राष्ट्रपति ने संवाददाताओं से कहा- आप पत्रकार नहीं, चोर हैं

वे कई बार मीडिया को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। कोरोना संकट काल में तो उनकी यह नाराजगी और भी ज्यादा बढ़ गई है,

Last Modified:
Friday, 08 May, 2020
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अपने मीडिया विरोधी रवैये को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन चर्चा में रहते हैं। मीडिया से उनकी नाराजगी जगजाहिर है। वे कई बार मीडिया को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। कोरोना संकट काल में तो उनकी यह नाराजगी और भी ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि मीडिया अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठा रहा है, लिहाजा इस बार उनके निशाने पर अब वह अखबार हैं, जिन्होंने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस की कथित मिलीभगत की खबरों के लिए पुलित्जर पुरस्कार (Pulitzer Prize) जीता था। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से कहा कि वे पत्रकार नहीं हैं। वे चोर हैं। वे सभी पत्रकार जिन्हें हम पुलित्जर पुरस्कार के साथ देखते हैं, उन सभी पत्रकारों को अवॉर्ड लौटाने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए, क्योंकि वे सभी गलत थे।

उन्होंने कहा कि आपने देखा, इस संबंध में जो और दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, उनसे यह स्पष्ट होता है कि रूस के साथ किसी भी तरह की मिलीभगत नहीं थी’। उन्होंने यह बात तब कही जब न्याय मंत्रालय ने कहा कि वह उनके पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल (सेवानिवृत्त) माइकल फिन के अभियोजन को समाप्त कर रहा है। ट्रंप ने कहा, कि पुलित्जर पुरस्कार लौटाए जाने चाहिए क्योंकि आपको पता है वे गलत काम के लिए दिए गए। सब फर्जी खबरें थी। 

 ट्रंप ने रूस की मिलीभगत की खबरों को झूठा करार देते हुए कहा कि चूंकि यह कहानी झूठी है, इसलिए अखबारों को झूठ फैलाने के लिए पुरस्कार दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि सभी पुलित्जर पुरस्कार लौटाए जाने चाहिए, क्योंकि आपको पता है कि वे गलत काम के लिए दिए गए। सब फर्जी खबरें थी।   पुलित्जर समिति, या जो भी यह पुरस्कार प्रदान करता है, उसे ध्यान देना चाहिए कि आखिर कैसे फर्जी खबरों के लिए किसी को सम्मानित किया जा सकता है। समिति को ऐसे सभी लोगों से तुरंत अवॉर्ड वापस लेना चाहिए, जिन्होंने बिना तथ्य के खबरें तैयार की और झूठ फैलाया।

उन्होंने कहा कि पुलित्जर पुरस्कार उन लोगों को मिलना चाहिए जिन्होंने सही खबर दी थी और मैं आपको उन नामों की भी लंबी सूची दे सकता हूं, और आपको पता होगा कि मैं किसकी बात कर रहा हूं।

इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्लिन के बारे में भी बात की। अमेरिकी न्याय विभाग ने रूसी राजनयिक से संबंध के आरोपों में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्लिन के खिलाफ आपराधिक केस चलाने से इंकार कर दिया है।  ट्रंप ने कहा कि फ्लिन बेकसूर व्यक्ति थे। वह एक सज्जन पुरुष थे, उन्हें ओबामा प्रशासन ने निशाना बनाया और उन्हें निशाना इसलिए बनाया गया ताकि राष्ट्रपति को नीचे गिराने की कोशिश कर सकें और उन्होंने जो किया वह शर्म की बात है और मुझे लगता है कि इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी। हमारे देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ।  उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार निर्वाचित राष्ट्रपति के पीछे पड़े रहे।

 

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देश भर के पत्रकारों के लिए तीर्थ से कम नहीं है पथरिया: राजेश बादल

मूर्धन्य संपादक और हिंदी के सेवक माधव राव सप्रे की याद में किया गया कार्यक्रम का आयोजन

Last Modified:
Saturday, 19 June, 2021
Programme

आजादी से पहले के हिंदुस्तान में पत्रकारिता के सबसे सशक्त हस्ताक्षर माधवराव सप्रे के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करने और उसे जन-जन तक पहुंचाने का आज संकल्प लिया गया। केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल के मुख्य आतिथ्य में सप्रे जी की जन्मस्थली मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पथरिया कस्बे में शनिवार को मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार पदमश्री विजय दत्त श्रीधर, वरिष्ठ पत्रकार व फिल्मकार राजेश बादल, साहित्यकार श्यामसुंदर दुबे और सीसीईआरटी की चेयरमैन सुश्री हेमलता मोहन ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

