न्यू मीडिया के हिसाब से हो मीडिया पाठ्यक्रमों का निर्माण : एरिक फॉल्ट

'न्यू मीडिया कम्युनिकेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। मल्टीमीडिया, ग्राफिक्स, एनिमेशन, प्रिंटिंग और पैकेजिंग आज मीडिया कंटेंट को बदल रहे हैं।

Last Modified:
Tuesday, 10 August, 2021
IIMC54540

'न्यू मीडिया कम्युनिकेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। मल्टीमीडिया, ग्राफिक्स, एनिमेशन, प्रिंटिंग और पैकेजिंग आज मीडिया कंटेंट को बदल रहे हैं। मीडिया शिक्षण संस्थानों को अब न्यू मीडिया के सभी तत्वों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए।' यह विचार यूनेस्को के नई दिल्ली कार्यालय के निदेशक एरिक फॉल्ट ने वर्ल्ड जर्नलिज्म एजुकेशन काउंसिल, भारतीय जन संचार संस्थान और यूनेस्को द्वारा 'भारत में पत्रकारिता शिक्षा : मुद्दे और चुनौतियां' विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के शुभारंभ सत्र में व्यक्त किए। आयोजन में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, अपर महानिदेशक के. सतीश नंबूदिरीपाड, भारतीय विश्वविद्यालय संघ की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल, वर्ल्ड जर्नलिज्म एजुकेशन काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. वेरिका रूपर, आयोजन की संयोजक प्रो. सुरभि दहिया एवं प्रो. संगीता प्रणवेंद्र ने भी हिस्सा लिया।   

'भारत में पत्रकारिता शिक्षा के 100 वर्ष एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए एरिक फॉल्ट ने कहा कि मीडिया के बदलते आयामों को देखकर ऐसा लगता है कि मौजूदा समय बदलाव का समय है। आज सोशल मीडिया हमारे जीवन के कई पहलुओं को तय कर रहा है।   

कार्यक्रम में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि मीडिया शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मीडिया एजुकेशन काउंसिल की आवश्यकता है। इसकी मदद से पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के पाठ्यक्रम में सुधार होगा और मीडिया इंडस्ट्री की जरुरतों के अनुसार पत्रकार तैयार किये जा सकेंगे। 

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारतीय विश्वविद्यालय संघ की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि आधुनिक तकनीक पर आधारित 'अकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' सिस्टम से विद्यार्थियों के लिए बड़ा परिवर्तन आने वाला है। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपनी शिक्षा प्रणाली को छात्रों के लिए सबसे आधुनिक और बेहतर बनाने का काम कर रही है।   

इस अवसर पर आईआईएमसी में अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग की पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. सुरभि दहिया की पुस्तक 'The House that Zee Built' का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में नॉर्थ टेक्सास यूनिवर्सिटी के डॉ. एलन बी अलबैरन, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के चेयरमैन प्रो. बृजकिशोर कुठियाला, एक्सचेंज फॉर मीडिया के संस्थापक अनुराग बत्रा, लॉफबोरो विश्वविद्यालय के डॉ. ग्राहम मर्डोक, हॉन्गकॉन्ग बैपटिस्ट यूनिवर्सिटी के डॉ. दया थुस्सु, डॉ. देवेश किशोर, यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ कैरोलीना के डॉ. देब एैकत, यूनेस्को के म्यांमार ऑफिस से जुड़े प्रो. रैमन गुलैमो, फ्यूचर यूनिवर्सिटी, इजिप्ट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रशा अल इबरी, खलीफा यूनिवर्सिटी, अबू धाबी से डॉ. सादिया जमील, ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से रिचर्ड पमैटाटो और रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपीश मेहरा ने पुस्तक के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में 'भारत में पत्रकारिता शिक्षा के बहुआयामी दृष्टिकोण' विषय पर आयोजित चर्चा में वर्ल्ड जर्नलिज्म एजुकेशन काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. वेरिका रूपर, मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन से डॉ. बी.पी. संजय, हैदराबाद विश्वविद्यालय से डॉ. उषा रमन, हांगकांग बैपटिस्ट यूनिवर्सिटी से डॉ. दया थुस्सु, जामिया मिलिया इस्लामिया से डॉ. बिस्वजीत दास, आंध्र विश्वविद्यालय से डॉ. डी.वी.आर. मूर्ति, वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. जयश्री जेठवानी, तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. गोपालन रवींद्रन एवं इंस्टीट्यूट ऑफ नॉलेज सोसायटी, भुवनेश्वर से डॉ. चंद्रभानु पटनायक ने भाग लिया। 

