प्रो.वेद प्रकाश वटुक द्वारा लिखी किताब ‘आजादी या मौत’ की समीक्षा

विश्व प्रसिद्व साहित्यकार व समाजशास्त्री प्रो. वेद प्रकाश ‘वटुक’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘आजादी या मौत’ की समीक्षा समीक्षक आरिफा एविस ने की है, जिसे आफ यहां पढ़ सकते हैं: हम इतिहास के ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां इतिहास को खासकर भारतीय इतिहास को बदलने की नाकाम कोशिश की जा रही है। भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन और उससे जुड़े तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत

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Published - Tuesday, 24 November, 2015
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Tuesday, 24 November, 2015
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विश्व प्रसिद्व साहित्यकार व समाजशास्त्री प्रो. वेद प्रकाश ‘वटुक’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘आजादी या मौत’ की समीक्षा समीक्षक आरिफा एविस ने की है, जिसे आफ यहां पढ़ सकते हैं: हम इतिहास के ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां इतिहास को खासकर भारतीय इतिहास को बदलने की नाकाम कोशिश की जा रही है। भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन और उससे जुड़े तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है। इतिहास के ऐसे कठिन दौर में भारतीय इतिहास को समृद्ध करती वेद प्रकाश ‘वटुक’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘आजादी या मौत’ गदर आन्दोलन की एक ऐसी दास्तान है जो अभी अकथ रही है। वेद प्रकाश ‘वटुक’ की यह पुस्तक संस्मरणात्मक रूप से अपनी बात कहती है कि 1848 से लेकर 1910 तक भारत के लोग अमरीका, कनाडा, इंग्लैण्ड में जहां एक तरफ उच्च शिक्षा प्राप्त करने गए वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग अपनी गरीबी मिटाने गए थे-“भारतीय छात्र ब्रिटेन ही जाते थे क्योंकि वह शिक्षा उन्हें ऊंचे सरकारी पदों के लिए तैयार करने के लिए सहायक होती थी...” इसी शिक्षा का परिणाम था कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन में कालान्तर में भाग लेने वाले नेताओं का भी निर्माण हुआ। गांधी, नेहरू, जिन्ना आदि उसी शिक्षा की उपज थे। छात्रों का एक वर्ग ऐसा भी था जो भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे जिनमें तारकनाथ दास, सुधीन्द्र बोस, प्रफुल्ल मुखर्जी आदि प्रमुख थे। दूसरी तरफ वे भारतीय लोग भी आये जो अपनी गरीबी का दुर्भाग्य मिटाना चाहते थे। उन्हें तो जो भी काम जहां भी मिलता, जितनी भी पगार पर मिलता कर लेते। साथ ही उन देशों के नस्लभेदी, द्वेषी विशाल समाज के कोप से अपना अस्तित्व बचाना भी एक चुनौती थी। और इन मुश्किलों के बावजूद वे स्त्रीविहीन, परिवार विहीन एकांकी पुरुष एक दूसरे का सहारा बनकर जीने को विवश थे। विदेशों में भारतीय नागरिक घृणा, उत्पीड़न और शोषण का शिकार हो रहे थे। उसी दौरान सोहन सिंह भकना और उसके दोस्त काम ढूंढने गए थे। जब वे अमरीका के सुपरिटेंडेंट से मिले तो उनका जवाब सुनकर शर्म से गर्दन झुकाकर वापस चले आये। “काम तो है पर तुम्हारे लिए नहीं... मेरा दिल तो करता है तुम दोनों को गोली मार दूं। …तुम्हारे देश की कितनी आबादी है? ये तीस करोड़ आदमी हैं या भेड़ें? जो तुम तीस करोड़ आदमी होते तो गुलाम क्यों होते? गुलाम क्यों रहते… मैं तुम दोनों को एक-एक बन्दूक देता हूं। जाओ पहले अपने देश को आजाद कराओ। जब आजाद कराके अमरीका आओगे तो मैं तुम्हारा स्वागत करूंगा।” जब भारतीय लोगों के लिए अमरीका, कनाडा इत्यादि देशों के दरवाजे बंद होने लगे तो भारतीय अप्रावासियों की त्रासदी निरंतर बढ़ने लगी। तमाम विरोध प्रदर्शन, सभाओं एवं लिखित प्रेस विज्ञप्ति के बाद भी भारतीयों के समर्थन में कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आया। “धीरे-धीरे भारतीयों की समझ में यह आने लगा कि ब्रिटेन साम्राज्य की रक्षा/सेवा में चाहे वे अपना तन-मन-धन सबकुछ न्यौछावर कर दें, तो भी किसी भी गोरों के उपनिवेश में आदर नहीं पा सकते। इसी चिन्तन ने ब्रिटिश सरकार परस्त लोगों के मन में राष्ट्रीयता और एकता की भावना को जन्म दिया। विदेशी धरती पर 1909 में ‘हिन्दुस्तान एसोसिएशन की स्थापना हुई। बदलती परिस्थितियों में यह संस्था भारतीयों के हित की रक्षा के लिए कटिबद्ध थी।” 