समारोह में प्रदीप सरदाना ने अपनी कविताओं का भी पाठ किया। उनकी कविता 'जग की रीत' को सुन पूरा समारोह तालियों से गूंज उठा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार, कवि और सुप्रसिद्ध फिल्म समीक्षक प्रदीप सरदाना को हिंदी अकादमी मुंबई ने अपने प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय गौरव सम्मान' से सम्मानित किया। श्री प्रदीप सरदाना को यह सम्मान उनकी राष्ट्रीय चेतना, सारस्वत साधना, प्रेरक दृष्टिकोण, शिक्षा, समाज तथा काव्य-साहित्य क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
मुंबई में आयोजित इस विशेष समारोह में सरदाना को यह सम्मान वरिष्ठ गीतकार, कवि डॉ धनंजय सिंह, आकाशवाणी के सहायक निदेशक राम अवतार बैरवा, सरदार पटेल विश्वविद्यालय गुजरात के प्रोफेसर और हिंदी विभाग प्रमुख डॉ दिलीप मेहरा एवं हिंदी अकादमी मुंबई के अध्यक्ष डॉ प्रमोद पाण्डेय ने मिलकर प्रदान किया।
समारोह में प्रदीप सरदाना ने अपनी कविताओं का भी पाठ किया। उनकी कविता 'जग की रीत' को सुन पूरा समारोह तालियों से गूंज उठा। उल्लेखनीय है श्री प्रदीप सरदाना ने मात्र 13 वर्ष की आयु में अपने लेखन, पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की थी। अभी तक अनेक राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित श्री सरदाना के नाम अपने क्षेत्र में किए गए असाधारण कार्यों और विभिन्न उपलब्धियों के कई रिकॉड दर्ज हैं।
जिनमें देश के सबसे कम उम्र के संपादक, भारत में टीवी पत्रकारिता की शुरुआत करने के साथ राष्ट्रीय न्यूज चैनल्स पर 4 दिन में 52 घंटे लाइव रहने के रिकॉर्ड प्रमुख हैं। पत्रकारिता के तीनों प्रमुख माध्यम प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल से जुड़े प्रदीप सरदाना लेखकों, पत्रकारों और कलाकारों की पुरानी संस्था 'आधारशिला' के अध्यक्ष भी हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने रेड बुल के उत्पादों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के इस्तेमाल को रोकने वाले एफएसएसएआई आदेश को रद्द कर दिया है, उचित प्रक्रिया के बाद नया आदेश जारी हो सकेगा।
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Samachar4media Bureau
दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें रेड बुल (Red Bull) को अपने पेय उत्पादों के लिए ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने कहा कि एफएसएसएआई ने 30 जून को निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने या जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। हाई कोर्ट ने एफएसएसएआई को उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए नया आदेश जारी करने की अनुमति दी है। इसमें रेड बुल को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देना होगा।
मामला रेड बुल की उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें कंपनी ने एफएसएसएआई के निर्देश को चुनौती दी थी। अदालत के अनुसार, कंपनी को जवाब देने का अवसर नहीं दिया जाना प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था।
सुनवाई के दौरान एफएसएसएआई के वकील ने माना कि रेड बुल को अलग से कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था। नियामक का कहना था कि 30 जून को भेजे गए पत्र को ही नोटिस माना जा सकता है। एफएसएसएआई ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी आपत्ति उत्पादों को लेकर नहीं, बल्कि ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर थी।
रेड बुल ने दलील दी थी कि वह भारत में 2002 से अपने पेय पदार्थों के लिए ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का इस्तेमाल कर रही है। कंपनी का यह भी कहना था कि एफएसएसएआई पहले संबंधित कैफीनयुक्त पेय पदार्थों की श्रेणी के लिए इस शब्दावली को मान्यता दे चुका है।