आयोजन के तीसरे सत्र में 'हाइब्रिड न्यूजरूम' विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस सत्र में आईआईएमसी के डीन (अकादमिक) डॉ. गोविंद सिंह, कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. शाहिद रसूल, एपीजे एजुकेशन सोसायटी के सलाहकार प्रो. अशोक ओगरा, वरिष्ठ पत्रकार के.ए. बद्रीनाथ, ऑर्गेनाइजर पत्रिका के मुख्य संपादक प्रफुल्ल केतकर, विश्व भारती यूनिवर्सिटी, शांति निकेतन की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मौसमी भट्टाचार्य, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से डॉ. शाहिद अली, आईआईएमसी के डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार एवं गरिमा शर्मा निझावन ने हिस्सा लिया। 

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में 'पत्रकारिता शिक्षा का उपनिवेशीकरण' विषय पर आयोजित परिचर्चा में असम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. के.वी. नागराज, बंगलुरु विश्वविद्यालय से डॉ. बी.के. रवि, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से डॉ. माधवी रेड्डी, जामिया मिलिया इस्लामिया से डॉ. साइमा सईद, ओहियो यूनिवर्सिटी से डॉ. जतिन श्रीवास्तव, मुंबई विश्वविद्यालय से डॉ. संजय रानाडे, आईआईएम बंगलुरु से डॉ. दीप्ति गणपति, गुवाहाटी विश्वविद्यालय से डॉ. अंकुरन दत्ता और ट्रिनिटी इंस्टीट्यूट से डॉ. पारुल मेहरा ने भाग लिया। 

सम्मेलन के दूसरे एवं अंतिम दिन 'डिजिटल युग में पत्रकारिता', 'मीडिया क्षेत्र में अनुसंधान की आवश्यकता', 'ऑनलाइन एजुकेशन की चुनौतियां एवं संभावनाएं' और 'भारतीय भाषाई पत्रकारिता एवं मीडिया शिक्षा का विकास' विषयों पर परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में विश्व के प्रख्यात पत्रकार एवं मीडिया शिक्षक हिस्सा लेंगे।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

IPI अवॉर्ड के लिए चुने गए NDTV और The Week के ये पत्रकार

‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (IPI) इंडिया द्वारा पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए दिए जाने वाले अवार्ड के विजेताओं के नामों की घोषणा कर दी गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 29 November, 2021
Last Modified:
Monday, 29 November, 2021
IPI Award

‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (IPI) इंडिया द्वारा  पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए दिए जाने वाले अवार्ड के विजेताओं के नामों की घोषणा कर दी गई है। इस साल यह अवॉर्ड संयुक्त रूप से ‘एनडीटीवी’ के श्रीनिवासन जैन और मरियम अल्वी तथा ‘द वीक’ की लक्ष्मी सुब्रमण्यम और भानु प्रकाश चंद्र को दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में ‘आईपीआई’ की ओर से शनिवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि जैन और अल्वी ने उत्तर प्रदेश में जबरन धर्मांतरण के मामलों की असत्यता के खुलासे पर एक रिपोर्ट के लिए पुरस्कार जीता। वहीं, सीरिया और इराक के गृहयुद्धग्रस्त क्षेत्रों में शरणार्थी शिविरों में फंसे भारतीयों, विशेष रूप से महिलाओं का पता लगाने वाली सुब्रमण्यम और चंद्रा की रिपोर्ट को पुरस्कार के लिए चुना गया।

इस पुरस्कार के तहत प्रत्येक टीम को एक लाख रुपये नकद, एक ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता में संपादकों के चयन मंडल ने पुरस्कार के लिए नामों का चयन किया। विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले साल के पुरस्कारों के साथ ये पुरस्कार जल्द ही प्रदान किए जाएंगे।