1913 तक आते-आते गदर पार्टी की नींव रख दी जाती है इसने पूर्ण स्वराज के नारे को कांग्रेस से भी पहले अपना लिया था। ‘गदर’ का यह नारा बहुत प्रचलित था- “जब तक भारत पूर्णरूप से राजनीतिक ही नहीं सामाजिक और आर्थिक आजादी भी प्राप्त नहीं कर लेता, हमारी जंग जारी रहेगी।” ‘गदर’ की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी कि इस अखबार को ‘गदर पार्टी’ के नाम से जाना जाने लगा। गदर पार्टी के सदस्यों ने जिस आजाद भारत का सपना देखा था। उसको व्यावहारिक रूप से जीने की कोशिश करने लगे- “धार्मिक अभिवादनों का स्थान ‘वंदेमातरम्’ ने ले लिया। जूते और धर्म दरवाजे से बाहर रखकर वे वहां शुद्ध भारतीय होकर जीते, साथ पकाते, साथ घर की देखभाल करते और साथ मिलकर ‘गदर’ निकलते।” गदर पार्टी की सक्रियता ने अमरीका, कनाडा और ब्रिटेन की सरकार को हिलाकर रख दिया। परिणामस्वरूप उन्होंने भेदियों को ‘गदर’ नेताओं के पीछे लगा दिया। लेकिन गदर ने धीरे-धीरे अपनी पहचान आम लोगों में बनानी शुरू कर दी थी। 25 मार्च 1914 को दिए गए हरदयाल के भाषण ने पूरी सभा को इतना प्रभावित एवं उत्तेजित किया कि लोग देश की आजादी के लिए स्वदेश लौटने की तयारी करने लगे। उन्होंने अपने भाषण में कहा था- “वह दिन दूर नहीं जब मजदूर जागेंगे, किसान जागेंगे, शोषित कुचले हुए लोग जागेंगे, बराबरी का हक़ मागेंगे, इन्सान की तरह जीने का अधिकार मांगेंगे। उसके लिए प्राणों का उत्सर्ग करेंगे- उनकी ताकत के आगे न अन्याय टिकेगा न झूट भरा जालिम राज।” 4 अगस्त 1941 को ब्रिटेन द्वारा जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा होते ही ‘गदर’ सदस्यों ने घोषणा कर दी कि अब वक्त आ गया है भारत की गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने का समय आ गया है। गदर पार्टी के नेताओं के संदेशों में अपील जारी की जाने लगी कि भारत में जाकर जनता में क्रांति का सन्देश फैलाये। मौलाना बरकत उल्लाह भोपाली ने अपने सन्देश में कहा “भाइयों, आप लोग दुनिया के बेहतरीन मुजाहिदीन हैं। धर्म की आड़ में दूसरे मजहबों के बेबस लोगों को मारने वाले नहीं, शैतानी राज को जड़ से उखाड़ने वाले मुजाहिदीन, हर लाचार की पांव की बेड़ियां काटने वाले मुजाहिदीन, गुलामी की जंजीरों के टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने वाले, जालिम को मिटाने वाले मुजाहिदीन। पर याद रखो, आजादी गोरों की जगह काले साहबों को बिठा देना नहीं।” देखते ही देखते 60 से 80 प्रतिशत अप्रवासी भारतीय बलिदान होने के लिए भारत लौट आये। यह विश्व इतिहास की सबसे अभूतपूर्व घटना इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो गयी। रास बिहारी के गदर पार्टी में शामिल होते ही ‘गदर’ साहित्य जनता के विभिन्न तबकों तक पहुंचने लगा। उसने सैनिकों के लिए गदर साहित्य पहुंचाना शुरू कर दिया ताकि एक दिन सैनिक विद्रोह किया जा सके। इसी दौरान राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण भी कर लिया गया था। ऐसा लग रहा था कि क्रांति का सपना साकार होने वाला है लेकिन अचानक ही पार्टी के एक सदस्य ने विश्वासघात करके बहुत से साथियों को पकड़वा दिया। देश विदेश में गदरी नेताओं पर ‘वैधानिक सरकार को पलटने’ के षड्यंत्र में सामूहिक मुकदमा चलाया गया। मुकदमे के दौरान गदरियों ने बार बार कहा “बंद करो यह ड्रामा, दे दो हमें फांसी।” फैसले के दिन जब सभी को मृत्युदंड मिला और उनके साथी ज्वाला सिंह को आजीवन कारावास तो वो चीख पड़ा “जब मेरे साथियों को मौत की सजा मिली है, तो मुझे उम्रकैद क्यों?” ऐसे थे आजादी के दीवाने जिन्होंने फांसी के तख्ते को हंसते गाते चूम लिया। कोठरी में करतार सिंह के द्वारा कोयले से लिखे गए वे शब्द आज भी सच्ची आजादी की उम्मीद बनाये रखते हैं- “शहीदों का खून कभी खाली नहीं जाता। आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसो जरूर ही बाहर जाकर रंग लायेगा।” गदर आन्दोलन के विफल होने के बाद जो भी गदरी बचे थे उन्होंने अपनी नाकामयाबी से सबक लिया और आत्मकेन्द्रित योजना न बनाकर जनकेन्द्रित योजनाओं पर अमल करना शुरू कर दिया। इस तरह उन्होंने नये सिरे से जन आन्दोलन को विकसित करना शुरू किया जिसमे सोहन सिंह भकना किसान आन्दोलन के मेरुदंड बनकर उभरे। देश तो आजाद हो गया लेकिन सोहन सिंह भकना ने आजाद भारत की सरकार के बर्ताव पर रोस जताया- “मुझे इस बात का फख्र है कि कौम की दुश्मन अंग्रेज सरकार मेरी कमर न झुका सकी, जो अभी झुकी है तो उन्हीं मित्रों की सरकार के कारण जिनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़कर हमने आजादी की लड़ाई लड़ी थी।” यह पुस्तक पाठकों की इतिहासबोध चेतना को उन्नत करने में सहायता करती है क्योंकि समाज के इतिहास में प्रत्येक व्यक्ति का अपना इतिहास और योगदान होता है। गदर आन्दोलन के इतिहास की रौशनी में हम भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन को भी आसानी से समझ सकते हैं। आजादी या मौत : वेद प्रकाश वटुक | गार्गी प्रकाशन | कीमत 130 रुपये | पेज 192

