प्रो.वेद प्रकाश वटुक द्वारा लिखी किताब ‘आजादी या मौत’ की समीक्षा

विश्व प्रसिद्व साहित्यकार व समाजशास्त्री प्रो. वेद प्रकाश ‘वटुक’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘आजादी या मौत’ की समीक्षा समीक्षक आरिफा एविस ने की है, जिसे आफ यहां पढ़ सकते हैं: हम इतिहास के ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां इतिहास को खासकर भारतीय इतिहास को बदलने की नाकाम कोशिश की जा रही है। भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन और उससे जुड़े तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत

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Published - Tuesday, 24 November, 2015
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Tuesday, 24 November, 2015
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विश्व प्रसिद्व साहित्यकार व समाजशास्त्री प्रो. वेद प्रकाश ‘वटुक’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘आजादी या मौत’ की समीक्षा समीक्षक आरिफा एविस ने की है, जिसे आफ यहां पढ़ सकते हैं: हम इतिहास के ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां इतिहास को खासकर भारतीय इतिहास को बदलने की नाकाम कोशिश की जा रही है। भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन और उससे जुड़े तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है। इतिहास के ऐसे कठिन दौर में भारतीय इतिहास को समृद्ध करती वेद प्रकाश ‘वटुक’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘आजादी या मौत’ गदर आन्दोलन की एक ऐसी दास्तान है जो अभी अकथ रही है। वेद प्रकाश ‘वटुक’ की यह पुस्तक संस्मरणात्मक रूप से अपनी बात कहती है कि 1848 से लेकर 1910 तक भारत के लोग अमरीका, कनाडा, इंग्लैण्ड में जहां एक तरफ उच्च शिक्षा प्राप्त करने गए वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग अपनी गरीबी मिटाने गए थे-“भारतीय छात्र ब्रिटेन ही जाते थे क्योंकि वह शिक्षा उन्हें ऊंचे सरकारी पदों के लिए तैयार करने के लिए सहायक होती थी...” इसी शिक्षा का परिणाम था कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन में कालान्तर में भाग लेने वाले नेताओं का भी निर्माण हुआ। गांधी, नेहरू, जिन्ना आदि उसी शिक्षा की उपज थे। छात्रों का एक वर्ग ऐसा भी था जो भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे जिनमें तारकनाथ दास, सुधीन्द्र बोस, प्रफुल्ल मुखर्जी आदि प्रमुख थे। दूसरी तरफ वे भारतीय लोग भी आये जो अपनी गरीबी का दुर्भाग्य मिटाना चाहते थे। उन्हें तो जो भी काम जहां भी मिलता, जितनी भी पगार पर मिलता कर लेते। साथ ही उन देशों के नस्लभेदी, द्वेषी विशाल समाज के कोप से अपना अस्तित्व बचाना भी एक चुनौती थी। और इन मुश्किलों के बावजूद वे स्त्रीविहीन, परिवार विहीन एकांकी पुरुष एक दूसरे का सहारा बनकर जीने को विवश थे। विदेशों में भारतीय नागरिक घृणा, उत्पीड़न और शोषण का शिकार हो रहे थे। उसी दौरान सोहन सिंह भकना और उसके दोस्त काम ढूंढने गए थे। जब वे अमरीका के सुपरिटेंडेंट से मिले तो उनका जवाब सुनकर शर्म से गर्दन झुकाकर वापस चले आये। “काम तो है पर तुम्हारे लिए नहीं... मेरा दिल तो करता है तुम दोनों को गोली मार दूं। …तुम्हारे देश की कितनी आबादी है? ये तीस करोड़ आदमी हैं या भेड़ें? जो तुम तीस करोड़ आदमी होते तो गुलाम क्यों होते? गुलाम क्यों रहते… मैं तुम दोनों को एक-एक बन्दूक देता हूं। जाओ पहले अपने देश को आजाद कराओ। जब आजाद कराके अमरीका आओगे तो मैं तुम्हारा स्वागत करूंगा।” जब भारतीय लोगों के लिए अमरीका, कनाडा इत्यादि देशों के दरवाजे बंद होने लगे तो भारतीय अप्रावासियों की त्रासदी निरंतर बढ़ने लगी। तमाम विरोध प्रदर्शन, सभाओं एवं लिखित प्रेस विज्ञप्ति के बाद भी भारतीयों के समर्थन में कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आया। “धीरे-धीरे भारतीयों की समझ में यह आने लगा कि ब्रिटेन साम्राज्य की रक्षा/सेवा में चाहे वे अपना तन-मन-धन सबकुछ न्यौछावर कर दें, तो भी किसी भी गोरों के उपनिवेश में आदर नहीं पा सकते। इसी चिन्तन ने ब्रिटिश सरकार परस्त लोगों के मन में राष्ट्रीयता और एकता की भावना को जन्म दिया। विदेशी धरती पर 1909 में ‘हिन्दुस्तान एसोसिएशन की स्थापना हुई। बदलती परिस्थितियों में यह संस्था भारतीयों के हित की रक्षा के लिए कटिबद्ध थी।” 