बता दें कि साल 2020 का पुरस्कार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रितिका चोपड़ा को अति विशिष्ट लोगों के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों से निपटने के मामले में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) में मतभेद पर उनकी खास खबरों के लिए दिया गया था। यह पुरस्कार अब तक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 16 मीडिया संगठनों और पत्रकारों को दिया गया है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

कश्मीरी पंडित पत्रकार आदित्य राज कौल को मिली जान से मारने की धमकी

वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल को जान से मारने की धमकी मिली है। खुद को ‘आईएसआईएस कश्मीर’ (ISIS Kashmir) बताने वाले एक समूह ने उन्हें यह धमकी दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 25 November, 2021
Last Modified:
Thursday, 25 November, 2021
adityakaul5544

वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल को जान से मारने की धमकी मिली है। खुद को ‘आईएसआईएस कश्मीर’ (ISIS Kashmir) बताने वाले एक समूह ने उन्हें यह धमकी दी है। इस समूह ने बीजेपी सांसद गौतम गंभीर को भी धमकी भरा मेल भेजा है। कौल ने यह जानकारी ट्विटर पर साझा की।

कश्मीरी पंडित पत्रकार कौल का दावा है कि उनकी आतंकवाद पर बेबाक रिपोर्टिंग के चलते उन्हें यह धमकी दी गई है। कौल का कहना है कि फिलहाल धमकी के बारे में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस और स्पेशल सेल को जानकारी दे दी है और उम्मीद है कि जल्द ही आतंकी पकड़े जाएंगे।

कौल ने धमकी भरे ई-मेल के तीन स्क्रीनशॉट ट्विटर पर शेयर किए हैं। इनमें उन्हें स्पष्ट शब्दों में जान से मारने की धमकी मिली है। स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए कौल ने लिखा, ‘कल रात मुझे ‘आईएसआईएस कश्मीर’ से एक के बाद एक धमकी भरे ई-मेल प्राप्त हुए, जिसमें कहा गया था कि वे आतंकवाद पर मेरी रिपोर्ट के लिए मेरा सिर काट देंगे और मुझे मार देंगे।’

दिल्ली पुलिस और साइबर सेल को टैग करते हुए उन्होंने लिखा, ‘@Uppolice और @CellDelhi को लिखा है कि आतंकवादियों का पता लगाने और सुरक्षा उपायों की समीक्षा करने के लिए तत्काल जांच करें। हम आपसे नहीं डरते।’

‘Our next Target is you Mr. Aditya’ शीर्षक (हमारा अगला शिकार तुम हो) वाले धमकी भरे ई-मेल में लिखा गया है, ‘जनाब आदित्य, कुछ ज्यादा ही आपने हमारे अगेंस्ट लिख दिया है। अब आपको हम कुछ दिन बाद लंबी यात्रा कराने वाले हैं… आओ कभी श्रीनगर।  -रिगार्ड: दाइश, जम्मू-कश्मीर।’

वहीं साझा किए गए एक अन्य स्क्रीनशॉट में कहा गया है, ‘जल्द ही हम तुम्हें मार देंगे।’

जबकि तीसरे स्क्रीनशॉट में आईएसआईएस कश्मीर ने दावा किया है कि कौल के बारे में सभी जानकारियां उसके पास है। इसमें लिखा है, ‘हमारे पास सभी तरह की डिटेल्स है। कहां रहते हो और अभी किस जगह पर हो? बस कुछ दिन की बात है और उसके बाद तुम्हारा सिर काट देंगे।’

पत्रकार आदित्य राज कौल कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद के खिलाफ मुखर होकर लिखते रहे हैं। शायद यही वजह है वे इस्लामी चरमपंथियों के निशाने पर हैं।

बता दें कि पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद गौतम गंभीर को भी ISIS कश्मीर से धमकी मिली है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से इसकी शिकायत की है। डीसीपी सेंट्रल श्वेता चौहान ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। गंभीर को मिले ई-मेल में उनकी और उनके परिवार की हत्या की बात कही गई है। दिल्ली पुलिस ने गंभीर के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