 

 

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अंकिता आचार्य बनीं WPP मीडिया में नेस्ले की ग्लोबल स्ट्रैटेजी डायरेक्टर

अंकिता आचार्य ने WPP मीडिया में नेस्ले के लिए ग्लोबल स्ट्रैटेजी डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह एसेंसमीडियाकॉम में एडिडास के लिए ब्रांड स्ट्रैटेजी डायरेक्टर थीं।

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Published - Thursday, 08 October, 2026
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Thursday, 08 October, 2026
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अंकिता आचार्य (Ankitha Acharya) ने डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) में नेस्ले (Nestlé) के लिए ग्लोबल स्ट्रैटेजी डायरेक्टर (Global Strategy Director) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इस नियुक्ति से पहले आचार्य एसेंसमीडियाकॉम (EssenceMediacom) में एडिडास (adidas) के लिए ब्रांड स्ट्रैटेजी डायरेक्टर, इमर्जिंग मार्केट्स (Brand Strategy Director, Emerging Markets) थीं। यहां उन्होंने 17 उभरते बाजारों में स्ट्रैटेजी की जिम्मेदारी संभाली।

इससे पहले वह माइंडशेयर (Mindshare) में वोल्वो (Volvo) के लिए प्लानिंग एंड स्ट्रैटेजी डायरेक्टर, यूरोप (Planning and Strategy Director, Europe) थीं। इस भूमिका में उन्होंने छह यूरोपीय बाजारों में प्लानिंग और स्ट्रैटेजी का नेतृत्व किया।

आचार्य वेवमेकर (Wavemaker) और परफॉर्मिक्स इंडिया (Performics India) सहित अन्य कंपनियों में भी अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं। उनके पास ग्लोबल और लोकल मार्केट्स में काम करने का अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता ब्रांड स्ट्रैटेजी (Brand Strategy), प्लानिंग (Planning) और ऑडियंस प्लानिंग (Audience Planning) में है।

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महेश सिंह ने वंडर सीमेंट में संभाली नई कॉरपोरेट ब्रांड कम्युनिकेशन जिम्मेदारी

वंडर सीमेंट ने महेश सिंह को वाइस प्रेसिडेंट – कॉरपोरेट ब्रांड कम्युनिकेशन नियुक्त किया है। वह ब्रांड स्ट्रैटेजी, डिजिटल मार्केटिंग, पब्लिक रिलेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे।

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Published - Thursday, 08 October, 2026
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Thursday, 08 October, 2026
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प्रमुख सीमेंट निर्माता कंपनी वंडर सीमेंट (Wonder Cement) ने महेश सिंह को वाइस प्रेसिडेंट – कॉरपोरेट ब्रांड कम्युनिकेशन (Vice President – Corporate Brand Communication) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की कॉरपोरेट ब्रांड स्ट्रैटेजी और कम्युनिकेशन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

महेश सिंह के दायरे में डिजिटल और परफॉर्मेंस मार्केटिंग (Digital and Performance Marketing), पब्लिक रिलेशंस (Public Relations), ट्रेड, इवेंट्स, एग्जिबिशंस, स्पोर्ट्स और एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग (Experiential Marketing) शामिल होंगे।

महेश के पास मार्केटिंग और कम्युनिकेशंस के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है। उनके करियर में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री, एजेंसी और उद्यमिता से जुड़ी अलग-अलग भूमिकाएं रही हैं। उन्होंने होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (Honda Motorcycle & Scooter India) के साथ एक दशक से अधिक समय तक काम किया।

यहां उन्होंने इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन (Integrated Communication), मीडिया, डिजिटल, रिटेल और कंज्यूमर एंगेजमेंट से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्होंने कंपनी की डिजिटल मार्केटिंग क्षमताओं को विकसित करने में भी योगदान दिया।

वंडर सीमेंट से जुड़ने से पहले महेश डेंट्सु एक्स इंडिया (dentsu X India) में वाइस प्रेसिडेंट – स्ट्रैटेजी एंड प्लानिंग (Vice President – Strategy & Planning) थे। यहां उन्होंने ऑटोमोटिव, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, एफएमसीजी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, बीएफएसआई, अपैरल और ब्रांड कंसल्टिंग जैसी कई कैटेगरी में काम किया।

