नई शिक्षा नीति को दिग्गजों ने यूं बताया देश में ज्ञान विज्ञान की क्रांति का 'जनक'

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री का कहना है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
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हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री का कहना है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं, इसलिए किसी भाषा को क्षेत्रीय भाषा और किसी को राष्ट्रीय भाषा कहना ठीक नहीं होगा। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा सोमवार को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय भाषाएं’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए प्रो. अग्निहोत्री का कहना था, ‘जिस दिन हमारे शिक्षकों ने भारतीय भाषाओं में पढ़ाना शुरू कर दिया, उस दिन हिन्दुस्तान अन्य देशों से बहुत आगे निकल जाएगा।'

प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भारतीय भाषाओं को सम्मान दिलाना है। इस दिशा में सभी लोगों को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है। भाषा, ज्ञान नहीं है, बल्कि ज्ञान तक पहुंचने की कुंजी है। इसलिए अगर विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में ज्ञान लेंगे, तो उनका संपूर्ण विकास संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह मां का दूध बच्चे के लिए सुपाच्य यानी आसानी से पचने वाला और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, उसी तरह मातृभाषा में लिया गया ज्ञान भी बच्चे के जीवन के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि इस नई शिक्षा नीति से भारत में ज्ञान विज्ञान की क्रांति होगी, जिसमें शिक्षकों को महत्वपूर्ण निभानी होगी।

अंग्रेजी के चक्रव्यूह से निकलेंगे आधुनिक अभिमन्यु: प्रो. संजीव शर्मा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी का जो चक्रव्यूह हमारे चारों तरफ है, उससे बाहर आने में आधुनिक अभिमन्यु पूरी तरह से सक्षम हैं। प्रो. शर्मा ने कहा कि ये भारत के शैक्षिक पुर्नजागरण का काल है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय का भाव आवश्यक है। भारतीय भाषाओं में कोई विभेद नहीं है, कोई संघर्ष नहीं है। अगर हमें भाषाओं को सींचना है, तो सभी को मिलजुलकर प्रयास करने होंगे, जिसमें महत्वपूर्ण भूमिका हिंदी भाषी लोगों को निभानी होगी।

बहती नदी है हिंदी: रंगनाथन

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रसिद्ध लेखिका एवं दैनिक हिन्दुस्तान की कार्यकारी संपादक जयंती रंगनाथन ने कहा, ‘हिंदी एक बहती नदी है। आप देखिए कि हिंदी के अखबार 30 वर्ष पहले सिर्फ 3 लाख प्रतियां छापते थे, लेकिन आज ये आंकड़ा 3 करोड़ के पार पहुंच चुका है। यही हिंदी की ताकत है।’

रंगनाथन का कहना था, ‘तमिल मेरी मातृभाषा है, पर हिंदी मेरी कर्म भाषा है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का जोर होता है कि बच्चे स्कूल में हिंदी में न बात करें, पर अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हुए बच्चों को हमने ये सिखाया ही नहीं कि जीवन में चुनौतियों का सामना किस तरह करना है। आज हम यह भूल गए हैं कि शिक्षा का मकसद क्या है।’ 

जिंदगी और शिक्षा पर उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें ये सिखाती है कि जिंदगी भागने का नाम नहीं, बल्कि रुकने और संभलकर चलने का नाम है। एक अच्छा नागरिक बनना और आशावादी जिंदगी जीना, यही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है। रंगनाथन ने कहा कि आने वाले दिनों में ये नई शिक्षा नीति हमारे बच्चों को ज्ञान की दृष्टि से ताकतवर बनाएगी।