बताया जा रहा है कि गौतम गंभीर को यह मेल पाकिस्तान से आया था। गौतम गंभीर ने आरोप लगाया था कि उन्हें ISIS कश्मीर से जान से मारने की धमकी मिली है, लेकिन ये मेल जिस सिस्टम से भेजा गया था, उसका आईपी एड्रेस पाकिस्तान में मिला है।  दरअसल, दिल्ली पुलिस ने गूगल से जानकारी मांगी थी। गूगल ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक गौतम गंभीर को धमकी भरा ई-मेल पाकिस्तान से भेजा गया था।  

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

बॉम्बे हाई कोर्ट ने की तरुण तेजपाल की यह याचिका खारिज

'तहलका’ के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के द्वारा दायर उस याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया है, जिसमें...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 25 November, 2021
Last Modified:
Thursday, 25 November, 2021
tarun-tejpal986

‘तहलका’ के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के द्वारा दायर उस याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया है, जिसमें 2013 के दुष्कर्म  मामले में उन्हें बरी करने को चुनौती देने वाली कार्यवाही को बंद कमरे में करने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति एम.एस. जावलकर की पीठ ने करीब दो सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। बॉम्बे हाई कोर्ट तर्कपूर्ण आदेश बाद में देगी।

बता दें कि इस साल 21 मई को एक निचली अदालत ने ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तेजपाल को दुष्कर्म के मामले में बरी कर दिया था। बाद में गोवा सरकार ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट की गोवा पीठ में अपील दाखिल की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीठ ने बंद कमरे में सुनवाई के लिए तेजपाल के अनुरोध को सीआरपीसी की धारा 327 के तहत खारिज किया। तेजपाल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अमित देसाई ने बंद कमरे में सुनवाई के लिए उनके आवेदन का समर्थन करते हुए विधि आयोग और उच्च न्यायालयों के विभिन्न फैसलों का हवाला दिया।

तेजपाल के वकील अमित देसाई ने तर्क देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को कुछ ऐसा कहना पड़ सकता है जो इस मामले में कुछ तथ्यों को उजागर कर सकता है, जिसे मीडिया में प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में अपना बचाव करने का मेरा मौलिक अधिकार नहीं छीना जा सकता है।

देसाई ने तर्क दिया कि बरी किए जाने के खिलाफ अपील में आरोपी की पहचान भी पीड़ित की तरह सुरक्षित रखने के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।

वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गोवा सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए तर्क दिया कि जिला अदालत द्वारा निर्णय (तेजपाल को बरी करने का) सार्वजनिक डोमेन में है। उन्होंने कहा कि धारा 327 किसी भी अपराध की जांच या कोशिश करने के उद्देश्य से लागू होती है। पूछताछ या ट्रायल के दौरान इसका उपयोग सीमित हो जाता है। अपील में बहुत कुछ स्पष्ट है। अपील, पुनरीक्षण आदि न तो जांच हैं और न ही पूछताछ और न ही परीक्षण।

दोनों की दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने तरुण तेजपाल की याचिका को खारिज कर दिया। वहीं राज्य सरकार द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर छह दिसंबर को सुनवाई होगी।

बता दें कि नवंबर 2013 में तेजपाल पर गोवा में एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में अपनी तत्कालीन सहयोगी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा था।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इन्वेंटिवप्रेन्योर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने कुछ यूं मनाया ‘महिला उद्यमिता दिवस’

वर्चुअल रूप से हुए इस कार्यक्रम के तहत 100 महिला उद्यमियों को सहयोग प्रदान कर ‘शक्ति 2021’ की शुरुआत की गई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 23 November, 2021
Last Modified:
Tuesday, 23 November, 2021
Shakti20214545

‘इन्वेंटिवप्रेन्योर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज’ (आईसीसीआई) द्वारा वैश्विक व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र में महिलाओं के योगदान को मान्यता देने और उनकी सफलता का जश्न मनाने के लिए ‘महिला उद्यमिता दिवस’ पर शुक्रवार 19 नवंबर 2021 को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

