मीडिया घरानों को सूचनाएं लीक कर पार्टी नेताओं की छवि खराब कर रहा ED: कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने ईडी पर आरोप लगाया कि वह पार्टी नेताओं की छवि खराब करने के लिए कुछ मीडिया घरानों को चुनिंदा सूचनाएं लीक कर रहा है।

Last Modified:
Tuesday, 21 June, 2022
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नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 21 जून को भी पूछताछ के लिए  बुलाया। राहुल गांधी से ED की पूछताछ का मंगलवार को पांचवां दिन है। नेशनल हेराल्ड केस में अब तक राहुल गांधी से 4 दिनों में 40 घंटे से ज्यादा की पूछताछ हो चुकी है।

राहुल गांधी से लगातार हो रही ईडी की पूछताछ को लेकर कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन ने बड़ा प्रवर्तन निदेशालय और केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। अजय माकन ने कहा कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों के जरिए विपक्ष की आवाज को दबाने का काम कर रही है।

इतना ही नहीं, उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर आरोप लगाया कि वह पार्टी नेताओं की छवि खराब करने के लिए कुछ मीडिया घरानों को चुनिंदा सूचनाएं लीक कर रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने सोमवार को नई दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ जांच को प्रभावित करने के लिए मोदी सरकार द्वारा कहानी गढ़ी जा रही है। नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी के चौथी बार ईडी के सामने पेश होने के बाद माकन की यह टिप्पणी आयी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हमारे नेताओं की छवि खराब करने के लिए झूठी और चुनिंदा खबरें-सूचनाएं लीक कर रही है। माकन ने कहा, ‘नेशनल हेराल्ड मामला ऐसा मुद्दा है, जिसमें किसी को एक पैसे का लाभ नहीं हुआ है, लेकिन फिर भी लगातार चौथे दिन हमारे नेता को बुलाया गया है, जो पार्टी की छवि खराब करने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो और ईडी का इस्तेमाल कर विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।

अजय माकन ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों को निर्देश दिए जाते हैं कि या तो मोदी सरकार और भाजपा के खिलाफ बोलना बंद करें, वरना उन पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि कई नेता ऐसे हैं जिन्हें पहले ईडी और सीबीआई के जरिए परेशान किया गया और बाद में जब वह भाजपा में शामिल हो गए तो उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रवर्तन निदेशालय में कुल 5422 केस चल रहे हैं, जिनमें से अकेले पर 5310 केस अकेले मोदी सरकार के 8 साल के कार्यकाल में दर्ज हुए, जिससे पता चलता है कि किस कदर विपक्ष के नेताओं को ईडी के जरिए डराया और धमकाया जा रहा है। उन्होंने प्रतिप्रश्न करते हुए कहा, इससे क्या यह ऐसा नहीं लगता कि ईडी अब चुनाव प्रबंधन विभाग बन गया है?

उन्होंने कहा कि हेमंत बिस्वा को शारदा घोटाले में ईडी ने बुलाया था, उनसे पूछताछ हुई लेकिन जब वो बीजेपी में शामिल हो गए तो उन पर कार्रवाई रोक दी गई। येदुरप्पा पर पर भी केस दर्ज हुआ था उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। नारायण राणे जब तक कांग्रेस में रहे जब तक उन्हें रोज ईडी और इनकम टैक्स के नोटिस भेजे जाते थे, लेकिन जैसे ही भाजपा में चले गए तो वह पाक साफ हो गए। मुकुल रॉय और सोमेन मित्रा जब तक तृणमूल कांग्रेस में रहे उन्हें एक भी ईडी और सीबीआई के जरिए परेशान किया जाता रहा। उन्होंने कहा कि यह सब चीजें इस बात को साबित करती है कि अन्य दलों के नेताओं को भाजपा में शामिल कराने के लिए भी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जाता है।

वहीं, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि 'शायद ईडी को कुछ काम नहीं है इसलिए राहुल जी को बुला लेते है, चार दिन की पूछताछ से कुछ निकलता है? लेकिन लगातार बुला रहे है।'

