं इस बात की जांच-पड़ताल भी की जा रही है कि कहीं किसी वाहन ने पीछे से कोई टक्कर तो नहीं मार दी।

फिलहाल दोनों को खून से लथपथ हालत में एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने सोहम को मृत घोषित कर दिया और मयूख रंजन को आईसीयू में भर्ती किया गया है। उसके सिर पर गंभीर चोट लगी है। मयूख की एक आंख बुरी तरह से जख्मी हो गई है और वह कोमा में हैं। उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। घटना रात 3:00 से 4:00 के बीच की है।

दोनों की नई नई नौकरी लगी थी और वे एक नए न्यूज चैनल के लिए काम करते थे। दोनों लंबे समय से पत्रकारिता करते रहे हैं। सोहम की मौत से कोलकाता के मीडिया जगत में शोक की लहर पसरी हुई है।

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डॉ. दिव्या प्रकाश की स्मृति में मुफ्त चिकित्सा शिविर लगाया

तीन दिवसीय इस शिविर में पित्ताशय की पथरी एवं गर्भाशय से संबंधित ऑपरेशन किए गए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 21 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 21 January, 2021
Medical Camp

आगरा की जानी-मानी महिला रोग विशेषज्ञ एवं कोरोना वॉरियर डॉ. (स्वर्गीय) दिव्या प्रकाश की स्मृति में पित्ताशय की पथरी एवं गर्भाशय से संबंधित ऑपरेशन के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।

आगरा में गुरु का ताल, सिकंदरा स्थित नवनिर्मित शांति वेद चिकित्सा संस्थान में 14 जनवरी 2021 से आयोजित तीन दिवसीय इस चिकित्सीय शिविर में सौ से अधिक ऑपरेशन करने की व्यवस्था की गई और रोजाना लगभग 30 ऑपरेशन किए गए।

डॉ. दिव्या प्रकाश के परिजनों के अनुसार,‘उनका (डॉ. दिव्या का) सपना था कि सामान्य जनता के हित से जुड़ा हुआ कोई नवीन सेवा कार्य किया जाए, जो आगरा एवं समीपवर्ती इलाकों में चिकित्सा के क्षेत्र में एक उदाहरण बने। दुर्भाग्य से कोविड-19 से चार माह तक संघर्ष करते हुए उनका स्वर्गवास हो गया और डॉ. दिव्या का यह स्वप्न उनके जीवन काल में अपूर्ण रह गया।’

डॉ. दिव्या के परिजनों ने उनके अधूरे स्वप्न को पूरा करते हुए इस शिविर को उन जरूरतमंदों को समर्पित किया है, जिन्हें इस शल्य चिकित्सा की अत्यन्त आवश्यकता थी।

लॉयन्स क्लब ऑफ आगरा विशाल के सौजन्य से आयोजित इस शिविर में डॉ. अजय प्रकाश, डॉ. संजय प्रकाश, डॉ. मधु प्रकाश, डॉ. श्वेतांक प्रकाश, डॉ. ब्लॉसम प्रकाश, डॉ. स्वाती प्रकाश, डॉ. शिवांक प्रकाश, डॉ. बीबी बंसल, डॉ. मिहिर गुप्ता, डॉ.एससी साहनी, नर्सिंग स्टाफ और समस्त शांति वेद परिवार का विशेष योगदान रहा।

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अखबार के मालिक पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता की मौत

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नींद की दवा का ओवरडोज लेने से एक युवती की बुधवार रात को एक अस्पताल में मौत हो गई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 21 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 21 January, 2021
Death

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नींद की दवा का ओवरडोज लेने से एक युवती की बुधवार रात को एक अस्पताल में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि यह वही पीड़ित युवती है, जिसने अखबार के एक मालिक पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।

एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया कि एक किशोरी ने भोपाल में स्थित सरकारी बालिका आश्रय गृह में नींद की गोलियां खा ली थीं, इसके बाद उसे सोमवार रात को गंभीर हालत में सरकारी हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

वहीं, हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आईडी चौरसिया ने बताया कि किशोरी को सोमवार रात को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, बुधवार रात को उसकी मौत हो गई। जिला प्रशासन ने बुधवार को ही इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