वर्चुअल रूप से हुए इस कार्यक्रम के तहत 100 महिला उद्यमियों को सहयोग प्रदान कर ‘शक्ति 2021’ की शुरुआत की गई। इस बारे में ‘आईसीसीआई’ की ओर से कहा गया है, यह समय भारत के इनक्यूबेशन इकोसिस्टम के लिए महिला उद्यमियों द्वारा लाए जाने वाले मूल्य को पहचानने का है। इस वर्चुअल समिट में, हम महिलाओं को अपने राष्ट्र के विकास और विकास में समान भागीदार के रूप में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज, भारत में 58.5 मिलियन उद्यमी हैं। इनमें केवल 8.05 मिलियन महिला उद्यमी हैं, जो भारत में महिला उद्यमियों का केवल 14 प्रतिशत है। हाल के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाले व्यवसायों के अगले पांच वर्षों में 90 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है।’

शक्ति 2021 के पैनल में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, गणमान्य व्यक्तियों, मशहूर हस्तियों, उद्योगपतियों, व्यापार मालिकों और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों जैसे डॉ. अनुराग बत्रा, अध्यक्ष और प्रधान संपादक-बिजनेस वर्ल्ड;  डॉ. रितिका यादव, अध्यक्ष-आईसीसीआई;  शांतनु मित्रा-आर्थिक सलाहकार, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय;  भारत सरकार;  ऋषभ मल्होत्रा, उपाध्यक्ष-आईसीसीआई; तरुण कटियाल, फाउंडर और सीईओ-इवन वर्ल्ड; पुनीत सक्सेना, पूर्व एमडी और सीईओ-यूटीआई-आईटीएसएल; डॉ. मनीष दीवान, हेड- स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप- बीआईआरएसी; चारुल चतुर्वेदी जेटली- मटीती ग्रुप, दुबई; वैभव अजय मिश्रा, सह-संस्थापक और निदेशक- एनबीएफसी; विकास सारदा, इन्वेस्टर-यूनिटस वेंचर;  दीपिंदर ढिल्लियन- निवेश पंजाब; सुधा सुरेश, संस्थापक- मणि कैपिटल; मोनिका पांडे, निवेशक- योरनेस्ट वेंचर कैपिटल; दीक्षा निगम, प्रबंधक-स्टार्टअप इंडिया को शामिल किया गया।

‘आईसीसीआई ‘ के वाइस चेयरमैन ऋषभ मल्होत्रा का कहना है कि उनका मिशन हर महिला को अपने लक्ष्य का पीछा करने और समग्र रूप से स्वतंत्र बनने के लिए उत्प्रेरक बनना है। उनका कहना है कि महिलाओं के लिए काम करने वाले और प्रेरणा देने वाले अन्य गैर-लाभकारी संगठन के साथ जुड़कर उन्हें हमेशा बहुत अच्छा लगा। सुश्री वृषाली देशपांडे (जेवीडी मेटल इनोवेशन), सुश्री निधि सिंघल (द अरोमा प्लैनेट) और सुश्री नंदिनी कोठारकर (वैश्विक बायोकेम) जैसी महिला उद्यमी काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।

ऋषभ मल्होत्रा का कहना है, ‘शक्ति की स्थापना का उद्देश्य न केवल महिलाओं को सशक्त बनाना है बल्कि टियर 2 और टियर 3 शहरों और यहां तक कि जिलों और ग्राम स्तर पर महिलाओं के लिए अवसर पैदा करना है, ताकि वे विश्व स्तर पर हमारी सफल महिला नेताओं और सलाहकारों से जुड़कर महिलाओं के लिए अवसर पैदा कर सकें। एक मंच तक आसान पहुंच और सीखने,  अपस्किलिंग, वित्तपोषण,  व्यापार, नेटवर्किंग आदि के अवसर वित्तीय स्वतंत्रता के लिए जरूरी हैं और शक्ति के मुख्य मिशन को प्राप्त करते हैं, जो राष्ट्र के उत्थान के लिए महिलाओं द्वारा वास्तविक जीडीपी में योगदान देते हैं।'