1913 तक आते-आते गदर पार्टी की नींव रख दी जाती है इसने पूर्ण स्वराज के नारे को कांग्रेस से भी पहले अपना लिया था। ‘गदर’ का यह नारा बहुत प्रचलित था- “जब तक भारत पूर्णरूप से राजनीतिक ही नहीं सामाजिक और आर्थिक आजादी भी प्राप्त नहीं कर लेता, हमारी जंग जारी रहेगी।” ‘गदर’ की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी कि इस अखबार को ‘गदर पार्टी’ के नाम से जाना जाने लगा। गदर पार्टी के सदस्यों ने जिस आजाद भारत का सपना देखा था। उसको व्यावहारिक रूप से जीने की कोशिश करने लगे- “धार्मिक अभिवादनों का स्थान ‘वंदेमातरम्’ ने ले लिया। जूते और धर्म दरवाजे से बाहर रखकर वे वहां शुद्ध भारतीय होकर जीते, साथ पकाते, साथ घर की देखभाल करते और साथ मिलकर ‘गदर’ निकलते।” गदर पार्टी की सक्रियता ने अमरीका, कनाडा और ब्रिटेन की सरकार को हिलाकर रख दिया। परिणामस्वरूप उन्होंने भेदियों को ‘गदर’ नेताओं के पीछे लगा दिया। लेकिन गदर ने धीरे-धीरे अपनी पहचान आम लोगों में बनानी शुरू कर दी थी। 25 मार्च 1914 को दिए गए हरदयाल के भाषण ने पूरी सभा को इतना प्रभावित एवं उत्तेजित किया कि लोग देश की आजादी के लिए स्वदेश लौटने की तयारी करने लगे। उन्होंने अपने भाषण में कहा था- “वह दिन दूर नहीं जब मजदूर जागेंगे, किसान जागेंगे, शोषित कुचले हुए लोग जागेंगे, बराबरी का हक़ मागेंगे, इन्सान की तरह जीने का अधिकार मांगेंगे। उसके लिए प्राणों का उत्सर्ग करेंगे- उनकी ताकत के आगे न अन्याय टिकेगा न झूट भरा जालिम राज।” 4 अगस्त 1941 को ब्रिटेन द्वारा जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा होते ही ‘गदर’ सदस्यों ने घोषणा कर दी कि अब वक्त आ गया है भारत की गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने का समय आ गया है। गदर पार्टी के नेताओं के संदेशों में अपील जारी की जाने लगी कि भारत में जाकर जनता में क्रांति का सन्देश फैलाये। मौलाना बरकत उल्लाह भोपाली ने अपने सन्देश में कहा “भाइयों, आप लोग दुनिया के बेहतरीन मुजाहिदीन हैं। धर्म की आड़ में दूसरे मजहबों के बेबस लोगों को मारने वाले नहीं, शैतानी राज को जड़ से उखाड़ने वाले मुजाहिदीन, हर लाचार की पांव की बेड़ियां काटने वाले मुजाहिदीन, गुलामी की जंजीरों के टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने वाले, जालिम को मिटाने वाले मुजाहिदीन। पर याद रखो, आजादी गोरों की जगह काले साहबों को बिठा देना नहीं।” देखते ही देखते 60 से 80 प्रतिशत अप्रवासी भारतीय बलिदान होने के लिए भारत लौट आये। यह विश्व इतिहास की सबसे अभूतपूर्व घटना इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो गयी। रास बिहारी के गदर पार्टी में शामिल होते ही ‘गदर’ साहित्य जनता के विभिन्न तबकों तक पहुंचने लगा। उसने सैनिकों के लिए गदर साहित्य पहुंचाना शुरू कर दिया ताकि एक दिन सैनिक विद्रोह किया जा सके। इसी दौरान राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण भी कर लिया गया था। ऐसा लग रहा था कि क्रांति का सपना साकार होने वाला है लेकिन अचानक ही पार्टी के एक सदस्य ने विश्वासघात करके बहुत से साथियों को पकड़वा दिया। देश विदेश में गदरी नेताओं पर ‘वैधानिक सरकार को पलटने’ के षड्यंत्र में सामूहिक मुकदमा चलाया गया। मुकदमे के दौरान गदरियों ने बार बार कहा “बंद करो यह ड्रामा, दे दो हमें फांसी।” फैसले के दिन जब सभी को मृत्युदंड मिला और उनके साथी ज्वाला सिंह को आजीवन कारावास तो वो चीख पड़ा “जब मेरे साथियों को मौत की सजा मिली है, तो मुझे उम्रकैद क्यों?” ऐसे थे आजादी के दीवाने जिन्होंने फांसी के तख्ते को हंसते गाते चूम लिया। कोठरी में करतार सिंह के द्वारा कोयले से लिखे गए वे शब्द आज भी सच्ची आजादी की उम्मीद बनाये रखते हैं- “शहीदों का खून कभी खाली नहीं जाता। आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसो जरूर ही बाहर जाकर रंग लायेगा।” गदर आन्दोलन के विफल होने के बाद जो भी गदरी बचे थे उन्होंने अपनी नाकामयाबी से सबक लिया और आत्मकेन्द्रित योजना न बनाकर जनकेन्द्रित योजनाओं पर अमल करना शुरू कर दिया। इस तरह उन्होंने नये सिरे से जन आन्दोलन को विकसित करना शुरू किया जिसमे सोहन सिंह भकना किसान आन्दोलन के मेरुदंड बनकर उभरे। देश तो आजाद हो गया लेकिन सोहन सिंह भकना ने आजाद भारत की सरकार के बर्ताव पर रोस जताया- “मुझे इस बात का फख्र है कि कौम की दुश्मन अंग्रेज सरकार मेरी कमर न झुका सकी, जो अभी झुकी है तो उन्हीं मित्रों की सरकार के कारण जिनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़कर हमने आजादी की लड़ाई लड़ी थी।” यह पुस्तक पाठकों की इतिहासबोध चेतना को उन्नत करने में सहायता करती है क्योंकि समाज के इतिहास में प्रत्येक व्यक्ति का अपना इतिहास और योगदान होता है। गदर आन्दोलन के इतिहास की रौशनी में हम भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन को भी आसानी से समझ सकते हैं। आजादी या मौत : वेद प्रकाश वटुक | गार्गी प्रकाशन | कीमत 130 रुपये | पेज 192