आयोजन में मुख्य अतिथि पटेल ने कहा, ‘स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। इनमें आजादी के आंदोलन की घटनाओं और उनमें शामिल रहे महापुरुषों के योगदान को याद किया जाएगा। इस कड़ी में पथरिया का यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है। सप्रे जी ने निष्काम योगी के रूप में अपने जीवन को देश को समर्पित कर दिया था। ऐसे श्रद्धा पुरुष को नमन।‘ उन्होंने कहा कि साल भर तक ऐसे गुमनाम क्रांतिकारियों और शहीदों की स्मृति में कार्यक्रम होंगे, जो वक्त के साथ भुला दिए गए।

पदमश्री विजयदत्त श्रीधर ने सप्रे जी के जीवन से जुड़ी तमाम घटनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सप्रे जी ने माखनलाल चतुर्वेदी, द्वारिका प्रसाद मिश्र और सेठ गोविंददास जैसी अनेक विभूतियों को तराशा और स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि भोपाल का माधवराव सप्रे राष्ट्रीय संग्रहालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुर्लभ समाचार पत्र-पत्रिकाओं का एक बड़ा केंद्र बन गया है । इसमें लाखों दस्तावेज,माधव राव सप्रे से लेकर धर्मवीर भारती और दुष्यंत कुमार तक की यादें सुरक्षित हैं। अनेक महान पुरुषों की पांडुलिपियां और दुर्लभ सामग्री से हजारों शोधार्थी लाभ उठा चुके हैं। शीघ्र ही सप्रे जी की स्मृति में अगला बड़ा कार्यक्रम संग्रहालय में किया जाएगा ।

वरिष्ठ पत्रकार, फिल्मकार और राज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यकारी निदेशक राजेश बादल ने कहा कि पथरिया देश भर के पत्रकारों के लिए तीर्थ से कम नहीं है। इस पर बुंदेलखंड का हर नागरिक गर्व कर सकता है। उन्होंने कहा कि सप्रे जी ने भारत में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए भी अभियान छेड़ा। ये दोनों आंदोलन बाद में महात्मा गांधी ने उठाए और उन्हें देश भर में विस्तार दिया। गोरी हुकूमत उनके लेखन से परेशान रही, लेकिन माधवराव जी अपना काम करते रहे।

साहित्यकार श्यामसुंदर दुबे ने पथरिया से सप्रे जी के रिश्ते को रेखांकित करते हुए अनेक संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम में सप्रे जी पर केंद्रित पांच विशेष प्रकाशनों का लोकार्पण किया गया । इसके अलावा माधव राव सप्रे संग्रहालय के सौजन्य से सप्रे जी के जीवन वृत्त को दर्शाते हुए एक चित्र दीर्घा का अवलोकन भी अतिथियों ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और साहित्यकार उपस्थित थे। समारोह का संचालन इंदिरागांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक विजय शंकर शुक्ल ने किया।

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‘वर्तमान पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं पं. माधवराव सप्रे जी के जीवन मूल्य’

पं. माधवराव सप्रे की 150वीं जयंती के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तथा भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

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Saturday, 19 June, 2021
Webinar

पं. माधवराव सप्रे की 150वीं जयंती के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तथा भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल का कहना था कि पं. माधवराव सप्रे जी के मूल्य वर्तमान पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। हम सभी को सप्रे जी के जीवन से यह सीख लेनी चाहिए कि स्वावलंबन के बिना आजादी का कोई मोल नहीं है।’ इस अवसर पर महत्वपूर्ण वैचारिक पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ के माधवराव सप्रे जी पर केंद्रित विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने की। वेबिनार में वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता,  विश्वनाथ सचदेव, जगदीश उपासने, माधवराव सप्रे जी के पौत्र डॉ. अशोक सप्रे,  इंदिरा गांधी कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी एवं भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