इससे पहले हुई सुनवाई में अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या रेड बुल को निर्देश जारी करने से पहले कोई नोटिस दिया गया था। अदालत ने यह भी सवाल किया था कि क्या ऐसी कोई तात्कालिक स्थिति थी, जिसके कारण कंपनी को सुने बिना कार्रवाई करना जरूरी था।
अब एफएसएसएआई का आदेश रद्द होने के बाद नियामक इस मामले पर दोबारा विचार कर सकता है और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नया निर्देश जारी कर सकता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी मीडिया संस्थानों, निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज और अन्य संबंधित संस्थाओं को तत्काल आदेश का पालन करने को कहा है।
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Vikas Saxena
मद्रास हाई कोर्ट के 25 सितंबर 2026 के आदेश के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी मीडिया संस्थानों, निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज और अन्य संबंधित संस्थाओं को तत्काल आदेश का पालन करने को कहा है। मंत्रालय ने यह निर्देश 29 सितंबर 2026 को जारी अपने संचार के जरिए दिया है।
मामला चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच में दर्ज क्राइम नंबर 174/2025 से जुड़ा है। यह मामला Tulir Charitable Trust vs. The Commissioner of Police & Ors. के तहत मद्रास हाई कोर्ट के सामने आया था। कोर्ट ने अंतरिम आदेश में मीडिया संस्थानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य संबंधित संस्थाओं को इस मामले से जुड़े किसी भी वीडियो को प्रकाशित, प्रसारित, अपलोड, शेयर, सर्कुलेट या दोबारा प्रसारित करने से रोक दिया है।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि अगर इस मामले से जुड़ी कोई सामग्री पहले से अपलोड की जा चुकी है, तो उसे तुरंत हटाया जाए। आदेश में कहा गया है कि ऐसा नहीं होने पर पुलिस कानून के तहत कार्रवाई करते हुए ऐसी सामग्री हटवाएगी। कोर्ट ने यह प्रक्रिया 26 सितंबर 2026 तक पूरी करने और अगली सुनवाई में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।
हर हफ्ते पुलिस जारी करेगी प्रेस रिलीज
हाई कोर्ट ने मामले की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए एक अलग व्यवस्था भी तय की है। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, इस गंभीर अपराध की जांच के संबंध में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) हर हफ्ते एक प्रेस रिलीज जारी करेगी। इसका मकसद यह है कि जनता को पुलिस की जांच की प्रगति की जानकारी मिलती रहे।
कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि मीडिया और अन्य संस्थाएं बाल शोषण से जुड़े व्यापक मुद्दों पर चर्चा कर सकती हैं, लेकिन ऐसी चर्चा में क्राइम नंबर 174/2025 से जुड़े तथ्यात्मक विवरण शामिल नहीं होने चाहिए।
पुलिस ने गूगल और मेटा से भी संपर्क किया
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु पुलिस की ओर से बताया गया कि साइबर क्राइम विंग ने मामले से जुड़े वीडियो हटाने के लिए गूगल और मेटा से संपर्क किया है। पुलिस ने बताया कि कुछ वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किए गए थे और संबंधित यूआरएल को ब्लॉक या निलंबित करने का अनुरोध किया गया। पुलिस के मुताबिक, 28 यूट्यूब चैनलों की जानकारी भी सामने आई है, जहां लीक हुई सामग्री अपलोड की गई थी।
कोर्ट ने अपने आदेश में प्रेस की स्वतंत्रता और इस मामले में पीड़ितों तथा आरोपी के हितों के बीच संतुलन बनाने की बात कही। कोर्ट ने कहा कि प्रेस को रिपोर्टिंग का अधिकार है, लेकिन यह भी देखा जाना जरूरी है कि यह अधिकार किस सीमा तक है और क्या इसमें मीडिया ट्रायल का अधिकार शामिल है।