बता दें कि पिछले साल जुलाई में स्थानीय अखबार चलाने वाले 68 वर्षीय प्यारे मियां के खिलाफ पांच नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस महानिरीक्षक (IG) उपेन्द्र जैन ने बताया कि जिस लड़की ने सोमवार रात को नींद की गोलियां खाई थीं, वह इन पांच पीड़ित बालिकाओं में से एक थी। उन्होंने बताया कि पीड़ित लड़कियों को सुरक्षा के मद्देनजर सरकारी बालिका आश्रय गृह में रखा गया था, इनमें से दो बालिकाओं की तबीयत सोमवार रात को बिगड़ गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि इनमें से एक लड़की की हालत बेहद नाज़ुक होने पर सोमवार देर रात को ही उसे हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया था। आईजी ने बताया कि घटना के बाद जिलाधिकारी ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही असली तस्वीर सामने आएगी।

इस बीच, कमला नगर थाना प्रभारी विजय सिसोदिया ने गुरुवार को बताया कि अत्यधिक मात्रा में नींद की गोलियों का सेवन करने वाली दुष्कर्म पीड़िता का हमीदिया अस्पताल में उपचार किया जा रहा था, लेकिन बुधवार रात को अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जा रहा है कि आश्रय गृह में उसे नींद की गोलियां कैसे मिलीं।

गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में भोपाल के रातीबड़ इलाके में पांच लड़कियों के नशे की हालत में घूमने के बाद प्यारे मियां और उसकी साथी स्वीटी विश्वकर्मा (21) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. मियां पर आरोप है कि उसने नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया। पुलिस ने बाद में उसे जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया था।

 

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दूरदर्शन के वरिष्ठ अधिकारी की मौत

दूरदर्शन के एक वरिष्ठ अधिकारी ईटानगर स्थित अपने आधिकारिक आवास में मंगलवार 19 जनवरी को मृत पाए गए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 21 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 21 January, 2021
KMorang

दूरदर्शन के एक वरिष्ठ अधिकारी ईटानगर स्थित अपने आधिकारिक आवास में मंगलवार 19 जनवरी को मृत पाए गए। वह 50 साल के थे।

दूरदर्शन के रीजनल न्यूज चैनल ‘डीडी न्यूज अरुणाचल’ ने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी कि ईटानगर स्थित दूरदर्शन केंद्र में निदेशक (इंजीनियरिंग) और कार्यालय प्रमुख के. मोरंग की मृत्यु हो गई। मोरंग, 1995 में भारतीय प्रसारण इंजीनियरिंग सेवा में शामिल हुए थे और वह पिछले चार साल से स्थानीय दूरदर्शन केंद्र के प्रमुख थे।

बुधवार को मोरंग के शव का पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनके मौत का सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है। वैसे आशंका जताई जा रही है कि मोरंग की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई होगी।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अधिकारी की मौत के समय उनका परिवार साथ नहीं था। मोरंग ‘डीडी अरुणप्रभा’ चैनल की लॉन्चिंग टीम के मुख्य सदस्य थे।  

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार गुलाम नबी शैद

करीब 70 वर्षीय शैद पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 January, 2021
Ghulam Nabi

जम्मू-कश्मीर के जाने-माने पत्रकार और उर्दू अखबार ‘वादी की आवाज’ (Wadi ki Awaz) के मालिक और संपादक गुलाम नबी शैद (Ghulam Nabi Shaida) का निधन हो गया है। मंगलवार की रात उन्होंने श्रीनगर स्थित अपने आवास पर आखिरी सांस ली।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 70 वर्षीय शैद पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके परिवार में एक बेटी है। शैद की पत्नी का वर्ष 2015 में निधन हो गया था।

शैद के निधन पर मीडिया के साथ ही तमाम सामाजिक व राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। ‘कश्मीर एडिटर्स गिल्ड’ (KEG) ने शैद के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शैद को हमेशा उनमें काम और विनम्र स्वभाव के लिए जाना जाएगा।

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फेक कंटेंट को पहचानें और इसे बेनकाब करें: प्रो. केजी सुरेश

एमसीयू और यूनिसेफ द्वारा आयोजित ‘जन-स्वास्थ्य और तथ्यपरक पत्रकारिता’ पर आधारित कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने विद्यार्थियों को बेहतर पत्रकारिता के गुर सिखाए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 January, 2021
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‘माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय’ (एमसीयू) और यूनिसेफ द्वारा आयोजित ‘जन-स्वास्थ्य और तथ्यपरक पत्रकारिता’ पर आधारित कार्यशाला में  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने विद्यार्थियों को बेहतर पत्रकारिता के गुर सिखाए। इस मौके पर प्रो. केजी सुरेश का कहना था, ‘स्वास्थ्य पत्रकारिता न केवल सामाजिक दृष्टिकोण से जरूरी है, बल्कि पत्रकारिता का विद्यार्थी होने के नाते ये आपके करियर के लिए भी आवश्यक है। इसलिए आपका कर्त्तव्य बनता है कि आप फेक कंटेंट को बेनकाब करें।‘