 

 

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हैप्पी बर्थडे सरवेश बागला: डिजिटल मार्केटिंग में बनाई खास पहचान

टेकमैग्नेट आज SEO, PPC, कंटेंट मार्केटिंग और वेब डेवलपमेंट जैसी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी को गूगल प्रीमियर पार्टनर (Google Premier Partner) के रूप में भी पहचान मिली है।

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Published - Monday, 24 August, 2026
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डिजिटल मार्केटिंग की दुनिया में करीब दो दशक से सक्रिय सरवेश बागला (Sarvesh Bagla) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने 2006 में टेकमैग्नेट (Techmagnate) की शुरुआत की थी और समय के साथ इसे भारत की जानी-मानी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों में शामिल किया।

टेकमैग्नेट आज SEO, PPC, कंटेंट मार्केटिंग और वेब डेवलपमेंट जैसी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी को गूगल प्रीमियर पार्टनर (Google Premier Partner) के रूप में भी पहचान मिली है। बागला के नेतृत्व में एजेंसी को विभिन्न इंडस्ट्री ट्रैकर्स ने भारत की प्रमुख SEO और डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों में जगह दी है।

बागला की शैक्षणिक पृष्ठभूमि गणित और टेक्नोलॉजी से जुड़ी रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से गणित में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट से मास्टर्स ऑफ इंफॉर्मेशन सिस्टम्स और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से मास्टर्स ऑफ साइंस इन इंफॉर्मेशन नेटवर्किंग की पढ़ाई की।

उद्यमिता की दुनिया में आने से पहले वह अमेरिका में वेरिजॉन (Verizon) के साथ सॉफ्टवेयर और सिस्टम्स आर्किटेक्ट के तौर पर काम कर चुके हैं। उन्होंने WFM India की सह-स्थापना की और ब्लॉगर्स व कंटेंट क्रिएटर्स के लिए BlogX भी शुरू किया।

उनके करियर की खास उपलब्धियों में बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv) के साथ किया गया काम भी शामिल है। कंपनी के मुताबिक, टेकमैग्नेट की टीम ने कैंपेन शुरू होने के करीब 18 महीनों के भीतर ‘पर्सनल लोन’ जैसे प्रतिस्पर्धी कीवर्ड पर ब्रांड को शीर्ष रैंकिंग तक पहुंचाने में मदद की।

आज टेकमैग्नेट BFSI, हेल्थकेयर, ऑटोमोटिव और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों के लिए डिजिटल मार्केटिंग समाधान उपलब्ध करा रही है। एक सिस्टम आर्किटेक्ट से डिजिटल मार्केटिंग उद्यमी तक बागला का सफर एजेंसी इंडस्ट्री में उनकी अलग पहचान को दर्शाता है।

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FSSAI की कार्रवाई: Marche Retail का लाइसेंस सस्पेंड, SDP Industries के घी की बिक्री पर रोक

खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है।

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Published - Monday, 24 August, 2026
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Monday, 24 August, 2026
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खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। इसके अलावा दमन की SDP Industries Pvt Ltd को अपने घी उत्पादों की बिक्री करने से रोक दिया गया है।

FSSAI ने रविवार को बताया कि Marche Retail के परिसर में निरीक्षण और उसके बाद की जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों से जुड़े कई मामलों में कमियां पाई गईं।

कई स्तरों पर मिली कमियां

नियामक के मुताबिक, Marche Retail के यहां मिली कमियां सिर्फ किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं थीं। जांच में प्रतिष्ठान के डिजाइन और संचालन से जुड़े नियमों, साफ-सफाई, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, फूड हैंडलर्स की ट्रेनिंग और जरूरी रिकॉर्ड रखने से जुड़े नियमों में भी खामियां सामने आईं।

FSSAI ने इन कमियों को खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन से जुड़ी गंभीर चूक के तौर पर देखा और इसके बाद कंपनी के लाइसेंस को 30 दिनों के लिए निलंबित करने की कार्रवाई की।

SDP Industries के घी की बिक्री पर रोक

इसके साथ ही FSSAI ने SDP Industries Pvt Ltd, जो दमन में स्थित है, के घी उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगा दी है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई प्रवर्तन कार्रवाई का हिस्सा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में SDP Industries के मामले में उल्लंघन की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

FSSAI की ताजा कार्रवाई से साफ है कि खाद्य नियामक अब सिर्फ उत्पादों की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, कर्मचारियों की ट्रेनिंग, व्यक्तिगत स्वच्छता और जरूरी रिकॉर्ड रखने जैसे नियमों के पालन पर भी सख्ती से नजर रख रहा है।

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Dream11 का बड़ा बदलाव, Real-Money Gaming से हटकर अब फैन एंगेजमेंट और फ्री कंटेस्ट पर जोर

Dream11 अपने पहले वाले Real-Money Gaming (RMG) मॉडल से फोकस हटाकर अब स्पोर्ट्स फैंस के लिए कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले पर ज्यादा ध्यान देगी।

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Published - Monday, 24 August, 2026
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Monday, 24 August, 2026
Dream11

फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म Dream11 अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करता नजर आ रहा है। कंपनी ने यूजर्स को बताया है कि वह अपने पहले वाले Real-Money Gaming (RMG) मॉडल से फोकस हटाकर अब स्पोर्ट्स फैंस के लिए कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले पर ज्यादा ध्यान देगी। हालांकि, प्लेटफॉर्म पर फ्री कंटेस्ट जारी रहेंगे।

Dream11 ने यूजर्स को भेजे एक नोटिफिकेशन में कहा है कि वह नए फोकस के साथ खुद को स्पोर्ट्स फैंस के लिए 'सिंगल डेस्टिनेशन' के तौर पर तैयार कर रहा है। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि यूजर्स फ्री कंटेस्ट में हिस्सा लेना जारी रख सकते हैं। इसके साथ ही Dream11 ने बताया कि जिन यूजर्स की एक्टिव सब्सक्रिप्शन फीस है, उसे 72 घंटे के भीतर रिफंड कर दिया जाएगा।

क्या Dream11 बंद हो रहा है?

Dream11 के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या कंपनी अपना पेड गेमिंग बिजनेस पूरी तरह बंद करने जा रही है या फिर प्लेटफॉर्म का नया वर्जन तैयार किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी के नोटिफिकेशन में प्लेटफॉर्म को बंद करने की बात नहीं कही गई है।

फिलहाल कंपनी के संदेश से इतना साफ है कि उसके पुराने मॉडल में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। पेड कंटेस्ट और सब्सक्रिप्शन को पीछे किया जा रहा है, जबकि फ्री कंटेस्ट, स्पोर्ट्स कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।

Online Gaming Act के बीच आया बदलाव

Dream11 का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत का ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर रेगुलेटरी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। Online Gaming Act, 2025 के बाद रियल-मनी ऑनलाइन गेमिंग को लेकर देश में नियम काफी सख्त हुए हैं।

इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ रही है। इन मामलों में यह तय होना है कि स्किल और चांस दोनों तरह के पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स पर लागू प्रतिबंध आगे भी जारी रहेगा या नहीं। ऐसे माहौल में Dream11 का अपने पुराने रियल-मनी मॉडल से फोकस हटाना इंडस्ट्री के लिए अहम माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज

Dream11 के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि कंपनी अपने पुराने बिजनेस मॉडल को छोड़ रही है, जबकि कुछ का कहना है कि Dream11 अब खुद को सोशल गेमिंग और स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म के तौर पर नए सिरे से पेश कर सकता है।

इस बदलाव का असर पूरे फैंटेसी स्पोर्ट्स सेक्टर पर पड़ने को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि अगर भारत में रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स का कारोबार काफी कम होता है, तो खिलाड़ी विदेशी या ऑफशोर गेमिंग सेवाओं की तरफ जा सकते हैं। वहीं, कुछ लोग पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय स्पष्ट रेगुलेशन की मांग कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक प्रतिक्रिया में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या यह Dream11 के पुराने मॉडल के अंत की शुरुआत है। फैंटेसी स्पोर्ट्स में मनोरंजन और मुकाबले के साथ पैसे जीतने का मौका भी होता था, लेकिन रेगुलेटरी बहस के दौरान इसे लेकर जुए से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं।

फिलहाल बंद नहीं, लेकिन दिशा जरूर बदली

फिलहाल Dream11 की तरफ से आया संदेश कंपनी के बंद होने के बजाय बिजनेस मॉडल में बदलाव की ओर इशारा करता है। सब्सक्रिप्शन फीस को 72 घंटे के भीतर रिफंड करने और फ्री कंटेस्ट जारी रखने की बात के साथ कंपनी अब स्पोर्ट्स फैंस को जोड़ने, कंटेंट और सोशल गेमिंग पर ज्यादा ध्यान देती नजर आ रही है। यानी Dream11 के अगले दौर में फोकस रियल-मनी दांव के बजाय स्पोर्ट्स फैनडम और एंगेजमेंट पर रहने वाला है।

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बॉबी पवार ने लॉन्च किया पहला कविता संग्रह ‘An Empty Heart Is a Loaded Gun’

एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के जाने-माने नाम बॉबी पवार ने अपने रचनात्मक सफर का एक नया अध्याय शुरू किया है। कविता संग्रह का लॉन्च 21 अगस्त को हुआ, जिसमें एडवर्टाइजिंग व मार्केटिंग जगत के दिग्गज मौजूद रहे।

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Published - Sunday, 23 August, 2026
Last Modified:
Sunday, 23 August, 2026
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एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के जाने-माने नाम बॉबी पवार ने अपने रचनात्मक सफर का एक नया अध्याय शुरू किया है। उन्होंने अपना पहला कविता संग्रह ‘An Empty Heart Is a Loaded Gun’ लॉन्च किया है।

पुस्तक का लॉन्च 21 अगस्त को हुआ, जिसमें एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग जगत के प्रमुख लोग मौजूद रहे। यह पुस्तक कविता के जरिए भावनाओं, रिश्तों, पहचान और मानवीय अनुभवों जैसे विषयों को सामने लाती है।

भारत और अमेरिका में एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में काम कर चुके बॉबी पवार ने अपने करियर की शुरुआत Ogilvy India से की थी। इसके बाद उन्होंने DDB Mudra, JWT और Publicis जैसी प्रमुख एजेंसियों में वरिष्ठ क्रिएटिव लीडरशिप भूमिकाएं निभाईं।

बॉबी पवार ने नवंबर 2023 तक हवास (Havas) में चेयरमैन और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने एक स्वतंत्र क्रिएटिव के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की और अब अपना कविता संग्रह लॉन्च किया है।

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प्रणय रॉय से अरुण पुरी तक : राहुल कंवल ने गिनाए मीडिया बिल्डर्स

एनडीटीवी के सीईओ राहुल कंवल ने बताया कि मजबूत मीडिया संस्थान बनाने के लिए लीडर को दूसरे पत्रकारों को आगे बढ़ने और चमकने की जगह देनी चाहिए।

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Published - Saturday, 22 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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एनडीटीवी (NDTV) के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल (Rahul Kanwal) ने मीडिया संस्थान खड़ा करने की अपनी नेतृत्व सोच साझा की है। एक्सचेंज4मीडिया के साथ हालिया बातचीत में उन्होंने प्रणय रॉय (Prannoy Roy), अरुण पुरी (Aroon Purie) और राघव बहल (Raghav Bahl) जैसे मीडिया उद्यमियों का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे समय तक टिकने वाले संस्थान वही बना पाते हैं, जहां नेतृत्व दूसरे पत्रकारों और एडिटोरियल ब्रांड्स को उभरने का अवसर देता है।