‘भारत का वैचारिक पुनर्जागरण और माधवराव सप्रे’ विषय पर अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पं. माधवराव सप्रे की जन्मस्थली पथरिया में उनकी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भाषा की चुनौती हमारे सामने है और ये बढ़ती जा रही है। इसलिए आज हमें सप्रे जी के लेखन से प्रेरणा लेनी चाहिए। हिंदी पत्रकारिता और हिंदी भाषा के विकास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि राष्ट्रीय पुनर्जागरण एक तरह से नए ज्ञान के उदय की प्रक्रिया भी है। सप्रे जी ने यह काम अनुवाद के माध्यम से किया और समर्थ गुरु रामदास की प्रसिद्ध पुस्तक 'दासबोध' का अनुवाद किया। उन्होंने कहा कि सप्रे जी का पूरा जीवन संघर्ष और साधना की मिसाल है। उनके निबंधों को पढ़ने पर मालूम होता है कि उनके ज्ञान का दायरा कितना व्यापक था।   

माधवराव सप्रे जी के पौत्र डॉ. अशोक सप्रे ने कहा, ‘मेरे दादाजी ने मराठी भाषी होते हुए भी हिंदी भाषा के विकास के लिए कार्य किया। उनका मानना था कि जब देश स्वतंत्र होगा, तो भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी ही हो सकती है। इससे ये पता चलता है कि वे कितने दूरदर्शी थे।’

वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि समाज सुधारक के रूप में सप्रे जी का महत्वपूर्ण योगदान है। अपने लेखन से उन्होंने सामाजिक क्रांति का सूत्रपात किया। उन्होंने जन जागरुकता के लिए कहानियां लिखीं और समाचार पत्र प्रकाशित किए। दलित समाज और महिलाओं के लिए किए गए उनके कार्य अविस्मरणीय हैं।

विश्वनाथ सचदेव ने कहा कि सप्रे जी को पढ़कर यह आश्चर्य होता है कि किस तरह उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से एक नई व्यवस्था बनाने की कोशिश की थी। किस तरह उन्होंने एक ऐसे समाज की रचना करने की कोशिश की, जहां उनकी आने वाली पीढ़ी सुख और शांति के साथ रह सके। यही महापुरुषों की विशेषता होती है कि वे अपने समय से दो कदम आगे चलते हैं। जगदीश उपासने ने कहा कि माधवराव सप्रे हिंदी नवजागरण काल के अग्रदूत थे। पत्रकारिता, साहित्य और भाषा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्यों का समग्र आकलन अभी तक नहीं हो पाया है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए इंदिरा गांधी कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि माधवराव सप्रे देश के पहले ऐसे पत्रकार थे, जिन्हें राजद्रोह के आरोप में वर्ष 1908 में जेल हुई। उन्होंने साहित्य की हर धारा में लिखा। उनके लेख आज भी युवाओं को प्रेरणा देते हैं। अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि सप्रे जी की प्रेरणा और भारतबोध से हमारा देश सशक्त राष्ट्र के रूप में उभरेगा और फिर से जगत गुरु के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।  धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अचल पंड्या ने किया।

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जेल में बंद पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की मां का निधन

जेल में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की मां खदीजा कुट्टी का शुक्रवार को मलप्पुरम में निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 19 June, 2021
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जेल में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की मां खदीजा कुट्टी का शुक्रवार को मलप्पुरम में निधन हो गया। वह 90 वर्ष की थीं। बताया जा रहा है कि वह उम्र संबंधी बीमारियों से ग्रसित थीं और कुछ महीनों से उनका इलाज चल रहा था।

स्वर्गीय मोहम्मद कुट्टी कप्पन उनके पति थे। सिद्दीकी के अलावा, खदीजा के परिवार में उनके बेटे हम्सा और बेटियां फातिमा, आयशा, मरियामू, खादियामू और अस्माबी हैं।

कप्पन और उसके कथित सहयोगी, जिन पर कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े होने का संदेह है, को पिछले साल 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। यूपी के हाथरस में युवती के साथ हुए गैंगरेप-मर्डर के बाद वे घटनास्थल पर जा रहे थे, जिस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

इस हफ्ते की शुरुआत में, मथुरा की एक अदालत ने कप्पन और तीन अन्य के खिलाफ शांति भंग की आशंका से संबंधित आरोपों पर कार्यवाही रद्द कर दी थी, क्योंकि पुलिस छह महीने की निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी करने में विफल रही। मजिस्ट्रेट के आदेश में कहा गया कि जैसा कि सीआरपीसी की धारा 116 (6) के तहत कार्यवाही पूरी करने की सीमा समाप्त हो गई है, चारों आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई है।