इस बारे में ऋषभ मल्होत्रा का कहना है, ‘हम उन महिला उद्यमियों का आह्वान करते हैं जो समर्थन की तलाश में हैं या अन्य महिलाओं का समर्थन करना चाहती हैं, क्योंकि हम आईसीसीआई में विभिन्न व्यवसायों और क्षेत्रों में प्रतिभाशाली महिलाओं की भागीदारी चाहते हैं। यह उन महिलाओं के लिए बहुत गर्व की बात है, जिन्होंने अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश को गौरवान्वित किया है।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

घर लौट रहे टीवी एंकर पर हथियारबंद लोगों का हमला

हमलावरों ने गोलियां भी चलाईं, जिनमें एक गोली दीवार में लगी और दूसरी जमीन पर

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 23 November, 2021
Last Modified:
Tuesday, 23 November, 2021
Attack

अफगानिस्तान में मीडियाकर्मियों पर हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी तरह की एक और घटना अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से सामने आई है, जहां पर एक टीवी एंकर को हथियारबंद लोगों ने मारपीट कर घायल कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, काबुल में कुछ हथियारबंद लोगों ने ‘आयना’(Ayna) टीवी चैनल  के पत्रकार अहमद बशीर अहमदी को रोक लिया और उनसे मारपीट शुरू कर दी। बशीर अहमदी पर उस समय हमला किया गया, जब वह कहीं से लौटकर अपने घर जा रहे थे।

बताया जाता है कि हमलावरों ने गोलियां भी चलाईं, जिनमें एक गोली दीवार में लगी और दूसरी जमीन पर। इसके बाद हमलावरों ने बशीर के सिर पर पिस्तौल से प्रहार किया और उसके दांत तोड़ दिए। इस बीच, पत्रकारों ने इस्लामिक अमीरात से मीडियाकर्मियों के खिलाफ हिंसा के मामलों की जांच शुरू करने की मांग की है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर शर्मा ‘नीरव’

दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन, रविवार की सुबह छत्तीसगढ़ स्थित अपने निवास पर आखिरी सांस ली

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 22 November, 2021
Last Modified:
Monday, 22 November, 2021
Jaishankar Sharma

वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर शर्मा ‘नीरव’ का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। रायपुर प्रेस क्लब के मानद सदस्य जयशंकर शर्मा ने रविवार की सुबह छत्तीसगढ़ स्थित अपने निवास पर आखिरी सांस ली। वह करीब 84 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक पुत्र और पांच बेटियां हैं। मारवाड़ी मुक्तिधाम मे दोपहर को जयशंकर शर्मा का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जयशंकर शर्मा ने शासकीय शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर पत्रकारिता को चुना था। वह लंबे समय तक रायपुर के दैनिक समाचार पत्र ‘महाकौशल’ में संपादक रहे। उन्होंने ‘संदेश बंधु टाइम्स’, ‘आज की जनधारा’, ‘प्रखर समाचार’ एवं ‘दण्डकारण्य समाचार’ पत्र में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जयशंकर शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। एक फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने कहा कि नीरवजी ने अपनी कलम से छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता को समृद्ध किया। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। सीएम बघेल में ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुःख की घड़ी को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पत्रकार भवन के निर्माण की मांग को लेकर CM को लिखा लेटर, दी ये चेतावनी

‘इंडियन फेडरेशन ऑफ मीडिया’ से संबद्ध ‘एम.पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन’ ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पत्रकार भवन के निर्माण की मांग की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 19 November, 2021
Last Modified:
Friday, 19 November, 2021
MP Working Journalist Union

‘इंडियन फेडरेशन ऑफ मीडिया’ (India Federation of Media) से संबद्ध ‘एम.पी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन’ (MP Working Journalist Union) ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पत्रकार भवन के निर्माण की मांग की है।

यूनियन की ओर से इस मांग को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र लिखा गया है। यूनियन के सदस्यों गोविंद तोमर, विजय नेमा, हरीश कासेकर एवं यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा की ओर से मेल किए गए इस पत्र में जल्द ही पत्रकार भवन का निर्माण न होने पर धरने की चेतावनी दी गई है।