जोड़ती है मातृभाषा: सचदेव

नवभारत टाइम्स, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव ने कहा कि अंग्रेजी के माध्यम से हम दुनिया से तो जुड़ सकते हैं, लेकिन अपने आप से नहीं जुड़ सकते। अगर हमें स्वयं से जुड़ना है, तो हमें मातृभाषा का इस्तेमाल करना ही होगा। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षित होकर आप अपने आप को पूर्ण शिक्षित नहीं मान सकते। शिक्षा के माध्यम से हम मनुष्य बन सकें, यही शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य होना चाहिए। सचदेव ने कहा कि जब तुर्की एक रात में अपनी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित कर सकता है, तो ये काम हमारे यहां क्यों नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि हमारा संकट ये नहीं है कि हमारी भाषा क्या होनी चाहिए, बल्कि हमारा संकट ये है कि किसी भी भाषा को सीखने का हमारा उद्देश्य क्या होना चाहिए। किसी भी शिक्षा नीति का उद्देश्य व्यक्ति को एक अच्छा इंसान बनाना होता है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि क्या पढ़ाया जाए और कैसे पढ़ाया जाए। सचदेव ने कहा कि नई शिक्षा नीति ये अहसास कराती है कि मातृभाषा में भी बच्चों को शिक्षित किया जा सकता है।

हिंदी और भारतीय भाषाओं को मिलकर चलना होगा: अनंत विजय

भारतीय भाषाओं पर अपनी बात रखते हुए दैनिक जागरण, नई दिल्ली के सह-संपादक अनंत विजय ने कहा कि हिंदी और भारतीय भाषाएं एक दूसरे के साथ मिलकर चलेंगी, तो दोनों मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति के बाद अगर आप देखें, तो पहली बार एक संपूर्ण और नई शिक्षा नीति आई है। इससे पहले जितनी भी नीतियां आई हैं, उन्हें नई न कहकर संशोधित नीतियां कहना ज्यादा बेहतर होगा। 

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की ज्ञान परंपरा को केंद्र में रखते हुए काम करने पर जोर देती है। भाषा वो ही जीवित रहती है, जिससे आप जीविकोपार्जन कर पाएं और भारत में एक सोची समझी साजिश के तहत अंग्रेजी को जीविकोपार्जन की भाषा बनाया जा रहा है।

भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तक निर्माण की चुनौतियों पर अनंत विजय का कहना था कि भारत में लगभग 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं और करीब 850 राज्य विश्वविद्यालय हैं। अगर हम इसमें निजी विश्वविद्यालयों को भी शामिल कर लें, तो कुल मिलाकर लगभग 1,000 से अधिक विश्वविद्यालय होते हैं। अगर एक विश्वविद्यालय एक वर्ष में सिर्फ 2 पुस्तकों का भी निर्माण करे, तो एक वर्ष में लगभग 2,000 किताबें छात्रों के लिए तैयार होंगी।

उन्होंने कहा,’जैसे ही आप भारत कें​द्रित पाठ्यक्रम की बात करेंगे, तो लोग विरोध में खड़े हो जाएंगे। ऐसा कहा जाएगा कि भारतीय भाषाओं में ज्ञान की बात नहीं हो सकती, अगर आपको ज्ञान की बात करनी है, तो सिर्फ अंग्रेजी में ही हो सकती है। जबकि आप देखिए कि जर्मनी में लोग संस्कृत भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय किसी भी शिक्षा नीति को सफल बनाने का सबसे महत्वपूर्ण उपक्रम है।’

भारतीय भाषाओं के व्यावहारिक प्रयोग की आवश्यकता: डॉ. बाबु

पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी जयशंकर बाबु ने कहा कि भारतीय भाषाओं के व्यावहारिक प्रयोग पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया की कुल भाषाओं में से एक तिहाई भाषाएं हमारे पास हैं, लेकिन हमने अब तक मुठ्ठीभर भाषाओं को शिक्षण में अपनाया है।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में भाषा को लेकर शिक्षा नीति में अभी उतनी स्पष्टता नहीं है, जितनी प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर है, लेकिन हमें इससे प्रेरणा लेते हुए उच्च शिक्षा में भी भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए। डॉ. बाबु ने तमिलनाडु का जिक्र करते हुए कहा कि वहां राज्य की नौकरियों में मातृभाषा में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है, क्या ऐसी पहल अन्य राज्यों में नहीं होनी चाहिए।