राहुल कंवल ने बताया कि वह रोजाना प्राइम-टाइम शो की एंकरिंग से जानबूझकर दूर रहते हैं। उनके मुताबिक एडिटर-इन-चीफ को जरूरत पड़ने पर खुद पीछे हटना चाहिए, ताकि न्यूज़रूम में दूसरे लोगों को भी अपनी पहचान बनाने का मौका मिले।

कंवल ने एनडीटीवी (NDTV) में प्रणय रॉय के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि वह दूसरे पत्रकारों की लोकप्रियता को लेकर असुरक्षित नहीं थे। उनके दौर में राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai), बरखा दत्त (Barkha Dutt) और अरनब गोस्वामी (Arnab Goswami) जैसे पत्रकारों ने अपनी अलग पहचान बनाई।

इसी तरह उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) के अरुण पुरी का उदाहरण दिया, जिन्होंने प्रभु चावला (Prabhu Chawla) और शेखर गुप्ता (Shekhar Gupta) जैसे संपादकीय चेहरों को आगे बढ़ने की जगह दी। राघव बहल के नेटवर्क18 (Network18) का उल्लेख करते हुए भी उन्होंने मजबूत प्रतिभाओं के साथ संस्थान बनाने की इसी सोच को रेखांकित किया।

कंवल ने कहा कि उनकी अपनी नेतृत्व शैली भी ऐसे लोगों को साथ लाने पर आधारित है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में उनसे ज्यादा सक्षम हों। उनके मुताबिक, “आपसे बेहतर लोग ही किसी मूल्यवान संस्थान के निर्माण में योगदान देते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई लीडर असुरक्षा की भावना से अपने से कम सक्षम लोगों को नियुक्त करता रहेगा, तो वह कभी एक महान संगठन नहीं बना पाएगा।

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डियाजियो इंडिया में मोहित चेरियन बने कैटेगरी डायरेक्टर

मोहित चेरियन फरवरी 2020 से डियाजियो इंडिया के साथ जुड़े हुए हैं। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ब्रांड मार्केटिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

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Published - Friday, 21 August, 2026
Last Modified:
Friday, 21 August, 2026
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डियाजियो इंडिया (Diageo India) ने मोहित चेरियन को कैटेगरी डायरेक्टर (Category Director) के पद पर प्रमोट किया है। इससे पहले वह कंपनी में सीनियर जनरल मैनेजर, ब्रांड मार्केटिंग के तौर पर कार्यरत थे और BII Scotches के मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

मोहित चेरियन फरवरी 2020 से डियाजियो इंडिया के साथ जुड़े हुए हैं। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ब्रांड मार्केटिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। नई जिम्मेदारी में चेरियन डियाजियो इंडिया के कैटेगरी से जुड़े बिजनेस और ब्रांड मार्केटिंग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

डियाजियो इंडिया में शामिल होने से पहले चेरियन आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल (Aditya Birla Fashion and Retail) के साथ काम कर चुके हैं। वहां उनकी अंतिम भूमिका असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ मार्केटिंग - Allen Solly की थी।

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हैप्पी बर्थडे श्वेता सिंह: दर्शकों और न्यूज इंडस्ट्री के भरोसे का दूसरा नाम हैं आप

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और आजतक व गुड न्यूज टुडे की सीनियर मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह का आज जन्मदिन है।

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Published - Friday, 21 August, 2026
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Friday, 21 August, 2026
Sweta Singh ..

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और आजतक व गुड न्यूज टुडे की सीनियर मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह का आज जन्मदिन है। भारतीय मीडिया जगत में श्वेता सिंह एक जाना-पहचाना नाम हैं। बेबाक अंदाज़, गहरी समझ और पेशेवर दक्षता ने उन्हें लाखों दर्शकों की पहली पसंद बना दिया है। जटिल मुद्दों को सहज भाषा में समझाने की उनकी क्षमता और प्रभावशाली एंकरिंग शैली ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।

लगातार मेहनत और समर्पण के दम पर उन्होंने पत्रकारिता में नए मानक स्थापित किए हैं। करीब दो दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय श्वेता पिछले करीब दो दशक से ‘आजतक’ परिवार का हिस्सा हैं। उनके लंबे अनुभव और संतुलित प्रस्तुति ने उन्हें न्यूज रूम से लेकर दर्शकों तक हर जगह विशेष स्थान दिलाया है।

टीवी न्यूज़ की लगभग हर विधा में दक्ष श्वेता सिंह को अब तक सर्वश्रेष्ठ एंकर, सर्वश्रेष्ठ प्रड्यूसर और सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टर जैसे सम्मान मिल चुके हैं। साल 2016 में उन्होंने अलग-अलग आयोजनों में एक ही वर्ष में 12 अवॉर्ड हासिल कर इतिहास रच दिया था। यह उपलब्धि अब तक पत्रकारिता जगत में मिसाल मानी जाती है।