गौरतलब है कि 19 जून को राहुल गांधी का 52वां जन्मदिन था। पिछले सप्ताह सोमवार, मंगलवार और बुधवार को लगातार तीन दिन और सोमवार को फिर से ईडी के अधिकारियों ने पूछताछ की। 52 वर्षीय राहुल गांधी से अब तक 40 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की जा चुकी है। इल दौरान धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनके बयान दर्ज किये गए।

ईडी ने इसी मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 23 जून को तलब किया है। सोनिया गांधी कोविड-19 से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं।    

गौरतलब है कि नेशनल हेराल्ड का मामला 2012 में चर्चा में आया था। तब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ कांग्रेसी नेताओं ने गलत तरीके से यंग इंडियन लिमिटेड (वाईआईएल) के जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण किया है। स्वामी ने आरोप लगाया था कि यह सब कुछ दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपए की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया। साजिश के तहत यंग इंडियन लिमिटेड को टीजेएल की संपत्ति का अधिकार दिया गया है।

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'समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया' ने इन पत्रकारों को किया सम्मानित

स्वतंत्रता दिवस पर गाजियाबाद के विजयनगर स्थित प्रताप विहार सेक्टर 11 में आयोजित इस सम्मान समारोह के मौके पर संस्था द्वारा एक परिचर्चा भी आयोजित की गई, जिसका विषय था ‘कल्याणकारी योजनाएं और वंचित वर्ग।’

Last Modified:
Tuesday, 16 August, 2022
Award

‘समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘आजादी का महापर्व’ मनाते हुए प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े नौ पत्रकारों को उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया। गाजियाबाद के विजयनगर स्थित प्रताप विहार सेक्टर 11 में आयोजित इस सम्मान समारोह के मौके पर संस्था द्वारा एक परिचर्चा भी आयोजित की गई, जिसका विषय था ‘कल्याणकारी योजनाएं और वंचित वर्ग।’

इस परिचर्चा के दौरान ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ के संपादक जितेन्द्र बच्चन ने आजादी के लिए कुर्बान हुए शहीदों को याद करते हुए कहा कि जिन्होंने अपनी जान देकर इस देश को आजाद कराया, उन्हीं के मुल्क में आज 75 साल बाद भी आम आदमी अपना हक पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। भ्रष्टाचार के चलते समाज का गरीब तबका और मजलूम वर्ग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित है। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

जितेन्द्र बच्चन ने कहा कि देश को आजाद कराने में पत्रकारों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इस संघर्ष में तमाम समाचार पत्र-पत्रिकाएं और उसके संपादकों को तमाम परेशानियों से जूझना पड़ा, इसके बावजूद लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ अपना सीना ताने खड़ा है। हालांकि पत्रकारों के लिए चुनौती कम नहीं हुई है। कल तक जहां यह मुल्क गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, आज वहीं भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में हमारा कर्तव्य बनता है कि हम भ्रष्टाचार की जड़ पर करारा प्रहार करें। सरकार और समाज की सच्चाई आम लोगों के सामने लाएं।

संस्था के राष्ट्रीय महासचिव कृष्ण कुमार द्विवेदी ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर जिन पत्रकारों को उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया गया है, उनमें वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र बच्चन और एनके शर्मा शामिल हैं।

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दुनिया को अलविदा कह गईं जानी-मानी न्यूज रीडर सरोज नारायणस्वामी

ऑल इंडिया रेडियो (AIR) से सेवानिवृत्ति के बाद मुंबई स्थित अपने आवास पर रह रही थीं करीब 86 वर्षीय सरोज नारायणस्वामी

Last Modified:
Sunday, 14 August, 2022
Saroj Narayanaswami

‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) की पूर्व न्यूज रीडर सरोज नारायणस्वामी का निधन हो गया है। उन्होंने शनिवार को मुंबई स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। करीब 86 वर्षीय सरोज पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। उनके परिवार में एक बेटी और एक बेटा है।

उन्होंने ‘ऑल इंडिया रेडियो’ के समाचार सेवा प्रभाग की तमिल न्यूज यूनिट में बतौर तमिल न्यूज रीडर-कम ट्रांसलेटर काम किया था। वह 20 साल से ज्यादा समय तक तमिल यूनिट में न्यूज इंचार्ज रही थीं। ब्रॉडकास्टिंग जर्नलिज्म में सरोज नारायणस्वामी के योगदान के लिए वर्ष 2009 में उन्हें तमिलनाडु सरकार द्वारा कलाईमनी पुरस्कार (Kalaimamani Award) से सम्मानित किया गया था।