इस पत्र में कहा गया है, ‘आपके पूर्व कार्यकाल में भोपाल के मालवीय नगर स्थित पत्रकार भवन की जमीन को अधिग्रहीत कर नए रूप में भवन का निर्माण किया जाना था। काफी लंबा समय बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। भवन का निर्माण न होने से प्रदेश के पत्रकारों में रोष है।’

इसके साथ ही इस पत्र में कहा गया है कि जिस प्रकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता के लिए आंदोलन किया था, उस तरह पत्रकार भवन के निर्माण की मांग पूरी न होने पर धरना दिया जाएगा।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

कृषि कानून वापस लेने के समय पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने उठाया सवाल, की ये मांग

प्रधानमंत्री ने आखिरकार किसानों की मांग मान ली और एक साल से किसान आंदोलन की वजह बने तीनों नए कृषि कानून वापस ले लिए हैं। वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने इस फैसले का स्वागत किया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 19 November, 2021
Last Modified:
Friday, 19 November, 2021
Modi4584

प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार किसानों की मांग मान ली और पिछले एक साल से किसान आंदोलन की वजह बने तीनों नए कृषि कानून वापस ले लिए हैं। शुक्रवार को देश के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने यह बड़ा ऐलान किया। 

सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा है। ऐसे अपने 18 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने यह साफ कर दिया कि केंद्र इन तीनों कानूनों को वापस ले रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि हम किसानों को समझा नहीं सके इसलिए इन कानूनों को वापस ले रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि कानून वापस ले रहे हैं लेकिन इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से शुद्ध, किसानों के हित की बात, हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए। कृषि अर्थशास्त्रियों ने, वैज्ञानिकों ने, प्रगतिशील किसानों ने भी उन्हें कृषि कानूनों के महत्व को समझाने का भरपूर प्रयास किया।

उन्होंने आगे कहा- हमारी सरकार, किसानों के कल्याण के लिए, खासकर छोटे किसानों के कल्याण के लिए, देश के कृषि जगत के हित में, देश के हित में, गांव गरीब के उज्जवल भविष्य के लिए, पूरी सत्य निष्ठा से, किसानों के प्रति समर्पण भाव से, नेक नीयत से ये कानून लेकर आई थी।

इस बीच वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून वापस लेने के फैसले का स्वागत किया। लेकिन उन्होंने न केवल इस फैसले के समय पर सवाल उठाया बल्कि यह मांग भी कि आंदोलन के दौरान जिन किसानों का आर्थिक नुकसान हुआ, जिनकी जान गयी उसकी भरपाई भी की जाए।  

राजेश बादल ने कहा, ‘सब कुछ लुटाकर होश में आए, तो क्या आए। सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की है। इस फैसले का स्वागत है, लेकिन यह भी अपेक्षा है कि आइंदा वो ऐसे फैसले नहीं ले, जिससे कि देश की आर्थिक रफ्तार, कृषि उत्पादन सब कुछ ठहर जाए। अपने बेअकल सलाहकारों को सत्ता से दूर रखे। जान, माल का जो नुकसान किसानों ने उठाया है, उसकी भरपाई कौन करेगा? सरकार को एक मुश्त प्रति किसान पच्चीस लाख क्षतिपूर्ति के देना चाहिए। वह भी सरकारी फंड से नही, बल्कि भारतीय जनता पार्टी को अपनी पार्टी फंड से देना चाहिए। सवाल तो यह भी है कि यदि उत्तरप्रदेश में चुनाव नहीं होते तो भी क्या सरकार यह निर्णय लेती?’