डॉ. बाबु ने कहा कि तमिलनाडु में इंजीनियरिंग और चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रम तमिल भाषा में पढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। ये पहल सराहनीय है और ऐसे ही प्रयासों से भारतीय भाषाएं ताकतवर होंगी। कार्यक्रम का संचालन भारतीय जनसंचार संस्थान की छात्र संपर्क अधिकारी विष्णुप्रिया पांडे ने किया। वेबिनार के अंत में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने सभी वक्ताओं का धन्यवाद दिया।

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पं. माधवराव सप्रे की 150वीं जयंती पर देशभर में होंगे कार्यक्रम

पं. माधवराव सप्रे की 150वीं जयंती के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तथा भारतीय जन संचार संस्थान द्वारा पूरे देश में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

Last Modified:
Saturday, 12 June, 2021
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प्रखर चिंतक, साहित्यकार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और लोकमान्य तिलक के विचारों को हिंदी जगत में व्यापकता देने वाले पं. माधवराव सप्रे की 150वीं जयंती के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तथा भारतीय जन संचार संस्थान द्वारा पूरे देश में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

इस कड़ी में पहला कार्यक्रम सप्रे जी के जन्म स्थान दमोह (म.प्र.) जिले के पथरिया गांव में 19 जून को आयोजित होगा। समारोह में भारत के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल तथा सप्रे संग्रहालय, भोपाल के संस्थापक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर सप्रे जी के अवदान पर केंद्रित एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

19 जून को ही ‘माधवराव सप्रे और राष्ट्रीय पुनर्जागरण’’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री रामबहादुर राय करेंगे। वेबिनार में वरिष्ठ पत्रकार श्री आलोक मेहता, श्री जगदीश उपासने, श्री विश्वनाथ सचदेव, इंदिरा गांधी कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी एवं माधवराव सप्रे जी के पौत्र डॉ. अशोक सप्रे भी अपने विचार व्यक्त करेंगे।

इस अवसर पर महत्वपूर्ण वैचारिक पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ के माधवराव सप्रे जी पर कें​द्रित विशेषांक का लोकार्पण किया जायेगा। पत्रिका का संपादन डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने किया है। सप्रे जी की 150 जयंती पर रायपुर, भोपाल, वाराणसी, चेन्नई, नागपुर सहित देश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। इस श्रृंखला में एक भव्य कार्यक्रम अगले वर्ष 23 अप्रैल को नई दिल्ली में आयोजित होगा।

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मशहूर लेखक डॉ. सिद्धलिंगैया का निधन, पीएम मोदी ने किया शोक व्यक्त

देश के जाने-माने कन्नड़ लेखक डॉ. सिद्धलिंगैया का शुक्रवार को कोरोना महामारी की वजह से निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 12 June, 2021
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देश के जाने-माने कन्नड़ लेखक डॉ. सिद्धलिंगैया का शुक्रवार को कोरोना महामारी की वजह से निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे।

जानकारी के मुताबिक, वह एक महीने से भी अधिक समय से एक निजी अस्पताल में भर्ती थे और पिछले कुछ समय से वेंटिलेटर पर थे। उनकी पत्नी भी कोविड से पीड़ित थीं, जोकि अब ठीक हो चुकी हैं।

उनके परिवार में पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री हैं। उन्हें दलित कवि भी कहा जाता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. सिद्धलिंगैया के निधन पर दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘डॉ. सिद्धलिंगैया को उनके विपुल लेखन, कविता और सामाजिक न्याय के लिए योगदान हेतु स्मरण किया जाएगा। उनके निधन से दु:खी हूं। दु:ख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और अनेक प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।’

कवि, नाटककार, निबंधकार और दलित कार्यकर्ता सिद्धलिंगैया दलित संघर्ष समिति के संस्थापकों में से एक थे। मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा, जद (एस) नेता एच.डी. कुमारस्वामी सहित अन्य लोगों ने सिद्धलिंगैया के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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कोरोना की चपेट में आने से वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ की पत्नी का निधन

चिन्ना (Chinna) के नाम से मशहूर करीब 56 वर्षीय डॉ. पद्मावती कुछ हफ्ते पहले कोरोनावायरस के संक्रमण की चपेट में आ गई थीं और इन दिनों गुरुग्राम के निजी अस्पताल में भर्ती थीं।