वह मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के दौरान तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन की आधिकारिक दुभाषिया रही थीं। बॉम्बे यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में ऑनर्स की डिग्री के साथ सरोज नारायणस्वामी ने नई दिल्ली स्थित ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म का कोर्स किया था।

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पत्रकार के सवालों पर भड़की पुलिस, भीड़ के सामने जमकर पीटा

बिहार के सारण इलाके में संदिग्ध हालात में एक व्यक्ति की मौत के मामले में जांच के लिए पहुंची थी पुलिस

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 13 August, 2022
Last Modified:
Saturday, 13 August, 2022
Police

बिहार के सारण इलाके में पुलिस द्वारा कवरेज के दौरान एक पत्रकार को पीटने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सारण जिले के गरखा थाना इलाके के औढ़ा माल गांव में पुलिस अलाउद्दीन खान (35) नामक व्यक्ति की संदिग्ध हालात में हुई मौत के मामले में जांच के लिए पहुंची थी। कथित तौर पर अलाउद्दीन खान की मौत अवैध शराब पीने से हुई थी।

इसी दौरान वहां मौजूद अनूप नामक स्थानीय पत्रकार ने पुलिस से क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री को लेकर सवाल शुरू कर दिए। बताया जाता है कि पहले तो पुलिस काफी देर तक चुप रही, इसके बाद उसने तमाम लोगों के सामने अनूप की पिटाई शुरू कर दी। इसके साथ ही पुलिस ने उसका माइक भो तोड़ डाला।

बताया जाता है कि पत्रकार की पिटाई होते देखकर गांव वाले भी आक्रोशित हो गए और उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने अनूप को पीटना बंद किया।

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पत्रकार ऋचा जैन कालरा के खाते में जुड़ी एक और बड़ी उपलब्धि

अपने दो दशक से भी अधिक के मीडिया सफर में उन्होंने एक से एक बेहतरीन ग्राउंड रिपोर्टिंग और शो किए हैं। सालों तक वह ‘एनडीटीवी‘ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा रही हैं।

Last Modified:
Friday, 12 August, 2022
Richa Jain

जानी-मानी टीवी एंकर और पत्रकार ऋचा जैन कालरा के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। दरअसल, उन्हें ‘Caparo Maruti Limited’ ( Joint Venture Between MSIL and Lord Swaraj Paul Caparo Group) और ’Caparo Engineering India Ltd’ (CEIL) में स्वतंत्र निदेशक चुना गया है।

ऋचा जैन कालरा को उनके लंबे अनुभव और दक्षता को देखते हुए लॉर्ड स्वराज पॉल के ‘Caparo India Group‘ में यह अहम जिम्मेदारी दी गई है। ऋचा जैन कालरा की यह उपलब्धि इस मायने में भी खास है क्योंकि देश में गिने-चुने पत्रकार/एंकर ही खबरों के साथ-साथ कॉरपोरेट की दुनिया में भी खास मुकाम हासिल कर पाते हैं।

अपने दो दशक से भी अधिक के मीडिया सफर में उन्होंने एक से एक बेहतरीन ग्राउंड रिपोर्टिंग और शो किए हैं। सालों तक वह ‘एनडीटीवी‘ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा रही हैं।

पिछले साल उन्होंने डिजिटल की ओर अपने कदम बढ़ाते हुए ‘अच्छी खबर’ (Achchi Khabar) नाम से यूट्यूब चैनल की शुरुआत की है। ऋचा इस चैनल की फाउंडर और सीईओ हैं। इस चैनल पर दर्शकों को ऐसी कहानियों से रूबरू करवाया जाता है, जो न सिर्फ सकारात्मक होती हैं, बल्कि लोगों के जीवन में एक नए उत्साह और उमंग को भरने का कार्य करती हैं।

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दिनदहाड़े ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर ‘प्रभात खबर’ के पत्रकार की हत्या

मोटरसाइकिल सवार पांच बदमाशों ने घात लगाकर दिया वारदात को अंजाम, परिजनों ने लगाया चुनावी रंजिश में हत्या का आरोप