मंत्रालय ने अपने संचार में कहा है कि हाई कोर्ट का आदेश तत्काल अनुपालन के लिए संबंधित सभी मीडिया संगठनों और प्लेटफॉर्म के पास भेजा जा रहा है।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि मीडिया और पत्रकारिता लोगों के दुनिया को देखने के नजरिए को आकार देने और ज्ञान की रोशनी फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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Samachar4media Bureau
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि मीडिया और पत्रकारिता लोगों के दुनिया को देखने के नजरिए को आकार देने और ज्ञान की रोशनी फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह बात फिक्की फ्रेम्स (FICCI FRAMES) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही।
शेखावत ने कहा कि कोई कहानी सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं होती। वह किसी विषय, जगह या मुद्दे को लेकर लोगों की सोच को प्रभावित कर सकती है और यह तय करने में भी भूमिका निभा सकती है कि समाज एक-दूसरे को किस तरह समझते हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय तकनीक और सामाजिक बदलाव के ऐसे दौर से गुजर रही है, जिसकी रफ्तार पहले कभी नहीं देखी गई। पिछले एक दशक में जितना बदलाव देखने को मिला है, वह पिछली पूरी सदी में हुए बदलाव से भी ज्यादा है। पिछले दो वर्षों में इस बदलाव की रफ्तार और तेज हुई है।
शेखावत के मुताबिक, आज मीडिया संस्थानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कंटेंट की कमी नहीं है। चुनौती यह है कि लगभग असीमित कंटेंट और दर्शकों के सीमित ध्यान के बीच अर्थ, मौलिकता, मानवीय जुड़ाव और भरोसा कैसे बनाए रखा जाए।
कंटेंट की मात्रा नहीं, उससे बनने वाली वैल्यू अहम: आयुष्मान खुराना
कार्यक्रम में फिक्की फ्रेम्स एंबेसडर और अभिनेता आयुष्मान खुराना ने कहा कि भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र अब फिल्मों, सीरीज और टेलीविजन तक सीमित नहीं है। इसमें गेमिंग, स्पोर्ट्स, म्यूजिक, क्रिएटर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शामिल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के मीडिया क्षेत्र की मौजूदा स्थिति सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि देश कितना कंटेंट तैयार कर रहा है, बल्कि यह भी मायने रखता है कि उस कंटेंट से कितनी वैल्यू पैदा हो रही है।
गलत जानकारी और AI से बने कंटेंट की चुनौती
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रभात ने कहा कि अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितना कंटेंट तैयार किया जा सकता है, बल्कि यह है कि उससे कितनी ऐसी वैल्यू बनाई जा सकती है, जो लंबे समय तक बनी रहे।
उन्होंने गलत जानकारी (मिसइन्फॉर्मेशन), सिंथेटिक कंटेंट और तेजी से ज्यादा आधुनिक होते AI से तैयार कंटेंट से जुड़ी चुनौतियों पर भी बात की।
दो दिन चलेगा फिक्की फ्रेम्स
दो दिवसीय फिक्की फ्रेम्स सम्मेलन में भारत के बदलते मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र पर कई महत्वपूर्ण चर्चाएं होंगी। इनमें फिल्म, टेलीविजन, स्ट्रीमिंग, स्पोर्ट्स, गेमिंग, क्रिएटर्स, AI, कॉपीराइट, डिजिटल मीडिया, लाइव इवेंट्स, एवीजीसी-एक्सआर (AVGC-XR), ई-स्पोर्ट्स और भारतीय कंटेंट व बौद्धिक संपदा के वैश्विक विस्तार जैसे विषय शामिल हैं।
सम्मेलन में मुख्य भाषण, फायरसाइड चैट, इंडस्ट्री पैनल, स्क्रीनिंग, नेटवर्किंग सेशन, एमओयू एक्सचेंज और अवॉर्ड समारोह भी आयोजित किए जाएंगे।
रेमंड लाइफस्टाइल लिमिटेड के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और पूर्णकालिक निदेशक (Whole-time Director) सत्यकी घोष ने 19 सितंबर को अपना जन्मदिन मनाया।
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Samachar4media Bureau
रेमंड लाइफस्टाइल लिमिटेड के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और पूर्णकालिक निदेशक (Whole-time Director) सत्यकी घोष ने 19 सितंबर को अपना जन्मदिन मनाया। यह उनके उस उल्लेखनीय पेशेवर सफर के भी जश्न का अवसर रहा, जो FMCG, रिटेल, टेक्सटाइल और उपभोक्ता व्यवसायों में 25 वर्षों से अधिक समय तक फैला हुआ है।
सत्यकी घोष जनवरी 2026 में रेमंड लाइफस्टाइल लिमिटेड से जुड़े थे। वर्तमान में वह कंपनी के CEO और पूर्णकालिक निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने B2B और उपभोक्ता-केंद्रित बाजारों, दोनों क्षेत्रों में काम करने का अनुभव हासिल किया है।
रेमंड लाइफस्टाइल से जुड़ने से पहले सत्यकी घोष ग्रासिम इंडस्ट्रीज में सेलुलोसिक फैशन यार्न के CEO के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले उन्होंने आदित्य बिड़ला समूह के घरेलू टेक्सटाइल कारोबार और थाई एक्रिलिक फाइबर के संचालन का नेतृत्व किया।
इससे पहले सत्यकी घोष ने लोरियल इंडिया में सात वर्षों से अधिक समय तक काम किया। वह कंपनी के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिवीजन के निदेशक भी रहे, जहां उन्होंने लोरियल पेरिस, गार्नियर और मेबेलिन जैसे ब्रैंड्स की जिम्मेदारी संभाली।
उनके करियर में पेप्सिको इंडिया, स्पेंसर्स रिटेल, जीई लाइटिंग और बर्न्स फिल्प में निभाई गई भूमिकाएं भी शामिल हैं।
कोलकाता विश्वविद्यालय से संबद्ध इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर एंड बिजनेस मैनेजमेंट (IISWBM) के पूर्व छात्र सत्यकी घोष ब्रैंड्स, उपभोक्ताओं और मैन्युफैक्चरिंग की व्यापक समझ रखते हैं। यही अनुभव वह रेमंड लाइफस्टाइल में लेकर आए हैं, जहां कंपनी अपने विकास के अगले चरण की ओर आगे बढ़ रही है।
मिंत्रा के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर सुंदर बालासुब्रमण्यम ने करीब चार साल बाद कंपनी छोड़ी। उन्होंने कंज्यूमर टेक्नोलॉजी, एफएमसीजी और विज्ञापन क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है।
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सुंदर बालासुब्रमण्यम ने करीब चार साल तक कंपनी के साथ रहने के बाद मिंत्रा (Myntra) से विदाई की घोषणा की है। वह कंपनी में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer) के पद पर कार्यरत थे। अपनी भूमिका में वह कस्टमर ग्रोथ (Customer Growth), मार्केटिंग, क्रिएटिव और कैटलॉग फंक्शंस (Creative and Catalogue Functions) का नेतृत्व कर रहे थे।
सुंदर बालासुब्रमण्यम के पास कंज्यूमर टेक्नोलॉजी (Consumer Technology), एफएमसीजी (FMCG) और एडवरटाइजिंग (Advertising) में 20 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है।
मिंत्रा से जुड़ने से पहले वह कूपांग (Coupang) में हेड-इंटरनेशनल मार्केटिंग (Head - International Marketing) के पद पर थे। वहां उन्होंने ताइवान और जापान में कंपनी के लॉन्च (Launches) पर काम किया। इससे पहले वह डिज्नी+ हॉटस्टार (Disney+ Hotstar) और कोलगेट-पामोलिव इंडिया (Colgate-Palmolive India) में भी लीडरशिप रोल (Leadership Roles) संभाल चुके हैं।
सौरभ कंवर ने NMIMS स्कूल ऑफ ब्रांडिंग एंड ऐडवर्टाइजिंग (SOBA) में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
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सौरभ कंवर ने NMIMS स्कूल ऑफ ब्रैंडिंग एंड ऐडवर्टाइजिंग (SOBA) में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। सौरभ कंवर ने खुद लिंक्डइन पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैंने एनएमआईएमएस स्कूल ऑफ ब्रैंडिंग एंड ऐडवर्टाइजिंग (SOBA) में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के तौर पर जॉइन किया है। यह भारत का पहला ऐसा अंडरग्रेजुएट स्कूल है, जो पूरी तरह इसी क्षेत्र पर बनाया गया है। और रिकॉर्ड के लिए बता दूं कि मेरे छात्र आईफोन से भी छोटे हैं।”
उन्होंने आगे लिखा कि उनके छात्र अपने करियर की शुरुआत एआई के साथ काम करते हुए करेंगे। ऐसे में पुराने सिलेबस का सवाल कि ‘उन्हें क्या पता होना चाहिए?’ अब बदलकर यह हो गया है कि ‘उन्हें किन चीजों को परखने में सक्षम होना चाहिए?’