डेंट्सु एक्स में उनकी जिम्मेदारियों में मीडिया और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी, प्रोडक्ट लॉन्च, कंटेंट, परफॉर्मेंस मार्केटिंग और कंज्यूमर एक्टिवेशन शामिल रहे। महेश की नियुक्ति के साथ वंडर सीमेंट को ऐसा मार्केटिंग प्रोफेशनल मिला है, जिसका अनुभव कम्युनिकेशंस इकोसिस्टम के ब्रांड, एजेंसी और एंटरप्रेन्योरियल—तीनों पक्षों में रहा है।

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डिज्नी ने की FCC कार्रवाई रोकने की मांग, ABC के लाइसेंस की समयपूर्व समीक्षा पर उठाए सवाल

वॉल्ट डिज्नी ने अमेरिका की एक अदालत से फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन यानी FCC की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

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Published - Thursday, 08 October, 2026
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Thursday, 08 October, 2026
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वॉल्ट डिज्नी ने अमेरिका की एक अदालत से फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन यानी FCC की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। कंपनी ने कहा है कि FCC की ओर से उसके स्वामित्व वाले आठ एबीसी टीवी स्टेशनों के लाइसेंस की समय से पहले समीक्षा करना असामान्य है। डिज्नी का आरोप है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन कंपनी पर ऐसे कंटेंट को लेकर दबाव बना रहा है, जो उसे पसंद नहीं है।

डिज्नी ने इस मामले में अगस्त में मुकदमा दायर किया था। कंपनी का कहना है कि यह मामला अमेरिका के संविधान के पहले संशोधन (First Amendment) के तहत प्रसारकों की अभिव्यक्ति की आजादी और सरकार की मीडिया नीतियों के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी परीक्षा बन गया है।

‘हम संपादकीय फैसले अलग तरीके से ले रहे हैं’

मंगलवार को सुनवाई के दौरान डिज्नी की वकील बेथ विल्किन्सन ने अमेरिकी जिला जज लॉरेन अलीखान से कहा कि कंपनी को चिंता है कि मौजूदा स्थिति का उसके संपादकीय फैसलों पर असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कंपनी अपने हर कदम को लेकर सावधानी बरत रही है, क्योंकि प्रशासन की नाराजगी और FCC की कार्रवाई का डर बना हुआ है। विल्किन्सन ने एबीसी की स्थिति की तुलना फ्रांसीसी क्रांति के दौरान सिर पर तलवार लटकने जैसी स्थिति से की।

उन्होंने कहा कि यहां तक कि राष्ट्रपति के किसी भाषण का लाइव प्रसारण नहीं करने जैसे फैसले पर भी प्रशासन की नाराजगी सामने आती है।

ट्रंप के भाषण का लाइव प्रसारण नहीं किया था ABC ने

विल्किन्सन जिस मामले का जिक्र कर रही थीं, वह 16 जुलाई का है। उस दिन एबीसी ने ट्रंप के एक भाषण का लाइव प्रसारण नहीं किया था। इस भाषण में ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर अपने पुराने आरोप फिर दोहराए थे।

कॉमकास्ट के स्वामित्व वाले एनबीसी ने भी इस भाषण का लाइव प्रसारण नहीं किया था। इसके बाद ट्रंप ने दोनों चैनलों के लाइसेंस रद्द करने की मांग की थी।

न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स समेत आठ स्टेशन जांच के दायरे में

FCC चेयरमैन ब्रेंडन कैर ने अप्रैल में डिज्नी के आठ एबीसी स्टेशनों के लाइसेंस की समय से पहले समीक्षा का आदेश दिया था। इनमें न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, शिकागो और ह्यूस्टन जैसे बड़े शहरों के स्टेशन शामिल हैं। इनमें से कुछ स्टेशन डिज्नी के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले स्टेशन हैं।

इन स्टेशनों के लाइसेंस की सामान्य अवधि 2028 से 2031 के बीच खत्म होनी थी। हालांकि, कैर ने पिछले सप्ताह कहा था कि उन्होंने अभी यह तय नहीं किया है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाया जाएगा।

प्रशासन ने ‘गिलोटिन’ वाली तुलना को गलत बताया

ट्रंप प्रशासन के वकील दिमितार जॉर्जिएव-रेमेल ने सुनवाई में डिज्नी की गिलोटिन वाली तुलना को गलत बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में डिज्नी को प्रशासनिक प्रक्रिया और उसके बाद न्यायिक समीक्षा के दौरान अपने एबीसी लाइसेंस बनाए रखने का अवसर मिलेगा।

जज अलीखान ने इससे पहले FCC को इन लाइसेंसों को सार्वजनिक सुनवाई के लिए भेजने संबंधी आदेश जारी करने से रोकने से इनकार कर दिया था। हालांकि, FCC ने अदालत को आगे की कार्रवाई से कम से कम 48 घंटे पहले सूचना देने पर सहमति जताई है।

करीब दो घंटे चली सुनवाई में जज को यह तय करना है कि डिज्नी की मांग पर FCC की कार्रवाई रोकने के लिए शुरुआती तौर पर रोक का आदेश जारी किया जाए या नहीं।

दस्तावेजों को लेकर शुरू हुआ था विवाद

FCC चेयरमैन ब्रेंडन कैर ने मार्च 2025 में डिज्नी की विविधता से जुड़ी नीतियों की जांच शुरू की थी। कैर के मुताबिक, कंपनी ने मांगे गए दस्तावेज पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराए थे।

ब्रेंडन कैर का कहना है कि दस्तावेजों की मांग का जल्द जवाब नहीं मिलने के कारण एबीसी स्टेशनों के लाइसेंस की समय से पहले समीक्षा की गई। 

हालांकि, सुनवाई के दौरान जज अलीखान ने प्रशासन के इस तर्क पर सवाल उठाया कि मामला सिर्फ दस्तावेज उपलब्ध कराने से जुड़े विवाद का है। उन्होंने पूछा कि अगर ऐसे विवाद कई लाइसेंसधारकों के साथ होते हैं, तो एबीसी का मामला इतना अलग क्या है कि उसके लाइसेंस की समय से पहले समीक्षा की जरूरत पड़ी।

वहीं, प्रशासन ने तर्क दिया कि डिज्नी को यह मुकदमा सीधे संघीय अपील अदालत में दायर करना चाहिए था और पहले FCC के कर्मचारियों की ओर से लाइसेंस की समीक्षा के आदेश के खिलाफ अपील करनी चाहिए थी।

50 साल से ज्यादा समय बाद ऐसी कार्रवाई

रिपोर्ट के मुताबिक, FCC ने इससे पहले 50 साल से ज्यादा समय तक किसी प्रसारक के लाइसेंस की ऐसी समयपूर्व समीक्षा का आदेश नहीं दिया था। इस मामले में लाइसेंस की समीक्षा का आदेश उस समय आया, जब ट्रंप ने एबीसी से लेट-नाइट होस्ट जिमी किमेल को हटाने की मांग की थी।

अमेरिका में ब्रॉडकास्ट टीवी चैनलों को सार्वजनिक एयरवेव का इस्तेमाल करने के लिए FCC लाइसेंस की जरूरत होती है। लाइसेंस रद्द किए जाने के मामले बेहद दुर्लभ हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि लाइसेंस खोने की धमकी प्रसारकों पर दबाव बना सकती है और कार्यक्रमों से जुड़े संपादकीय फैसलों में सरकारी दखल की चिंता पैदा कर सकती है।

‘The View’ की भी FCC कर रहा जांच

FCC एबीसी के राजनीतिक चर्चा वाले डे-टाइम शो ‘The View’ की भी जांच कर रहा है। आयोग ने कहा है कि यह कार्यक्रम राजनीतिक उम्मीदवारों को समान अवसर देने से जुड़े संघीय नियमों के दायरे में आ सकता है।

डिज्नी का कहना है कि फरवरी से ‘The View’ में किसी भी राजनीतिक उम्मीदवार को नहीं बुलाया गया है और कंपनी ने इसके पीछे FCC के दबाव को कारण बताया है।

पिछले महीने जिमी किमेल ने भी कहा था कि FCC की धमकियों के कारण उनके शो में टेक्सस के डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार जेम्स तालारिको का इंटरव्यू प्रसारित नहीं हो सका। बाद में यह इंटरव्यू यूट्यूब पर जारी किया गया, जिसे अब तक 1.3 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है।

 

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थियोब्रोमा ने आनंद तोमर को चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर नियुक्त किया

आनंद तोमर ने थियोब्रोमा में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह एलाइड ब्लेंडर्स, मैकडॉनल्ड्स और मैरिको में टेक्नोलॉजी और आईटी से जुड़ी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुके हैं।

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Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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आनंद तोमर (Anand Tomar) ने थियोब्रोमा (Theobroma) में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (Chief Technology Officer) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। वह कंपनी के टेक्नोलॉजी फंक्शन (Technology Function) का नेतृत्व करेंगे।

थियोब्रोमा से पहले तोमर एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स लिमिटेड (Allied Blenders & Distillers Ltd.) में चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर (Chief Information Officer) थे। उन्होंने मई 2025 से सितंबर 2026 तक इस भूमिका में कंपनी की टेक्नोलॉजी और आईटी एजेंडा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली।

इससे पहले तोमर मैकडॉनल्ड्स (McDonald’s) से जुड़े थे, जहां उन्होंने अगस्त 2021 से मई 2025 तक हेड ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Head of Information Technology) के रूप में काम किया।

तोमर ने मैरिको लिमिटेड (Marico Limited) के साथ भी छह साल से ज्यादा समय तक काम किया। वह फरवरी 2015 से अगस्त 2021 तक कंपनी में टेक्नोलॉजी लीड (Technology Lead) रहे। उनके अनुभव में टेक्नोलॉजी लीडरशिप, सिस्टम इंटीग्रेशन और आईटी मैनेजमेंट शामिल हैं।

थियोब्रोमा में नई भूमिका में तोमर कंपनी की टेक्नोलॉजी स्ट्रैटेजी और डिजिटल पहलों (Digital Initiatives) का नेतृत्व करेंगे। कंपनी अपने ऑपरेशंस को आगे बढ़ा रही है और इसी विस्तार के बीच वह टेक्नोलॉजी से जुड़े काम की जिम्मेदारी संभालेंगे।

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कर्नाटक कोर्ट ने मीडिया को बिना पुष्टि वाली इस मामले की खबरें प्रकाशित करने से रोका