यहां देख सकते हैं कि और क्या कुछ कहा वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने:  

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

30 साल बाद दो पत्रकारों को रासुका से मिली राहत

रामजन्म भूमि आंदोलन के दौरान पत्रकारों पर दर्ज मामले अब तीस साल बाद खत्म कर दिए गए हैं। मुकदमे वापसी के शासनादेश को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने पत्रकारों को इससे राहत दे दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 19 November, 2021
Last Modified:
Friday, 19 November, 2021
Journalist523589

रामजन्म भूमि आंदोलन के दौरान पत्रकारों पर दर्ज मामले अब तीस साल बाद खत्म कर दिए गए हैं। मुकदमे वापसी के शासनादेश को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने पत्रकारों को इससे राहत दे दी है। इन पत्रकारों पर रासुका भी लगी थी।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रामजन्म भूमि आंदोलन काल में गंगोह कस्‍बे में जुलूस निकालने को लेकर हुए टकराव में दो पत्रकारों पर रासुका की कार्रवाई की गई थी। मामला पूरे प्रदेश में चर्चित हुआ, तो मुकदमा वापसी का शासनादेश हो गया था। अब उस आदेश को स्वीकारते हुए न्यायालय ने पत्रकारों को इससे राहत दे दी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 1987 में कोर्ट के आदेश पर अयोध्या स्थित रामलला मंदिर के ताले खोले गए थे। लोगों ने खुशी में बाजार सजाए और प्रतिष्ठानों व घरों पर झंडे लगाए गए। प्रशासन द्वारा तीन अप्रैल 1987 को झंडे व बैनर उतरवा दिए गए। इससे क्षुब्ध दुकानदारों ने प्रदर्शन किया था।

मामले के पीड़ित गंगोह निवासी डॉ. राकेश गर्ग के अनुसार, आठ अप्रैल 1987 को श्री राम शोभायात्रा निकाली गई, जिसे नूरी मस्जिद पर जबरन रोक दिया गया। गंगोह में श्री राम की शोभायात्रा को रोकने पर तनातनी का माहौल बन गया था। पुलिस प्रशासन ने इस प्रकरण में एकपक्षीय कार्रवाई कर पत्रकार डॉ. राकेश गर्ग व स्वर्गीय राकेश गोयल समेत एक अन्य के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमे बनाए और रासुका लगाकर 15 अप्रैल को जेल भेज दिया। पत्रकारों ने इसके विरोध में आंदोलन चलाया, जिसकी गूंज संसद व विधानसभा तक पहुंची।

रिपोर्ट में बताय गया है कि 29 अप्रैल को 500 पत्रकारों ने डीएम कार्यालय पर ज्ञापन चस्पा किया था। प्रशासन ने रासुका वापस लेकर 15 मई 1987 को पत्रकारों को रिहा कर दिया, लेकिन 153ए व अन्य धाराएं नहीं हटाई थीं। सपा के वरिष्‍ठ नेता स्व. रामशरण दास ने 1991 में तब मुकदमा वापसी का शासनादेश कराया था, मगर इसके क्रियान्वयन में 30 साल से ज्यादा समय लग गया। सिविल जज की अदालत ने प्रकरण में पत्रकारों को मुक्त कर दिया गया है। इसमें बार संघ के जिलाध्यक्ष अभय सैनी का भी योगदान रहा।

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र मोहन तरुण का निधन, कुछ साल पहले PTI से हुए थे रिटायर

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र मोहन तरुण का मंगलवार को निधन हो गया। उनकी आयु 80 वर्ष से अधिक थी और वे अविवाहित थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 18 November, 2021
Last Modified:
Thursday, 18 November, 2021
surendramohan4554

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र मोहन तरुण का मंगलवार को निधन हो गया। उनकी आयु 80 वर्ष से अधिक थी और वे अविवाहित थे। वह पिछले दो साल से बीमारी से जूझ रहे थे।

उनके पारिवारिक मित्र ने मीडिया को बताया कि मंगलवार सुबह तरुण की तबीयत अचानक खराब हुई और उन्हें उनके गुलमोहर पार्क स्थित आवास से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रास्ते में ले जाते समय ही उनका निधन हो गया।

बताया जाता है कि  वे कुछ वर्ष पहले समाचार एजेंसी ‘पीटीआई- भाषा’ से सेवानिवृत्त (रिटायर) हुए थे। इससे पहले वे हिंदी समाचार पत्र ‘वीर अर्जुन’ के साहित्य संपादक थे। सेवानिवृत्ति के बाद से तरुण सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहते थे।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए