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ED ने राणा अय्यूब के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, पत्रकार बोलीं- मेरी कलम नहीं होगी चुप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गाजियाबाद की एक अदालत में राणा अय्यूब के खिलाफ धन शोधन रोधी कानून के तहत चार्जशीट दाखिल की है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गाजियाबाद की एक अदालत में राणा अय्यूब के खिलाफ धन शोधन रोधी कानून के तहत चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि कोरोना महामारी के दौरान जुटाए गए 2.69 करोड़ रुपए का इस्तेमाल राणा अय्यूब ने खुद के लिए किया है और साथ ही उन्होंने विदेशी अंशदान कानून का भी उल्लंघन किया है।
ED ने 12 अक्टूबर को गाजियाबाद में एक विशेष मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के समक्ष अय्यूब के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद राणा अय्यूब ने अब इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। पत्रकार ने कहा कि यह चार्जशीट मेरे काम के लिए मुझ पर निशाना साधने और मुझे डराने धमकाने की एक और हताशापूर्ण कोशिश है। यह मुझे चुप करने के लिए पीएमएलए कानून तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है।
उन्होंने ट्वीट किया, ‘मेरी कलम कभी चुप नहीं हो सकती। हास्यास्पद बात यह है कि कल ही मैंने यहां अमेरिका में भारत में स्वतंत्र प्रेस पर हमले के मामले में संगोष्ठी की थी। मैं देश में वंचितों के शोषण के खिलाफ अपनी आवाज उठाती रहूंगी।’
अय्यूब ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि ईडी द्वारा प्रक्रिया का यह दुरुपयोग न्यायिक समीक्षा के स्तर पर नहीं टिक पाएगा। मैं पत्रकार के रूप में अपनी भूमिका अदा करने से नहीं डिगूंगी।’
My pen can NEVER be silenced. Ironic that I conducted a seminar yesterday, here in the US, on the attack on the free press in India. I will continue to raise my voice against the persecution of the marginalised in the country. My statement. All i have to say pic.twitter.com/5q4Hnzkx56
— Rana Ayyub (@RanaAyyub) October 13, 2022
उन्होंने आगे कहा कि मेरे द्वारा जो भी फंड इकट्ठा किया गया था, कोरोना पीड़ितों की मदद में उसका इस्तेमाल किया गया। मेरे बैंक अकाउंट में जितनी भी राशि जमा थी, यहां तक की मेरे अकाउंट में प्रोफेशनल इनकम के भी पैसे शामिल थे, उसे भी प्रवर्तन निदेशालय ने जब्त कर लिया था। मगर दिल्ली हाई कोर्ट ने जब्ती कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और फंड को जब्त करने की पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने 2021 में यूपी पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू की थी। राणा अय्यूब पर राहत कार्यों के लिए एनजीओ के फंड का का दुरुपयोग करने का आरोप है।
ईडी का आरोप है कि राणा अय्यूब ने राणा अय्यूब ने कोविड, बाढ़ राहत और प्रवासियों के लिए तीन ऑनलाइन कैंपेन शुरू किए थे और एक ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म केटो के जरिए करोड़ों रुपए जुटाए थे। जांच अधिकारियों का कहना है कि झुग्गी वालों, किसानों और असम, बिहार और महाराष्ट्र में राहत कार्यों के लिए ये तीन कैंपेन शुरू किए गए थे। इन तीनों कैंपेन से उन्हें 2.69 करोड़ रुपए की डोनेशन मिली थी, जिसमें से 80.49 लाख रुपए विदेशी मुद्रा में लिए गए। उन्हें FCRA की मंजूरी के बिना विदेशी योगदान मिला।
इस साल फरवरी में मनी लॉन्ड्रिंग मामले प्रवर्तन निदेशालय ने पत्रकार राणा अय्यूब के 1.77 करोड़ रुपए जब्त किए थे। पत्रकार राणा अय्यूब के 1.77 करोड़ रुपए जब्त करने के बाद ईडी अधिकारियों ने कहा था कि उन्होंने कथित तौर पर 3 अभियानों के लिए दिए गए दान का सही उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया। ईडी ने यह कदम उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर उठाया है।
हालांकि, इनकम टैक्स और ईडी की कार्रवाई के बाद पत्रकार राणा ने विदेशी चंदा वापस कर दिया। विदेशी चंदे की वापसी के बाद भी उनके पास लगभग 2 करोड़ रुपए थे, लेकिन कथित तौर पर केवल 28 लाख रुपए का उपयोग किया गया था। ईडी का कहना हि कि उन्होंने गोवा की यात्रा जैसे निजी खर्चों के लिए चंदे का इस्तेमाल किया।
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