बता दें कि पिछले साल 7 अक्टूबर से एक अन्य मामले में आरोपी आईपीसी की धारा 153ए (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 124ए (देशद्रोह), 120बी (साजिश), यूएपीए के तहत जेल में बंद हैं।

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हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक के नाम पर देश का पहला स्मारक बना IIMC का पुस्तकालय

'आईआईएमसी' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा, व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं 'पं. युगल किशोर'

Last Modified:
Thursday, 17 June, 2021
IIMC

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) का पुस्तकालय अब पं. युगल किशोर शुक्ल ग्रंथालय एवं ज्ञान संसाधन केंद्र के नाम से जाना जाएगा। हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक पं. युगल किशोर शुक्ल के नाम पर यह देश का पहला स्मारक है। बुधवार को पं. युगल किशोर शुक्ल ग्रंथालय एवं ज्ञान संसाधन केंद्र के नामकरण के मौके पर 'आईआईएमसी' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा, 'पं. युगल किशोर शुक्ल का पूरा जीवन हिंदी पत्रकारिता,  भारतबोध और सामाजिक प्रतिबद्धताओं को समर्पित था। उन्होंने पत्रकारिता में मूल्यों को समझा था और लोक कल्याण और जनसरोकार की पत्रकारिता की थी। पं. युगल किशोर शुक्ल व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं।'

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि हमारे लिए बड़े गर्व का विषय है कि आईआईएमसी का पुस्तकालय अब शुक्ल जी के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि भाषा सिर्फ एक साधन है। ज्ञान किसी भाषा का मोहताज नहीं होता। भारत को जोड़े रखने के लिए हमें सभी भारतीय भाषाओं को समान महत्व देना ही होगा, क्योंकि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रभाषाएं हैं।

इस अवसर पर "हिंदी पत्रकारिता की प्रथम प्रतिज्ञा: हिंदुस्तानियों के हित के हेत" विषय पर एक विशेष विमर्श का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में ‘दैनिक जागरण‘ के कार्यकारी संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में तथा पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ पत्रकार विजय दत्त श्रीधर मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुए। इसके अलावा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की निदेशक डॉ. सोनाली नरगुंदे, पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी. जय शंकर बाबु, कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सुर एवं आईआईएमसी, ढेंकनाल केंद्र के निदेशक प्रो. मृणाल चटर्जी ने भी वेबिनार में अपने विचार व्यक्त किये। समारोह की अध्यक्षता प्रो. संजय द्विवेदी ने की।

इस मौके पर ‘दैनिक जागरण‘ के कार्यकारी संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि पं. युगल किशोर शुक्ल में समाज और राष्ट्र की ज्वलंत समस्याओं के बारे में असाधारण जागरूकता थी और सच कहने का साहस भी था। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के लिए सिर्फ राजनीतिक चेतना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना की भी आवश्यकता है।

पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ पत्रकार विजय दत्त श्रीधर ने कहा कि आज से 195 वर्ष पूर्व पं. युगल किशोर शुक्ल ने सूचना की शक्ति को पहचान लिया था। उन्हें पता था कि समाज के लिए सूचना बहुत ​ही हितकारी है। श्रीधर ने कहा कि पत्रकारिता सिर्फ व्यवसाय नहीं है। पत्रकारिता में जब सामाजिक सरोकार प्रबल होंगे, तभी पत्रकारिता की सार्थकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता न ​तो किसी के पक्ष में होती है और न ही विपक्ष में। पत्रकारिता सिर्फ जनपक्ष होती है।

पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने कहा कि आज अतीत के हमारे प्रामाणिक शोधों के डिजिटलाइजेशन की आवश्यकता है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी इसका लाभ उठा सके। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की निदेशक डॉ. सोनाली नरगुंदे ने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय का भाव आवश्यक है। अगर हमें भाषाओं को सींचना है, तो सभी को मिल-जुलकर प्रयास करने होंगे, जिसमें महत्वपूर्ण भूमिका हिंदी भाषी लोगों को निभानी होगी।

कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सुर ने कहा कि हिंदी भारतीय भाषाओं के बीच संपर्क का माध्यम है। पिछले कुछ समय से हिंदी के साथ अन्य भाषाओं के लोगों की सहजता बढ़ी है और परस्पर आदान-प्रदान से दोनों ही भाषाएं समृद्ध होती हैं। आईआईएमसी, ढेंकनाल केंद्र के निदेशक प्रो. मृणाल चटर्जी ने बताया कि आर्थिक तंगी के बावजूद पं. युगल किशोर शुक्ल ने 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन किया था। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को अपने महापुरुषों का भुलाना नहीं चाहिए और उनके अनुभवों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

इस अवसर पर प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारतीय जनसंचार संस्थान अपनी स्थापना से ही भारतीय भाषाओं के संवर्धन का कार्य कर रहा है। हम चाहते हैं कि आईआईएमसी भारतीय भाषाओं के बीच अंतर-संवाद का मंच बने। उन्होंने कहा कि संवाद के माध्यम से ही हम लोगों को जोड़ सकते हैं और इस प्रक्रिया में पत्रकारिता का महत्वपूर्ण स्थान है।

कार्यक्रम में संस्थान के अपर महानिदेशक के. सतीश नंबूदिरीपाड भी विशेष तौर पर उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डीन (छात्र कल्याण) प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन आईआईएमसी, जम्मू केंद्र के निदेशक प्रो. (डॉ.) राकेश गोस्वामी ने किया।

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नहीं रहीं जानी-मानी मीडिया प्रफेशनल टीना सिंह

टीना सिंह देश के तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी थीं। BCCL के साथ वह 31 साल से ज्यादा समय तक जुड़ी रही थीं।

Last Modified:
Wednesday, 16 June, 2021
Teena Singh

मीडिया और मार्केटिंग क्षेत्र की जानी-मानी हस्ती टीना सिंह का निधन हो गया है। टीना सिंह को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव था। वह देश के तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी थीं। उन्होंने वर्ष 2019 में करीब पांच महीनों के लिए नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के फर्स्टपोस्ट (First Post) प्रिंट एडिशन में बतौर कंसल्टेंट (सेल्स और मार्केटिंग) काम किया था।

उससे पहले 2015 से 2017 के बीच वह ‘टीमवर्क आर्ट्स’ (Teamwork Arts) में बतौर कंसल्टेंट (मार्केटिंग, मीडिया स्ट्रैटेजी और सेल्स) की जिम्मेदारी निभा रही थीं। उन्होंने ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) के साथ अपने करियर की सबसे लंबी पारी खेली।

यहां उन्होंने 31 साल से अधिक समय तक विभिन्न भूमिकाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाई। टीना सिंह ने वर्ष 1984 में 'बीसीसीएल' में बतौर चीफ मैनेजर जॉइन किया था और वर्ष 2015 में यहां वाइस प्रेजिडेंट के पद से अलग हुई थीं।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो टीना सिंह ने ‘दिल्ली विश्वविद्यालय’ (DU) से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसके अलावा उन्होंने ’इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पीजी डिप्लोमा और ‘आईआईएम अहमदाबाद’ (IIM Ahmadabad) से स्ट्रैटेजिक मार्केटिंग में डिग्री ली थी।

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मार्कंड अधिकारी ने टीकाकरण से वंचितों के लिए बड़े पैमाने पर शुरू किया ये अभियान

अब श्री अधिकारी ब्रदर्स ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर मार्कंड अधिकारी एक बेहतरीन पहल शुरू की है।

Last Modified:
Wednesday, 16 June, 2021
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कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन ही बचाव का एक बेहतर विकल्प है। लिहाजा सरकार की कोशिश है कि वह ज्यादा से ज्यादा भारतीयों के लिए वैक्सीन उपलब्ध करा सके। इस कड़ी में अब श्री अधिकारी ब्रदर्स ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर मार्कंड अधिकारी एक बेहतरीन पहल शुरू की है। दरअसल, चल रही COVID-19 महामारी के बीच, मीडिया दिग्गज मार्कंड अधिकारी ने उन लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जो अभी तक टीका लगवाने (वैक्सीनेशन) से वंचित रह गए हैं।

श्री अधिकारी ब्रदर्स ग्रुप (सब ग्रुप) के ब्रॉडकास्टिंग व प्रॉडक्शन की पूरी टीम का टीकाकरण हो चुका है, जिसके बाद अब मार्कंड अधिकारी ने उन वंचितों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जो टीकाकरण का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं या वे लोग, जो तकनीकि चुनौतियों की वजह से स्लॉट को बुक करने में असमर्थ हैं। मुंबई के अंधेरी पश्चिम से भाजपा विधायक अमित साटम की मदद से ऐसे लोगों की सूची तैयार की जा रही है।