कर्नाटक की एक अदालत ने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को व्यक्ति और उसके परिवार से जुड़ी बिना पुष्टि वाली, आधारहीन या मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित और प्रसारित करने से रोक दिया है।

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Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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कर्नाटक की एक अदालत ने एक व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों से जुड़े मामले में मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बिना पुष्टि वाली, आधारहीन, मानहानिकारक या पक्षपातपूर्ण कंटेंट प्रकाशित और प्रसारित करने से रोक दिया है। अदालत ने मामले में एकतरफा अस्थायी रोक (एक्स-पार्टी टेंपरेरी इंजंक्शन) का आदेश दिया है।

अदालत ने कहा कि यह ऐसा मामला है, जिसमें अगर प्रतिवादियों को पहले नोटिस जारी किया गया और इस दौरान समय बीत गया, तो राहत देने का उद्देश्य ही खत्म हो सकता है। इसी वजह से अदालत ने नोटिस जारी करने से पहले ही अस्थायी रोक लगाने को उचित माना।

अदालत के आदेश के मुताबिक, प्रतिवादी, उनके कर्मचारी या उनकी ओर से काम करने वाला कोई भी व्यक्ति अगली सुनवाई तक शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों से संबंधित ऐसी खबर, लेख, हेडलाइन, ऑडियो, वीडियो, इंटरव्यू आदि को प्रसारित, प्रकाशित, लिख, साझा या अपलोड नहीं कर सकता, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है।

यह रोक विधान सौधा पुलिस द्वारा क्राइम नंबर 89/2026 में की जा रही जांच और कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़े कथित घोटाले में ED, CID और SIT की जांच से संबंधित कंटेंट पर लागू होगी।

पहले से प्रकाशित कंटेंट हटाने का भी निर्देश

अदालत ने केवल नई कंटेंट प्रकाशित करने पर रोक नहीं लगाई, बल्कि पहले से प्रकाशित कंटेंट को लेकर भी निर्देश दिया है। शिकायतकर्ता ने अदालत से ऐसी कंटेंट हटाने के लिए अनिवार्य रोक लगाने की मांग की थी।

इस पर अदालत ने संबंधित प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों के बारे में प्रकाशित या अपलोड की गई ऐसी खबरें, लेख, इंटरव्यू, ऑडियो और वीडियो को निष्क्रिय किया जाए, जिनमें आधारहीन खबरें दी गई हैं।

24 प्रतिवादियों के खिलाफ दायर किया मुकदमा

शिकायतकर्ता ने 24 नामित प्रतिवादियों के खिलाफ स्थायी रोक लगाने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया था। इन प्रतिवादियों में बड़े टेलीविजन न्यूज चैनल, अखबार और गूगल, मेटा यानी फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

शिकायतकर्ता, जो खुद को तुमकुरु विश्वविद्यालय के सिंडिकेट का सदस्य बताता है, ने आरोप लगाया कि उसकी गिरफ्तारी के बाद कुछ मीडिया संस्थानों ने उसके खिलाफ 'मीडिया ट्रायल' किया।

उसका आरोप है कि मीडिया रिपोर्टों में उसे इस घोटाले का 'किंगपिन' और 'बिचौलिया' बताया गया। इसके अलावा कुछ खबरों में ऐसे सवाल और दावे भी किए गए, जैसे वह पांच साल में शून्य से करोड़पति कैसे बन गया और उसने कथित अपराध से मिले पैसों से जमीन खरीदी।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इन आरोपों को बिना पर्याप्त पुष्टि के इस तरह पेश किया गया, जैसे वे साबित तथ्य हों। उसके मुताबिक, ऐसी रिपोर्टों से उसकी प्रतिष्ठा और समाज में उसकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है।

KPSC भर्ती घोटाले से जुड़ा है मामला

यह मामला कर्नाटक लोक सेवा आयोग की पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले से संबंधित है। मामले में विधान सौधा पुलिस के अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED), अपराध जांच विभाग (CID) और विशेष जांच दल (SIT) की जांच का भी उल्लेख अदालत के आदेश में किया गया है।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर को कर्नाटक हाई कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें KPSC की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए SIT गठित करने और नए सिरे से जांच कराने का आदेश दिया गया था।

अदालत का मौजूदा आदेश अगली सुनवाई तक शिकायतकर्ता और उसके परिवार के खिलाफ जांच से जुड़ी ऐसी कंटेंट के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाता है, जिसे आधारहीन या अपुष्ट बताया गया है।

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गीता प्रेस की पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी समारोह में शामिल होंगे सीएम योगी

गीता प्रेस की पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी समारोह का आयोजन 7 अक्टूबर को गोरखपुर में होगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे और कई विद्वान संबोधित करेंगे।

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Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
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गोरखपुर में गीता प्रेस की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी समारोह का आयोजन 7 अक्टूबर को किया जाएगा। शाम 4 बजे होने वाले इस समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।

यह आयोजन श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार के 134वें जयंती महोत्सव के अवसर पर किया जा रहा है। समारोह में देश के कई प्रख्यात विद्वान और विचारक ‘कल्याण’ की 100 साल की वैचारिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा पर अपने विचार रखेंगे।

समारोह को पूर्व सांसद प्रो. राकेश सिन्हा, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय, भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक डा. ओमजी उपाध्याय संबोधित करेंगे।