Last Modified:
Friday, 11 June, 2021
Dr Padmavati Dua

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आकर जान गंवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आकर वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ की पत्नी डॉ. पदमावती दुआ का निधन हो गया है।

चिन्ना (Chinna) के नाम से मशहूर करीब 56 वर्षीय डॉ. पद्मावती कुछ हफ्ते पहले कोरोनावायरस के संक्रमण की चपेट में आ गई थीं और इन दिनों गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती थीं, जहां पर शुक्रवार की देर शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके परिवार में पति विनोद दुआ और बेटी मल्लिका दुआ हैं। मल्लिका दुआ जानी-मानी अभिनेत्री व कॉमेडियन हैं। बता दें कि पत्नी के साथ विनोद दुआ भी कोविड-19 की चपेट में आ गए थे फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। 

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पत्रकार संघों व विपक्षी दलों ने उठाया सवाल, यह पत्रकार की गिरफ्तारी है या अपहरण?

हैदराबाद में तेलंगाना पुलिस द्वारा एक पत्रकार की गिरफ्तारी का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

Last Modified:
Thursday, 10 June, 2021
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हैदराबाद में तेलंगाना पुलिस द्वारा एक पत्रकार की गिरफ्तारी का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पत्रकार संघों और विपक्षी दलो ने आरोप लगाया है कि सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मियों ने पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया और उसे दिनदहाड़े जबरन उठा ले गए, जोकि एक अपहरण है।

वायरल वीडियो में पत्रकार की पहचान रघु रामकृष्ण के रूप में हुई है। वीडियो में दिखाई देता है कि पत्रकार सड़क के किनारे खरीददारी कर रहा था। तभी वहां अचानक सिविल ड्रेस में दो लोग आते हैं और फिर रघु रामकृष्ण को चलती सड़क पर पकड़ लेते हैं और उन्हें पीछे खड़ी एक प्राइवेट कार के अंदर ले जाने के लिए मजबूर करते हैं। पत्रकार के विरोध करने पर एक तीसरा व्यक्ति कार से बाहर निकलता हुआ दिखाई देता है और दो नकाबपोश लोगों को रघु को वाहन के अंदर धकेलने में उनकी मदद करता है। वीडियो फुटेज के सामने आने के बाद, लोग अब यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कहीं यह  पत्रकार का अपहरण तो नहीं है।

परिवार के सदस्यों को भी पहले संदेह था कि रामकृष्ण का अपहरण किया गया था, क्योंकि घटना के तीन घंटे तक उनसे कोई बातचीत नहीं हो पा रही थी।

वहीं, सूर्यापेट जिले के पुलिस अधीक्षक आर. भास्करन ने कहा कि रघु को मट्टमपल्ली पुलिस स्टेशन में क्राइम नंबर 20/21 के लिए गिरफ्तार किया गया। हमें पता है कि रघु की पत्नी ने हाई कोर्ट में अपील की है। हम कानूनी रूप से जो भी जरूरी होगा कार्रवाई करेंगे और उसे हाई कोर्ट के सामने पेश करेंगे।

मट्टमपल्ली पुलिस द्वारा गुरुवार को की गई उनकी गिरफ्तारी से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। पत्रकार संघों और राजनीतिक दलों ने गिरफ्तारी की निंदा की और टीआरएस सरकार को फटकार लगाई।

तेलंगाना विधायक दानसारी अनसूया ने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर सीसीटीवी की एक शॉर्ट फुटेज शेयर की है और तेलंगाना सरकार से पूछा है कि यह अपहरण है या गिरफ्तारी? उन्होंने कहा कि अगर आप आवाज उठाते हैं तो तेलंगाना सरकार आपके साथ इस तरह का व्यवहार करती है।

वहीं इस बीच तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य के महानिदेशक को रघु के मामले में 14 जून या उससे पहले डिटेल जमा करने को कहा है।

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पत्रकार के सवाल पर नाराज मंत्री ने कह दी ऐसी बात, शुरू हुआ विवाद

तमिलनाडु के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एम.आर.के. पन्नीरसेल्वम ने सोमवार को एक पत्रकार से यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि...