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 11 August, 2022
Last Modified:
Thursday, 11 August, 2022
Murder

बिहार के जमुई में बेखौफ बदमाशों द्वारा बुधवार को दिनदहाड़े गोली मारकर ‘प्रभात खबर‘ के पत्रकार गोकुल कुमार की हत्या का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोकुल कुमार (35) सिमुलतल्ला थाना क्षेत्र के लीलावरण गांव के रहने वाले थे और प्रभात खबर में रिपोर्टर के पद पर कार्यरत थे।

बताया जाता है कि मोटरसाइकिल सवार पांच हमलावर सुबह से ही गोकुल कुमार (35) के घर के नजदीक रास्ते में घात लगाकर इंतजार कर रहे थे। नाश्ता करने के बाद करीब 11 बजे जैसे ही गोकुल कुमार वहां से गुजरे, बदमाशों ने उन पर नजदीक से गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। बदमाशों ने एक गोली गोकुल कुमार की कनपटी पर, दूसरी सीने में और तीसरी पीठ में मारी।

वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पत्रकार के परिजन और पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और घायल गोकुल को इलाज के लिए जमुई के सदर अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने गोकुल कुमार को मृत घोषित कर दिया।

गोकुल के पिता नागेन्द्र यादव का कहना है कि पंचायत चुनाव की रंजिश में उनके बेटे की हत्या की गई है। नागेन्द्र यादव के अनुसार, गोकुल कुमार ने इस बार पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी को मुखिया पद के लिए प्रत्याशी बनाया था, जो विरोधी खेमे को नागवार गुजरा और उन्होंने इस घटना को अंजाम दे दिया। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और परिजनों ने जिन लोगों पर आशंका जताई है, उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।

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‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ है हमारा विकास मंत्र: प्रो. संजय द्विवेदी

भारतीय जनसंचार संस्थान एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की ओर से ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के उपलक्ष्य में विशेष परिचर्चा का किया गया आयोजन

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 10 August, 2022
Last Modified:
Wednesday, 10 August, 2022
IIMC

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) एवं ‘इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय कला केंद्र’ द्वारा बुधवार को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के उपलक्ष्य में विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। ‘विभाजन की विभीषिका’ विषय पर आयोजित इस परिचर्चा में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी ने कहा कि इतिहास में अगर हमसे गलतियां हुईं हैं तो उन गलतियों को सुधारने की जिम्‍मेदारी भी हमारी ही है।

उनका कहना था कि वर्ष 1947 में देश बंट गया, लेकिन अब मुल्‍क नहीं बंट सकता। अब सिर्फ हिंदुस्‍तान रहेगा और हिंदुस्‍तान पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करेगा कि कैसे सभी लोग चाहे वे किसी भी धर्म, संप्रदाय के हों, हिंदुस्‍तान की सरजमीं पर अमन-चैन से रह सकते हैं। यह हिंदुस्‍तान की जमीन की खूबी है। आज हमारी एक ही पहचान है कि हम भारतीय हैं। हम सभी मिलकर भारत को श्रेष्ठ बनाएंगे। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि भारत पूरी दुनिया के समक्ष एक मॉडल की तरह है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सबका साथ सबका विकास’ की बात करते हैं। हम दुनिया को सुख, शांति और वैभव का संदेश देने वाले देश हैं।

वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों में मुख्यत: विभाजन की पीड़ा को ही व्यक्त किया जाता है, लेकिन आईआईएमसी के इस आयोजन में आज एक गंभीर अकादमिक विमर्श दिखाई दे रहा है, जो एक अनुकरणीय पहल है। उन्‍होंने बताया कि विभाजन की विभीषिका का एक पहलू यह भी है कि विश्व की इस भयानक त्रासदी की पीड़ा झेलकर भी भारत आने वाले शरणार्थियों ने अपने अंदर मौजूद मानवता की भावना को कम नहीं होने दिया। उनके द्वारा बड़े संख्या में खोले गए स्‍कूल, आश्रम और अस्‍पताल इसके उदाहरण हैं।

वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘संडे मेल’ के पूर्व संपादक त्रिलोक दीप ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे रावलपिंडी में रहते थे और जब पाकिस्‍तान बना, उस समय वह करीब 12 साल के थे। उन्‍होंने बताया कि 1947 में होली के आसपास उन्‍होंने कुछ धार्मिक नारे सुने, जिसके बाद पुलिस ने उन्‍हें अपने घरों में बंद हो जाने को कहा। बाद में बड़ी संख्या में लोगों को दो हफ्ते तक कैंपों में रखा गया। उन्‍होंने बताया कि इस घटना से उन्‍हें विभाजन का पूर्वाभास हो गया था। वे यह बताते हुए भावुक हो गए कि पत्रकार होने के नाते कैसे वे आजादी के बाद रावलपिंडी गए और अपने घर और स्‍कूल भी गए। उन्‍होंने बताया कि उन्‍हें उस मुल्‍क की बहुत याद आती है, उस जमीन की बहुत याद आती है।

वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ला ने कहा कि वे एक ऐसे परिवार से आते हैं, जिसने विभाजन का दंश बहुत करीब से देखा और झेला है। उन्‍होंने कहा कि लोगों को लगता है कि पाकिस्‍तान से सिर्फ हिंदू ही भारत आए, लेकिन ऐसा नहीं है। कांग्रेस विचारधारा पर यकीन रखने वाले कई मुस्लिम भी पाकिस्‍तान से भारत आए। उन्‍होंने बताया कि जो शरणार्थी भारत आए, उनका इस देश की अर्थव्‍यवस्‍था में आज बहुत बड़ा योगदान है। शरणार्थियों में ज्‍यादातर व्‍यवसाय करने वाले लोग थे।

वरिष्ठ लेखक कृष्णानंद सागर ने कहा कि विभाजन एक बहुत बड़ी त्रासदी थी, जिसकी जमीनी वास्‍तविकता सरकारी आंकड़ों से बहुत अलग है। उन्‍होंने बताया कि वे ऐसी सैकड़ों दुर्घटनाओं के प्रत्‍यक्षदर्शी हैं, जहां ट्रेनों में लोगों को काटा गया, गोलीकांड हुए, लोगों को कैंपों में रखा गया और उन्‍हें वहां कई प्रकार की यातनाएं झेलनी पड़ीं। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘विभाजनकालीन भारत के साक्षी’ का जिक्र करते हुए बताया कि पुस्तक में विभाजन की त्रासदी के साक्षी रहे 350 लोगों के साक्षात्‍कार हैं और पुस्तक चार खंडों में प्रकाशित हुई है।

कार्यक्रम की शुरुआत में फिल्म्स डिवीजन द्वारा देश के विभाजन पर निर्मित एक लघु फिल्म दिखाई गई। कार्यक्रम का संचालन उर्दू पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह ने दिया।

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दुनिया को 'अलविदा' कह गए वरिष्ठ पत्रकार शिवदास श्रीवत्सन

वरिष्ठ पत्रकार शिवदास श्रीवत्सन का रविवार को निधन हो गया। वह 60 वर्ष के थे और अपने दोस्तों और पत्रकार मंडलियों में ‘वत्सन’ के नाम से लोकप्रिय थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 10 August, 2022
Last Modified:
Wednesday, 10 August, 2022
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वरिष्ठ पत्रकार शिवदास श्रीवत्सन का रविवार को निधन हो गया। वह 60 वर्ष के थे और अपने दोस्तों और पत्रकार मंडलियों में ‘वत्सन’ के नाम से लोकप्रिय थे। बताया जा रहा है कि उन्हें सिर में चोट लगी थी, जिसके बाद उन्हें कोझीकोड के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

श्रीवत्सन के परिवार में उनकी पत्नी रेमा व एक पुत्र दीपक हैं। वह ‘तेलंगाना टुडे’ से एसोसिएट एडिटर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने विजयवाड़ा में ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ में स्पोर्ट्स डेस्क से अपना करियर शुरू किया था। ‘द हिंदू’ में स्पोर्ट्स डेस्क में एक कार्यकाल के बाद वे न्यूज एडिटर के रूप में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ कोयंबटूर लौट आए।