कंवर ने हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा कि अब उन्हें बस सुबह 9 बजे की क्लास को इंस्टाग्राम से मुकाबला करना है और कभी-कभी जीतना भी है। सौरभ कंवर डॉसकंटेंट डिजाइंस के फाउंडर और सीईओ हैं।
ओम्निकॉम मीडिया इंडिया के सीईओ कार्तिक शर्मा को एमआरयूसीआई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में नियुक्त किया गया है। वह मीडिया रिसर्च, एनालिटिक्स और कम्युनिकेशन प्लानिंग में करीब तीन दशक का अनुभव रखते हैं।
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ओम्निकॉम मीडिया इंडिया (Omnicom Media India) के सीईओ कार्तिक शर्मा (Kartik Sharma) को मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (Media Research Users Council India) यानी एमआरयूसीआई (MRUCI) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Board of Governors) में नियुक्त किया गया है।
कार्तिक शर्मा बोर्ड में नियुक्त किए गए चार नए सदस्यों में शामिल हैं। उनके साथ एचटी मीडिया (HT Media) में प्रिंट और रेडियो के सीईओ समुद्र भट्टाचार्य (Samudra Bhattacharya), साकल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Sakal Media Pvt. Ltd.) की निदेशक जान्हवी अभिजीत पवार (Janhavi Abhijit Pawar) और डब्ल्यूपीपी मीडिया साउथ एशिया (WPP Media South Asia) की प्रेसिडेंट, क्लाइंट सॉल्यूशंस नवीन खेमका (Navin Khemka) को भी बोर्ड में नियुक्त किया गया है।
ये नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं, जब एमआरयूसीआई भारतीय रीडरशिप सर्वे (Indian Readership Survey) यानी आईआरएस (IRS) को दोबारा शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। संगठन के अनुसार, नए आईआरएस का उद्देश्य मीडिया कंजम्पशन (Media Consumption) के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए आधुनिक क्रॉस-मीडिया मेजरमेंट फ्रेमवर्क (Cross-Media Measurement Framework) तैयार करना है।
कार्तिक शर्मा को मीडिया इंडस्ट्री (Media Industry) में करीब तीन दशक का अनुभव है। उन्हें कम्युनिकेशन प्लानिंग (Communication Planning), बिहेवियरल इकोनॉमिक्स (Behavioural Economics), मीडिया रिसर्च (Media Research), एनालिटिक्स (Analytics) और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने ग्राहकों के साथ मजबूत बिजनेस रिलेशनशिप बनाने पर भी काम किया है। उनके अनुभव में हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever), मोंडेलेज (Mondelez), नेटफ्लिक्स (Netflix) और लॉरियल (L’Oréal) जैसे प्रमुख ब्रांड शामिल हैं।
शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत एचटीए (HTA) में मीडिया प्लानर (Media Planner) के रूप में की थी। इसके बाद वह लिंटास (Lintas) में चैनल प्लानिंग डायरेक्टर (Channel Planning Director) बने। आगे उन्होंने माइंडशेयर (Mindshare), मैडिसन मीडिया रिसर्च सेंटर (Madison Media Research Centre) और मैक्सस (Maxus) में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। मैक्सस में उन्होंने पश्चिम क्षेत्र का नेतृत्व किया।
काकून सेठी 8 अक्टूबर 2026 से मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया की नई सीईओ होंगी। वह 35 वर्षों के अनुभव के साथ आईआरएस के रीलॉन्च की जिम्मेदारी संभालेंगी।