इस पहल को लेकर मार्कंड अधिकारी ने कहा, ‘निजी व्यक्तियों द्वारा टीकाकरण अभियान से लोगों का टीकाकरण कराने में मदद मिलेगी और सरकार का बोझ भी कम होगा। मुझे लगता है कि हर कॉरपोरेट को इस तरह के नेक काम के लिए आगे आना चाहिए और समाज को महामारी से छुटकारा दिलाना चाहिए।’

मार्कंड अधिकारी, सब ग्रुप के मीडिया और मनोरंजन के सभी कार्यक्षेत्रों जैसे- कंटेंट प्रॉडक्शन, ब्रॉडकास्टिंग, फिल्म प्रॉडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन, वीएफएक्स स्टूडियो, डिजिटल प्लेटफॉर्म और करंट अफेयर्स व न्यूज आर्म्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इसके अलावा, वह बॉलीवुड मूवीज के प्रॉडक्शन से भी जुड़े हुए हैं।

इसके अतिरिक्त वह कॉमेडी चैनल ‘सब’ (SAB) के संस्थापक भी हैं। उनके नेतृत्व में ‘मस्ती’,  ‘दबंग’, ‘मैबोली’ जैसे सफल चैनल का संचालन भी किया जा रहा है। इसके अलावा, वह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म `गवर्नेंस नाउ’ को भी चला रहे हैं, जो एक सार्वजनिक मंच पर शासन-प्रशासन से संबंधित मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा रहा है और इस प्रकार से उन्होंने मीडिया सेगमेंट में भी अपनी जगह बनाई है।

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कोर्ट ने पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को इस आरोप से किया मुक्त, कही ये बात

मांट (मथुरा) एसडीएम रामदत्त राम ने इस मामले में कप्पन समेत उनके साथ गिरफ्तार तीन अन्य लोगों के ऊपर से यह आरोप हटा दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 16 June, 2021
Siddique Kappan

कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म की शिकार युवती के हाथरस स्थित गांव जाते समय पांच अक्टूबर 2020 को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य को शांतिभंग के आरोप से मुक्त कर दिया गया है। मांट (मथुरा) एसडीएम रामदत्त राम ने इस मामले में कप्पन समेत उनके साथ गिरफ्तार तीन अन्य लोगों के ऊपर से यह आरोप हटा दिया है। हालांकि, देशद्रोह और अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम ‘यूएपीए’ (UAPA) के तहत लगे आरोप अभी भी उन पर लगे हुए हैं।  

बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील पर उप जिलाधिकारी ने सभी चारों आरोपितों को शांति भंग के आरोप से मुक्त किए जाने के आदेश जारी किए हैं। इस मामले में एसडीएम का कहना है, ' पुलिस इस मामले की जांच तय छह महीने में पूरा नहीं कर पाई है। ऐसे में चारों आरोपितों पर से शांतिभंग का आरोप हटाया जाता है।'

गौरतलब है कप्पन को 5 अक्टूबर 2020 को तीन अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था, जब वह एक दलित महिला के कथित गैंगरेप और मौत की रिपोर्ट करने यूपी के हाथरस जा रहे थे। पुलिस ने तब कहा था कि उसने चार लोगों को मथुरा में अतिवादी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के साथ कथित संबंध के आरोप में गिरफ्तार किया और चारों की पहचान केरल के मलप्पुरम के सिद्दीकी कप्पन, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के अतीक-उर-रहमान, बहराइच के मसूद अहमद और रामपुर के मोहम्मद आलम के तौर पर हुई है।

उनके खिलाफ मांट थाने में आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह), 153ए (दो समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने), 295ए (धार्मिक भावनाएं आहत करने), यूएपीए की धारा 65, 72 और आईटी एक्ट की धारा 76 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 3 अप्रैल को मथुरा की अदालत में उनके और सात अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया, जिसमें उन पर राजद्रोह का और राज्य में हिंसा भड़काने के प्रयास का आरोप लगाया गया। साथ ही उन्हें आतंकवादी संगठन पीएफआई का सदस्य बताया गया।

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कोरोना को मात देकर लौटे सुधीर चौधरी को फैन्स ने यूं बैठाया सिर आंखों पर