एक खेल पत्रकार के तौर पर उन्होंने फिल्मों में भी गहरी रुचि ली। बाद में उन्होंने ‘द हिंदू’ में रहते हुए हैदराबाद आ गए और न्यूज एडिटर का पदभार संभाला। ‘द हिंदू’ के साथ काम करते हुए श्रीवत्सन ने कई जिम्मेदार पदों पर काम किया। वह 2021 में सेवानिवृत्त होने से पहले एसोसिएट एडिटर के रूप में ‘तेलंगाना टुडे’ में शामिल हुए।  

उन्होंने दो उपन्यास ‘दि इनर कॉलिंग’ (The Inner Calling) और ‘द कंट्रीसाइड एल्बम’ (The Countryside Album) भी लिखे।

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अर्जुन सिंह ने जीता 'वॉयस ऑफ पंजाब छोटा चैंप' सीजन 8 का खिताब

‘पीटीसी नेटवर्क‘ के प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष रबिन्द्र नारायण ने अर्जुन सिंह को ट्रॉफी प्रदान की। साथ ही सभी फाइनलिस्ट्स और प्रतिभागियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

Last Modified:
Monday, 08 August, 2022
Grand Finale

‘पीटीसी पंजाबी‘ (PTC Punjabi) द्वारा हर साल आयोजित किए जाने वाले टेलीविजन शो ‘वॉयस ऑफ पंजाब छोटा चैंप’ (Voice Of Punjab Chhota Champ) के सीजन-8 का समापन छह अगस्त को पंजाब के मोहाली में हुआ।

इस साल संगीत के क्षेत्र की यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी अमृतसर के अर्जुन सिंह ने जीती। ‘पीटीसी पंजाबी‘ के मोहाली स्टूडियो में ‘वॉयस ऑफ पंजाब‘ सीजन-8 के ग्रैंड फिनाले में अर्जुन को विजेता घोषित किया गया, साथ ही लुधियाना की मेहकजोत कौर प्रथम उपविजेता और हिमाचल प्रदेश के रहने वाले वंश को द्वितीय उपविजेता घोषित किया गया।

‘पीटीसी नेटवर्क‘ के प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष रबिन्द्र नारायण ने अर्जुन सिंह को 'वॉयस ऑफ पंजाब छोटा चैंप' सीजन 8 के विजेता की ट्रॉफी प्रदान की। साथ ही उन्होंने सभी फाइनलिस्ट्स और इस सीजन में पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से भाग लेने वाले प्रतिभागियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।  

इससे पहले, पंजाब के विभिन्न हिस्सों से आए 24 प्रतियोगियों ने इस सीजन में मेगा ऑडिशन में जगह बनाई, जिसमे शीर्ष सात  प्रतियोगियों को शो की जूरी द्वारा उनके अद्भुत प्रदर्शन (जो की कई स्तरों से गुजरा) के आधार पर चुना गया था। जैसे-जैसे शो आगे बढ़ा, इसकी यात्रा के दौरान कई प्रतियोगियों को विभिन्न राउंड में बाहर होना पड़ा।

'वॉयस ऑफ पंजाब छोटा चैंप' सीजन 8 के लिए ऑडिशन अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला और मोहाली जिलों में आयोजित किए गए थे। इस सीजन के जजों में मशहूर संगीत निर्देशक सचिन आहूजा, प्रसिद्ध गायक और अभिनेता अमर नूरी, गीतकार और गायक बीर सिंह शामिल थे। कलाकार हशमत सुल्ताना और अफसाना खान द्वार समापन समारोह में शानदार प्रदर्शन किया गया।

इनके अलावा, अतुल शर्मा, गुरमीत सिंह, रविंदर ग्रेवाल, सुरिंदर खान, खान साब, फिरोज खान, सज्जन अदीब, प्रीत हरपाल, ममता जोशी, इंद्रजीत निक्कू और जी खान जैसे कई कलाकार मेहमानों को 'वॉयस ऑफ पंजाब छोटा चैंप' सीजन 8 के विभिन्न राउंड्स में स्पेशल जज के तौर पर आमंत्रित किया गया था।