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मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (Media Research Users Council India) ने काकून सेठी (Kaacon Sethi) को अपना नया सीईओ (CEO) नियुक्त किया है। वह 8 अक्टूबर 2026 से यह जिम्मेदारी संभालेंगी। एमआरयूसीआई (MRUCI) में यह शीर्ष नेतृत्व पद करीब छह साल से खाली था। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब इंडियन रीडरशिप सर्वे (Indian Readership Survey) के दोबारा शुरू होने की तैयारी है।
काकून सेठी के पास मीडिया, एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स, कंटेंट और मार्केटिंग के क्षेत्र में 35 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रमुख एजेंसियों के साथ मीडिया प्लानिंग और मीडिया बाइंग (Media Planning & Buying) से की थी।
इसके बाद वह सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (Sony Entertainment Television) से जुड़ीं, जहां उन्होंने सेट (SET) के मार्केटिंग और सेल्स (Marketing & Sales) का नेतृत्व किया। इसी दौरान उन्होंने सोनी मैक्स (Sony MAX) को बिजनेस हेड (Business Head) के तौर पर लॉन्च किया और पीएंडएल (P&L) की जिम्मेदारी संभाली।
काकून सेठी के एग्जीक्यूटिव लीडरशिप (Executive Leadership) अनुभव में के सेरा सेरा प्रोडक्शंस (K Sera Sera Productions) की सीईओ और लिंटास मीडिया ग्रुप (Lintas Media Group) में ब्रांडेड कंटेंट सॉल्यूशंस (Branded Content Solutions) का नेतृत्व शामिल है।
सबसे हाल में उन्होंने दैनिक भास्कर ग्रुप (Dainik Bhaskar Group) में एक दशक से ज्यादा समय तक चीफ कॉरपोरेट मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Corporate Marketing Officer) के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने कांटार-दैनिक भास्कर अर्बन भारत पहल (Kantar–Dainik Bhaskar Urban Bharat initiative) और रिपोर्ट में क्लाइंट लीड (Client Lead) की भूमिका निभाई।
एमआरयूसीआई में नई जिम्मेदारी के तहत काकून सेठी इंडियन रीडरशिप सर्वे को नए सिरे से शुरू करने की प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगी। इसमें स्टडी डिजाइन (Study Design), मेथडोलॉजी (Methodology) और मीडिया क्वालिटी व इम्पैक्ट (Media Quality & Impact) को मापने के लिए नए फ्रेमवर्क पर काम किया जाएगा।
एमआरयूसीआई के चेयरमैन विक्रम सखूजा (Vikram Sakhuja) ने कहा, “मैं बहुत उत्साहित हूं कि काकून ऐसे समय में एमआरयूसीआई का नेतृत्व करेंगी, जब ऑडियंस मेजरमेंट (Audience Measurement) को विश्वसनीयता के साथ नए नजरिए की भी जरूरत है। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।”
काकून सेठी ने कहा, “मैं एमआरयूसीआई की यह जिम्मेदारी संभालकर खुश हूं। ऑडियंस मेजरमेंट मीडिया इंडस्ट्री को बदलते मीडिया कंजम्पशन बिहेवियर (Media Consumption Behaviour) को समझने और बेहतर फैसले लेने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”
प्रसार भारती की न्यूज सर्विस पीबीशब्द (PBSHABD) की पहुंच लगातार बढ़ रही है। अब देशभर के करीब 3,600 मीडिया संगठन इस सेवा से जुड़े हैं।
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Samachar4media Bureau
प्रसार भारती की न्यूज सर्विस पीबीशब्द (PBSHABD) की पहुंच लगातार बढ़ रही है। अब देशभर के करीब 3,600 मीडिया संगठन इस सेवा से जुड़े हैं। सार्वजनिक प्रसारक ने करीब दो साल पहले अपनी न्यूज इंफ्रास्ट्रक्चर को बाहरी यूजर्स के लिए भी उपलब्ध कराया था।