‘कल्याण’ ने एक शताब्दी से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चिंतन और नैतिक जीवन-मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह पत्रिका भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम रही है। शताब्दी समारोह में इसकी ऐतिहासिक भूमिका, वैचारिक योगदान और आज के समाज में इसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा होगी।

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महिला पत्रकार से यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच दिल्ली पुलिस के ACP का प्रमोशन

एक महिला पत्रकार से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को सोमवार को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद पर प्रमोट किया गया है।

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Published - Tuesday, 06 October, 2026
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Tuesday, 06 October, 2026
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दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को सोमवार को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (Additional Deputy Commissioner) के पद पर प्रमोट किया गया है। उनके साथ 11 अन्य पुलिस अधिकारियों को भी प्रमोशन दिया गया है।

एक आधिकारिक आदेश के मुताबिक, प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों में डॉ. विकास श्योकंद, ए. वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेणु लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, सकारिया मिहिर प्रवीनभाई, गरिमा तिवारी, विवेक भगत, आशीष कुमार, मनीष लडला और रोहित गुप्ता शामिल हैं।

पुलिस ने प्रमोशन को बताया नियमित प्रक्रिया

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ये प्रमोशन नियमित प्रक्रिया के तहत किए गए हैं और प्रमोशन के लिए अनुरोध काफी पहले ही भेजा गया था।

तीन महिला पत्रकारों ने लगाए थे आरोप

यह मामला 3 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। इस प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस को इन मामलों में शिकायतें मिली थीं और आगे की जांच के लिए इन्हें क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।

दिल्ली पुलिस ने रविवार को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बताया था कि 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी थी। इसी दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। पुलिस के मुताबिक, निष्पक्ष और उचित जांच के लिए शिकायतों को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया गया है। इन आरोपों के बाद कई स्वतंत्र पत्रकारों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन भी किया और आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

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SEBI ने चंडीगढ़ में खोला स्थानीय कार्यालय, पंजाब-हरियाणा के निवेशकों को मिलेगी सुविधा

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने चंडीगढ़ में अपना स्थानीय कार्यालय शुरू किया है।

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Published - Tuesday, 06 October, 2026
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Tuesday, 06 October, 2026
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने चंडीगढ़ में अपना स्थानीय कार्यालय शुरू किया है। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को चंडीगढ़ में इस स्थानीय कार्यालय का उद्घाटन किया।

SEBI का चंडीगढ़ स्थानीय कार्यालय SCO नंबर 20-25, दूसरी मंजिल, जीवन प्रकाश बिल्डिंग, सेक्टर 17B, चंडीगढ़-160017 में स्थित है।

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लिए काम करेगा

चंडीगढ़ स्थित यह स्थानीय कार्यालय पंजाब और हरियाणा राज्यों तथा चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को कवर करेगा। यह कार्यालय SEBI के नई दिल्ली स्थित नॉर्दर्न रीजनल ऑफिस के प्रशासनिक नियंत्रण और अधिकार क्षेत्र के तहत काम करेगा।

निवेशकों की शिकायतों के निपटारे में मदद करेगा

चंडीगढ़ स्थानीय कार्यालय के प्रमुख कामों में सूचीबद्ध कंपनियों और बाजार से जुड़े बिचौलियों के खिलाफ निवेशकों की शिकायतों के निपटारे में मदद करना शामिल होगा।

इसके अलावा, कार्यालय के जरिए निवेशकों के बीच निवेशक शिक्षा और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को निवेश और वित्तीय मामलों से जुड़ी जानकारी देने और उनकी समझ बढ़ाने में मदद करना है।

SME और दूसरे बाजार से जुड़े क्षेत्रों पर भी रहेगा फोकस

SEBI का यह स्थानीय कार्यालय अपने अधिकार क्षेत्र में जारीकर्ता मंच (Issuers Forum), छोटे और मध्यम उद्यम (SMEs), सोशल स्टॉक एक्सचेंज, म्युनिसिपल बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों और संस्थाओं के साथ भी संपर्क करेगा। इसके अलावा, स्थानीय कार्यालयों को समय-समय पर सौंपे जाने वाले दूसरे काम भी यह कार्यालय करेगा।

SEBI के मुताबिक, चंडीगढ़ में स्थानीय कार्यालय खुलने से पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ क्षेत्र में निवेशकों से जुड़े मामलों और पूंजी बाजार से संबंधित गतिविधियों के लिए स्थानीय स्तर पर संपर्क और सुविधा उपलब्ध होगी।

 

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टीम पंपकिन ने स्वाति नाथानी को नियुक्त किया नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर

टीम पंपकिन ने को-फाउंडर स्वाति नाथानी को नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त किया है। वह बिजनेस स्ट्रैटेजी और ग्रोथ का नेतृत्व करते हुए एजेंसी की इंटीग्रेटेड क्षमताओं को मजबूत करेंगी।

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Published - Monday, 05 October, 2026
Last Modified:
Monday, 05 October, 2026
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टीम पंपकिन (Team Pumpkin) ने अपनी को-फाउंडर स्वाति नाथानी (Swati Nathani) को नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (Chief Executive Officer) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह एजेंसी की बिजनेस स्ट्रैटेजी और ग्रोथ का नेतृत्व करेंगी।