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे प्रो. सुरेश ने कहा कि आजकल कोरोना को लेकर बहुत फेक कंटेंट आ रहा है, जिससे सनसनी फैल रही है। इसलिए ऐसे मामलों में सरकारी पक्ष जानना बहुत जरूरी है। बिना तथ्यों को जांचे-परखे कभी भी खबरों को प्रकाशित/प्रसारित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी पक्ष के साथ ही खबरों को प्रकाशित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नकारात्मक खबरें छापने का दूरगामी परिणाम होता है, इसलिए हमें सकारात्मक खबरें छापना चाहिए। कोरोनाकाल में अफवाहें, अटकलें फैलाईं जा रही हैं, जो तेजी से बढ़ती जा रही हैं, पत्रकारिता के विद्यार्थी होने के नाते आपको साक्ष्य आधारित पत्रकारिता करते हुए अपनी जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता की सराहना करते हुए प्रो. सुरेश ने कहा कि आजकल सूचना के लिए लोगों की भूख बढ़ गई है, अत: हमारा कर्तव्य बनता है कि हम पाठकों तक विश्वसनीय खबरों को पहुंचाएं। प्रो.सुरेश ने कहा कि पत्रकारिता का मूल कार्य सिर्फ सूचित करना, शिक्षित करना ही नहीं है, बल्कि लोगों को प्रेरित करना भी है। हेल्थ रिपोर्टिंग का महत्व बताते हुए प्रो. सुरेश ने कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता को जिले स्तर तक ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने 29 जनवरी को पत्रकारों के लिए भी स्वास्थ्य पत्रकारिता पर कार्यशाला का आयोजन किए जाने की बात कही।

कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में वरिष्ठ पत्रकार संजय देव ने कहा कि कोरोनाकाल में खबरों की बाढ़ सी आ गई है लेकिन हमें तथ्यों की जांच-पड़ताल करके ही सही सूचनाओं को लोगों तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आशंकाएं एवं समाधान हर जगह से अलग-अलग आ रही हैं, हमें गंभीरता से इन्हें समझते हुए पत्रकारिता करनी चाहिए। हमारा फर्ज बनता है कि हम अफवाहों, अटकलों एवं भ्रमों का निवारण करें और समाज में एक सकारात्मक माहौल का निर्माण करें। स्वास्थ्य पत्रकारिता में डर का वातावरण न बनाने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि हमें तथ्यों के दायरे में रहते हुए समाज में उपयोगी जानकारियों को पहुंचाना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि आप स्वास्थ्य पत्रकारिता करना चाहते हैं इसमें विशेषज्ञता का होना बहुत आवश्यक है। आपको इससे संबंधित कुछ जरूरी जानकारियों का पता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच-परख, तथ्य, कौशल एक स्वास्थ्य पत्रकार के पास होना जरूरी है। स्वास्थ्य पत्रकारिता बिना सिद्धांतों के नहीं करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें वस्तुनिष्ठता, स्पष्टवादिता एवं परिशुद्धता का होना बहुत आवश्यक है। स्वास्थ्य पत्रकारिता को जिम्मेदारी की पत्रकारिता बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे समाज से हमदर्दी रखें, उनसे दूरी न बनाएं।

वरिष्ठ पत्रकार संजय अभिज्ञान ने कहा कि हेल्थ रिपोर्टिंग में खतरा बहुत है, क्योंकि फेक न्यूज से किसी के जीवन को बचाने की जगह उसे मौत के मुंह में भी पहुंचाया जा सकता है। अत: पत्रकारिता के विद्यार्थियों को इससे बचते हुए तथ्यपरक पत्रकारिता करनी चाहिए, पाठकों तक विश्वसनीय एवं सही सूचनाओं को पहुंचाना चाहिए। स्वास्थ्य पत्रकारिता का काम लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज हित में कलम उठाकर स्वास्थ्य पत्रकारिता करने की बात कही।

कार्यशाला का समन्वय एवं संचालन वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक लाल बहादुर ओझा ने किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) अविनाश वाजपेयी, यूनिवर्सिटी कैंपस मेंटर डॉ. मणिकंठन नायर, प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर अंकित पांडे, विश्वविद्यालय के जनसंचार, प्रबंधन एवं कंप्यूटर एवं अनुप्रयोग विभाग के साथ ही नोएडा, खंडवा एवं रीवा परिसर के विद्यार्थी भी ऑनलाइन उपस्थित थे।

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राजद्रोह और UAPA के तहत गिरफ्तार दो संपादकों को मिली जमानत, ये है मामला

मणिपुर पुलिस ने स्थानीय न्यूज पोर्टल के दो संपादकों को रविवार की सुबह हिरासत में लिया और सोमवार को उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 January, 2021
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मणिपुर पुलिस ने स्थानीय न्यूज पोर्टल के दो संपादकों को रविवार की सुबह हिरासत में लिया और सोमवार को उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया। दरअसल पुलिस ने इन दोनों पत्रकारों को राज्य के विद्रोही आंदोलन से जुड़े एक लेख के प्रकाशन को लेकर गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार किए गए दोनों संपादकों की पहचान ‘द फ्रंटियर मणिपुर’ के कार्यकारी संपादक पोजेल चोबा और प्रधान संपादक धीरेन सदोकपम के रूप में की गई। दोनों को सोमवार की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे जमानत पर छोड़ दिया गया। इस दौरान दोनों पत्रकारों ने पुलिस को लिखित में दिया है कि वे ऐसी गलती दोबारा नहीं करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स ऐसी खबर सामने आई कि इन दोनों पत्रकारों के खिलाफ IPC की धारा 124A (देशद्रोह), 120B (आपराधिक साजिश), 505B (राज्य के खिलाफ अपराध को प्रेरित करना), धारा 34 (सामान्य इरादे) और आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने के खिलाफ 'अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट' यानी UAPA की धारा 39 लगाई गई, लेकिन अब पुलिस ने अपनी एफआईआर में ऐसी कोई भी धारा नहीं लगाने की बात कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले को देख रहे इम्फाल वेस्ट के पुलिस अधीक्षक के. मेघाचंद्र सिंह के मुताबिक, एक गलत लेख प्रकाशित करने के मामले में पुलिस ने दो पत्रकारों को हिरासत में लिया था, लेकिन अब दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। इन पत्रकारों का 'द फ्रंटियर मणिपुर' नाम से एक फेसबुक वेब पेज है, जो पंजीकृत नहीं है और न ही इसका यहां कोई ऑफिस है। इन लोगों ने किसी अज्ञात व्यक्ति से वॉट्सऐप पर प्राप्त एक आर्टिकल को अपने वेब पोर्टल पर योगदानकर्ता के किसी भी प्रमाणीकरण के बिना प्रकाशित कर दिया। उस लेख में मणिपुर के विद्रोही संगठन से जुड़ी कई सारी गलत जानकारियां थीं। लेख में ऐसा कहा गया कि मणिपुर में विद्रोही आंदोलन भयावह हो रहा है और इस तरहसे लोगों में एक गलत संदेश गया, क्योंकि ऐसे बहुत से विद्रोही हैं जो मुख्यधारा में लौटे हैं।

वहीं बाद में ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से भी मुलाक़ात की और उनसे इस मामले में कुछ सहानुभूति दिखाने की अपील की, चूंकि ऐसी गलती पहली दफा हुई है और सभी बातों पर दिए गए क्लेरिफिकेशन को ध्यान में रखते हुए उन्हें रिहा किया गया है।  

  

 

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महिला पत्रकार ने फिल्म निर्माता-एक्टर पर लगाया ये आरोप, दर्ज कराई शिकायत

महिला पत्रकार ने इसे लेकर महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 19 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 19 January, 2021
FIR

असम में एक महिला पत्रकार ने एक फिल्म निर्माता और एक्टर के खिलाफ मारपीट करने और अपशब्द कहने का आरोप लगाया है और इस मामले में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई है। एक स्थानीय दैनिक से जुड़ी पत्रकार ने रविवार को एक मीडिया एजेंसी को बताया कि फिल्म निर्माता उमाशंकर झा और एक्टर उत्तम सिंह ने अपनी हिंदी फिल्म ‘सेवन सिस्टर्स एंड वन ब्रदर’ की घोषणा के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें वे हिस्सा लेने पहुंची हुईं थीं।

महिला ने दावा किया कि जब उन्होंने फिल्म से संबंधित कुछ सवाल पूछे, तो निर्माता ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें अपशब्द भी कहे। महिला ने कहा कि कुछ समय बाद जब वह और एक फोटो-पत्रकार उनके पास गए औऱ उनके इस व्यवहार पर सवाल उठाया, तो उन्होंने साथी पत्रकार का हाथ खींच लिया और उसके साथ मारपीट की।

महिला पत्रकार ने इसे लेकर महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वहीं, गुवाहाटी प्रेस क्लब (जीपीसी) ने एक बयान में घटना की निंदा की और पुलिस से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। जीपीसी के अध्यक्ष मनोज नाथ और महासचिव संजॉय रे ने कहा कि क्लब अपनी जांच में पुलिस को मदद देगा।

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