बता दें कि यह शो पंजाबी संगीत और फिल्म उद्योग को नई युवा प्रतिभाओं से जोड़ता है, साथ ही युवाओं को उनके सपनों को पूरा करने का अवसर प्रदान करते हुए पंजाबी संस्कृति को भी बढ़ावा देता है। ‘पीटीसी नेटवर्क‘ ने पहली बार 2013 में 'वॉयस ऑफ पंजाब छोटा चैंप' रियलिटी शो की शुरुआत पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत को बढ़ावा देने के अपने उद्देश्य से की थी।

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पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को HC से नहीं मिली राहत

अवैध गतिविधि निरोधक अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की जमानत याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को नामंजूर कर दी।

Last Modified:
Friday, 05 August, 2022
Siddique Kappan

अवैध गतिविधि निरोधक अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की जमानत याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को नामंजूर कर दी। कोर्ट ने इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए पिछली दो अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मलयालम न्यूज पोर्टल ‘अझीमुखम’ के संवाददाता और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की दिल्ली इकाई के सचिव कप्पन को अक्टूबर 2020 में तीन अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था। कप्पन उस समय हाथरस जिले में 19 साल की एक दलित लड़की की बलात्कार के बाद अस्पताल में हुई मौत के मामले की रिपोर्टिंग करने के लिए हाथरस जा रहे थे। उन पर आरोप लगाया गया है कि वह कानून-व्यवस्था खराब करने के लिए हाथरस जा रहे थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कप्पन फिलहाल उत्तर प्रदेश की मधुरा जेल में बंद हैं।

गौरतलब है कि 14 सितंबर 2020 को हाथरस जिले के एक गांव में चार लोगों ने 19 साल की एक दलित लड़की से दरिंदगी की थी, उसे गंभीर हालत में दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।

पीड़िता के शव को जिला प्रशासन ने आधी रात में ही कथित रूप से मिट्टी का तेल डालकर जलवा दिया था। लड़की के परिजन ने आरोप लगाया था कि जिला प्रशासन ने उनकी मर्जी के बगैर पीड़िता का अंतिम संस्कार जबरन करा दिया।

कप्पन की जमानत याचिका को मथुरा की एक अदालत ने नामंजूर कर दिया था। उसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

यूपी सरकार की ओर से कप्पन पर आरोप लगाया गया है कि वह पीएफआई के एक्टिव सदस्य हैं।  

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार आर. गोपीकृष्णन

करीब 65 वर्षीय गोपीकृष्णन पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। रविवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे उन्होंने आखिरी सांस ली।

Last Modified:
Monday, 01 August, 2022
R Gopikrishnan

वरिष्ठ पत्रकार एवं मलयालम दैनिक अखबार ‘मेट्रो वार्ता’ के प्रधान संपादक आर. गोपीकृष्णन का निधन हो गया है। करीब 65 वर्षीय गोपीकृष्णन पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। रविवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं।

गोपीकृष्णन के निधन पर मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन, विपक्ष के नेता वी डी सतीशन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला समेत तमाम वरिष्ठ नेताओं और पत्रकारों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

गोपीकृष्णन ने दैनिक अखबार ‘दीपिका’ से पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कोट्टयम और नई दिल्ली में ‘मंगलम‘ के डिप्टी एडिटर के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने ‘केरल कौमुदी‘ दैनिक अखबार के डिप्टी एडिटर की जिम्मेदारी भी संभाली।

गोपीकृष्णन जाने-माने लेखक भी थे। उन्होंने नई दिल्ली में एक सहकर्मी पत्रकार के साथ मिलकर डैन ब्राउन के मशहूर उपन्यास ‘दा विंची कोड’ (Da Vinci Code) का मलयालम भाषा में अनुवाद भी किया था।

वर्ष 1985 और 1988 में उन्होंने केरल सरकार से सर्वश्रेष्ठ पत्रकार का पुरस्कार जीता था। इसके अलावा राजनीतिक रिपोर्टिंग के लिए उन्हें एम शिवराम पुरस्कार, वी करुणाकरण पुरस्कार, के सी सेबेस्टियन पुरस्कार, सी एच मोहम्मद कोया पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

गोपीकृष्णन ने केरल से स्नातक करने के बाद बुल्गारिया में जियोर्गी दिमित्रोव इंस्टीट्यूट ऑफ जनर्लिज्म से पत्रकारिता की पढ़ाई भी की थी।

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