स्वाति ने 2012 में टीम पंपकिन की सह-स्थापना की थी और डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस से एक इंटीग्रेटेड मार्केटिंग पार्टनर के तौर पर एजेंसी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नई जिम्मेदारी में उनका फोकस क्रिएटिव, परफॉर्मेंस, टेक्नोलॉजी, कम्युनिकेशंस और कॉमर्स को करीब लाने पर रहेगा।

स्वाति ने कहा कि एजेंसी बिजनेस में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में तेजी से बदलाव हो रहा है। एआई (AI) एक्सीक्यूशन के तरीके बदल रहा है, जबकि प्लेटफॉर्म ब्रांड्स की खोज के तरीके को प्रभावित कर रहे हैं। क्लाइंट्स अब आइडिया से बिजनेस रिजल्ट तक कम से कम साइलो चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि टीम पंपकिन का लक्ष्य हर नई टेक्नोलॉजी के पीछे भागना नहीं, बल्कि ऐसी एजेंसी तैयार करना है जो यह समझ सके कि टेक्नोलॉजी कहां वैल्यू जोड़ती है और कहां ह्यूमन जजमेंट सबसे ज्यादा जरूरी है।

स्वाति के नेतृत्व में टीम पंपकिन ब्रांड स्ट्रैटेजी, क्रिएटिव, डिजिटल, परफॉर्मेंस मार्केटिंग, सोशल मीडिया, पीआर, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, टेक्नोलॉजी और मार्केटप्लेस सर्विसेज में अपनी इंटीग्रेटेड पेशकश को मजबूत करेगी। एजेंसी एआई-आधारित क्षमताओं को भी आगे बढ़ाएगी।

स्वाति के अनुभव में ब्रांडिंग, डिजिटल स्ट्रैटेजी, एनालिटिक्स, एंटरप्रेन्योरशिप और टेक्नोलॉजी शामिल हैं। उनका अनुभव क्रिएटिव और बिजनेस सोच के बीच संतुलित नजरिया बनाने में मदद करता है।

टीम पंपकिन के अगले चरण में इंटीग्रेटेड क्षमताओं को मजबूत करने, टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं का विस्तार करने, लीडरशिप टीम को मजबूत करने, ग्लोबल विस्तार बढ़ाने और कम्युनिकेशन को मापने योग्य बिजनेस ग्रोथ से जोड़ने पर जोर रहेगा।

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मोहित चेरियन बने डियाजियो इंडिया में वाइस प्रेसिडेंट- कस्टमर मार्केटिंग

मोहित चेरियन को डियाजियो इंडिया में वाइस प्रेसिडेंट – कस्टमर मार्केटिंग बनाया गया है। वह भारत में कस्टमर मार्केटिंग एजेंडा का नेतृत्व करते हुए ब्रांड्स और कैटेगरी को मजबूत बनाने पर काम करेंगे।

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Published - Monday, 05 October, 2026
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Monday, 05 October, 2026
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मोहित चेरियन (Mohit Cherian) को डियाजियो इंडिया (Diageo India) में वाइस प्रेसिडेंट – कस्टमर मार्केटिंग (Vice President – Customer Marketing) के पद पर पदोन्नत किया गया है। अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा की। इस भूमिका में वह भारत में कस्टमर मार्केटिंग एजेंडा का नेतृत्व करेंगे और डियाजियो के ब्रांड्स व कैटेगरी को आकार देने और मजबूत बनाने पर काम करेंगे।

इससे पहले चेरियन डियाजियो इंडिया में कैटेगरी डायरेक्टर (Category Director) के तौर पर काम कर रहे थे। उससे पहले वह सीनियर जनरल मैनेजर, ब्रांड मार्केटिंग (Senior General Manager, Brand Marketing) की भूमिका में थे, जहां उन्होंने कंपनी के बीआईआई स्कॉचेज (BII Scotches) पोर्टफोलियो की मार्केटिंग संभाली।

चेरियन 2020 में डियाजियो इंडिया से जुड़े थे। उन्होंने कंपनी की इनोवेशन टीम (Innovation Team) से अपना सफर शुरू किया और बाद में ब्रांड मार्केटिंग में आए। इस दौरान उन्होंने रॉयल चैलेंज (Royal Challenge) और मैकडॉवेल्स नंबर 1 (McDowell’s No.1) जैसे ब्रांड्स पर काम किया।

रॉयल चैलेंज के साथ उन्होंने ब्रांड की री-पोजिशनिंग और विराट कोहली (Virat Kohli) के साथ ‘नया शेर’ (Naya Sher) कैंपेन पर काम किया। वहीं, मैकडॉवेल्स नंबर 1 के विकास और पोर्टफोलियो से जुड़ी पहलों में भी उनकी भूमिका रही, जिसमें एक्स-सीरीज (X-Series) और सिंगल माल्ट (Single Malt) पेशकश शामिल है।

डियाजियो इंडिया से पहले चेरियन आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल (Aditya Birla Fashion and Retail) में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट और एलन सॉली (Allen Solly) के हेड ऑफ मार्केटिंग रह चुके हैं। उन्होंने ओगिल्वी (Ogilvy) और मैनेजमेंट कंसल्टिंग के क्षेत्र में भी काम किया है।

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