Last Modified:
Wednesday, 09 June, 2021
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तमिलनाडु के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एम.आर.के. पन्नीरसेल्वम ने सोमवार को एक पत्रकार से यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि ‘यदि आप एक मूर्खतापूर्ण प्रश्न पूछेंगे, तो आपको एक मूर्खतापूर्ण उत्तर मिलेगा।’

पत्रकार ने मंत्री से राज्य में प्रत्यक्ष खरीद केंद्रों (डीपीसी) में बड़े पैमाने पर किए जा रहे  भ्रष्टाचार को लेकर तब सवाल किया, जब मंत्री तंजावुर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। वे यहां तंजावुर और तिरुवरूर जिले में कुरुवई की खेती की तैयारियों की समीक्षा करने आए थे। इस दौरान पत्रकार ने पूछा, ‘ऐसी शिकायतें हैं कि किसानों को धान की प्रति बोरी पर 40 रुपए रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया था।

तंजावुर जिला कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव एस. विमलनाथन ने इस तरह से मंत्री द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह एक मंत्री के लिए अशोभनीय था। किसान कल्याण मंत्री होने के नाते, वह सवाल को नजरअंदाज करने के बजाय सामान्य स्वर में जवाब दे सकते थे।

उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से हस्तक्षेप की मांग की और कृषि मंत्री से खुले मंच पर माफी मांगने को भी कहा।

तमिलगा झील और नदी सिंचाई किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष पी. विश्वनाथन ने भी किसानों के कल्याण के सवाल पर मंत्री द्वारा किए गए इस दुर्व्यवहार पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘रिश्वत की शिकायत को लेकर पत्रकार द्वारा किया गया सवाल सही था। हमने तब इस मुद्दे पर प्रदर्शन भी किया था। सवाल मंत्री से इसलिए किया गया ताकि इस तरह के मुद्दों पर अब अंकुश लगाया जा सके। मंत्री को ऐसी अनुचित प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए थी।’

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पुलिस ने बताया, 2020 से पत्रकारों पर हमले के कितने मामले हुए दर्ज

एक खबर सामने आयी है त्रिपुरा से, जो यह बताती है कि साल 2020 से पत्रकारों पर हुए हमले को लेकर कितने मामले दर्ज किए गए हैं।  

Last Modified:
Tuesday, 08 June, 2021
Attack on Journalist

दुनियाभर से आए दिन पत्रकारों पर हुए उत्पीड़न की खबरें आती रहती हैं। इसी तरह की एक खबर सामने आयी है त्रिपुरा से, जो यह बताती है कि साल 2020 से पत्रकारों पर हुए हमले को लेकर कितने मामले दर्ज किए गए हैं।  

त्रिपुरा पुलिस ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी कर बताया कि 2020 से राज्य के आठ जिलो के विभिन्न थानों में पत्रकारों पर हमले के 24 मामले दर्ज किए गए हैं।  

सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) (कानून एवं व्यवस्था), सुब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि सूची में इस साल 5 जून तक 7 नए मामलों को शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने पत्रकारों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं और हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करने में पुलिस की कथित विफलता पर अखबारों में प्रकाशित हालिया रिपोर्टों पर संज्ञान लिया है और इस पर चिंता व्यक्त की है। चक्रवर्ती ने कहा, डीजीपी वी.एस. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पांच जून को जिला पुलिस अधीक्षकों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।

उन्होंने कहा, पुलिस अधीक्षकों के साथ चर्चा के दौरान सामने आया कि पत्रकारों पर हमले के संबंध में साल 2020 में 17 मामले और 2021 में 5 जून तक सात मामले दर्ज किए गए। चक्रवर्ती ने कहा कि दर्ज किए गए 24 मामलों में से 16 मामलों में आरोप पत्र दायर किया चुका है, तीन मामलों में समझौता हो गया जबकि शेष पांच मामलों में अब भी जांच चल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन मामलों में पीड़ित बदमाशों की पहचान करने में असमर्थ थे, पुलिस ने उनकी पहचान करने के लिए हर संभव प्रयास किए। नतीजतन, जांच के दौरान 15 से अधिक लोगों की पहचान की गई, जिसके बाद उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किए गए।