मार्च 2024 में शुरू किया गया पीबीशब्द, प्रसार भारती की पहले से चल रही प्रसार भारती न्यूज सर्विस (PBNS) का विस्तार है। पीबीएनएस पहले आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए एक इंटरनल न्यूज वायर के तौर पर काम करता था।
अब पीबीशब्द के जरिए रजिस्टर्ड अखबारों, टीवी और रेडियो ब्रॉडकास्टर्स, डिजिटल पब्लिशर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को अलग-अलग फॉर्मेट और भाषाओं में तैयार न्यूज कंटेंट उपलब्ध कराया जाता है।
मार्च 2027 तक मुफ्त है सेवा
पीबीशब्द की सेवा फिलहाल मार्च 2027 तक मुफ्त है। इसके जरिए करीब 50 कैटेगरी में चौबीसों घंटे खबरें उपलब्ध कराई जाती हैं। कंटेंट 15 भारतीय भाषाओं में दिया जाता है।
पीबीशब्द के लिए प्रसार भारती ने नया न्यूज रूम शुरू करने के बजाय अपने मौजूदा न्यूज नेटवर्क का इस्तेमाल किया है। इसकी न्यूज पाइपलाइन में 1,500 से ज्यादा रिपोर्टर, कॉरेस्पॉन्डेंट और स्ट्रिंगर योगदान देते हैं। इनके साथ करीब 60 डेडिकेटेड एडिटोरियल डेस्क चौबीसों घंटे काम करते हैं।
आकाशवाणी और दूरदर्शन के क्षेत्रीय न्यूज यूनिट भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करते हैं। इससे पीबीशब्द का रिपोर्टिंग नेटवर्क प्रसार भारती के अपने प्लेटफॉर्म से काफी आगे तक पहुंचता है।
पांच फॉर्मेट में मिलता है कंटेंट
पीबीशब्द पर खबरें टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटो और इन्फोग्राफिक्स जैसे पांच फॉर्मेट में उपलब्ध होती हैं। इससे मीडिया संगठन एक ही न्यूज फीड का इस्तेमाल टीवी, प्रिंट, वेबसाइट, सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कर सकते हैं।
इस सर्विस की एक खास बात इसका डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल है। रजिस्टर्ड यूजर्स को प्लेटफॉर्म से डाउनलोड किए गए कंटेंट के लिए कोई सब्सक्रिप्शन फीस नहीं देनी पड़ती। फिलहाल यह मुफ्त सुविधा मार्च 2027 तक जारी रहने की बात कही गई है।
बैकग्राउंडर के मुताबिक, इस कंटेंट पर प्रसार भारती का लोगो नहीं होता और क्रेडिट लाइन देना भी जरूरी नहीं है। इससे छोटे प्रकाशनों को फायदा हो सकता है, क्योंकि वे किसी राष्ट्रीय खबर को अपने ही अखबार या प्लेटफॉर्म के नाम से प्रकाशित कर सकते हैं और इसके लिए बड़ा रिपोर्टिंग नेटवर्क बनाए रखना जरूरी नहीं होता।
छोटे और क्षेत्रीय मीडिया संगठनों के लिए मददगार
यह मॉडल खास तौर पर उन छोटे और क्षेत्रीय मीडिया संगठनों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिनके दिल्ली या भारत के बाहर अपने संवाददाता नहीं हैं। अलग-अलग फॉर्मेट में तैयार कंटेंट मिलने से प्रोडक्शन लागत कम करने और खबर मिलने से लेकर उसके प्रकाशन तक का समय घटाने में भी मदद मिल सकती है।
पीबीशब्द फिलहाल 15 भारतीय भाषाओं और करीब 50 कैटेगरी में कंटेंट उपलब्ध कराता है। इसमें राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय घटनाक्रम शामिल हैं। इसके यूजर्स में अखबार, न्यूज टीवी चैनल, डिजिटल पब्लिशर्स और कंटेंट क्रिएटर्स शामिल हैं।
आकाशवाणी और दूरदर्शन का बड़ा न्यूज नेटवर्क
पीबीशब्द के पीछे प्रसार भारती का बड़ा रिपोर्टिंग और बुलेटिन नेटवर्क काम करता है। आकाशवाणी के 46 क्षेत्रीय न्यूज यूनिट हैं और मुख्यालय स्तर पर भी ऑपरेशन चलता है। आकाशवाणी रोजाना 92 भाषाओं और बोलियों में 607 बुलेटिन तैयार करता है।
वहीं, दूरदर्शन न्यूज के 31 क्षेत्रीय न्यूज यूनिट और मुख्यालय का ऑपरेशन है। दूरदर्शन न्यूज रोजाना 22 से ज्यादा भाषाओं और बोलियों में 145 से ज्यादा बुलेटिन तैयार करता है।
खबरों की कई स्तर पर जांच
