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तमाम खूबियों के अलावा उमेश उपाध्याय की यही बात सबसे अच्छी थी: हर्ष वर्धन त्रिपाठी
इतने ऊंचे पदों पर रहकर इतनी विनम्रता आज के दौर में मुश्किल ही है। अपनी ऊंची पहुंच/संबंधों का दिखावा करते उन्हें मैंने नहीं देखा।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
हर्ष वर्धन त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार।।
उमेश उपाध्याय जी के साथ मेरा कोई बहुत पुराना परिचय नहीं था। राष्ट्रवादी धारा के पत्रकार होने की वजह से हम दोनों की वैचारिक गर्भनाल जुड़ी हुई थी, इस वजह से मैं उन्हें पत्रकारिता के शुरुआती दिनों से ही जानता था, लेकिन उनसे पहला परिचय मेरे मुम्बई से दिल्ली आने के बाद हुआ। वह भी लंबे समय तक औपचारिक ही रहा। उनसे संबंधों में प्रगाढ़ता पिछले पांच वर्षों में आई। स्नेहिल भाव से हमेशा कहते थे कि, पंडित जी, आप अच्छा कर रहे हैं। इतने ऊंचे पदों पर रहकर इतनी विनम्रता आज के दौर में मुश्किल ही है। अपनी ऊंची पहुंच/संबंधों का दिखावा करते उन्हें मैंने नहीं देखा।
‘नेटवर्क18’ के एडिटर-इन-चीफ और उसके बाद रिलायंस के प्रवक्ता के तौर पर भी लगातार उनसे मिलना होता रहा। उमेश जी की सबसे अच्छी बात थी कि, अपने विचारों पर दृढ़ थे, लेकिन दूसरे विचार वालों के प्रति किसी तरह की कोई कटुता नहीं रखते थे। इतने मिलनसार और विनम्र स्वभाव के थे कि, अगर किसी के मन में उनको लेकर किसी तरह की कटुता या ईर्ष्या का भाव आए भी तो उनके लिए कहने का साहस नहीं जुटा पाता था।
हाल ही में उमेश जी ने भारत को लेकर विदेशी मीडिया की पक्षपाती दृष्टि पर एक पुस्तक लिखी थी। गुरुग्राम विश्वविद्यालय में उनकी पुस्तक 'Western Media Narrative On India: From Gandhi to Modi' पर चर्चा के एक सत्र में उनके साथ हाल में ही रहना हुआ था। उस कार्यक्रम से हम साथ ही निकले, उन्होंने कहा कि, आप इतना बोलते/लिखते हैं, पुस्तक क्यों नहीं लिखते। दूसरों को भी प्रेरित करते रहना उनके स्वभाव में रहा होगा। अभी कृष्ण जन्माष्टमी के दिन उनका जन्मदिन था। मैंने उन्हें जन्मदिन की बधाई देने के लिए फोन किया तो उन्होंने बताया कि, असल में उनके जन्मदिन पर अंग्रेजी तिथि पर भी जन्माष्टमी ही थी और इस वर्ष यह संयोग पुनः बन गया।
उन्होंने कहा- पंडित जी आपसे भेंट ही नहीं हो पाती। मैंने कहा- सर, अगले सप्ताह आपसे भेंट तय रही, लेकिन नियति के सामने किसी का तय करना कहां हो पाता है। राष्ट्रवादी विमर्श को बिना शोर शराबे के मजबूती से आगे बढ़ाने वाला एक पत्रकार चला गया। विनम्र श्रद्धांजलि, ॐ शान्ति शान्ति शान्ति...।
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