सुधीर चौधरी ने अपने चाहने वालों को एक तोहफा देते हुए कहा कि वह अपने फेसबुक पेज पर लाइव आ रहे हैं। उनके ऐसा कहते ही फेसबुक और ट्विटर पर वह ट्रेंड करने लगे।

Last Modified:
Tuesday, 15 June, 2021
SudhirChaudhary5454

‘जी न्यूज’ (Zee News) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने कोरोना वायरस (कोविड-19) को मात दे दी है। लगभग 20 दिनों के बाद उनकी कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आई है। इसके बाद सुधीर चौधरी ने अपने चाहने वालों को एक तोहफा देते हुए रविवार को कहा था कि वह अपने फेसबुक पेज पर लाइव आ रहे हैं। उनके ऐसा कहते ही फेसबुक और ट्विटर पर वह ट्रेंड करने लगे। लोगों को उनका बेसब्री से इंतजार था और जब वह शाम पांच बजे फेसबुक पर आए, तो ऐसे आए कि लाइक, कमेंट और शेयर की तो जैसे बाढ़ सी आ गई।

यह भी पढ़ें: कोरोना को मात देने के बाद फेसबुक पर LIVE हुए सुधीर चौधरी, कही ये बात

लोग अपने चहेते एंकर को देखने और सुनने के लिए बेकरार थे। दीवानगी का आलम ये था कि खबर लिखे जाने तक उनके वीडियो को 7.5 मिलियन से भी अधिक व्यूज मिल चुके हैं।

आपको बता दें कि पिछले दिनों सुधीर चौधरी कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुधीर चौधरी ने एक ट्वीट के जरिये खुद इस बात की जानकारी दी थी। अपने ट्वीट में सुधीर चौधरी का कहना था, ‘मैं कोविड पॉजिटिव हो गया हूं और अब इससे रिकवर कर रहा हूं।’ हालांकि कई दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद एक जून को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। 

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पत्रकार की हत्या के मामले में कई नेताओं ने योगी सरकार को घेरा, की CBI जांच की मांग

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की हत्या के मामले में राजनीतिक दलों के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है

Last Modified:
Tuesday, 15 June, 2021
sulabhsrivastava65

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की हत्या के मामले में राजनीतिक दलों के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है और इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।

कांग्रेस की महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने मामले में यूपी की योगी सरकार को घेरा और पत्रकार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की।

प्रियंका ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा, ‘12 जून को सुलभ श्रीवास्तव ने एडीजी (प्रयागराज जोन) को लिखे पत्र में बताया था कि स्थानीय शराब माफिया अवैध शराब पर उनकी खबर से नाराज हैं और उन्हें अपनी और अपने परिवार की सलामती की चिंता है। प्रशासन को पत्र भेजे जाने के एक दिन बाद ही संदिग्ध हालात में वह मृत पाए गए।’

उन्होंने कहा कि सुलभ श्रीवास्तव के परिजन और पत्रकार साथियों ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने तथा सच सामने लाने की मांग की है। प्रियंका ने दावा किया, ‘यूपी में कई जगहों से जहरीली शराब से मौत होने की खबरें आई हैं। अलीगढ़ से लेकर प्रतापगढ़ तक जहरीली शराब के चलते सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में एक पत्रकार द्वारा खबरें दिखाने को लेकर शराब माफियाओं से खतरा होने की आशंका बताती है कि प्रदेश में कानून के राज इकबाल खत्म हो चुका है।’

उन्होंने कहा, ‘इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। प्रदेश भर जड़ जमा चुके शराब माफिया एवं प्रशासन के गठजोड़ पर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही पीड़ित परिवार और मृतक के आश्रितों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाए।’

वहीं, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी इस घटना की निंदा की है। उन्होंने इस घटना पर सवाल उठाते हुए कहा,  ‘उत्तर प्रदेश में आज क्या हुआ? एक पत्रकार की हत्या हो गई? मैं इसकी निंदा करती हूं। ममता बनर्जी ने अपने ट्वीट में लिखा, 'यूपी में पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की मौत की खबर सुनकर झटका लगा। ये देखकर दु:खी हूं कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता के हमारे मूल्यों का हिस्सा होने के बावजूद हम उनकी जान नहीं बचा पा रहे जो दिन रात सच सामने लाने की लड़ाई लड़ते हैं।'

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस घटना को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठाए हैं। अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा, 'प्रतापगढ़ में एक कथित हादसे में एक टीवी पत्रकार की संदिग्ध मौत बेहद दुखद है। भावभीनी श्रद्धांजलि! बीजेपी सरकार इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच बैठाकर परिजन और जनता को ये बताए कि पत्रकार द्वारा शराब माफिया के हाथों हत्या की आशंका जताने के बाद भी उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं दी गई?'

वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे हत्या करार दिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘शराब माफियाओं के खिलाफ खबर चलाने के कारण यूपी में एक पत्रकार की हत्या हो जाती है, जबकि एक दिन पहले सुलभ जी ने एडीजी को पत्र लिखकर हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन सब सोते रहे।’

बता दें कि यूपी के प्रतापगढ़ जिले में ‘एबीपी गंगा’ के जिला संवाददाता सुलभ श्रीवास्तव की रविवार रात एक ईंट भट्ठे के किनारे संदिग्ध हालात में मौत हो गई। पुलिस इस मौत को दुर्घटना बता रही थी जबकि परिजनों को आशंका है कि उनकी हत्या हुई है।

यह भी पढ़ें: संदिग्ध हालात में पत्रकार की मौत, एक दिन पहले ही मांगी थी पुलिस से सुरक्षा

दरअसल, उन्होंने घटना से एक दिन पहले ही यानी 12 जून को पुलिस को लिखे पत्र में अपनी जान और परिवार की सुरक्षा को लेकर खतरे की आशंका जताई थी। सोशल मीडिया पर सुलभ श्रीवास्तव का एक कथित खत वायरल हुआ है, जो उन्होंने पुलिस को अपनी सुरक्षा के लिए लिखा था। इसमें उन्होंने लिखा है कि 9 जून को उनकी रिपोर्ट से एक शराब माफिया नाराज है। उन्होंने तो यहां तक लिखा कि जब भी वह घर से निकलते हैं तो लगता है कि उनका कोई पीछा कर रहा है।  

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हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक के नाम पर होगा IIMC का पुस्तकालय

भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) का पुस्तकालय अब पं. युगल किशोर शुक्ल ग्रंथालय एवं ज्ञान संसाधन केंद्र के नाम से जाना जाएगा।

Last Modified:
Monday, 14 June, 2021
IIMC DELHI

भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) का पुस्तकालय अब पं. युगल किशोर शुक्ल ग्रंथालय एवं ज्ञान संसाधन केंद्र के नाम से जाना जाएगा। हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक पं. युगल किशोर शुक्ल के नाम पर यह देश का पहला स्मारक होगा। पुस्तकालय के नामकरण के अवसर पर आईआईएमसी द्वारा 17 जून को "हिंदी पत्रकारिता की प्रथम प्रतिज्ञा: हिंदुस्तानियों के हित के हेत" विषय पर एक विशेष विमर्श का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख विद्वान अपने विचार व्यक्त करेंगे।

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि इस वेबिनार में दैनिक जागरण (दिल्ली-एनसीआर) के संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी मुख्य अतिथि होंगे तथा पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ पत्रकार  विजयदत्त श्रीधर मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल होंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ताओं के रूप में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की निदेशक डॉ. सोनाली नरगुंदे, पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी. जय शंकर बाबू, कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सुर एवं आईआईएमसी, ढेंकनाल केंद्र के निदेशक प्रो. मृणाल चटर्जी अपने विचार प्रकट करेंगे। 

प्रो. द्विवेदी ने इस आयोजन के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि भारत में हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत पं. युगल किशोर शुक्ल द्वारा 30 मई, 1826 को कोलकाता से प्रकाशित समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' से हुई थी। इसलिए 30 मई को पूरे देश में हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि 'उदन्त मार्तण्ड' का ध्येय वाक्य था, ‘हिंदुस्तानियों के हित के हेत’ और इस एक वाक्य में भारत की पत्रकारिता का मूल्यबोध स्पष्ट रूप में दिखाई देता है। 

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि ये हमारे लिए बड़े गर्व का विषय है कि आईआईएमसी का पुस्तकालय अब पं. युगल किशोर शुक्ल के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने स्वाधीनता से लेकर आम आदमी के अधिकारों तक की लड़ाई लड़ी है। समय के साथ पत्रकारिता के मायने और उद्देश्य चाहे बदलते रहे हों, लेकिन हिंदी पत्रकारिता पर देश के लोगों का विश्वास आज भी है।

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