पीबीशब्द का कहना है कि कंटेंट जारी करने से पहले उसकी कई स्तर पर एडिटोरियल जांच की जाती है। फर्जी, बदले हुए या छेड़छाड़ किए गए कंटेंट को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय किए गए हैं। साथ ही, बिना पुष्टि वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मिली जानकारी को लेकर भी सावधानी बरती जाती है।
खबरों में टाइमस्टैम्प, डेटलाइन और कैप्शन दिए जाते हैं, जिससे यूजर्स को यह पता चलता है कि घटना कब और कहां हुई। यह वेरिफिकेशन सिस्टम ऐसे समय में महत्वपूर्ण बताया गया है, जब खबरें टीवी, अखबार, वेबसाइट, यूट्यूब, सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप जैसे कई प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलती हैं।
अब पीबीशब्द 2.0 की तैयारी
प्रसार भारती अब पीबीशब्द के अगले चरण की तैयारी कर रहा है। पीबीशब्द 2.0 में नए प्रोडक्ट और बेहतर कंटेंट डिलीवरी की सुविधा आने की उम्मीद है।
3,600 मीडिया संगठनों के जुड़ने के साथ पीबीशब्द प्रसार भारती के न्यूज नेटवर्क को अपने प्लेटफॉर्म से बाहर बड़ी संख्या में मीडिया संगठनों तक पहुंचाने का काम कर रहा है। इससे प्रसार भारती का राष्ट्रीय रिपोर्टिंग नेटवर्क देश के बहुभाषी और अलग-अलग प्लेटफॉर्म में बंटे न्यूज इकोसिस्टम से जुड़ रहा है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा को बताया है कि पत्रकार कल्याण योजना (JWS) 2023 के तहत सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) को अब तक एक भी आवेदन नहीं मिला है।
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Samachar4media Bureau
जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा को बताया है कि पत्रकार कल्याण योजना (JWS) 2023 के तहत सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) को अब तक एक भी आवेदन नहीं मिला है। सरकार ने बताया कि इस योजना के तहत मुश्किल हालात का सामना कर रहे मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों, फ्रीलांस पत्रकारों और उनके परिवारों को एक बार की आर्थिक मदद दी जाती है।
2023 में शुरू हुई थी योजना
विधायक रणबीर सिंह पठानिया के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से 1 अप्रैल 2023 को जारी पत्रकार कल्याण योजना पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर लागू है।
इस योजना के तहत पत्रकार की मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तक, स्थायी दिव्यांगता के मामले में 5 लाख रुपये तक और ऐसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए 3 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जा सकती है, जिसका इलाज केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) या बीमा के तहत कवर नहीं होता।
PIB या सूचना विभाग के जरिए कर सकते हैं आवेदन
सरकार ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के पत्रकार इस योजना के तहत प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) और/या सूचना विभाग के जरिए आवेदन कर सकते हैं। केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े पात्र मामलों को उचित सिफारिश के साथ आगे भेजा जा सकता है।
पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान जिलेवार कितने आवेदन मिले, कितनी राशि मंजूर हुई और कितनी आर्थिक सहायता जारी की गई, इस सवाल पर सरकार ने कहा कि JWS-2023 केवल जम्मू-कश्मीर के लिए बनाई गई योजना नहीं है।