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15 साल पुरानी घटना का वॉट्सऐप स्टेटस लगाना पत्रकार को यूं पड़ा महंगा

लगभग 15 साल पहले हुई एक घटना के संबंध में वॉट्सऐप स्टेटस लगाना एक पत्रकार को महंगा पड़ गया।

Last Modified:
Monday, 07 June, 2021
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लगभग 15 साल पहले हुई एक घटना के संबंध में वॉट्सऐप स्टेटस लगाना एक पत्रकार को महंगा पड़ गया। दरअसल जम्मू कश्मीर पुलिस इस तरह का वॉट्सऐप स्टेटस लगाने के चलते 23 वर्षीय पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह एफआईआर  कश्मीर घाटी में बांदीपोरा कस्बे के रहने वाले पत्रकार साजिद रैना के खिलाफ दर्ज की गई है। उन्होंने साल 2006 में एक नाव हादसे में मारे गए 22 बच्चों की तस्वीर को अपने वॉट्सऐप स्टेटस पर लगाया था और उन बच्चों को ‘वुलर झील के शहीद’ कहा था, जिसे लेकर ही उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

बांदीपोरा पुलिस ने बीते शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, ‘30/05/2021 को वॉट्सऐप स्टेटस के लिए साजिद रैना नामक व्यक्ति के खिलाफ बांदीपोरा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी संख्या 84/2021 दर्ज की गई, जिसके तहत इस सामग्री और इसके पीछे की मंशा को लेकर जांच की जाएगी।’

पुलिस ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि ये कदम किसी के पेशे विशेषकर पत्रकारों के खिलाफ नहीं उठाया गया है, जैसा कि लोग सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं। जांच जारी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, साजिद रैना श्रीनगर स्थिति एक न्यूज एजेंसी में काम करते हैं और उनका कहना है कि पुलिस द्वारा बुलाए जाने के बाद उन्होंने वॉट्सऐप स्टेटस डिलीट कर दिया था।

उन्होंने कहा, ‘30 मई को त्रासदी की 15वीं बरसी थी और मैंने बच्चों की तस्वीर के साथ एक वॉट्सऐप स्टेटस अपलोड किया था। शाम को सुरक्षा एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुझे फोन किया और मैंने उनसे कहा कि इसमें कुछ भी भड़काऊ नहीं है। इसके बाद मैंने उनसे माफी मांगी और अपने वॉट्सऐप पर लगा स्टेटस हटा दिया। हालांकि तब तक मेरे इस स्टेटस को मात्र 20 लोगों ने ही देखा था।’

रैना ने हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें लगा था कि ये मामला खत्म हो चुका है, लेकिन दो दिन बाद उन्हें पता चला कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

युवा पत्रकार रैना के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 (दंगे के इरादे से भड़काऊ बयानबाजी करना) और 505 (पब्लिक में डर की भावना पैदा करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जानकारी के लिए बता दें कि 30 मई 2006 को कश्मीर के बारामूला जिले की वुलर झील में एक नाव डूबने से 22 बच्चों की मौत हो गई थी। यह हादसा राज्य की राजधानी श्रीनगर से 50 किलोमीटर की दूरी पर हुआ था। दो स्कूली बसों में सवार होकर पढ़ने वाले बच्चे यहां पिकनिक मनाने के लिए आए थे। इनमें से कुछ बच्चे नाव पर सवार होकर झील में घूमने निकले, जो कि कुछ देर बाद डूब गई थी।

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नहीं रहे जाने-माने पूर्व खेल पत्रकार चंदन बनर्जी

जाने-माने पूर्व खेल पत्रकार चंदन बनर्जी का शनिवार को हृदयगति रुकने से निधन हो गया।

Last Modified:
Monday, 07 June, 2021
ChandanBanerjee554

जाने-माने पूर्व खेल पत्रकार चंदन बनर्जी का शनिवार को हृदयगति रुकने से निधन हो गया। वह 64 साल के थे। उनके निधन की खबर मीडिया को परिवार से जुड़े सदस्यों ने दी।