न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्पेस में उनके अनुकरणीय योगदान और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए श्वेता सिंह को प्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2023 में  ‘बेस्ट एंकर–हिंदी’ कैटेगरी में गोल्ड मेडल से नवाजा जा चुका है।

वर्तमान में श्वेता सिंह आजतक पर रात 8 बजे प्रसारित होने वाले प्रमुख शो ‘ख़बरदार’ (Khabardar) की एंकरिंग करती हैं। यह शो उनकी संवाद क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और दर्शकों से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है।

राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीति, बिज़नेस, खेल और मनोरंजन—हर विषय पर उनकी पकड़ समान रूप से मजबूत है। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग हो या एंकरिंग, दर्शक उन्हें भरोसे के साथ देखते हैं। मशहूर टॉक शो ‘सीधी बात’ की मेजबानी से लेकर स्पेशल प्रोग्राम्स तक, उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से हर मंच पर अपनी छाप छोड़ी है।

श्वेता सिंह ने हमेशा पत्रकारिता को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की तरह निभाया है। उनकी निर्भीकता और सटीक विश्लेषण ने उन्हें अलग पहचान दी है। यही वजह है कि वह देश की चुनिंदा पत्रकारों में गिनी जाती हैं, जिनकी बात दर्शक न केवल सुनते हैं, बल्कि उस पर भरोसा भी करते हैं। 

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बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर HC का फैसला, कहा- प्रतिबंध लगाना सरकार की नीति का मामला

बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाना या उसकी पहुंच सीमित करना सरकार की नीति से जुड़ा मामला है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 21 August, 2026
Last Modified:
Friday, 21 August, 2026
DelhiHighCourt878

बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाना या उसकी पहुंच सीमित करना सरकार की नीति से जुड़ा मामला है। ऐसे में इस पर फैसला लेना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर उठाई गई चिंताओं और सुझावों पर विचार करे। इसके लिए सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर सकती है। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को इस मुद्दे पर फैसला लेने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है।

बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर दायर हुई थी PIL

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए कोर्ट पहुंचा था। याचिका तीन साल के बच्चे की मां कीर्ति दुआ और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता ने दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं ने बच्चों की सोशल मीडिया तक खुली पहुंच पर चिंता जताते हुए इसमें प्रतिबंध लगाने और बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण से जुड़ी सामग्री यानी Child Sexual Abuse Material (CSAM) से बचाने के लिए ज्यादा मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बच्चों का इंटरनेट पर अश्लील और उम्र के लिहाज से अनुचित सामग्री के संपर्क में आना उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल सकता है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से भी जोड़ते हुए दलील दी।

संविधान के अनुच्छेद 39(f) का भी दिया हवाला

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 39(f) का भी हवाला दिया गया। इसमें राज्य से बच्चों को शोषण से बचाने और उन्हें स्वस्थ तरीके से विकास का अवसर देने की अपेक्षा की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने Economic Survey 2025-26 का भी जिक्र किया। इसमें युवाओं के बीच सोशल मीडिया की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को सामने रखा गया था।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सोशल मीडिया कंपनियों की ओर से अपनाए गए स्वैच्छिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा के लिए बाध्यकारी यानी कानूनी तौर पर लागू होने वाले नियमों की जरूरत है।

Meta से भी मजबूत तकनीकी व्यवस्था की मांग

याचिका में Meta को भी निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह ऐसी तकनीकी व्यवस्था और ऑडिट सिस्टम लागू करे, जिससे बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री की पहचान कर उसे जल्द से जल्द हटाया जा सके।

Meta की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कोर्ट को बताया कि Facebook और Instagram पर CSAM की पहचान और उसे हटाने के लिए पहले से ही कई तकनीकी व्यवस्थाएं लागू हैं।

उनके मुताबिक, Facebook पर CSAM की सक्रिय पहचान की दर 99.5 फीसदी और Instagram पर 95.2 फीसदी है। उन्होंने बताया कि प्लेटफॉर्म ऐसी सामग्री की पहचान के लिए कई तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ हानिकारक सामग्री सिस्टम की नजर से बच सकती है।

कोर्ट ने प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया

याचिकाकर्ताओं ने इसके बावजूद ज्यादा मजबूत तकनीकी व्यवस्था और नियमित ऑडिट की मांग की। लेकिन हाईकोर्ट ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सीधे प्रतिबंध लगाने या कोई खास पाबंदी तय करने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने या उनकी पहुंच सीमित करने जैसे व्यापक फैसले सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी के तहत आते हैं।कोर्ट ने केंद्र सरकार को याचिकाकर्ताओं की चिंताओं और सुझावों पर विचार करने को कहा है। इसके लिए सरकार सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज और दूसरे संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा कर सकती है।

अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब इस मुद्दे पर अगली बड़ी कार्रवाई केंद्र सरकार के स्तर पर होगी। सरकार को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को लेकर नियमों पर विचार करना होगा।

हालांकि, कोर्ट ने सरकार को कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है। यानी अभी यह साफ नहीं है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कब तक कोई अंतिम नीति या फैसला लेकर आएगी।

फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध या अन्य व्यापक पाबंदियां तय करना अदालत का नहीं, बल्कि सरकार के नीति-निर्धारण का विषय है। ऐसे में अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बहस का अगला दौर कोर्ट के बजाय नीति के स्तर पर होगा।

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अंकित पांडे की सोनी में वापसी : बने स्पोर्ट्स एड सेल्स हेड

यह सोनी के साथ पांडे की दूसरी पारी है। इससे पहले वह जनवरी 2021 से मई 2023 तक कंपनी के साथ जुड़े रहे थे। अब दोबारा सोनी से जुड़ने के बाद वह स्पोर्ट्स एड सेल्स से जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे।

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Published - Thursday, 20 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 20 August, 2026
ankitpandey

अंकित पांडे ने सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India) में Group Head- Ad Sales (Sports) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने LinkedIn अपडेट के जरिए अपनी नियुक्ति की जानकारी साझा की। यह सोनी के साथ उनकी दूसरी पारी है।

सोनी से जुड़ने से पहले पांडे जियोस्टार (JioStar) के साथ काम कर रहे थे, जहां वह Associate Director- Sports (TV & Digital) के पद पर थे। उन्होंने जियोस्टार में करीब दो साल बिताए और स्पोर्ट्स से जुड़े टीवी व डिजिटल बिजनेस में जिम्मेदारी संभाली।

अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा करते हुए पांडे ने कहा कि यह उनके लिए पूरी तरह नई शुरुआत की बजाय घर वापसी जैसा अनुभव है। उन्होंने जियोस्टार स्पोर्ट्स ऐड्स के साथ बिताए समय के दौरान मिली सीख, साझेदारियों और दोस्तियों के लिए आभार भी जताया।

यह सोनी के साथ पांडे की दूसरी पारी है। इससे पहले वह जनवरी 2021 से मई 2023 तक कंपनी के साथ जुड़े रहे थे। अब दोबारा सोनी से जुड़ने के बाद वह स्पोर्ट्स एड सेल्स से जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे।

अंकित पांडे के करियर में वायकॉम18 (Viacom18) के साथ भी काम करने का अनुभव शामिल है। मीडिया और स्पोर्ट्स एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में उनका अनुभव नई भूमिका में अहम माना जा रहा है।

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दिव्यम चतुर्वेदी बने हाइब्रिड इंडिया के Country Head

दिव्यम चतुर्वेदी को हाइब्रिड इंडिया (Hybrid India) में कंट्री हेड (Country Head) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह Syncmedia and Adtech में वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड पार्टनरशिप्स थे।

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Published - Thursday, 20 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 20 August, 2026
hubird

दिव्यम चतुर्वेदी (Divyam Chaturvedi) ने हाइब्रिड इंडिया (Hybrid India) में कंट्री हेड (Country Head) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

अपनी पोस्ट में चतुर्वेदी ने कहा कि वह अपने प्रोफेशनल सफर के नए अध्याय को लेकर उत्साहित हैं और हाइब्रिड इंडिया की टीम के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं।

हाइब्रिड इंडिया में शामिल होने से पहले चतुर्वेदी सिंकमीडिया एंड एडटेक (Syncmedia and Adtech) के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड पार्टनरशिप्स (Vice President-Sales and Partnerships) की जिम्मेदारी संभाली।

चतुर्वेदी को डिजिटल मीडिया और एडटेक इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव है। अपने पिछले कार्यकाल में उन्होंने सेल्स और पार्टनरशिप से जुड़े क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभाईं। हाइब्रिड इंडिया में उनकी नई भूमिका में कंपनी के भारत में कारोबार और रणनीतिक पहलों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

सिंकमीडिया एंड एडटेक से पहले चतुर्वेदी वसर्व (Vserv) और रिपब्लिक वर्ल्ड (Republic World) के साथ भी काम कर चुके हैं। इन संस्थानों में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मीडिया, डिजिटल और विज्ञापन से जुड़े क्षेत्रों में अनुभव हासिल किया।

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