वह कलकत्ता खेल पत्रकार क्लब के पूर्व अध्यक्ष बिपुल बनर्जी के बेटे थे। टेबल टेनिस में भी उनकी काफी दिलचस्पी थी। उन्होंने मुख्य रूप से 80 के दशक व 90 के दशक में कोलकाता स्थित विभिन्न प्रकाशनों के लिए टेबल टेनिस को कवर किया।

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‘इंडिया-अमेरिका टुडे’ के संस्थापक-संपादक तेजिंदर सिंह का निधन

व्हाइट हाउस के अनुभवी पत्रकार और ‘भारत-अमेरिकी संवाद समिति’ के संपादक व संस्थापक तेजिंदर सिंह का अमेरिका में निधन हो गया है।

Last Modified:
Friday, 04 June, 2021
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व्हाइट हाउस के अनुभवी पत्रकार और संवाद समिति ‘इंडिया-अमेरिका टुडे’ के संपादक व संस्थापक तेजिंदर सिंह का अमेरिका में निधन हो गया है। 

‘इंडिया-अमेरिका टुडे’ की ओर से कहा गया, तेजिंदर सिंह के निधन की घोषणा करते हुए हम काफी दुखी हैं। उनकी आत्मा को शांति मिले। उन्होंने 2012 में ‘इंडिया-अमेरिका टुडे’ की स्थापना की थी और हम उनके द्वारा शुरू किए गए काम को जारी रखेंगे। उनकी आत्मा को शांति मिले।’

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने उनके निधन पर शोक जताया है। सिंह के निधन पर जॉन किर्बी ने कहा, वे 2011 में पेंटागन के संवाददाता थे और मैंने इस मंच से उनसे बात की है। वे सचमुच एक सज्जन इंसान थे। वे कठिन सवाल पूछते थे और अच्छी सामग्रियां मुहैया कराते थे। वे हम सबको बहुत याद आएंगे। सिंह एशियाई अमेरिकी पत्रकार संगठन (एएजेए-डीसी) के उपाध्यक्ष (प्रिंट) भी थे।’

 

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ब्लैक फंगस ने निगल ली पत्रकार तनवीर अहमद की जिंदगी

राजस्थान के पत्रकार तनवीर अहमद का ब्लैक फंगस की वजह से बुधवार को निधन हो गया।

Last Modified:
Thursday, 03 June, 2021
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राजस्थान के पत्रकार तनवीर अहमद का ब्लैक फंगस की वजह से बुधवार को निधन हो गया। वे जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती थे। बताया जा रहा है कि सोमवार को उनका नाक, कान और गले का ऑपरेशन हुआ था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद भी उनको बचाया न जा सका। वे 36 वर्ष के थे।

तनवीर के परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो पुत्र थे। तनवीर कुछ माह पहले किडनी संबंधित बीमारी से भी पीडित रह चुके थे। उनकी माताजी ने अपनी एक किडनी देकर उनका ट्रांसप्लांट कराया था, जिसके बाद वे किडनी की बीमारी से पूरी तरह ठीक हो चुके थे, लेकिन कुछ दिन पूर्व उनकी तबियत बिगड़ी, तो टेस्ट के जरिए पता चला कि उन्हें कोरोना संक्रमण ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इसके बाद उपचार के लिए उन्हें जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां इसी दौरान उन्हें ब्लैक फंगस हो गया, जिसके बाद उनके नाक, कान और गले का ऑपरेशन हुआ। इसके बाद से ही वे आईसीयू में थे। बुधवार दोपहर बाद करीब 3 बजे ये खबर आयी है कि वे जिंदगी की जंग हार गए।

तनवीर अहमद ‘राजस्थान लीडर, ‘जयपुर का फरिश्ता’, ‘राजस्थान पत्रिका’, ‘डेली न्यूज’, ‘दैनिक भास्कर’, ‘नेशनल दुनिया’, ‘ई टीवी राजस्थान’, ‘फर्स्ट इंडिया न्यूज’ सहित कई अन्य मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी।  

पत्रकार तनवीर अहमद के निधन पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई नेताओं, पत्रकार संगठनों, बुद्विजीवियों और शुभचिंतकों ने अपनी संवेदना व्यक्त की हैं।

 

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